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वायासैट और बीएसएनएल ने भारत में पहला सैटेलाइट कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू किया

जबलपुर। भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और वायासैट इंडिया (Viasat India) ने ‘सैटेलाइट और सैटेलाइट तकनीक के अनुप्रयोग’ पर अपना पहला प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। यह कार्यक्रम भारत रत्न भीम राव अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेलीकॉम ट्रेनिंग (BRBRAITT), जबलपुर में प्रस्तावित दूरसंचार नवाचार, अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (TIRTC) के तत्वावधान में शुरू किया गया है।
सैटेलाइट संचार के क्षेत्र में कौशल विकास एवं उद्योग की तैयारी को बढ़ावा देने के लिए बीएसएनएल और वायासैट इंडिया ने पिछले वर्ष गठबंधन की घोषणा की थी। प्रशिक्षण के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता बीएसएनएल के सीएमडी रॉबर्ट रवि ने की। इस अवसर पर वायासैट के अध्यक्ष – कॉमर्शियल बेन पामर, वायासैट इंडिया के प्रबंध निदेशक गौतम शर्मा, वायासैट के उपाध्यक्ष- एडवांस्ड NTN सॉल्यूशंस संदीप मूर्ति और दूरसंचार विभाग के अन्य अधिकारी भी संचार भवन में मौजूद थे। वहीं, इस समारोह के दौरान जबलपुर स्थित बीआरबीआरएआईटीटी में विद्यार्थी मौजूद थे।
इस गठबंधन के तहत सैटेलाइट एवं सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के उपयोग पर यह प्रारंभिक पाठ्यक्रम विद्यार्थियों और करियर के शुरुआती दौर में काम कर रहे पेशेवरों के लिए 22 घंटे का एक वर्चुअल प्रोग्राम है। इन प्रशिक्षण सत्रों का संचालन एक्सपर्ट ट्रेनर द्वारा ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कॉलेज के विद्यार्थियों, आईटी व इंजीनियरिंग के पेशेवरों और सैटेलाइट संचार एवं सैटेलाइट युक्त एप्लीकेशंस में बुनियादी ज्ञान प्राप्त करने के इच्छुक नए स्नातकों को लाभ प्रदान करना है। यह पाठ्यक्रम जबलपुर में बीएसएनएल के तत्वावधान में स्थापित विशेषज्ञ प्रशिक्षण संस्थान बीआरबीआरएआईटीटी में एक व्यापक कौशल विकास की रूपरेखा पेश करने में पहला कदम है। यह संस्थान टेक्नोलॉजी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए आधारभूत ढांचा और लॉजिस्टिक संबंधी सहयोग उपलब्ध कराता है।

बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रॉबर्ट जे. रवि ने कहा, “नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने और देशज क्षमताओं का निर्माण करने के हमारे लक्ष्य के अनुरूप वायासैट के साथ गठबंधन के तहत हमारा प्रारंभिक पाठ्यक्रम शुरू करने को लेकर हमें वास्तव में बहुत प्रसन्नता है। भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कौशलों में पेशेवरों की अगली पीढ़ी को दक्ष करने में बीआरबीआरएआईटीटी की बढ़ती भूमिका देखकर भी हम उत्साहित हैं। हम भविष्य में इस गठबंधन का विस्तार कर विद्यार्थियों के लिए और पाठ्यक्रम एवं सुविधाएं लाने को लेकर हम प्रतिबद्ध हैं।”

अनिल कुमार भारद्वाज, डीडीजी, दूरसंचार विभाग ने कहा, “सैटेलाइट कम्युनिकेशंस (उपग्रह संचार) मॉड्यूल, संचार प्रौद्योगिकियों और उनके उपयोग के मामलों में वैश्विक तकनीकी दिग्गजों द्वारा पहले से ही संचालित किए जा रहे प्रशिक्षणों के अतिरिक्त है। TIRTC (टी.आई.आर.टी.सी.) माननीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया का एक विज़न रहा है, जिसका उद्देश्य संचार के उन्नत क्षेत्र में अत्यधिक कुशल जनशक्ति तैयार करना और भारत को दूरसंचार डिजाइन, विकास, विनिर्माण और सेवाओं में अग्रणी बनने में मदद करना है। हम सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और एप्लिकेशन प्रशिक्षण को सक्षम बनाने के लिए वायासैट इंडिया को धन्यवाद देते हैं।”
वायासैट कॉमर्शियल के अध्यक्ष – कॉमर्शियल बेन पामर ने कहा, “भविष्य के लिए तैयार सैटेलाइट संबंधी प्रतिभा की पाइपलाइन का निर्माण करना महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी डिजिटल एवं उभरती टेक्नोलॉजी की महत्वाकांक्षा को लेकर आगे बढ़ रहा है। बीआरबीआरएआईटीटी में इस प्रथम पाठ्यक्रम के साथ हमारा लक्ष्य उच्च गुणवत्ता का बुनियादी सैटेलाइट ज्ञान विद्यार्थियों और पेशेवरों की पहुंच में लाना और आगे चलकर मिश्रित वर्चुअल और क्लासरूम प्रोग्राम शुरू करना है। हमारी इच्छा भविष्य में एक ‘सेंटर ऑफ एक्सिलेंस’ भी स्थापित करने की है जहां विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव मिल सकेगा और वे उपकरण के सजीव प्रदर्शन के जरिए अपनी समझ बढ़ा सकेंगे।”
बीआरबीआरएआईटीटी जबलपुर के आईटीएस, सीजीएम, डाक्टर मनीष शुक्ला ने कहा, “प्रतिष्ठित परियोजना टीआईआरटीसी (टेलीकॉम इन्नोवेशन, रिसर्च ट्रेनिंग सेंटर) के तहत वायासैट द्वारा शुरू किया गया यह सैटेलाइट कम्युनिकेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम, उभरती एवं रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच गठबंधन को बढ़ावा देने की बीआरबीआरएआईटीटी की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दूरसंचार विभाग और वायासैट की साझीदारी में इस प्रोग्राम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह विद्यार्थियों को सैटेलाइट की बारीकियों, संचार लिंक डिजाइन, एडवांस्ड सैटेलाइट आर्किटेक्चर्स, ग्राउंड सेगमेंट ऑपरेशंस और वास्तविक दुनिया के एप्लीकेशंस के बारे में व्यापक अनुभव उपलब्ध करा सके। हमारा उद्देश्य तेजी से उभर रहे सैटेलाइट संचार क्षेत्र में विद्यार्थियों को व्यवहारिक कौशल एवं वैश्विक दृष्टिकोण के साथ सशक्त करते हुए अकादमिक सीख और उद्योग की अपेक्षाओं के बीच अंतर पाटना है।”

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