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युवाओं को सोशल मीडिया की लत का आरोप मेटा पर 1.4 खरब डॉलर जुर्माने की मांग से बढ़ीं मुश्किलें


नई दिल्ली । अमेरिका में सोशल मीडिया कंपनी मेटा एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गई है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी पर आरोप लगाया गया है कि उसने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया जिससे किशोरों और युवा यूजर्स में सोशल मीडिया की लत बढ़ी और कंपनी ने सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों के बारे में लोगों को पूरी और सही जानकारी नहीं दी। इन गंभीर आरोपों के आधार पर अमेरिका के चार राज्यों ने मेटा पर लगभग 1.4 खरब डॉलर के जुर्माने की मांग की है। यदि यह मांग अदालत में स्वीकार होती है तो यह तकनीकी कंपनियों के खिलाफ प्रस्तावित सबसे बड़े आर्थिक दंडों में से एक माना जाएगा।

कैलिफोर्निया कोलोराडो केंटकी और न्यू जर्सी की ओर से दायर मामलों में कहा गया है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह विकसित किया जिससे युवा उपयोगकर्ता लंबे समय तक स्क्रीन पर बने रहें। आरोप है कि कंपनी ने एल्गोरिद्म और अन्य फीचर्स के जरिए उपयोगकर्ताओं की निर्भरता बढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती। राज्यों का कहना है कि इस वजह से बड़ी संख्या में किशोर प्रभावित हुए हैं और इसी आधार पर भारी जुर्माने की मांग की गई है।

मेटा ने अदालत में दायर अपने जवाब में इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि प्रस्तावित जुर्माना तथ्यों और कानूनी आधार से परे है। मेटा के अनुसार उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मामलों में इतनी बड़ी राशि के दंड का कोई उदाहरण नहीं है। कंपनी का यह भी दावा है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम को युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लगातार नए सुरक्षा फीचर्स के साथ अपडेट किया जाता रहा है और सोशल मीडिया की लत संबंधी आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।

इस मामले में सिर्फ चार राज्य ही नहीं बल्कि अमेरिका के कई अन्य राज्यों ने भी मेटा के खिलाफ अलग-अलग कानूनी कार्रवाई शुरू कर रखी है। कुल 29 राज्यों ने संघीय अदालत में कंपनी पर बच्चों और किशोरों के डेटा संग्रह तथा ऑनलाइन गोपनीयता कानूनों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। इन मामलों में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने अभिभावकों की उचित सहमति के बिना नाबालिगों से संबंधित जानकारी एकत्र की जो संघीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल मेटा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि भविष्य में सभी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों की कार्यप्रणाली और उनकी जवाबदेही तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है तो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में नए और कड़े नियम लागू होने का रास्ता खुल सकता है।

अब इस बहुचर्चित मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई अगस्त में अमेरिकी संघीय अदालत में होगी। इस दौरान अदालत यह तय करेगी कि मेटा पर लगाए गए आरोपों में कितनी कानूनी मजबूती है और क्या कंपनी पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाना उचित होगा। दुनिया भर की टेक कंपनियों और डिजिटल उद्योग की नजरें अब इस फैसले पर टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर वैश्विक सोशल मीडिया उद्योग पर भी पड़ सकता है।

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