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भारत की ये खूबसूरत जगहें कैमरे में कैद करने लायक, Photography के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन

नई दिल्ली। भारत एक सुंदर देश है। जहां के हर कौने में सुंदरता फैली हुई है। जहाँ हर राज्य में ऐसी खूबसूरत जगहें हैं जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं। अगर आप अपने कैमरे से बेहतरीन यादें कैद करना चाहते हैं, तो भारत की ये जगहें आपके लिए परफेक्ट हैं।चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप अपने कैमरे में भारत की किन किन जगहों की सुंदरता को कैद कर सकते हैं। जयपुरसबसे पहले बात करें जयपुर की, जिसे ‘पिंक सिटी’ कहा जाता है। यहाँ के महल, हवेलियाँ और किले फोटोग्राफी के लिए बेहद शानदार बैकग्राउंड देते हैं। खासकर हवा महल और आमेर किला हर फ्रेम को शाही बना देते हैं। ऋषिकेशऋषिकेश भारत का एक पवित्र शहर है। यह भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। और गंगा के घाटों पर शाम का दृश्य कोईइ भी फोटोग्राफर छोड़ना नहीं चाहेगा। ऋषिकेश फोटोग्राफी के लिए भारत की सबसे खूबसूरत और शांत जगहों में से एक है। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य, गंगा नदी और पहाड़ों का संगम हर फोटोग्राफर को आकर्षित करता है।लक्ष्मण झूला और राम झूला जैसे प्रसिद्ध स्थान यहां की पहचान हैं, जहाँ से गंगा का नजारा बेहद शानदार दिखता है। सुबह और शाम का समय यहां फोटोग्राफी के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है, जब सूरज की रोशनी पानी पर सुनहरी चमक बिखेरती है। मनाली, हिमाचल प्रदेशमनाली भारत के सबसे खूबसूरत पहाड़ी स्टेशनों में से एक है आप यहां आकर फोटोग्राफी के लिए कई दृश्यों को देख सकते हैं जो आपका दिल खुश कर देगीं।यहां पर आपको ऐसे कई नजारे देखेंगे जो आप अपने कैमरे में कैद जरूर करना चाहेंगे। डल झील, कश्मीरकश्मीर के हर नजारे काफी खूबसूरत होते हैं लेकिन डल झील की बात ही खास है। डल झील कश्मीर में स्थित हैं। डल झील को देखकर आपका रोम-रोम खिल उठेगा।यहां आकर यहां की सुंदर तस्वीरो को कैद कर फिल्मी झरोखों की तरह संभाल सकते हैं। यहां फोटोग्राफी का अनुभव शानदार होगा।

Kharge Modi controversy : खड़गे के बयान से सियासी भूचाल मोदी को बताया ‘आतंकवादी’ भाजपा ने EC से की सख्त कार्रवाई की मांग

   Kharge Modi controversy : नई दिल्ली। तमिलनाडु में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान ने देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में तीखी टिप्पणी करते हुए एक शब्द का प्रयोग किया, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। इस बयान के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है और मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। भाजपा नेताओं ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि देश के प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल आपत्तिजनक है बल्कि यह राजनीतिक संस्कृति को भी नुकसान पहुंचाता है। भाजपा का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की टिप्पणियां जनता को गुमराह करने और माहौल को बिगाड़ने का काम करती हैं। इस मामले को लेकर भाजपा ने औपचारिक रूप से चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराते हुए मांग की है कि इस बयान का संज्ञान लिया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार के डर से इस तरह की भाषा का सहारा ले रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। इस विवाद में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बयान किसी भावनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं बल्कि सोच समझकर दिया गया राजनीतिक संदेश है। उनके अनुसार विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री और सरकार पर व्यक्तिगत हमले कर रहा है जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं भाजपा के एक अन्य नेता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह बयान देश की जनता और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार चुनावी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहा है। विवाद बढ़ने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उनके अनुसार उनका आशय किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करना नहीं था बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और विपक्ष के प्रति कथित दबाव की राजनीति को उजागर करना था। उन्होंने कहा कि सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्षी दलों को दबाने का प्रयास कर रही है और यही बात उन्होंने अपने बयान में कही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते हैं वैसे वैसे राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती जाती है। उनका कहना है कि इस तरह के विवाद अक्सर चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं और कई बार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाकर व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप को बढ़ावा देते हैं। इस पूरे विवाद ने चुनावी चर्चा का केंद्र बदल दिया है और अब राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप लगाने में जुट गए हैं। फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

एलोवेरा जेल के साइड इफेक्ट्स: किन लोगों के लिए हो सकता है नुकसानदायक, जानें जरूरी सावधानियां

नई दिल्ली। एलोवेरा जेल को स्किन और बालों की देखभाल के लिए एक प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय माना जाता है। यह त्वचा को ठंडक देने, जलन कम करने और बालों को पोषण देने में मदद करता है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यह जरूरी नहीं कि एलोवेरा हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सुरक्षित हो। कुछ लोगों को इसके इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए। त्वचा पर एलर्जी वाले लोग रहें सावधानजिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है या जिन्हें एलर्जी की समस्या रहती है, उन्हें एलोवेरा जेल का उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। कुछ मामलों में इससे खुजली, लालिमा या जलन हो सकती है। डायबिटीज के मरीजों के लिए सावधानीविशेषज्ञों के अनुसार, एलोवेरा शरीर के ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित कर सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन या उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएंगर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को एलोवेरा जेल या इसके किसी भी आंतरिक उपयोग से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह हार्मोन और शरीर पर असर डाल सकता है। त्वचा रोग या खुले घाव में न लगाएंजिन लोगों को गंभीर त्वचा रोग, संक्रमण या खुले घाव हैं, उन्हें बिना सलाह के एलोवेरा जेल का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा हो सकता है। सही उपयोग से ही मिलेगा लाभएलोवेरा जेल प्राकृतिक जरूर है, लेकिन इसका सही और सीमित उपयोग ही फायदेमंद होता है। बाजार में उपलब्ध शुद्ध और प्रमाणित उत्पादों का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

Mallikarjun Kharge statement : खरगे के बयान से गरमाई सियासत, पीएम मोदी पर टिप्पणी के बाद दी सफाई, बीजेपी ने घेरा

   Mallikarjun Kharge statement : नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने मंगलवार को राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसके बाद तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। दरअसल, चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने AIADMK और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ कह दिया। इस बयान के सामने आते ही बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई और कांग्रेस पर प्रधानमंत्री का अपमान करने का आरोप लगाया। खरगे ने अपने बयान में कहा कि AIADMK, जो अन्नादुरई की विचारधारा का दावा करती है, वह मोदी के साथ कैसे जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती और इस तरह का गठबंधन लोकतंत्र को कमजोर करता है। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तारीफ करते हुए उन्हें बीजेपी के खिलाफ मजबूती से खड़े होने वाला नेता बताया। MLA PRITAM LODHI : औकात और कानून में रहो…’ भाजपा विधायक प्रीतम लोधी का IPS अधिकारी को खुली धमकी का वीडियो वायरल बयान पर सफाई विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उनके मुताबिक, उन्होंने पीएम मोदी को ‘आतंकवादी’ नहीं कहा, बल्कि यह कहना चाहा कि वे राजनीतिक दलों और लोगों को डराने का काम करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ED, IT और CBI जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। बीजेपी का पलटवार बीजेपी ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार प्रधानमंत्री का अपमान करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक पीएम मोदी के खिलाफ कई बार आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा चुका है और इसके लिए कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए।

आंखों की समस्या केवल थकान नहीं पित्त असंतुलन भी हो सकता है कारण, जानें देखभाल के सरल उपाय

नई दिल्ली: आज की आधुनिक जीवनशैली में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीन के उपयोग के कारण आंखों में भारीपन, जलन और पानी आने जैसी परेशानियां आम हो गई हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समस्या सुबह उठते ही अधिक महसूस हो तो इसे केवल थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि यह शरीर के अंदरूनी असंतुलन का संकेत भी हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार आंखों की सेहत केवल बाहरी कारणों पर निर्भर नहीं करती बल्कि शरीर के भीतर मौजूद पित्त संतुलन से भी गहराई से जुड़ी होती है। पित्त शरीर में गर्मी और ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने का कार्य करता है, लेकिन जब यह असंतुलित हो जाता है तो शरीर में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होने लगती है। इसका सीधा प्रभाव आंखों पर पड़ता है जिससे जलन, सूखापन और भारीपन जैसी समस्याएं सामने आती हैं। दैनिक जीवन की कई आदतें इस असंतुलन को बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं। देर तक स्क्रीन देखना, नींद पूरी न होना, तनावपूर्ण दिनचर्या और अनियमित खानपान शरीर में पित्त को प्रभावित करते हैं। आयुर्वेद में माना गया है कि आंखें शरीर के पित्त से जुड़ी होती हैं और पित्त रक्त से जुड़ा होता है। रक्त का संबंध पाचन और लिवर से होता है, ऐसे में जब पाचन और लिवर पर दबाव बढ़ता है तो इसका असर आंखों की सेहत पर भी दिखाई देता है। इस समस्या से राहत पाने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करना बेहद जरूरी है। रात में हल्का और संतुलित भोजन करने से पाचन तंत्र पर दबाव कम होता है और शरीर को आराम मिलता है। सुबह उठते ही ठंडे पानी से आंखों को धोने से आंखों की थकान कम होती है और ताजगी महसूस होती है। दिन में दो बार त्रिफला जल से आंखों की सफाई करना भी आंखों के लिए फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से आंखों को ठंडक और आराम प्रदान करता है। इसके अलावा खीरा या ककड़ी का उपयोग आंखों पर करने से सूजन और जलन में राहत मिलती है। लगातार स्क्रीन पर काम करने से बचना और बीच-बीच में आंखों को आराम देना भी जरूरी है। डिजिटल आदतों में संतुलन लाना आंखों की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आहार का भी आंखों की सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है। विटामिन ए, सी और ई से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे आंवला, गाजर, अनार, पपीता, शकरकंद, कद्दू, दूध और अंडे आंखों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। ये पोषक तत्व न केवल आंखों की रोशनी को बेहतर बनाते हैं बल्कि थकान और जलन को भी कम करते हैं। शरीर के भीतर होने वाले बदलावों को समझना और सही जीवनशैली अपनाना आंखों की लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

Iran America conflict : सीजफायर की डेडलाइन नजदीक, अमेरिका-ईरान के बीच 24 घंटे में तय होगा जंग या बातचीत का रास्ता

 Iran America conflict : नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लागू सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है, और ऐसे में दोनों देशों के लिए आने वाले 24 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। इस दौरान यह साफ हो सकता है कि हालात युद्ध की ओर बढ़ेंगे या कूटनीतिक बातचीत से समाधान निकलेगा। अमेरिका की ओर से बातचीत के लिए डेलिगेशन के पाकिस्तान जाने को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। सोमवार को खबरें आई थीं कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जल्द इस्लामाबाद पहुंच सकता है, लेकिन बाद में ये खबरें गलत साबित हुईं। सीजफायर की समयसीमा खत्म होने से पहले अगर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो एक बार फिर संघर्ष शुरू होने की आशंका है। फिलहाल यह भी तय नहीं है कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच कोई बैठक होगी या नहीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेडी वेंस मंगलवार को पाकिस्तान के लिए रवाना हो सकते हैं। वहीं Bloomberg से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सीजफायर अमेरिकी समयानुसार बुधवार रात 8 बजे तक लागू रहेगा। इस हिसाब से दोनों देशों के पास गुरुवार सुबह तक निर्णय लेने का समय होगा। दूसरी ओर, ईरान ने साफ किया है कि उसकी कोई भी आधिकारिक या अनौपचारिक टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं गई है। सरकारी मीडिया के अनुसार, इस तरह की सभी खबरें गलत हैं। ईरान का कहना है कि वह धमकियों के माहौल में बातचीत नहीं करेगा और जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी। 21 April 2026 Prediction : मूलांक 1 से 9 तक का 21 अप्रैल 2026 अंक राशिफल, जानें मंगलवार का पूरा भविष्यफल बातचीत में अड़चन क्यों? ईरान के बातचीत से पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक और दबाव वाली रणनीति ने हालात को जटिल बना दिया है। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े दावे करते हैं, जिनका ईरान खंडन कर देता है।ईरान के बातचीत से पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक और दबाव वाली रणनीति ने हालात को जटिल बना दिया है। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े दावे करते हैं, जिनका ईरान खंडन कर देता है। ट्रंप जहां तेजी से समझौता करना चाहते हैं, वहीं ईरान धैर्य के साथ लंबी रणनीति अपनाए हुए है। ट्रंप का दावा है कि वह ईरान के साथ बराक ओबामा से बेहतर परमाणु समझौता करेंगे, लेकिन ईरान का कहना है कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि एक सरकार समझौता करती है और दूसरी उसे तोड़ देती है। Hair Care Tips: झड़ते बालों से छुटकारा पाने और ग्रोथ बढ़ाने के लिए अपनाएं ये असरदार उपाय ईरान की चेतावनी ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ईरान नए तरीकों से जवाब देगा। उन्होंने संकेत दिया कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत किया है, जिसमें मिसाइल और ड्रोन क्षमता भी शामिल है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव या थोपे गए शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा। अब नजर इस बात पर है कि सीजफायर खत्म होने के बाद हालात टकराव की ओर बढ़ते हैं या कूटनीति से कोई रास्ता निकलता है।

गूगल पर ‘near me’ सर्च का बढ़ता ट्रेंड होटल, रेस्टोरेंट और अस्पताल सबसे ज्यादा खोजी जाने वाली कैटेगरी

 नई दिल्ली: डिजिटल युग में लोगों की जरूरतें अब तेजी से ऑनलाइन सर्च पर निर्भर होती जा रही हैं। जब भी किसी को अपने आसपास किसी सुविधा की जरूरत होती है तो वह तुरंत मोबाइल या कंप्यूटर पर गूगल खोलकर ‘near me’ लिख देता है और नजदीकी विकल्पों की तलाश शुरू कर देता है। यह ट्रेंड अब आम जीवन का हिस्सा बन चुका है और लगातार तेजी से बढ़ रहा है। ताजा पैटर्न के अनुसार लोग सबसे ज्यादा अपने आसपास रेस्टोरेंट, होटल, अस्पताल और कैफे जैसी सेवाओं की खोज करते हैं। ‘restaurants near me’ और ‘hotel near me’ जैसी क्वेरीज सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली सर्च में शामिल हैं। इसके अलावा स्कूल, जिम, सलून, स्पा और एटीएम जैसी सुविधाओं की खोज भी लगातार बढ़ रही है। यह दर्शाता है कि लोग अब अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं। स्वास्थ्य से जुड़ी सर्च भी इस ट्रेंड का अहम हिस्सा बन चुकी है। लोग अचानक बीमारी या इमरजेंसी स्थिति में ‘hospital near me’ या ‘clinic near me’ जैसे कीवर्ड का इस्तेमाल करते हैं ताकि तुरंत नजदीकी इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अलावा दवा की दुकान और मेडिकल टेस्ट से जुड़ी खोजों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे यह साफ होता है कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पहले से ज्यादा बढ़ी है। इसके साथ ही ट्रैवल और लाइफस्टाइल से जुड़े विकल्प भी ‘near me’ सर्च में शामिल हैं। लोग अपने आसपास मॉल, पार्क, पेट्रोल पंप, स्विमिंग पूल और रिजॉर्ट जैसी जगहों की भी खोज करते हैं। होटल और रेस्टोरेंट की मांग हमेशा टॉप पर रहती है क्योंकि बाहर खाने और घूमने की आदतें तेजी से बढ़ी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह ट्रेंड स्थानीय व्यवसायों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। छोटे और बड़े व्यापार अब सीधे ऑनलाइन सर्च के जरिए ग्राहकों तक पहुंच पा रहे हैं। इससे न केवल ग्राहकों को सुविधा मिलती है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी डिजिटल मजबूती मिल रही है।  ‘near me’ सर्च अब केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। लोग समय बचाने और तुरंत समाधान पाने के लिए इस सुविधा पर निर्भर हो रहे हैं और आने वाले समय में इस ट्रेंड के और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।

लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

नई दिल्ली।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के चलते लागू की गई शराबबंदी ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगाए गए इस प्रतिबंध को लेकर सत्ताधारी दल और चुनावी व्यवस्था से जुड़े निर्णयों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक बहस को तेज किया है बल्कि राज्य के कारोबारी वर्ग पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। निर्णय के अनुसार राज्य में शराब की बिक्री और परोसने पर 20 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल तक अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लागू किया गया है। इस अवधि में कुल मिलाकर लगभग साढ़े नौ दिन तक शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। मतदान के चरणों और मतगणना के आसपास के समय को देखते हुए यह प्रतिबंध लागू किया गया है, हालांकि बीच में कुछ दिनों के लिए सीमित राहत भी दी गई है। इस फैसले का असर राज्य के व्यापारिक ढांचे पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है। अनुमान के अनुसार इस अवधि में सरकार को लगभग 1400 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान की संभावना है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्य की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला बताया जा रहा है। पूरे राज्य में हजारों की संख्या में शराब की दुकानें और बार संचालित होते हैं, जिनका दैनिक कारोबार करोड़ों रुपये में होता है। ऐसे में लंबे समय तक पाबंदी से कारोबार ठप होने की स्थिति बन गई है। इस निर्णय का असर केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर वे व्यवसाय जो बार और खाद्य सेवाओं पर निर्भर हैं, उन्हें ग्राहकों की कमी और बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। शराब कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले से ही स्टॉक और बिक्री को लेकर कई तरह की पाबंदियां लागू थीं और अब लंबे समय की बंदी से उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा। उनका यह भी कहना है कि अलग-अलग चरणों में लागू नियमों के कारण स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। वहीं इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्ताधारी दल के नेताओं का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के नाम पर ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं जो आम जनता और छोटे कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से प्रभावित प्रतीत होते हैं और इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रतिबंध निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।  पश्चिम बंगाल में लागू यह शराबबंदी अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गई है बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। इससे जहां एक ओर राज्य का राजस्व प्रभावित होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर चुनावी माहौल और भी अधिक गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती नई दिल्ली।

DATIYA COLLECTOR’S HEARING : दतिया जनसुनवाई में शिकायतों का अंबार, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश

DATIYA PUBLIC HEARING

HIGHLIGHTS: दतिया कलेक्ट्रेट में बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादी जमीन सीमांकन और अवैध कब्जे की शिकायतें प्रमुख आर्थिक सहायता और स्वास्थ्य मामलों पर भी गुहार कलेक्टर ने त्वरित निराकरण के दिए निर्देश सभी मामलों में समय-सीमा में कार्रवाई के आदेश   DATIYA COLLECTOR’S HEARING : ग्वालियर। दतिया कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में जिलेभर से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। जमीन सीमांकन, अवैध कब्जा, बंटवारा, आर्थिक सहायता और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों की शिकायतें सबसे अधिक रहीं। कलेक्टर ने सभी आवेदनों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम बनने के बाद पहली दिल्ली यात्रा में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य विकास पर मंथन जमीन विवाद और कब्जे की शिकायतें बनीं प्रमुख मुद्दा बताया जा रहा है कि ग्राम गणेशखेड़ा के एक निवासी ने सीमांकन में देरी और पड़ोसियों द्वारा कब्जे का आरोप लगाया। वहीं, बड़ौनी और इंदरगढ़ क्षेत्र से भी कई लोगों ने जमीन विवाद और अवैध कब्जे की शिकायतें दर्ज कराईं। कुछ मामलों में पुलिस बल की मौजूदगी में सीमांकन कराने की मांग भी सामने आई। GWALIOR HEAT WAVE : भीषण गर्मी का कहर, ग्वालियर बना प्रदेश का दूसरा सबसे गर्म शहर; पारा 42.5°C पार आर्थिक संकट और सरकारी मदद की गुहार रिछरा फाटक निवासी सायरा वानो ने पति की मौत के बाद आर्थिक सहायता और बेटी की शादी के लिए सरकारी मदद की मांग की। उन्होंने बताया कि नगर पालिका के कई चक्कर लगाने के बावजूद कोई सहायता नहीं मिली। इससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम प्रशासन पर लापरवाही के आरोप इंदरगढ़ निवासी रामचरन अहिरवार ने जमीन बंटवारे की फाइल लंबित रखने और बाद में निरस्त करने का आरोप लगाया। वहीं, एक अन्य शिकायत में पटवारी पर रिश्वत मांगने और जानबूझकर काम रोकने के गंभीर आरोप लगाए गए, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए। मंडी व्यवस्था पर सवाल: Burhanpur में किसानों की भीड़, उप संचालक बोले- व्यवस्था सुधरी कलेक्टर के सख्त निर्देश कलेक्टर ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को जांच कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनसुनवाई में आने वाले हर आवेदन का समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

BJP DMK alliance : चेन्नई में खड़गे के बयान से सियासी तूफान प्रधानमंत्री पर टिप्पणी और गठबंधन राजनीति को लेकर बढ़ा विवाद

   BJP DMK alliance : नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने संबोधन में भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर तीखे आरोप लगाए, लेकिन उनके एक बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में खासा विवाद खड़ा हो गया है। बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है। प्रेस वार्ता के दौरान खड़गे ने तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति और गठबंधन समीकरणों पर टिप्पणी करते हुए नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां सामाजिक समानता और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ जा रही हैं। इसी दौरान उनके एक बयान को लेकर विवाद गहरा गया जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के संदर्भ में आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। खड़गे ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार विपक्षी दलों को कमजोर करने और राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया पर इसका असर पड़ सकता है और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र की मजबूती के लिए संस्थाओं की स्वतंत्रता बेहद जरूरी है और किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव इस व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है। इसके साथ ही उन्होंने दक्षिण भारत की राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस का गठबंधन डीएमके के साथ आगे भी जारी रहेगा और यह गठबंधन राज्य में विकास और कल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने के लिए काम करेगा। उन्होंने शिक्षा स्वास्थ्य और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों को गठबंधन की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल बताया। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। भाजपा नेताओं ने खड़गे के बयान की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। वहीं एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों ने भी इस बयान को अनुचित करार दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने खड़गे के बयान का समर्थन करते हुए इसे राजनीतिक असहमति का हिस्सा बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकते हैं। उनका कहना है कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जारी आरोप प्रत्यारोप की यह श्रृंखला आने वाले समय में और तेज हो सकती है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इस तरह के विवादों से मुद्दों पर आधारित राजनीति की जगह व्यक्तिगत आरोपों की राजनीति को बढ़ावा मिलता है। इसी बीच खड़गे ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को निष्पक्ष रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि संस्थाएं दबाव में काम करेंगी तो इसका असर चुनावी प्रक्रिया और जनता के विश्वास पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी संस्थाओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष रहना जरूरी है।