Manu Bhaker: एक सवाल और बड़ा हंगामा: मनु भाकर के बयान से ज्यादा चर्चा सवाल पूछने के तरीके पर

Manu Bhaker: नई दिल्ली । देश में खेलों को लेकर जुनून हमेशा से रहा है लेकिन कई बार यही जुनून बहस और विवाद का कारण भी बन जाता है कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर से युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को लेकर सवाल पूछा गया और देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर बड़ी बहस में बदल गया दरअसल दिल्ली में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम के दौरान मनु भाकर से वैभव सूर्यवंशी के बारे में राय मांगी गई इस पर उन्होंने बेहद संतुलित और सकारात्मक जवाब देते हुए कहा कि अगर किसी खिलाड़ी को सही मार्गदर्शन और अच्छा माहौल मिले तो उम्र सिर्फ एक नंबर रह जाती है और प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती उन्होंने यह भी कहा कि सही मेंटरशिप के साथ वैभव आगे चलकर बड़ा स्टार बन सकते हैं हालांकि मनु भाकर का यह बयान प्रेरणादायक था लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र उनका जवाब नहीं बल्कि उनसे पूछा गया सवाल बन गया कई यूजर्स और खेल से जुड़े लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एक ओलंपिक मेडलिस्ट शूटर से क्रिकेटर के बारे में सवाल करना उनके खेल और उपलब्धियों के साथ न्याय नहीं है इस मुद्दे पर जॉय भट्टाचार्य ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मनु भाकर जैसी खिलाड़ी से इस तरह का सवाल पूछना उनके योगदान को कम आंकने जैसा है उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अगर ऐसा ही है तो अगली बार किसी क्रिकेटर से शूटिंग के उभरते खिलाड़ियों पर सवाल पूछा जाना चाहिए सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कभी क्रिकेटरों से अन्य खेलों के खिलाड़ियों के बारे में इस तरह सवाल किए जाते हैं लोगों का मानना है कि क्रिकेट को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है जबकि अन्य खेलों के खिलाड़ी भी उतनी ही मेहनत और उपलब्धियां हासिल करते हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे सामान्य मानते हैं उनका कहना है कि भारत में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है इसलिए अन्य खेलों से जुड़े खिलाड़ियों से भी क्रिकेट पर राय लेना कोई नई बात नहीं है अगर बात करें वैभव सूर्यवंशी की तो वह इस समय क्रिकेट जगत में तेजी से उभरते सितारे हैं कम उम्र में उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं और Indian Premier League में शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है यह पूरा विवाद एक बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है कि क्या भारत में खेलों के बीच संतुलन बन पाया है या नहीं क्या अन्य खेलों को भी क्रिकेट जितनी ही अहमियत मिलनी चाहिए यह बहस लंबे समय से चल रही है और इस घटना ने इसे एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है फिलहाल यह मामला सिर्फ एक सवाल से शुरू हुआ था लेकिन अब यह खेल पत्रकारिता और खेलों के बीच समानता की बड़ी बहस का रूप ले चुका है
भरोसे से अदालत तक: मस्क ने ओपनएआई पर लगाया विश्वासघात का आरोप, सुनवाई शुरू

नई दिल्ली । अमेरिका में टेक दुनिया की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाइयों में से एक ने अब अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है जहां एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन के बीच चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित फेडरल कोर्ट में इस हाई प्रोफाइल केस की सुनवाई शुरू हो चुकी है और इसके साथ ही पूरी दुनिया की नजरें इस मुकदमे पर टिक गई हैं इस मामले की अध्यक्षता जज यवोन गोंजालेज रोजर्स कर रही हैं जहां सबसे पहले जूरी चयन की प्रक्रिया शुरू हुई है माना जा रहा है कि यह ट्रायल मई के मध्य तक चल सकता है और इसमें कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं मामले की जड़ में वह आरोप है जिसमें मस्क ने OpenAI पर अपनी मूल गैर लाभकारी सोच से भटकने का आरोप लगाया है मस्क का कहना है कि जिस संस्था को मानवता के हित में काम करने के लिए बनाया गया था वह अब मुनाफा कमाने वाली कंपनी बन गई है जो उसके शुरुआती उद्देश्य के खिलाफ है इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब मस्क ने लगभग 134 अरब डॉलर के भारी भरकम हर्जाने की मांग कर दी हालांकि उन्होंने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि यदि उन्हें कोई राशि मिलती है तो वह उसे ओपनएआई की चैरिटेबल शाखा को दान कर देंगे साथ ही मस्क ने ऑल्टमैन और सह संस्थापक ग्रेग ब्रॉकमैन को पद से हटाने की मांग भी की है दिलचस्प बात यह है कि ट्रायल शुरू होने से ठीक पहले मस्क ने अपने धोखाधड़ी के आरोप वापस ले लिए हैं अब यह मामला मुख्य रूप से विश्वासघात और अनुचित लाभ पर केंद्रित हो गया है वहीं दूसरी ओर ओपनएआई ने मस्क के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह मुकदमा व्यक्तिगत असफलताओं और प्रतिस्पर्धा से उपजी नाराजगी का परिणाम है इस केस में टेक इंडस्ट्री के कई बड़े नाम गवाही दे सकते हैं जिनमें सत्या नडेला का नाम भी शामिल है जिससे यह मुकदमा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार बचाव पक्ष यह साबित करने की कोशिश करेगा कि मस्क ने पहले खुद ओपनएआई को मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनाने का समर्थन किया था बशर्ते इसे उनकी कंपनी Tesla में शामिल किया जाए मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी दावा किया है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं जो सभी को चौंका देंगे यह मामला सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच की लड़ाई नहीं बल्कि यह टेक इंडस्ट्री के भविष्य और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है अब देखना होगा कि अदालत इस बहुचर्चित विवाद में क्या फैसला सुनाती है और इसका असर वैश्विक तकनीकी जगत पर किस रूप में पड़ता है
दिल दहला देने वाली सुबह: रात तक हंसी-ठिठोली, सुबह फंदे पर झूलता मिला पति-पत्नी का शव

सागर । मध्यप्रदेश के सागर जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है जहां एक पति और पत्नी ने एक साथ अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली इस घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे मोहल्ले को गहरे सदमे में डाल दिया है मामला शाहगढ़ थाना क्षेत्र के नगर परिषद के वाल्मीकि वार्ड का है जहां रहने वाले 45 वर्षीय उत्तम अहिरवार और उनकी 42 वर्षीय पत्नी हरिबाई का शव उनके ही घर में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला हैरानी की बात यह है कि जिस दंपती ने यह खौफनाक कदम उठाया वह कुछ घंटों पहले तक पूरी तरह सामान्य नजर आ रहे थे बताया जा रहा है कि घटना वाली रात दोनों अपने घर के बाहर पड़ोसियों के साथ बैठे थे बातचीत कर रहे थे और माहौल पूरी तरह सामान्य था किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी रात साबित होगी सुबह जब घर के अंदर से कोई हलचल नहीं हुई तो परिजनों और आसपास के लोगों को शक हुआ दरवाजा खोलकर देखा गया तो अंदर का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था पति और पत्नी दोनों फंदे पर झूल रहे थे यह दृश्य देखते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई जिसके बाद शाहगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया प्रारंभिक जांच में किसी तरह का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है जिससे यह घटना और भी ज्यादा रहस्यमयी बन गई है मृतक दंपती के भतीजे ने पुलिस को घटना की जानकारी दी वहीं उनके बेटे को भी सूचना दी गई जो उस समय सागर में मौजूद था परिवार के लोग इस घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं और किसी को समझ नहीं आ रहा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों ने एक साथ इतना बड़ा कदम उठा लिया पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है आत्महत्या के पीछे की वजह जानने के लिए परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं कोई मानसिक दबाव या पारिवारिक विवाद तो इसकी वजह नहीं बना इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हमारे आसपास रहने वाले लोग कितनी चुपचाप अपने अंदर संघर्ष झेल रहे होते हैं और हमें इसकी भनक तक नहीं लगती एक सामान्य दिखने वाली जिंदगी के पीछे छिपे दर्द का अंदाजा लगाना अक्सर मुश्किल हो जाता है फिलहाल पूरे मामले का सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएगा लेकिन इस दर्दनाक घटना ने इलाके में गहरा सन्नाटा जरूर छोड़ दिया है
पन्ना में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल प्रसव पीड़ा में तड़पती महिला को अस्पताल में मिला ताला

पन्ना । मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान बंद अस्पताल के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह घटना न केवल सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत भी सामने लाती है। जानकारी के अनुसार घटना कल्दा क्षेत्र की है जहां ग्राम सकतरा निवासी वंदना वर्मा को सोमवार रात अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तुरंत 108 एम्बुलेंस को सूचना दी और भारी बारिश व तेज हवाओं के बीच महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्दा पहुंचाया गया। लेकिन वहां पहुंचने के बाद जो दृश्य सामने आया उसने सभी को हैरान कर दिया। अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ था और वहां कोई डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था। तेज बारिश और असहनीय दर्द के बीच परिजन अस्पताल के बाहर खड़े होकर मदद की गुहार लगाते रहे। उन्होंने बार बार डॉक्टरों और स्टाफ को फोन किया लेकिन किसी ने कॉल उठाना तक जरूरी नहीं समझा। इस बीच महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी और हर मिनट की देरी जोखिम बढ़ा रही थी। ऐसे में मजबूरी में परिजनों को बड़ा फैसला लेना पड़ा और गर्भवती महिला को करीब 27 किलोमीटर दूर सलेहा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। गनीमत रही कि एम्बुलेंस समय रहते वहां पहुंच गई और महिला को इलाज मिल सका। पीड़िता के परिजनों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया है। उनका कहना है कि वे अस्पताल इस उम्मीद से पहुंचे थे कि समय पर इलाज मिलेगा लेकिन वहां ताला लटका मिला जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। उनका कहना है कि अगर समय पर दूसरे अस्पताल नहीं ले जाते तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है खासकर उन क्षेत्रों में जहां लोगों की निर्भरता पूरी तरह सरकारी अस्पतालों पर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा मामला है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
कोतवाली क्षेत्र में पुलिस कमिश्नर की सख्ती रॉन्ग साइड एंट्री बंद करने के निर्देश

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था और यातायात सुधार को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार इमामी ने कोतवाली थाना क्षेत्र में नागरिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उनकी समस्याएं सुनीं। इस जनसंवाद कार्यक्रम का उद्देश्य शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और जनता की भागीदारी बढ़ाना रहा। जनसंवाद के दौरान पुलिस कमिश्नर ने साफ तौर पर निर्देश दिए कि दुकानों के सामने होने वाली अवैध पार्किंग को तत्काल हटाया जाए क्योंकि इससे न केवल ट्रैफिक बाधित होता है बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस तरह की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल के आसपास रॉन्ग साइड एंट्री को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस क्षेत्र में गलत दिशा से आने वाले वाहनों पर पूरी तरह रोक लगाई जाए ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए कहा गया कि यदि कहीं भी कोई संदिग्ध या अवैध गतिविधि नजर आए तो तुरंत डायल 112 पर सूचना दें। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी और शिकायतों का जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। जनसंवाद में ट्रैफिक नियमों को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया और उन्हें नियमों का पालन करने की शपथ दिलाई गई। साथ ही साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई। पुलिस कमिश्नर ने मादक पदार्थों और अवैध हथियारों के खिलाफ भी लोगों से सहयोग मांगा और अपील की कि ऐसी किसी भी जानकारी को तुरंत पुलिस तक पहुंचाएं ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। इस पहल के जरिए पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की जा रही है जिससे शहर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके। पुलिस का मानना है कि आम नागरिकों की भागीदारी के बिना सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना संभव नहीं है।
दिल दहला देने वाली घटना सागर में दंपती ने एक साथ दी जान कारण बना रहस्य

सागर । मध्यप्रदेश के सागर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक दंपती ने एक साथ आत्महत्या कर ली जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मामला शाहगढ़ थाना क्षेत्र के वाल्मीकि वार्ड का है जहां पति और पत्नी अपने ही घर में फांसी के फंदे पर लटके हुए मिले। जानकारी के अनुसार मृतकों की पहचान उत्तम अहिरवार उम्र करीब 45 वर्ष और उनकी पत्नी हरिबाई उम्र 42 वर्ष के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों पति पत्नी रात तक अपने घर के बाहर पड़ोसियों के साथ सामान्य बातचीत करते हुए बैठे थे और किसी तरह की परेशानी के संकेत भी नहीं मिले थे। लेकिन सुबह जब परिवार और आसपास के लोगों ने दरवाजा खोला तो दोनों को कमरे के अंदर फंदे पर लटका देख सभी के होश उड़ गए। घटना की सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई करते हुए दोनों शवों को फंदे से उतारा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बाद में शवों को परिजनों को सौंप दिया गया। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और परिजनों तथा आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस घटना के पीछे की असली वजह सामने आ सके। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पड़ोसियों और परिचितों का कहना है कि दंपती का व्यवहार सामान्य था और उन्होंने कभी किसी बड़ी परेशानी का जिक्र नहीं किया था। ऐसे में दोनों का एक साथ यह कदम उठाना कई सवाल खड़े कर रहा है। परिवार के लोगों के लिए यह घटना गहरे सदमे से कम नहीं है। वहीं पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर किन परिस्थितियों ने इस दंपती को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।
ASHOKNAGAR ROAD CONSTRUCTION: स्वीकृति मिली, फिर भी सड़क अधूरी; खैजरा-कंचनपुर रोड न बनने से परेशान आदिवासी

HIGHLIGHTS: आदिवासी ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे, जनसुनवाई में सौंपा आवेदन स्वीकृति के बावजूद सड़क निर्माण अधूरा निजी जमीन विवाद में फंसा 300 मीटर हिस्सा मशीनों के सामने खड़े होकर रोका गया काम बारिश में गांव का संपर्क पूरी तरह कटने की समस्या ASHOKNAGAR ROAD CONSTRUCTION: अशोकनगर। जिले में खैजरा अटारी से कंचनपुर गांव तक पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर आदिवासी समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जनसुनवाई में आवेदन देकर बताया कि वर्षों से सड़क न होने के कारण गांव के लोगों को रोजमर्रा के कामों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब में रेलवे ट्रैक पर जोरदार धमाका, DFCCIL कॉरिडोर में दहशत, आतंकी साजिश की आशंका स्वीकृति के बाद भी 300 मीटर में अटका काम ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन निजी जमीन विवाद के चलते काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ठेकेदार और अधिकारियों ने कई बार निर्माण शुरू करने की कोशिश की, लेकिन हर बार 0 से 300 मीटर के हिस्से में विरोध के कारण काम रुक गया। Datia Temple Theft: मंदिर का रखवाला ही निकला चोर, भगवान के जेवर लेकर हुआ फरार मशीनों के सामने खड़े होकर रोका निर्माण ग्रामीणों का कहना है कि पहले पंचायत स्तर पर सहमति बन गई थी, लेकिन अब कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। ये लोग मशीनों के सामने खड़े होकर काम रुकवा देते हैं और मजदूरों को भगा देते हैं, जिससे सड़क निर्माण पूरी तरह ठप हो गया है। Datia Temple Theft: मंदिर का रखवाला ही निकला चोर, भगवान के जेवर लेकर हुआ फरार बारिश में बढ़ती परेशानी बरसात के मौसम में हालात और बिगड़ जाते हैं। बीमार लोगों को मुख्य सड़क तक ले जाना मुश्किल हो जाता है और बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते। मामले को लकेर ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क का सीमांकन जल्द कराया जाए, ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सके और उन्हें राहत मिल सके।
7 लीटर दूध देने वाली विदेशी सानेन बकरी भारत में एंट्री गांधी जी ने कहा था गरीबों की गाय

नई दिल्ली । भारत में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है जहां स्विट्जरलैंड की मशहूर सानेन बकरी को जम्मू कश्मीर में लाया गया है। दूध उत्पादन के मामले में बेहद खास मानी जाने वाली यह नस्ल अब किसानों की आमदनी बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर के वैज्ञानिकों ने इस पहल की शुरुआत की है। प्रोजेक्ट के तहत 7 से 8 महीने की उम्र वाली 20 मादा और 4 नर सानेन बकरियां स्विट्जरलैंड से लाई गई हैं। यह पहली बार है जब किसी सरकारी संस्थान ने इस विदेशी नस्ल को भारत में संगठित तरीके से शामिल किया है। इस बकरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी दूध देने की क्षमता है। सानेन बकरी एक दिन में करीब 7 लीटर तक दूध दे सकती है जो इसे अन्य बकरियों से अलग बनाता है। यही वजह है कि इसे दूध की रानी भी कहा जाता है। खास बात यह भी है कि इसका दूध A2 कैटेगरी में आता है जो पोषण के लिहाज से काफी बेहतर माना जाता है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है। इस नस्ल का संबंध महात्मा गांधी से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि गांधी जी इस बकरी को भारत लेकर आए थे और इसकी खासियत को देखते हुए इसे गरीब आदमी की गाय कहा था। कम लागत में अधिक दूध उत्पादन करने की क्षमता के कारण यह छोटे किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। गाय के मुकाबले सानेन बकरी का पालन करना आसान होता है। इसे कम जगह की जरूरत होती है और इसका खानपान भी अपेक्षाकृत सस्ता होता है। यही वजह है कि सीमित संसाधनों वाले किसान भी इसे आसानी से पाल सकते हैं और अच्छी कमाई कर सकते हैं। फिलहाल इन बकरियों को सीधे किसानों को नहीं दिया जाएगा। पहले जम्मू कश्मीर की जलवायु में इनके अनुकूलन का अध्ययन किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह नस्ल यहां के वातावरण में बेहतर प्रदर्शन कर सके। इसके बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर किसानों और युवाओं में वितरित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो सानेन बकरी जम्मू कश्मीर में डेयरी सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
पंजाब में रेलवे ट्रैक पर जोरदार धमाका, DFCCIL कॉरिडोर में दहशत, आतंकी साजिश की आशंका

नई दिल्ली। पंजाब में रेलवे सुरक्षा को लेकर एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। राजपुरा और शंभू के बीच स्थित डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर देर रात एक तेज धमाका हुआ, जिससे रेलवे ट्रैक को काफी नुकसान पहुंचा। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि ट्रैक का एक हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हो गया। घटना स्थल पर मौजूद एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह घटना सामान्य दुर्घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे किसी तरह की सुनियोजित योजना होने की संभावना भी जताई जा रही है। जांच के दौरान मौके से कुछ संदिग्ध वस्तुएं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है। विशेषज्ञ इन सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि विस्फोट कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ। रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। पूरे क्षेत्र में जांच तेज कर दी गई है और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। चूंकि यह रेलवे कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण मार्ग का हिस्सा है, इसलिए इसकी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इसी क्षेत्र में पहले भी इसी तरह की घटना की आशंका या घटना सामने आ चुकी है। बार-बार एक ही इलाके में इस तरह की गतिविधियां सामने आने से यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित साजिश तो नहीं है। घटना के बाद रेल संचालन पर भी असर पड़ा है और कुछ समय के लिए मालगाड़ियों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया है। सुरक्षा बलों को मौके पर तैनात किया गया है और पूरे ट्रैक की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह की और घटना को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हर संभावित पहलू से जांच कर रही हैं। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि मृतक व्यक्ति का इस घटना से क्या संबंध था और उसकी गतिविधियां किस दिशा में संकेत कर रही थीं। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और सुरक्षा एजेंसियां इसे किसी भी संभावित साजिश के एंगल से खारिज नहीं कर रही हैं। इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
सिंगरौली में ब्लास्टिंग का कहर पहाड़ों से गिर रहे पत्थर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र में इन दिनों ब्लास्टिंग को लेकर हालात बेहद चिंताजनक बन गए हैं जहां विकास कार्यों के नाम पर हो रही गतिविधियां अब ग्रामीणों के लिए खतरे का कारण बनती जा रही हैं। मिसिरगवा आयरन ब्लॉक में टेस्टिंग के नाम पर लगातार की जा रही ब्लास्टिंग से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। जानकारी के अनुसार चितरंगी के केकराव चितावल शिवपुरवा और मिसिरगवा गांवों में इन दिनों तेज धमाकों के साथ ब्लास्टिंग की जा रही है। इन धमाकों के कारण पहाड़ियों से बड़े बड़े पत्थर टूटकर नीचे गिर रहे हैं जिससे न सिर्फ ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि राहगीरों की जान भी हर समय खतरे में बनी हुई है। कई घरों में दरारें पड़ चुकी हैं और कुछ मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि चितरंगी लमसरई मुख्य मार्ग पर भी पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं जिससे आवागमन करने वाले लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। युवा नेता लक्ष्मण सिंह बैस के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए साफ शब्दों में कहा कि या तो ब्लास्टिंग के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए या फिर इस काम को तत्काल बंद किया जाए। ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में क्षतिग्रस्त मकानों का तुरंत मुआवजा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कंपनी और प्रशासन के बीच खुली बैठक और लोगों की जान जोखिम में डालने वाले कार्यों पर रोक शामिल है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि तहसीलदार ने मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है लेकिन अब भी बड़ा सवाल यही है कि अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्रशासन की धीमी कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और प्रशासनिक कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह समय रहते कदम उठाता है या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होती है।