भिंड में दर्दनाक हादसा, गाय के सींग से बाइक सवार युवक की मौत

नई दिल्ली। भिंड जिले के मिहोना कस्बे में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 27 वर्षीय युवक की मौत हो गई। युवक शादी समारोह में शामिल होने के लिए बाइक से जा रहा था, तभी सड़क किनारे खड़ी गाय से टकराने के बाद उसकी जान चली गई। अंधेरे में नहीं दिखी गाय, तेज रफ्तार बनी हादसे की वजहजानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक 5 निवासी संजय कुशवाहा (27) रविवार रात लहार में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने जा रहा था। जब वह रिपुदमन स्कूल के पास पहुंचा, तो अंधेरे और तेज रफ्तार के कारण सड़क किनारे खड़ी गाय दिखाई नहीं दी और बाइक सीधे उससे टकरा गई। हादसे के बाद गाय के सींग पर जा गिरा युवकटक्कर इतनी जोरदार थी कि संजय बाइक से उछलकर सीधे गाय के सींग पर गिर गया। सींग उसकी छाती में गहराई तक घुस गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और सड़क पर तड़पने लगा। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौतराहगीरों ने घायल युवक को देखकर तुरंत पुलिस को सूचना दी। मिहोना पुलिस मौके पर पहुंची और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रौन ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कीपुलिस ने सोमवार को शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
सुप्रिया सुले ने की राहुल गांधी की खुलकर तारीफ, बोलीं ईमानदारी का ओलंपिक होता तो…

नई दिल्ली। एनसीपी एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की खुलकर तारीफ की है। सोमवार 20 अप्रैल को उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को किसी भी जांच एजेंसी से डर नहीं लगता। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि अगर ईमानदारी के लिए ओलंपिक में कोई पदक होता, तो राहुल गांधी निश्चित रूप से उसे जीतते। महिला आरक्षण पर उठाए सवाल महिला आरक्षण को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि हालिया विधेयक वास्तव में महिलाओं के आरक्षण का नहीं, बल्कि परिसीमन डिलिमिटेशन से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक पहले ही 2003 में पारित हो चुका है और इसे राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित भी किया जा चुका है।देवेंद्र फडणवीस पर साधा निशाना सुले ने देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे यह कहते हैं कि जनगणना के कारण 2029 तक महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो रही है, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि जनगणना प्रक्रिया को तेज करने से किसने रोका। उनके मुताबिक, समय पर जनगणना पूरी कर इसे लागू किया जा सकता था।आदिवासी लड़कियों के लापता होने पर जताई चिंता उन्होंने महाराष्ट्र में आदिवासी लड़कियों के लापता होने के बढ़ते मामलों पर भी चिंता जताई और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। सुले ने कहा कि सत्ताधारी दलों द्वारा लगाए जा रहे आरोप गलत हैं और लोकतंत्र में हर किसी को विरोध करने का अधिकार है। आईएएस अधिकारी के व्यवहार पर कार्रवाई की मांग सुप्रिया सुले ने MHADA के सीईओ संजीव जायसवाल से जुड़े एक कथित मामले का जिक्र करते हुए कहा कि गोरेगांव के मोतीलाल नगर में स्थानीय निवासियों को धमकाने के आरोप वाले वायरल वीडियो पर मुख्यमंत्री को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर ध्यान दिया होगा।
शादी में जा रहे दंपति की बाइक अनियंत्रित होकर नहर में गिरी, बड़ा हादसा

नई दिल्ली। दतिया जिले के गोराघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गढ़ी नहर के पास रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। शादी समारोह में जा रहे एक दंपति की बाइक अचानक अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई, जिसमें 50 वर्षीय पति की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। शादी समारोह में शामिल होने निकले थे दंपतिजानकारी के अनुसार, पिपरऊआ गांव निवासी चंद्रप्रकाश कुशवाहा (50) अपनी पत्नी पिस्ता देवी के साथ ग्राम गढ़ी में आयोजित विवाह कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। दोनों रात करीब 8 बजे बाइक से निकले थे। जैसे ही वे गढ़ी नहर के पास पहुंचे, बाइक अनियंत्रित होकर सीधे नहर में जा गिरी। राहगीरों ने बचाने की कोशिश की, अस्पताल पहुंचायाहादसे के बाद मौके से गुजर रहे राहगीरों ने तुरंत दोनों को नहर से बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल दंपति को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने चंद्रप्रकाश कुशवाहा को मृत घोषित कर दिया। पत्नी की हालत गंभीर, इलाज जारीहादसे में घायल पिस्ता देवी का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। पुलिस जांच में जुटीगोराघाट थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर मर्ग कायम कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बाइक के अनियंत्रित होने की बात सामने आई है।
जापान में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में सुनामी का अलर्ट जारी

नई दिल्ली। जापान के उत्तरी हिस्से में सोमवार को जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.4 मापी गई जिससे कई इलाकों में दहशत फैल गई। नेशनल ब्रॉडकास्टर NHK के मुताबिक भूकंप के तुरंत बाद तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी कर दिया गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इवाते प्रीफेक्चर और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में समुद्री लहरें करीब 3 मीटर तक ऊंची उठ सकती हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं। सरकार और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन संभावित नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है। जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि सुनामी की लहरें तट तक पहुंचना शुरू हो चुकी हैं और ये एक बार नहीं बल्कि कई बार आ सकती हैं। ऐसे में लोगों को बिना देरी किए प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की सलाह दी गई है।
गुना : नानाखेड़ी मंडी गेट पर स्कूटी बनी आग का गोला, वीडियो वायरल

नई दिल्ली। गुना जिले के नानाखेड़ी मंडी गेट पर सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक चलती पेट्रोल स्कूटी में अचानक आग लग गई। गनीमत रही कि स्कूटी चला रही महिला ने समय रहते वाहन रोककर नीचे उतरकर अपनी जान बचा ली, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। बाजार से लौटते वक्त अचानक उठी चिंगारीजानकारी के अनुसार, भगत सिंह कॉलोनी निवासी दिलीप रघुवंशी की पत्नी सुबह करीब 11:45 बजे बाजार से काम निपटाकर घर लौट रही थीं। जैसे ही वह नानाखेड़ी मंडी गेट के पास पहुंचीं, स्कूटी में अचानक चिंगारी उठी और देखते ही देखते आग भड़क गई। महिला ने दिखाई सूझबूझ, बची जानआग लगते ही महिला ने तुरंत स्कूटी रोककर उतरने में देरी नहीं की। उनकी इस सूझबूझ से वह सुरक्षित बच गईं। कुछ ही मिनटों में आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि पूरी स्कूटी आग का गोला बन गई। लोगों ने पानी डाला, लेकिन आग नहीं बुझीघटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की और पानी भी डाला, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उस पर काबू नहीं पाया जा सका। थोड़ी ही देर में पूरी स्कूटी जलकर खाक हो गई। फायर ब्रिगेड ने पाया काबूसूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। हालांकि तब तक स्कूटी पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी।
वात्सल्य पीठ: करुणा, साधना और आत्मोन्नति का दिव्य तीर्थ

-ललित गर्ग दिल्ली जैसे महानगर की आपाधापी भागदौड़ और संवेदनहीनता के बीच यदि कोई ऐसा स्थान निर्मित हो जहाँ पहुंचते ही मन शांत हो जाए आत्मा को विश्राम मिले और जीवन को एक नई दिशा का बोध हो तो निश्चय ही वह स्थान साधारण नहीं बल्कि दिव्यता का स्पंदित केन्द्र होता है। वात्सल्य पीठ ऐसा ही एक अनुपम आध्यात्मिक तीर्थ बनकर उभरा है जो शासनमाता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी की स्मृतियों को संजोए हुए न केवल तेरापंथ धर्मसंघ के अनुयायियों के लिए बल्कि समस्त मानवता के लिए शांति साधना और आत्मिक उन्नति का केन्द्र बनने जा रहा है। 19 अप्रैल 2026 को इसके उद्घाटन का पावन अवसर केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक युगीन चेतना के जागरण एवं आध्यात्मिक अनुभवों का प्रतीक है। यह वही पावन भूमि है जहाँ साध्वीप्रमुखा कनकप्रभाजी ने अपने तप त्याग और आत्म-साधना के अनेक अमूल्य क्षण व्यतीत किए एवं यह वही सिद्ध भूमि है जहां उन्होंने देह से विदेह होने की यानी निर्वाण यात्रा की है और इसी भूमि पर उनका दाह-संस्कार हुआ। आज वही भूमि वात्सल्य पीठ के रूप में एक ऐसे जीवंत तीर्थ में परिवर्तित हो चुकी है जहाँ हर कण में वात्सल्य की मधुरता और साधना की गंभीरता अनुभव की जा सकती है। यहाँ का वातावरण मानो स्वयं बोलता है यहाँ शांति केवल शब्द नहीं बल्कि अनुभूति है यहाँ अध्यात्म केवल विचार नहीं बल्कि जीवन का साक्षात् स्पर्श है। इस स्थल पर पहुंचकर ऐसा लगता है कि जीवन की समस्त अशांति व्याकुलता और तनाव धीरे-धीरे विलीन हो रहे हैं और आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप की ओर लौट रही है। वात्सल्य पीठ की संरचना और सज्जा भी अपने आप में अत्यंत अद्वितीय और आकर्षक है। इसकी वास्तुकला में आधुनिकता और आध्यात्मिकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। खुले आकाश की ओर उन्मुख इसकी रचना प्राकृतिक प्रकाश के लिए बनाए गए स्काईलाइट्स स्वच्छ वायु के संचार के लिए संतुलित वेंटिलेशन और सादगी में निहित गरिमामयी भव्यता-ये सभी तत्व इसे एक सजीव ध्यान-स्थली का रूप प्रदान करते हैं। यहाँ की प्रत्येक दीवार प्रत्येक मार्ग और प्रत्येक कोना जैसे एक मौन संदेश देता है कि जीवन का उद्देश्य बाहरी चकाचौंध में नहीं बल्कि आंतरिक प्रकाश की खोज में है। तमसो मा ज्योतिर्गमय का शाश्वत मंत्र यहाँ की संरचना में साकार रूप से अनुभव किया जा सकता है। इसकी सज्जा कृत्रिम आडंबर से दूर सहज और सात्विक है जो साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा के व्यक्तित्व की ही तरह निर्मल शांत और प्रभावशाली प्रतीत होती है। साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा का व्यक्तित्व अपने आप में एक विलक्षण प्रेरणा है। वे केवल एक साध्वी नहीं थीं बल्कि वात्सल्य की मूर्ति ज्ञान की गंगा और सृजन की सजीव सरस्वती थीं। अल्पायु में ही आचार्य तुलसी के सान्निध्य में दीक्षित होकर उन्होंने अपने जीवन को साधना सेवा और सृजन के लिए समर्पित कर दिया। मात्र 17 वर्ष की आयु में उन्होंने जिस आध्यात्मिक पथ का वरण किया वह आगे चलकर एक विराट साध्वी संघ के संचालन और मार्गदर्शन तक पहुँचा। लगभग सात सौ से अधिक साध्वियों के विशाल परिवार का नेतृत्व करना अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है और यह तब और भी विशिष्ट हो जाता है जब उसमें अनुशासन के साथ-साथ वात्सल्य और संवेदना का संतुलन भी बना रहे। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि नारी केवल करुणा और ममता की प्रतीक नहीं बल्कि संगठन नेतृत्व और सृजन की भी अद्वितीय शक्ति है। उनका जीवन एक दीपशिखा की भांति था जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश प्रदान करती रही। उनकी वाणी में ओज विचारों में गहराई और आचरण में ऐसी पवित्रता थी जो हर व्यक्ति को प्रभावित और प्रेरित करती थी। वे केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं रहीं बल्कि साहित्य शिक्षा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने अनेक साहित्यिक कृतियों की रचना और संपादन किया तथा आचार्य तुलसी की आत्मकथा मेरा जीवन मेरा दर्शन के संपादन में भी अपनी अद्वितीय प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता अभिव्यक्ति में माधुर्य और चिंतन में गहराई का अद्भुत समन्वय था। वे एक सफल साध्वी कुशल प्रशासक प्रभावशाली वक्ता और संवेदनशील कवयित्री के रूप में जानी जाती थीं। वात्सल्य पीठ का निर्माण केवल एक स्मारक के रूप में नहीं किया गया है बल्कि इसे एक जीवंत आध्यात्मिक केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है। यह स्थान आने वाले समय में एक ऐसे तीर्थ के रूप में प्रतिष्ठित होगा जहाँ न केवल श्रद्धालु बल्कि जीवन में शांति-दिशा की खोज करने वाला प्रत्येक व्यक्ति आकर्षित होगा। यहाँ आने वाला हर व्यक्ति अपने भीतर एक नई ऊर्जा एक नई सकारात्मकता और एक नए संकल्प का अनुभव करेगा। यह स्थान व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है और यही जुड़ाव उसे समाज संस्कृति और मानवता के प्रति अपने दायित्वों का भी बोध कराता है। शासन माता साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा का संपूर्ण जीवन वात्सल्य की ऐसी निर्मल धारा था जिसने न केवल तेरापंथ साध्वी संघ को बल्कि जन-जन के अंतर्मन को भी स्नेह करुणा और आत्मीयता से आप्लावित किया। उनके व्यक्तित्व में वात्सल्य केवल एक गुण नहीं बल्कि एक जीवंत चेतना थी एक ऐसी करुणामयी ऊर्जा जो हर मिलने वाले को अपनेपन के आलोक में भर देती थी। वे अनुशासन की अधिष्ठात्री होते हुए भी ममता की मूर्ति थीं उनके सान्निध्य में कठोरता भी कोमलता में बदल जाती थी। उन्होंने सैकड़ों साध्वियों का नेतृत्व केवल व्यवस्था से नहीं बल्कि माँ की तरह स्नेहिल संरक्षण देकर किया और यही कारण था कि उनके व्यक्तित्व में शासन और माता का अद्भुत संगम साकार हुआ। उनके प्रेम संवेदना और वात्सल्य की असीम अनुकम्पा से अनगिनत जीवन स्पर्शित परिवर्तित और आलोकित हुए। इसी वात्सल्य-रस से आप्लावित उनके जीवन की स्मृतियों को सहेजने के लिए वात्सल्य पीठ नाम पूर्णतः सार्थक और उपयुक्त प्रतीत होता है क्योंकि यह केवल एक स्मारक नहीं बल्कि उस दिव्य मातृत्व उस अनंत करुणा और उस जीवनदायी स्नेह का प्रतीक है जिसे साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा ने अपने जीवन के प्रत्येक क्षण में जिया और जन-जन तक पहुँचाया। आज के समय में जब भौतिकता और प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में मनुष्य अपने भीतर की शांति और संतुलन खोता जा रहा है ऐसे में वात्सल्य पीठ जैसे केन्द्र अत्यंत आवश्यक हो जाते हैं। यह हमें स्मरण कराता है कि जीवन का वास्तविक सुख बाहरी उपलब्धियों में नहीं बल्कि
अशोकनगर में 30 फीट गहरे कुएं में गिरी कार, बड़ा हादसा टला

नई दिल्ली। अशोकनगर जिले के नई सराय थाना क्षेत्र में रविवार देर शाम एक बड़ा हादसा हुआ, जब एक कार अनियंत्रित होकर लगभग 30 फीट गहरे सूखे कुएं में जा गिरी। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से कार में सवार सभी लोगों की जान बचा ली गई और बड़ा हादसा टल गया। मोड़ पर अनियंत्रित हुई कार, कुएं में जा गिरीजानकारी के अनुसार, शिवपुरी के बड़ौदी निवासी सत्येंद्र बाथम के वाहन से वीरू कुशवाह अपने साथी और एक दुल्हन के साथ घर लौट रहे थे। इसी दौरान अखाई घाट और घुरवार गांव के बीच मोड़ पर कार अचानक अनियंत्रित होकर सीधे कुएं में जा गिरी। घटना को एक राहगीर ने देख लिया और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने रस्सी के सहारे किया रेस्क्यू ऑपरेशनसूचना मिलते ही नई सराय थाना प्रभारी मनीष सिंह गुर्जर पुलिस टीम और 112 वाहन के साथ मौके पर पहुंचे। बिना देर किए पुलिस ने रेस्क्यू शुरू किया। एक पुलिसकर्मी को रस्सी के सहारे कुएं में उतारा गया, जिसके बाद एक-एक कर महिला, चालक और अन्य यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। समय रहते बची जान, बड़ी अनहोनी टलीप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि पुलिस समय पर नहीं पहुंचती तो कुएं में फंसे लोगों की दम घुटने से जान जा सकती थी। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। वाहन निकालने का प्रयास जारीघटना के बाद देर रात तक करीब 12:15 बजे तक कुएं में गिरी कार को निकालने का प्रयास जारी रहा, हालांकि वाहन को बाहर नहीं निकाला जा सका।
अपनी विशिष्ट संवाद शैली और आंखों के खौफ से दर्शकों को डराने वाले महान कलाकार..

नई दिल्ली/मुंबई। भारतीय सिनेमा के इतिहास में खलनायकों के किरदारों ने हमेशा से कहानी को एक नई ऊंचाई दी है लेकिन नब्बे के दशक में एक ऐसा चेहरा उभरा जिसने बिना चीखे और बिना चिल्लाए केवल अपनी आंखों की गहराई से दर्शकों के दिल में दहशत पैदा कर दी। हम बात कर रहे हैं दिग्गज अभिनेता रामी रेड्डी की जिन्होंने अपनी विशिष्ट संवाद शैली और प्रभावशाली व्यक्तित्व के दम पर खलनायकी की एक नई परिभाषा लिखी थी। करीब ढाई सौ फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाले इस कलाकार का स्क्रीन प्रेजेंस इतना जबरदस्त था कि उनके पर्दे पर आते ही नायक और दर्शक दोनों के पसीने छूट जाते थे। रामी रेड्डी ने यह साबित किया कि खौफ पैदा करने के लिए डरावने मेकअप की नहीं बल्कि सधी हुई नजरों और ठंडे लहजे की जरूरत होती है। बहुत कम लोग इस तथ्य से परिचित हैं कि फिल्मी चकाचौंध में आने से पहले रामी रेड्डी पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में जन्मे रेड्डी ने हैदराबाद के विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की और एक दैनिक समाचार पत्र में अपनी सेवाएं दीं। हालांकि उनके भीतर के कलाकार ने उन्हें अंततः अभिनय की ओर खींच लिया। क्षेत्रीय सिनेमा से शुरू हुआ उनका सफर हिंदी सिनेमा तक पहुंचा जहां कर्नल शिकारा और स्पॉट नाना जैसे किरदारों ने उन्हें रातों रात घर-घर में मशहूर कर दिया। उनके संवाद बोलने का सपाट अंदाज और दक्षिण भारतीय पुट वाली आवाज दर्शकों के जेहन में आज भी ताजा है। सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद इस महान कलाकार का जीवन संघर्षों के एक कठिन दौर में प्रवेश कर गया। साल दो हजार दस के आसपास उनकी सेहत में भारी गिरावट दर्ज की गई और गंभीर बीमारी की पुष्टि हुई। इस शारीरिक समस्या ने उनके स्वास्थ्य पर इतना बुरा प्रभाव डाला कि पर्दे पर बेहद मजबूत दिखने वाला यह कलाकार शारीरिक रूप से बहुत कमजोर हो गया। अपने अंतिम दिनों में उनकी स्थिति इतनी बदल गई थी कि उन्हें पहचानना तक मुश्किल था लेकिन उनकी इच्छाशक्ति अंत तक बनी रही। बीमारी से लंबी और साहसी लड़ाई लड़ने के बाद चौदह अप्रैल दो हजार ग्यारह को महज बावन वर्ष की आयु में इस महान अभिनेता ने हैदराबाद में अंतिम सांस ली। उनका असमय जाना फिल्म जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति थी जिसकी भरपाई आज भी नहीं हो सकी है। रामी रेड्डी अपने पीछे एक समृद्ध फिल्मी विरासत छोड़ गए हैं जो आने वाली पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक प्रेरणा की तरह है। आज भले ही वह हमारे बीच मौजूद नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्मों के दृश्य और उनकी वह डरावनी खामोशी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगी।
सागर में बीएमसी पर गंभीर सवाल गर्भवती की मौत के बाद परिजनों का विरोध

सागर । सागर शहर में स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एक गर्भवती महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मृतका की पहचान तीस वर्षीय संध्या अहिरवार के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार संध्या को सत्रह तारीख को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का आरोप है कि भर्ती के बाद समय पर इलाज नहीं मिला और गंभीर लापरवाही की गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने इलाज के बदले पचास हजार रुपये की मांग की थी। उनका कहना है कि पैसे न देने की वजह से ऑपरेशन में देरी की गई और मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों का दावा है कि अगर समय पर ऑपरेशन किया जाता तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। सोमवार सुबह करीब पांच बजे संध्या की तबीयत अचानक अत्यंत गंभीर हो गई। इसके बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया और परिजनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। घटना के बाद परिजनों का आक्रोश बढ़ता गया और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही का मामला नहीं है बल्कि गंभीर भ्रष्टाचार और अमानवीय व्यवहार का भी संकेत देता है। परिजनों ने आरोप लगाया कि गरीब मरीजों के साथ इलाज के नाम पर पैसों की मांग करना आम बात हो गई है और इस पर रोक लगनी चाहिए। अस्पताल परिसर में हुए हंगामे के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए गए लेकिन अब तक बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इससे लोगों में और अधिक नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहेंगे तो आम जनता का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से उठ जाएगा। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच की बात कही है लेकिन परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों के लिए बेहतर और पारदर्शी इलाज व्यवस्था की मांग तेज हो गई है।
मंदसौर में आज बिजली कटौती, कई इलाकों में घंटों बंद रहेगी सप्लाई

नई दिल्ली। मंदसौर शहर में सोमवार को कई इलाकों में बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित रहेगी। विद्युत विभाग ने बताया कि 11 केवी लाइनों के मानसून पूर्व आवश्यक रखरखाव कार्य के कारण यह कटौती की जा रही है। सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगी कटौतीसहायक यंत्री के अनुसार, आज मालगोदाम क्षेत्र के अंतर्गत स्टेडियम फीडर पर काम किया जाएगा। इस वजह से सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। कुल चार घंटे तक कई इलाकों में बिजली बाधित रहेगी। इन इलाकों में प्रभावित होगी बिजलीइस कटौती से शुक्ला कॉलोनी, पुलिस कॉलोनी, दशरथ नगर, मालगोदाम रोड, माथुर कॉलोनी, जैन कॉलोनी, सेठिया विहार, संजीत रोड, संजय गांधी उद्यान, भारत प्लाजा, जनपद पंचायत और बंटी चौराहा सहित आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। विभाग ने दी जानकारी और अपीलविद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह कार्य बिजली व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है। साथ ही विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर समय में बदलाव किया जा सकता है।