SAMRAT CHAUDHRY DELHI VISIT : सीएम बनने के बाद पहली दिल्ली यात्रा में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य विकास पर मंथन

SAMRAT CHAUDHRY DELHI VISIT : नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद Samrat Choudhary ने पहली बार राष्ट्रीय राजधानी पहुंचकर प्रधानमंत्री Narendra Modi से शिष्टाचार मुलाकात की इस मुलाकात को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें बिहार के विकास और भविष्य की योजनाओं को लेकर व्यापक चर्चा हुई बताया जा रहा है कि इस दौरान विकसित भारत और समृद्ध बिहार के विजन को लेकर विस्तार से विचार विमर्श किया गया मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त किया और राज्य के विकास को नई दिशा देने पर जोर दिया इस मुलाकात के बाद सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री का सहयोग और मार्गदर्शन बिहार की प्रगति को गति देने में अहम भूमिका निभाएगा सूत्रों के अनुसार इस मुलाकात के दौरान केवल औपचारिक चर्चा ही नहीं बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी रणनीतियों पर भी विचार किया गया माना जा रहा है कि बिहार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी बातचीत हुई है वर्तमान में राज्य सरकार का मंत्रिमंडल अधूरा है और इसे जल्द पूरा करना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है गौरतलब है कि बिहार में अभी तक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों ने ही शपथ ली है जनता दल यूनाइटेड की ओर से दो नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है जबकि भारतीय जनता पार्टी के हिस्से से अभी तक किसी विधायक को मंत्री पद नहीं दिया गया है ऐसे में गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने और प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कैबिनेट विस्तार जरूरी माना जा रहा है बिहार विधानसभा में कुल मंत्रियों की संख्या 33 तक हो सकती है लेकिन वर्तमान स्थिति में सरकार अधूरी मानी जा रही है इससे शासन और निर्णय प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है इसलिए आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तेज गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं इस बीच राजनीतिक दृष्टि से एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने है 24 अप्रैल को बिहार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है जिसमें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी सरकार का विश्वास मत पेश करेंगे यह सत्र सरकार की स्थिरता और बहुमत को साबित करने के लिए निर्णायक माना जा रहा है विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री से हुई यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है इससे न केवल राज्य और केंद्र के बीच तालमेल मजबूत होगा बल्कि बिहार में नई सरकार के कामकाज को भी स्पष्ट दिशा मिलेगी
Khilchipur Chintaman Ganesh : खिलचीपुर में चमत्कारिक दृश्य: 300 साल बाद सामने आया भगवान गणेश का असली स्वरूप

Khilchipur Chintaman Ganesh : राजगढ़। जिले के खिलचीपुर स्थित रियासतकालीन चिंतामण गणेश मंदिर में सोमवार देर रात एक अनोखी और आस्था से जुड़ी घटना सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना दिया। मंदिर में स्थापित करीब 300 वर्ष पुरानी भगवान गणेश की प्रतिमा ने अचानक अपना पुराना चोला छोड़ दिया, जिसके बाद उसका वास्तविक और दुर्लभ स्वरूप पहली बार स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। चोला हटते ही सामने आया दिव्य स्वरूप वर्षों से प्रतिमा पर सिंदूर और चोले की परत चढ़ी होने के कारण उसका मूल रूप स्पष्ट नहीं दिखता था। लेकिन चोला उतरते ही भगवान गणेश की चार भुजाओं वाली अद्भुत प्रतिमा सामने आई, जिसे देखकर श्रद्धालु हैरान रह गए। प्रतिमा के स्वरूप में भगवान गणेश को रुद्राक्ष माला जपते हुए दिखाया गया है। एक हाथ में वे रुद्राक्ष माला धारण किए हुए हैं, दूसरे हाथ से वे सूंड की सहायता से लड्डू ग्रहण कर रहे हैं। तीसरे हाथ में कमल का फूल और चौथे हाथ में फरसा दिखाई देता है। यह दुर्लभ स्वरूप भक्तों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया है। दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ इस घटना की खबर सुबह होते ही पूरे इलाके में फैल गई। इसके बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दिनभर बड़ी संख्या में लोग इस दिव्य और दुर्लभ स्वरूप के दर्शन करने के लिए पहुंचते रहे। 60 साल पुरानी सेवा परंपरा और मंदिर का इतिहास स्थानीय श्रद्धालुओं रामबाबू गुप्ता, मोहन गुप्ता और श्याम गुप्ता के अनुसार, यह मंदिर पहले एक कच्चे चबूतरे पर स्थित था। उनके परिवार ने लगभग 60 वर्ष पहले यहां सेवा शुरू की थी और गणेश चतुर्थी पर 10 दिवसीय उत्सव की परंपरा शुरू की, जो आज भी जारी है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए वर्ष 2016 में मंदिर का पुनर्निर्माण तमिलनाडु शैली में किया गया था। आगे की पूजा और चोले का विसर्जन मंदिर समिति के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रतिमा का जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद नए चोले और आभूषणों से भगवान का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। पुराना चोला ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी में विधिवत रूप से विसर्जित किया जाएगा। श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना मंदिर इस घटना ने श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा कर दिया है। 300 साल पुरानी इस प्रतिमा के वास्तविक स्वरूप के सामने आने के बाद मंदिर अब पूरे क्षेत्र में आस्था और आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है।
Hindu Calendar : 22 अप्रैल का पंचांग स्कंद षष्ठी पर रवि योग और विजय मुहूर्त का विशेष संयोग जानिए शुभ और अशुभ समय

Hindu Calendar : नई दिल्ली: धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 22 अप्रैल का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन स्कंद षष्ठी का पावन पर्व मनाया जा रहा है यह पर्व भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है जिन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में पूजा जाता है इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं और सुख समृद्धि की कामना करते हैं पंचांग के अनुसार यह दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ रहा है जो रात 10 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगी इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी सूर्योदय सुबह 5 बजकर 49 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 51 मिनट पर निर्धारित है वहीं आर्द्रा नक्षत्र रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा जिसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र का आरंभ होगा इस दिन का सबसे खास पहलू रवि योग का निर्माण है जो सुबह 5 बजकर 49 मिनट से रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा ज्योतिष के अनुसार यह योग शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है हालांकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं बन रहा है लेकिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा जो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की सफलता के लिए उपयुक्त माना जाता है इसके अलावा अमृत काल दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगा जो अत्यंत शुभ समय माना जाता है दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होगी जो सुबह 4 बजकर 21 मिनट से 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगा यह समय पूजा और ध्यान के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है वहीं शाम को गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा जो धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल माना जाता है अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है इसके अलावा यमगंड काल सुबह 7 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक प्रभावी रहेगा दुर्मुहूर्त का समय दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा जिसे अशुभ माना जाता है इसके साथ ही वर्ज्य काल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा इस दौरान भी शुभ कार्यों से परहेज करना उचित माना जाता है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सही मुहूर्त का चयन जीवन में सकारात्मक परिणाम लाने में सहायक होता है 22 अप्रैल का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है जहां एक ओर स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजा का विशेष महत्व है वहीं दूसरी ओर शुभ योगों का संयोग इसे और भी खास बनाता है ऐसे में श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे दिन के शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखते हुए अपने कार्यों की योजना बनाएं ताकि उन्हें बेहतर फल प्राप्त हो सके
Ayurvedic medicine for thyroid : थायराइड और हार्मोन असंतुलन में फायदेमंद मानी जाती है कंचनार गुग्गुलु, जानें इसके आयुर्वेदिक लाभ

Ayurvedic medicine for thyroid : नई दिल्ली। सदियों से भारत में जड़ी-बूटियों के माध्यम से कई बीमारियों का उपचार किया जाता रहा है। आयुर्वेद में कंचनार गुग्गुलु को एक महत्वपूर्ण औषधि माना गया है, जिसका उपयोग शरीर की गांठों, सूजन और हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याओं में किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह औषधि थायराइड जैसी समस्याओं में भी सहायक भूमिका निभा सकती है, बशर्ते इसका सेवन चिकित्सक की सलाह से किया जाए। कंचनार गुग्गुलु क्या है? कंचनार गुग्गुलु आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध औषधि है, जिसे मुख्य रूप से कंचनार वृक्ष की छाल और गुग्गुलु से तैयार किया जाता है। यह शरीर में कफ और मेद धातु को संतुलित करने में मदद करती है और ग्रंथियों की सूजन को कम करने में सहायक मानी जाती है। SAMRAT CHAUDHRY DELHI VISIT : सीएम बनने के बाद पहली दिल्ली यात्रा में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य विकास पर मंथन थायराइड और हार्मोन संतुलन में मददगार आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में विषैले तत्व (टॉक्सिन) जमा होने से गांठें और हार्मोन असंतुलन की समस्या बढ़ सकती है, जिससे थायराइड और पीसीओडी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कंचनार गुग्गुलु शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है और मेटाबॉलिज्म को सुधारकर हार्मोन संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्स गुण कंचनार गुग्गुलु में एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्सिफाइंग गुण पाए जाते हैं। यह शरीर की सूजन को कम करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार होता है। सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि कंचनार गुग्गुलु पाउडर और टैबलेट दोनों रूप में उपलब्ध है, लेकिन इसका सेवन सही मात्रा और सही स्थिति में ही करना चाहिए। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है। धरती के भीतर छिपी हलचल का विज्ञान भूकंप कैसे आता है और वैज्ञानिक इसे कैसे मापते हैं समझिए पूरी प्रक्रिया जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी इसके साथ ही केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी जरूरी है। जंक फूड और अधिक चीनी का सेवन कम करना चाहिए, नियमित व्यायाम और सुबह की सैर को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। आयुर्वेद में हल्दी वाला दूध और हरे धनिए का सेवन भी थायराइड संतुलन में सहायक माना गया है।
GWALIOR HEAT WAVE : भीषण गर्मी का कहर, ग्वालियर बना प्रदेश का दूसरा सबसे गर्म शहर; पारा 42.5°C पार

HIGHLIGHTS: ग्वालियर प्रदेश का दूसरा सबसे गर्म शहर अधिकतम तापमान पहुंचा 42.5 डिग्री रात का तापमान भी बढ़ने की संभावना दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा एक्सपर्ट्स ने पानी ज्यादा पीने की सलाह दी GWALIOR HEAT WAVE : मध्यप्रदेश। ग्वालियर में भीषण गर्मी का असर लगातार बना हुआ है। बता दें कि सोमवार को शहर का अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे यह प्रदेश का दूसरा सबसे गर्म शहर रहा। खजुराहो 43 डिग्री के साथ सबसे गर्म स्थान रहा। मंगलवार को सुबह से ही तापमान 31 डिग्री पहुंच गया, जिससे दिन की शुरुआत ही तपिश के साथ हुई। शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय रातें भी हो रहीं गर्म मंगलवार रात का न्यूनतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे में रात का तापमान 1 से 2 डिग्री तक और बढ़ सकता है। लगातार बढ़ता तापमान इस बात का संकेत है कि गर्मी से फिलहाल राहत की उम्मीद कम है। ग्वालियर-चंबल में तापमान ग्वालियर: 42.5°C (दिन) | 23.3°C (रात) मुरैना: 43–44°C (तेज लू और अत्यधिक गर्मी) भिंड: 41–42°C (लू का असर जारी) दतिया: 40–41°C (गर्म और शुष्क मौसम) शिवपुरी: 41–42°C (तेज धूप और गर्म हवाएं) इन सभी जिलों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर बना हुआ है, जिससे पूरे ग्वालियर-चंबल संभाग में हीटवेव जैसी स्थिति है। घर या ऑफिस कहीं भी करें ‘एंकल मूवमेंट’, टखनों के दर्द और जकड़न से मिलेगा तुरंत आराम दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दोपहर 12 बजे के बाद शहर की सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है। लोग केवल जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल रहे हैं। बाजारों में भी भीड़ कम हो गई है, जिससे व्यापार पर असर दिख रहा है। बुजुर्ग और मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित गर्मी का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, बच्चों और खुले में काम करने वाले मजदूरों पर देखा जा रहा है। लू लगने का खतरा बढ़ने के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। Apple में बड़ा बदलाव की चर्चा: Tim Cook के बाद John Ternus बन सकते हैं नए CEO प्रशासन और मौसम विभाग अलर्ट मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने, अधिक पानी पीने और धूप से बचाव की सलाह दी है। प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट पर रखा है ताकि लू से प्रभावित लोगों को तुरंत उपचार मिल सके।
Natural Disaster : धरती के भीतर छिपी हलचल का विज्ञान भूकंप कैसे आता है और वैज्ञानिक इसे कैसे मापते हैं समझिए पूरी प्रक्रिया

Natural Disaster : नई दिल्ली: हाल ही में जापान और भारत के मणिपुर में आए भूकंप के झटकों ने एक बार फिर इस प्राकृतिक घटना को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि भूकंप आखिर होता क्या है इसके पीछे का विज्ञान क्या है और वैज्ञानिक इसे किस तरह मापते हैं दरअसल भूकंप पृथ्वी की सतह पर होने वाली अचानक हलचल का परिणाम होता है जो धरती के भीतर जमा ऊर्जा के एकाएक मुक्त होने से पैदा होता है पृथ्वी की संरचना को समझे बिना भूकंप के कारणों को पूरी तरह नहीं जाना जा सकता हमारी पृथ्वी चार मुख्य परतों से बनी है जिनमें क्रस्ट मेंटल बाहरी कोर और आंतरिक कोर शामिल हैं क्रस्ट और मेंटल का ऊपरी हिस्सा मिलकर एक कठोर परत बनाते हैं जिसे लिथोस्फीयर कहा जाता है यह लिथोस्फीयर कई बड़े हिस्सों में बंटी होती है जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है ये प्लेट्स लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं और इसी गति के कारण पृथ्वी के अंदर दबाव बनता रहता है जब ये टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं अलग होती हैं या एक दूसरे के समानांतर खिसकती हैं तो चट्टानों में तनाव बढ़ने लगता है जब यह तनाव एक सीमा से अधिक हो जाता है तो चट्टानों में दरारें बनती हैं जिन्हें फॉल्ट लाइन कहा जाता है इसी फॉल्ट लाइन पर अचानक ऊर्जा के मुक्त होने से भूकंप उत्पन्न होता है यह ऊर्जा तरंगों के रूप में बाहर फैलती है जिन्हें सिस्मिक वेव्स कहा जाता है भूकंप की शुरुआत जिस स्थान से होती है उसे अधिकेंद्र कहा जाता है और यही वह क्षेत्र होता है जहां झटके सबसे अधिक महसूस किए जाते हैं हालांकि इन सिस्मिक वेव्स का प्रभाव सैकड़ों किलोमीटर दूर तक फैल सकता है और कई बार दूरस्थ क्षेत्रों में भी नुकसान पहुंचा सकता है सिस्मिक वेव्स पृथ्वी के अंदर और सतह पर अलग अलग गति से यात्रा करती हैं और वैज्ञानिक इन्हीं तरंगों के आधार पर भूकंप का विश्लेषण करते हैं भूकंप को मापने के लिए वैज्ञानिक सीस्मोमीटर नामक यंत्र का उपयोग करते हैं यह उपकरण धरती की हलचल को बेहद संवेदनशील तरीके से रिकॉर्ड करता है और उसे ग्राफ के रूप में प्रस्तुत करता है इन आंकड़ों के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है कि भूकंप की तीव्रता कितनी थी उसका केंद्र कहां था और वह कितनी गहराई में उत्पन्न हुआ दिलचस्प तथ्य यह है कि भूकंप केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं हैं वैज्ञानिकों ने चंद्रमा और मंगल जैसे ग्रहों पर भी सिस्मिक गतिविधियों के संकेत खोजे हैं इन अध्ययनों से यह समझने में मदद मिल रही है कि अन्य ग्रहों की आंतरिक संरचना कैसी है और वहां की भूगर्भीय प्रक्रियाएं कैसे काम करती हैं विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप को रोका नहीं जा सकता क्योंकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है इसके लिए वैज्ञानिक शोध बेहतर निर्माण तकनीक और जागरूकता बेहद जरूरी है यदि लोग भूकंप के दौरान सही सावधानियां बरतें और सुरक्षित निर्माण को अपनाएं तो जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है नई दिल्ली।
MP BUS FIRE: शाजापुर में चलती बस में भीषण आग, 60 से ज्यादा बारातियों ने कूदकर बचाई जान

MP BUS FIRE: शाजापुर। जिले के नेशनल हाईवे-52 पर मंगलवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया, जब इंदौर से शडोरा जा रही एक बारात बस में अचानक आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस जलकर खाक हो गई। बस में सवार करीब 60 से 70 बारातियों ने सूझबूझ दिखाते हुए कूदकर अपनी जान बचाई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। चलती बस से उठता धुआं बना खतरे का संकेत जानकारी के अनुसार, बस इंदौर से गुना जिले के शडोरा की ओर जा रही थी। इसी दौरान अचानक बस के अंदर से धुआं उठने लगा। चालक कुछ समझ पाता, इससे पहले ही आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। बारातियों ने कूदकर बचाई जान, सामान जलकर राख आग लगते ही बस में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन यात्रियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बस से कूदकर अपनी जान बचाई। इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यात्रियों का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया। 5 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने पाया काबू घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। शाजापुर और मक्सी से कुल 5 दमकल गाड़ियां बुलवाई गईं। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल चुकी थी। प्रशासन मौके पर पहुंचा, यात्रियों को सुरक्षित ठहराया घटना की जानकारी मिलते ही एसपी यशपाल सिंह राजपूत, एसडीएम मनीषा वास्कले और तहसीलदार सुनील पाटिल मौके पर पहुंचे। बाद में कलेक्टर ऋजु बाफना ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रशासन ने सभी यात्रियों को पास के ढाबे पर सुरक्षित ठहराया और उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दूसरी बस की व्यवस्था की। हाईवे पर लगा जाम, यातायात प्रभावित आग की घटना के चलते हाईवे के एक हिस्से पर यातायात बाधित हो गया, जिससे कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। यातायात पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहनों को नियंत्रित किया और बाद में क्रेन की मदद से जली हुई बस को हटाकर यातायात सामान्य कराया गया। चालक-परिचालक फरार, जांच जारी लालघाटी थाना प्रभारी अर्जुन सिंह मुजाल्दे ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। घटना के बाद बस चालक और परिचालक मौके से फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। फायर सिस्टम पर भी उठे सवाल राहत कार्य के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के पाइप कई जगह से खराब होने के कारण पानी का नुकसान हुआ, जिससे आग बुझाने में दिक्कत आई। नगर पालिका कर्मचारियों ने भी संसाधनों की कमी और खराब स्थिति पर चिंता जताई है।
Ankle movement exercise : घर या ऑफिस कहीं भी करें ‘एंकल मूवमेंट’, टखनों के दर्द और जकड़न से मिलेगा तुरंत आराम

Ankle movement exercise : नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी और लंबे समय तक बैठकर काम करने वाली जीवनशैली के कारण शरीर में जकड़न और दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर टखनों, पीठ, कंधों और कमर में अकड़न आम हो गई है। ऐसे में विशेषज्ञ छोटे लेकिन असरदार व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दे रहे हैं। इन्हीं में से एक है ‘एंकल मूवमेंट’, जो टखनों की जकड़न और दर्द में तेजी से राहत देता है। आयुष मंत्रालय भी मानता है प्रभावी भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी एंकल मूवमेंट को एक सरल और प्रभावी व्यायाम मानता है। इसे रोजाना सिर्फ 3 से 5 मिनट करने से पैरों में रक्त संचार बेहतर होता है, जकड़न कम होती है और शरीर का संतुलन मजबूत होता है। यह व्यायाम घर, ऑफिस या किसी भी जगह आसानी से किया जा सकता है। SAMRAT CHAUDHRY DELHI VISIT : सीएम बनने के बाद पहली दिल्ली यात्रा में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य विकास पर मंथन टखनों और पैरों के लिए बेहद फायदेमंद विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने वाले लोगों के लिए यह एक्सरसाइज बेहद लाभकारी है। नियमित अभ्यास से टखनों की लचीलापन बढ़ती है, जोड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है और चलने-फिरने में आसानी होती है। यह खासकर बुजुर्गों के लिए गिरने के खतरे को भी कम करता है। आसान है करने की प्रक्रिया एंकल मूवमेंट करना बेहद सरल है। इसके लिए पहले सीधे खड़े होकर शरीर को संतुलित करें और एक पैर को लगभग 9 इंच तक ऊपर उठाएं। फिर उस पैर को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं और गोल घुमाव में चलाएं—पहले घड़ी की दिशा में और फिर उल्टी दिशा में। हर दिशा में 5 से 10 बार यह प्रक्रिया दोहराएं, फिर दूसरे पैर से भी यही करें। शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय किसी भी समय किया जा सकता है अभ्यास यह व्यायाम दिन में किसी भी समय किया जा सकता है, जैसे सुबह उठने के बाद या काम के दौरान छोटे ब्रेक में। जरूरत पड़ने पर दीवार या कुर्सी का सहारा भी लिया जा सकता है ताकि संतुलन बना रहे। नियमित अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ नियमित एंकल मूवमेंट करने से पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, सूजन और थकान कम होती है और जोड़ों की लचीलापन बढ़ती है। इससे घुटनों और कूल्हों पर दबाव भी कम पड़ता है और शरीर अधिक सक्रिय रहता है।
SUMMER HACKES : शरीर का तापमान संतुलित रखने वाला नेचुरल ड्रिंक: लस्सी के फायदे और सही समय

SUMMER HACKES : नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडक और ताजगी देने वाले पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स और आर्टिफिशियल पेय पदार्थों का सेवन करते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसके मुकाबले लस्सी एक पारंपरिक और प्राकृतिक ड्रिंक है, जो न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी मदद करती है। दही से बनने वाली सेहतमंद ड्रिंक लस्सी दही से तैयार किया जाने वाला एक लोकप्रिय भारतीय पेय है, जिसे मथकर उसमें चीनी या नमक और अन्य स्वाद बढ़ाने वाली चीजें मिलाकर बनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका स्वाद और बनाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। यह स्वाद और सेहत का बेहतरीन संयोजन मानी जाती है। गर्मी में शरीर को देती है ठंडक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लस्सी एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जिसकी तासीर ठंडी होती है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर को तुरंत राहत देता है और तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करती है। पाचन और हड्डियों के लिए फायदेमंद लस्सी पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक होती है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। लस्सी पीने का सही समय विशेषज्ञों के अनुसार लस्सी का सेवन दिन के समय, विशेषकर दोपहर में करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। दोपहर के भोजन के साथ लस्सी पीने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को गर्मी से राहत मिलती है। रात में सेवन से बचें हालांकि कुछ लोग रात में भी लस्सी का सेवन करते हैं, लेकिन यह सभी के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। रात में इसका सेवन कुछ लोगों में भारीपन या पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए इसे दिन में ही पीना बेहतर माना जाता है। गर्मी में प्राकृतिक राहत कुल मिलाकर, लस्सी गर्मियों में शरीर के लिए एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है, जो बिना किसी नुकसान के शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों प्रदान करती है।
Adani Group : अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम

Adani Group : नई दिल्ली: देश के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही अदाणी पावर लिमिटेड ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है कंपनी ने एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली स्टेप डाउन सहायक इकाई के गठन की घोषणा की है जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काम करेगी इस कदम को भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड ने रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक नई इकाई का गठन किया है यह नई कंपनी 20 अप्रैल 2026 को स्थापित की गई है और इसे 5 लाख रुपए की अधिकृत पूंजी के साथ शुरू किया गया है इस पूंजी को 10 रुपए प्रति शेयर के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है इस नई इकाई की संरचना को देखें तो यह पूरी तरह से समूह के नियंत्रण में है रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के पास है और अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी अदाणी पावर लिमिटेड के पास है इस प्रकार यह कंपनी समूह की एक स्टेप डाउन सहायक इकाई के रूप में कार्य करेगी जो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगी इसी क्रम में समूह की एक अन्य इकाई ने भी न्यूक्लियर क्षेत्र में अपनी सक्रियता दिखाई है अदाणी एनर्जी ने कोस्टल महा एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक और स्टेप डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है यह इकाई परमाणु ऊर्जा के उत्पादन ट्रांसमिशन और वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न रहेगी जिससे ऊर्जा क्षेत्र में विविधता और मजबूती आएगी ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल व्यावसायिक विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक बड़ा संकेत है देश तेजी से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और न्यूक्लियर एनर्जी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है वर्तमान समय में भारत की स्थापित न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता लगभग 8 दशमलव 7 गीगावाट है लेकिन देश ने वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है अदाणी समूह का यह कदम दर्शाता है कि वह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को विविध बना रहा है और नई तकनीकों तथा क्षेत्रों में निवेश कर रहा है न्यूक्लियर एनर्जी में यह विस्तार न केवल कंपनी के लिए नए अवसर खोलेगा बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा