दमोह में गौशालाओं की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए 25 अप्रैल को अहम बैठक

दमोह, 24 अप्रैल: जिले में संचालित गौशालाओं की व्यवस्था को बेहतर और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में विभिन्न गौशालाओं के निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर व्यवस्थाओं में खामियां सामने आईं, जिन्हें सुधारने के लिए अब ठोस रणनीति तैयार की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर ने 25 अप्रैल को गौशाला संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस बैठक में गौशालाओं के संचालन, उपलब्ध संसाधनों, साफ-सफाई, पशुओं के स्वास्थ्य, चारे-पानी की व्यवस्था और गौवंश की समुचित देखभाल जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कई गौशालाओं में मूलभूत सुविधाओं की कमी है, जिससे गौवंश के रखरखाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन अब इन कमियों को दूर करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने जा रहा है, ताकि हर गौशाला में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। कलेक्टर श्री यादव ने आमजन से भी इस पहल में सहभागिता की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही गौशालाओं की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। नागरिक अपने सुझाव देकर इस अभियान को मजबूत बना सकते हैं। प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि जिले की सभी गौशालाओं में गौ माताओं को बेहतर सुविधा, पर्याप्त पोषण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए, जिससे उनकी देखभाल उच्च स्तर पर सुनिश्चित हो सके।
राघव चड्ढा के फैसले से AAP में असंतोष उजागर, पार्टी संरचना और नेतृत्व शैली पर उठे गंभीर सवाल..

नई दिल्ली में राजनीतिक माहौल उस समय अचानक बदल गया जब आम आदमी पार्टी से जुड़े राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने कुछ सहयोगियों के साथ पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम ने न केवल पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय से पार्टी के सक्रिय चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा का यह कदम कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी अप्रत्याशित माना जा रहा है। सूत्रों और सामने आई जानकारी के अनुसार, इस निर्णय के पीछे कई आंतरिक कारण माने जा रहे हैं। सबसे पहला कारण संगठन के मूल विचारों से दूरी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि जिस उद्देश्य और सिद्धांतों के आधार पर पार्टी का गठन हुआ था, उसमें समय के साथ बदलाव आया है और यही बदलाव कई वरिष्ठ नेताओं को असहज कर रहा था। राघव चड्ढा का मानना है कि संगठन अपने शुरुआती लक्ष्य से भटकता नजर आ रहा था, जिससे लंबे समय से जुड़े नेताओं में असंतोष बढ़ता गया। दूसरे कारण के रूप में पार्टी संगठन में कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर असंतोष सामने आया है। कई नेताओं का मानना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं की भूमिका को धीरे धीरे कम किया गया, जिससे संगठनात्मक संतुलन प्रभावित हुआ। इससे पार्टी के भीतर एक अलग तरह की असहजता पैदा होने लगी थी, जो समय के साथ और गहरी होती चली गई। तीसरा कारण नेतृत्व शैली और निर्णय प्रक्रिया में बदलाव बताया जा रहा है। संगठन के भीतर हाल के वर्षों में लिए गए कई निर्णयों को लेकर असहमति बढ़ी और कई नेताओं को यह महसूस होने लगा कि उनकी राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। इसी वजह से पार्टी के भीतर संवाद की कमी और दूरी बढ़ने लगी। चौथा कारण व्यक्तिगत राजनीतिक दिशा से जुड़ा माना जा रहा है। युवा नेतृत्व के तौर पर राघव चड्ढा को लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत भूमिका निभाने वाला चेहरा माना जाता रहा है। ऐसे में उनके सामने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प और अवसर भी उभर रहे थे, जिसने उनके निर्णय को प्रभावित किया। पांचवां कारण पार्टी के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान और अलगाव की स्थिति को बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय से यह संकेत मिल रहे थे कि संगठन में एकजुटता की कमी बढ़ रही है और विभिन्न गुटों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि कई नेता धीरे धीरे अपने रास्ते अलग करने की दिशा में बढ़ने लगे। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में गहन चर्चा को जन्म दिया है। जहां कुछ लोग इसे संगठनात्मक पुनर्गठन का परिणाम मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे नेतृत्व और कार्यशैली में बदलाव की आवश्यकता के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस निर्णय का राजनीतिक संतुलन और पार्टी की रणनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।
दमोह में बिजली बकायेदारों पर सख्ती, विभाग ने शुरू की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई

दमोह । दमोह शहर में बिजली बिल बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ बिजली विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग के अनुसार शहर में लगभग 7 हजार उपभोक्ताओं पर करीब 4 करोड़ 68 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है, जिसे वसूलने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बिजली विभाग द्वारा कनेक्शन काटने की कार्रवाई के बावजूद कई उपभोक्ता अवैध रूप से बिजली का उपयोग करते पाए गए हैं। ऐसे मामलों में विभाग ने सख्ती दिखाते हुए चार नामजद आरोपियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कर जांच के लिए मामला सौंपा है। ये आरोपी अवैध रूप से लाइन से छेड़छाड़ कर बिजली का उपयोग कर रहे थे। विभाग ने बकाया राशि जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 146 एवं 147 के तहत आरआरसी नोटिस जारी कर कुर्की की कार्रवाई भी शुरू कर दी है।इसी क्रम में अधीक्षण अभियंता के निर्देशन में 24 अप्रैल को विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान फीडर नंबर 24 में कार्रवाई करते हुए शिवशक्ति मंदिर के पास रहने वाली माया/देवेंद्र जाटव, जिन पर 64 हजार रुपये बकाया था, तथा मल्लपुरा नया बाजार क्षेत्र के निवासी दयाशंकर/डल्लू प्रसाद अहिरवार, जिन पर 42,178 रुपये बकाया था, के दो वाहनों को जब्त किया गया। अधीक्षण अभियंता ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और बकाया भुगतान नहीं करने वाले उपभोक्ताओं की संपत्ति कुर्क कर नीलामी तक की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सहायक अभियंताओं को तहसीलदार की शक्तियां प्रदान की गई हैं, जिससे राजस्व वसूली की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। अपील:बिजली विभाग ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने लंबित बिजली बिलों का शीघ्र भुगतान करें, अन्यथा उन्हें सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
घुटनों और कूल्हों की कमजोरी का आसान इलाज, नी मूवमेंट से पाएं संतुलन और ताकत

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती जीवनशैली का असर लोगों के स्वास्थ्य पर साफ नजर आने लगा है लंबे समय तक बैठकर काम करना शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित खानपान के कारण घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में दर्द कमजोरी और अकड़न जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं पहले ये समस्याएं उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देती थीं लेकिन अब युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं है ऐसे में योग का एक बेहद आसान लेकिन प्रभावी अभ्यास नी मूवमेंट लोगों के लिए राहत का जरिया बन सकता है जिसे समस्थिति भी कहा जाता है यह एक बेसिक योग मुद्रा है लेकिन इसके फायदे बेहद व्यापक हैं भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार यह अभ्यास न केवल घुटनों और हिप जॉइंट्स को मजबूत बनाता है बल्कि शरीर के निचले हिस्से की स्थिरता और ताकत भी बढ़ाता है नी मूवमेंट को करने के लिए किसी विशेष उपकरण या जगह की जरूरत नहीं होती इसे घर पर आसानी से किया जा सकता है इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को आपस में मिला लें हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें और नजर सामने की ओर स्थिर रखें इसके बाद धीरे धीरे अपने शरीर को ऐसे नीचे झुकाएं जैसे आप हवा में कुर्सी पर बैठने जा रहे हों इस स्थिति में शरीर को संतुलित रखते हुए कुछ मिनट तक रुकना होता है यह अभ्यास देखने में जितना सरल लगता है उतना ही असरदार है नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से घुटनों और कूल्हों के जोड़ों में मजबूती आती है साथ ही जांघों और पिंडलियों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद है क्योंकि यह शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और कमजोरी को दूर करता है नी मूवमेंट का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह शरीर के संतुलन को बेहतर बनाता है जिससे रोजमर्रा के काम करना आसान हो जाता है इसके साथ ही यह मानसिक एकाग्रता को भी बढ़ाता है जब आप इस मुद्रा में स्थिर रहते हैं तो आपका ध्यान पूरी तरह शरीर और सांस पर केंद्रित होता है जिससे तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है यह अभ्यास केवल शारीरिक मजबूती तक सीमित नहीं है बल्कि यह शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने में भी मदद करता है व्यस्त दिनचर्या में यदि रोजाना कुछ मिनट भी इस अभ्यास के लिए निकाल लिए जाएं तो यह लंबे समय में बड़े फायदे दे सकता है हालांकि यह एक सरल योग अभ्यास है लेकिन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं है जिन लोगों को गंभीर जोड़ों की समस्या या आर्थराइटिस है उन्हें इसे करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए स्वस्थ व्यक्ति इसे नियमित रूप से अपनाकर अपने शरीर को मजबूत और संतुलित बना सकते हैं
महंगी सनस्क्रीन छोड़ें, किचन के ये देसी नुस्खे देंगे नेचुरल ग्लो और टैनिंग से छुटकारा

नई दिल्ली । तेज धूप और बढ़ती गर्मी के बीच त्वचा की देखभाल आज के समय में एक बड़ी जरूरत बन गई है लोग अपनी स्किन को टैनिंग और यूवी किरणों से बचाने के लिए महंगी सनस्क्रीन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च करते हैं लेकिन इसके बावजूद कई बार चेहरे पर कालापन पिग्मेंटेशन और रूखापन बना रहता है इसका कारण केवल प्रोडक्ट नहीं बल्कि सही जानकारी का अभाव और गलत चुनाव भी होता है अक्सर लोग सनस्क्रीन खरीदते समय सिर्फ SPF नंबर देखकर ही फैसला कर लेते हैं जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है सही सनस्क्रीन वही होती है जिस पर ब्रॉड स्पेक्ट्रम लिखा हो क्योंकि यह UVA और UVB दोनों तरह की हानिकारक किरणों से त्वचा की रक्षा करती है इसके साथ ही स्किन टाइप के अनुसार सनस्क्रीन चुनना भी बेहद जरूरी है ऑयली स्किन वालों को जेल बेस्ड और ड्राई स्किन वालों को लोशन बेस्ड सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए इसके अलावा कई सनस्क्रीन में ऐसे केमिकल होते हैं जो लंबे समय में त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं इसलिए प्रोडक्ट खरीदते समय उसके इंग्रीडिएंट्स और एक्सपायरी डेट की जांच करना भी जरूरी है कई बार गलत या एक्सपायर्ड सनस्क्रीन त्वचा पर उल्टा असर डालती है अगर आप केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से बचना चाहते हैं तो किचन में मौजूद प्राकृतिक चीजें आपकी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं घरेलू नुस्खे न केवल सस्ते होते हैं बल्कि लंबे समय तक त्वचा को हेल्दी बनाए रखते हैं दही और मसूर दाल का पैक त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है मसूर दाल को पीसकर उसमें दही मिलाकर लगाने से यह एक नेचुरल एक्सफोलिएटर की तरह काम करता है दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को ठंडक देता है और टैनिंग को कम करने में मदद करता है इस पैक को चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर धोने से त्वचा साफ और चमकदार बनती है इसी तरह एलोवेरा और नारियल तेल का मिश्रण भी त्वचा के लिए बेहद लाभकारी है एलोवेरा में हल्का प्राकृतिक SPF होता है जो त्वचा को धूप से बचाने में मदद करता है वहीं नारियल तेल त्वचा को मॉइश्चराइज कर उसे मुलायम बनाए रखता है यह खासतौर पर ड्राई स्किन वालों के लिए बेहद असरदार उपाय है सिर्फ घरेलू नुस्खे अपनाना ही काफी नहीं है बल्कि सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका भी जानना जरूरी है घर से बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगानी चाहिए ताकि वह त्वचा में अच्छी तरह समा जाए अगर आप लंबे समय तक धूप में रहते हैं तो हर 3 से 4 घंटे में इसे दोबारा लगाना चाहिए त्वचा की देखभाल केवल महंगे प्रोडक्ट्स पर निर्भर नहीं होती बल्कि सही जानकारी और प्राकृतिक उपायों के संतुलन से ही असली निखार मिलता है इस गर्मी में अपनी स्किन को सुरक्षित और चमकदार बनाए रखने के लिए किचन के इन आसान और असरदार नुस्खों को अपनाना एक बेहतर और सस्ता विकल्प साबित हो सकता है
नौकरी से निकाले जाने पर मिलते हैं ये कानूनी अधिकार, जानिए पूरी प्रक्रिया….

नई दिल्ली।नौकरी के क्षेत्र में आज के समय में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। कई बार कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक नौकरी से निकाल दिया जाता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में अधिकतर लोग घबरा जाते हैं, लेकिन यह जानना जरूरी है कि कर्मचारियों के अधिकार कानून द्वारा सुरक्षित होते हैं। भारत में नौकरी से संबंधित नियम श्रम कानूनों के तहत निर्धारित किए जाते हैं। अधिकतर कंपनियों में नियुक्ति पत्र में नोटिस पीरियड स्पष्ट रूप से लिखा होता है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी कर्मचारी की सेवाएं समाप्त की जाती हैं, तो कंपनी को पहले से निर्धारित अवधि का नोटिस देना होता है या उसके बदले में वेतन देना अनिवार्य होता है। यदि कंपनी ऐसा नहीं करती, तो वह कानूनी रूप से गलत मानी जाती है और कर्मचारी अपने अधिकारों की मांग कर सकता है। स्थायी कर्मचारियों के मामले में यह नियम और भी सख्ती से लागू होता है। कई बार कंपनियां अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करतीं, ऐसे में कर्मचारी के पास कानूनी विकल्प मौजूद रहते हैं। नौकरी समाप्त होने के बाद कर्मचारी को उसकी बकाया सैलरी, अवकाश का भुगतान और अन्य देय राशि समय पर मिलना जरूरी होता है। इसे फुल एंड फाइनल सेटलमेंट कहा जाता है, जिसे तय समय सीमा के भीतर पूरा करना कंपनी की जिम्मेदारी होती है। यदि किसी कर्मचारी को लगता है कि उसकी नौकरी गलत तरीके से समाप्त की गई है, तो वह श्रम विभाग या संबंधित न्यायिक मंच पर शिकायत दर्ज कर सकता है। इसके अलावा कानूनी नोटिस भेजकर भी अपने अधिकारों की मांग की जा सकती है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया कर्मचारी के हितों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत माध्यम बनती है। निजी क्षेत्र और आईटी सेक्टर में भी ये नियम लागू होते हैं, खासकर तब जब कंपनी अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करती है। कई बार जानकारी की कमी के कारण कर्मचारी अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
अभय देओल ने ‘देव डी’ की शूटिंग का अनोखा अनुभव किया साझा..

नई दिल्ली। दिल्ली में फिल्मी दुनिया के चर्चित अभिनेता अभय देओल ने अपनी लोकप्रिय फिल्म ‘देव डी’ से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया है, जिसने दर्शकों और प्रशंसकों के बीच फिर से इस फिल्म को चर्चा में ला दिया है। यह फिल्म हाल ही में दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज हुई है और एक बार फिर दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी बीच अभिनेता ने शूटिंग के दौरान का एक ऐसा किस्सा बताया, जिसमें उन्होंने बिना एक भी डायलॉग बोले अपने किरदार को बेहद प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा था। अभय देओल ने एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए उस सीन को याद किया, जिसमें उनका किरदार पूरी तरह चुप रहता है। इस दृश्य में कहानी आगे बढ़ती है और दूसरे किरदार बातचीत करते हैं, जबकि उनका किरदार केवल मौजूद रहता है। उन्होंने बताया कि स्क्रिप्ट के अनुसार उस सीन में उनके लिए कोई संवाद लिखा ही नहीं गया था, लेकिन यही सादगी उस पल को खास बना गई। अभय देओल ने बताया कि उन्होंने उस सीन में अपने किरदार की भावनाओं को शब्दों के बिना व्यक्त करने की कोशिश की। उनका मानना था कि कभी-कभी चुप्पी भी कहानी को आगे बढ़ाने में उतनी ही प्रभावशाली होती है जितनी बातचीत। शूटिंग के दौरान उन्होंने केवल अपने किरदार की उपस्थिति और भाव को ही केंद्र में रखा, जिससे पूरा दृश्य अधिक स्वाभाविक और वास्तविक लगने लगा। अभिनेता ने यह भी साझा किया कि जब निर्देशक ने शूटिंग पूरी होने पर कट कहा, तो उन्होंने इस दृश्य को लेकर उनकी सराहना की। निर्देशक ने यह सवाल भी किया कि उन्होंने बिना किसी अतिरिक्त संवाद के पूरे कमरे के माहौल को इतने सहज तरीके से कैसे व्यक्त किया। इस प्रतिक्रिया ने अभय देओल के लिए इस अनुभव को और भी खास बना दिया। अभय देओल के अनुसार, यह सीन सिर्फ एक टेक में पूरा हो गया था, जो अपने आप में एक अनोखा अनुभव था। उन्होंने कहा कि उस क्षण उन्हें लगा जैसे उनका किरदार पूरी तरह जीवंत हो गया हो और वह खुद उस दुनिया का हिस्सा बन गए हों। यह अनुभव उनके लिए आज भी यादगार है। फिल्म ‘देव डी’ अपने अनोखे कथानक और आधुनिक प्रस्तुति के लिए जानी जाती है। यह पारंपरिक कहानी को एक नए दृष्टिकोण से पेश करती है, जिसमें रिश्तों, भावनाओं और जीवन की जटिलताओं को अलग अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म में अभय देओल के साथ माही गिल और कल्कि कोचलीन जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। यह फिल्म अपने समय से आगे की सोच और प्रयोगात्मक शैली के कारण युवाओं के बीच खास जगह बनाने में सफल रही थी। आज भी इसकी कहानी और अभिनय को दर्शक सराहते हैं। अभय देओल द्वारा साझा किया गया यह अनुभव एक बार फिर साबित करता है कि कभी-कभी बिना शब्दों के भी कहानी को बेहद प्रभावशाली तरीके से कहा जा सकता है।
भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 703 अरब डॉलर के पार, आरबीआई के आंकड़े जारी..

नई दिल्ली।पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक सकारात्मक खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 703.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी हाल के सप्ताह में दर्ज की गई है, जिसमें भंडार में लगभग 2.3 अरब डॉलर की वृद्धि देखी गई है। यह संकेत देता है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद देश की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है। विदेशी मुद्रा भंडार में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब पिछले कुछ महीनों से इसमें उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था। वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता के कारण पहले भंडार पर दबाव बना था, जिससे इसमें गिरावट भी दर्ज की गई थी। हालांकि हाल के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति अब धीरे-धीरे संतुलन की ओर बढ़ रही है। कुछ समय पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद वैश्विक तनाव और मुद्रा बाजार में बदलाव के चलते इसमें कमी आई थी। अब फिर से इसमें सुधार देखने को मिल रहा है, जो आर्थिक स्थिरता के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस दौरान देश के सोने के भंडार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 122 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की स्थिति में भी हल्का सुधार देखने को मिला है। ये सभी संकेत मिलकर देश की बाहरी आर्थिक मजबूती को दर्शाते हैं। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार होता है। यह आयात भुगतान, विदेशी व्यापार और मुद्रा स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। मजबूत भंडार से देश को वैश्विक झटकों का सामना करने की क्षमता मिलती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है। हालिया बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि वैश्विक दबाव के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी हुई है और धीरे-धीरे और मजबूत हो रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार में यह सुधार आर्थिक संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
इंदौर में जल संकट गहराया, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, नगर निगम पर लापरवाही के आरोप

इंदौर । मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में बढ़ते जल संकट को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। गुरुवार को कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर नगर निगम के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और “हल्ला बोल, पोल खोल” अभियान के तहत मटका फोड़ कर अपनी नाराजगी जताई। यह प्रदर्शन मोती तबेला चौराहा और छत्रीबाग क्षेत्र में किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने खाली मटके फोड़कर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन का नेतृत्व शहर कांग्रेस कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव और मध्यप्रदेश राजीव विकास केंद्र के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश शाह ने किया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नगर निगम आम जनता से पूरे महीने का पानी का बिल वसूल रहा है, जबकि सप्लाई केवल 15 दिन ही सही तरीके से हो रही है। कई इलाकों में नर्मदा पाइपलाइन अभी तक नहीं पहुंची है, जिसके कारण लोगों को पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि भगीरथपुरा, सुदामा नगर, मूसाखेड़ी, बाणगंगा और चंदन नगर जैसे क्षेत्रों में ड्रेनेज लीकेज की वजह से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के टैंकरों का उपयोग आम जनता की बजाय होटलों और निर्माण कार्यों में किया जा रहा है, जबकि कई मोहल्लों में लोग पानी के लिए परेशान हैं। इससे शहर में असमान वितरण व्यवस्था का आरोप भी लगाया गया। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि नई पाइपलाइन से जुड़े कई कार्य और फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिससे कई वार्डों में जल संकट और गहरा गया है। शहर के कई हिस्सों में नर्मदा का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा, जिससे स्थिति और खराब होती जा रही है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गंदे पानी की सप्लाई और टैंकरों की कमी जैसी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो नगर निगम का उग्र घेराव किया जाएगा। इस प्रदर्शन ने शहर में जल संकट को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पानी की समस्या को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
अरिजीत सिंह: सादगी से स्टारडम तक का सफर, रोमांटिक आवाज ने बनाया करोड़ों का दिलबर

नई दिल्ली।बॉलीवुड में कई बेहतरीन आवाजें रही हैं, लेकिन कुछ ही ऐसी होती हैं जो सीधे दिल तक उतर जाती हैं। ऐसी ही एक आवाज है अरिजीत सिंह की, जिन्होंने अपनी गायकी से लोगों के दिलों में खास जगह बना ली है। उनकी आवाज में भावनाओं की गहराई, सादगी और दर्द का ऐसा मेल है जो हर गाने को यादगार बना देता है। अरिजीत सिंह का जन्म 25 अप्रैल 1987 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुआ था। बचपन से ही उनका जुड़ाव संगीत से रहा, क्योंकि उनके परिवार में भी संगीत का माहौल था। दादी और मां गीत गाती थीं और मामा तबला बजाते थे, जिससे उनका झुकाव धीरे-धीरे संगीत की ओर बढ़ता गया। उन्होंने कम उम्र से ही शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी, जिसने उनकी गायकी की नींव मजबूत कर दी। अपने करियर की शुरुआत में उन्हें ज्यादा पहचान नहीं मिली और उन्हें कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने एक रियलिटी शो के जरिए अपनी शुरुआत की, लेकिन वहां से बड़ी सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और छोटे प्रोजेक्ट्स के जरिए खुद को साबित करते रहे। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना ‘तुम ही हो’ रिलीज हुआ। इस गाने ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया और यहीं से उनका सफर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया। इसके बाद उन्होंने लगातार हिट गाने दिए और बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई। “चन्ना मेरेया”, “केसरिया”, और “अपना बना ले” जैसे गानों ने उन्हें हर घर में लोकप्रिय बना दिया। अब तक वे 400 से अधिक गाने गा चुके हैं और हर तरह के संगीत में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उनकी खासियत यह है कि वे हर गाने को सिर्फ गाते नहीं, बल्कि उसमें भावनाएं भर देते हैं, जिससे श्रोता उससे गहराई से जुड़ जाते हैं। इतनी बड़ी सफलता के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है। वे लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं और आम लोगों की तरह जीवन जीते हैं। वे सोशल मीडिया और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं और अपने काम पर ज्यादा ध्यान देते हैं। यही सादगी उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है। हाल के समय में उन्होंने अपने करियर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया, जिसमें उन्होंने पार्श्व गायन से दूरी बनाने की बात कही, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि वे संगीत से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं। वे आगे भी अपने फैंस के लिए संगीत से जुड़े रहेंगे। उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सच्ची लगन और मेहनत से कोई भी व्यक्ति संगीत की दुनिया में अमिट पहचान बना सकता है।