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18 दिन का क्रूड, 21 दिन का पेट्रोल-डीजल, 12 दिन की गैस भारत पर पड़ सकता है गंभीर संकट..


नई दिल्ली :पश्चिम एशिया में बढ़ता युद्ध ईरान और इजरायल/अमेरिका टकराव भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। ईरान ने आधिकारिक रूप से होर्मुज की खाड़ी बंद करने की चेतावनी दी है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो भारत को तेल, गैस और पेट्रोल-डीजल की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

इंडस्ट्री और सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास केवल 17-18 दिन की डिमांड के बराबर क्रूड स्टॉक है। वहीं पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति 20-21 दिन के लिए पर्याप्त है जबकि एलएनजी केवल 10-12 दिन का भंडार बचा है। भारत अपनी एलएनजी की करीब 90 फीसदी आपूर्ति खाड़ी देशों से करता है।

आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने कई उपायों पर काम शुरू कर दिया है। इनमें पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोकना, रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाना और एलपीजी की राशनिंग शामिल है। इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने कुछ चुनिंदा रिफाइनरीज में एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई है।

पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक तेल और गैस कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड करीब 10 फीसदी बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जबकि यूरोप में गैस वायदा की कीमत 40 फीसदी से अधिक उछली। सऊदी अरब की रास तानुरा रिफाइनरी और कतर के एनएनजी प्लांट पर हमलों के कारण उत्पादन अस्थायी रूप से बंद हो गया। होर्मुज की खाड़ी में टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान ज्यादा समय तक खाड़ी बंद रखता है तो भारत को तत्काल कदम उठाने होंगे। सबसे पहले पेट्रोल और डीजल का एक्सपोर्ट रोका जा सकता है। इसके अलावा एलपीजी की खपत सीमित करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल की खरीद कम की है, लेकिन अगर वैश्विक सप्लाई संकट बढ़ता है तो रूस से आयात बढ़ाया जा सकता है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए इंडस्ट्री और पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार आपूर्ति और डिमांड की समीक्षा कर रहे हैं। हालाँकि कुछ एनालिस्ट मानते हैं कि ईरान ज्यादा समय तक खाड़ी को बंद नहीं रख पाएगा और स्थिति जल्दी सामान्य हो सकती है।

अगर संकट लंबा खिंचता है, तो भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव होगा। पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक्सपोर्ट रोके जाएंगे, घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा और रूस से तेल की सप्लाई तेज़ी से बढ़ाई जाएगी। यह संकट यह भी दर्शाता है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक राजनीतिक घटनाओं से कितनी प्रभावित होती है और देश को आपात योजना हमेशा तैयार रखनी होगी।

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