हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष माइक डी रॉजर्स ने कहा कि अमेरिका इस समय अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा है जिसमें चीन सबसे बड़ा दीर्घकालिक खतरा बनकर उभर रहा है उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन अब केवल अपनी सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि वह प्रशांत महासागर के गहरे हिस्सों तक अपनी सैन्य ताकत का विस्तार कर रहा है इसके लिए वह नौसैनिक जहाजों मिसाइल सिस्टम और अंतरिक्ष क्षमताओं में तेजी से निवेश कर रहा है
सुनवाई के दौरान सांसदों ने इस बात पर भी जोर दिया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती विशेष रूप से कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की मौजूदगी से संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है इसका सीधा असर इंडो पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की प्रतिक्रिया क्षमता पर पड़ सकता है जहां चीन को सबसे बड़ा रणनीतिक चुनौती माना जाता है
कई सांसदों ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका का ध्यान इस महत्वपूर्ण क्षेत्र से हटता है तो चीन को अपनी स्थिति और मजबूत करने का मौका मिल सकता है उन्होंने कहा कि यह केवल सैन्य नहीं बल्कि भू राजनीतिक संतुलन का भी मामला है जहां थोड़ी सी ढील भी दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सैन्य तैनाती हमेशा रणनीतिक संतुलन का हिस्सा होती है उन्होंने बताया कि हर निर्णय में जोखिम और विकल्पों का आकलन किया जाता है और उसी के आधार पर प्राथमिकताएं तय की जाती हैं उनका कहना था कि अमेरिका को एक साथ कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिबद्धताओं को संतुलित करना पड़ता है
वहीं रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सरकार की रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना दुनिया भर में एक साथ कई खतरों से निपटने में सक्षम है उन्होंने भरोसा जताया कि मौजूदा रणनीति तत्काल चुनौतियों से निपटने के साथ साथ दीर्घकालिक सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है
हालांकि आलोचकों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक सैन्य संलिप्तता अमेरिका की क्षमताओं पर दबाव डाल सकती है और इससे विरोधी देशों को गलत संदेश जा सकता है उन्होंने यह भी कहा कि यदि इंडो पैसिफिक क्षेत्र से ध्यान हटता है तो चीन को अपनी सैन्य और आर्थिक पकड़ मजबूत करने का अतिरिक्त अवसर मिल सकता है
गौरतलब है कि इंडो पैसिफिक क्षेत्र अमेरिका की विदेश और रक्षा नीति का केंद्र बना हुआ है जहां वह अपने सहयोगी देशों के साथ साझेदारी को मजबूत करने में जुटा है ऐसे में यह बहस इस बात को दर्शाती है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका को अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है