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मध्य प्रदेश में पूरे उत्साह से मनाई जा रही अंबेडकर जयंती, गूंजा 'जय भीम' का नारा, महू में मुख्य आयोजन

भोपाल। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मंगलवार को मध्यप्रदेश में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इंदौर जिले के डॉ. अंबेडकर नगर (महू), जो उनकी जन्मस्थली है, वहां मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। यहां देशभर से श्रद्धालु, सामाजिक संगठन और बौद्ध भिक्षु बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान ‘जय भीम’ के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा और डॉ. अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राज्यभर में माल्यार्पण, रैलियों और सभाओं का आयोजन किया गया। संविधान ने मजबूत की लोकतंत्र की नींव- मुख्यमंत्री यादव मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान निर्माण के जरिए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत आधार दिया और उनका सामाजिक समरसता व समानता का संदेश आज भी प्रासंगिक है।महू में मुख्य आयोजन, बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे महू में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में देशभर से आए लोगों ने बाबा साहेब को नमन किया। यहां बौद्ध भिक्षुओं की मौजूदगी भी रही और पूरा क्षेत्र श्रद्धा और उत्साह के माहौल में नजर आया।प्रदेश के अन्य शहरों में भी आयोजन भोपाल में अंबेडकर चौक पर माल्यार्पण के साथ सभा आयोजित की गई। ग्वालियर के फूलबाग अंबेडकर पार्क में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और रैलियों का समापन वहीं हुआ। जबलपुर में विभिन्न संगठनों ने माल्यार्पण कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। रतलाम में कैबिनेट मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी और लोगों को छाछ वितरित की गई। बैतूल में अंबेडकर चौक पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने अंबेडकर के योगदान को महान बताते हुए उनके विचारों को प्रेरक बताया। नरसिंहपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर पंचायत एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बेलहाई अंबेडकर पार्क में प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उज्जैन में अखिल भारतीय बैरवा महासंघ ने अंबेडकर जयंती पर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और प्रभात फेरी निकाली, जिसमें बाबा साहब के योगदान को याद किया गया। नर्मदापुरम में भाजपा कार्यालय के सामने स्थित प्रतिमा स्थल कार्यक्रम आयोजित हुआ अधिकारियों ने माल्यार्पण किया और भीम आर्मी ने बाइक रैली निकाली। बैतूल, नरसिंहपुर, उज्जैन और नर्मदापुरम में भी विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए बाबा साहेब को याद किया गया। कई स्थानों पर प्रभात फेरी, बाइक रैली और सामूहिक माल्यार्पण का आयोजन हुआ। बता दें कि पूरे मध्य प्रदेश में अंबेडकर जयंती के अवसर पर सामाजिक न्याय, समानता और संविधान के मूल्यों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

राहत भरी खबर: सस्ता हुआ सोना और चांदी, ईंधन कीमतों में क्या बदलाव?

नई दिल्ली। आज देशभर में सोना-चांदी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा अपडेट देखने को मिला है। जहां लगातार दूसरे दिन सोने की चमक फीकी पड़ी है, वहीं चांदी भी सस्ती हो गई है। दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल के दामों में शहरों के हिसाब से हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। सोने की कीमतों में गिरावट का दबाव जारीवैश्विक बाजार में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली है। हालांकि कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी भी दर्ज की गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में गिरावट का रुझान बना हुआ है। दिल्ली में आज 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दाम में हल्की बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन पिछले दो दिनों में कुल मिलाकर सोना सस्ता हुआ है। चांदी के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार दो दिनों में चांदी करीब ₹5100 प्रति किलो तक सस्ती हुई है। दिल्ली में आज चांदी ₹2,54,900 प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। प्रमुख शहरों में सोने के ताजा दाम (10 ग्राम)दिल्ली: ₹1,52,600 (24K), ₹1,39,890 (22K), ₹1,14,480 (18K)मुंबई: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330कोलकाता: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330चेन्नई: ₹1,53,370, ₹1,40,590, ₹1,17,290बेंगलुरु: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330हैदराबाद: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330पटना: ₹1,52,500, ₹1,39,790, ₹1,14,380 पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारीसुबह 6 बजे तेल कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें जारी कीं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर देखा गया है। प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल रेटनई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72, डीजल ₹87.62मुंबई: पेट्रोल ₹104.21, डीजल ₹92.15कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94, डीजल ₹90.76चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75, डीजल ₹92.34हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46, डीजल ₹95.70पटना: पेट्रोल ₹105.58, डीजल ₹93.80लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.80जयपुर: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21 कीमतें क्यों बदलती हैं?विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों का टैक्स रिफाइनिंग लागत और मांग-आपूर्ति का संतुलन ग्राहक अपने मोबाइल से भी आसानी से अपने शहर का ईंधन रेट जान सकते हैं। Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें, आज के बाजार अपडेट में साफ दिख रहा है कि सोना और चांदी पर दबाव बना हुआ है, जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता के साथ हल्का बदलाव देखा गया है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल ही इन कीमतों की दिशा तय करेगी।

हनुमान जी को मिला था शक्ति भूलने का श्राप, इसके पीछे की पौराणिक कहानी

नई दिल्ली। मंगलवाल का दिन हनुमान जी की पूजा अर्चना के लिए बहुत ही खास होता है। इस दिन व्रत रहने से आपके ऊपर उनकी कृपा बानी रहती है। कहा जाता हैं कि, बचपन से ही हनुमान जी को कई सिद्धियां और चमत्कारी शक्तियां प्राप्त थीं। उनके पास असीम शक्तियां थीं। वे पहाड़ उठा सकते थे, समुद्र लांघ सकते थे और सूरज को निगल सकते थे।लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि वो अपनी शक्तियां को ही भूल गए तो चलिए इससे जुड़ी कथा जानते हैं। हनुमान जी को मिला था ऐसा श्रापपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली, तेजस्वी और चंचल स्वभाव के थे। वे अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग खेल-खेल में ही करने लगते थे। कभी वे ऋषि-मुनियों के आश्रमों में पहुंच जाते, तो कभी उनकी साधना में बाधा डालते। एक बार कई महान ऋषि-मुनि वन में तपस्या कर रहे थे। तभी बाल स्वरूप हनुमान जी वहां पहुंचे और अपनी चंचलता के कारण उन्होंने ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया।ऋषियों ने पहले तो उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने, तब उन्हें क्रोध आ गया।तब ऋषियों ने हनुमान जी को श्राप दिया कि वे अपनी सारी दिव्य शक्तियों को भूल जाएंगे। श्राप का ये था तोड़यह श्राप पूर्ण रूप से दंड देने के लिए नहीं था, बल्कि उनके हित में ही था। ऋषियों ने यह भी कहा कि जब कोई उन्हें उनकी शक्तियों की याद दिलाएगा, तब वे पुनः अपनी शक्ति को पहचान लेंगे और उसका उपयोग धर्म के कार्यों में करेंगे। नारद मुनि और जामवंत ने याद दिलाई थी शक्तियांजब भगवान राम की सेवा का समय आया और सीता माता की खोज के लिए समुद्र पार करना था, तब हनुमान जी अपनी शक्ति को भूल चुके थे। उस समय नारद मुनि और जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। तभी हनुमान जी को अपनी अपार शक्ति का बोध हुआ और उन्होंने विशाल रूप धारण कर समुद्र लांघ लिया। इसके बाद उन्होंने राम भगवान की।

देवदूत बने जवान मैहर में ट्रेन हादसा टला, महिला को प्लेटफॉर्म के नीचे जाने से बचाया गया

मैहर । मध्यप्रदेश के मैहर रेलवे स्टेशन पर उस समय बड़ा हादसा टल गया जब चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही एक महिला अचानक संतुलन खो बैठी और प्लेटफॉर्म के किनारे से नीचे गिरने लगी। यह पूरा घटनाक्रम कुछ ही सेकेंड में हुआ लेकिन मौके पर मौजूद GRP और RPF जवानों की तत्परता ने एक बड़ी दुर्घटना को होने से रोक दिया। उनकी सूझबूझ और तेजी से लिए गए निर्णय ने महिला की जान बचा ली। यह घटना ट्रेन संख्या 11754 रीवा–इतवारी एक्सप्रेस के जनरल कोच के पास हुई। जानकारी के अनुसार योगिता श्रीवास उम्र 38 वर्ष अपने पति के साथ यात्रा कर रही थीं और ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह असंतुलित होकर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक स्थिति में पहुंच गईं। कुछ ही पल में स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात GRP आरक्षक 104 दिनेश कुमार पटेल और RPF आरक्षक प्रमोद मिश्रा ने स्थिति को देखते ही बिना देरी किए कार्रवाई की। दोनों जवानों ने तेजी से दौड़कर महिला को पकड़ लिया और खींचकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। अगर कुछ सेकेंड की भी देरी होती तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी। लेकिन उनकी तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह घटना बेहद डरावनी थी और आसपास मौजूद यात्री भी कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गए थे। लेकिन जवानों की बहादुरी के बाद सभी ने राहत की सांस ली और उनकी सराहना की। यह घटना एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की लापरवाही की ओर ध्यान खींचती है। अक्सर देखा जाता है कि यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश करते हैं जो बेहद खतरनाक होता है और कई बार जानलेवा साबित हो सकता है। रेलवे प्रशासन लगातार यात्रियों से अपील करता है कि ट्रेन पूरी तरह रुकने के बाद ही उसमें चढ़ें या उतरें। थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। मैहर की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से जान बचाई जा सकती है।

दिग्विजय के बाद खाली सीट पर बढ़ी खींचतान कांग्रेस में जातीय समीकरण बने सिरदर्द

भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट ने पार्टी के अंदर नई खींचतान को जन्म दे दिया है। खास बात यह है कि यह विवाद अब केवल राजनीतिक नहीं रहा बल्कि जातीय समीकरणों के इर्दगिर्द घूमता नजर आ रहा है जहां अलग अलग वर्ग अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। शुरुआत में अनुसूचित जाति वर्ग की ओर से मांग उठी थी कि इस बार राज्यसभा में दलित नेता को मौका दिया जाए। इस मांग को कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रमुखता से उठाया और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं का भी समर्थन मिला। इसके बाद विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं ने भी सक्रियता दिखाई और उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी रखी। हाल ही में विंध्य क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार से मुलाकात कर यह तर्क दिया कि क्षेत्र में ब्राह्मण समाज का प्रभाव काफी अधिक है और उन्हें राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इस मुलाकात के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के भीतर जातीय संतुलन का मुद्दा अब और गहराता जा रहा है। इसी बीच अब सिंधी समाज की एंट्री ने इस पूरी प्रक्रिया को और दिलचस्प बना दिया है। रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से प्रतिनिधि भेजने की मांग की है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को संबोधित पत्र में अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए खुद को एक योग्य दावेदार बताया है। ठारवानी का कहना है कि सिंधी समाज का कांग्रेस के प्रति वर्षों से जुड़ाव रहा है और पार्टी को इस वर्ग को भी प्रतिनिधित्व देने पर विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि उन्हें मौका मिलता है तो वे संसद में पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे और प्रदेशभर में संगठन को और मजबूत करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर जातीय समीकरणों को त्रिकोणीय बना दिया है जहां दलित ब्राह्मण और सिंधी समाज तीनों अपनी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की होगी ताकि किसी भी वर्ग की नाराजगी सामने न आए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा जैसी अहम सीट पर उम्मीदवार का चयन केवल योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान किस वर्ग को प्राथमिकता देता है और किस तरह इस आंतरिक दबाव को संतुलित करता है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की यह एक सीट कांग्रेस के लिए केवल एक राजनीतिक अवसर नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन की परीक्षा भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस पर फैसला पार्टी की रणनीति और भविष्य की राजनीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।

Dacoit की बॉक्स ऑफिस पर सुस्त चाल, नहीं पकड़ पा रही रफ्तार

नई दिल्ली। ‘मृणाल ठाकुर’ (Mrunal Thakur) और अदिवि शेष (Adivi Sesh) की फिल्म फिल्म ‘डकैत’ (Dacoit) इस समय सुर्खियों में है। अब तक फिल्म को रिलीज हुए 4 दिन हो गए हैं लेकिन फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पा रही है। 10 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इस फिल्म को मिले-जुले रिव्यू थे, लेकिन इसके बावजूद इसने अपने पहले दिन अच्छी कमाई की थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक शुरुआत की है और अब इसके तीसरे दिन का कलेक्शन क्या है चलिए उसके बारे में बताते हैं। चार दिन में फिल्म का ये रहा कलेक्शनSacnilk के मुताबिक ‘डकैत’ ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन 6.55 करोड़ का कलेक्शन किया था. वहीं, फिल्म ने दूसरे दिन 6.85 करोड़ का कलेक्शन किया और तीसरे दिन 6.40 करोड़ की कमाई की थीं। वहीं अब चौथे दिन का भी कलेक्शन सामने आ गया है फिल्म ने चौथे दिन 2.70 करोड़ का कलेक्शन किया है। देखा जाए तो फिल्म बिल्कुल भी रफ्तार में नहीं है फिल्म का कलेक्शन दिन पर दिन कम होते ही जा रहा है। बजट से बहुत दूर है डकैतआपको बता दें की इस फिल्म का बजट रिपोर्ट्स के मुताबिक 70-80 करोड़ रुपये का माना जा रहा है। लेकिन फिल्म अब तक अपना बजट निकलने में संघर्ष क्र रही है।अब तक फिल्म ने कुछ खास कमाल नहीं दिखाया हैं। मतलब कि फिल्म अपने पहले वीकेंड में बजट का आधा भी नहीं कमा सकी है। अब लोग आने वाले वीकेंड का ही इंतजार कर रहे हैं। डकैत की कहानीशेनिल देव पहली बार निर्देशन कर रहे उनके द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आदिवी शेष एक इंस्पेक्टर की भूमिका में हैं। कहानी दो पुराने प्रेमियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें मिलकर कई चोरियां करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसमें ये दिखाया गया है कि उनकी जिंदगी में बार बार कैसे बदलाव आते है। इस फिल्म में प्रकाश राज और अनुराग कश्यप भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। सुप्रिया यारलागड्डा द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘डकैत’ को सुनील नारंग ने को-प्रेजेंट किया है और अन्नपूर्णा स्टूडियोज ने इसे प्रेजेंट किया है।

TET परीक्षा पर नए आदेश जल्द, कौन शिक्षक देंगे एग्जाम तय करेगा विभाग

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर बड़ा फैसला जल्द सामने आ सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग नए सिरे से आदेश जारी करने की तैयारी में है, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किन शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होगा और किन्हें छूट या सरलीकरण मिलेगा। इस संबंध में लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। नए आदेश में तय होगी अनिवार्यता और छूटआयुक्त ने कहा कि प्रस्तावित आदेश में यह बिंदु स्पष्ट रूप से शामिल किया जाएगा कि किन श्रेणी के शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी होगा। साथ ही नियमों के तहत कुछ शिक्षकों को राहत देने के प्रावधानों को भी परिभाषित किया जाएगा, जिससे भ्रम की स्थिति खत्म हो सके। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की तैयारीमामले को लेकर विभाग शासकीय अधिवक्ता से कानूनी राय ले रहा है। राय मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर निर्णय लिया जाएगा। इससे पहले कोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए सेवा में बने रहने और प्रमोशन के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया था। बैठक में कई अहम प्रशासनिक निर्णयसोमवार को आयोजित बैठक में शिक्षक संगठनों और अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें लंबित वेतनवृद्धि और समयमान वेतनमान से जुड़े मामलों को जल्द निपटाने पर सहमति बनी। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन कार्यक्रम की तैयारीयदि न्यायालय के निर्देश यथावत रहते हैं, तो TET में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए तहसील और विकासखंड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें सिलेबस आधारित मार्गदर्शन दिया जाएगा ताकि शिक्षक परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें। DPI स्तर पर परामर्श बैठक का निर्णयलंबित समस्याओं के समाधान के लिए डीपीआई स्तर पर एक परामर्शदात्री बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान निकालना है। शिक्षक संगठनों में असंतोषहालांकि इस बैठक को लेकर कुछ शिक्षक संगठनों ने असंतोष जताया है। उनका कहना है कि सभी प्रभावित संगठनों को शामिल नहीं किया गया, जिससे लिए गए निर्णयों की वैधता पर सवाल उठते हैं। कुछ संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे अधिकृत प्रतिनिधिमंडल के साथ ही चर्चा को मान्यता देंगे। क्या है TET परीक्षा?TET यानी Teacher Eligibility Test एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा 2010 में अनिवार्य किया गया था। यह परीक्षा कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की योग्यता निर्धारित करती है और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत इसकी वैधानिकता तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक शेष है, उन्हें TET पास करना अनिवार्य होगा। अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है।

अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में भड़की राजनीतिक हिंसा, बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़प में दो घायल, पूरे इलाके में तनाव

नई दिल्ली :पश्चिम बंगाल  अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच भड़की हिंसक झड़प, राजनीतिक तनाव के बीच दो लोग घायल, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो के बाद राजनीतिक माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। यह घटना बांकुरा मोड़ इलाके में हुई, जहां दोनों दलों के समर्थकों के बीच पहले कहासुनी हुई और देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। इस झड़प में दोनों पक्षों के एक एक कार्यकर्ता घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच हल्की नोकझोंक हुई थी, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति बेकाबू हो गई और हाथापाई शुरू हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। हालांकि तब तक दोनों पक्षों को चोटें लग चुकी थीं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया गया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की आगे की हिंसा को रोका जा सके। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। घायलों को तुरंत दुर्गापुर के सब डिविजनल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर भी आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक पक्ष ने दूसरे पर हमले का आरोप लगाते हुए कहा कि रोड शो के बाद बढ़ी भीड़ से विपक्षी दल असहज हो गया था, जिसके कारण यह झड़प हुई। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से भी इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान दोनों दलों के समर्थकों के बीच तनाव का माहौल बना रहा। इलाके में फिलहाल स्थिति सामान्य लेकिन संवेदनशील बनी हुई है। पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की जांच में जुटा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि झड़प की शुरुआत किस कारण से हुई और इसमें कौन कौन शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिना काम के मिलता रहा वेतन: नगर निगम में फर्जी उपस्थिति पर जांच शुरू

नई दिल्ली। ग्वालियर नगर निगम में सफाई व्यवस्था से जुड़ी बड़ी अनियमितता सामने आई है। बिना उपस्थिति दर्ज किए एक कर्मचारी को वेतन भुगतान किए जाने के मामले में निगमायुक्त संघप्रिय ने कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस, स्थानांतरण और जांच के आदेश जारी किए हैं। लंबे समय से अनुपस्थित कर्मचारी को मिलता रहा वेतनमामला वार्ड क्रमांक-65 का है, जहां पदस्थ सफाई संरक्षक शीला लंबे समय से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थीं। इसके बावजूद उनकी हाजिरी ऑफलाइन दर्ज कर वेतन जारी किया जाता रहा। इस खुलासे के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। पोर्टल पर नाम नहीं, फिर भी दर्ज होती रही उपस्थितिजांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कर्मचारी का नगर निगम के ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन तक नहीं था, फिर भी नियमित रूप से उनकी उपस्थिति दर्ज की जाती रही। यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिसनिगमायुक्त ने वार्ड हेल्थ ऑफिसर रवि चिंडालिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर 20 अप्रैल शाम 6 बजे तक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। वहीं जोन क्रमांक-25 के प्रभारी जोनल हेल्थ ऑफिसर अर्जुन दास को भी नोटिस थमाया गया है। उन पर फर्जी हाजिरी दर्ज कराने के लिए दबाव बनाने और भ्रामक शिकायत करने के आरोप हैं। तत्काल स्थानांतरण, नई जिम्मेदारी सौंपी गईकार्रवाई के तहत रवि चिंडालिया का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर दिया गया है। उन्हें वार्ड 39 में उनके मूल पद विनियमित सफाई कर्मी के रूप में पदस्थ किया गया है। वहीं वार्ड 65 का अतिरिक्त प्रभार अस्थायी रूप से दिनेश गौहर को सौंपा गया है। तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देशपूरे मामले की प्राथमिक जांच स्वच्छता अधिकारी दीपेन्द्र सेंगर को सौंपी गई है। उन्हें तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जिम्मेदारों के खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जा सके। भ्रष्टाचार पर सख्त रुख, प्रशासन का संदेशनगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।

गली क्रिकेट से प्रो लेवल तक: प्रफुल हिंगे की प्रेरणादायक और चौंकाने वाली कहानी

नई दिल्ली। Praful Hinge ने अपने आईपीएल डेब्यू मैच में ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। Indian Premier League में पहली बार खेलने उतरे इस युवा खिलाड़ी ने पहले ही मैच में 4 विकेट लेकर सनसनी मचा दी और “प्लेयर ऑफ द मैच” का खिताब अपने नाम किया। डेब्यू मैच में ही दिखाया जलवाSunrisers Hyderabad और Rajasthan Royals के बीच खेले गए मुकाबले में हिंगे ने गेंदबाजी से मैच का रुख ही बदल दिया। सनराइजर्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 216 रन बनाए थे, जिसके बाद राजस्थान की टीम मुकाबले में मजबूत नजर आ रही थी। लेकिन जैसे ही दूसरी पारी शुरू हुई, हिंगे ने पहले ही ओवर में 3 बड़े बल्लेबाजों को आउट कर मैच को एकतरफा बना दिया। पहले से ही लिखकर रखा था लक्ष्यमैच के बाद Praful Hinge ने बताया कि उन्होंने पहले ही लिखकर रखा था कि वह अपने डेब्यू मैच में 4 से 5 विकेट लेंगे। उन्होंने कहा, “मैंने सोचा था कि पावरप्ले में दबाव बनाऊंगा और विकेट लूंगा। मुझे भरोसा था कि मैं ऐसा कर सकता हूं।” 13 साल की उम्र तक नहीं देखी थी लेदर बॉलहिंगे की कहानी और भी दिलचस्प है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने 13 साल की उम्र में क्रिकेट शुरू किया, तब उन्हें यह भी नहीं पता था कि लेदर बॉल क्रिकेट क्या होता है। शुरुआत में उनके पिता ने क्लब जॉइन करने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में मौका मिला और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वैभव सूर्यवंशी का विकेट रहा खासVaibhav Suryavanshi का विकेट हिंगे के लिए सबसे खास रहा। उन्होंने पहले ही कहा था कि वह बाउंसर डालकर उन्हें आउट करेंगे—और उन्होंने वैसा ही किया। इसके अलावा उन्होंने Riyan Parag को भी आउट किया। हिंगे ने अपने 4 ओवर के स्पेल में 34 रन देकर 4 विकेट लिए। उनके पहले ओवर के तीन विकेट ने ही मैच का नतीजा लगभग तय कर दिया था। इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें “प्लेयर ऑफ द मैच” चुना गया। हिंगे ने इस सफलता का श्रेय अपने परिवार और टीम के कोच को दिया। उन्होंने खासतौर पर बॉलिंग कोच Varun Aaron का धन्यवाद किया, जिन्होंने रणनीति बनाने में उनकी मदद की। प्रफुल्ल हिंगे की यह कहानी बताती है कि अगर आत्मविश्वास और मेहनत हो, तो कोई भी सपना सच हो सकता है। 13 साल की उम्र में लेदर बॉल से अनजान रहने वाला खिलाड़ी आज आईपीएल में छा गया है और यह तो बस शुरुआत है।