स्थानीय जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में सप्ताह के निर्धारित दिन गर्भवती महिलाओं और बच्चों का नियमित टीकाकरण किया जाता है। रोजाना करीब 20 से 25 महिलाएं और बच्चे यहां टीके लगवाने पहुंचते हैं, लेकिन इन दिनों बिजली व्यवस्था ठप होने के कारण उन्हें अस्पताल के अंदर सुविधाजनक वातावरण नहीं मिल पा रहा है। पंखे, कूलर और अन्य जरूरी उपकरण बंद पड़े हैं, जिससे मजबूरी में टीकाकरण की प्रक्रिया बाहर पेड़ों के नीचे करनी पड़ रही है।
कर्मचारियों ने बताया कि करीब पांच दिन पहले तेज हवा और आंधी के कारण स्वास्थ्य केंद्र की बिजली लाइन का तार टूट गया था। इसकी सूचना कई बार बिजली विभाग को दी गई, लेकिन अब तक मरम्मत नहीं हो सकी है। नतीजतन, पूरे केंद्र में अंधेरा और गर्मी का माहौल बना हुआ है।
स्थिति और भी गंभीर इसलिए हो गई है क्योंकि स्वास्थ्य केंद्र में न तो पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही स्टाफ नर्स की तैनाती है। फिलहाल केवल सेक्टर सुपरवाइजर और सीएचओ के सहारे ही व्यवस्था संचालित की जा रही है। इसके अलावा उल्टी, दस्त और बुखार जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीज भी यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिससे दबाव और बढ़ जाता है।
स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार, केंद्र में पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। हालांकि शासन की ओर से नई बिल्डिंग बनाई गई है, लेकिन उसमें भी मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण उसे अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। इससे आसपास के पांच से छह गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि बिजली व्यवस्था को लेकर संबंधित विभाग से संपर्क कर जल्द सुधार कराया जाएगा और स्वास्थ्य केंद्र की सभी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त किया जाएगा।
फिलहाल गर्मी और अव्यवस्थाओं के बीच गर्भवती महिलाओं और बच्चों की यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।