सड़क पार करते समय हादसा: सिर में गंभीर चोट, अस्पताल में तोड़ा दम

नई दिल्ली। ग्वालियर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सोमवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। गुब्बारा फाटक के पास सड़क पार कर रहे 62 वर्षीय सुरेंद्र सिंह राठौर को तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया। सिर में गंभीर चोट, अस्पताल में तोड़ा दमहादसे में बुजुर्ग के सिर में गंभीर चोट आई। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान देर रात उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार चोट काफी गंभीर थी, जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। परिजनों का आरोप: ऑटो ने मारी टक्करमृतक के भतीजे विक्रांत ने आरोप लगाया कि टक्कर एक ऑटो ने मारी थी। उनका कहना है कि हादसे के बाद बुजुर्ग ऑटो में फंस गए और कुछ दूरी तक घिसटते रहे, लेकिन चालक वाहन लेकर मौके से भाग गया। CCTV में कैद हुई घटनाघटनास्थल के पास लगी एक दुकान के CCTV कैमरे में हादसा रिकॉर्ड हुआ है। फुटेज में वाहन टक्कर मारने के बाद बुजुर्ग को घसीटते हुए नजर आ रहा है। हालांकि, पुलिस को जो फुटेज मिला है, वह दूरी के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आरोपी वाहन की तलाश जारीथाना प्रभारी के अनुसार आसपास के अन्य CCTV कैमरों की भी जांच की जा रही है, ताकि आरोपी वाहन की पहचान की जा सके। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और जल्द ही आरोपी तक पहुंचने का दावा किया है। लोगों ने दिखाई मदद, फिर भी नहीं बच सकी जानहादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोग मदद के लिए दौड़े और घायल को अस्पताल पहुंचाया। लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनकी जान नहीं बचाई जा सकी, जिससे इलाके में शोक का माहौल है।
इनकम टैक्स सिस्टम में सुधार: ‘फॉर्म 141’ से आसान होगी TDS प्रक्रिया

नई दिल्ली।आयकर विभाग ने टैक्स प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए ‘फॉर्म 141’ शुरू किया है। यह एक कंसोलिडेटेड चालान-कम-स्टेटमेंट है, जो अब तक इस्तेमाल हो रहे चार अलग-अलग TDS फॉर्म की जगह लेगा। इससे करदाताओं को अलग-अलग फॉर्म भरने की झंझट से राहत मिलेगी। इन चार फॉर्म की जगह लेगा नया फॉर्मफॉर्म 141 में निम्न चार TDS फॉर्म को एक साथ शामिल किया गया है: फॉर्म 26QB – संपत्ति खरीद पर TDS फॉर्म 26QC – किराए पर TDS फॉर्म 26QD – कॉन्ट्रैक्ट/प्रोफेशनल भुगतान पर TDS फॉर्म 26QE – वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर TDS अब इन सभी के लिए अलग-अलग फाइलिंग की जरूरत नहीं होगी। किन मामलों में होगा इस्तेमालनए नियमों के अनुसार फॉर्म 141 का उपयोग इन स्थितियों में किया जा सकेगा: ₹50,000 प्रति माह तक के किराए पर TDS ₹50 लाख या उससे अधिक की संपत्ति खरीद पर TDS ऐसे व्यक्ति/HUF द्वारा ₹50 लाख से अधिक के प्रोफेशनल, कमीशन या कॉन्ट्रैक्ट भुगतान (जो टैक्स ऑडिट के अंतर्गत नहीं आते) क्रिप्टोकरेंसी या NFT जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर भुगतान फॉर्म भरने के लिए जरूरी जानकारीफॉर्म 141 भरते समय करदाताओं को निम्न जानकारी देनी होगी: कटौतीकर्ता (payer) और प्राप्तकर्ता (payee) का PAN पता, मोबाइल नंबर और ईमेल लेन-देन का प्रकार और भुगतान का तरीका यह फॉर्म आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘e-Pay Tax’ सेक्शन के जरिए भरा जा सकता है। एक फॉर्म में कई विक्रेताओं की एंट्रीविशेषज्ञों के अनुसार इस नए सिस्टम में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब फॉर्म की संख्या विक्रेताओं (sellers) के आधार पर नहीं बल्कि खरीदारों (buyers) के आधार पर तय होगी। यानी एक ही फॉर्म में कई विक्रेताओं की जानकारी दर्ज की जा सकती है, जिससे प्रक्रिया और आसान हो जाएगी। डिजिटल टैक्स सिस्टम को मिलेगा बढ़ावासरकार का यह कदम डिजिटल टैक्स फाइलिंग को और मजबूत करेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी कम होगी और अनुपालन (compliance) आसान बनेगा।
बिहार में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर तेज हुआ मंथन, सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नामों पर केंद्रित राजनीतिक चर्चा

नई दिल्ली : बिहार में एनडीए की बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल तेज, नेतृत्व चयन पर भाजपा और जदयू में गहन मंथन, सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय के नाम चर्चा में बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले भारी बहुमत के बाद राज्य की राजनीति में सरकार गठन और नेतृत्व चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। 202 सीटों के मजबूत समर्थन के साथ एनडीए अब सत्ता गठन की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। इस स्थिति ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों और संभावनाओं को और अधिक बढ़ा दिया है। गठबंधन के भीतर भाजपा और जदयू दोनों ही दल अपने अपने स्तर पर नेतृत्व संतुलन को लेकर विचार विमर्श कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ऐसे चेहरे की तलाश की जा रही है जो संगठनात्मक मजबूती के साथ प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक स्वीकार्यता भी रखता हो। इसी बीच सम्राट चौधरी का नाम प्रमुख दावेदारों में तेजी से उभरकर सामने आया है, जिन्हें संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय और प्रभावशाली नेता माना जा रहा है। इसके साथ ही केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। संगठन से लंबे समय तक जुड़े रहने और पार्टी की वैचारिक धारा में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें भी एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका अनुभव और संगठनात्मक पकड़ नेतृत्व चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जदयू और भाजपा के बीच सत्ता संतुलन और भविष्य की रणनीति को लेकर आंतरिक स्तर पर लगातार संवाद जारी है। नेतृत्व को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और गठबंधन के शीर्ष स्तर पर होने वाली बैठक के बाद ही तय किया जाएगा। इस प्रक्रिया ने बिहार की राजनीति में नई रणनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जहां हर संभावित निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल मुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीतिक दिशा और विकास नीति को भी प्रभावित करेगा। ऐसे में नेतृत्व चयन को लेकर हर कदम बेहद सोच समझकर उठाया जा रहा है ताकि गठबंधन की स्थिरता और जन समर्थन दोनों को बनाए रखा जा सके।
Android यूजर्स के लिए खुशखबरी, मिलेगा iPhone जैसा फीचर, गूगल जल्द करेगा लॉन्च

नई दिल्ली। Android स्मार्टफोन यूजर्स को जल्द ही iPhone जैसा आसान और तेज फाइल शेयरिंग अनुभव मिलने वाला है। Google एक नए फीचर ‘Tap to Share’ पर काम कर रहा है, जिससे सिर्फ दो फोन को पास लाकर तुरंत डेटा शेयर किया जा सकेगा। यह फीचर काफी हद तक NameDrop जैसा बताया जा रहा है। कैसे काम करेगा नया फीचर? Tap to Share का इस्तेमाल बेहद सरल होगा। यूजर्स को अपने दोनों Android फोन अनलॉक करके एक-दूसरे के करीब लाना होगा जैसे स्क्रीन-टू-स्क्रीन या किनारे मिलाकर। कनेक्शन बनते ही स्क्रीन पर एनिमेशन दिखाई देगा, जो डेटा ट्रांसफर शुरू होने का संकेत देगा। अगर पहली बार में कनेक्शन नहीं बनता, तो यूजर्स फोन को अलग तरीके से जैसे बैक-टू-बैक रखकर दोबारा ट्राई कर सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अलग-अलग कंपनियों के फोन में NFC सेंसर की पोजिशन अलग होती है। क्या-क्या कर सकेंगे शेयर? इस फीचर के जरिए सिर्फ फोटो और वीडियो ही नहीं, बल्कि कॉन्टैक्ट, लिंक, लोकेशन और अन्य डेटा भी आसानी से शेयर किया जा सकेगा। यानी यह एक ऑल-इन-वन फाइल शेयरिंग टूल की तरह काम करेगा। शुरुआत में कनेक्शन NFC के जरिए होगा, लेकिन बड़ी फाइल्स ट्रांसफर करने के लिए यह ऑटोमैटिकली Wi-Fi या Bluetooth जैसे तेज माध्यमों का इस्तेमाल करेगा। मौजूदा सिस्टम से होगा इंटीग्रेशन Tap to Share, Android के मौजूदा शेयरिंग सिस्टम के साथ मिलकर काम करेगा। खासतौर पर इसे Quick Share के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे यूजर्स को और स्मूथ अनुभव मिलेगा। प्राइवेसी पर भी फोकस इस फीचर में यूजर्स को पूरा कंट्रोल मिलेगा कि वे कौन-सी जानकारी शेयर करना चाहते हैं जैसे फोन नंबर, ईमेल या प्रोफाइल फोटो। इससे डेटा सुरक्षा बेहतर होगी। कब तक होगा लॉन्च? हालांकि Google ने अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक यह फीचर Android 17 के साथ इस साल लॉन्च हो सकता है। शुरुआती टेस्टिंग Samsung के डिवाइसेज पर देखी गई है, जिससे संकेत मिलता है कि इसका रोलआउट जल्द शुरू हो सकता है।
खनन क्षेत्र को राहत: लो-ग्रेड आयरन ओर के इस्तेमाल पर नए नियम लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कम गुणवत्ता (लो-ग्रेड) वाले लौह अयस्क के बेहतर उपयोग और बर्बादी रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। खान मंत्रालय ने इसके लिए प्राइसिंग नियमों में बदलाव करते हुए नया ढांचा तैयार किया है, जिससे ऐसे अयस्क का आर्थिक रूप से उपयोग संभव हो सके। नई प्राइसिंग व्यवस्था से स्पष्टतानए नियमों के तहत 45% से कम आयरन (Fe) कंटेंट वाले अयस्क जैसे बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (BHQ) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (BHJ) के लिए अलग से मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है। 35% से 45% Fe कंटेंट वाले अयस्क की औसत बिक्री कीमत (ASP) अब 45-51% ग्रेड के अयस्क की ASP का 75% होगी। 35% से कम Fe कंटेंट वाले अयस्क की ASP 50% तय की गई है। पहले क्या थी समस्या?पहले लो-ग्रेड अयस्क के लिए अलग प्राइसिंग सिस्टम नहीं था। रॉयल्टी और अन्य शुल्क उच्च ग्रेड (45-51%) अयस्क के आधार पर तय होते थे, जिससे लो-ग्रेड अयस्क को प्रोसेस करना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो जाता था। यही वजह थी कि बड़ी मात्रा में यह संसाधन बेकार चला जाता था। नई तकनीक से बढ़ेगा उपयोगसरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीकों की मदद से BHQ और BHJ जैसे लो-ग्रेड अयस्क को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाले स्टील निर्माण योग्य मटेरियल में बदला जा सकता है। नई प्राइसिंग नीति इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करेगी। रॉयल्टी नियमों में भी बदलावनए नियमों के तहत यदि कच्चे अयस्क (ROM) को प्रोसेस करने से उसकी कीमत घटती है, तो रॉयल्टी का निर्धारण प्रोसेसिंग से पहले की स्थिति (प्रारंभिक स्क्रीनिंग) के आधार पर किया जाएगा। इससे कीमत को कृत्रिम रूप से कम दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। स्टील इंडस्ट्री और संसाधन संरक्षण को फायदासरकार के मुताबिक इस कदम से: हाई-ग्रेड अयस्क पर निर्भरता कम होगी स्टील उद्योग को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति मिलेगी खनिज संसाधनों का संरक्षण होगा बेकार माने जाने वाले अयस्क का भी उपयोग बढ़ेगा
मार्च में महंगाई बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंची, वैश्विक तनाव और तेल बाजार की अस्थिरता से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली:देश में खुदरा महंगाई दर मार्च 2026 में बढ़कर 3.40 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिससे आम उपभोक्ताओं के बजट पर हल्का लेकिन स्पष्ट दबाव देखने को मिला है। यह आंकड़ा फरवरी के 3.21 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा अधिक है, लेकिन अभी भी यह स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर जारी भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने भारत की कीमतों पर असर डाला है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन में आई बाधाओं का असर ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बदलाव के कारण परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ी है, जिसका प्रभाव धीरे धीरे अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ रहा है। इसका सीधा असर घरेलू खर्चों पर पड़ रहा है और उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर दबाव बन रहा है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी मिला जुला रुझान देखा गया है। कुछ सब्जियों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुछ खाद्य पदार्थों जैसे प्याज, आलू और दालों के दामों में गिरावट भी देखने को मिली है। इसके बावजूद खाद्य महंगाई दर मार्च में बढ़कर 3.87 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो फरवरी की तुलना में अधिक है। ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई वृद्धि भी महंगाई के आंकड़ों को ऊपर ले जाने में एक महत्वपूर्ण कारण रही है। एलपीजी सिलेंडर और अन्य ईंधन उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। ऊर्जा लागत में वृद्धि का असर सीधे तौर पर परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे अन्य वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होती हैं। सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी ने भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को प्रभावित किया है। निवेश और बाजार में अनिश्चितता के कारण इनकी मांग बढ़ी है, जिससे कीमतों में रिकॉर्ड स्तर की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि मौजूदा महंगाई दर अभी भी केंद्रीय बैंक के मध्यम लक्ष्य चार प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर स्थिति में बनी हुई है, लेकिन बाहरी झटकों का असर लगातार महसूस किया जा रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से सप्लाई साइड दबाव का परिणाम है, जिसमें वैश्विक तनाव, तेल बाजार की अस्थिरता और मौसम आधारित प्रभाव शामिल हैं। नीति निर्धारक फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में महंगाई की दिशा काफी हद तक मानसून, वैश्विक बाजार और भू राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ता है तो इसका असर घरेलू कीमतों पर और अधिक स्पष्ट हो सकता है।
गर्मी में गन्ने का रस है अमृत समान, शरीर को रखे ठंडा और मजबूत

नई दिल्ली। मौसम में बदलाव हो रहा है और गर्मी अब धीरे-धीरे बढ़ रही है गर्मी जैसे ही बढ़ने लगती है। कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होने लगती है। आपकी इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ जाती है सही खान-पान गर्मी में करना बहुत जरूरी होता है वरना कई प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गर्मी में गाने का रस पीना बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह आपको सेहतमंद रखने में मदद करता है चलिए जानते हैं कैसे। गन्ने के रस के फायदेगर्मियों के मौसम में जब तेज धूप और गर्मी से शरीर थकान महसूस करता है, तब गन्ने का रस सबसे अच्छा प्राकृतिक पेय साबित होता है।औषधीय गुणों से भरपूर ये ठंडा रस शरीर को न केवल तुरंत एनर्जी देता है, बल्कि सेहत का भी ध्यान रखता है।गन्ने का रस शरीर को तरोताजा करने के साथ-साथ आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है, पाचन तंत्र को सुधारता है और पीलिया जैसी बीमारी में राहत पहुंचाता है। कई बीमारियों के लिए है रामबाणगन्ने के रस से सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि गुड़, शीरा जैसे कई उपयोगी उत्पाद भी बनते हैं।आयुर्वेद में गन्ने के रस को मूत्रवर्धक, शीतलक, रेचक और टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।यह पेशाब में जलन, पेशाब न आने की समस्या और रक्तस्राव में भी राहत देता है। यूनानी चिकित्सा में इसे पीलिया के मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है। इस लिए आपको गर्मी में गन्ने का रस जरूर पीना चाहिए।गर्मियों में गन्ने का रस पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और गर्मी से होने वाली थकान दूर होती है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स तनाव कम करने में मददगार है
सैलरी और शोषण के आरोपों से गरमाया पीथमपुर 500 मजदूरों ने कंपनी के खिलाफ खोला मोर्चा

पीथमपुर । मध्यप्रदेश के धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में श्रमिक असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में दिल्ली एनसीआर में वेतन वृद्धि और न्यूनतम मजदूरी को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अब इसका असर मध्यप्रदेश के औद्योगिक इलाकों में भी दिखने लगा है। पीथमपुर स्थित सेक्टर 3 में मदरसन कंपनी की यूनिट 1 के बाहर लगभग 500 महिला और पुरुष कर्मचारियों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी है जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में हलचल मच गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन लंबे समय से आर्थिक शोषण कर रहा है और काम के निर्धारित घंटे लागू नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि उनसे आठ घंटे से अधिक काम कराया जाता है लेकिन इसके बदले में उचित वेतन नहीं दिया जाता जिससे बढ़ती महंगाई के दौर में जीवनयापन मुश्किल होता जा रहा है। हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि विरोध प्रदर्शन में शामिल कुछ कर्मचारियों को हाल ही में नौकरी से निकाल दिया गया है। इस कार्रवाई को कर्मचारियों ने दबाव बनाने और डराने की रणनीति बताया है। इससे अन्य कर्मचारियों में भी आक्रोश बढ़ गया है और वे सामूहिक रूप से विरोध में उतर आए हैं। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में शामिल रश्मि नामक कर्मचारी ने बताया कि कंपनी में न तो काम के घंटे तय हैं और न ही महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को छुट्टी नहीं दी जाती और किसी भी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी सुविधा या डॉक्टर की व्यवस्था भी कंपनी परिसर में मौजूद नहीं है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में निकाले गए साथियों की तत्काल बहाली वेतन में वृद्धि और काम के घंटे तय करना शामिल है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस आंदोलन का असर अब अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी देखने को मिल रहा है जहां कर्मचारी एकजुट होकर समर्थन जता रहे हैं। कंपनी गेट पर लगातार नारेबाजी और प्रदर्शन जारी है जिससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। स्थिति को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासनिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं ताकि मामला शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सके। यह घटना एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक अधिकारों और कार्यस्थल की स्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू

नई दिल्ली। नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन और तनाव के बीच Yogi Adityanath सरकार ने मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 1000 रुपये से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगा। नए वेतन दर क्या हैं?सरकार द्वारा तय किए गए नए वेतन के अनुसार Gautam Buddh Nagar और Ghaziabad में अकुशल मजदूरी ₹11,313 से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। अर्धकुशल मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल मजदूरी 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये कर दी गई है। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी 13,006, रुपये अर्धकुशल 14,306 रुपये और कुशल रुपये 16,025 तय की गई है। अन्य जिलों में अकुशल मजदूरी रुपये 12,356, अर्धकुशल 13,591 रुपये और कुशल रुपये 15,224 निर्धारित की गई है। मजदूरों को मिली अंतरिम राहतसरकार का कहना है कि यह फैसला श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाकर लिया गया है और इससे मजदूरों को फिलहाल अंतरिम राहत मिलेगी। आगे वेज बोर्ड के माध्यम से मजदूरी की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम वेतन ₹20,000 किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। सरकार ने बताया कि केंद्र स्तर पर नए लेबर कोड के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम ‘फ्लोर वेज’ तय करने की प्रक्रिया जारी है। 20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबरें गलतमुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। साथ ही नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे श्रमिकों को समय पर वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा के सभी अधिकार सुनिश्चित करें, साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।
दिल्ली से देहरादून अब मात्र ढाई घंटे में, आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुभारंभ से बदली उत्तर भारत की सड़क यात्रा की तस्वीर

नई दिल्ली:देश के सड़क नेटवर्क को नई दिशा देते हुए दिल्ली और देहरादून को जोड़ने वाले आधुनिक एक्सप्रेसवे का शुभारंभ किया गया है। लगभग 210 किलोमीटर लंबी यह ग्रीनफील्ड परियोजना राजधानी दिल्ली को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जोड़ने वाली सबसे तेज और आधुनिक सड़क सुविधाओं में से एक बन गई है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच का सफर, जो पहले छह से सात घंटे में पूरा होता था, अब घटकर लगभग ढाई से तीन घंटे का रह गया है। इससे यात्रियों को समय की बड़ी बचत के साथ-साथ आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्याधुनिक एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जो राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है। लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीव जैसे हाथी, बाघ और तेंदुए बिना किसी बाधा के सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें। यह संरचना आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है और इसे देश की सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का प्रभाव केवल इन दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आर्थिक और पर्यटन विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। इस मार्ग से हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी। इससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को जोड़ता है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो गई है। सुरक्षा और तकनीक के स्तर पर इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और यातायात नियंत्रण के लिए स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। रात के समय बेहतर दृश्यता के लिए सौर ऊर्जा आधारित लाइटिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। इसके अलावा तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी के लिए विशेष तकनीक लागू की गई है ताकि सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस परियोजना को ग्रीन कॉरिडोर मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से दूर डिजाइन किया गया है ताकि यात्रा निर्बाध और तेज बनी रहे। लगभग बारह हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए मार्ग पर आधुनिक रेस्ट एरिया, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग पॉइंट और हरियाली से भरपूर विश्राम स्थल बनाए गए हैं। यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के विकास और पर्यटन को भी नई दिशा देगा।