विशेष न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और जांच रिपोर्ट यह दर्शाते हैं कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं था, बल्कि इसके पीछे संगठित साजिश की भूमिका सामने आई है। अदालत ने विनय कुलकर्णी को इस पूरे प्रकरण का प्रमुख सूत्रधार मानते हुए हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
यह घटना 15 जून 2016 की है, जब धारवाड़ में भाजपा नेता और जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेश गौड़ा की उनके जिम परिसर में हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और प्रारंभिक जांच के बाद मामला आगे बढ़ते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचा। विस्तृत जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया गया और अदालत में सुनवाई शुरू हुई।
विनय कुलकर्णी को वर्ष 2020 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें सशर्त जमानत दी गई थी। हालांकि वर्ष 2025 में अदालत ने गवाहों को प्रभावित किए जाने के आरोपों और सबूतों की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया और तेज हो गई थी।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार की संगठित आपराधिक गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं। इसलिए दोषियों को कठोर सजा देना आवश्यक है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि ऐसे अपराधों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सभी दोषियों को हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ आर्थिक दंड भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य संबंधित धाराओं में अलग-अलग सजाएं निर्धारित की गई हैं, जो कानून के अनुसार साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मृतक के परिवार को मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।
इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वर्षों पुराने इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड में अदालत का यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण माना जा रहा है।