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तेल कोटे पर टकराव के बाद यूएई का बड़ा फैसला, ओपेक से बाहर निकलने से दुनिया में हलचल

नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव सामने आया है जहां United Arab Emirates ने 1 मई से OPEC से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया पहले से ही ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासतौर पर भारत जैसे आयातक देशों पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। भारत के पूर्व राजदूत Navdeep Singh Suri के मुताबिक यूएई का यह फैसला अचानक नहीं है बल्कि पिछले पांच वर्षों से इसकी तैयारी चल रही थी। उनका कहना है कि यूएई लंबे समय से ओपेक द्वारा तय किए गए उत्पादन कोटे से असंतुष्ट था। शुरुआत में उसे करीब 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन की अनुमति थी जिसे बाद में बढ़ाकर 3.4 मिलियन बैरल किया गया लेकिन यह भी उसकी बढ़ती क्षमता के अनुरूप नहीं था। सूरी ने बताया कि यूएई ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी तेल उत्पादन क्षमता में भारी निवेश किया है और वह जल्द ही 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन करने की स्थिति में पहुंच सकता है। ऐसे में वह ओपेक के कड़े नियमों और सऊदी अरब के प्रभाव वाले फैसलों से मुक्त होकर अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना चाहता है। यही वजह है कि उसने स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने का रास्ता चुना। हालांकि इस फैसले का असर वैश्विक बाजार पर तुरंत देखने को मिल सकता है। मौजूदा समय में Strait of Hormuz में तनाव और रुकावट के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है जिससे कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। ऐसे में यूएई का ओपेक से बाहर होना बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आने वाले समय में होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सामान्य होती है और तेल की आपूर्ति सुचारू रूप से शुरू हो जाती है तो यूएई का अतिरिक्त उत्पादन वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। इससे भारत जैसे देशों को राहत मिल सकती है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। लेकिन दूसरी ओर एक बड़ा खतरा भी सामने आता है। ओपेक लंबे समय से तेल की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है जिससे कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोका जा सके। यदि यूएई जैसे बड़े उत्पादक देश इस संगठन से बाहर निकलते हैं तो ओपेक की पकड़ कमजोर हो सकती है और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच Iran और United States के बीच जारी तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। पूर्व राजदूत सूरी ने स्पष्ट कहा कि इन हालातों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उनका मानना है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और आपूर्ति में रुकावट वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। कुल मिलाकर यूएई का यह कदम आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अन्य देश इस फैसले के बाद क्या रणनीति अपनाते हैं और बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच अमेरिका की दुविधा: क्या चीन पर से हट रहा है फोकस?

नई दिल्ली । अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर वाशिंगटन में एक नई बहस तेज हो गई है जहां सांसदों ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच चीन पर से ध्यान हटने की आशंका जताई है पेंटागन के बजट से जुड़ी एक अहम सुनवाई के दौरान कई सांसदों ने चिंता व्यक्त की कि मौजूदा हालात अमेरिका की इंडो पैसिफिक रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माइक डी रॉजर्स ने कहा कि अमेरिका इस समय अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है जिसमें चीन सबसे बड़ा दीर्घकालिक खतरा बनकर उभर रहा है उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन अब केवल अपनी सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि वह प्रशांत महासागर के गहरे हिस्सों तक अपनी सैन्य ताकत का विस्तार कर रहा है इसके लिए वह नौसैनिक जहाजों मिसाइल सिस्टम और अंतरिक्ष क्षमताओं में तेजी से निवेश कर रहा है सुनवाई के दौरान सांसदों ने इस बात पर भी जोर दिया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती विशेष रूप से कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की मौजूदगी से संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है इसका सीधा असर इंडो पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की प्रतिक्रिया क्षमता पर पड़ सकता है जहां चीन को सबसे बड़ा रणनीतिक चुनौती माना जाता है कई सांसदों ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका का ध्यान इस महत्वपूर्ण क्षेत्र से हटता है तो चीन को अपनी स्थिति और मजबूत करने का मौका मिल सकता है उन्होंने कहा कि यह केवल सैन्य नहीं बल्कि भू राजनीतिक संतुलन का भी मामला है जहां थोड़ी सी ढील भी दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सैन्य तैनाती हमेशा रणनीतिक संतुलन का हिस्सा होती है उन्होंने बताया कि हर निर्णय में जोखिम और विकल्पों का आकलन किया जाता है और उसी के आधार पर प्राथमिकताएं तय की जाती हैं उनका कहना था कि अमेरिका को एक साथ कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिबद्धताओं को संतुलित करना पड़ता है वहीं रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सरकार की रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया भर में एक साथ कई खतरों से निपटने में सक्षम है उन्होंने भरोसा जताया कि मौजूदा रणनीति तत्काल चुनौतियों से निपटने के साथ साथ दीर्घकालिक सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है हालांकि आलोचकों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक सैन्य संलिप्तता अमेरिका की क्षमताओं पर दबाव डाल सकती है और इससे विरोधी देशों को गलत संदेश जा सकता है उन्होंने यह भी कहा कि यदि इंडो पैसिफिक क्षेत्र से ध्यान हटता है तो चीन को अपनी सैन्य और आर्थिक पकड़ मजबूत करने का अतिरिक्त अवसर मिल सकता है गौरतलब है कि इंडो पैसिफिक क्षेत्र अमेरिका की विदेश और रक्षा नीति का केंद्र बना हुआ है जहां वह अपने सहयोगी देशों के साथ साझेदारी को मजबूत करने में जुटा है ऐसे में यह बहस इस बात को दर्शाती है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है

एक क्लिक की चूक और पैसा गायब-जानिए गलत UPI ट्रांजैक्शन के बाद रिकवरी का पूरा सच

नई दिल्ली । डिजिटल लेन-देन की बढ़ती लोकप्रियता ने जहां भुगतान को आसान बना दिया है, वहीं छोटी-सी लापरवाही कई बार बड़ी परेशानी खड़ी कर देती है। अक्सर लोग जल्दी में या बिना पूरी जानकारी जांचे UPI के जरिए पैसे भेज देते हैं और बाद में पता चलता है कि रकम गलत खाते में चली गई है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत समझदारी से कदम उठाना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि सही समय पर की गई कार्रवाई ही पैसे वापस मिलने की संभावना को बढ़ाती है। अगर किसी से गलती से गलत UPI आईडी या नंबर पर पैसे ट्रांसफर हो जाएं, तो सबसे पहले ट्रांजैक्शन की जानकारी ध्यान से देखें। कई बार उसमें सामने वाले व्यक्ति का नाम या मोबाइल नंबर दिखाई देता है। यदि संपर्क संभव हो, तो तुरंत कॉल या संदेश के जरिए विनम्रता से पैसे लौटाने का अनुरोध करना चाहिए। कई मामलों में सामने वाला व्यक्ति सहयोग कर देता है और समस्या जल्दी हल हो जाती है। लेकिन यदि सामने से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो अगला कदम तकनीकी और औपचारिक प्रक्रिया की ओर बढ़ना होता है। जिस ऐप के जरिए भुगतान किया गया है, उसमें जाकर संबंधित ट्रांजैक्शन के लिए शिकायत दर्ज करनी चाहिए। हर ट्रांजैक्शन के साथ एक यूनिक आईडी होती है, जिसे संभालकर रखना जरूरी है, क्योंकि इसी के आधार पर बैंक या सेवा प्रदाता मामले की जांच करता है। साथ ही अपने बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करना भी आवश्यक है, ताकि शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज हो सके और प्रक्रिया आगे बढ़े। अगर इन प्रयासों के बाद भी समाधान नहीं मिलता, तो उच्च स्तर पर शिकायत करने का विकल्प मौजूद रहता है। डिजिटल भुगतान से जुड़े नियामक तंत्र के माध्यम से मामला उठाया जा सकता है, जहां विस्तृत जांच के बाद उचित कदम उठाए जाते हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि UPI ट्रांजैक्शन तुरंत पूरे हो जाते हैं और सामान्य परिस्थितियों में उन्हें सीधे रिवर्स नहीं किया जा सकता। बैंक केवल अनुरोध भेज सकता है और पैसा तभी वापस मिलता है जब प्राप्तकर्ता इसकी अनुमति देता है। इस पूरी प्रक्रिया में समय सबसे अहम भूमिका निभाता है। जितनी जल्दी कार्रवाई की जाएगी, उतनी ही संभावना बढ़ेगी कि पैसा वापस मिल सके। इसलिए 24 से 48 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज करना बेहद जरूरी माना जाता है। देरी होने पर मामला जटिल हो सकता है और सफलता की संभावना कम हो जाती है। भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। पैसे भेजने से पहले प्राप्तकर्ता का नाम और UPI आईडी ध्यान से जांचना चाहिए। बड़ी रकम भेजने से पहले एक छोटी राशि ट्रांसफर करके पुष्टि करना समझदारी भरा कदम हो सकता है। इसके अलावा QR कोड स्कैन करते समय भी स्क्रीन पर दिखाई देने वाली जानकारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डिजिटल भुगतान की सुविधा जितनी तेज है, उतनी ही जिम्मेदारी भी मांगती है। थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर उठाया गया कदम न केवल आपकी परेशानी कम कर सकता है, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में भी मददगार साबित होता है।

यूरोप में बढ़ता जलवायु संकट: रिकॉर्ड गर्मी और हीटवेव का खतरा, WMO ने जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली । यूरोप में जलवायु परिवर्तन की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और ताजा रिपोर्ट्स ने इस खतरे को और स्पष्ट कर दिया है विश्व मौसम विज्ञान संगठन और कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है जहां तापमान वृद्धि वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से हो रही है डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने यूरोपियन स्टेट ऑफ द क्लाइमेट रिपोर्ट 2025 पेश करते हुए कहा कि 1980 के बाद से यूरोप में तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह स्थिति अब पर्यावरण से लेकर मानव जीवन तक हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में यूरोप के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया इसमें मेडिटेरेनियन क्षेत्र से लेकर आर्कटिक सर्कल तक लंबे समय तक गर्मी का असर बना रहा कई क्षेत्रों में रिकॉर्ड हीटवेव देखने को मिली खासतौर पर सब आर्कटिक क्षेत्र फेनोस्कैंडिया में जुलाई के महीने में लगातार 21 दिन तक हीटवेव चली जो अब तक की सबसे लंबी और गंभीर मानी जा रही है स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि आर्कटिक सर्कल के आसपास तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया जो सामान्य परिस्थितियों में बेहद असामान्य है इसके अलावा बढ़ती गर्मी और सूखे हालात ने जंगल की आग के खतरे को भी कई गुना बढ़ा दिया है रिपोर्ट के अनुसार 2025 में यूरोप में लगभग 1.034 मिलियन हेक्टेयर जमीन आग की चपेट में आई जो साइप्रस देश के कुल क्षेत्रफल से भी ज्यादा है जंगल की आग के कारण उत्सर्जन में भी भारी वृद्धि हुई है जिसमें स्पेन का योगदान सबसे अधिक रहा इस तरह की घटनाओं ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है बल्कि जैव विविधता पर भी गंभीर प्रभाव डाला है समुद्री हीटवेव के कारण भूमध्य सागर में सीग्रास जैसे संवेदनशील इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचा है वहीं पीटलैंड क्षेत्रों में आग लगने से कार्बन उत्सर्जन और बढ़ गया है जलवायु परिवर्तन का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है बल्कि यह मानव स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल रहा है Food and Agriculture Organization और डब्ल्यूएमओ की संयुक्त रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक गर्मी वैश्विक खाद्य प्रणाली को प्रभावित कर रही है जिससे एक अरब से ज्यादा लोग जोखिम में आ सकते हैं इसके अलावा हीट स्ट्रेस के कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 500 अरब काम के घंटे का नुकसान हो रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की समस्या बन चुका है और इससे निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है यूरोपीय देशों ने 2030 और 2050 के लिए कई लक्ष्य तय किए हैं लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन प्रयासों की गति को और तेज करने की आवश्यकता है कुल मिलाकर यह रिपोर्ट एक स्पष्ट चेतावनी है कि यदि दुनिया ने अभी कदम नहीं उठाए तो जलवायु संकट आने वाले समय में और भी विनाशकारी रूप ले सकता है

OnePlus Pad 4 लॉन्च: बड़ी डिस्प्ले, पावरफुल प्रोसेसर और लंबी बैटरी लाइफ के साथ नया विकल्प

नई दिल्ली । भारतीय टेक बाजार में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है, जहां OnePlus ने अपना नया टैबलेट OnePlus Pad 4 पेश कर दिया है। यह डिवाइस उन यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो एक साथ बेहतर परफॉर्मेंस, बड़ी स्क्रीन और लंबी बैटरी लाइफ चाहते हैं। लॉन्च के साथ ही यह टैबलेट प्रीमियम कैटेगरी में एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरकर सामने आया है। इस टैबलेट की सबसे प्रमुख खासियत इसकी बड़ी और हाई-क्वालिटी डिस्प्ले है। 13.2 इंच की स्क्रीन के साथ यह डिवाइस शानदार विजुअल एक्सपीरियंस देता है। हाई रिफ्रेश रेट के कारण स्क्रीन पर हर मूवमेंट बेहद स्मूथ दिखाई देता है, जिससे वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और मल्टीटास्किंग का अनुभव और बेहतर हो जाता है। परफॉर्मेंस के मामले में भी OnePlus Pad 4 किसी से पीछे नहीं है। इसमें लेटेस्ट जनरेशन का पावरफुल प्रोसेसर दिया गया है, जो हैवी टास्क और मल्टीटास्किंग को आसानी से संभाल सकता है। इसके साथ ही हाई-स्पीड रैम और पर्याप्त स्टोरेज विकल्प इसे और अधिक उपयोगी बनाते हैं। यह टैबलेट उन यूजर्स के लिए खास है जो काम और मनोरंजन दोनों के लिए एक ही डिवाइस पर निर्भर रहना चाहते हैं। कैमरा फीचर्स की बात करें तो इसमें रियर और फ्रंट दोनों कैमरे दिए गए हैं, जो वीडियो कॉलिंग और सामान्य उपयोग के लिए उपयुक्त हैं। हालांकि टैबलेट का मुख्य फोकस कैमरा नहीं होता, फिर भी यह रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। बैटरी इस डिवाइस का एक और मजबूत पक्ष है। इसमें बड़ी क्षमता की बैटरी दी गई है, जो लंबे समय तक इस्तेमाल की सुविधा देती है। इसके साथ फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी मौजूद है, जिससे यूजर्स को बार-बार चार्जिंग की चिंता नहीं करनी पड़ती। डिजाइन के लिहाज से भी यह टैबलेट काफी आकर्षक और स्लिम है, जिससे इसे कैरी करना आसान हो जाता है। कनेक्टिविटी फीचर्स भी आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर शामिल किए गए हैं, जिससे यह डिवाइस भविष्य के उपयोग के लिए तैयार नजर आता है। कीमत के मामले में यह टैबलेट प्रीमियम सेगमेंट में आता है, लेकिन इसमें दिए गए फीचर्स इसे इस रेंज में एक संतुलित विकल्प बनाते हैं। साथ ही लॉन्च के दौरान कुछ विशेष ऑफर्स भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे ग्राहकों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। कुल मिलाकर, OnePlus Pad 4 एक ऐसा टैबलेट है जो आधुनिक यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह पावर, डिजाइन और परफॉर्मेंस का ऐसा संयोजन पेश करता है, जो इसे बाजार में एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाता है।

मोदी के निमंत्रण पर भारत आएंगे वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम, अहम मुद्दों पर होगी बड़ी चर्चा

नई दिल्ली । भारत और वियतनाम के बीच कूटनीतिक रिश्तों को नई दिशा देने वाला एक अहम दौरा जल्द शुरू होने जा रहा है जहां टो लैम 5 मई से तीन दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंचेंगे यह दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा भारत सरकार के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति टो लैम 5 से 7 मई तक भारत में रहेंगे इस दौरान उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा जिसमें वियतनाम सरकार के मंत्री वरिष्ठ अधिकारी और एक बड़ा बिजनेस डेलिगेशन शामिल रहेगा यह संकेत देता है कि इस यात्रा का फोकस केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को भी आगे बढ़ाना है दौरे की शुरुआत 6 मई को औपचारिक स्वागत समारोह से होगी जहां राष्ट्रपति टो लैम का स्वागत राष्ट्रपति भवन में किया जाएगा इसके बाद उनकी मुलाकात भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगी इस बैठक में दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के साथ साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करेंगे माना जा रहा है कि इस दौरान रक्षा सहयोग व्यापार निवेश और इंडो पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी जैसे अहम विषयों पर भी बातचीत होगी राष्ट्रपति टो लैम भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाकात करेंगे इसके अलावा कई अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ भी उनकी बैठक प्रस्तावित है इन मुलाकातों के जरिए दोनों देशों के बीच राजनीतिक विश्वास और सहयोग को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव भी है राष्ट्रपति टो लैम अपने कार्यक्रम के तहत बिहार के बोधगया भी जाएंगे जो बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र है इसके साथ ही वे मुंबई का भी दौरा करेंगे जहां व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों को लेकर चर्चाएं हो सकती हैं भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक और सभ्यतागत आधार पर टिके हुए हैं पिछले कुछ वर्षों में इन रिश्तों में लगातार मजबूती आई है खासतौर पर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वियतनाम दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई थी अब इस साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह दौरा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टो लैम को राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई देते हुए दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की इच्छा जताई थी उन्होंने भरोसा जताया था कि टो लैम के नेतृत्व में भारत और वियतनाम की दोस्ती और गहरी होगी विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग को भी बढ़ावा देगा आने वाले समय में भारत और वियतनाम के बीच साझेदारी और मजबूत होती दिखाई दे सकती है

क्लाउड और सब्सक्रिप्शन की रफ्तार से नई ऊंचाइयों पर पहुंचा Google, 20 अरब डॉलर रेवेन्यू का ऐतिहासिक आंकड़ा

नई दिल्ली । तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में Google ने एक बार फिर अपने मजबूत बिजनेस मॉडल और तकनीकी निवेश के दम पर शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी ने इस वित्तीय तिमाही में न केवल पेड सब्सक्रिप्शंस का नया रिकॉर्ड बनाया, बल्कि क्लाउड सर्विसेज से भी उल्लेखनीय आय दर्ज कराई, जो लगभग 20 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि डिजिटल सर्विसेज और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर आज के समय में टेक कंपनियों की रीढ़ बन चुके हैं। कंपनी की कुल कमाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष-दर-वर्ष आधार पर रेवेन्यू में मजबूत उछाल देखने को मिला, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी की सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। खास बात यह रही कि यह ग्रोथ कई सेगमेंट्स में एक साथ देखने को मिली, जिसमें सर्च, डिजिटल विज्ञापन, क्लाउड और सब्सक्रिप्शन शामिल हैं। सब्सक्रिप्शन बिजनेस इस सफलता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। कंपनी की सेवाओं से जुड़े पेड यूजर्स की संख्या करोड़ों में पहुंच चुकी है, जो इसकी लोकप्रियता और भरोसे को दर्शाता है। वीडियो और अन्य डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने इस सेगमेंट को और मजबूती दी है, जिससे कंपनी को स्थिर और लगातार आय प्राप्त हो रही है। क्लाउड बिजनेस ने इस तिमाही में सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया। एंटरप्राइज सेक्टर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की बढ़ती जरूरत ने क्लाउड सर्विसेज की मांग को तेज किया है, जिसका सीधा फायदा कंपनी को मिला है। यही कारण है कि क्लाउड से होने वाली आय में तेज वृद्धि दर्ज की गई और यह कंपनी के प्रमुख राजस्व स्रोतों में शामिल हो गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ते निवेश ने भी इस ग्रोथ को नई दिशा दी है। AI आधारित तकनीकों ने सर्च और अन्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और यूजर फ्रेंडली बनाया है, जिससे प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं की सक्रियता बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी की कुल कमाई में भी सकारात्मक असर देखने को मिला है। इसके अलावा, ऑपरेटिंग इनकम और मार्जिन में भी सुधार दर्ज किया गया है, जो कंपनी की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है। यह लगातार कई तिमाहियों से जारी ग्रोथ ट्रेंड का हिस्सा है, जो यह साबित करता है कि कंपनी की रणनीति दीर्घकालिक सफलता की दिशा में आगे बढ़ रही है।

बीजिंग मिशन से पहले औपचारिकता पूरी: राष्ट्रपति मुर्मु से मिले विक्रम दोराईस्वामी, सौंपे गए परिचय पत्र

नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है जहां विक्रम दोराईस्वामी ने चीन में भारत के राजदूत के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने से पहले औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है उन्होंने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर अपने परिचय पत्र प्राप्त किए हैं जो किसी भी राजनयिक नियुक्ति का एक जरूरी और औपचारिक चरण माना जाता है चीन में भारतीय दूतावास ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की और बताया कि दोराईस्वामी को उनके नए असाइनमेंट के लिए राष्ट्रपति से क्रेडेंशियल्स प्रदान किए गए हैं यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के बीच संबंध कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के चलते काफी अहम माने जा रहे हैं ऐसे में एक अनुभवी राजनयिक की तैनाती को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी विक्रम दोराईस्वामी का कूटनीतिक करियर बेहद समृद्ध और विविध अनुभवों से भरा रहा है उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में मास्टर डिग्री हासिल कर पूरी की इसके बाद 1992 से 1993 के दौरान नई दिल्ली में अपनी इन सर्विस ट्रेनिंग पूरी की और मई 1994 में हांगकांग स्थित भारतीय दूतावास में थर्ड सेक्रेटरी के रूप में अपनी पहली विदेशी नियुक्ति संभाली दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने हांगकांग के चीनी विश्वविद्यालय से चीनी भाषा में डिप्लोमा भी किया है जो उन्हें चीन से जुड़े मामलों में एक अतिरिक्त विशेषज्ञता प्रदान करता है यही कारण है कि उन्हें पहले भी बीजिंग में भारतीय दूतावास में कार्य करने का अनुभव मिल चुका है जहां उन्होंने लगभग चार वर्षों तक अपनी सेवाएं दी थीं इसके अलावा दोराईस्वामी ने विदेश मंत्रालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है जिसमें डिप्टी चीफ ऑफ प्रोटोकॉल और प्रधानमंत्री कार्यालय में निजी सचिव जैसे अहम पद शामिल हैं उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन न्यूयॉर्क में राजनीतिक सलाहकार के रूप में भी काम किया और दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में महावाणिज्य दूत की जिम्मेदारी भी संभाली उनका अनुभव केवल बहुपक्षीय मंचों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने क्षेत्रीय संगठनों में भी अहम भूमिका निभाई नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने सार्क विभाग का नेतृत्व किया और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समन्वयक के रूप में भी कार्य किया हाल के वर्षों में वे ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत रहे हैं और अब उन्हें चीन जैसे महत्वपूर्ण देश में भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ऐसे में यह नियुक्ति भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है आने वाले समय में विक्रम दोराईस्वामी से उम्मीद की जा रही है कि वे अपने अनुभव और विशेषज्ञता के जरिए भारत और चीन के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत के हितों को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे

स्मार्टफोन की सुरक्षा अब आपके इशारे पर; फोन चोरी होने के बाद भी ऐसे सुरक्षित रहेगा आपका बैंक खाता और निजी डेटा।

नई दिल्ली । आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन का खो जाना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है, क्योंकि इसमें हमारे जीवन की पूरी कमाई, निजी दस्तावेज और संवेदनशील बैंकिंग जानकारियां समाहित होती हैं। जब फोन चोरी होता है, तो सबसे बड़ा डर डिवाइस की कीमत का नहीं, बल्कि उसमें मौजूद डेटा के दुरुपयोग का होता है। हालांकि, आधुनिक मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम ने अब यूजर्स को वह ‘ब्रह्मास्त्र’ दे दिया है जिससे वे अपने फोन से मीलों दूर रहकर भी उसे एक लोहे की तिजोरी में बदल सकते हैं। चाहे आप एंड्रॉइड का उपयोग कर रहे हों या आईफोन का, तकनीकी सुरक्षा के ऐसे घेरे तैयार किए गए हैं जो आपके एक इशारे पर डिवाइस को पूरी तरह निष्क्रिय कर सकते हैं। एंड्रॉइड इकोसिस्टम में सुरक्षा की कमान एक विशेष ट्रैकिंग और लॉकिंग सेवा के हाथ में होती है। यदि आपका फोन गुम हो जाता है, तो आपको केवल किसी भी अन्य कंप्यूटर या मोबाइल के जरिए अपने मुख्य डिजिटल खाते में प्रवेश करना होता है। वहां मौजूद ‘सिक्योर डिवाइस’ का विकल्प आपके फोन को तत्काल प्रभाव से लॉक कर देता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि आप दूर बैठे ही अपने फोन की स्क्रीन पर एक संदेश या अपना कोई दूसरा मोबाइल नंबर फ्लैश कर सकते हैं। यह न केवल चोर के इरादों पर पानी फेर देता है, बल्कि अगर फोन किसी भले इंसान को मिला है, तो वह आपसे संपर्क भी कर सकता है। यह तकनीक आपके फोन को तब तक सुरक्षित रखती है जब तक आप स्वयं उसे अनलॉक न करें। दूसरी ओर, आईफोन धारकों के लिए सुरक्षा का स्तर और भी अधिक कड़ा है। ‘लॉस्ट मोड’ के सक्रिय होते ही एप्पल का यह डिवाइस एक डिजिटल लॉक में तब्दील हो जाता है। इस मोड की खासियत यह है कि यह डिवाइस पर मौजूद सभी भुगतान सेवाओं और कार्ड्स को तुरंत फ्रीज कर देता है, जिससे वित्तीय सेंधमारी की कोई गुंजाइश नहीं बचती। इसके अलावा, एप्पल की यह प्रणाली इतनी उन्नत है कि बिना आपकी विशिष्ट पहचान और पासवर्ड के फोन को दोबारा चालू करना या उसे रिसेट करना नामुमकिन होता है। यह तकनीक अपराधी के हाथ में मौजूद आपके महंगे फोन को एक बेकार धातु के टुकड़े में बदल देती है। हालांकि, इस सुरक्षा चक्र को प्रभावी बनाने के लिए कुछ सावधानियां पहले से बरतनी जरूरी हैं। आपके स्मार्टफोन में लोकेशन सर्विसेज और ‘फाइंड’ फीचर हमेशा ऑन रहना चाहिए। यदि कभी ऐसी स्थिति आए कि फोन मिलने की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो जाए, तो ‘रिमोट इरेज़’ का विकल्प चुनना ही बुद्धिमानी है। यह प्रक्रिया आपके फोन के भीतर मौजूद हर एक फाइल, फोटो और अकाउंट को हमेशा के लिए मिटा देती है। हालांकि इसके बाद फोन की लोकेशन ट्रैक नहीं की जा सकेगी, लेकिन आपका डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इस तरह की डिजिटल जागरूकता ही आज के समय में आपकी निजी और वित्तीय गोपनीयता की सबसे बड़ी रक्षक है।

तेहरान में फंसे बुजुर्ग सिख दंपति, भारत वापसी पर संकट: बीजेपी प्रवक्ता ने की अपील

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीयों की वापसी को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है उन्होंने खास तौर पर तेहरान में फंसे बुजुर्ग सिख दंपतियों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है जो इस समय वहां के गुरुद्वारा साहिब में फंसे हुए हैं शेरगिल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी अपील में कहा कि ये सिख दंपति लंबे समय से भारत लौटने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन जरूरी अनुमति नहीं मिलने के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि इन परिवारों को सुरक्षित भारत लाया जा सके बताया जा रहा है कि ईरान से भारत के लिए महान एयरवेज की एक फ्लाइट 5 मई को संचालित होने वाली है लेकिन एयरलाइन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना भारत सरकार की अनुमति के इन यात्रियों को साथ लाना संभव नहीं होगा यही कारण है कि यह मामला अब और गंभीर हो गया है और तत्काल समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है दरअसल ईरान में हालिया हालात के चलते वहां का एयरस्पेस काफी समय तक बंद रहा था जिसकी वजह से कई लोग वहीं फंस गए थे हालांकि अब धीरे-धीरे उड़ानों का संचालन शुरू किया जा रहा है और अलग-अलग देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया भी जारी है लेकिन कई मामलों में प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण देरी हो रही है इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत भी हुई है इस बातचीत में दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई इससे उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में फंसे भारतीयों की वापसी को लेकर कुछ सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं ईरानी दूतावास की ओर से भी इस बातचीत की पुष्टि की गई है जिसमें बताया गया कि दोनों देशों के बीच सीजफायर क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है ऐसे में यह कूटनीतिक संवाद भी इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा सकता है गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है खासकर वे लोग जो विदेश में फंसे हुए हैं उनके लिए हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं ऐसे में सरकारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें फिलहाल सभी की निगाहें भारत सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेकर इन फंसे हुए सिख परिवारों को राहत दी जाएगी