Chambalkichugli.com

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर VHP ने बनाई दूरी, आलोक कुमार बोले- जो हुआ वह बेहद शर्मनाक, ट्रस्ट ही जवाबदेह

नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज से स्पष्ट दूरी बना ली है। संगठन ने कहा है कि मंदिर के संचालन और ट्रस्ट से जुड़े सभी प्रशासनिक निर्णयों की जिम्मेदारी केवल ट्रस्ट की है। वीएचपी ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए इसे अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम बताया है।

वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में संगठन की भूमिका मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने तक सीमित थी। उनके अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य कर रहा है और उसके प्रशासनिक तथा वित्तीय निर्णयों से वीएचपी का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी ट्रस्ट पर ही है।

आलोक कुमार ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में मंदिरों का संचालन करना वीएचपी का दायित्व नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के निर्णयों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार जिस संस्था को मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वही उसके सभी निर्णयों और परिणामों के लिए उत्तरदायी है।

उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के रूप में चंपत राय के कार्यों से भी स्वयं को अलग बताया। उनका कहना था कि ट्रस्ट के प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है और किसी अन्य संगठन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इस बयान को मौजूदा विवाद के बीच वीएचपी के स्पष्ट रुख के रूप में देखा जा रहा है।

चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। प्रारंभिक जांच के बाद मामले की गंभीरता बढ़ने से ट्रस्ट के भीतर भी बदलाव देखने को मिले हैं। इसी क्रम में नैतिक आधार पर चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दिया, जबकि ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया। इन घटनाक्रमों के बाद पूरे मामले की जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या में जो कुछ भी हुआ, उससे देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालु आहत हुए हैं। उनके अनुसार जिन लोगों ने वर्षों तक राम मंदिर आंदोलन का समर्थन किया, आर्थिक सहयोग दिया और अपनी आस्था इस अभियान से जोड़ी, उनके लिए यह घटनाक्रम बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी असर डालती हैं, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वीएचपी ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि संगठन न तो मंदिर का निर्माण करेगा और न ही उसका संचालन करेगा। इसके बाद ट्रस्ट स्वतंत्र रूप से अपने सभी निर्णय लेता रहा है। इसलिए ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय विवाद की जवाबदेही उसी संस्था की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल राम मंदिर से जुड़े इस विवाद की निष्पक्ष जांच न केवल तथ्यों को स्पष्ट करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में अहम साबित होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular News