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शहरी विकास को मिलेगा बूस्ट: अर्बन फंड से बढ़ेगी बाजार आधारित फाइनेंसिंग


नई दिल्ली। देश के शहरी विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar ने बुधवार को 1 लाख करोड़ रुपए के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (UCF) और क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम (CRGSS) की गाइडलाइंस लॉन्च कीं। इस फंड का मकसद बाजार आधारित फाइनेंसिंग के जरिए करीब चार गुना यानी 4 लाख करोड़ रुपए तक निवेश जुटाना है।

 सरकारी पैसे से खींचेंगे निजी निवेश
कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि यह फंड शहरी विकास के तरीके में बड़ा बदलाव लाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी पूंजी का उपयोग कर निजी और संस्थागत निवेश को आकर्षित करना है।
Government of India की इस पहल से शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें निवेश के लिए आकर्षक बनाया जाएगा।

‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में बड़ा कदम
मंत्री ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच शहर अब आर्थिक विकास, इनोवेशन और रोजगार के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। ऐसे में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहतर प्लानिंग, फाइनेंसिंग और गवर्नेंस बेहद जरूरी है।

कहां खर्च होगा पैसा?
इस 1 लाख करोड़ रुपए के फंड का इस्तेमाल कई अहम प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा—
पुराने शहरों और बाजारों का पुनर्विकास
शहरी परिवहन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी
गैर-मोटर चालित परिवहन (साइकिल ट्रैक, पैदल मार्ग)
पानी, स्वच्छता और क्लाइमेट-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर

फंडिंग मॉडल क्या होगा?
इस योजना की खास बात इसका फाइनेंसिंग मॉडल है-
केंद्र सरकार केवल 25% तक ही फंड देगी
कम से कम 50% राशि म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन और PPP मॉडल से जुटाई जाएगी
इससे शहरों को आत्मनिर्भर बनने और बाजार से पूंजी जुटाने की दिशा में बढ़ावा मिलेगा।

 बजट का पूरा ब्रेकअप

₹90,000 करोड़ – इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स
₹5,000 करोड़ – प्रोजेक्ट तैयारी और क्षमता निर्माण
₹5,000 करोड़ – CRGSS (गारंटी स्कीम)

 छोटे शहरों को भी मिलेगा फायदा
CRGSS स्कीम का खास फोकस टियर-2, टियर-3 शहरों और पहाड़ी व उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों पर रहेगा। इसका उद्देश्य इन शहरों को भी बाजार से फंड जुटाने में सक्षम बनाना है, ताकि विकास सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे।

ULBs की भूमिका होगी अहम
मंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ाने और आधुनिक फाइनेंसिंग मॉडल अपनाने पर जोर दिया। इससे शहर खुद अपने विकास के लिए संसाधन जुटा सकेंगे।

 डिजिटल कनेक्टिविटी और साझेदारी को बढ़ावा
इस मौके पर शहरों को बैंकों, वित्तीय संस्थानों और क्रेडिट एजेंसियों से जोड़ने के लिए एक ई-डायरेक्टरी भी लॉन्च की गई। साथ ही राज्यों और मंत्रालय के बीच MoU तथा निजी क्षेत्र के साथ सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए गए।

 कब तक लागू रहेगा फंड?
सरकार के अनुसार, यह फंड वित्त वर्ष 2026 से 2031 तक लागू रहेगा और इसका लक्ष्य भारतीय शहरों को ‘ग्रोथ हब’ में बदलना है।

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