राहुल गांधी को बड़ी राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR पर लगाई रोक, दोहरी नागरिकता मामले में जांच जारी रहेगी

नई दिल्ली /प्रयागराज: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता मामले में फिलहाल किसी भी तरह की FIR दर्ज नहीं की जाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले में दिया गया आदेश फिलहाल स्थगित कर दिया है, जिससे राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना संबंधित पक्ष को नोटिस दिए FIR दर्ज करने का निर्देश देना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से पहले सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर मिलना जरूरी है। इससे पहले निचली अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की याचिका को खारिज कर दिया था। मामला वहीं से अपील के जरिए हाईकोर्ट पहुंचा था। शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत ने प्रारंभिक तौर पर FIR दर्ज करने के संकेत दिए थे, जिसके बाद राज्य सरकार को या तो स्वयं जांच करने या मामले को किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर विचार करने को कहा गया था। हालांकि अब उसी आदेश पर रोक लग गई है और अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है। मामला एक शिकायत से जुड़ा है जिसमें राहुल गांधी पर कथित दोहरी नागरिकता को लेकर जांच और FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने इससे पहले विशेष अदालत में भी याचिका दाखिल की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। बाद में यह मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद राहुल गांधी के खिलाफ FIR की प्रक्रिया पर रोक लग गई है, और अब अगली सुनवाई में इस पूरे मामले की कानूनी स्थिति पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
कोयंबटूर के वेलपराई क्षेत्र में टूरिस्ट वैन के खाई में गिरने से केरल के 9 पर्यटकों की मौत हो गई,

नई दिल्ली/तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। वेलपराई पहाड़ी क्षेत्र के पास एक टूरिस्ट वैन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें केरल से घूमने आए नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार केरल के मलप्पुरम से 13 लोगों का एक समूह टूरिस्ट वैन से तमिलनाडु की यात्रा पर आया था। घूमने के बाद सभी लोग वापस लौट रहे थे, तभी यह दर्दनाक घटना हो गई। वेलपराई और पोल्लाची को जोड़ने वाले पहाड़ी मार्ग पर जैसे ही वाहन एक तीखे मोड़ के पास पहुंचा, चालक ने नियंत्रण खो दिया और वैन सड़क किनारे लगे बैरियर से टकराकर गहरी खाई में गिर गई। हादसा इतना भयावह था कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और मौके पर ही आठ लोगों की मौत हो गई। एक अन्य घायल ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों में अधिकतर महिलाएं शामिल बताई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि यात्री समूह में कुछ लोग मलप्पुरम के एक शैक्षणिक संस्थान से जुड़े शिक्षक भी थे, जो पर्यटन के उद्देश्य से यात्रा पर निकले थे। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। खाई में फंसे शवों और घायलों को निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जांच में अनुमान लगाया जा रहा है कि दुर्घटना का कारण तेज रफ्तार और पहाड़ी मार्ग पर वाहन पर नियंत्रण का खो जाना हो सकता है। हालांकि, विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। इस दर्दनाक हादसे पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई गई है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई है। प्रशासन ने भी स्थानीय स्तर पर राहत कार्य तेज कर दिए हैं। यह घटना एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा, वाहन गति नियंत्रण और सतर्क ड्राइविंग की आवश्यकता को गंभीर रूप से उजागर करती है। प्रशासन ने इस मार्ग पर सुरक्षा उपायों की समीक्षा शुरू कर दी है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
गेम शो मनोरंजन में एक बार फिर नया रोमांच लेकर लौट रहा है व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया..

नई दिल्ली: टेलीविजन की दुनिया में मनोरंजन और गेम शो फॉर्मेट का आकर्षण एक बार फिर नए स्तर पर पहुंचने जा रहा है क्योंकि लोकप्रिय शो व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया का दूसरा सीजन जल्द ही दर्शकों के सामने आने की तैयारी में है। पहले सीजन की मजबूत लोकप्रियता और लगातार मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इसके नए संस्करण को हरी झंडी मिल चुकी है। इस बार भी अभिनेता अक्षय कुमार शो के होस्ट के रूप में वापसी करते नजर आएंगे और दर्शकों को एक बार फिर उनके अंदाज में मनोरंजन और रोमांच का मिश्रण देखने को मिलेगा। पहला सीजन इस साल की शुरुआत में प्रसारित हुआ था और इसे दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिला था। शो का फॉर्मेट, जिसमें प्रतिभागियों को पहेलियों और भाग्य आधारित राउंड्स के माध्यम से इनाम जीतने का मौका मिलता है, भारतीय दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ। अक्षय कुमार की सहज प्रस्तुति और प्रतिभागियों के साथ उनका आत्मीय व्यवहार शो की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज संवाद शैली ने कार्यक्रम को पारिवारिक मनोरंजन का स्वरूप दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध इस गेम शो का भारतीय संस्करण लंबे समय से चर्चा में रहा है। इसका मूल फॉर्मेट कई दशकों से वैश्विक टेलीविजन पर लोकप्रियता बनाए हुए है और भारत में इसके अनुकूलन ने इसे नए दर्शक वर्ग तक पहुंचाया है। प्राइज आधारित गेम शो का भारतीय टेलीविजन पर हमेशा से खास स्थान रहा है और इसी श्रेणी में यह शो भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। अक्षय कुमार के लिए टेलीविजन होस्टिंग कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वे कई रियलिटी और गेम आधारित कार्यक्रमों में होस्ट की भूमिका निभा चुके हैं, जहां उनकी उपस्थिति ने शो की लोकप्रियता को बढ़ाया। उनकी शैली में सादगी और मनोरंजन का संतुलन देखने को मिलता है, जो दर्शकों को जोड़कर रखने में मदद करता है। व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया में भी उन्होंने इसी अंदाज को अपनाया और शो को एक अलग पहचान दी। दूसरे सीजन को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और शो के प्रारूप को और अधिक रोचक बनाने पर काम किया जा रहा है। प्रोडक्शन टीम का उद्देश्य है कि इस बार कार्यक्रम को और अधिक इंटरैक्टिव और रोमांचक बनाया जाए ताकि दर्शकों की भागीदारी और रुचि दोनों बढ़ सकें। टीवी इंडस्ट्री में गेम शो की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इस नए सीजन से काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। टेलीविजन पर लगातार बदलते मनोरंजन के स्वरूप के बीच व्हील ऑफ फॉर्च्यून इंडिया जैसे कार्यक्रम दर्शकों को हल्के-फुल्के और पारिवारिक मनोरंजन का विकल्प प्रदान करते हैं। अक्षय कुमार की वापसी इस शो को एक बार फिर चर्चा में ले आई है और दर्शकों में नए सीजन को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है।है।
फर्श से अर्श तक अरशद वारसी का प्रेरणादायक सफर अनाथपन से कॉमेडी के शिखर तक पहुंची एक असाधारण कहानी..

नई दिल्ली: बॉलीवुड में अपनी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय से अलग पहचान बनाने वाले अरशद वारसी का जीवन संघर्ष और सफलता की एक प्रेरक कहानी है। मुन्ना भाई एम बी बी एस में सर्किट के किरदार और गोलमाल सीरीज में माधव जैसे रोल ने उन्हें कॉमेडी के क्षेत्र में मजबूत स्थान दिलाया। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था और इसके पीछे गहरी व्यक्तिगत चुनौतियां और कठिन जीवन परिस्थितियां छिपी हैं। अरशद वारसी का बचपन संघर्षों से भरा रहा। कम उम्र में उन्होंने माता पिता की गंभीर बीमारियों का सामना देखा। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था और घर में संसाधनों की कमी थी। उनके पिता व्यापार में असफल रहे और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहे जबकि उनकी मां लंबे समय तक किडनी की बीमारी से पीड़ित रहीं। नियमित डायलिसिस की वजह से परिवार पर आर्थिक दबाव बना रहता था। इस स्थिति में अरशद ने छोटी उम्र में काम करना शुरू किया और जिम्मेदारियां समय से पहले समझ लीं। बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान वे अकेलेपन से जूझते रहे और खुद को लिखकर व्यक्त करने की आदत विकसित की। अरशद ने कोरियोग्राफी के क्षेत्र में कदम रखा और मंच पर प्रदर्शन करने लगे। यहीं से उनकी आय का छोटा जरिया बना लेकिन पारिवारिक हालात लगातार चुनौतीपूर्ण रहे। माता पिता के निधन ने उन्हें गहरे स्तर पर प्रभावित किया और जीवन को नए सिरे से समझने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने खुद को संभाला और काम की तलाश में फिल्मी दुनिया की ओर रुख किया। संघर्ष के दौर में उन्हें कई छोटे बड़े काम करने पड़े लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ते रहे। फिल्मी करियर की शुरुआत में उन्हें छोटे भूमिकाओं में काम मिला और धीरे धीरे अनुभव बढ़ता गया। शुरुआती संघर्षों के बावजूद उन्होंने अभिनय को सीखने और सुधारने की प्रक्रिया जारी रखी। समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें ऐसे किरदार मिलने लगे जिन्होंने उन्हें पहचान दिलाई। अरशद वारसी के करियर का बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें मुन्ना भाई एम बी बी एस में सर्किट का किरदार मिला। इस भूमिका ने उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई और उनकी कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इसके बाद गोलमाल सीरीज में माधव का किरदार निभाकर उन्होंने कॉमेडी शैली में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। इन किरदारों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी कलाकारों में शामिल कर दिया। आज अरशद वारसी उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों से निकलकर मेहनत और प्रतिभा के दम पर अपनी पहचान बनाई। उनका सफर यह दिखाता है कि संघर्ष चाहे जितना भी बड़ा हो, लगन और आत्मविश्वास से सफलता हासिल की जा सकती है।
एमपी बोर्ड सेकेंड एग्जाम का मौका 10वीं 12वीं के छात्रों के लिए आवेदन शुरू 7 मई से परीक्षा

भोपाल । मध्यप्रदेश में बोर्ड परीक्षा से जुड़े छात्रों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है जहां मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं की द्वितीय परीक्षा को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है इस फैसले के तहत उन छात्रों को बड़ा अवसर मिला है जो मुख्य परीक्षा में असफल रहे हैं या अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय परीक्षा 7 मई 2026 से शुरू होगी इस परीक्षा में न केवल फेल हुए विद्यार्थी बल्कि वे छात्र भी शामिल हो सकेंगे जो अपने प्राप्त अंकों को बेहतर करना चाहते हैं यानी श्रेणी सुधार के इच्छुक छात्र भी इस मौके का लाभ उठा सकते हैं आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है छात्र एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 22 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होगा इसके बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा परीक्षा कार्यक्रम की बात करें तो 10वीं कक्षा की द्वितीय परीक्षा 7 मई से शुरू होकर 19 मई 2026 तक चलेगी वहीं 12वीं कक्षा की परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित की जाएगी इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 5 लाख विद्यार्थी इस द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकते हैं जो इसे एक बड़ा आयोजन बनाता है बोर्ड का यह कदम उन छात्रों के लिए राहत भरा है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए थे अब उन्हें बिना एक साल गंवाए अपनी स्थिति सुधारने का अवसर मिल रहा है इससे छात्रों का शैक्षणिक वर्ष भी सुरक्षित रहेगा और उनके करियर पर नकारात्मक प्रभाव भी कम होगा शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की द्वितीय परीक्षा प्रणाली छात्रों के लिए सकारात्मक पहल है क्योंकि इससे उन्हें एक और मौका मिलता है अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने का साथ ही यह व्यवस्था शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र हितैषी बनाती है कुल मिलाकर मध्यप्रदेश बोर्ड की यह पहल हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है जो अपने परिणाम को सुधारना चाहते हैं या आगे की पढ़ाई में बिना रुकावट के बढ़ना चाहते हैं
अभिनय और किरदार की सच्चाई को लेकर अभिनेत्री ने खोला अपने अनुभवों का राज..

नई दिल्ली: 1993 में रिलीज हुई फिल्म खलनायिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है, क्योंकि इससे जुड़ा एक पुराना दृश्य और अभिनेत्री अनु अग्रवाल की हालिया टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आई है। आशिकी से पहचान बनाने वाली अनु अग्रवाल ने इस फिल्म में अपने किरदार और उस समय चर्चा में रहे एक विशेष सीन को लेकर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि जिसे उस समय विवादित या बोल्ड माना गया था, वह उनके लिए केवल कहानी और किरदार की स्वाभाविक मांग थी। अनु अग्रवाल ने बताया कि खलनायिका में उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया था जो परिस्थितियों और कहानी के अनुसार जटिल भावनाओं से गुजरती है। फिल्म के एक दृश्य में उन्हें एक बच्चे को दूध पिलाते हुए दिखाया गया था, जिसे लेकर उस समय काफी बहस हुई थी। हालांकि अभिनेत्री का मानना है कि अभिनय का उद्देश्य किसी दृश्य को बाहरी नजर से जज करना नहीं होता, बल्कि उसे किरदार की परिस्थिति में समझकर निभाना होता है। उनका कहना है कि एक कलाकार को अक्सर अपनी व्यक्तिगत सोच से ऊपर उठकर किरदार की भावनाओं और कहानी की जरूरतों के अनुसार काम करना पड़ता है। इसी कारण उन्होंने उस दृश्य को भी सामान्य अभिनय प्रक्रिया का हिस्सा माना और उसे उसी दृष्टिकोण से निभाया। फिल्म खलनायिका एक ऐसी कहानी पर आधारित थी जिसमें एक महिला अपने जीवन में मिले संघर्षों और अन्याय के बाद बदले की भावना से आगे बढ़ती है। कहानी में कई भावनात्मक और तीव्र मोड़ शामिल थे, जिनके कारण फिल्म अपने समय में चर्चा का विषय बनी रही। अनु अग्रवाल ने अपने करियर की शुरुआत 1990 के दशक में की थी और उस दौर में उन्होंने कई फिल्मों में काम करके अपनी पहचान बनाई। बाद में एक गंभीर दुर्घटना ने उनके जीवन को बदल दिया, लेकिन वे समय समय पर अपने अनुभवों और फिल्मों से जुड़े पुराने पलों को साझा करती रहती हैं। उनका कहना है कि फिल्मों में हर दृश्य को कहानी और किरदार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, क्योंकि अभिनय केवल अभिनय नहीं बल्कि एक परिस्थिति को जीने की प्रक्रिया होती है।
एमपी सरकार का बड़ा ऐलान गेहूं बिक्री के लिए अब ज्यादा समय और ज्यादा सुविधा

भोपाल । मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरा फैसला सामने आया है जहां राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि को बढ़ा दिया है अब किसान 30 अप्रैल 2026 तक गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे यह निर्णय किसानों को अधिक समय और सुविधा देने के उद्देश्य से लिया गया है जिससे वे बिना किसी जल्दबाजी के अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच सकें डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि में 6 दिन की वृद्धि की है इसके साथ ही एक और अहम बदलाव करते हुए स्लॉट बुकिंग की क्षमता को भी बढ़ा दिया गया है पहले जहां एक स्लॉट में 1000 क्विंटल गेहूं की सीमा तय थी वहीं अब इसे बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दिया गया है इस फैसले से बड़े और मध्यम किसानों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो प्रदेश में गेहूं खरीदी का काम तेजी से चल रहा है आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है इसके एवज में किसानों के खातों में 355 करोड़ 3 लाख रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है यह भुगतान सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए आगे आ रहे हैं अब तक 4 लाख 22 हजार 848 किसानों ने 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक कराए हैं इससे साफ है कि इस बार गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों में उत्साह देखने को मिल रहा है राज्य सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं इन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं जैसे छायादार बैठने की व्यवस्था स्वच्छ पेयजल बारदाने तौल कांटे सिलाई मशीन कंप्यूटर इंटरनेट और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं इसके अलावा उपज की सफाई के लिए पंखे और छनने की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े वर्ष 2026 27 के लिए सरकार ने गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया है इसमें केंद्र सरकार द्वारा तय 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार की ओर से 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी शामिल है इस मूल्य से किसानों को उनकी उपज का बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए 19 लाख 4 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख 60 हजार अधिक है यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार की योजनाओं पर किसानों का भरोसा बढ़ा है पिछले साल जहां लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस साल 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय किसानों के लिए राहत और सुविधा दोनों लेकर आया है जिससे उन्हें अपनी मेहनत की उपज का उचित मूल्य पाने में मदद मिलेगी और खरीदी प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सकेगी
स्पाइस बोर्ड में रिसर्च ट्रेनी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, 30 अप्रैल को वॉक इन टेस्ट से होगा चयन, कृषि शोध में युवाओं के लिए सुनहरा अवसर

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम:केरल स्थित मसाला बोर्ड ने भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान में रिसर्च ट्रेनी पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह अवसर विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के योग्य उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध कराया गया है। कुल पांच पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जिनमें कृषि विज्ञान और मृदा विज्ञान से जुड़े दो पद तथा पादप रोग विज्ञान से जुड़े तीन पद शामिल हैं। इन पदों के लिए चयन प्रक्रिया वॉक इन टेस्ट के माध्यम से पूरी की जाएगी। इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के साथ लिखित परीक्षा, दक्षता परीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन शामिल रहेगा। चयनित अभ्यर्थियों को प्रति माह 21 हजार रुपये का स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा। वॉक इन टेस्ट का आयोजन 30 अप्रैल को सुबह 10 बजे निर्धारित स्थान पर किया जाएगा। उम्मीदवारों को निर्देश दिया गया है कि वे परीक्षा स्थल पर समय से कम से कम एक घंटा पहले उपस्थित हों ताकि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके। योग्यता मानदंड के अनुसार कृषि विज्ञान और मृदा विज्ञान पद के लिए उम्मीदवार के पास कृषि विज्ञान, मृदा विज्ञान, जैव रसायन, रसायन विज्ञान, बागवानी या पर्यावरण विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री होना आवश्यक है और न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य रखे गए हैं। वहीं पादप रोग विज्ञान पद के लिए कृषि विषय में पादप रोग विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान या बागवानी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री जरूरी है। इसके साथ ही कंप्यूटर का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले और संबंधित क्षेत्र में अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। इस भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 12 मार्च के आधार पर की जाएगी। चयन प्रक्रिया पूरी तरह वॉक इन टेस्ट आधारित होगी, जिसमें उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और व्यावहारिक क्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को मसाला फसलों और विशेष रूप से इलायची से जुड़े अनुसंधान कार्यों में योगदान देना होगा। यह भर्ती कृषि और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। इससे न केवल शोध कार्यों को मजबूती मिलेगी बल्कि कृषि विज्ञान के क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास को भी गति मिलेगी।
आईपीएल 2026 में रिंकू सिंह का खराब प्रदर्शन टीम के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। फॉर्म में वापसी अब बेहद जरूरी हो गई है।

नई दिल्ली/कोलकाता। कभी आखिरी ओवर में लगातार पांच छक्के लगाकर क्रिकेट जगत में सनसनी मचाने वाले रिंकू सिंह इस समय अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। आईपीएल 2026 में उनका लगातार खराब प्रदर्शन न केवल उनकी व्यक्तिगत फॉर्म पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम संतुलन और रणनीति को भी प्रभावित कर रहा है। जिस खिलाड़ी को टीम का सबसे भरोसेमंद फिनिशर माना जाता था, वही अब संघर्ष करता नजर आ रहा है। 9 अप्रैल 2023 का वह मुकाबला आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक पलों में गिना जाता है, जब रिंकू सिंह ने असंभव को संभव कर दिखाया था। आखिरी ओवर में 29 रन की जरूरत थी और उन्होंने लगातार पांच छक्के लगाकर टीम को यादगार जीत दिलाई थी। उस पारी के बाद रिंकू सिंह को एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में देखा जाने लगा, जो किसी भी मुश्किल परिस्थिति में मैच का रुख बदल सकता है। उनकी इसी क्षमता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट में एक खास पहचान दिलाई। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में भी मौके मिले और उन्होंने कई अहम पारियां खेलकर अपनी उपयोगिता साबित की। हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय सफर पूरी तरह स्थिर नहीं रहा और उन्हें टीम में जगह बनाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा। इसके बावजूद केकेआर ने उन पर पूरा भरोसा जताया और उन्हें लंबे समय तक टीम के साथ बनाए रखा। आईपीएल 2025 में टीम ने उन्हें बड़ी कीमत पर रिटेन किया और भविष्य के प्रमुख खिलाड़ी के रूप में देखा। मौजूदा सीजन में उनकी फॉर्म ने सभी को निराश किया है। आईपीएल 2026 में वह रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और कई पारियों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। चाहे उन्हें ऊपरी क्रम में भेजा जाए या निचले क्रम में, उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास की कमी साफ दिखाई दे रही है। उनके शॉट चयन और टाइमिंग में भी वह धार नजर नहीं आ रही, जिसने उन्हें कभी खतरनाक बल्लेबाज बनाया था। रिंकू सिंह की खराब फॉर्म का सीधा असर टीम के प्रदर्शन पर भी पड़ा है। मध्यक्रम में स्थिरता की कमी के कारण टीम को निर्णायक मौकों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक समय जिस खिलाड़ी पर टीम को सबसे ज्यादा भरोसा था, वही अब टीम के लिए चिंता का कारण बन गया है। उनकी असफलता ने टीम प्रबंधन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। आने वाले समय में रिंकू सिंह के लिए यह दौर बेहद अहम साबित हो सकता है। यदि वह जल्द ही अपनी लय में वापसी नहीं करते हैं, तो टीम संयोजन में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लंबे समय से टीम का हिस्सा रहे इस खिलाड़ी के सामने अब खुद को फिर से साबित करने की चुनौती है और इसके लिए उन्हें अपने खेल में निरंतर सुधार करना होगा।
शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल में किया प्रदर्शन, TET अनिवार्यता का विरोध, बड़े आंदोलन की चेतावनी

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। दशहरा मैदान में जुटी भारी भीड़ भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया, जिससे कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा।TET अनिवार्यता पर जताया विरोध संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा दिलवाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें अन्य कार्यों, जैसे जनगणना, में न लगाया जाए।भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। दशहरा मैदान में जुटी भारी भीड़ भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया, जिससे कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा।TET अनिवार्यता पर जताया विरोध संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा दिलवाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें अन्य कार्यों, जैसे जनगणना, में न लगाया जाए।सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता शिक्षकों का दावा है कि हालिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, खासकर वे जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक बने। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है। सेवा गणना और पेंशन को लेकर नाराजगी संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही TET अनिवार्यता से भविष्य में पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। शिक्षकों ने आखिर में एमपी नगर एसडीएम एल.के खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। इसके साथ ही दिन भर चला यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया। जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो जून में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी क्रम में भोपाल में यह राज्य स्तरीय आंदोलन आयोजित किया गया। शिक्षकों का दावा है कि हालिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, खासकर वे जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक बने। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।सेवा गणना और पेंशन को लेकर नाराजगी संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही TET अनिवार्यता से भविष्य में पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। शिक्षकों ने आखिर में एमपी नगर एसडीएम एल.के खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। इसके साथ ही दिन भर चला यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया। जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो जून में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी क्रम में भोपाल में यह राज्य स्तरीय आंदोलन आयोजित किया गया।