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जब दोस्ती निभाने के लिए अमिताभ बच्चन उतर गए भोजपुरी सिनेमा में तीन फिल्मों से जीता दिल

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई अलग-अलग प्रयोग किए हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई थी खास बात यह है कि यह फैसला उन्होंने किसी बड़े प्रोड्यूसर या स्क्रिप्ट के कारण नहीं बल्कि अपने करीबी रिश्ते और दोस्ती के चलते लिया था दरअसल भोजपुरी फिल्मों में काम करने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत थे दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और जब दीपक सावंत ने भोजपुरी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा तो अमिताभ बच्चन ने बिना ज्यादा सोचे इसे स्वीकार कर लिया यह एक ऐसा उदाहरण है जहां प्रोफेशनल दुनिया में भी रिश्तों की अहमियत साफ नजर आती है अमिताभ बच्चन ने कुल तीन भोजपुरी फिल्मों में काम किया जिनमें गंगा गंगोत्री और गंगा देवी शामिल हैं इन फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग क्षमता का वही लेवल शो जिसके लिए वह जाने जाते हैं दर्शकों ने भी उन्हें भोजपुरी अंदाज में काफी पसंद किया फिल्म गंगा में उनके साथ मनोज तिवारी और रवि किशन जैसे लोकप्रिय सितारे नजर आए इस फिल्म ने दर्शकों के बीच अच्छी पहचान बनाई और भोजपुरी सिनेमा में बिग बी की एंट्री को खास बना दिया इसके बाद आई फिल्म गंगोत्री जिसमें हेमा मालिनी और भूमिका चावला भी अहम किरदार में थीं, यह फिल्म भी दर्शकों को पसंद आई और इसने अमिताभ बच्चन की बहुमुखी प्रतिभा को फिर साबित किया। तीसरी फिल्म गंगा देवी और भी खास रही क्योंकि इसमें उनके साथ उनकी पत्नी जया बच्चन भी नजर आईं फिल्म की कहानी सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित थी जिसमें एक महिला के संघर्ष और उसके सफर को दिखाया गया था इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर और दिनेश लाल यादव जैसे कलाकार भी शामिल थे। इन तीन फिल्मों के जरिए अमिताभ बच्चन ने यह साबित किया कि भाषा और इंडस्ट्री कोई भी हो अगर कलाकार सच्चे मन से काम करे तो दर्शकों का प्यार मिलना तय है हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इन फिल्मों के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा से दूरी बना ली और फिर कभी इस इंडस्ट्री में काम नहीं किया। आज जब भोजपुरी सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है तब अमिताभ बच्चन का यह छोटा लेकिन प्रभावशाली सफर और भी खास बन जाता है यह कहानी सिर्फ फिल्मों की नहीं बल्कि दोस्ती निभाती है और एक कलाकार की बहुमुखी प्रतिभा की मिसाल भी हैभारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई अलग-अलग प्रयोग किए हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई थी खास बात यह है कि यह फैसला उन्होंने किसी बड़े प्रोड्यूसर या स्क्रिप्ट के कारण नहीं बल्कि अपने करीबी रिश्ते और दोस्ती के चलते लिया था दरअसल भोजपुरी फिल्मों में काम करने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत थे दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और जब दीपक सावंत ने भोजपुरी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा तो अमिताभ बच्चन ने बिना ज्यादा सोचे इसे स्वीकार कर लिया यह एक ऐसा उदाहरण है जहां प्रोफेशनल दुनिया में भी रिश्तों की अहमियत साफ नजर आती है अमिताभ बच्चन ने कुल तीन भोजपुरी फिल्मों में काम किया जिनमें गंगा गंगोत्री और गंगा देवी शामिल हैं इन फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग क्षमता का वही लेवल शो जिसके लिए वह जाने जाते हैं दर्शकों ने भी उन्हें भोजपुरी अंदाज में काफी पसंद किया फिल्म गंगा में उनके साथ मनोज तिवारी और रवि किशन जैसे लोकप्रिय सितारे नजर आए इस फिल्म ने दर्शकों के बीच अच्छी पहचान बनाई और भोजपुरी सिनेमा में बिग बी की एंट्री को खास बना दिया इसके बाद आई फिल्म गंगोत्री जिसमें हेमा मालिनी और भूमिका चावला भी अहम किरदार में थीं, यह फिल्म भी दर्शकों को पसंद आई और इसने अमिताभ बच्चन की बहुमुखी प्रतिभा को फिर साबित किया। तीसरी फिल्म गंगा देवी और भी खास रही क्योंकि इसमें उनके साथ उनकी पत्नी जया बच्चन भी नजर आईं फिल्म की कहानी सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित थी जिसमें एक महिला के संघर्ष और उसके सफर को दिखाया गया था इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर और दिनेश लाल यादव जैसे कलाकार भी शामिल थे। इन तीन फिल्मों के जरिए अमिताभ बच्चन ने यह साबित किया कि भाषा और इंडस्ट्री कोई भी हो अगर कलाकार सच्चे मन से काम करे तो दर्शकों का प्यार मिलना तय है हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इन फिल्मों के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा से दूरी बना ली और फिर कभी इस इंडस्ट्री में काम नहीं किया। आज जब भोजपुरी सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है तब अमिताभ बच्चन का यह छोटा लेकिन प्रभावशाली सफर और भी खास बन जाता है यह कहानी सिर्फ फिल्मों की नहीं बल्कि दोस्ती निभाती है और एक कलाकार की बहुमुखी प्रतिभा की मिसाल भी है

जब बेटे को कहा गया मेरा बाप औरत है तब टूट गए अली असगर छोड़ना पड़ा कॉमेडी का सबसे बड़ा रोल

नई दिल्ली । टीवी की दुनिया में अपनी कॉमिक टाइमिंग और अलग अंदाज़ से पहचान बनाने वाले अली असगर ने हाल ही में उस फैसले के पीछे की सच्चाई बताने की है जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी थी एक समय था जब कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में उनकी दादी का किरदार घर घर में लोकप्रिय था दर्शक उनके हर डायलॉग पर ठहाके लगाते थे लेकिन अचानक उनके शो से गायब होना कई सवाल छोड़ गया था अब इस राज से पर्दा उठाते हुए अली असगर ने बताया कि यह फैसला जितना प्रोफेशनल था उससे कहीं ज़्यादा पर्सनल भी था उन्होंने एक बातचीत के दौरान कहा कि उनके इस किरदार का असर उनके परिवार खासकर बच्चों पर पड़ने लगा था जो उनके लिए बेहद मेहनतीदेह था अली ने खुलासा किया कि उनके बच्चों को स्कूल में इस वजह से चिढ़ाया जाता था उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे फिल्मों में डायलॉग होता है मेरा बाप चोर है उसी तरह उनके बेटे को लेकर बच्चे कहते थे मेरा बाप औरत है यह सुनना उनके लिए एक पिता के रूप में बेहद कठिन था और दब से उनके मन में बदलाव की शुरुआत हुई उन्होंने यह भी बताया कि समस्या सिर्फ दब तक सीमित नहीं थी बल्कि उन्हें लगातार एक ही तरह के किरदार ऑफर किए जा रहे थे कॉमेडी शो में उन्हें बार बार महिला किरदार निभाने को कहा जाता था जिससे उनकी क्रिएटिव सैटिस्फैक्शन भी प्रभावित हो रही थी अली ने कहा कि कलाकार होने के रिश्तेदार वह अलग-अलग तरह के रोल करना चाहते थे लेकिन उन्हें बार-बार उसी इमेज में ढाल दिया जाता था उन्होंने अपने एक्सपीरियंस को शेयर करते हुए कहा कि हर वीकेंड जब वह कॉमेडी शो करते थे तो उन्हें दो अलग-अलग एक्ट में भी महिला किरदार ही निभाने को कहा इससे उन्हें फील होने लगा कि उनकी पहचान लिमिटेड हो रही है और इंडस्ट्री उन्हें एक ही नजर से देख रही है उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार को वैरायटी चाहिए और वह सिर्फ एक ही तरह का काम करते रहना नहीं चाहते थे गौरतलब है कि अली असगर ने साल 2017 में शो छोड़ा था उस समय यह कहा गया था कि उन्होंने क्रिएटिव बदलावों के कारण यह फैसला लिया है लेकिन अब सामने आई सच्चाई इस फैसले को एक नई नजर देती है अली असगर का करियर सिर्फ कॉमेडी तक लिमिटेड नहीं रहा है उन्होंने कई पॉपुलर टीवी शो जैसे कहानी घर घर की और दूसरे प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है इसके अलावा फिल्मों में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई है और कई चर्चित फिल्मों में नजर आ चुके हैं उनकी बची हुई फिल्म और टीवी प्रोजेक्ट्स भी इस बात का सबूत हैं कि उन्होंने खुद को एक ही छवि तक सीमित नहीं रखा बल्कि नए प्रयोग करने की कोशिश की है यह कहानी सिर्फ एक कलाकार के फैसले की नहीं है बल्कि उस जिम्मेदारी की भी है जो एक पिता अपने परिवार के प्रति महसूस करता है अली असगर का यह कदम दिखाता है कि कभी कभी सफलता से ज्यादा जरूरी अपने करीबियों की भावनाएं होती हैं और यही असली जीत होती है

महावतार परशुराम का पहला पोस्टर रिलीज होते ही मचा हंगामा, दमदार लुक और टैगलाइन ने फैंस को किया रोमांचित

नई दिल्ली। भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित भव्य फिल्म महावतार परशुराम का पहला पोस्टर जारी कर दिया गया है, जिसके सामने आते ही दर्शकों के बीच उत्साह तेजी से बढ़ गया है। यह फिल्म महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स की दूसरी कड़ी है और इसे बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। पोस्टर में दिखाई गई भव्यता और गहराई यह संकेत देती है कि फिल्म को दृश्यात्मक रूप से बेहद प्रभावशाली बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। फिल्म का निर्देशन अश्विन कुमार कर रहे हैं, जिन्हें उनकी रचनात्मक दृष्टि के लिए जाना जाता है। पोस्टर के साथ जारी की गई टैगलाइन जहां धैर्य समाप्त होता है वहां परशुराम का फरसा शुरू होता है फिल्म के कथानक की तीव्रता और भावनात्मक गहराई को दर्शाती है। यह कहानी भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम के जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है। फिल्म में उस समय की परिस्थितियों को दिखाया जाएगा जब समाज में अन्याय और अत्याचार बढ़ गए थे और धर्म का संतुलन बिगड़ चुका था। ऐसे समय में परशुराम का अवतार हुआ, जिन्होंने अधर्म के खिलाफ संघर्ष करते हुए न्याय और संतुलन की स्थापना की। इस कथा को आधुनिक तकनीक और भव्य प्रस्तुति के साथ बड़े पर्दे पर जीवंत करने की योजना बनाई गई है। निर्माताओं का उद्देश्य केवल एक मनोरंजक फिल्म बनाना नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं को नई पीढ़ी तक प्रभावशाली तरीके से पहुंचाना भी है। इस परियोजना को एक ऐसे अनुभव के रूप में तैयार किया जा रहा है जो दर्शकों को भावनात्मक और दृश्य दोनों स्तरों पर जोड़ सके। इस सिनेमैटिक यूनिवर्स की पहली फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी और उसे एक अलग तरह के अनुभव के रूप में देखा गया था। उसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब इस नई कड़ी को और अधिक भव्य और प्रभावशाली बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पोस्टर के सामने आने के बाद से ही फिल्म को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और इसे भारतीय सिनेमा के एक बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म पौराणिक कथाओं को नए अंदाज में प्रस्तुत करते हुए एक यादगार सिनेमाई अनुभव देगी।

दिल्ली से हार के बाद आरसीबी कप्तान का आत्ममंथन बोले 20 रन और होते तो बदल जाता मैच

नई दिल्ली । IPL 2026 का 26वां मुकाबला बेंगलुरु के ऐतिहासिक मैदान में खेला गया जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली कैपिटल्स के बीच रोमांच अपने चरम पर था लेकिन अंत में बाजी दिल्ली के नाम रही और उसने छह विकेट से जीत दर्ज कर ली यह मुकाबला आखिरी ओवर तक गया और दर्शकों को भरपूर रोमांच देखने को मिला। मैच खत्म होने के बाद RCB के कप्तान रजत पाटीदार ने हार की वजह साफ तौर पर बताई उन्होंने बिना घुमाए सीधे कहा कि टीम की बल्लेबाजी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और यही हार का सबसे बड़ा कारण बना पाटीदार ने माना कि अगर टीम 15 से 20 रन और जोड़ लेती तो परिणाम पूरी तरह बदल सकता था। RCB की शुरुआत अच्छी रही थी खासकर विराट कोहली और फिल साल्ट ने टीम को मजबूत आधार दिया लेकिन मध्यक्रम में लगातार विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई पाटीदार ने कहा कि कुछ ओवर ऐसे रहे जहां टीम ने बिना जरूरत के विकेट गंवाए और वही मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ उन्होंने स्वीकार किया कि बल्लेबाजी में तालमेल की कमी साफ दिखी और यही कारण रहा कि टीम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर पहले बल्लेबाजी करते हुए RCB ने 20 ओवर में 8 विकेट पर 175 रन बनाए जो इस मैदान के बैट से थोड़ा कम माना गया कप्तान ने यह भी कहा कि आखिरी ओवरों में टीम ने तेजी से रन जरूर बनाए जो एक पॉजिटिव पहलू रहा लेकिन कुल मिलाकर परफॉर्मेंस जरूरी नहीं था गेंदबाजी को लेकर पाटीदार ने अपने प्लेयर्स को साफ मैसेज दिया उन्होंने कहा कि जब गोल उगे तो हर बॉल पर साफ सोच और जरूरी होती है उन्होंने अपने बॉलर्स से कहा कि जो भी स्ट्रैटजी अपनाओ उसे पूरी स्ट्राइक के साथ लागू करो दूसरी तरफ दिल्ली कैपिटल्स ने गोल का पीछा करते हुए संघर्ष जरूर किया लेकिन आखिर में संयम बनाए रखा और 19.5 ओवर में मैच अपना नाम कर लिया कप्तान अक्षर पटेल की देखरेख में टीम ने प्रेशर के डेस्क में बेहतर जजमेंट के लिए और जीत हासिल की पाटीदार ने मैच के बाद पॉजिटिव रुख भी दिखाया उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट अभी लंबा है और टीम के पास वापसी का पूरा मौका है उन्होंने भरोसा दिलाया कि टीम अपनी गलतियों से सीखेगी आत्मनिरीक्षण करेगी और आगे बेहतर परफॉर्मेंस देगी इस हार के बाद भी RCB का परफॉर्मेंस टूर्नामेंट में बैलेंस बना हुआ है टीम ने छह में से चार मुकाबले जीते हैं जबकि दो में हार का सामना करना पड़ा है वहीं दिल्ली की यह तीसरी जीत रही जिसने उसे अंक तालिका में प्रवेश दिया है कुल मिलाकर यह मुकाबला एक सबक बनकर सामने आया है जहां छोटी गलतियां बड़े खर्चों को प्रभावित कर सकती हैं और आरसीबी के लिए यह हार आगे की रणनीति को और मजबूत बनाने का संकेत दे गई है

टैक्सी बेचकर फिल्म बनाने वाले सरदार सिंह सूरी की कहानी, सफलता के बाद भी मिला सिर्फ धोखा

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत में कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आती रही हैं, लेकिन कुछ जीवन यात्राएं ऐसी होती हैं जिनमें संघर्ष और सफलता के साथ गहरा दर्द भी जुड़ा होता है। ऐसी ही एक कहानी है सरदार सिंह सूरी की, जिन्होंने साधारण जीवन से उठकर अपने सपनों को साकार किया और सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका सफर मेहनत, जज्बे और त्याग से भरा हुआ था, लेकिन अंत में उन्हें एक ऐसे विश्वासघात का सामना करना पड़ा जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। सरदार सिंह सूरी मूल रूप से रावलपिंडी के निवासी थे। देश के विभाजन के बाद उन्होंने नए सिरे से जीवन की शुरुआत की और मुंबई पहुंचकर टैक्सी चलाने का काम शुरू किया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे धीरे अपने परिश्रम से एक टैक्सी को तीन टैक्सियों में बदल दिया। हालांकि उनके मन में सिनेमा के प्रति गहरी रुचि थी और वे कुछ बड़ा करने का सपना देखते थे। अपने इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने एक बड़ा और जोखिम भरा फैसला लिया। उन्होंने अपनी तीनों टैक्सियां बेच दीं और उस धन से पंजाबी फिल्म ए धरती पंजाब दी का निर्माण किया। यह फिल्म उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इस फिल्म में प्रेम चोपड़ा को बतौर हीरो पहला बड़ा अवसर मिला, जिसने उनके अभिनय करियर की मजबूत नींव रखी। फिल्म रिलीज होने के बाद जबरदस्त सफल रही और इसे कुल नौ पुरस्कार भी प्राप्त हुए। यह सफलता किसी भी निर्माता के लिए गर्व का क्षण होती, लेकिन सरदार सिंह सूरी के लिए यह खुशी अधूरी रह गई। फिल्म की कमाई में उनके एक सहयोगी द्वारा धोखाधड़ी किए जाने के कारण उन्हें उनका उचित हिस्सा नहीं मिल पाया। आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि वे अपनी ही फिल्म के सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए टिकट तक नहीं खरीद सके। यह घटना उनके जीवन का सबसे बड़ा झटका साबित हुई। एक ओर जहां उन्होंने अपने सपनों के लिए सब कुछ दांव पर लगाया, वहीं दूसरी ओर विश्वासघात ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया। इस दर्दनाक अनुभव के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण से दूरी बना ली और सिनेमा की दुनिया से लगभग अलग हो गए। वर्षों बाद प्रेम चोपड़ा ने एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उन्हें याद करते हुए कहा कि सरदार सूरी केवल एक निर्माता नहीं बल्कि एक नेक और सच्चे इंसान थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके करियर की शुरुआत में मिला अवसर सरदार सूरी की ही देन था। उस दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद फिल्मों में काम करने का जुनून अलग ही था। सरदार सिंह सूरी का जीवन केवल सिनेमा तक सीमित नहीं था। उन्होंने सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई और मुंबई के चार बंगला गुरुद्वारा साहिब के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सपनों को पूरा करने के लिए साहस जरूरी है, लेकिन विश्वास और पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

रफ्तार बनी काल मऊगंज में बाइक रेस का खतरनाक अंत ट्रक से टकराकर तीन युवकों की मौत

मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज में 14 अप्रैल को हुआ दर्दनाक सड़क हादसा अब एक नए पहलू के साथ सामने आया है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे का एक लाइव वीडियो सामने आया है जो न केवल दिल दहला देने वाला है बल्कि रफ्तार और लापरवाही के खतरनाक अंजाम को भी साफ तौर पर दिखाता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे देखने वाला हर व्यक्ति सिहर उठ रहा है। घटना नेशनल हाईवे 135 पर पथरिहा मोड़ के पास की है जहां पांच दोस्त दो बाइकों पर सवार होकर तेज रफ्तार में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगे हुए थे। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवक सड़क पर स्टंट करते हुए एक दूसरे को ओवरटेक कर रहे थे और इस पूरे घटनाक्रम को मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड भी कर रहे थे। उस समय शायद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह रोमांच कुछ ही सेकंड में मौत के तांडव में बदल जाएगा। कुछ ही पलों बाद कैमरे में एक भयावह टक्कर कैद हो जाती है जिसमें सामने खड़े ईंटों से लदे ट्रेलर से उनकी सीधी भिड़ंत हो जाती है। रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि युवकों को संभलने या ब्रेक लगाने का मौका तक नहीं मिला। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान उपलक्ष कोल अमरीश कोल और हेमराज कोल के रूप में हुई है जो आपस में सगे भाई थे। एक ही परिवार के तीन बेटों की मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। इस हादसे में दूसरी बाइक पर सवार प्रशांत और प्रदीप द्विवेदी गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वीडियो में यह भी दिखाई देता है कि पीछे बैठा युवक पूरी रेसिंग को रिकॉर्ड कर रहा था जो अब इस हादसे का सबसे बड़ा सबूत बन गया है। हादसे का  अब केवल एक वायरल क्लिप नहीं बल्कि समाज के लिए चेतावनी बनकर सामने आया है। यह दिखाता है कि सड़क पर स्टंटबाजी और तेज रफ्तार का जुनून किस तरह कुछ ही सेकंड में जिंदगियों को खत्म कर सकता है। जिस उत्साह और रोमांच के साथ यह युवक रेस कर रहे थे वही उनके लिए काल बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना ने उन्हें अंदर तक हिला दिया है और आज  सामने आया है तो पुराने जख्म फिर से ताजा हो गए हैं। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में गहरा मातम पसरा हुआ है। यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर कब युवा सड़क सुरक्षा नियमों को गंभीरता से लेंगे। यह वीडियो एक सख्त संदेश देता है कि रफ्तार कोई खेल नहीं बल्कि जानलेवा खतरा है। जरूरत इस बात की है कि युवाओं को समय रहते जागरूक किया जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

मुख्यमंत्री की पूजा के साथ शुरू हुई पवित्र यात्रा भक्तिमय माहौल से गूंजा उत्तराखंड..

नई दिल्ली। उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चार धाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ रविवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हो गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम में विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की और यात्रा की औपचारिक शुरुआत का संदेश दिया। मंदिरों को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया और पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। जैसे ही कपाट खुले, देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने दर्शन के लिए उमड़कर अपनी आस्था प्रकट की। यात्रा के पहले दिन ही तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली, जिसे देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और प्रबंधन के इंतजाम किए थे। पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोल दमाऊ और रानसिंघा की गूंज ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ साथ सांस्कृतिक परंपराओं का भी सुंदर समावेश देखने को मिला, जिससे यह आयोजन और अधिक भव्य और जीवंत बन गया। इसी क्रम में केदारनाथ धाम की यात्रा की शुरुआत भी ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की डोली को रवाना करने के साथ हुई। पंचमुखी प्रतिमा को वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच एक भव्य शोभायात्रा के रूप में ले जाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पुजारी और साधु संत शामिल हुए जिन्होंने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया। मंदिर परिसर को सजाने के लिए बड़ी मात्रा में फूलों का उपयोग किया गया जिससे वातावरण अत्यंत पवित्र और आकर्षक बन गया। डोली यात्रा के दौरान पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ औपचारिकता का भी विशेष ध्यान रखा गया। यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया और भंडारे का आयोजन कर सेवा भाव का प्रदर्शन किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली यात्रा विभिन्न पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ेगी और तय समय पर केदारनाथ धाम पहुंचेगी जहां विधिवत पूजा के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। चार धाम यात्रा के अंतर्गत आने वाले केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी निर्धारित तिथियों पर खोले जाएंगे, जिसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं ताकि यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो सके। चिकित्सा, परिवहन और आवास की व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। चार धाम यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में भाग लेते हैं। यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि हिमालयी क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिल रही है।

एमपी में नारी शक्ति वंदन पर सियासी घमासान कल से पदयात्रा विधानसभा में निंदा प्रस्ताव की तैयारी

भोपाल । भोपाल में नारी शक्ति वंदन को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है जहां सत्ताधारी दल ने इस मुद्दे पर बड़ा जनआंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। प्रदेश बीजेपी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और इसे लेकर प्रदेशभर में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश में कल से नारी शक्ति वंदन पदयात्रा शुरू की जाएगी जो गांव गांव और शहर शहर तक पहुंचेगी। इसके साथ ही विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की भी तैयारी है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि समाज की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा विषय है और इसे लेकर जनता के बीच जाकर सच्चाई रखी जाएगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में जो व्यवहार देखने को मिला वह निंदनीय है और इससे महिलाओं के प्रति उनकी सोच उजागर होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के हर प्रयास का विरोध करना एक तरह की अलगाववादी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने अवसरवादिता दिखाते हुए अपने रुख बदल लिए और महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर भी राजनीति की। इस मुद्दे को लेकर प्रदेश में बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने की रणनीति बनाई गई है। नेताओं ने बताया कि केवल पदयात्रा ही नहीं बल्कि नगर निगम से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक विरोध और निंदा प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इसके जरिए जनता को यह बताया जाएगा कि कौन महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है और कौन इसके खिलाफ खड़ा है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की आधी आबादी से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण विषय है लेकिन विपक्ष ने इसे गंभीरता से लेने के बजाय राजनीतिक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके नेताओं ने इस मुद्दे पर जिस तरह का रुख अपनाया वह महिलाओं के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े ऐसे विषय पर जश्न मनाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। पार्टी इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है और हर स्तर पर इसका विरोध दर्ज कराएगी। नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेशभर में आक्रोश रैलियां आयोजित की जाएंगी और व्यापक स्तर पर लोगों को इस मुद्दे से जोड़ा जाएगा। पंचायत स्तर तक आंदोलन को ले जाने की योजना बनाई गई है ताकि हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए सरकार और संगठन पूरी मजबूती से खड़े हैं। कुल मिलाकर नारी शक्ति वंदन का मुद्दा अब मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा जनआंदोलन बनने की ओर बढ़ रहा है जिसमें सियासी बयानबाजी के साथ साथ जमीनी स्तर पर भी सक्रियता देखने को मिलेगी।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का श्रीलंका दौरा तमिल समुदाय और शीर्ष नेतृत्व से महत्वपूर्ण मुलाकात

नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन अपने पहले आधिकारिक विदेश दौरे पर श्रीलंका पहुंचे हैं जहां उनका कार्यक्रम कई महत्वपूर्ण राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बैठकों से भरा हुआ है। यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इस दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय चर्चा शामिल है। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच सहयोग, विकास और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर विस्तार से बातचीत होने की संभावना है। इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य श्रीलंका में रहने वाले भारतीय मूल के तमिल समुदाय से सीधा संवाद स्थापित करना है। नुवारा एलिया क्षेत्र में बड़ी संख्या में बसे इस समुदाय से मुलाकात के दौरान उपराष्ट्रपति उनके सामाजिक और आर्थिक हालात को समझने का प्रयास करेंगे। यह संवाद न केवल समस्याओं को जानने का माध्यम होगा बल्कि भारत और इस समुदाय के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस दौरान भारत की ओर से चल रही आवासीय और विकास परियोजनाओं का भी अवलोकन किया जाएगा जिनका उद्देश्य इस समुदाय के जीवन स्तर को सुधारना है। यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति उन आवासीय क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे जो भारत की सहायता से विकसित किए गए हैं। इन परियोजनाओं के तहत हजारों घर बनाए गए हैं और कई अन्य निर्माणाधीन हैं। इन योजनाओं ने स्थानीय समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद की है और यह भारत की पड़ोसी देशों के प्रति सहयोगात्मक नीति का उदाहरण माना जाता है। इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव को भी विशेष महत्व दिया गया है। उपराष्ट्रपति के नुवारा एलिया स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल के दौरे की संभावना है जो भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। इस प्रकार की गतिविधियां दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा करती हैं। भारत और श्रीलंका के संबंध ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत रहे हैं और समय के साथ इनमें व्यापार, संस्कृति और रणनीतिक सहयोग के कई आयाम जुड़े हैं। हाल के वर्षों में भारत ने श्रीलंका को आर्थिक चुनौतियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लगातार सहायता प्रदान की है जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग और अधिक मजबूत हुआ है। इस यात्रा को क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। उपराष्ट्रपति का यह दौरा केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी संबंधों को मजबूत करना है। विशेष रूप से तमिल समुदाय के साथ सीधा संवाद भारत की क्षेत्रीय कूटनीति को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और विकास सहयोग के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। यह दौरा भारत और श्रीलंका के संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ सकता है जिसमें राजनीतिक समझ के साथ-साथ जनस्तर पर संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।

हिमालय की पवित्र वादियों में शुरू हुई आस्था की यात्रा, प्रशासन ने किए व्यापक सुरक्षा इंतजाम

नई दिल्ली। उत्तराखंड में आस्था और आध्यात्मिकता के प्रतीक चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विधिवत रूप से हो गई। इस शुभ दिन पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही देशभर से पहुंचे भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी और पूरा क्षेत्र भक्ति भाव और जयकारों से गूंज उठा। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कपाट खुलने की प्रक्रिया उत्तरकाशी जिले में स्थित इन पवित्र स्थलों पर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में संपन्न हुई। पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जिससे यात्रा के प्रारंभिक चरण में ही उत्साह और आस्था का वातावरण बन गया। चारधाम यात्रा के इस शुभारंभ के साथ ही हिमालय की पवित्र वादियों में धार्मिक गतिविधियों ने गति पकड़ ली है। आने वाले दिनों में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खोले जाएंगे। केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाने की तैयारी है। इन दोनों प्रमुख धामों के कपाट खुलने के बाद पूरी चारधाम यात्रा अपने चरम पर पहुंच जाएगी और लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। राज्य सरकार और प्रशासन ने इस वर्ष यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन टीमें और स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय किया गया है। प्रमुख पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सहायता केंद्र और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। डिजिटल पंजीकरण और ट्रैकिंग व्यवस्था को भी इस बार और अधिक सख्त किया गया है ताकि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की निगरानी और सुविधा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें और सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है। चारधाम यात्रा का हिंदू धर्म में अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन से जीवन के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। हिमालय की गोद में स्थित ये चारों धाम श्रद्धालुओं को न केवल आस्था से जोड़ते हैं बल्कि उन्हें प्रकृति की दिव्यता का अनुभव भी कराते हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं, जिससे उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलता है। स्थानीय होटल, परिवहन, दुकानें और छोटे व्यवसाय इस दौरान सक्रिय हो जाते हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। पर्यटन आधारित गतिविधियों में भी इस अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। इस वर्ष प्रशासन का अनुमान है कि यात्रियों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रह सकती है, जिसके चलते सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। जैसे ही केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे, यात्रा पूरी तरह से अपने चरम पर पहुंच जाएगी और श्रद्धालुओं का विशाल प्रवाह हिमालय की ओर बढ़ेगा।