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कॉरपोरेट ड्रेस कोड विवाद: धार्मिक प्रतीकों पर अलग-अलग नियमों से बढ़ी बहस

नई दिल्ली:देश की एक प्रमुख आईवियर रिटेल कंपनी की कर्मचारी ड्रेस पॉलिसी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें धार्मिक प्रतीकों से जुड़े नियमों पर तीखी बहस शुरू हो गई है। मामला तब सामने आया जब कंपनी के कथित स्टाइल गाइड में कुछ ऐसे दिशा निर्देशों का उल्लेख सामने आया, जिनमें विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रतीकों और पहनावे को लेकर अलग अलग तरह के प्रावधान बताए गए हैं। इस नीति को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विवाद के केंद्र में यह दावा है कि कंपनी की नीति में हिजाब पहनने की अनुमति दी गई है, हालांकि उसके लिए रंग और डिजाइन से जुड़ी कुछ शर्तें निर्धारित हैं। इसी तरह पगड़ी पहनने की अनुमति का भी उल्लेख है, लेकिन उसमें भी एक समान रंग को लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर तिलक, बिंदी और कलावा जैसे धार्मिक प्रतीकों के उपयोग पर रोक जैसी बात सामने आने के बाद विवाद और अधिक गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस नीति की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक भावनाओं के प्रति असंतुलित बताया और लोगों से कंपनी के बहिष्कार की अपील की है। उनके अनुसार यह नीति एक तरफ कुछ धार्मिक पहचान को अनुमति देती है, जबकि दूसरी तरफ कुछ परंपरागत प्रतीकों को प्रतिबंधित करती है, जो समानता के सिद्धांत पर सवाल खड़े करता है। उनकी टिप्पणी के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया और सोशल मीडिया पर दो अलग अलग विचार सामने आने लगे। एक वर्ग का मानना है कि कॉरपोरेट संस्थानों में ड्रेस कोड का उद्देश्य पेशेवर माहौल बनाए रखना होता है, इसलिए कुछ समान नियम जरूरी होते हैं। वहीं दूसरा वर्ग इसे धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मुद्दा मान रहा है और इसे अनुचित प्रतिबंध के रूप में देख रहा है। इस विवाद में यह भी चर्चा का विषय बन गया है कि कॉरपोरेट संस्थानों में व्यक्तिगत धार्मिक प्रतीकों और पेशेवर ड्रेस कोड के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। कई लोगों का मानना है कि कंपनियों को ऐसा नियम बनाना चाहिए जो सभी कर्मचारियों के लिए समान हो और किसी विशेष समुदाय को लेकर अलग अलग व्याख्या की स्थिति न बने।  इस पूरे मामले पर संबंधित कंपनी की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और इस पर बहस सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक पहुंच चुकी है।

पनागर क्षेत्र में हथियारों के साथ दो संदिग्ध दबोचे पुलिस ने कार समेत किया बड़ा खुलासा

जबलपुर । जबलपुर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध हथियारों के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरी कार्रवाई पनागर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बडेरा कला में की गई जहां बीती रात मिली गुप्त सूचना ने पुलिस को तत्काल हरकत में ला दिया। सूचना में बताया गया था कि एक कर्नाटक पासिंग महिंद्रा मेजर कार में दो संदिग्ध व्यक्ति हथियारों के साथ मौजूद हैं और किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में हो सकते हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना देर किए मौके पर दबिश दी और संदिग्ध वाहन को घेर लिया। जब कार की तलाशी ली गई तो उसमें सवार दो व्यक्तियों के पास से खतरनाक हथियार और गोला बारूद बरामद हुआ। तलाशी के दौरान एक 30 बोर की राइफल और एक 22 बोर की राइफल के साथ 22 बोर के दो जिंदा कारतूस और 30 बोर का एक जिंदा कारतूस मिला। इसके अलावा मौके से एक चला हुआ खोखा भी बरामद किया गया जिससे यह आशंका और गहरा गई कि हथियारों का इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है या फिर किसी वारदात की तैयारी चल रही थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया और उनके कब्जे से सभी हथियार और गोला बारूद जब्त कर लिया। साथ ही जिस महिंद्रा कंपनी की मेजर कार में आरोपी सवार थे उसे भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। जब्त वाहन का नंबर केए 12 एन 4252 बताया जा रहा है जो कर्नाटक में पंजीकृत है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरुण चिनगप्पा और गार्डन पेप्टिस के रूप में की गई है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर ये आरोपी इतने हथियार लेकर किस उद्देश्य से घूम रहे थे और क्या इनके तार किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क या अवैध शिकार से जुड़े हुए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। यह भी खंगाला जा रहा है कि हथियार कहां से लाए गए और क्या इनका इस्तेमाल किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में किया जाना था। साथ ही आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। इस कार्रवाई को पुलिस की सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है जिसने संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और उम्मीद की जा रही है कि पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं जो किसी बड़े आपराधिक गिरोह तक पहुंचा सकते हैं।

विदिशा में जुए के अड्डे पर पुलिस का छापा, 11 आरोपी गिरफ्तार

विदिशा । मध्यप्रदेश के विदिशा में सिविल लाइन थाना पुलिस ने जुए के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से नगदी, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल सहित करीब 4.44 लाख रुपये का मशरूका जब्त किया है। इस कार्रवाई से शहर में अवैध गतिविधियों पर शिकंजा कसने का स्पष्ट संदेश गया है। मुखबिर की सूचना पर हुई त्वरित कार्रवाईपुलिस को सूचना मिली थी कि बालाजी पैराडाइज कॉलोनी के पीछे स्थित खाली जमीन पर कुछ लोग अवैध रूप से जुआ खेल रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना देर किए मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 11 आरोपी जुआ खेलते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। मोबाइल, बाइक और नगदी बरामदछापेमारी में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 3 मोटरसाइकिलें और बड़ी मात्रा में नगदी बरामद की। जब्त किए गए सामान की कुल कीमत लगभग 4 लाख 44 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारीपुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में गौरव साहू, रवि बघेल, अक्षय खान, आसिफ खान, तौफीक खान, दिनेश मालवीय, गौरव सूर्यवंशी, इशान खान, आशीष लोधी, रानू सिलावट और साजिद खान शामिल हैं। ये सभी शहर के अलग-अलग इलाकों जैसे शिव नगर, पुरनपुरा, बजरिया और बेस दरवाजा के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाईयह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देशन में की गई। साथ ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे और नगर पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी आशुतोष सिंह राजपूत की टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। अवैध गतिविधियों पर सख्ती जारीपुलिस ने स्पष्ट किया है कि शहर में जुआ, सट्टा और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना और अपराध पर नियंत्रण करना है।

छत्तीसगढ़ औद्योगिक हादसा: वेदांता प्लांट में धमाके के बाद 14 मौतों ने बढ़ाई देशभर में चिंता

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले में स्थित एक औद्योगिक संयंत्र में हुए भीषण हादसे ने देश की बड़ी खनन और धातु कंपनी वेदांता ग्रुप की औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 14 अप्रैल को सिंघानातराई गांव स्थित प्लांट में उच्च दबाव वाले बॉयलर की नली फटने से अचानक अत्यंत गर्म भाप का तेज रिसाव हुआ, जिससे मौके पर अफरा तफरी मच गई। लगभग 600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंची इस भाप की चपेट में आने से कई कर्मचारियों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतकों की संख्या कम से कम 14 बताई जा रही है, जबकि घायलों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है। इस दुर्घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की वास्तविक स्थिति पर व्यापक बहस छेड़ दी है।घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं। जिला प्रशासन ने अलग से मजिस्ट्रेट जांच भी शुरू कर दी है ताकि दुर्घटना के कारणों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की जा सके। राज्य के मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है और घायलों को भी राहत राशि प्रदान करने की बात कही है। वहीं केंद्र स्तर पर भी इस घटना को लेकर गहरा शोक व्यक्त किया गया और पीड़ित परिवारों को राहत देने के लिए सहायता राशि की घोषणा की गई है। यह पहली बार नहीं है जब वेदांता ग्रुप का नाम औद्योगिक सुरक्षा को लेकर चर्चा में आया हो। कंपनी के विभिन्न खनन, धातु, तेल और ऊर्जा क्षेत्रों में कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पिछले वर्षों में समूह के अलग अलग परिचालनों में कार्यस्थल पर होने वाली मौतों के मामलों में उतार चढ़ाव देखा गया है, जो औद्योगिक सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। कई रिपोर्टों में यह भी संकेत मिला है कि बड़े औद्योगिक समूहों में सुरक्षा मानकों के पालन में असमानता देखने को मिलती रही है। वित्त वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में भी कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत दिया गया है। कर्मचारियों और श्रमिकों द्वारा दर्ज की गई स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी शिकायतों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना इजाफा देखा गया, जो कार्यस्थल के माहौल और सुरक्षा व्यवस्थाओं की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारी औद्योगिक इकाइयों में तकनीकी निगरानी और नियमित सुरक्षा ऑडिट को और अधिक सख्त किए बिना ऐसे हादसों को रोकना कठिन होगा। इस घटना के बाद औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक संगठनों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि बड़े उद्योगों में उत्पादन के दबाव के साथ साथ सुरक्षा मानकों का पालन उतना ही जरूरी है, लेकिन कई बार इसे पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जाती। इसी कारण गंभीर दुर्घटनाएं सामने आती हैं, जिनका सीधा असर श्रमिकों के जीवन और उनके परिवारों पर पड़ता है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्लांट में कामकाज को लेकर भी समीक्षा की जा रही है और सुरक्षा प्रोटोकॉल को तत्काल प्रभाव से मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। Keywords: industrial safety, Vedanta Group, boiler explosion, workplace accident, Chhattisgarh plant Description: छत्तीसगढ़ के शक्ति जिले में हुए भीषण औद्योगिक हादसे ने वेदांता ग्रुप की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की जांच जारी है और प्रशासन ने राहत व मुआवजे की घोषणा की है।

बांधवगढ़ में बाघ शावक की दर्दनाक मौत जंगल के भीतर संघर्ष की आशंका ने बढ़ाई चिंता

उमरिया । मध्य प्रदेश के उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है जहां पनपथा कोर क्षेत्र की बीट बघडो में एक बाघ शावक का शव मिलने से वन महकमे में हलचल मच गई है। यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करती है बल्कि बाघों के बीच बढ़ते संघर्ष की ओर भी संकेत करती है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मृत शावक का शव अत्यंत क्षतविक्षत अवस्था में पाया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि शावक की मौत किसी अन्य बाघ के साथ हुए आपसी संघर्ष के कारण हुई है जिसे वैज्ञानिक भाषा में इंट्रास्पेसिफिक फाइट कहा जाता है। जंगल के भीतर क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच इस प्रकार के संघर्ष असामान्य नहीं माने जाते लेकिन हाल के समय में ऐसी घटनाओं की बढ़ती संख्या ने चिंता जरूर बढ़ा दी है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेरकर गहन जांच शुरू की गई। डाग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर की मदद से हर संभावित पहलू की बारीकी से जांच की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस घटना में किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या शिकार शामिल नहीं है। जांच के दौरान ऐसे कोई संकेत नहीं मिले जिससे यह प्रतीत हो कि शावक की मौत के पीछे अवैध शिकार या बाहरी गतिविधि जिम्मेदार है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए शावक के शव का मौके पर ही दाह संस्कार कर दिया गया ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अन्य खतरे से बचा जा सके। वन विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत अंजाम दिया और सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण भी किया गया है। घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया है। विभागीय हाथियों की मदद से आसपास के घने जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि अन्य बाघों और शावकों की स्थिति का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि वे हर संभावित खतरे पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी असामान्य गतिविधि को गंभीरता से लिया जा रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है जहां बाघों की अच्छी खासी आबादी पाई जाती है। हालांकि हाल के वर्षों में शावकों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं जो वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी के कारण क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं जिससे कमजोर शावक अधिक प्रभावित होते हैं। वन विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और इसकी रिपोर्ट जल्द ही नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भेजी जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर जंगल के भीतर की जटिल वास्तविकताओं को उजागर कर दिया है जहां जीवन और संघर्ष साथ साथ चलते हैं और संरक्षण के प्रयासों के बीच कई अनदेखी चुनौतियां सामने आती रहती हैं।

दहेज के लिए प्रताड़ना: महिला से मारपीट, पति समेत ससुराल पक्ष पर केस

नई दिल्ली। करनवास थाना क्षेत्र में दहेज की मांग को लेकर एक विवाहिता के साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना का मामला सामने आया है। पीड़िता ने अपने पति समेत ससुराल पक्ष के चार लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पति, सास-ससुर और देवर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, राजपुरा निवासी महिला की शादी करीब तीन वर्ष पहले नरसिंहगढ़ के लकड़िया गांव निवासी सोनू के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग महिला पर दहेज की अतिरिक्त मांग को लेकर दबाव बना रहे थे। पीड़िता का आरोप है कि जब भी वह मांग पूरी नहीं कर पाती थी, तो उसके साथ मारपीट की जाती थी और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। लगातार हो रही प्रताड़ना से परेशान होकर महिला ने आखिरकार पुलिस की शरण ली। थाना प्रभारी संगीता शर्मा के अनुसार, महिला की शिकायत के आधार पर पति, सास, ससुर और देवर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और मारपीट से संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बढ़ते दहेज उत्पीड़न के मामलेयह घटना एक बार फिर समाज में दहेज प्रथा जैसी कुरीति की गंभीरता को उजागर करती है। कानून सख्त होने के बावजूद इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। पीड़िता को न्याय की उम्मीदपीड़िता को अब पुलिस जांच से न्याय की उम्मीद है। वहीं, प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

आईपीएल 2026 में आरसीबी का दबदबा, जीत के साथ अंकतालिका में शीर्ष स्थान पर कब्जा..

नई दिल्ली: बेंगलुरु में खेले गए आईपीएल 2026 के एक महत्वपूर्ण मुकाबले के बाद टूर्नामेंट की अंकतालिका में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच विकेट से जीत दर्ज की और इस जीत के साथ वह अंकतालिका में पहले स्थान पर पहुंच गई है। टीम ने लक्ष्य का पीछा बेहद संतुलित और आक्रामक अंदाज में किया और 147 रनों के लक्ष्य को 15.1 ओवर में पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया। इस जीत ने टीम के आत्मविश्वास को और मजबूत किया है और प्लेऑफ की दौड़ में उसकी स्थिति को काफी सुदृढ़ कर दिया है। इस जीत के बाद अंकतालिका में मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है। आरसीबी और राजस्थान रॉयल्स दोनों के पास आठ आठ अंक हैं, लेकिन बेहतर रन रेट के आधार पर आरसीबी शीर्ष पर बनी हुई है। पंजाब किंग्स सात अंकों के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से बनी हुई है। सनराइजर्स हैदराबाद चार मैचों में चार अंकों के साथ चौथे स्थान पर है और लगातार बेहतर प्रदर्शन की तलाश में है। दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस चार चार अंकों के साथ क्रमशः पांचवें और छठे स्थान पर हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स को इस हार का नुकसान हुआ है और टीम सातवें स्थान पर खिसक गई है। चेन्नई सुपर किंग्स आठवें स्थान पर बनी हुई है जबकि मुंबई इंडियंस नौवें स्थान पर संघर्ष कर रही है। कोलकाता नाइट राइडर्स अब तक केवल एक अंक के साथ तालिका में सबसे नीचे है। इस मुकाबले के बाद ऑरेंज कैप की दौड़ में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विराट कोहली ने एक बार फिर अपनी क्लास और निरंतरता का परिचय देते हुए शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। उन्होंने इस मैच में 34 गेंदों पर 49 रन की अहम पारी खेली और पूरे टूर्नामेंट में अब तक उनके कुल रन 228 हो गए हैं। इस प्रदर्शन के साथ वह ऑरेंज कैप की रेस में सबसे आगे पहुंच गए हैं। उनके पीछे हेनरिक क्लासेन 224 रनों के साथ दूसरे स्थान पर हैं जबकि रजत पाटीदार 222 रनों के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद हैं। ईशान किशन और वैभव सूर्यवंशी भी शीर्ष पांच में अपनी जगह बनाए हुए हैं, जिससे बल्लेबाजों के बीच प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प हो गई है। गेंदबाजी विभाग में भी रोमांच लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रसिद्ध कृष्णा ने अपनी शानदार गेंदबाजी के दम पर पर्पल कैप पर कब्जा बनाए रखा है। उन्होंने चार मैचों में दस विकेट हासिल किए हैं और अपनी टीम के लिए लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं। अंशुल कंबोज और प्रिंस यादव भी दस और नौ विकेट के साथ शीर्ष गेंदबाजों में शामिल हैं। रवि बिश्नोई और जोफ्रा आर्चर भी लगातार विकेट निकालकर अपनी टीमों को मजबूती दे रहे हैं। इस सीजन में गेंदबाजों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। आईपीएल 2026 का यह चरण अब पूरी तरह से रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां हर मुकाबला अंकतालिका और व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स को प्रभावित कर रहा है। टीमों के बीच अंतर बेहद कम रह गया है और हर मैच प्लेऑफ की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। दर्शकों की नजरें अब आने वाले मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां प्रतिस्पर्धा और भी तेज होने की उम्मीद है।

राज कपूर ने विरोध के बावजूद अपने रचनात्मक निर्णय पर कायम रहते हुए दिया बड़ा अवसर

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी कहानियां दर्ज हैं जो केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं बल्कि पर्दे के पीछे के फैसलों और रचनात्मक सोच की मिसाल बन गईं। वर्ष 1982 में रिलीज हुई फिल्म प्रेम रोग भी ऐसी ही एक यादगार फिल्म रही, जिसने सामाजिक विषय को बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया। विधवा विवाह जैसे मुद्दे पर आधारित इस फिल्म ने न केवल दर्शकों का ध्यान खींचा बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी मजबूत प्रदर्शन किया। फिल्म में ऋषि कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे की प्रमुख भूमिकाओं के साथ साथ रजा मुराद द्वारा निभाया गया ठाकुर वीरेंद्र प्रताप सिंह का किरदार भी गहरी छाप छोड़ने में सफल रहा। फिल्म के निर्माण से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि इस महत्वपूर्ण किरदार के लिए रजा मुराद का चयन शुरुआती दौर में पूरी तरह सहज नहीं था। उस समय वह इंडस्ट्री में स्थापित नाम नहीं थे और उनका करियर शुरुआती संघर्ष के दौर से गुजर रहा था। फिल्म के दायरे और किरदार की गंभीरता को देखते हुए कुछ लोगों को यह निर्णय उपयुक्त नहीं लगा और इसके खिलाफ मतभेद सामने आए। यहां तक कि कपूर परिवार के कुछ सदस्यों की ओर से भी इस चयन को लेकर असहमति जताई गई थी। हालांकि इन सभी विरोधों के बीच फिल्म के प्रमुख रचनात्मक निर्णयों में राज कपूर का दृष्टिकोण सबसे मजबूत रहा। उन्होंने बिना पूर्वाग्रह के प्रतिभा को पहचानने की अपनी सोच पर भरोसा किया और रजा मुराद को इस किरदार के लिए अंतिम रूप से चुनने का निर्णय लिया। माना जाता है कि उन्होंने एक पुराने प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी और प्रभाव को देखते हुए यह निर्णय लिया था और उसी आधार पर उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना गया। फिल्म के सेट पर शुरुआत में माहौल औपचारिक और चुनौतीपूर्ण था, लेकिन जैसे जैसे शूटिंग आगे बढ़ी, रजा मुराद ने अपने अभिनय से सभी संदेहों को धीरे धीरे खत्म कर दिया। उनका किरदार न केवल कहानी का एक मजबूत स्तंभ बना बल्कि दर्शकों के बीच भी एक प्रभावशाली छवि छोड़ने में सफल रहा। उनके अभिनय की गंभीरता और संवादों की पकड़ ने इस भूमिका को और अधिक प्रभावी बना दिया। सबसे खास बात यह रही कि फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद वही लोग जिन्होंने शुरुआत में इस चयन पर सवाल उठाए थे, उन्होंने भी रजा मुराद के प्रदर्शन को सराहा। यह बदलाव इस बात का संकेत था कि सिनेमा में अंतिम मूल्यांकन हमेशा कलाकार के प्रदर्शन पर आधारित होता है, न कि शुरुआती धारणाओं पर। प्रेम रोग ने यह भी साबित किया कि एक सही निर्णय किसी कलाकार के करियर की दिशा पूरी तरह बदल सकता है। यह फिल्म उस दौर की उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल हो गई जिसने न केवल सामाजिक विषय को गहराई से उठाया बल्कि पर्दे के पीछे की रचनात्मक सोच और साहसिक निर्णयों को भी उजागर किया। राज कपूर का यह निर्णय आज भी फिल्म निर्माण की दुनिया में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में देखा जाता है जहां प्रतिभा को अवसर देना सबसे महत्वपूर्ण माना गया।

रायसेन में गैस सिलेंडर संकट, उपभोक्ताओं ने किया चक्काजाम

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के रायसेन में गुरुवार सुबह गैस सिलेंडर की कमी को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सांची रोड स्थित गैस एजेंसी पर सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं ने सड़क पर उतरकर चक्का जाम कर दिया। सड़क पर सिलेंडर रखकर प्रदर्शनगुस्साए लोगों ने रायसेन-विदिशा रोड पर गैस सिलेंडर रखकर जाम लगा दिया। करीब 10 से 12 मिनट तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। इससे राहगीरों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों लाइन में लगे, फिर भी नहीं मिला सिलेंडरउपभोक्ताओं का कहना है कि वे सुबह से ही एजेंसी के बाहर लंबी कतार में खड़े थे, लेकिन स्टॉक खत्म होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती गई और आखिरकार उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। घरों में शादी-ब्याह, बढ़ी परेशानीकई उपभोक्ताओं ने बताया कि उनके घरों में शादी और अन्य कार्यक्रम हैं, ऐसे में गैस सिलेंडर न मिलने से उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर सिलेंडर न मिलने से रोजमर्रा का काम भी प्रभावित हो रहा है। एजेंसी ने बताया- ऊपर से नहीं आया स्टॉकगैस एजेंसी संचालक ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें सप्लाई ही नहीं मिली है। एजेंसी और गोदाम दोनों जगह सिलेंडर खत्म हो चुके हैं, इसलिए वितरण नहीं किया जा सका। पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चासूचना मिलते ही थाना प्रभारी नरेंद्र गोयल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। लोगों को समझाइश देकर जाम खुलवाया गया। साथ ही एसडीएम ने जल्द समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया। सप्लाई सिस्टम पर उठे सवालइस घटना ने गैस वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय पर सप्लाई सुनिश्चित की जाए, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार का खुलासा, मैनेजर ने मांगी 75% मानदेय की रकम

नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां ब्लॉक मैनेजर पर महिला सखी से मानदेय के बदले 75% तक रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है। 75% तक कमीशन मांगने का आरोपबनखेड़ी की एक महिला बैंक सखी ने आरोप लगाया कि ब्लॉक मैनेजर दुर्गेश अहिरवार ने उसके मानदेय भुगतान के बदले 75 फीसदी रकम मांगी। इतना ही नहीं, पैसे नहीं देने पर उसे काम से हटाने की धमकी भी दी गई।  जांच में मिले सबूतशिकायत के बाद मामले की जांच के लिए जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने दो सदस्यीय टीम गठित की। जांच में प्राथमिक तौर पर रिश्वत मांगने के साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है और जल्द कार्रवाई की बात कही जा रही है। एक हफ्ते में दूसरा मामलायह पहला मामला नहीं है। इससे पहले केसला में लोकायुक्त पुलिस ने 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते तीन लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में:सहायक विकासखंड प्रबंधक धर्मेंद्र गुप्ताक्लस्टर मैनेजरचपरासीको गिरफ्तार किया गया था। ऐसे बिछाया गया जालग्राम पाण्डुखेड़ी की महिला सुनैया बरकड़े से 25 हजार रुपए की मांग की गई थी, जो बाद में 20 हजार में तय हुई। महिला ने लोकायुक्त में शिकायत की, जिसके बाद टीम ने ट्रैप लगाकर तीनों को रिश्वत लेते पकड़ लिया। पूरे सिस्टम पर उठे सवाललगातार सामने आ रहे मामलों से यह साफ है कि जिले में आजीविका मिशन के तहत मानदेय भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शक जताया जा रहा है कि कहीं फर्जी बिल बनाकर भी भुगतान तो नहीं किया जा रहा। प्रशासन सख्तसीईओ हिमांशु जैन ने साफ कहा है कि अगर और अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है, तो नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।