अनु अग्रवाल ने बताया कि खलनायिका में उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया था जो परिस्थितियों और कहानी के अनुसार जटिल भावनाओं से गुजरती है। फिल्म के एक दृश्य में उन्हें एक बच्चे को दूध पिलाते हुए दिखाया गया था, जिसे लेकर उस समय काफी बहस हुई थी। हालांकि अभिनेत्री का मानना है कि अभिनय का उद्देश्य किसी दृश्य को बाहरी नजर से जज करना नहीं होता, बल्कि उसे किरदार की परिस्थिति में समझकर निभाना होता है।
उनका कहना है कि एक कलाकार को अक्सर अपनी व्यक्तिगत सोच से ऊपर उठकर किरदार की भावनाओं और कहानी की जरूरतों के अनुसार काम करना पड़ता है। इसी कारण उन्होंने उस दृश्य को भी सामान्य अभिनय प्रक्रिया का हिस्सा माना और उसे उसी दृष्टिकोण से निभाया।
फिल्म खलनायिका एक ऐसी कहानी पर आधारित थी जिसमें एक महिला अपने जीवन में मिले संघर्षों और अन्याय के बाद बदले की भावना से आगे बढ़ती है। कहानी में कई भावनात्मक और तीव्र मोड़ शामिल थे, जिनके कारण फिल्म अपने समय में चर्चा का विषय बनी रही।
अनु अग्रवाल ने अपने करियर की शुरुआत 1990 के दशक में की थी और उस दौर में उन्होंने कई फिल्मों में काम करके अपनी पहचान बनाई। बाद में एक गंभीर दुर्घटना ने उनके जीवन को बदल दिया, लेकिन वे समय समय पर अपने अनुभवों और फिल्मों से जुड़े पुराने पलों को साझा करती रहती हैं।
उनका कहना है कि फिल्मों में हर दृश्य को कहानी और किरदार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, क्योंकि अभिनय केवल अभिनय नहीं बल्कि एक परिस्थिति को जीने की प्रक्रिया होती है।