अवैध खनन बना मौत का कारण पत्थर लदे ट्रैक्टर ने ली युवक की जान गांव में दहशत

मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र के अंतर्गत हाटा चौकी के ग्राम लोढ़ी में अवैध उत्खनन का काला कारोबार एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। लगातार जारी अवैध खनन गतिविधियों के बीच हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को दहशत और आक्रोश में डाल दिया है। पत्थर से लदे तेज रफ्तार ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। मृतक की पहचान राजभान साकेत के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय ट्रैक्टर में भारी मात्रा में पत्थर लोड था और वह तेज गति से गुजर रहा था। इसी दौरान युवक ट्रैक्टर के पहिए की चपेट में आ गया और गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही हाटा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। बाद में थाना प्रभारी अनिल काकड़े भी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। यह घटना लोढ़ी गांव में ट्रांसफार्मर प्लांट के पास पप्पू सिंह की मड़ई के सामने हुई बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह ट्रैक्टर राजेंद्र बहादुर सिंह उर्फ पप्पू से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध पत्थर खनन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। लगातार शिकायतों और रिपोर्ट के बावजूद इस पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज आवाजाही और बिना नियमों के खनन कार्य से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। घटना के बाद मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस पर भी दबाव बनाए जाने की बात कही है जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि अवैध खनन न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि स्थानीय लोगों की जान के लिए भी गंभीर जोखिम बन चुका है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे हादसे भविष्य में और बढ़ सकते हैं।
वरुण धवन की फिल्म में रिश्तों और हास्य का अनोखा मिश्रण, मृणाल और पूजा हेगड़े ने बढ़ाया आकर्षण

नई दिल्ली:वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े की मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्म है जवानी तो इश्क होना है का पहला लुक सामने आते ही मनोरंजन जगत में चर्चा तेज हो गई है। इस फिल्म में पारिवारिक कॉमेडी और उलझे रिश्तों की कहानी को आधुनिक अंदाज में पेश करने की कोशिश की गई है। पहले लुक से यह संकेत मिलता है कि फिल्म का फोकस हल्के-फुल्के हास्य, गलतफहमियों और रिश्तों के बीच पैदा होने वाली स्थितियों पर आधारित है, जो दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ मनोरंजन देने का दावा करती है। फिल्म में वरुण धवन का किरदार दो अलग-अलग परिस्थितियों में दिखाई देता है, जहां उनका जीवन दो अलग दिशाओं में चलता हुआ नजर आता है। मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े के किरदार कहानी में अहम भूमिका निभाते हैं और दोनों के साथ जुड़ी स्थितियां फिल्म में कॉमेडी और ड्रामा का मिश्रण पैदा करती हैं। पहले लुक में कहानी का जो स्वरूप सामने आया है, उससे यह साफ है कि फिल्म पारिवारिक उलझनों और रिश्तों की जटिलताओं को हास्य के माध्यम से पेश करेगी। फिल्म के एक हिस्से में आधुनिक तकनीक के उपयोग से बनाए गए बच्चों के दृश्य भी दिखाए गए हैं, जो कहानी को एक नया और अलग अंदाज देने की कोशिश करते हैं। यह तत्व फिल्म को पारंपरिक कॉमेडी से थोड़ा अलग और तकनीक से जुड़ा हुआ बनाने का प्रयास माना जा रहा है। हालांकि इस प्रस्तुति को लेकर दर्शकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, क्योंकि कुछ लोग इसे नया प्रयोग मान रहे हैं तो कुछ इसे पुरानी शैली की पुनरावृत्ति कह रहे हैं। इस फिल्म का निर्देशन डेविड धवन कर रहे हैं, जो लंबे समय से पारिवारिक कॉमेडी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। उनके निर्देशन की शैली हमेशा से हल्के हास्य, पारिवारिक स्थितियों और मनोरंजक घटनाओं पर आधारित रही है। इस वजह से इस नई फिल्म से भी दर्शकों को उसी तरह की उम्मीदें हैं, लेकिन बदलते समय में दर्शकों की पसंद और अपेक्षाएं काफी बदल चुकी हैं, जिससे फिल्म के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी हो गई है। वरुण धवन को लेकर सबसे बड़ी चर्चा यह है कि क्या वह अपने किरदार के जरिए दर्शकों पर वही प्रभाव छोड़ पाएंगे जो कभी पुरानी कॉमेडी फिल्मों के दिग्गज कलाकारों ने छोड़ा था। सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच फिल्म की तुलना पहले की सफल कॉमेडी फिल्मों से की जा रही है, जिससे इसकी उम्मीदें और दबाव दोनों बढ़ गए हैं। कुल मिलाकर यह फिल्म एक पारिवारिक मनोरंजन का वादा करती है, जिसमें हास्य, भावनाएं और रिश्तों की उलझनें एक साथ देखने को मिल सकती हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और क्या यह नई पीढ़ी के लिए भी उसी तरह का मनोरंजन पेश कर पाती है जैसा पहले के दौर की कॉमेडी फिल्मों में देखने को मिलता था।
MP ILLEGAL MINING : सुप्रीम कोर्ट की सख्ती! मुरैना में रेत माफिया ने पुल की नींव खोद डाली, वनरक्षक की हत्या पर MP सरकार को फटकार

HIGHLGHTS: • सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को अवैध खनन रोकने में फेल बताया • चंबल नदी पुल की नींव तक 15 फीट खुदाई, संरचना खतरे में • वनरक्षक हरकेश गुर्जर की ट्रेक्टर से कुचलकर हत्या • कोर्ट बोला- या तो सरकार नाकाम या अधिकारियों की मिलीभगत • 17 अप्रैल को फैसला, जांच रिपोर्ट मांगी\ MP ILLEGAL MINING : ग्वालियर। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार पर अवैध खनन रोकने में पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मुरैना के मामले में राज्य सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। दवाइयों की खोज में AI का बढ़ता दखल, एक्सपर्ट्स ने बताया गेमचेंजर पुल की नींव तक खुदाई का खतरा मुरैना के राजघाट क्षेत्र में स्थित नेशनल हाईवे-44 चंबल पुल के पिलरों की नींव तक रेत माफिया द्वारा 15 फीट गहरी खुदाई की गई है। कोर्ट ने पूछा यदि पुल गिर गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी। विवाद के बीच AIFF ने दी सफाई, खेल भावना बनाए रखने की अपील वनरक्षक की क्रूर हत्या 8 अप्रैल को वन आरक्षक हरकेश गुर्जर को रेत माफिया ने ट्रेक्टर से कुचलकर मार डाला। कोर्ट ने इस हत्याकांड को बेहद गंभीर बताया और पूछा कि प्रशासन को अवैध खनन दिखाई नहीं देता क्या? खनन क्षेत्र को राहत: लो-ग्रेड आयरन ओर के इस्तेमाल पर नए नियम लागू मिलीभगत का आशंका जताया कोर्ट ने साफ कहा कि या तो सरकार अवैध खनन रोकने में असमर्थ है या फिर अधिकारियों की मिलीभगत है। यह सब राज्य की निगरानी में हो रहा है, जो चिंताजनक है। पेट्रोल-डीजल से राहत: भारत में लॉन्च होंगी 6 नई इलेक्ट्रिक कारें, 500KM+ रेंज अब 17 अप्रैल को फैसला सुप्रीम कोर्ट ने वनरक्षक हत्या की जांच रिपोर्ट, CCTV फुटेज और अवैध खनन रोकने के प्रयासों की जानकारी मांगी है। सुनवाई पूरी कर फैसला 17 अप्रैल को सुरक्षित रख लिया गया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार बताया है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को लेकर उत्तराखंड में उत्साह, नेताओं ने बताया राज्य के विकास का बड़ा मोड़

नई दिल्ली:दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से पहले उत्तराखंड की राजनीति में इस परियोजना को लेकर उत्साह और सराहना का माहौल देखने को मिल रहा है। राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं ने इसे देवभूमि के विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। नेताओं का कहना है कि इस परियोजना से न केवल यात्रा समय में भारी कमी आएगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के विकास को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रति केंद्र सरकार का विशेष ध्यान लगातार देखने को मिल रहा है और इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनके अनुसार उत्तराखंड की जनता विकास कार्यों से प्रभावित होकर लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही है और सरकार के प्रति विश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना केवल एक सड़क नहीं बल्कि विकास की एक बड़ी कड़ी है, जो उत्तराखंड को देश की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जोड़ती है। लगभग बारह हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह कॉरिडोर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण है, जो पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों को साथ लेकर चलता है। इससे यात्रा समय में भारी कमी आने के साथ क्षेत्रीय संपर्क भी मजबूत होगा। भाजपा सांसद नरेश बंसल ने इस परियोजना को उत्तराखंड के लिए गेमचेंजर बताते हुए कहा कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन और व्यापार में बढ़ोतरी से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उनके अनुसार यह एक्सप्रेसवे आधुनिक तकनीक और योजना का बेहतरीन उदाहरण है, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह ग्रीन कॉरिडोर एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है। उन्होंने कहा कि पहले जहां देहरादून से दिल्ली पहुंचने में कई घंटे लगते थे, वहीं अब यह यात्रा काफी कम समय में पूरी हो सकेगी। इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। विधायक बृजभूषण गैरोला ने भी इस परियोजना को राज्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह एक्सप्रेसवे लोगों की जीवनशैली को आसान बनाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं, जिनका लाभ सीधे जनता तक पहुंच रहा है। विधायक बिशन सिंह चुफाल ने कहा कि समय के साथ यात्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है और यह एक्सप्रेसवे उस बदलाव को और आगे ले जाएगा। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी पहले की तुलना में बेहद कम महसूस होगी, जिससे लोगों को समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।
GWALIOR HOSPITAL NEGLIGENCE : मुरैना जिला अस्पताल में ‘अंधेरगर्दी’; मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हो रहा घायलों का इलाज, सिस्टम की खुली पोल

HIGHLIGHTS: • 600 बेड वाले जिला अस्पताल में अचानक बिजली चली गई • इमरजेंसी वार्ड में घुप अंधेरा, मरीजों का तुरंत इलाज जारी • परिजनों ने मोबाइल टॉर्च जलाकर डॉक्टरों की मदद की • वीडियो वायरल, मोबाइल की रोशनी में चल रहा था ऑपरेशन • बिजली व्यवस्था पर उठे सवाल, अधिकारियों में हड़कंप GWALIOR HOSPITAL NEGLIGENCE : मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को शर्मसार करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। जहां जिला मुख्यालय स्थित कु. जाहर सिंह शासकीय अस्पताल, जो कहने को तो 600 बिस्तरों का बड़ा अस्पताल है, वहां बिजली गुल होने के बाद घोर लापरवाही का नजारा देखने को मिला। बता दें कि इमरजेंसी वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों का इलाज बिजली न होने के कारण मोबाइल की टॉर्च जलाकर करना पड़ा। पेट्रोल-डीजल से राहत: भारत में लॉन्च होंगी 6 नई इलेक्ट्रिक कारें, 500KM+ रेंज इमरजेंसी वार्ड में पसरा अंधेरा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई जब बिजली कट गई। इस दौरान एक्सीडेंट में घायल हुए कई मरीज अस्पताल पहुंचे थे, जिनकी हालत नाजुक थी। लेकिन हैरत की बात यह रही कि करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल में पावर बैकअप (जेनरेटर) की कोई व्यवस्था काम नहीं कर रही थी। खनन क्षेत्र को राहत: लो-ग्रेड आयरन ओर के इस्तेमाल पर नए नियम लागू डॉक्टर बेबस, परिजनों ने थामी टॉर्च सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मोबाइल की रोशनी में मरीजों के घावों पर टांके लगा रहे हैं और मरहम-पट्टी कर रहे हैं। इस दौरान मरीजों के परिजन खुद अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर डॉक्टरों की मदद करते नजर आए। घायलों के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में घंटों बिजली गुल रहती है और वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है। 600 बेड के अस्पताल की बदहाली मुरैना का यह जिला अस्पताल संभाग के बड़े अस्पतालों में गिना जाता है, जहाँ रोजाना सैकड़ों मरीज आते हैं। 600 बेड की क्षमता होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति बनी हो, लेकिन फिर भी प्रशासन इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
पेट्रोल-डीजल से राहत: भारत में लॉन्च होंगी 6 नई इलेक्ट्रिक कारें, 500KM+ रेंज

नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का चलन तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बाजार और भी बड़ा होने वाला है। Tata Motors, Maruti Suzuki, Toyota और Kia जैसी बड़ी कंपनियां अगले दो सालों में नई इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च करने की तैयारी में हैं। इन कारों की खास बात यह होगी कि इनमें से कई मॉडल 500 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज देने में सक्षम होंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के पीछे सरकार की नीतियां, चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार और बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतें अहम कारण हैं। ऐसे में अब कंपनियां बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक नई EVs लॉन्च करने पर जोर दे रही हैं। Toyota eBella और Kia Syros EVइस सूची में सबसे पहले नाम Toyota eBella का आता है, जो 543 किलोमीटर तक की रेंज देने का दावा करती है और इसे प्रीमियम डिजाइन के साथ पेश किया जाएगा। वहीं Kia Syros EV को शहर के उपयोग के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है, जिसकी रेंज करीब 369 किलोमीटर हो सकती है। Tata Sierra EV और VinFast VF3इसी कड़ी में Tata Sierra EV की भी वापसी हो रही है, जो 90 के दशक की मशहूर SUV का इलेक्ट्रिक अवतार होगी। यह कार 2026 में लॉन्च हो सकती है और इसमें दमदार परफॉर्मेंस देखने को मिलेगी। इसके अलावा वियतनाम की कंपनी VinFast भी भारत में अपनी VinFast VF3 के साथ एंट्री करने जा रही है, जो खासतौर पर शहरों के लिए डिजाइन की गई छोटी इलेक्ट्रिक कार होगी। Tata Safari EV और Maruti YMC MPVटाटा मोटर्स अपनी लोकप्रिय SUV Tata Safari EV को भी इलेक्ट्रिक अवतार में लाने की तैयारी में है, जिसमें बड़ी बैटरी और नए फीचर्स देखने को मिलेंगे। वहीं Maruti Suzuki एक नई इलेक्ट्रिक MPV Maruti YMC MPV पर काम कर रही है, जो बड़े परिवारों के लिए किफायती विकल्प बन सकती है। आने वाले समय में भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की भरमार होने वाली है। लंबी रेंज, कम खर्च और बेहतर तकनीक के साथ ये गाड़ियां पेट्रोल-डीजल वाहनों को कड़ी टक्कर देने के लिए तैयार हैं।
विवाद के बीच AIFF ने दी सफाई, खेल भावना बनाए रखने की अपील

नई दिल्ली। भारतीय फुटबॉल में नस्लवाद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इंडियन सुपर लीग के एक मैच के बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक फैन को खिलाड़ी पर नस्लवादी टिप्पणी करते देखा गया। यह घटना श्री कांतीरावा स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान हुई। AIFF ने दिखाई सख्ती, जांच के आदेशऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि खेल में किसी भी तरह के भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। फेडरेशन ने मामले को अपनी अनुशासन समिति को सौंप दिया है, जो स्वतंत्र रूप से जांच करेगी। खिलाड़ी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणीयह विवाद केरला ब्लास्टर्स एफसी के डिफेंडर फालू नदिये को लेकर सामने आया। वीडियो में एक दर्शक द्वारा उन पर नस्लवादी टिप्पणी किए जाने का आरोप है, जिससे पूरे फुटबॉल समुदाय में आक्रोश फैल गया। AIFF की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीतिAIFF ने अपने बयान में कहा कि वह नस्लवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाता है।“जो लोग हमारे स्टेडियम में नफरत लाते हैं, उनके लिए हमारे खेल में कोई जगह नहीं है।”फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक इस मामले पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की जाएगी। क्लब ने भी जताई कड़ी आपत्तिकेरला ब्लास्टर्स ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे “घिनौना” बताया। क्लब ने कहा कि खिलाड़ियों की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है और मामले की जानकारी आधिकारिक रूप से लीग और फेडरेशन को दे दी गई है। खिलाड़ियों की सुरक्षा और फैंस के व्यवहार पर सवालइस घटना ने एक बार फिर भारतीय फुटबॉल में खिलाड़ियों की सुरक्षा और दर्शकों के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोक सकती है।
दवाइयों की खोज में AI का बढ़ता दखल, एक्सपर्ट्स ने बताया गेमचेंजर

नई दिल्ली। दवाइयों की खोज और विकास के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आने वाले समय में बड़ी भूमिका निभाने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एआई के उपयोग से सटीक और प्रभावी दवाइयों का विकास संभव होगा, जिससे मरीजों को बेहतर और पर्सनलाइज्ड इलाज मिल सकेगा। ‘इंडिया फार्मा 2026’ में भविष्य की रणनीति पर मंथनइंडिया फार्मा 2026 के पहले दिन आयोजित चार प्रमुख सत्रों में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स ने फार्मा सेक्टर के भविष्य पर चर्चा की। इस दौरान हेल्थकेयर इकोसिस्टम को इनोवेशन आधारित बनाने पर जोर दिया गया। सिर्फ डिजिटलीकरण नहीं, सिस्टम को नए सिरे से सोचने की जरूरतफार्मा सेक्टर के विशेषज्ञों ने कहा कि केवल मौजूदा प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण काफी नहीं है, बल्कि उन्हें पूरी तरह नए तरीके से डिजाइन करना होगा। इसके लिए मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत तकनीकी आधार जरूरी है। नीतियों और क्रियान्वयन के बीच गैप कम करने पर जोरउद्घाटन सत्र में नीतिगत उद्देश्यों और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन के बीच मौजूद अंतर को कम करने की जरूरत बताई गई। मनोज जोशी ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले मॉडल और मजबूत सरकारी लैब नेटवर्क की वकालत की। भारत-आधारित रिसर्च मॉडल की आवश्यकताराजीव बहल ने कहा कि रिसर्च फंडिंग बढ़ने के बावजूद भारत को अपने खुद के रिसर्च मॉडल को मजबूत करना होगा, जिसमें उद्योग और शिक्षा जगत के बीच विश्वास और सहयोग बढ़े। रेगुलेटरी सिस्टम को बनाना होगा ग्लोबल स्तर काएक सत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप कुशल और पारदर्शी नियामक ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया।डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा कि बेहतर रेगुलेशन के लिए सभी हितधारकों की भागीदारी जरूरी है। फार्मा वैल्यू चेन में एआई की बढ़ती भूमिकातीसरे सत्र में यह सामने आया कि एआई दवा खोज से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन को बदल सकता है। इससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी और नई दवाइयों की खोज तेज होगी। CRDMO सेक्टर में भारत की मजबूत पकड़चौथे सत्र में CRDMO सेक्टर में भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा हुई। वर्तमान में लगभग 8 अरब डॉलर का यह उद्योग 10-12% की दर से बढ़ रहा है, जो वैश्विक आउटसोर्सिंग की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
अंबेडकर जयंती पर CM मोहन यादव का नमन बाबा साहेब को बताया संविधान का शिल्पकार

भोपाल । भोपाल में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर पूरे प्रदेश में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा साहेब को भावपूर्ण नमन किया और उन्हें भारतीय संविधान का शिल्पकार तथा सामाजिक न्याय का महान पुरोधा बताया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि डॉ. अंबेडकर ने जीवनभर शिक्षा समानता और अधिकारों के आधार पर एक सशक्त और समतामूलक भारत की नींव रखी। उनके विचार आज भी देश के विकास और सामाजिक उत्थान की दिशा में मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का योगदान केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था बल्कि उन्होंने समाज के वंचित शोषित और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए संघर्ष को जीवन का उद्देश्य बनाया। सीएम यादव ने यह भी कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक समानता के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आए। उनके प्रयासों ने देश में एक ऐसी व्यवस्था की नींव रखी जिसमें हर व्यक्ति को समान अधिकार और अवसर मिल सकें। इस अवसर पर प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें श्रद्धांजलि सभाएं, विचार गोष्ठियां और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम शामिल रहे। लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर बाबा साहेब के विचारों को याद किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार बाबा साहेब के सिद्धांतों और उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज के हर वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि समता न्याय और अधिकार आधारित समाज की स्थापना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस प्रकार अंबेडकर जयंती का यह अवसर न केवल श्रद्धांजलि का दिन रहा बल्कि सामाजिक एकता और समानता के संदेश को मजबूत करने का भी प्रतीक बना।
मिथिला की अनूठी परंपरा जुड़ शीतल, प्रकृति और आशीर्वाद का संगम बनकर देती है शांति और संतुलन का संदेश

नई दिल्ली:मिथिला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में जुड़ शीतल एक ऐसा पर्व है जिसे केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं बल्कि प्रकृति, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन के संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। यह त्योहार हर वर्ष गर्मी की शुरुआत के साथ मनाया जाता है और इसे नववर्ष की प्रतीकात्मक शुरुआत भी माना जाता है। मौसम में बदलाव के साथ जब तापमान बढ़ने लगता है, तब यह पर्व जीवन में शीतलता, संयम और सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश देता है। इस दिन घरों में विशेष परंपराओं का पालन किया जाता है। परिवार की महिलाएं सुबह उठकर घर के सभी सदस्यों पर घड़े का ठंडा और बासी पानी छिड़कती हैं। इसे आशीर्वाद और स्वास्थ्य सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। बच्चों को विशेष रूप से आशीर्वाद दिया जाता है ताकि वे स्वस्थ, शांत और संतुलित जीवन जी सकें। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था नहीं बल्कि गर्मी से बचाव और शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक प्रदान करने की पारंपरिक विधि भी मानी जाती है। जुड़ शीतल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रकृति से जुड़ाव है। इस दिन लोग अपने घरों के पेड़ पौधों पर पानी डालते हैं और पर्यावरण के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। तुलसी के पौधे को विशेष रूप से महत्व दिया जाता है और उसे जल अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। यह जीवन में पवित्रता, संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देता है। इस पर्व में मटके और पानी का विशेष महत्व होता है। कई घरों में मटके से धीरे धीरे पानी टपकाने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे जीवन में निरंतरता, संयम और संसाधनों के संतुलित उपयोग का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा यह भी संदेश देती है कि जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग सोच समझकर करना चाहिए ताकि भविष्य के लिए संतुलन बना रहे। खगोलीय दृष्टि से यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सूर्य इस अवधि में अपनी राशि परिवर्तन प्रक्रिया के दौरान मौसम में बदलाव लाता है। दिन लंबे होने लगते हैं और गर्मी धीरे धीरे अपने प्रभाव को बढ़ाने लगती है। इसी समय कई धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की शुरुआत भी मानी जाती है, जिससे इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। जुड़ शीतल केवल एक परंपरा नहीं बल्कि जीवन में शांति, शीतलता, प्रकृति के प्रति सम्मान और पारिवारिक एकता का गहरा संदेश देने वाला पर्व है। यह आधुनिक जीवन में भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और लोगों को प्रकृति के साथ संतुलन में रहने की प्रेरणा देता है।