वेम्बु के अनुसार, हर बड़ी टेक्नोलॉजी वेव में इस तरह की स्थिति बनती है, लेकिन मौजूदा AI निवेश और प्रचार का स्तर पहले से कहीं ज्यादा बड़ा है। उनका मानना है कि कई कंपनियां वास्तविक मांग से ज्यादा भविष्य की उम्मीदों पर भारी निवेश कर रही हैं।
उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि AI इंडस्ट्री की ग्रोथ केवल वास्तविक उपयोग नहीं, बल्कि निवेश चक्र और अकाउंटिंग स्ट्रक्चर पर भी आधारित हो सकती है। इस पोस्ट में दावा किया गया कि बड़ी टेक कंपनियां AI स्टार्टअप्स में निवेश कर क्लाउड सर्विसेज के जरिए उसी पैसा वापस अर्जित कर रही हैं।
उदाहरण के तौर पर पोस्ट में Microsoft और OpenAI के बीच हुए निवेश और क्लाउड क्रेडिट्स के उपयोग का भी जिक्र किया गया, जिससे यह सवाल उठाया गया कि AI इकोसिस्टम का असली रेवेन्यू मॉडल कितना मजबूत है।
वेम्बु ने यह भी कहा कि इस पूरे दौर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कंपनियां बिना बड़े नुकसान के इस तेज AI दौड़ में कैसे आगे बढ़ें, खासकर तब जब कई टेक कंपनियों में छंटनी भी देखने को मिल रही है।
इसके अलावा वे AI आधारित कोडिंग पर भी सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि AI से कोड लिखने के बावजूद सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की उत्पादकता में अपेक्षित वृद्धि नहीं दिख रही है।फिलहाल, उनके इस बयान ने टेक इंडस्ट्री में AI निवेश और उसके वास्तविक प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।