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अभय देओल ने ‘देव डी’ की शूटिंग का अनोखा अनुभव किया साझा..

नई दिल्ली।  दिल्ली में फिल्मी दुनिया के चर्चित अभिनेता अभय देओल ने अपनी लोकप्रिय फिल्म ‘देव डी’ से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया है, जिसने दर्शकों और प्रशंसकों के बीच फिर से इस फिल्म को चर्चा में ला दिया है। यह फिल्म हाल ही में दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज हुई है और एक बार फिर दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी बीच अभिनेता ने शूटिंग के दौरान का एक ऐसा किस्सा बताया, जिसमें उन्होंने बिना एक भी डायलॉग बोले अपने किरदार को बेहद प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा था।

अभय देओल ने एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए उस सीन को याद किया, जिसमें उनका किरदार पूरी तरह चुप रहता है। इस दृश्य में कहानी आगे बढ़ती है और दूसरे किरदार बातचीत करते हैं, जबकि उनका किरदार केवल मौजूद रहता है। उन्होंने बताया कि स्क्रिप्ट के अनुसार उस सीन में उनके लिए कोई संवाद लिखा ही नहीं गया था, लेकिन यही सादगी उस पल को खास बना गई।

अभय देओल ने बताया कि उन्होंने उस सीन में अपने किरदार की भावनाओं को शब्दों के बिना व्यक्त करने की कोशिश की। उनका मानना था कि कभी-कभी चुप्पी भी कहानी को आगे बढ़ाने में उतनी ही प्रभावशाली होती है जितनी बातचीत। शूटिंग के दौरान उन्होंने केवल अपने किरदार की उपस्थिति और भाव को ही केंद्र में रखा, जिससे पूरा दृश्य अधिक स्वाभाविक और वास्तविक लगने लगा।

अभिनेता ने यह भी साझा किया कि जब निर्देशक ने शूटिंग पूरी होने पर कट कहा, तो उन्होंने इस दृश्य को लेकर उनकी सराहना की। निर्देशक ने यह सवाल भी किया कि उन्होंने बिना किसी अतिरिक्त संवाद के पूरे कमरे के माहौल को इतने सहज तरीके से कैसे व्यक्त किया। इस प्रतिक्रिया ने अभय देओल के लिए इस अनुभव को और भी खास बना दिया।

अभय देओल के अनुसार, यह सीन सिर्फ एक टेक में पूरा हो गया था, जो अपने आप में एक अनोखा अनुभव था। उन्होंने कहा कि उस क्षण उन्हें लगा जैसे उनका किरदार पूरी तरह जीवंत हो गया हो और वह खुद उस दुनिया का हिस्सा बन गए हों। यह अनुभव उनके लिए आज भी यादगार है।

फिल्म ‘देव डी’ अपने अनोखे कथानक और आधुनिक प्रस्तुति के लिए जानी जाती है। यह पारंपरिक कहानी को एक नए दृष्टिकोण से पेश करती है, जिसमें रिश्तों, भावनाओं और जीवन की जटिलताओं को अलग अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म में अभय देओल के साथ माही गिल और कल्कि कोचलीन जैसे कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं।

यह फिल्म अपने समय से आगे की सोच और प्रयोगात्मक शैली के कारण युवाओं के बीच खास जगह बनाने में सफल रही थी। आज भी इसकी कहानी और अभिनय को दर्शक सराहते हैं। अभय देओल द्वारा साझा किया गया यह अनुभव एक बार फिर साबित करता है कि कभी-कभी बिना शब्दों के भी कहानी को बेहद प्रभावशाली तरीके से कहा जा सकता है।

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