Chambalkichugli.com

जंग का झटका बाजार को! सेंसेक्स 80 हजार से नीचे, ऑटो-कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर धराशायी


नई दिल्ली। Israel–Iran युद्ध के बीच वैश्विक अनिश्चितता ने भारतीय शेयर बाजार को झटका दिया है। दोपहर 12:30 बजे तक सेंसेक्स 1,486 अंक यानी 1.83% टूटकर 79,806 पर आ गया, जबकि निफ्टी 453 अंक (1.80%) गिरकर 24,725 पर कारोबार करता दिखा। निवेशकों की घबराहट साफ नजर आई, खासकर उन सेक्टरों में जो कच्चे तेल की कीमतों और उपभोक्ता मांग से सीधे जुड़े हैं।
ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सबसे ज्यादा प्रभावित

सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में रही। निफ्टी ऑटो और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स करीब 3-3% टूटे। इसके अलावा निफ्टी इन्फ्रा, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और एनर्जी इंडेक्स भी 2% से ज्यादा गिरावट के साथ लाल निशान में रहे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली तेज रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.14% और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2.03% नीचे कारोबार करता दिखा। यह संकेत है कि गिरावट व्यापक रही, सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं।

सेंसेक्स पैक में चुनिंदा शेयर संभले, बाकी दबाव में

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से अधिकांश में गिरावट रही। बीईएल, सन फार्मा और भारती एयरटेल जैसे कुछ शेयर ही हरे निशान में दिखे। वहीं एलएंडटी, इंडिगो, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, एशियन पेंट्स, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई समेत कई दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बाजार पूंजीकरण की बात करें तो बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 9 लाख करोड़ रुपये घटकर 454 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

कच्चे तेल और डॉलर का दबाव, सोना-चांदी में चमक
युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। Brent Crude करीब 9% चढ़कर 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि WTI Crude भी 8% की तेजी के साथ 72 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

दूसरी ओर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी में जोरदार तेजी देखी गई। सोना 3% से ज्यादा उछल गया, जबकि चांदी में भी लगभग 2.7% की बढ़त रही। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *