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Femina Miss India 2026 में गोवा की साध्वी सैल बनीं विजेता, देश को मिला नया चेहरा

नई दिल्ली। देश की प्रतिष्ठित सौंदर्य प्रतियोगिता Femina Miss India 2026 का ताज इस वर्ष गोवा की साध्वी सतीश सैल के नाम रहा। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में देशभर से आई 30 प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिसमें साध्वी सैल ने अपने आत्मविश्वास, स्पष्ट विचार और प्रभावशाली मंचीय प्रस्तुति से निर्णायकों को प्रभावित किया। विजेता की घोषणा के साथ ही पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा और यह क्षण दर्शकों के लिए यादगार बन गया। इस जीत के साथ साध्वी सैल ने न केवल राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया बल्कि अब वे Miss World 2027 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में प्रतिभागियों का मूल्यांकन व्यक्तित्व, संवाद क्षमता, सामाजिक दृष्टिकोण और आत्मविश्वास के आधार पर किया गया। फाइनल राउंड में साध्वी सैल ने अपने संतुलित उत्तरों और मंच पर आत्मविश्वासपूर्ण उपस्थिति से निर्णायक मंडल को खासा प्रभावित किया। इस प्रतियोगिता में महाराष्ट्र की राजनंदिनी पवार को फर्स्ट रनर-अप और केंद्र शासित प्रदेश की श्री अद्वैता को सेकंड रनर-अप घोषित किया गया। पूरे आयोजन में प्रतिभागियों ने उच्च स्तर का प्रदर्शन किया, जिससे चयन प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण रही। Femina Miss India को देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक माना जाता है, जो वर्षों से भारतीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का माध्यम रहा है। यह प्रतियोगिता केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें नेतृत्व क्षमता, सामाजिक समझ और व्यक्तित्व विकास को भी प्रमुखता दी जाती है। साध्वी सैल गोवा की रहने वाली हैं और उन्होंने अर्थशास्त्र तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शिक्षा प्राप्त की है। उनकी बहुभाषी क्षमता और सात भाषाओं का ज्ञान उनके व्यक्तित्व को और भी विशिष्ट बनाता है। यह उनकी अकादमिक और व्यक्तिगत विविधता को दर्शाता है। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष की प्रतियोगिता अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक रही, जिसमें हर चरण में प्रतिभागियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। निर्णायकों ने चयन प्रक्रिया में व्यक्तित्व संतुलन, आत्मविश्वास और सामाजिक दृष्टिकोण को प्रमुख आधार बनाया। साध्वी सैल की जीत को युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। यह उपलब्धि विशेष रूप से छोटे राज्यों और क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश देती है कि अवसर और सफलता किसी भौगोलिक सीमा पर निर्भर नहीं होते। अब साध्वी सैल आने वाले महीनों में Miss World 2027 की तैयारी में जुटेंगी, जहां वे भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व का प्रदर्शन करेंगी।

भोपाल में दर्दनाक हादसा एलपीजी टैंकर दीवार तोड़कर घर में घुसा मासूम की मौत परिवार घायल

भोपाल । राजधानी के छोला मंदिर क्षेत्र में शनिवार देर रात एक भयावह सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया जब एक एलपीजी टैंकर अनियंत्रित होकर रिहायशी इलाके में घुस गया और दीवार तोड़ते हुए सीधे एक घर के अंदर जा घुसा। यह हादसा रात लगभग दो बजकर बीस मिनट पर हुआ जब अधिकांश लोग गहरी नींद में थे और अचानक हुए तेज धमाके ने पूरे मोहल्ले में अफरा तफरी मचा दी। हादसे के दौरान घर में सो रही सात वर्षीय मासूम बच्ची खुशी गेहार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। टैंकर के पहिये और मलबे के बीच वह करीब एक घंटे तक फंसी रही जिसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से उसका शव बाहर निकाला जा सका। इस हृदयविदारक घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई। हादसे में बच्ची के पिता मोनू गेहार मां मनीषा गेहार और भाई आरुष सहित कुल चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और लगातार निगरानी में रखा गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एलपीजी टैंकर तेज रफ्तार में था और चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा जिसके बाद वह सीधे रिहायशी बस्ती की ओर बढ़ गया और घर की दीवार तोड़ते हुए अंदर घुस गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि आसपास के दो अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंचा है जिससे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल बन गया। घटना के बाद मौके पर भारी अफरा तफरी मच गई। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास शुरू किया। सूचना मिलते ही छोला मंदिर और निशातपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। पुलिस ने टैंकर को कब्जे में ले लिया है जबकि चालक घटना के बाद फरार बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वाहन की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा मानवीय लापरवाही का परिणाम था या फिर किसी तकनीकी खराबी के कारण हुआ। वहीं प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। स्थानीय लोगों ने इस हादसे के बाद प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग भी की जा रही है। एसीपी अक्षय चौधरी ने बताया कि हादसे में बच्ची खुशी गेहार की मौत हुई है जबकि चार लोग घायल हैं और सभी का इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि आरोपी चालक की तलाश की जा रही है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर शहर में भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

भारतीय जहाजों पर हमले के बाद भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा..

नई दिल्ली। होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल लेकर गुजर रहे भारतीय जहाजों पर हुई गोलीबारी की घटना के बाद भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव की स्थिति बन गई है। बताया जा रहा है कि इस घटना में समुद्री मार्ग से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद उन्हें अपना रास्ता बदलना पड़ा। इस घटना को लेकर भारत ने गंभीर आपत्ति जताई और संबंधित पक्ष से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है। साथ ही राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया गया है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। इस संवेदनशील समुद्री मार्ग में हुई घटना ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या तनाव का असर व्यापक स्तर पर देखा जा सकता है। इस घटना के बाद कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई और कुछ को एहतियातन मार्ग बदलना पड़ा। भारत की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उसके जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। भारत ने इस पूरे मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है और इसे बनाए रखना आवश्यक है। वहीं दूसरी ओर ईरान की ओर से प्रतिक्रिया में कहा गया है कि भारत के साथ उसके संबंध ऐतिहासिक और मजबूत हैं। ईरानी पक्ष ने यह भी कहा कि उन्हें इस विशेष घटना की पूरी जानकारी नहीं है और मामले की जांच की जा रही है। साथ ही यह संकेत दिया गया कि क्षेत्र में शांति बनाए रखना सभी देशों के हित में है और किसी भी प्रकार के तनाव को बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। राजनयिक स्तर पर दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया तेज हो गई है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है क्योंकि यह मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस घटना के बाद समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कई जहाजों ने सतर्कता बढ़ा दी है और कुछ ने अपने मार्ग में बदलाव किया है। इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक स्थिरता को लेकर नई चिंताओं को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर डाल सकती हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत और संयम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

उज्जैन में प्रसव दिवस बना प्रेरणा का उत्सव, गुरुजी ने नवजातों को दिया आशीर्वाद

उज्जैन । उज्जैन में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर इस वर्ष एक विशेष और भावनात्मक आयोजन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया जहां चरक अस्पताल में प्रसव दिवस के रूप में एक अनोखी पहल की गई। यह आयोजन कृष्णा मिश्रा जिन्हें लोग श्रद्धा से गुरुजी कहते हैं उनके नेतृत्व में लगातार छठे वर्ष आयोजित किया गया जिसमें नवजात शिशुओं और माताओं के सम्मान को केंद्र में रखा गया। कार्यक्रम के दौरान अस्पताल में जन्मे नवजात शिशुओं का पारंपरिक और भावनात्मक तरीके से स्वागत किया गया। कृष्णा मिश्रा ने नवजातों के चरण स्पर्श कर उन्हें आशीर्वाद दिया और उनके परिजनों से मुलाकात कर खुशी साझा की। पूरे माहौल में एक आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली जहां हर नवजात को जीवन के नए सफर के लिए शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर प्रसव के बाद अस्पताल में भर्ती माताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें बेबी किट वितरित किए गए जिनमें नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल से जुड़ी सामग्री शामिल थी। साथ ही माताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें पोषण के लिए ड्राई फ्रूट लड्डू भी प्रदान किए गए जिससे उनके स्वास्थ्य लाभ में सहायता मिल सके। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था बल्कि इसमें सेवा और समाजसेवा की गहरी भावना झलकती रही। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात जीवन के महत्व को समाज में सम्मान दिलाना और मातृत्व को विशेष पहचान देना था। आयोजन में उपस्थित सभी लोगों ने इस पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम में चरक अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ कल्पना पवार और उनकी टीम ने गुरुजी का स्वागत किया और आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। अस्पताल के स्टाफ ने भी पूरी तत्परता से कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कृष्णा मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि नवजात शिशु केवल परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी होते हैं और उनका सम्मान करना समाज की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से परंपरा और सेवा भावना को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे जिनमें भारती मंडलोई तृप्ति बजाज राकेश बजाज राजेश पंडित पिंकू यादव और नितेश पटेल सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी ने इस पहल को समाज के लिए उपयोगी और प्रेरक बताया। अक्षय तृतीया के इस अवसर पर आयोजित प्रसव दिवस ने न केवल नवजीवन का स्वागत किया बल्कि सेवा और मानवता की भावना को भी एक नई दिशा दी जिससे यह आयोजन उज्जैन में चर्चा का विषय बन गया।

कमल हासन के बयान पर बढ़ी माफी की मांग और राजनीतिक प्रतिक्रिया..

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक चोल विरासत को लेकर दिए गए एक बयान के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अभिनेता और राजनेता कमल हासन के कथन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब उन्होंने चुनावी कार्यक्रम के दौरान एक मंत्री के मंदिर पुनर्निर्माण कार्यों की तुलना चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम से की, जिसके बाद इस टिप्पणी को ऐतिहासिक विरासत के संदर्भ में अनुचित बताया जाने लगा। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा गया है और कई नेताओं ने इसे तमिल इतिहास और सांस्कृतिक गौरव का अपमान बताया है। आलोचकों का कहना है कि राजराजा चोल प्रथम केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि उन्होंने तमिल सभ्यता, प्रशासन और मंदिर वास्तुकला को एक नई पहचान दी थी। उनके शासनकाल को भारतीय इतिहास में सुव्यवस्थित प्रशासन और सांस्कृतिक उत्कर्ष के लिए जाना जाता है। राजराजा चोल प्रथम ने तंजावुर में बृहदीश्वर मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे द्रविड़ स्थापत्य कला का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। उनके नेतृत्व में चोल साम्राज्य का विस्तार दक्षिण भारत से आगे बढ़कर श्रीलंका और दक्षिण पूर्व एशिया तक पहुंचा था। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए कई राजनीतिक नेताओं का कहना है कि ऐसी तुलना सार्वजनिक विमर्श में सावधानी के साथ की जानी चाहिए। विवाद के बाद विपक्षी और सत्तारूढ़ दोनों ही पक्षों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ नेताओं ने मांग की है कि कमल हासन को अपने बयान को वापस लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उनका मानना है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की तुलना राजनीतिक संदर्भों में करना जनभावनाओं को प्रभावित कर सकता है और इससे सांस्कृतिक सम्मान को ठेस पहुंच सकती है। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक प्रतीकों और सांस्कृतिक विरासत का उपयोग लंबे समय से चुनावी विमर्श का हिस्सा रहा है। ऐसे में यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित न रहकर व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। दूसरी ओर कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा मामला चुनावी माहौल में जनभावनाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों का हिस्सा बन सकता है। तमिलनाडु में सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक गौरव हमेशा से राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण आधार रहे हैं। वर्तमान स्थिति में यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इतिहास, राजनीति और जनभावनाओं के बीच टकराव का एक बड़ा उदाहरण बन गया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और अधिक तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

पिता की कस्टडी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्राकृतिक संरक्षक अधिकार पर दी अहम टिप्पणी

नई दिल्ली। नाबालिग बच्चों की कस्टडी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल यह तथ्य कि पिता बच्चों को मां से अपने साथ ले गया, उसे अवैध कस्टडी या बंधक बनाना नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसमें किसी अदालत के आदेश का उल्लंघन या स्पष्ट गैरकानूनी स्थिति साबित न हो। अदालत ने कहा कि कानून के अनुसार पिता को नाबालिग बच्चों का प्राकृतिक संरक्षक माना जाता है और इसी आधार पर उसकी कस्टडी को स्वतः अवैध नहीं ठहराया जा सकता। यह मामला एक महिला द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसके पूर्व पति ने वर्ष 2022 में कथित रूप से बल प्रयोग करते हुए बच्चों को अपने साथ ले लिया और तब से उन्हें अपने पास रखे हुए है। याचिकाकर्ता ने इसे अवैध कस्टडी बताते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी। हालांकि अदालत ने मामले की परिस्थितियों और प्रस्तुत तथ्यों की समीक्षा के बाद याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि नाबालिग बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है जब यह सिद्ध हो कि कस्टडी कानून के विरुद्ध है या किसी वैधानिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है। न्यायालय ने यह भी कहा कि केवल आरोप के आधार पर कस्टडी को अवैध नहीं माना जा सकता, विशेषकर तब जब बच्चे लंबे समय से एक अभिभावक के साथ रह रहे हों और उनके कल्याण पर कोई प्रत्यक्ष खतरा सिद्ध न हो। फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि कानूनी दृष्टि से पिता को प्राकृतिक संरक्षक का दर्जा प्राप्त है, और इस आधार पर उसकी अभिरक्षा को तब तक वैध माना जाता है जब तक कि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा विपरीत आदेश न दिया गया हो। अदालत ने यह भी कहा कि बच्चे यदि लंबे समय से किसी एक अभिभावक के साथ रह रहे हों, तो अचानक कस्टडी बदलने से उनके मानसिक और सामाजिक स्थायित्व पर प्रभाव पड़ सकता है, जिसे ध्यान में रखना आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में भावनात्मक पक्ष महत्वपूर्ण होने के बावजूद निर्णय कानूनी प्रावधानों और बच्चों के सर्वोत्तम हितों के आधार पर ही लिया जा सकता है। अदालत ने पाया कि प्रस्तुत मामले में ऐसी कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि बच्चों की वर्तमान कस्टडी गैरकानूनी है या उनके हितों के विपरीत है।

भारत रूस राजनयिक संबंधों की 79वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली में साइकिल रैली का भव्य आयोजन..

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच दशकों पुराने राजनयिक संबंधों की 79वीं वर्षगांठ के अवसर पर राजधानी नई दिल्ली में एक साइकिल रैली का आयोजन किया गया जिसने दोनों देशों के बीच गहरी होती मित्रता और सांस्कृतिक जुड़ाव को एक बार फिर उजागर किया। यह आयोजन एक जनभागीदारी कार्यक्रम के रूप में सामने आया जिसमें विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। रैली का उद्देश्य केवल खेल और फिटनेस को बढ़ावा देना ही नहीं था बल्कि भारत और रूस के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना भी था। सुबह के समय आयोजित इस साइकिल रैली में प्रतिभागियों ने राजधानी की सड़कों पर साइकिल चलाते हुए एकता और सहयोग का संदेश दिया। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे एक सकारात्मक अनुभव बताया और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं बल्कि विभिन्न देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को भी बढ़ाते हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह और ऊर्जा का माहौल देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने इसे और प्रभावशाली बना दिया। आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियां दोनों देशों के संबंधों को केवल राजनयिक स्तर तक सीमित नहीं रखतीं बल्कि इन्हें जन स्तर तक पहुंचाने में मदद करती हैं। उनका मानना है कि सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के बीच जुड़ाव और अधिक मजबूत होता है और यही वास्तविक कूटनीति की नींव होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में इस तरह के आयोजन और बड़े स्तर पर किए जाने की संभावना है जिससे अधिक लोग जुड़ सकें। कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि साइकिल रैली ने उन्हें एक अलग अनुभव दिया और यह केवल एक खेल गतिविधि नहीं बल्कि एक संदेशवाहक आयोजन था जिसमें शांति और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कुछ प्रतिभागियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि नियमित रूप से साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है और ऐसे आयोजनों से समाज में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ती है। आयोजकों के अनुसार लगभग सात सौ लोगों ने इस रैली में भाग लिया जो विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से आए थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत और रूस के बीच संबंधों को लेकर जनता में भी सकारात्मक भावना मौजूद है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा गया जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सफल रहा। भारत और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं और समय के साथ इन संबंधों ने कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया है। इस तरह के आयोजन न केवल कूटनीतिक संबंधों को मजबूती देते हैं बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को भी गहरा करते हैं। राजधानी में आयोजित यह साइकिल रैली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है जिसने एकता और मित्रता का मजबूत संदेश दिया है।

शारीरिक और मेडिकल टेस्ट के आधार पर होगा चयन, पूरी प्रक्रिया होगी पारदर्शी और निशुल्क

नई दिल्ली। देश सेवा के इच्छुक पूर्व सैनिकों और अनुभवी उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। 137वीं समग्र पारिस्थितिक टास्क फोर्स बटालियन, टेरिटोरियल आर्मी, 39 गोरखा राइफल्स ने वर्ष 2026 के लिए भर्ती रैली की घोषणा की है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 161 रिक्त पदों को भरा जाएगा। चयन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए उम्मीदवारों को सीधे भर्ती रैली स्थल पर उपस्थित होना होगा और यह प्रक्रिया पूरी तरह चरणबद्ध तरीके से आयोजित की जाएगी। यह भर्ती रैली 5 मई से शुरू होकर 23 मई तक देश के तीन अलग अलग स्थानों पर आयोजित की जाएगी। पहला चरण पश्चिम बंगाल के बेंगदुबी में 5 से 8 मई तक होगा। दूसरा चरण उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 13 से 16 मई तक चलेगा और अंतिम चरण उत्तराखंड के देहरादून में 20 से 23 मई तक संपन्न किया जाएगा। सभी उम्मीदवारों को सुबह 7 बजे निर्धारित केंद्रों पर रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा, जिसके बाद चयन प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। इस भर्ती अभियान में विभिन्न श्रेणियों के पद शामिल किए गए हैं जिनमें जूनियर कमीशंड ऑफिसर जनरल ड्यूटी के 7 पद, सोल्जर जनरल ड्यूटी के 143 पद, सोल्जर क्लर्क के 3 पद, शेफ के 2 पद, टेलर के लिए 1 पद, हाउसकीपर के 3 पद तथा वॉशरमैन और ड्रेसर के लिए एक एक पद शामिल हैं। यह अवसर विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए रखा गया है जिन्होंने पूर्व में सेना में सेवा दी हो या फिर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय या राज्य वन विभाग में कम से कम 20 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया हो। उम्मीदवारों की आयु सीमा पद के अनुसार निर्धारित की गई है। जूनियर कमीशंड ऑफिसर पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष तय की गई है जबकि अन्य रैंकों के लिए यह सीमा 50 वर्ष निर्धारित है। सभी उम्मीदवारों का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है और मेडिकल फिटनेस के रूप में शेप वन श्रेणी अनिवार्य मानी गई है। चयन प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं। सबसे पहले उम्मीदवारों को शारीरिक दक्षता परीक्षा से गुजरना होगा जिसमें एक मील की दौड़, पुल अप्स, डिच जंप और बैलेंस टेस्ट शामिल हैं। इसके बाद संबंधित ट्रेड के अनुसार प्रोफिशिएंसी टेस्ट आयोजित किया जाएगा। इन दोनों चरणों में सफल उम्मीदवारों को मेडिकल जांच के लिए बुलाया जाएगा और अंत में इंटरव्यू के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा। वेतन संरचना उम्मीदवार के पद और सेवा श्रेणी पर निर्भर करेगी। चयनित कर्मियों को मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता, आवास भत्ता, बच्चों की शिक्षा भत्ता और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। हालांकि इस सेवा में पेंशन, ग्रेच्युटी या वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ शामिल नहीं होगा, लेकिन पहले से प्राप्त पेंशन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह निशुल्क रखा गया है। उम्मीदवारों को अपने सभी आवश्यक दस्तावेज जैसे डिस्चार्ज बुक, पेंशन भुगतान आदेश, पासपोर्ट साइज फोटो, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। यह भर्ती अभियान उन अनुभवी उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जो दोबारा देश सेवा में योगदान देना चाहते हैं। Keywords: TerritorialArmyRecruitment, ArmyRally2026, DefenceJobsIndia, GovernmentJobsAlert, MilitaryServiceOpportunity संक्षिप्त विवरणटेरिटोरियल आर्मी में 161 पदों के लिए भर्ती रैली 2026 की घोषणा की गई है। देश के तीन शहरों में चयन प्रक्रिया आयोजित होगी जिसमें पूर्व सैनिक और अनुभवी उम्मीदवार भाग ले सकते हैं।

महिला आरक्षण बिल पर असफलता से बढ़ा सियासी तनाव, रूपाली गांगुली का तीखा बयान..

नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल को आवश्यक दो तिहाई बहुमत न मिलने के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा गया है। बिल के समर्थन में पर्याप्त संख्या में वोट न जुट पाने के कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। प्रस्ताव के लिए जहां 352 वोटों की आवश्यकता थी, वहीं 298 वोट ही पक्ष में पड़ सके। इस परिणाम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़ा यह मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। इस घटनाक्रम पर टीवी अभिनेत्री और राजनीतिक रूप से सक्रिय रूपाली गांगुली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस फैसले को लेकर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि जिस देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, वहां वास्तविक जीवन में उनके अधिकारों को लेकर अभी भी संघर्ष जारी है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक असमानता का संकेत बताया। अपने संदेश में रूपाली गांगुली ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य संसद और अन्य संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समानता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से इस विषय पर चर्चा होती रही है लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। उनके अनुसार यह स्थिति महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने वाली सोच को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात तो अक्सर की जाती है लेकिन जब वास्तविक अवसर देने की बात आती है तो बाधाएं सामने आ जाती हैं। उनके अनुसार यह केवल एक कानून का मामला नहीं बल्कि सोच और व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं की भागीदारी किसी एक वर्ग या समूह का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास से जुड़ा हुआ प्रश्न है। रूपाली गांगुली ने अपने संदेश में अपने लोकप्रिय धारावाहिक का संदर्भ देते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर सीमित भूमिकाओं में देखने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने कहा कि वास्तविक जीवन में भी कई बार महिलाओं को यही संदेश दिया जाता है कि उनकी भूमिका सीमित है, जो बदलने की आवश्यकता है। इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा अवसर मानते हैं, जबकि कुछ इसे संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं। हालांकि यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण जैसे विषय पर देश में व्यापक सहमति अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।

भारत श्रीलंका संबंधों में नया अध्याय, उपराष्ट्रपति के दौरे से कूटनीतिक रिश्तों में आई नई मजबूती..

नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के दो दिवसीय श्रीलंका दौरे ने दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई कूटनीतिक दिशा देने का संकेत दिया है। कोलंबो पहुंचने पर उनका पारंपरिक कंडियन नृत्य के माध्यम से भव्य स्वागत किया गया, जो दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव को दर्शाता है। इस दौरे के दौरान उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और श्रीलंका के बीच साझा इतिहास, सभ्यता और लोगों के बीच गहरे संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने पर विचार साझा किए। बातचीत में विकास सहयोग, आर्थिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा हुई। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय आधार पर भी अत्यंत मजबूत हैं और इन्हें और आगे ले जाने की आवश्यकता है। द्विपक्षीय वार्ता में भारत की ओर से चल रही आवास परियोजना और श्रीलंका में हाल ही में आए तूफान से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण से जुड़े सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया। लगभग 450 मिलियन की सहायता योजना के तहत चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसमें विशेष रूप से भारतीय मूल के तमिल समुदाय के प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अलावा मछुआरों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस विषय को मानवीय दृष्टिकोण से हल करने पर सहमति जताई ताकि सीमावर्ती समुद्री क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरा समुदायों की आजीविका सुरक्षित रह सके और किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो। इस बातचीत में समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह भारत के किसी उपराष्ट्रपति का श्रीलंका का पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा है। इस यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति ने भारतीय सहायता से निर्मित आवास परियोजना के तीसरे चरण के तहत बनाए गए घरों का भी उल्लेख किया, जिन्हें जल्द ही लाभार्थियों को सौंपा जाएगा। यह पहल दोनों देशों के बीच विकास सहयोग की गहराई और मानवीय जुड़ाव को दर्शाती है। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत और श्रीलंका के संबंधों में केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी एक नई मजबूती का संकेत देता है। क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और मानवीय मुद्दों पर बढ़ती समझ भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक गहरा कर सकती है।