आरबीआई ने बंद नोटों को बदलने के लिए नहीं जारी किया कोई नया नियम..

नई दिल्ली। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाओं का प्रवाह जितनी तेजी से होता है उतनी ही तेजी से भ्रामक और गलत जानकारियां भी समाज में फैलती हैं। हाल ही में विभिन्न संदेशों और चर्चाओं के माध्यम से यह दावा किया जा रहा था कि केंद्रीय बैंक ने काफी समय पहले चलन से बाहर हो चुके पुराने नोटों को बदलने के लिए एक और अवसर प्रदान किया है और इसके लिए नए नियम भी जारी किए गए हैं। आधिकारिक जांच और तथ्यों के गहन विश्लेषण के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि इस प्रकार का कोई भी दावा सत्य नहीं है। प्रशासन ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि पुरानी मुद्रा को बदलने के संबंध में किसी भी प्रकार का कोई नया बदलाव या घोषणा नहीं की गई है। भ्रामक खबरों का उद्देश्य अक्सर नागरिकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा करना होता है। विशेषकर वित्तीय मामलों में इस तरह की अफवाहें लोगों को गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यह देखा गया है कि साल 2016 में बंद किए गए उच्च मूल्य के नोटों को लेकर समय-समय पर इस तरह की मनगढ़ंत कहानियां साझा की जाती हैं। जिम्मेदार अधिकारियों ने एक बार फिर यह दोहराया है कि इन नोटों को बदलने की समय सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है और वर्तमान में ऐसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। जनता को यह समझना होगा कि किसी भी महत्वपूर्ण वित्तीय नीति में बदलाव की जानकारी हमेशा आधिकारिक और औपचारिक माध्यमों से ही सार्वजनिक की जाती है और व्यक्तिगत स्तर पर प्रसारित होने वाले संदेशों की कोई कानूनी वैधता नहीं होती है। आर्थिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह अनिवार्य है कि लोग किसी भी संदिग्ध जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करें। केवल मुद्रा ही नहीं बल्कि बैंकिंग सेवाओं और निवेश की योजनाओं को लेकर भी अक्सर फर्जी दावे किए जाते हैं ताकि भोले-भाले लोगों को वित्तीय जाल में फंसाया जा सके। कभी खातों को बंद करने का डर दिखाया जाता है तो कभी कम समय में धन दोगुना करने का प्रलोभन दिया जाता है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत जानकारी साझा करना या किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना खतरनाक साबित हो सकता है। समाज के हर वर्ग को इस बात के लिए जागरूक होना चाहिए कि वे किसी भी अपुष्ट संदेश को बिना सोचे-समझे दूसरों के साथ साझा न करें। सरकार और संबंधित विभाग लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं कि आम जनता तक केवल सही और प्रमाणित जानकारी ही पहुंचे। फर्जी खबरों के इस तंत्र को तोड़ने के लिए नागरिकों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत की सत्यता परखना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वित्तीय नियमों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन होने पर उसकी सूचना व्यापक रूप से सार्वजनिक की जाएगी। तब तक किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और अपनी व्यक्तिगत व वित्तीय सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सजग रहें। सतर्कता और सही जानकारी ही इस प्रकार के डिजिटल भ्रम से बचने का एकमात्र प्रभावी उपाय है।
सतना के देवलहा बीट में आग का तांडव वनकर्मी बेहोश सैकड़ों पेड़ पौधे जलकर नष्ट

सतना । सतना जिले के वन मंडल अंतर्गत मझगवां रेंज के रोहनिया गांव के पास स्थित देवलहा बीट में अचानक भड़की भीषण आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया आग कक्ष क्रमांक पी 839 और पी 840 के जंगल में अज्ञात कारणों से शुरू हुई और देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया तेज हवाओं और सूखी झाड़ियों के कारण आग ने इतनी तेजी पकड़ी कि लगभग पंद्रह से बीस हेक्टेयर वन क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लपटें दस से बारह फीट तक ऊंची उठ रही थीं और दूर से ही धुएं का गुबार आसमान में फैलता नजर आ रहा था आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल बन गया वहीं वन विभाग को जैसे ही सूचना मिली पूरा अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया प्रभारी रेंजर अभिषेक मिश्रा के अनुसार आग मुख्य रूप से लेंटाना और सूखी झाड़ियों में लगी थी लेकिन हवा की तेज रफ्तार और तुलसा की सूखी वनस्पतियों ने इसे और भड़काने का काम किया जिससे आग पर नियंत्रण पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि आग तेजी से फैलते हुए बड़े हिस्से को अपनी चपेट में लेती चली गई आग बुझाने के लिए वन विभाग के करीब पच्चीस सुरक्षा श्रमिकों की टीम को मैदान में उतारा गया जिन्होंने फायर बीटर्स और लीफ ब्लोअर जैसे उपकरणों की मदद से लगातार सात घंटे तक संघर्ष किया यह एक कठिन और जोखिम भरा अभियान था जिसमें हर पल सतर्कता और साहस की जरूरत थी आखिरकार लंबी मशक्कत के बाद रात करीब आठ बजे आग पर काबू पाया जा सका इस दौरान आग की भीषण गर्मी और धुएं के कारण दो वनकर्मी रामकृष्ण पांडेय और गोविंद यादव बेहोश हो गए दोनों को तत्काल मझगवां के शासकीय चिकित्सालय ले जाया गया जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत अब स्थिर है और लगभग तीन घंटे बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई इस घटना ने एक बार फिर जंगलों में बढ़ते आग के खतरे और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं गर्मी के मौसम में सूखी वनस्पतियां और तेज हवाएं ऐसी घटनाओं को और खतरनाक बना देती हैं वन विभाग के लिए यह एक चेतावनी भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता और मजबूत इंतजाम किए जाएं देवलहा का यह अग्निकांड न केवल वन संपदा के नुकसान की कहानी कहता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए कितनी बड़ी चुनौती सामने खड़ी है समय रहते ठोस कदम उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के विपरीत दृष्टिकोणों ने इंडस्ट्री में बढ़ाई नई बहस..

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा में काम के घंटों और कार्य संस्कृति को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। 8 घंटे की शिफ्ट की मांग ने फिल्म इंडस्ट्री में नई चर्चा को जन्म दिया है और यह मुद्दा अब केवल व्यक्तिगत राय तक सीमित न रहकर व्यापक पेशेवर विमर्श का हिस्सा बन चुका है। हाल के समय में यह विषय तब और अधिक चर्चा में आया जब दीपिका पादुकोण ने मातृत्व के बाद काम के संतुलन और सीमित कार्य घंटों की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि लगातार लंबे समय तक काम करना केवल पेशेवर प्रतिबद्धता का पैमाना नहीं हो सकता, बल्कि यह कलाकारों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ विषय है। इस विचार ने फिल्म जगत में एक नई बहस को जन्म दिया है जिसमें काम की गुणवत्ता और कलाकारों की भलाई के बीच संतुलन को लेकर अलग अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। दीपिका पादुकोण का दृष्टिकोण यह है कि किसी भी पेशेवर क्षेत्र में काम के घंटे तय होने चाहिए ताकि कलाकार अपने निजी और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बना सकें। उनका मानना है कि लंबे शूटिंग शेड्यूल कई बार रचनात्मकता पर दबाव डालते हैं और यह थकान प्रदर्शन को भी प्रभावित कर सकती है। इसी कारण वह कार्य समय को सीमित और व्यवस्थित रखने की बात करती हैं ताकि काम की गुणवत्ता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रह सकें। वहीं रणवीर सिंह का नजरिया इस मुद्दे पर बिल्कुल अलग दिखाई देता है। उनका मानना है कि फिल्म निर्माण एक रचनात्मक प्रक्रिया है जिसमें समय की सीमा कई बार बाधा बन सकती है। उनके अनुसार जब तक किसी दृश्य की आवश्यकता पूरी न हो जाए तब तक शूटिंग जारी रहनी चाहिए। वे काम को केवल एक औपचारिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखते बल्कि इसे एक ऐसी यात्रा मानते हैं जिसमें अंतिम परिणाम और प्रदर्शन की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार फिल्म निर्माण में कई बार निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा करना कठिन हो जाता है इसलिए अतिरिक्त समय देना प्रक्रिया का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि लंबे शूटिंग शेड्यूल के दौरान सह कलाकारों को भी अधिक समय देना पड़ता है लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा बेहतर दृश्य और प्रभावशाली प्रदर्शन हासिल करना होता है। इस पूरे मुद्दे ने फिल्म इंडस्ट्री में एक व्यापक बहस को जन्म दिया है जिसमें कार्य संस्कृति, कलाकारों का स्वास्थ्य, रचनात्मक स्वतंत्रता और पेशेवर अनुशासन जैसे पहलू शामिल हैं। यह चर्चा केवल दो दृष्टिकोणों तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे उद्योग में काम करने के तरीकों पर पुनर्विचार की आवश्यकता को दर्शाती है। समय के साथ यह विषय और अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है क्योंकि बदलते समय में काम और जीवन के संतुलन को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
कांग्रेस ने हिमाचल में 71 ब्लॉक अध्यक्ष किए नियुक्त, एक भी महिला को नहीं मिली जगह

नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश में संगठन विस्तार के तहत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ी स्तर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति की है। कुल 71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची जारी की गई है, लेकिन इस सूची में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है। संगठन विस्तार में नई नियुक्तियां कांग्रेस द्वारा जारी सूची के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर नए अध्यक्षों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, ऊना, हमीरपुर, सोलन, सिरमौर, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसे सभी जिलों को शामिल किया गया है। नालागढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बने बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति पर हाईकमान का आभार जताया और इसे बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि वे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलेंगे। नेताओं ने जताया नेतृत्व पर भरोसा बाबूराम ठाकुर ने अपनी नियुक्ति को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उन्होंने मुकेश अग्निहोत्री, प्रतिभा सिंह, विक्रमादित्य सिंह और अन्य नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। जमीनी संगठन को मजबूत करने का दावा नवनियुक्त अध्यक्षों ने कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करेंगे और कार्यकर्ताओं के सम्मान को प्राथमिकता देंगे। साथ ही, किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय लेने की बात भी कही गई। जिलावार नियुक्तियां पूरी सूची के अनुसार सभी जिलों में ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई है, जिनमें चंबा, कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, सोलन, सिरमौर, शिमला और अन्य जिले शामिल हैं। महिला प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल हालांकि संगठन विस्तार के इस कदम के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इतने बड़े स्तर पर नियुक्तियों के बावजूद किसी भी महिला को ब्लॉक अध्यक्ष नहीं बनाया गया। यह मुद्दा राजनीतिक बहस का नया विषय बन सकता है, खासकर उस समय जब महिला प्रतिनिधित्व और आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।
F-47 Jet: अमेरिका का सबसे एडवांस और महंगा फाइटर जेट हो रहा तैयार, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

नई दिल्ली । दुनियाभर में बदलते सामरिक हालात और बढ़ते एरियल थ्रेट के बीच आधुनिक फाइटर जेट्स की रेस और तेज हो गई है। लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन तकनीक ने सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना दिया है, जिसके चलते कई देश नई पीढ़ी के एयर डिफेंस सिस्टम और फाइटर एयरक्राफ्ट विकसित कर रहे हैं। भारत का ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ और अमेरिका का ‘गोल्डन डोम’ इसी दिशा में बड़े प्रयास माने जा रहे हैं। 6th जेनरेशन फाइटर जेट पर फोकस इसी बदलाव के बीच अब छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर दुनिया का ध्यान केंद्रित हो गया है। यूरोप, भारत और अमेरिका सभी अपने-अपने एडवांस एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। भारत ने जहां AMCA प्रोजेक्ट शुरू किया है, वहीं अमेरिका ने अपने नए फाइटर जेट प्रोग्राम के तहत Boeing को बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया है। अमेरिका के इस नए फाइटर जेट का नाम F-47 रखा गया है, जिसे F-22 Raptor का अगला और ज्यादा एडवांस संस्करण माना जा रहा है। कीमत ने उड़ाए होश F-47 को दुनिया का सबसे महंगा फाइटर जेट बताया जा रहा है। इसकी प्रति यूनिट कीमत करीब 300 मिलियन डॉलर (लगभग 3000 करोड़ रुपये) आंकी गई है। यह F-35 की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा महंगा है। इस कीमत में लगभग 4 से 5 हल्के लड़ाकू विमान HAL Tejas खरीदे जा सकते हैं, जिसकी एक यूनिट लागत करीब 600–650 करोड़ रुपये बताई जाती है। F-47 को केवल एक लड़ाकू विमान नहीं बल्कि डिजिटल क्वार्टरबैक की तरह डिजाइन किया जा रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑल-एंगल स्टील्थ और एडवांस मिशन सिस्टम जैसी तकनीकें शामिल होंगी। यह विमान मानव रहित ड्रोन (CCA) के साथ मिलकर काम करेगा और पूरे नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध संचालन का नेतृत्व करेगा। भारी-भरकम बजट खर्च इस प्रोजेक्ट पर अब तक अरबों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं और आने वाले वर्षों में इसमें और तेजी लाई जा रही है। अमेरिकी वायुसेना का लक्ष्य 185 से अधिक F-47 विमान तैयार करने का है, जो F-22 बेड़े के बराबर होंगे। हालांकि, इस परियोजना को फंडिंग और अन्य रक्षा कार्यक्रमों से प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। F-22 की विरासत और आगे की रणनीति F-47 को F-22 की तकनीकी विरासत को आगे बढ़ाने वाला विमान माना जा रहा है, लेकिन इसकी भूमिका और भी व्यापक होगी। यह अकेले लड़ाई लड़ने के बजाय ड्रोन और अन्य सिस्टम के साथ मिलकर एक समन्वित युद्ध नेटवर्क का हिस्सा होगा। वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और चीन जैसे देशों द्वारा छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर काम करने के चलते अमेरिका इस प्रोजेक्ट को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मान रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान विवाह पर रोक के विवादित फरमान से छात्राओं का भविष्य अधर में, संस्थान ने दी नामांकन रद्द करने की धमकी।

नई दिल्ली: बिहार के गोपालगंज जिले में एक शैक्षणिक संस्थान द्वारा जारी किए गए अनूठे और सख्त आदेश ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संस्थानिक नियमों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जिले के एक प्रतिष्ठित स्वास्थ्य प्रशिक्षण संस्थान में प्रशासन द्वारा जारी एक आधिकारिक सूचना ने छात्राओं के बीच हड़कंप मचा दिया है। संस्थान परिसर में चस्पा किए गए इस निर्देश में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया गया है कि प्रशिक्षण की निर्धारित अवधि के दौरान कोई भी छात्रा विवाह के बंधन में नहीं बंध सकती है। आदेश में इस बात का भी कड़ाई से उल्लेख किया गया है कि यदि कोई छात्रा इस नियम का उल्लंघन करती है या चोरी-छिपे विवाह कर लेती है, तो उसका नामांकन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा और उसे अपना प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ना होगा। इस कठोर निर्णय के पीछे संस्थान प्रशासन का अपना तर्क है। अधिकारियों का मानना है कि नर्सिंग और स्वास्थ्य से जुड़े पाठ्यक्रम अत्यंत संवेदनशील और आवासीय प्रकृति के होते हैं जिनमें शत-प्रतिशत उपस्थिति और मानसिक एकाग्रता की आवश्यकता होती है। प्रशासन के अनुसार शैक्षणिक सत्र के मध्य में विवाह करने से छात्राओं का ध्यान अपनी पढ़ाई और नैदानिक अभ्यास से भटक जाता है जिससे उनके व्यावसायिक कौशल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रवेश के समय ही छात्राओं से इस आशय का एक शपथ पत्र लिया जाता है जिसमें वे पाठ्यक्रम पूर्ण होने तक अविवाहित रहने की प्रतिबद्धता जताती हैं। संस्थान का दावा है कि यह नियम अनुशासन सुनिश्चित करने और भविष्य के कुशल स्वास्थ्य कर्मियों को तैयार करने के उद्देश्य से बनाया गया है। जैसे ही यह आदेश सार्वजनिक हुआ इसे लेकर नागरिक समाज और कानूनी विशेषज्ञों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। कई जानकारों ने इसे छात्राओं के मौलिक अधिकारों का सीधा हनन और उनकी व्यक्तिगत पसंद के संवैधानिक अधिकार में अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया है। आलोचकों का मानना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही वयस्क छात्राओं पर इस तरह के प्रतिबंध लगाना न केवल सामाजिक रूप से पिछड़ापन दर्शाता है बल्कि यह कानून की नजर में भी अनुचित है। मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते विरोध को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाया है। संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस आदेश की वैधानिकता की जांच के निर्देश दिए हैं और संस्थान के प्रबंधन से इस संबंध में विस्तृत जवाब तलब किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि किसी भी संस्थान के आंतरिक नियम देश के कानूनों और व्यक्तिगत गरिमा से ऊपर नहीं हो सकते। प्राथमिक जांच के आदेश जारी होने के बाद फिलहाल इस विवादित निर्देश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या इस तरह के नियम किसी सरकारी नियमावली का हिस्सा हैं या यह केवल संस्थान की अपनी उपज है। इस घटना ने पूरे प्रदेश में शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली और वहां लागू होने वाले मनमाने नियमों की सीमाओं पर एक गंभीर विमर्श को जन्म दे दिया है। वर्तमान में इस आदेश को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और छात्राएं अपनी शैक्षणिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि किसी भी छात्रा के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और नियमों की समीक्षा कर एक न्यायसंगत समाधान निकाला जाएगा। यह मामला अब केवल एक संस्थान तक सीमित न रहकर व्यक्तिगत स्वायत्तता और शिक्षा के अधिकार के बीच एक बड़े विधिक प्रश्न के रूप में उभरकर सामने आया है जिसका परिणाम भविष्य में अन्य संस्थानों के लिए भी एक नजीर साबित हो सकता है।
वरुण चक्रवर्ती ने रचा नया इतिहास कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए सौ विकेट लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने

नई दिल्ली/अहमदाबाद। क्रिकेट के सबसे लोकप्रिय टी20 मंच पर अपनी फिरकी का जादू बिखेर रहे मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। गुजरात के खिलाफ खेले गए मुकाबले में अपनी धारदार गेंदबाजी के दम पर चक्रवर्ती ने अपनी टीम के लिए एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जिसे अब तक कोई भी भारतीय गेंदबाज इस विशेष फ्रैंचाइजी के लिए हासिल नहीं कर पाया था। वरुण चक्रवर्ती अब कोलकाता की टीम की ओर से खेलते हुए इस प्रतियोगिता में सौ विकेट पूरे करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इस शानदार उपलब्धि के साथ ही उन्होंने टीम के गौरवशाली इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है। मैदान पर अपनी विविधताओं और सटीक लाइन लेंथ के लिए मशहूर चक्रवर्ती ने जैसे ही इस मैच में अपना शिकार किया वैसे ही उन्होंने इस जादुई आंकड़े को छू लिया। टीम के इतिहास पर नजर डालें तो उनसे पहले केवल दो विदेशी गेंदबाजों ने ही इस फ्रैंचाइजी के लिए सौ से अधिक विकेट लेने का कारनामा किया था। वरुण चक्रवर्ती अब इस विशिष्ट क्लब में शामिल होने वाले तीसरे गेंदबाज और पहले भारतीय बन गए हैं। उनकी इस सफलता ने न केवल टीम के गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती प्रदान की है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि वे आधुनिक क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली स्पिनरों में से एक हैं। मुकाबले के दौरान चक्रवर्ती ने विपक्षी बल्लेबाजों को अपनी फिरकी के जाल में फंसाए रखा और रन गति पर पूरी तरह लगाम लगाए रखी। उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने महत्वपूर्ण समय पर टीम को सफलता दिलाई जिससे विरोधी टीम बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने में नाकाम रही। वरुण चक्रवर्ती का इस प्रतियोगिता में करियर उतार चढ़ाव भरा रहा है लेकिन पिछले कुछ सत्रों से उन्होंने अपनी निरंतरता और कौशल से सबको प्रभावित किया है। एक अभ्यास गेंदबाज से लेकर एक प्रमुख विकेट लेने वाले गेंदबाज तक का उनका सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। गेंदबाजी विभाग में चक्रवर्ती की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है और उन्होंने कई मौकों पर अकेले दम पर मैच का रुख मोड़ा है। सौ विकेटों का यह आंकड़ा पार करना उनकी मेहनत और खेल के प्रति उनके समर्पण का परिणाम है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि चक्रवर्ती की गेंदबाजी में जो रहस्य है वह बल्लेबाजों के लिए आज भी एक बड़ी पहेली बना हुआ है। इस मील के पत्थर को छूने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि वे आने वाले मैचों में और भी कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम करेंगे। उनकी यह उपलब्धि भारतीय घरेलू प्रतिभा की ताकत को भी वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करती है।
Venus Transit 2026: शुक्र के मिथुन राशि में गोचर से इन राशियों को होगा लाभ, खुलेंगे सुख-समृद्धि के रास्ते

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुख, सौंदर्य, प्रेम और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। जब भी यह ग्रह अपनी स्थिति बदलता है, तो इसका असर व्यक्ति के जीवन, आर्थिक स्थिति और जीवनशैली पर गहराई से पड़ता है। वर्ष 2026 में 14 मई को शुक्र देव अपनी स्वराशि वृषभ से निकलकर बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे। यह गोचर कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और जीवन में सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी का संकेत माना जा रहा है। बुध–शुक्र का शुभ संयोग बुध और शुक्र के बीच मित्रता का संबंध माना जाता है। मिथुन राशि में शुक्र का प्रवेश एक सकारात्मक योग बना रहा है। इस अवधि में लोगों की संवाद क्षमता, रचनात्मकता और व्यापारिक समझ में वृद्धि होगी। साथ ही विलासिता से जुड़ी वस्तुओं की मांग बढ़ने और बाजार में हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया, फैशन और मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है। इन राशियों पर होगा प्रभाव, बदलेगी किस्मत मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर करियर में नई ऊर्जा लेकर आएगा। तीसरे भाव में शुक्र के प्रभाव से साहस और आत्मविश्वास बढ़ेगा। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और रुका हुआ धन मिलने की संभावना बनेगी। जीवन में सुख-सुविधाओं में भी वृद्धि होगी। मिथुन राशि शुक्र के अपनी ही राशि के लग्न भाव में आने से मिथुन राशि वालों का व्यक्तित्व और आकर्षण बढ़ेगा। आत्मविश्वास मजबूत होगा और लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे। रिश्तों में मजबूती आने की संभावना है और समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है। कन्या राशि कन्या राशि के लिए यह गोचर कर्म भाव में शुभ प्रभाव डालेगा। कार्यक्षेत्र में आपके काम की सराहना होगी और पदोन्नति के अवसर बन सकते हैं। घर या वाहन खरीदने की योजना के लिए यह समय अनुकूल माना जा रहा है। शुक्र को मजबूत करने के उपाय शुक्र के शुभ प्रभाव पाने के लिए गोचर के दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने की सलाह दी जाती है। शुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे दूध, दही, चावल या सफेद वस्त्रों का दान लाभकारी माना जाता है। साथ ही घर में घी का दीपक जलाकर “ॐ शुं शुक्राय नमः” मंत्र का जाप करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
अक्षय कुमार का बड़ा खुलासा: फिलहाल ठंडे बस्ते में गई 'हेरा फेरी 3', अगले एक साल तक शुरू होने की उम्मीद नहीं।

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और कालजयी कॉमेडी फ्रेंचाइजी ‘हेरा फेरी’ के तीसरे भाग की प्रतीक्षा कर रहे करोड़ों सिनेप्रेमियों के लिए एक अत्यंत निराशाजनक खबर सामने आई है। लंबे समय से कयासों, विवादों और कानूनी पचड़ों में घिरी इस फिल्म के भविष्य पर स्वयं अभिनेता अक्षय कुमार ने बड़ा बयान देकर विराम लगा दिया है। एक ताजा संवाद के दौरान अक्षय कुमार ने यह स्पष्ट किया है कि राजू, श्याम और बाबूराव की आइकोनिक तिकड़ी फिलहाल बड़े पर्दे पर वापसी नहीं कर रही है। अभिनेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि फिल्म का निर्माण कार्य वर्तमान में पूरी तरह से ठप पड़ गया है और निकट भविष्य में इसकी शूटिंग शुरू होने की कोई भी संभावना नजर नहीं आ रही है। अक्षय के इस चौंकाने वाले खुलासे ने उन तमाम उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है जो फिल्म के जल्द ही धरातल पर उतरने की प्रतीक्षा कर रहे थे। फिल्म की वर्तमान स्थिति पर गहन चर्चा करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि ‘हेरा फेरी 3’ फिलहाल नहीं बन रही है और इस वास्तविकता ने उन्हें स्वयं भी काफी हैरान और व्यथित किया है। उन्होंने अपनी चिर-परिचित शैली में लेकिन गंभीर लहजे में टिप्पणी की कि शायद अब कुछ ईश्वरीय मदद या विशेष ‘मंत्रों’ की आवश्यकता है ताकि बिगड़ी हुई चीजें एक बार फिर पटरी पर आ सकें। अभिनेता के अनुसार, अगले कम से कम एक वर्ष तक फिल्म की दिशा में किसी भी प्रकार की प्रगति होने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि फिल्म के निर्माण में आ रही बाधाओं का मुख्य कलाकारों के आपसी संबंधों से कोई लेना-देना नहीं है। अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल के बीच की बॉन्डिंग आज भी उतनी ही मजबूत है और वे अन्य बड़ी परियोजनाओं में एक साथ काम भी कर रहे हैं, किंतु ‘हेरा फेरी’ का मामला जटिल कानूनी और तकनीकी उलझनों में बुरी तरह फंसा हुआ है। फिल्म के निर्माण में आ रही रुकावटों का मूल कारण विभिन्न अनुबंधों, बौद्धिक संपदा अधिकारों और फिल्म के मालिकाना हक से जुड़े गंभीर कानूनी विवाद बताए जा रहे हैं। अक्षय कुमार ने संकेत दिया कि कुछ व्यवसायिक और तकनीकी समझौते ऐसे हैं जिन्हें वह खुलकर सार्वजनिक मंच पर साझा नहीं कर सकते, लेकिन इन्हीं पेंचों ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को काफी पीछे धकेल दिया है। ज्ञात हो कि इस फ्रेंचाइजी के अधिकारों को लेकर न्यायालय में पहले से ही कुछ मामले लंबित हैं और निर्माताओं के बीच के आंतरिक मतभेदों ने स्थिति को और अधिक पेचीदा बना दिया है। इन निरंतर बढ़ते विवादों ने फिल्म की रचनात्मक प्रक्रिया और पूर्व-निर्माण कार्यों को पूरी तरह प्रभावित किया है, जिससे पूरी टीम और निवेश करने वाले पक्ष असमंजस की स्थिति में हैं। अभिनेता अक्षय कुमार ने यह भी स्वीकार किया कि वह व्यक्तिगत रूप से इस देरी से काफी आहत हैं क्योंकि यह फ्रेंचाइजी उनके करियर के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक रही है और प्रशंसकों का इससे गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह केवल यह कामना करते हैं कि यह फिल्म तब तक बन जाए जब तक वे तीनों कलाकार सक्रिय भूमिका निभाने की अवस्था में हों। हालांकि उन्होंने भविष्य के लिए उम्मीद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं और उन्हें विश्वास है कि जब समय और परिस्थितियां अनुकूल होंगी, तब यह फिल्म अपने आप आकार ले लेगी। फिलहाल, अक्षय कुमार अपनी अन्य बड़ी फिल्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां वह अपने पुराने साथियों के साथ पर्दे पर नजर आएंगे, लेकिन ‘हेरा फेरी’ के तीसरे भाग की राह अभी भी अत्यंत कठिन बनी हुई है। प्रशंसकों के लिए यह जानकारी इसलिए भी अधिक पीड़ादायक है क्योंकि पिछले कुछ समय से ऐसी खबरें लगातार आ रही थीं कि फिल्म की पटकथा और कास्टिंग को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विशेष रूप से परेश रावल द्वारा ‘बाबूराव’ के किरदार को दोबारा जीवंत करने की खबरों ने सोशल मीडिया पर भारी उत्साह पैदा किया था। किंतु अब अनुबंधों की जटिलताओं और अदालती कार्यवाहियों ने इस सुनहरे सपने को फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या फिल्म के निर्माता इन गंभीर कानूनी चुनौतियों का समाधान ढूंढ पाते हैं या फिर ‘हेरा फेरी 3’ केवल एक अधूरा और प्रतीक्षित अध्याय बनकर इतिहास के पन्नों में दब जाएगा।
स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रोहित शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ बनीं भारत की सबसे सफल बल्लेबाज

नई दिल्ली/डरबन। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने खेल के सबसे छोटे प्रारूप में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली जा रही मौजूदा श्रृंखला के दौरान मंधाना ने वह मुकाम हासिल किया जो अब तक किसी भी भारतीय क्रिकेटर के नाम नहीं था। स्मृति मंधाना अब भारत की ओर से टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने वाली बल्लेबाज बन गई हैं। उन्होंने इस विशिष्ट उपलब्धि के मामले में भारतीय पुरुष टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी रोहित शर्मा के स्थापित रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। मैदान पर अपनी कलात्मक बल्लेबाजी के लिए पहचानी जाने वाली मंधाना ने जैसे ही इस मुकाबले में व्यक्तिगत स्तर पर तेरहवां रन बनाया वैसे ही उन्होंने रोहित शर्मा के पूर्ववर्ती रनों के आंकड़े को पार कर लिया। रोहित शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रारूप से विदाई लेने से पहले जो शिखर स्थापित किया था उसे अब मंधाना ने नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। स्मृति मंधाना के नाम अब एक सौ इकसठ मैचों में चार हजार दो सौ चवालीस रन दर्ज हो गए हैं जो उन्हें भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे सफल टी20 बल्लेबाज बनाता है। मैच के घटनाक्रम पर नजर डालें तो विपक्षी टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था। भारतीय टीम ने निर्धारित ओवरों में सात विकेट खोकर एक चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। हालांकि लक्ष्य का पीछा करते हुए विरोधी टीम ने अंतिम क्षणों में जीत हासिल कर ली लेकिन भारतीय खेमे के लिए मंधाना की यह व्यक्तिगत सफलता सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी रही। हार के बावजूद मंधाना के बल्ले से निकला यह रिकॉर्ड भारतीय महिला क्रिकेट के सशक्तिकरण और वैश्विक मंच पर उनकी बढ़ती धमक का प्रतीक बनकर उभरा है। विश्व स्तर पर सर्वाधिक टी20 रनों की सूची पर गौर करें तो स्मृति मंधाना अब दूसरे पायदान पर पहुंच गई हैं। उनसे आगे अब केवल न्यूजीलैंड की एक खिलाड़ी का नाम आता है जबकि भारतीय खिलाड़ियों की सूची में मंधाना अब शीर्ष पर विराजमान हैं। मंधाना के बाद रोहित शर्मा और फिर हरमनप्रीत कौर का स्थान आता है। मंधाना का यह सफर आने वाले समय में युवा महिला क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों का खेल नहीं है बल्कि यह महिला क्रिकेट के प्रति बदलते नजरिए और मैदान पर उनके अटूट समर्पण की जीत है।