AMITABH BACHCHAN POST: अमिताभ बच्चन का क्रिप्टिक पोस्ट ‘चुप’ ने फैंस को किया हैरान – सोशल मीडिया पर मचा तहलका

AMITABH BACHCHAN POST: नई दिल्ली । अमिताभ बच्चन जो हमेशा सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं ने हाल ही में Amitabh Bachchan अपने एक्स X प्लेटफ़ॉर्म पर एक क्रिप्टिक पोस्ट किया जिसने फैंस को हैरान कर दिया। पोस्ट में उन्होंने लिखा: टी 5661 i CHUUUUUUPPPP जिसे पढ़कर उनके फॉलोअर्स समझ नहीं पाए कि बिग बी किसे चुप करवा रहे हैं या इसका संदर्भ क्या है। बिग बी अपने पोस्ट में अक्सर विचार कविताएं और छोटे नोट्स साझा करते हैं जिन्हें फैंस बड़ी उत्सुकता से पढ़ते हैं। लेकिन इस बार का चुप वाला पोस्ट अलग ही था। पोस्ट के तुरंत बाद फैंस ने प्रतिक्रियाएं देना शुरू किया। एक यूजर ने लिखा अमिताभ बच्चन जी क्या हो गया? जबकि दूसरे ने पूछा यह क्या है सर? कोड को प्लीज एक्सप्लेन करें। पोस्ट पर प्रतिक्रियाएं जमकर आईं। एक यूजर ने मज़ाक में लिखा सर आपको बोलते रहना चाहिए। उम्मीद करते हैं कि आप कभी चुप नहीं होंगे। वहीं एक और फैन ने कहा जब अमिताभ बच्चन चुप कहते हैं तो यह सिर्फ एक शब्द नहीं है यह एक युग है एक एटिट्यूड है। इस पोस्ट पर डेढ़ हजार से अधिक लोग रिप्लाई कर चुके हैं 800 से ज्यादा लोगों ने इसे रीपोस्ट किया और 4 500 से अधिक फॉलोअर्स ने लाइक किया। कुछ फैंस ने इस क्रिप्टिक पोस्ट का अर्थ जानने के लिए एआई ग्रोक का भी इस्तेमाल किया। ग्रोक ने बताया कि CHUUUUUUPPPP का मतलब हिंदी में शटअप होता है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अमिताभ ने इसे किस संदर्भ में लिखा लेकिन फैंस इसे उनके मज़ाकिया और व्यंग्यात्मक अंदाज का हिस्सा मान रहे हैं। बिग बी की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने हाल ही में Vettaiyan में काम किया था जिसमें उनके साथ Rajinikanth लीड रोल में थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औसत प्रदर्शन कर पाई। फिलहाल अमिताभ फिल्मों से थोड़ी दूरी बनाए हुए हैं लेकिन फैंस उनकी आने वाली फिल्मों को लेकर उत्साहित हैं। अमिताभ जल्द ही Section 84 में नजर आएंगे जिसमें उनके साथ Nimrat Kaur और Abhishek Banerjee हैं। इसके अलावा वह Kalqi 2898 AD 2 में भी दिखाई देंगे। पहले पार्ट में दीपिका पादुकोण और प्रभास लीड रोल में थे लेकिन दूसरे पार्ट में दीपिका शामिल नहीं होंगी। फैंस अमिताभ के इस पोस्ट के पीछे का रहस्य जानने के लिए उत्साहित हैं। चाहे यह उनके मजाकिया अंदाज का हिस्सा हो या किसी अंदर की बात का संकेत बिग बी का यह चुप वाला पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
ENTERTAINMENT NEWS: निक जोनस ने पहना मंगलसूत्र, प्रियंका चोपड़ा की फिल्म ‘द ब्लफ’ का किया स्टाइलिश प्रमोशन, फैंस बोले जीजू अव्वल नंबर

ENTERTAINMENT NEWS: नई दिल्ली । प्रियंका चोपड़ा के पति और पॉप सिंगर Nick Jonas भारत में हमेशा ही फैंस के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। लेकिन अब उन्होंने कुछ ऐसा किया है जिसने भारतीय फैंस का दिल जीत लिया। निक का हाल ही में एक वीडियो सामने आया है जिसमें उनके हाथ में मंगलसूत्र ब्रेसलेट नजर आ रहा है। भारतीय ट्रेडिशन फॉलो करने वाले निक ने इसे पहनकर फैंस को अपने देसी अंदाज से दीवाना बना दिया है। निक ने किया प्रियंका का प्रमोशन वीडियो में निक अपनी पत्नी Priyanka Chopra Jonas की फिल्म द ब्लफ का प्रमोशन कर रहे हैं। वीडियो में वह कहते हैं दोस्तों प्रियंका की फिल्म द ब्लफ का प्रीमियर अमेज़न प्राइम पर है। यह शानदार है। मैंने इसे दो बार देखा है। उनके किरदार का नाम ब्लडी एम है इसलिए मैं ब्लडी मैरी बनाऊंगा। इसके बाद निक कॉकटेल बनाते हैं और प्रियंका को सर्व करते हैं। प्रियंका भी इसका स्वाद चखकर कहते हैं आपकी बेस्ट रेसिपी है।” फैंस के रिएक्शन निक का मंगलसूत्र ब्रेसलेट पहनना फैंस की नजर से नहीं बचा। सोशल मीडिया पर लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। एक फैन ने लिखा निक ने मंगलसूत्र ब्रेसलेट पहना है यार। किसी ने लिखा निक जीजू बेस्ट हैं। वहीं एक ने मज़ाकिया अंदाज में लिखा अगर आपने नोटिस किया कि निक ने मंगलसूत्र ब्रेसलेट पहना है तो देखें निक ग्रीन फॉरेस्ट हैं।” प्रियंका की फिल्म द ब्लफ द ब्लफ एक एक्शन-एडवेंचर थ्रिलर फिल्म है। फिल्म में प्रियंका के अलावा कार्ल इसमैल क्रूज और साफिया जैसे कलाकार भी अहम किरदार निभा रहे हैं। इसे Frank E Flowers ने डायरेक्ट किया है। फिल्म का प्रीमियर 25 फरवरी 2026 को Amazon Prime Video पर होगा। प्रियंका की भारतीय फिल्म वापसी प्रियंका चोपड़ा लंबे समय बाद भारतीय सिनेमा में वापसी करने जा रही हैं। वह एसएस राजामौली की फिल्म वाराणसी में नजर आएंगी जिसमें Mahesh Babu उनके साथ लीड रोल में हैं। यह दोनों की पहली फिल्म है और एसएस राजामौली के साथ भी प्रियंका की यह पहली मूवी है। फैंस को इस बड़ी फिल्म का बेसब्री से इंतजार है। लंबे समय बाद भारतीय सिनेमा में प्रियंका का पिछला बॉलीवुड प्रोजेक्ट द स्काई इज़ पिंक (2019) था। वहीं 2020 में उन्होंने Netflix की फिल्म द व्हाइट टाइगर में नजर आई थीं। अब वाराणसी के जरिए वह फिर से भारतीय सिनेमा में अपनी धमाकेदार वापसी करने जा रही हैं।
GWALIOR SC-ST VIVAD: एससी-एसटी एक्ट की एफआईआर के विरोध में, ब्राह्मण-क्षत्रियों ने ली सामूहिक शपथ

HIGHLIGHTS: कोंहार गांव में जाटव समाज का सामूहिक बहिष्कार ब्राह्मण-क्षत्रियों सहित अन्य समाजों ने मंदिर में ली शपथ घर आना-जाना और खेतों में मेलजोल बंद करने का निर्णय विरोध का कारण: 17 फरवरी को दर्ज एससी-एसटी एक्ट की एफआईआर प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग, स्थिति फिलहाल सामान्य GWALIOR SC-ST VIVAD: ग्वालियर। भिंड जिले के कोंहार गांव में शुक्रवार सुबह एक बड़ी सामाजिक घटना सामने आई। जहां गांव के ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य समाज के लोगों ने जाटव समाज के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया। बता दें कि घटना हनुमान मंदिर परिसर में हुई, जहां ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे जाटव समाज के लोगों के साथ किसी भी प्रकार का सामाजिक मेलजोल नहीं रखेंगे। ग्रामीणों ने यह कदम हाल ही में दर्ज ST -SC एक्ट की एफआईआर और कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में उठाया। उनका आरोप है कि इस एफआईआर ने गांव का सामाजिक माहौल प्रभावित किया है और एकतरफा कार्रवाई के रूप में इसे देखा जा रहा है। पार्ट 1 से छोटी होगी Dhurandhar 2: The Revenge? Ranveer Singh की फिल्म को मिला UA 16+ सर्टिफिकेट बैठक और बहिष्कार की प्रक्रिया शुक्रवार सुबह 10:30 से 11:00 बजे के बीच कोंहार गांव के हनुमान मंदिर परिसर में बैठक बुलाई गई। इस दौरान, ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य समाज के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जाटव समाज के कुछ लोगों ने हिंदू देवी-देवताओं और ब्राह्मण-क्षत्रिय समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की। इसके बाद, ग्रामीणों ने शपथ ली कि वे जाटव समाज के लोगों के साथ सभी सामाजिक संबंध समाप्त करेंगे। इसमें उनके घर आना-जाना बंद करना, खेतों में संपर्क खत्म करना और अन्य सामाजिक मेलजोल बंद करना शामिल है। IMDb रेटिंग का गणित: क्यों करते हैं लोग भरोसा और कैसे रुकते हैं फर्जी वोट्स? प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग बैठक में उपस्थित लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की। ग्रामीणों का कहना है, यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो भविष्य में और कठोर सामूहिक निर्णय भी लिए जा सकते हैं। IPL से जुड़ी फ्रेंचाइजी का संकेत, The Hundred में पाक खिलाड़ियों की राह मुश्किल? याद रहे, यह घटना कोंहार गांव में दूसरी बार सामने आई है, जब जाटव समाज के खिलाफ सार्वजनिक विरोध और शपथ समारोह आयोजित किया गया। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
IMDB RATING: IMDb रेटिंग का गणित: क्यों करते हैं लोग भरोसा और कैसे रुकते हैं फर्जी वोट्स?

IMDB RATING: नई दिल्ली । आज के डिजिटल दौर में किसी भी फिल्म या वेब सीरीज को देखने से पहले ज्यादातर लोग सबसे पहले IMDb रेटिंग चेक करते हैं। 1 से 10 के स्केल पर दी जाने वाली यह रेटिंग दुनिया भर में भरोसे का पैमाना मानी जाती है। लेकिन सवाल उठता है यह सिर्फ साधारण औसत एवरेज है? क्या यहां फर्जी वोटिंग संभव नहीं? दरअसल IMDb का रेटिंग सिस्टम बेहद तकनीकी और फिल्टर-आधारित है जिसे छेड़छाड़ से बचाने के लिए खास तरीके से तैयार किया गया है। क्या होती है IMDb रेटिंग? जब आप गूगल पर किसी फिल्म के नाम के साथ IMDb लिखते हैं तो एक पेज खुलता है जिसमें फिल्म की जानकारी के साथ ऊपर रेटिंग दिखाई देती है। यह रेटिंग केवल कुल वोट्स का सीधा औसत नहीं होती। इसके पीछे एक वेटेड एवरेज फॉर्मूला काम करता है जो हर वोट को अलग-अलग वजन वेटेज देता है। यही वजह है कि IMDb की रेटिंग फिल्मों के साथ-साथ वेब सीरीज और टीवी शोज के लिए भी भरोसेमंद मानी जाती है। वेटेड एवरेज सिस्टम कैसे काम करता है? IMDb पर करोड़ों यूजर्स फिल्में रेट करते हैं लेकिन हर यूजर के वोट की वैल्यू समान नहीं होती। प्लेटफॉर्म ऐसे यूजर्स को ज्यादा महत्व देता है जो लंबे समय से सक्रिय हैं नियमित रूप से रेटिंग देते हैं और जिनकी गतिविधि सामान्य और विश्वसनीय मानी जाती है। इसके विपरीत नए या संदिग्ध अकाउंट से दिए गए वोट्स का असर कम होता है। यानी अगर कोई व्यक्ति सिर्फ किसी खास फिल्म को प्रमोट करने या बदनाम करने के लिए नया अकाउंट बनाकर 10/10 या 1/10 की बाढ़ ला दे तो उसका प्रभाव सीमित रहेगा। यही वेटेड एवरेज मॉडल IMDb की विश्वसनीयता की सबसे बड़ी वजह है।फर्जी वोट्स और स्पैम को कैसे फिल्टर किया जाता है? अक्सर बड़ी फिल्मों के रिलीज होते ही रेटिंग बमबारी देखी जाती है या तो फिल्म को जानबूझकर कम रेटिंग दी जाती है या फिर 10/10 देकर हाइप बनाने की कोशिश की जाती है। IMDb का एल्गोरिद्म ऐसे असामान्य पैटर्न यानी आउटलायर्स को पहचान लेता है। अगर सिस्टम को लगता है कि कोई रेटिंग अस्वाभाविक है या किसी अभियान का हिस्सा है तो उस वोट का असर अंतिम स्कोर पर बहुत कम कर दिया जाता है। इस तरह स्पैम और फर्जीवाड़े को काफी हद तक रोका जाता है जिससे रेटिंग अपेक्षाकृत संतुलित बनी रहती है।टॉप 250 फिल्मों की लिस्ट कैसे बनती है? IMDb की प्रसिद्ध टॉप 250 सूची के लिए अलग और ज्यादा सख्त फॉर्मूला अपनाया जाता है जिसे बेयसियन एस्टीमेट कहा जाता है। इसमें केवल नियमित और भरोसेमंद वोटर्स के वोट गिने जाते हैं। साथ ही किसी फिल्म को सूची में शामिल होने के लिए न्यूनतम वोटों की सीमा पार करनी होती है। इसी कारण कई बार हजारों वोट मिलने के बाद भी किसी फिल्म की रैंकिंग बदल जाती है या वह सूची से बाहर हो जाती है। यह सिस्टम सुनिश्चित करता है कि केवल स्थिर और व्यापक रूप से सराही गई फिल्में ही शीर्ष सूची में जगह बना सकें।क्यों माना जाता है भरोसेमंद? हालांकि कोई भी सिस्टम पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं हो सकता लेकिन एडवांस एल्गोरिद्म वेटेड वोटिंग और स्पैम फिल्टरिंग के कारण IMDb रेटिंग अपेक्षाकृत विश्वसनीय मानी जाती है। यही वजह है कि दुनिया भर के सिनेप्रेमी किसी फिल्म की गुणवत्ता का पहला अंदाजा IMDb स्कोर से ही लगाते हैं।
Dhurandhar 2: पार्ट 1 से छोटी होगी धुरंधर 2; फिल्म को मिला UA 16+ सर्टिफिकेट

Dhurandhar 2: नई दिल्ली । रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर के बाद अब दर्शकों को इसके सीक्वल का बेसब्री से इंतजार है। धुरंधर 2: द रिवेंज 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और रिलीज से पहले फिल्म से जुड़ी अहम जानकारी सामने आ गई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने फिल्म को रिव्यू कर इसका सर्टिफिकेट और रनटाइम तय कर दिया है। सीबीएफसी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, धुरंधर 2 को UA 16+ सर्टिफिकेट दिया गया है। यानी 16 वर्ष से कम उम्र के दर्शकों को अभिभावक की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी गई है। फिल्म को 9 फरवरी को प्रमाणपत्र जारी किया गया। इससे साफ है कि फिल्म में एक्शन और इंटेंस ड्रामा का स्तर पहले भाग से भी ज्यादा हो सकता है। रनटाइम की बात करें तो धुरंधर 2 की अवधि 208 मिनट यानी 3 घंटे 28 मिनट होगी। दिलचस्प बात यह है कि धुरंधर का पहला भाग 3 घंटे 35 मिनट लंबा था। हालांकि उसमें करीब चार मिनट का पोस्ट-क्रेडिट सीन भी शामिल था, जिसकी वजह से उसकी कुल अवधि बढ़ गई थी। ऐसे में देखा जाए तो सीक्वल पार्ट 1 से थोड़ा छोटा जरूर है, लेकिन फिर भी यह एक लंबी और ग्रैंड स्केल पर बनी फिल्म साबित होगी। फिल्म का निर्देशन Aditya Dhar ने किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार कहानी और भी ज्यादा तीव्र और भावनात्मक होगी। रणवीर सिंह एक बार फिर हम्जा अली के किरदार में नजर आएंगे और सीक्वल में उनके किरदार की गहराई को और विस्तार से दिखाया जाएगा। साथ ही पहले भाग से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब भी इस फिल्म में मिल सकते हैं। खासतौर पर बड़े साहब के किरदार से पर्दा उठने की चर्चा है, जिसने पहले भाग में दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी थी। फिल्म को लेकर एक और चर्चा जोरों पर है कि इसमें Yami Gautam का कैमियो देखने को मिल सकता है। हालांकि मेकर्स की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह दर्शकों के लिए बड़ा सरप्राइज होगा। बॉक्स ऑफिस की बात करें तो धुरंधर 2 का मुकाबला साउथ सुपरस्टार Yash की फिल्म Toxic से होने वाला है। दोनों बड़ी फिल्मों के बीच यह क्लैश मार्च में सिनेमाघरों में जबरदस्त टक्कर पैदा कर सकता है। कुल मिलाकर, धुरंधर 2: द रिवेंज पार्ट 1 से थोड़ी छोटी जरूर है, लेकिन इसकी कहानी, एक्शन और ड्रामा पहले से ज्यादा दमदार होने का दावा कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या रणवीर सिंह की यह फिल्म भी पहले भाग की तरह बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ पाती है या नहीं।
T20 WORLD CUP: Sikandar Raza का धमाका, Rohit Sharma का ICC रिकॉर्ड टूटा; टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे का बड़ा उलटफेर

T20 WORLD CUP: नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 में जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने इतिहास रच दिया। श्रीलंका के खिलाफ निर्णायक मुकाबले में प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीतते ही रजा आईसीसी टूर्नामेंट में बतौर कप्तान यह सम्मान हासिल करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। 39 साल 301 दिन की उम्र में उन्होंने वह उपलब्धि अपने नाम की जो अब तक रोहित शर्मा के नाम दर्ज थी। रोहित ने 37 साल 331 दिन की उम्र में न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी 2025 फाइनल में यह पुरस्कार जीता था जबकि 37 साल 55 दिन की उम्र में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी POTM बने थे। लेकिन अब यह रिकॉर्ड जिम्बाब्वे के अनुभवी कप्तान के नाम हो गया है। मैच की तस्वीर भी किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रही। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए कठिन पिच पर सात विकेट पर 178 रन बनाए। बीच के ओवरों में जिम्बाब्वे के गेंदबाजों ने रन गति पर लगाम कसी जिससे श्रीलंकाई बल्लेबाज खुलकर नहीं खेल सके। लक्ष्य 179 रन का था दबाव भरा लेकिन असंभव नहीं। GWALIOR SC-ST VIVAD: एससी-एसटी एक्ट की एफआईआर के विरोध में, ब्राह्मण-क्षत्रियों ने ली सामूहिक शपथ जवाब में जिम्बाब्वे की शुरुआत शानदार रही। पावरप्ले में बिना विकेट खोए 55 रन जुड़ गए। ब्रायन बेनेट और ताडी मारूमानी ने पहले विकेट के लिए 8.3 ओवर में 69 रन जोड़कर मजबूत नींव रखी। मारूमानी 34 रन बनाकर आउट हुए लेकिन बेनेट ने 48 गेंदों में 63 रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम को मुकाबले में बनाए रखा। रियान बर्ल ने 12 गेंदों में 23 रन की तेज पारी खेली हालांकि वह ज्यादा देर टिक नहीं सके। इसके बाद कमान संभाली कप्तान सिकंदर रजा ने। जब मैच संतुलन पर था तब रजा ने आक्रामक रुख अपनाया। 26 गेंदों में 45 रन की उनकी नाबाद पारी में 2 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। 173.08 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए उन्होंने 15वें ओवर में दिलशान मदुशंका को लगातार दो छक्के जड़कर मैच का रुख पलट दिया। अगले ओवर में महीष तीक्षणा पर छक्का और चौका लगाकर दबाव पूरी तरह श्रीलंका पर डाल दिया। 19वें ओवर में रजा आउट हुए लेकिन तब तक जीत लगभग तय हो चुकी थी। Sikandar Raza का धमाका, Rohit Sharma का ICC रिकॉर्ड टूटा; टी20 वर्ल्ड कप में जिम्बाब्वे का बड़ा उलटफेर आखिरी ओवर में आठ रन की जरूरत थी और टोनी मुनियोंगा ने तीक्षणा पर छक्का जड़कर जिम्बाब्वे को छह विकेट से ऐतिहासिक जीत दिला दी। टीम ने 19.3 ओवर में चार विकेट पर 182 रन बनाकर लक्ष्य हासिल किया और ग्रुप में अपराजेय रहते हुए सुपर आठ में जगह पक्की कर ली। इससे पहले जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर भी बड़ा उलटफेर किया था जिससे टूर्नामेंट में उनकी दावेदारी मजबूत हुई है। रजा की कप्तानी अनुभव और दबाव में खेलने की क्षमता ने एक बार फिर साबित किया कि उम्र महज आंकड़ा है। बड़े मंच पर बड़ा प्रदर्शन ही असली पहचान बनाता है और इस बार सिकंदर रजा ने विश्व क्रिकेट में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया।
THE HUNDRED 2026: IPL से जुड़ी फ्रेंचाइजी का संकेत, The Hundred में पाक खिलाड़ियों की राह मुश्किल?

THE HUNDRED 2026: नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के तनावपूर्ण कूटनीतिक रिश्तों की छाया अब वैश्विक फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर भी पड़ती नजर आ रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक इंग्लैंड की 100 गेंदों की लीग द हंड्रेड के आगामी सत्र में उन टीमों द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर विचार नहीं किया जा सकता जिनका स्वामित्व आंशिक रूप से Indian Premier League से जुड़ी फ्रेंचाइजियों के पास है। अगले महीने प्रस्तावित खिलाड़ी नीलामी से पहले यह संकेत क्रिकेट जगत में हलचल पैदा कर रहा है। 21 जुलाई से 16 अगस्त तक खेले जाने वाले इस टूर्नामेंट के नए सीजन में निजी निवेश बढ़ने के कारण खिलाड़ियों की सैलरी में उल्लेखनीय इजाफा होने की संभावना है। ऐसे में अगर आईपीएल से जुड़ी फ्रेंचाइजियां पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज करती हैं तो वे संभावित आर्थिक लाभ से वंचित रह सकते हैं। हालांकि इसे किसी आधिकारिक प्रतिबंध के रूप में घोषित नहीं किया गया है लेकिन मौजूदा भारत-पाक संबंधों की पृष्ठभूमि में इसे रणनीतिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है। ब्रिटिश मीडिया संस्थान BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कथित तौर पर एक खिलाड़ी एजेंट को संकेत दिया कि उसके पाकिस्तानी खिलाड़ियों में रुचि केवल उन्हीं टीमों तक सीमित रह सकती है जिनका आईपीएल से कोई संबंध नहीं है। हालांकि इस मुद्दे पर न तो बोर्ड और न ही किसी फ्रेंचाइजी की ओर से आधिकारिक पुष्टि की गई है जिससे स्थिति अभी अटकलों के दायरे में है। द हंड्रेड में कुल आठ टीमें हिस्सा लेती हैं और इनमें से कई में आईपीएल से जुड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी है। उदाहरण के तौर पर मैनचेस्टर ओरिजिनल्स ओवल इनविंसिबल्स सदर्न ब्रेव और नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स जैसी टीमों में भारतीय निवेशकों की भागीदारी बताई जाती है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इन टीमों की चयन नीति पर आईपीएल की कारोबारी प्राथमिकताओं और राजनीतिक संवेदनशीलताओं का असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि 2008 के बाद से पाकिस्तानी खिलाड़ी आईपीएल का हिस्सा नहीं रहे हैं। यदि इसी तरह का रुख आईपीएल से जुड़ी विदेशी फ्रेंचाइजियों में भी अपनाया जाता है तो अंतरराष्ट्रीय टी20 बाजार में पाक खिलाड़ियों के अवसर सीमित हो सकते हैं। एक अन्य एजेंट ने इसे भारतीय निवेश वाली टी20 लीगों में अनलिखा नियम तक करार दिया है हालांकि औपचारिक रूप से ऐसा कोई नियम सार्वजनिक नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक फ्रेंचाइजी क्रिकेट अब केवल खेल तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह बहु-अरब डॉलर का वैश्विक व्यावसायिक मॉडल बन चुका है। निवेशकों के हित ब्रांड छवि राजनीतिक समीकरण और बाजार रणनीति ये सभी कारक टीम चयन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर नीलामी के दौरान ही साफ होगी लेकिन फिलहाल संकेत यही हैं कि द हंड्रेड के आगामी सत्र में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए राह पहले जितनी सहज नहीं दिख रही।
BHIND HARSH FIRING CASE: भिंड में हर्ष फायरिंग पड़ी महंगी: मासूम को लगी गोली, आरोपी को 5 साल की सजा

HIGHLIGHTS: लगुन कार्यक्रम में की गई हर्ष फायरिंग पांच साल की बच्ची के पैर में लगी गोली गंभीर चोट, हुआ फ्रैक्चर पुलिस ने कट्टा और कारतूस किया बरामद आरोपी को 5 साल की सश्रम सजा और जुर्माना BHIND HARSH FIRING CASE: ग्वालियर। भिंड जिले में लगुन फलदान कार्यक्रम के दौरान की गई हर्ष फायरिंग एक व्यक्ति के लिए भारी पड़ गई। घटना में आरोपी ने अपने परिवार के कार्यक्रम में देसी कट्टे से फायरिंग की, जिसके कारण पांच साल की मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी श्रीचंद गोयल को दोषी ठहराया और उसे 5 साल का सश्रम कारावास तथा 5,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया है। Gold and Silver Prices: US-Iran टेंशन के बीच सुरक्षित निवेश… फिर 3 लाख के पार जा सकते हैं चांदी के दाम पूरा मामला क्या ? 20 अप्रैल 2024 की शाम लगभग 4 बजे, थाना उमरी क्षेत्र के ग्राम नारायण सिंह का पुरा नुनहाटा में छक्कीलाल जाटव के घर लगुन फलदान कार्यक्रम चल रहा था। सुदेश कुमार जाटव अपनी 5 साल की बेटी विशाखा के साथ कार्यक्रम में पहुंचे। इसी दौरान, परिवार के सदस्य श्रीचंद गोयल ने 315 बोर के देसी कट्टे से हर्ष फायर कर दी। गोली सीधे विशाखा के दाहिने पैर में घुटने के पास जा लगी और उसे गंभीर चोट आई, साथ ही फ्रैक्चर भी हुआ। जिसके बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। Gold and Silver Prices: US-Iran टेंशन के बीच सुरक्षित निवेश… फिर 3 लाख के पार जा सकते हैं चांदी के दाम पुलिस की जांच घटना की रिपोर्ट सुदेश कुमार जाटव ने थाना उमरी में दर्ज कराई। साथ ही, पुलिस ने आरोपी के पास से 315 बोर का कट्टा और एक जिंदा कारतूस बरामद किया। हालांकि, आरोपी ने कोर्ट में अपने बचाव में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। GWALIOR SUSPICIOUS DAETH: चार दिन बाद मिला शव: इंदौर के कार डेकोरेटर की ग्वालियर में संदिग्ध मौत कोर्ट का फैसला साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने श्रीचंद गोयल को दोषी ठहराया। इसके साथ ही, अदालत ने उसे पांच साल के सश्रम कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
SAFETY ALERET: थायरॉइड और एंटीबायोटिक दवाओं पर सख्त अलर्ट, Central Drugs Standard Control Organization और Drug Controller General of India ने जारी किए नए निर्देश

SAFETY ALERET: नई दिल्ली। देश में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली थायरॉइड और एंटीबायोटिक दवाओं को लेकर स्वास्थ्य महकमे ने गंभीर चेतावनी जारी की है। हाइपरथायरॉइडिज्म के इलाज में दी जाने वाली कार्बिमाजोल और विभिन्न बैक्टीरियल संक्रमणों में इस्तेमाल होने वाली डॉक्सीसाइक्लिन के कुछ नए और संभावित रूप से खतरनाक दुष्प्रभाव सामने आए हैं। दवाओं की सुरक्षा की राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा के बाद नियामक संस्थाओं ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि इन दवाओं के पैकेट, लेबल और प्रिस्क्रिप्शन जानकारी में नए साइड इफेक्ट्स को स्पष्ट और प्रमुख चेतावनी के रूप में दर्ज किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बिमाजोल का उपयोग मुख्य रूप से बढ़े हुए थायरॉइड हार्मोन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह दवा लंबे समय से प्रभावी उपचार के रूप में इस्तेमाल होती रही है, लेकिन हालिया आकलन में पाया गया है कि कुछ मरीजों में इसके सेवन से सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या खतरनाक रूप से कम हो सकती है। इस स्थिति को एग्रानुलोसाइटोसिस कहा जाता है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है। व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी होने पर साधारण संक्रमण भी तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। वायरस, बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण से लड़ने की क्षमता घटने के कारण मरीज को तेज बुखार, गले में खराश, कमजोरी या बार-बार संक्रमण की शिकायत हो सकती है। गंभीर मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। इसलिए चिकित्सकों को सलाह दी गई है कि कार्बिमाजोल लेने वाले मरीजों की नियमित ब्लड जांच कराई जाए और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत चिकित्सा परीक्षण कराया जाए। वहीं, डॉक्सीसाइक्लिन को लेकर भी चिंताजनक संकेत मिले हैं। यह एंटीबायोटिक दवा त्वचा रोग, श्वसन संक्रमण, मूत्र संक्रमण और अन्य बैक्टीरियल बीमारियों के इलाज में व्यापक रूप से दी जाती है। हालांकि इसे आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन नई समीक्षा में कुछ मामलों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े दुष्प्रभाव सामने आए हैं। मरीजों में मूड में बदलाव, घबराहट, चिंता, अवसाद, भ्रम या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण देखे गए हैं। यद्यपि ऐसे मामले अपेक्षाकृत दुर्लभ बताए गए हैं, फिर भी एहतियात के तौर पर इन संभावित जोखिमों को दवा की आधिकारिक जानकारी में शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि डॉक्टर और मरीज दोनों पूरी तरह सतर्क रह सकें। नियामक संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दवा कंपनियों को पारदर्शिता के साथ सभी संभावित जोखिमों को सामने लाना होगा। अब इन दवाओं के पैकेट पर सख्त सुरक्षा चेतावनी छापना अनिवार्य होगा। साथ ही चिकित्सकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे दवा लिखते समय मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और संभावित जोखिमों पर विशेष ध्यान दें। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा अचानक बंद न करें, क्योंकि इससे बीमारी और गंभीर हो सकती है। लेकिन यदि बुखार, गले में संक्रमण, मानसिक अस्थिरता या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार ही इन संभावित दुष्प्रभावों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
समाज के रक्त में लोकतंत्र है, उसे दबाने की कोशिश करने वाला मिट्टी में मिल जाएगाः भैयाजी जोशी
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश जोशी उपाख्य भैयाजी जोशी ने कहा कि आपातकाल की घटना सिखाती है कि कोई तानाशाह बनने की कोशिश करेगा तो ये समाज, ये देश सहन नहीं करेगा। समाज के रक्त में लोकतंत्र है, जनतंत्र है, उसे दबाने की कोशिश करने वाला मिट्टी में मिल जाएगा।भैयाजी जोशी गुरुवार को आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘आपातकाल और युवा‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विमर्श को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन हिन्दुस्थान समाचार बहुभाषी संवाद समिति और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी के अध्यक्ष अरविंद भालचंद्र मार्डीकर ने की।भैयाजी जोशी ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए हिन्दुस्थान समाचार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां शायद ही कुछ लोग होंगे, जिन्होंने उस आपातकाल का अनुभव किया है और बहुत से लोग हैं, जिन्होंने उस घटना के बारे में सुना है। जिन्होंने अनुभव किया, उनके लिए स्मृति से कई बातों को हटाना असंभव है। उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्यपूर्ण काला इतिहास 26 जून 1975 को शुरू हुआ और मार्च 1977 को वह कालखंड समाप्त हुआ। उस समय, सत्ता में बैठी हुई व्यक्ति निरंकुश सत्ता चलाना चाहती थीं। हम कुछ भी करेंगे, उसके विरोध में कोई स्वर उठा न सके, हमें कोई रोक न सके, इस प्रकार का व्यक्ति केन्द्रित विचार करते हुए इस कानून का सहारा लेते हुए 25 जून की मध्य रात्रि को ये आपातकाल घोषित किया गया।उन्होंने कहा कि सब प्रकार के जनतंत्र द्वारा प्राप्त अधिकारों का हनन करते हुए केवल और केवल एक व्यक्तिगत इच्छा की पूर्ति के लिए उसने यह सब कानून बनाया। उस समय के प्रधानमंत्री के निर्वाचन को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले राजनारायण थे। उन्होंने उस निर्णय को चुनौती दी। न्यायालय में मामला चला, फैसला आ गया कि निर्वाचन अनुचित है, लेकिन इंदिरा गांधी ने हटने का मार्ग चयन नहीं किया, सारे देश को जेल बनाने का निर्णय लिया। अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर इस देश के लोकतंत्र को समाप्त करने का एक वेदनादायक कदम उठाया। जो कानून लाया गया, उसे मीसा के नाम से जाना जाता है।भैयाजी जोशी ने कहा कि इस एक कानून के आधार पर अपने विरोधियों को सब प्रकार से प्रतिबंधित किया गया, जेल में डाला गया। इस कानून का भयानक सूत्र था कि इसके खिलाफ न्यायालय में भी नहीं जा सकते, इसके खिलाफ कुछ लिख नहीं सकते, जनसभाएं नहीं ले सकते, कोई आंदोलन खड़ा नहीं कर सकते। जो करेगा उसे देशद्रोही-समाजद्रोही माना जाएगा और उसे जेल के अंदर जाना पड़ेगा। इसके बाद 1977 में निर्वाचन घोषित कर दिया गया। चुनाव में 20-25 दिन बचे हैं। उन्हें लगा कि अलग-अलग दलों के जो नेता जेलों में हैं, उनकी आवाज दबी हुई है, वे क्या कर लेंगे। आश्चर्य की बात है कि सोया हुआ समाज नहीं था, जागृत समाज था। इसलिए जैसे ही अवसर प्राप्त हुआ समाज की शक्ति खुलकर सामने आ गई थी। उस डर के वातावरण में भी नेता बिना किसी भय के साहस के साथ जनता के बीच गए। नियोजित समय पर निर्वाचन हुआ और जनता ने उन्हें दिखा दिया कि तुम्हारा स्थान क्या है। इस देश का युवा वर्ग अपनी सूझ-बूझ के साथ खड़ा हुआ और काले कानून से मुक्त होते हुए मूल परम्पराओं के साथ चलना प्रारंभ किया। ये घटना दो बातें सिखाती हैं। एक बात है कि कोई तानाशाह बनने की कोशिश करेगा ये भारत यहां का समाज कभी भी इसका सहन करने वाला नहीं। दूसरी बात आती है समाज के रक्त में लोकतंत्र-जनतंत्र है, ये भारत की हजारों वर्षों की परम्परा है, यहां सभी को मत रखने का अधिकार है। इस अधिकार को जो भी समाप्त करने की कोशिश करेगा, वह मिट्टी में मिलेगा, यही उसकी नियति है।आपातकाल में किस तरह लोकतंत्र का अपहरण हुआ, युवाओं को यह जानना जरूरी: उप मुख्यमंत्री शुक्लकार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि आपातकाल में जिस तरह से लोकतंत्र का अपहरण हुआ, इस विषय में जानने की सबसे ज्यादा जरूरत युवाओं को है, क्योंकि लोकतंत्र लंबे समय के संघर्ष के बाद स्थापित हुआ और देश की बेहतरी के लिए हुआ था, देश को फिर से विश्व गुरु के स्थान पर पहुंचाकर दुनिया का नेतृत्व करने के लिए हुआ था, जिससे दुनिया में शांति की स्थापना हो सके और हम लोकतंत्र को अमर बना सकें।उन्होंने कहा कि सत्ता के सदुपयोग और दुरुपयोग में क्या अंतर होता है और जब सत्ता का दुरुपयोग होता है तो स्थिति विकट हो सकती है, ये आपातकाल में हम लोगों ने देखा। जनता के आशीर्वाद से मिली हुई सत्ता इस बात के लिए नहीं है कि जो कुर्सी हमारे हाथ से जाने का खतरा आ जाए और वह भी उच्च न्यायालय के आदेश पर, तो हम ऐसी स्थिति पैदा कर दें कि लाखों लोगों को जेल के अंदर ठूस दिया जाए, प्रताड़ना दी जाए, प्रेस की स्वतंत्रता को समाप्त कर दिया जाए इससे भयावह स्थिति नहीं हो सकती। उन लोगों के लिए इससे बड़ी चिंता का विषय नहीं हो सकता कि लोगों ने लोकतंत्र की स्थापना एक बड़े मिशन की पूरा करने के लिए गई थी।उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने जब जनसंघ की पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक की तो उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया था कि समाज के अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति जिस दिन मुस्कराकर कह दे कि अब किसी प्रकार की समस्या हमारे सामने नहीं। हमारी सारी समस्याओं का समाधान हो गया, उस दिन मान जाना कि आपका राजनीति में आने का उद्देश्य पूरा हो गया। देश का सौभाग्य है कि भारत आर्थिक महाशक्ति बन रहा है। चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हमारा देश बन चुका है। ये युवाओं के लिए संतोष की बात है, क्योंकि आगे उनका लम्बा भविष्य है, लेकिन आर्थिक महाशक्ति बनने के साथ-साथ हमारी संस्कृति, हमारी विरासत और इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि विरासत से विकास। हम अपना एक पैर जमीन में जमाकर और लम्बी छलांग लगाने की