रीवा एक्सप्रेस में 'खूनी' साजिश: शंकराचार्य पर केस करने वाले आशुतोष महाराज पर हमला, नाक काटने की कोशिश

प्रयागराज। गाजियाबाद से प्रयागराज जा रही रीवा एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी (H1) कोच में रविवार सुबह उस वक्त दहशत फैल गई, जब आशुतोष महाराज पर एक अज्ञात हमलावर ने चाकू से हमला कर दिया। हमला इतना सोची-समझी साजिश का हिस्सा जान पड़ता है कि आरोपी ने सीधे चेहरे और नाक को निशाना बनाया। लहूलुहान हालत में आशुतोष महाराज ने ट्रेन के टॉयलेट में छिपकर अपनी जान बचाई और वहीं से जीआरपी (GRP) को फोन कर खुद के ‘मर्डर’ की साजिश का खुलासा किया। वारदात: सुबह 5 बजे, टॉयलेट के पास ‘बॉडी बिल्डर’ का हमलाआशुतोष महाराज के अनुसार, वे वेस्ट यूपी संयोजक सुधांशु सोम के साथ सफर कर रहे थे। सुबह करीब 5 बजे जब ट्रेन फतेहपुर और सिराथू के बीच थी, तब वे बाथरूम की ओर जा रहे थे। तभी एक ‘नकाबपोश नहीं बल्कि खुले चेहरे’ वाले हट्टे-कट्टे हमलावर ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमलावर ने उनकी नाक काटने की कोशिश की और चेहरे व हाथ पर कई वार किए। आशुतोष ने बताया कि उन्होंने जान बचाने के लिए हमलावर से हाथापाई की और किसी तरह खुद को बाथरूम में लॉक कर लिया। वे तब तक बाहर नहीं आए जब तक जीआरपी की टीम मौके पर नहीं पहुँच गई। आरोप: “कोर्ट में सबूत न दे पाऊं, इसलिए रची गई हत्या की साजिश”अस्पताल के बेड से आशुतोष महाराज ने सीधे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर उंगली उठाई है। उन्होंने दावा किया कि: वजह: पॉक्सो एक्ट के तहत उन्होंने जो एफआईआर दर्ज कराई है, उसके पुख्ता सबूत वे कोर्ट में पेश न कर पाएं, इसलिए यह हमला कराया गया। इनाम की घोषणा: उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी नाक काटने के लिए एक लाख रुपये के इनाम का ऐलान किया गया था, जिसमें दिनेश फलाहारी और मुकुंदानंद जैसे नाम शामिल हैं। फेसबुक पोस्ट का रहस्य: इस हमले की कथित जिम्मेदारी ‘डॉ. स्वाति अघोरी’ नाम के फेसबुक अकाउंट से ली गई है, जिसमें लिखा गया— “बोला था न हमारे लोगों के हत्थे मत चढ़ना।” पुलिस अब इस अघोरी साधक के प्रोफाइल की सत्यता की जांच कर रही है। पलटवार: “यह सब सुरक्षा पाने का बनावटी ड्रामा है”वहीं, दूसरी ओर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को ‘मीडिया अटेंशन’ पाने का तरीका बताया है। उन्होंने कहा कि: बनावटी हमला: शंकराचार्य के अनुसार, अटेंडेंट का कहना है कि बाथरूम जाने तक वे ठीक थे, फिर अचानक यह हाल कैसे हो गया? यह सब सरकारी सुरक्षा हासिल करने का प्रपंच है। रेलवे सुरक्षा पर सवाल: उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि क्या अब भारत की ट्रेनें सुरक्षित नहीं रह गई हैं? जीआरपी कहाँ थी? ध्यान भटकाने की कोशिश: उन्होंने इसे अपनी धार्मिक यात्रा से लोगों का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया। वर्तमान स्थिति: मेडिकल जांच और पुलिसिया शिकंजाफिलहाल आशुतोष महाराज का प्रयागराज के काल्विन अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने उनके चेहरे के गहरे घावों को देखते हुए CT स्कैन और एक्स-रे कराया है। आशुतोष ने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की है और वे सहारे के बिना चल भी नहीं पा रहे हैं। जीआरपी ने उनकी शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और प्रयागराज सर्किट हाउस से लेकर अस्पताल तक भारी पुलिस बल तैनात है। निष्कर्ष“चलती ट्रेन के सुरक्षित कोच में इस तरह का हमला न केवल रेलवे सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि धर्म और कानून की इस जंग में ‘नाक’ का सवाल अब जान पर बन आया है। पुलिस के लिए अब दूध का दूध और पानी का पानी करना एक बड़ी चुनौती है।”
जंग की 9वीं सुबह: मासूमों की मौत, शहरों में तबाही और दुनिया में विरोध-समर्थन की लहर

नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष का रविवार को नौवां दिन है। इस जंग ने ईरान के कई शहरों को तबाह कर दिया है और अब तक 1,400 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। घरों और मोहल्लों में मलबा सड़कों पर खून और अस्पतालों में घायल लोग इस जंग की भयावहता बयान कर रहे हैं। तेहरान में हेल्थ केयर वर्कर्स ने गांधी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया जहां हाल ही में एयर स्ट्राइक हुई थी। अस्पताल परिसर में ईरान का झंडा लहराते हुए लोग घायल मरीजों और खोए हुए लोगों की याद में खड़े थे। इसी बीच जैनब साहेबी नाम की एक मासूम बच्ची की कब्र को फूलों से सजाया गया और उस पर ईरान का झंडा रखा गया। महिलाएं उसकी कब्र तक उसका शव लेकर गईं हर कदम पर मातम और दर्द नजर आ रहा था। शहरों में फैली तबाही ने लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए। आपातकालीन केंद्रों और राहत शिविरों में लोग पानी भोजन और दवाइयों के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह से खो दी है कई बच्चों की पढ़ाई और भविष्य अस्थायी तौर पर थम गया है। दुनिया भर में इस जंग के खिलाफ और समर्थन में प्रदर्शन हुए। ब्रिटेन में शनिवार को ईरान समर्थक और अमेरिका समर्थक दोनों ही समूहों ने मार्च निकाला। विरोध-समर्थन के ये विरोध मार्च वैश्विक स्तर पर इस जंग के राजनीतिक और सामाजिक असर को दर्शा रहे हैं। साथ ही लेबनान में भी इजराइल और ईरान समर्थक ग्रुप हिज़बुल्लाह के बीच हिंसक टकराव जारी है। शहरों में धमाके हवाई हमले और सड़क संघर्ष ने आम नागरिकों की जिंदगी को पूरी तरह से अस्थिर कर दिया है। इन हालातों के बीच बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों की कहानियां सबसे ज्यादा दिल दहला रही हैं। जैनब साहेबी की तस्वीरें घायल मरीज बिखरी हुई सड़कें और मलबे में फंसे लोग इस जंग की भयंकर तस्वीर पेश कर रहे हैं। वैश्विक समुदाय की नजरें ईरान अमेरिका और इजराइल के राजनीतिक फैसलों पर टिकी हुई हैं। राहत कार्य मानवाधिकार संगठन और स्वास्थ्य कर्मचारी लगातार संघर्षरत नागरिकों की मदद में जुटे हैं लेकिन जंग की भयावहता के बीच राहत की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण है।
संगीत से मानसिक शांति, चिंता और उदासी दूर करें, म्यूजिक थेरेपी बन रही आसान उपाय

नई दिल्ली में आज के तेज और तनावपूर्ण जीवन में मानसिक स्वास्थ्य का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। अनियमित दिनचर्या, बढ़ता काम का प्रेशर और भावनात्मक उतार-चढ़ाव शरीर के साथ ही मन को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे में तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन, उदासी और घबराहट जैसी मानसिक समस्याएं आम हो जाती हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन समस्याओं से निपटने के लिए म्यूजिक थेरेपी (Music Therapy) बेहद कारगर साबित हो रही है। मेंटल हेल्थ के लिए संगीत एक सरल, मुफ्त और असरदार उपाय है। दिनभर की भागदौड़ और काम का तनाव, या भावनात्मक उथल-पुथल के बाद शाम के कुछ मिनटों में अपने पसंदीदा हल्के और शांत संगीत को सुनना दिमाग और मन दोनों को गहरा सुकून देता है। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) भी यही सलाह देता है कि रोजाना कुछ समय खुद के लिए निकालें और पसंदीदा गीत-संगीत के माध्यम से मानसिक तनाव दूर करें। एनएचएम के अनुसार संगीत सुनने या बजाने से कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर कम होता है, जबकि डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे खुशी के हार्मोन बढ़ते हैं। इसका सीधा असर मूड पर पड़ता है, चिंता और डिप्रेशन में कमी आती है। संगीत भावनाओं को व्यक्त करने का एक आसान माध्यम बन जाता है चाहे दुख हो या खुशी, यह उसे बाहर निकालने में मदद करता है। म्यूजिक थेरेपी के फायदे अनेक हैं। मानसिक शांति बढ़ती है, याददाश्त मजबूत होती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है। म्यूजिक थेरेपी न केवल तनाव और चिंता को कम करती है बल्कि मूड को बेहतर और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है। इसका असर भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास पर भी पड़ता है। रोजाना हल्का संगीत सुनने से नकारात्मक विचार कम होते हैं और मन शांत रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूजिक थेरेपी किसी जटिल उपाय की मांग नहीं करती। केवल रोजाना कुछ मिनटों के लिए क्लासिकल, इंस्ट्रुमेंटल, भजन या अपनी पसंद के गाने सुनना पर्याप्त है। अगर तनाव ज्यादा है या मानसिक दबाव गंभीर है तो म्यूजिक थेरेपी विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लेना फायदेमंद हो सकता है। ध्यान रखें कि तेज वॉल्यूम के बजाय कम वॉल्यूम में संगीत सुनें और हेडफोन या ईयरफोन का अधिक इस्तेमाल न करें। आज के दौर में म्यूजिक थेरेपी मानसिक स्वास्थ्य का सरल, प्रभावी और प्राकृतिक उपाय बन चुकी है। नियमित संगीत सुनने से तनाव कम होता है, मूड बेहतर होता है, नींद गहरी आती है और जीवन में खुशियों की वृद्धि होती है। यह साधारण आदत मन को स्थिर और संतुलित बनाए रखने का तरीका है।
जबलपुर ग्वारीघाट पर 200 बच्चों की अनोखी क्लास: दिन में दुकान, शाम को पढ़ाई

जबलपुर । गुरुवार की शाम करीब 6 बजे जब नर्मदा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ नर्मदा आरती देखने जुटी थी उसी समय घाट किनारे छोटे छोटे बच्चे अपनी दुकानों पर बैठे थे। फूल प्रसाद खिलौने और अन्य सामान बेचते ये बच्चे कंधों पर स्कूल बैग टंगे हुए थे। परंतु जैसे ही शाम की आरती खत्म हुई घाट की सीढ़ियों पर बच्चों की आवाज़ें गूंजने लगीं। भारत माता की जय। देखते ही देखते करीब 300 बच्चे घाट की सीढ़ियों पर बैठ गए और वही बच्चे कुछ देर पहले दुकानों पर सामान बेच रहे थे। सामने लगे डिजिटल बोर्ड और छोटे साउंड सिस्टम के माध्यम से पराग भैया बच्चों को पढ़ा रहे थे। माहौल ऐसा था कि घाट पर मौजूद श्रद्धालु भी रुककर इस अनोखी क्लास को देखने लगे। छोटे छोटे बच्चे मैथ्स और विज्ञान के कठिन सवाल हल कर रहे थे। पराग भैया बताते हैं कि यह विचार उनकी मां के निधन के बाद आया। 2016 में मां की अस्थियां नर्मदा में विसर्जित करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब उनका परिवार यही बच्चे हैं। शुरुआत सिर्फ 5 बच्चों से हुई थी लेकिन धीरे धीरे संख्या बढ़कर 200 से अधिक हो गई। शुरुआत में बच्चों को पढ़ाने के लिए 10 20 रुपए देने पड़ते थे लेकिन अब बच्चे स्वयं नियमित पढ़ाई के लिए घाट पर आते हैं। इस प्रयास में कई लोग मदद कर रहे हैं। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने डिजिटल बोर्ड उपलब्ध कराया वहीं 26 जनवरी को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने 60 बच्चों को टैबलेट दिए जिससे डिजिटल पढ़ाई आसान हो गई। इन बच्चों के माता पिता अक्सर नाव चलाते हैं या घाट किनारे दुकाने लगाते हैं। कई बच्चे खुद भी दिनभर 60 70 रुपए तक कमाते हैं। 8वीं कक्षा की परी यादव बताती हैं कि वह दिनभर नारियल प्रसाद बेचती हैं शाम को बैग लेकर पढ़ने आती हैं। पहले पराग भैया उन्हें 20 रुपए देकर पढ़ाते थे अब वह बिना किसी पैसे के नियमित पढ़ाई में शामिल होती हैं। तीसरी कक्षा की खुशी खिलौनों की दुकान संभालती है और चौथी कक्षा की आराधना रिमोट कार चलवाती है। फिर भी दोनों शाम को पढ़ाई के लिए घाट पर जुटती हैं। इसी तरह 10वीं की छात्रा सान्या उईके जिसकी फीस न जमा होने के कारण एडमिट कार्ड नहीं मिला था पराग भैया के प्रयास से परीक्षा दे पाने में सफल हुई। पराग भैया की पराग ट्यूटोरियल कोचिंग 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए चलती है और आईआईटी नीट की तैयारी भी कराई जाती है। उनका लक्ष्य आगे ऐसा स्कूल खोलने का है जहां बड़े छात्र छोटे छात्रों को पढ़ाएं जिससे परिवारिक सैलरी और शिक्षा का लाभ सीधे छात्रों और उनके परिवार तक पहुंचे। यह अनोखी पहल न केवल बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरक है बल्कि यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी उत्साह अनुशासन और समर्पण से शिक्षा को आगे बढ़ाया जा सकता है।
महिला दिवस पर चर्चा: किरण चोपड़ा ने कहा, फिल्मों और मीडिया से महिलाओं पर पड़ रहा गलत प्रभाव

नई दिल्ली। महिला दिवस के मौके पर दिल्ली के Vigyan Bhawan में दो दिवसीय राष्ट्रीय महिला विचारक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में महिलाओं के उत्थान, समाज में उनकी भूमिका और उनके सशक्तिकरण पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन मंच पर सात वक्ताओं ने भाग लिया और अपने अनुभवों को साझा करते हुए महिलाओं की स्थिति पर अपने विचार रखे। इस दिन की थीम थी ‘प्रकृति और संस्कृति’, जिसमें सिनेमा और मीडिया द्वारा महिलाओं की छवि पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पर चर्चा हुई। पैनल में दंगल, एनिमल, कबीर सिंह और मिर्जापुर जैसी फिल्मों का जिक्र किया गया, जिनमें महिलाओं को वस्तु की तरह दिखाया गया और खुले तौर पर नशे को बढ़ावा देने वाले दृश्य शामिल थे। इस विषय पर अपनी बात रखते हुए पत्रकार और विचारक Kiran Chopra ने कहा कि सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म दर्शकों पर बहुत बड़ा प्रभाव डालते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दंगल फिल्म में पहलवानी सीखती लड़की को दिखाया गया, जिससे लोगों को प्रेरणा मिली और बेटियों को आगे बढ़ाने की सोच उत्पन्न हुई। वहीं दूसरी ओर ऐसी फिल्में भी आईं, जिनमें शराब का गिलास सिर पर रखकर डांस किया गया और इसके बाद यह ट्रेंड सोशल मीडिया और घरों तक फैल गया। किरण चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को मीडिया और सिनेमा में वस्तु की तरह दिखाया जाना गलत है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भावनात्मक रूप से संवेदनशील होती हैं और कभी-कभी अपने कदम उठाने में हिचकिचाती हैं, लेकिन उन्हें अपनी शक्तियों का एहसास होना चाहिए। महिला जब अपने भीतर की क्षमता को पहचान लेगी तब समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। सम्मेलन में संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष Sandhya Purecha ने भी महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सौंदर्यशास्त्र और वेद-पुराणों में स्त्री को शक्ति का रूप माना गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि हमारे पुराणों में यह अपराध माना गया है। उन्होंने अतीत की शिक्षाओं से सीख लेकर महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि महिला सशक्तिकरण केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भर बनने के अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस आयोजन ने सिनेमा और मीडिया में महिलाओं की छवि सुधारने की दिशा में एक चेतावनी और सुझाव के रूप में काम किया।
उज्जैन के महाकाल मंदिर में भगवान भोलेनाथ से मांगी टीम इंडिया की टी20 विश्व कप 2026 फाइनल जीत की विशेष कृपा

उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल मुकाबले को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह फाइनल अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार को शाम 7 बजे से खेला जाना है। इस अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा आयोजित की गई और भारतीय टीम की खिताबी जीत का आशीर्वाद मांगा गया। विशेष पूजा में भारतीय टीम के खिलाड़ियों की तस्वीरों के साथ जल और दूध से भगवान का अभिषेक किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी अक्षय पुजारी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि रंगपंचमी के इस पावन अवसर पर भगवान महाकाल की विशेष पूजा की गई और टीम इंडिया की फाइनल जीत की प्रार्थना की गई। भक्तों ने हृदय से यह प्रार्थना की कि टीम इंडिया इतिहास रचते हुए टी20 विश्व कप का खिताब जीत सके। महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज ने बताया कि उन्होंने बाबा महाकाल के चरणों में निवेदन किया है कि वह भारतीय टीम को न्यूजीलैंड को हराकर विश्व चैंपियन बनने का आशीर्वाद दें। भक्तों में इस अवसर पर उत्साह और श्रद्धा का मिश्रण साफ देखा गया। भरुच से आए जयेश ने भी भगवान महादेव से प्रार्थना करते हुए कहा कि टीम इंडिया को जीत मिले और वह अपने देश को गर्वित करे। उज्जैन ही नहीं, राजस्थान के चुरु में भी क्रिकेट प्रेमियों ने भारतीय टीम के विश्व चैंपियन बनने की दुआ की। युवाओं ने कहा कि फाइनल मुकाबले में दोनों टीमें दबाव में होंगी, लेकिन भारतीय टीम को जीत हासिल कर इतिहास बदलना है। टी20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ अब तक भारतीय टीम ने कभी फाइनल में जीत नहीं दर्ज की है और यही चुनौती इसे और रोमांचक बनाती है। क्रिकेट फैंस ने अपनी उम्मीद जताई कि अगर भारतीय टीम टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 200 के आसपास स्कोर बना ले और न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज फिन एलन और टिम साइफर्ट के विकेट शुरुआती ओवरों में निकल जाएं, तो टीम की जीत की संभावना और बढ़ जाएगी। उनके अनुसार टीम इंडिया का संतुलित प्रदर्शन और गेंदबाजी विभाग की तेज़ी टीम के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। टीम इंडिया लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने के करीब है। अगर भारतीय टीम खिताब जीतने में सफल होती है, तो यह लगातार दूसरी बार टी20 विश्व कप जीतने के साथ ही कुल तीन टी20 विश्व कप जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन जाएगी। इस अवसर पर पूरी भारतवर्ष में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है और महाकाल मंदिर में आयोजित पूजा ने इसे और भी खास बना दिया है। भगवान महाकाल के आशीर्वाद के साथ अब भारतीय टीम मैदान में उतरने के लिए तैयार है। फैंस की उम्मीद है कि यह प्रार्थना और भक्ति भारतीय टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी और भारत एक बार फिर टी20 विश्व कप के खिताब को अपने नाम करेगा।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 फाइनल: भारत और न्यूजीलैंड के बीच अहम मुकाबला, ICC अध्यक्ष जय शाह ने दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली। क्रिकेट प्रेमियों के लिए टी20 विश्व कप 2026 का फाइनल अब बस कुछ घंटे दूर है। यह रोमांचक मुकाबला अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में शाम 7 बजे से भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा। आईसीसी के अध्यक्ष Jay Shah ने इस मौके पर दोनों टीमों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह टूर्नामेंट रिकॉर्ड तोड़ने वाला रहा है और इसमें एसोसिएट देशों के शानदार प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं। अब समय है भारत और न्यूजीलैंड को फाइनल के लिए गुड लक कहने का जो भारी दर्शक संख्या के सामने खेला जाएगा और जिसे करोड़ों लोग देखेंगे। टी20 विश्व कप 2026 ने क्रिकेट के इतिहास में कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अकेले भारत में दर्शकों की संख्या 500 मिलियन को पार कर गई है, जो किसी भी टी20 विश्व कप में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। आईसीसी की स्ट्रीमिंग सर्विस ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। भारत और वेस्टइंडीज के सुपर 8 मैच के दौरान स्ट्रीमिंग की उच्चतम संख्या 2024 के फाइनल रिकॉर्ड को पार कर गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी ICC ने अपने वीडियो व्यूज में नया मील का पत्थर पार किया। ICC ने कुल 10 बिलियन वीडियो व्यूज के आंकड़े को पार कर लिया है और 2024 में हासिल किए गए 16 बिलियन व्यूज को पार करने की राह पर है। इसके अलावा भारत और इंग्लैंड के बीच हुए दूसरे सेमीफाइनल ने JioHotstar पर 65.2 मिलियन दर्शकों की पीक डिजिटल कंसंट्रेशन दर्ज की, जो दुनिया में किसी भी लाइव इवेंट के लिए सबसे अधिक है। 2026 के टी20 विश्व कप में मुकाबले काफी रोमांचक और उलटफेर से भरे रहे। ग्रुप स्टेज में 20 टीमों को चार ग्रुप में बांटा गया और हर ग्रुप से टॉप दो टीमें सुपर 8 में पहुंचीं। शुरुआत में ही बड़ी टीमों का परीक्षण हुआ जबकि जिम्बाब्वे, नेपाल और इटली जैसी टीमों ने शानदार प्रदर्शन किया। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान ग्रुप स्टेज से बाहर हो गए और पाकिस्तान को सुपर-8 में जगह नहीं मिली। सुपर-8 स्टेज ने मुकाबले और कड़े कर दिए। आठ क्वालिफाई करने वाली टीमों भारत, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे और पाकिस्तान को दो ग्रुप में बांटा गया। हर ग्रुप से केवल शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचीं। भारत ने सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराया जबकि न्यूजीलैंड ने दक्षिण अफ्रीका को परास्त कर फाइनल की टिकट पक्की की। ऐतिहासिक और रोमांचक मुकाबलों से भरे इस टूर्नामेंट में फाइनल का इंतजार करोड़ों क्रिकेट फैंस के लिए सबसे बड़ा उत्सव साबित होने वाला है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाला यह मुकाबला न सिर्फ टीमों की तकनीक और रणनीति की परीक्षा है बल्कि दर्शकों के लिए भी रोमांचक और यादगार पल लेकर आएगा। जय शाह ने दोनों टीमों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह मुकाबला क्रिकेट इतिहास में यादगार रहेगा।
MP में मार्च में ही अप्रैल जैसी गर्मी: मालवा निमाड़ सबसे गर्म, राजस्थान की रेगिस्तानी हवाओं से बढ़ा तापमान

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मार्च की शुरुआत में ही गर्मी ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई शहरों में तापमान अप्रैल जैसा महसूस होने लगा है। खासतौर पर मालवा-निमाड़ क्षेत्र में दिन के समय लू जैसी तपन महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रदेश के प्रमुख शहरों में रविवार को रंगपंचमी के दिन भी तेज धूप और गर्मी का असर बना रहेगा। राजधानी भोपाल के साथ साथ इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में दिन के समय तेज गर्मी महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली गर्म हवाओं का असर मध्य प्रदेश के मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। हवा की दिशा उत्तर-पूर्व से बदलकर पश्चिम और उत्तर-पश्चिम हो गई है। इसके साथ ही वातावरण में नमी की मात्रा भी कम हो गई है। यही कारण है कि प्रदेश में मार्च के पहले ही पखवाड़े में गर्मी का असर तेजी से बढ़ गया है। शनिवार को प्रदेश के कई शहरों में तापमान 37 से 38 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। सबसे अधिक रतलाम में तापमान 38.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा धार में 38.5 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.6 डिग्री, Sagar में 37.2 डिग्री और Guna में 37 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो उज्जैन में 36.5 डिग्री, इंदौर में 36.4 डिग्री, भोपाल में 35.2 डिग्री, ग्वालियर में 35.7 डिग्री और जबलपुर में 34.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आमतौर पर प्रदेश में तेज गर्मी का असर मार्च के दूसरे पखवाड़े के बाद दिखाई देता है, लेकिन इस बार ट्रेंड बदल गया है और शुरुआती दिनों में ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। तेज गर्मी को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग के भोपाल मौसम केंद्र ने लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप का असर सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे में लोगों को जरूरी होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने, हल्के और ढीले सूती कपड़े पहनने तथा धूप में निकलते समय सिर और चेहरे को ढंकने की सलाह दी है। साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में प्रदेश का अधिकतम तापमान करीब 4 डिग्री तक बढ़ सकता है। ऐसे में संभावना है कि मार्च के पहले ही पखवाड़े में कई शहरों में पारा 40 डिग्री तक पहुंच सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि वास्तविक हीट वेव यानी लू का दौर अप्रैल और मई में देखने को मिल सकता है, जब प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है।
महाकाल को सबसे पहले रंग अर्पित, भस्म आरती से शुरू हुआ रंगपंचमी उत्सव

उज्जैन। रंगपंचमी पर्व पर रविवार तड़के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के साथ पावन उत्सव की शुरुआत हुई। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भगवान महाकालेश्वर को केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके साथ ही भगवान का त्रिपुंड, मुंडमाल और रजत आभूषणों से श्रृंगार किया गया। शिव परिवार को चढ़ाया हर्बल रंगइस अवसर पर भगवान महाकाल, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी को हर्बल रंग अर्पित किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर मंत्रोच्चार के साथ हरिओम का जल भी अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का जलाभिषेक पंचामृत, दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाया गया।भगवान को रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला और सुगंधित पुष्पमाला अर्पित की गई।भोग में फल और मिष्ठान रखा गया। सुरक्षा और प्रतिबंधदो साल पहले धुलेंडी पर गर्भगृह में आग लगने की घटना के बाद इस बार भक्तों और पुजारियों को रंग लाने की अनुमति नहीं दी गई।सुबह दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सख्त सुरक्षा जांच के बाद ही प्रवेश मिला।गर्भगृह, नंदी मंडपम, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और पूरे मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का रंग, गुलाल लाना, उड़ाना या एक-दूसरे को लगाना प्रतिबंधित रहा।विशेष उपकरण से रंग उड़ाने पर भी सख्त रोक लगाई गई। विशेष बातेंइस साल भी रंगपंचमी की शुरुआत भस्म आरती और हर्बल रंग अर्पित करने की परंपरा के अनुसार हुई। मंदिर परिसर में शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और मंदिर प्रबंधन पूरी तरह सक्रिय रहे।
महिला दिवस पर बदली तस्वीर: ग्वालियर चंबल में आत्मरक्षा के लिए हथियार रख रहीं महिलाएं, 600 के करीब महिला लाइसेंस धारक

ग्वालियर । अंतरराष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाग से महिला सशक्तिकरण की एक अलग और मजबूत तस्वीर सामने आ रही है। कभी डकैतों के आतंक से पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब महिलाएं आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार रख रही हैं। ग्वालियर भिंड और मुरैना जिलों में महिलाएं रिवॉल्वर और पिस्टल के लाइसेंस लेकर अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दे रही हैं। Gwalior चंबल क्षेत्र में देश में सबसे अधिक लाइसेंसी हथियार जारी होने की बात कही जाती है। अब इस परंपरा में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार केवल ग्वालियर जिले में ही 30 हजार से अधिक हथियार लाइसेंस जारी हैं जिनमें लगभग 600 लाइसेंस महिलाओं के नाम पर हैं। यह संख्या धीरे धीरे बढ़ती जा रही है जो इस क्षेत्र में बदलती सामाजिक सोच को दर्शाती है। ग्वालियर शहर के धर्मवीर पेट्रोल पंप क्षेत्र में रहने वाली विद्या देवी कौरव भी उन महिलाओं में शामिल हैं जिनके पास लाइसेंसी हथियार है। उन्होंने बताया कि हथियार रखना उनके लिए शौक नहीं बल्कि आत्मरक्षा का माध्यम है। विद्या देवी बताती हैं कि उनकी शादी के समय पूरा क्षेत्र दस्यु प्रभावित था और सन 1970 के दशक में डकैतों ने उनके पति को दो बार पकड़ लिया था। इन घटनाओं के बाद उनका परिवार सब कुछ छोड़कर ग्वालियर आकर बस गया। उन्होंने कहा कि उस समय उनके मन में एक सवाल उठा कि यदि घर में पुरुष न हों तो महिलाएं अपनी सुरक्षा कैसे करेंगी। उनका मानना है कि अक्सर यह कहा जाता है कि हथियार पुरुष ही चला सकते हैं लेकिन जब महिलाओं के पास हथियार होंगे ही नहीं तो वे चलाना कैसे सीखेंगी। इसी सोच के साथ उन्होंने लाइसेंसी हथियार लिया। विद्या देवी का कहना है कि ग्वालियर की धरती वीरता की प्रतीक रही है क्योंकि यहां महान स्वतंत्रता सेनानी Rani Lakshmibai ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। ऐसे में महिलाओं को भी उनसे प्रेरणा लेते हुए आत्मरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। ग्वालियर के गोले का मंदिर क्षेत्र में रहने वाली गुड्डी बैस भी पिछले 20 वर्षों से लाइसेंसी हथियार रखती हैं। उनका कहना है कि लोग अक्सर हथियार को शौक से जोड़कर देखते हैं जबकि असल में यह आत्मरक्षा का साधन है। उन्होंने बताया कि एक समय उनके पति पर जानलेवा हमला हुआ था जिसके बाद उन्हें महसूस हुआ कि जरूरत पड़ने पर खुद की और परिवार की सुरक्षा के लिए हथियार होना जरूरी है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार हथियारों के लाइसेंस जारी करने में सुरक्षा और नियमों का पूरा ध्यान रखा जाता है। एसडीएम सीबी प्रसाद के मुताबिक जिले में लाइसेंसी हथियारों की संख्या भले अधिक हो लेकिन उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासन सख्त निगरानी रखता है। ग्वालियर चंबल क्षेत्र की यह बदलती तस्वीर बताती है कि महिलाएं अब केवल घर परिवार तक सीमित नहीं रहीं। वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा के लिए भी तैयार हैं। यह बदलाव न केवल इस क्षेत्र की सामाजिक सोच में परिवर्तन का संकेत है बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा भी बन रहा है।