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RBI ने 6 माह में भारत में शिफ्ट किया 104 टन सोना…. जानें विदेशी मुद्रा भंडार का हाल

नई दिल्ली। भारत (India) के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India- RBI) ने पिछले छह महीनों में अपने सोने के भंडार का बड़ा हिस्सा देश के भीतर शिफ्ट किया है, जिससे गोल्ड की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है। 6 महीने में 104 टन सोना देश में शिफ्टआरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 104.23 मीट्रिक टन सोना विदेश से भारत लाया गया। इसके साथ ही देश में रखा गया कुल सोना बढ़कर 290.37 मीट्रिक टन हो गया है। हालांकि, कुल गोल्ड रिजर्व में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। मार्च 2026 तक RBI के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना है, जो सितंबर 2025 के 880.18 टन से थोड़ा ही ज्यादा है। विदेश में अभी भी कितना सोना रखा हैआरबीआई अभी भी अपने सोने का एक बड़ा हिस्सा विदेश में सुरक्षित रखता है। करीब 197.67 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा 2.80 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में है। गोल्ड की हिस्सेदारी में तेज बढ़ोतरीसोने की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा है।मार्च 2026 तक फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई, जो छह महीने पहले 13.92% थी। यह दिखाता है कि RBI धीरे-धीरे अपने रिजर्व में गोल्ड का महत्व बढ़ा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार का हालभारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) का बड़ा हिस्सा है। कुल विदेशी मुद्रा 552.28 अरब डॉलर है। इसमें से 465.61 अरब डॉलर सिक्योरिटीज में निवेश है। 46.83 अरब डॉलर अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा है। 39.84 अरब डॉलर विदेशी कमर्शियल बैंकों में जमा है। रणनीति में क्या बदलाव दिख रहा: रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि RBI धीरे-धीरे अपनी रणनीति बदल रहा है। सिक्योरिटीज और विदेशी बैंकों में जमा राशि थोड़ी घटाकर, अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा बढ़ाई गई है। क्या है इसका मतलबविशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षा बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए RBI अपने रिजर्व को ज्यादा स्थिर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

आज से इस कोड के बिना नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर…. बुकिंग के नियमों में हुए कई बदलाव

नई दिल्ली। एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) को लेकर लोगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आज 1 मई से नियमों में कई बदलाव (Many changes Rules) हो गए हैं। जिसकी वजह से अब एलपीजी सिलेंडर बिना डॉक्यूमेंट के लेना और कठिन हो जाएगा। बता दें, इस बीच कॉमर्शियल गैस सिलेंडर (Commercial gas cylinder) की कीमतों में आज भारी इजाफा किया गया है। 1 मई से एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में हुआ बदलाव? (LPG Booking rules changed)अभी तक आप अपना एलपीजी बुकिंग पासबुक के जरिए भी सिलेंडर पा जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बिना ओटीपी के एक भी सिलेंडर नहीं मिल पाएगा। डिस्ट्रीब्यूटर्स DAC नंबर के बिना एलपीजी सिलेंडर नहीं दे पाएंगे। इस नियम को आज से और कड़ा कर दिया गया है। एलपीजी बुकिंग कितने दिन में? (LPG booking time)1 मई यानी आज से शहरी क्षेत्रों में 21 दिन की जगह 25 दिन पर एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग करवाई जा सकती है। वहीं, गांव में पहले से ही 45 दिन के अंतराल पर एलपीजी सिलेंडर बुक किया जा सकता है। सप्लाई को बेहतर बनाने और गलत उपयोग को रोकने के लिए सरकार ने यह नियम बनाए हैं। 98% बुकिंग हो रही है ऑनलाइनमौजूदा समय में 98% सिलेंडर की बुकिंग ऑनलाइन ही हो रही है। जबकि 94 प्रतिशत डिलीवरी कोड्स के जरिए हो रहा है। इससे कालाबाजारी पर नकेल कसी गई है। eKYC हुई एलपीजी सिलेंडर के लिए जरूरी (LPG booking ekyc details)अगर आपने अपने एलपीजी पासबुक का eKYC नहीं करवाया है तो ऐसी स्थिति में सिलेंडर नहीं मिलेगा। अब आधार आधारित eKYC करवाना जरूरी हो गया है। बता दें, जिन ग्राहकों ने eKYC नहीं करवाई है उन्हें एलपीजी सिलेंडर बुक करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 1 मई को बढ़ गए कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के रेट (LPG price today)आज दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का रेट 993 रुपये बढ़ गया है। जिसके बाद 19 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर का रेट 3071.50 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, कंपनियों ने घरेलू सिलेंडर की कीमतों में आज कोई भी इजाफा नहीं किया है। आखिरी बार घरेलू एलपीजी सिलेंडर का रेट मार्च में बढ़ाया गया था। उसके बाद से ही दाम स्थिर है। युद्ध के बाद एलपीजी की शुरू हुई किल्लत (LPG latest News)भारत अपनी एलपीजी जरूरत के लिए पूरी तरह से खाड़ी देशों पर निर्भर था। लेकिन युद्ध ने आपूर्ति पर बुरा असर डाला है। जिसकी वजह से सप्लाई लगभग रुक गई है। सरकार ने घरेलू कंपनियों को एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा है। इसके अलावा यूनाइटेड स्टेट से भी एलपीजी मंगवाया जा रहा है। हालांकि, भारत को इसके लिए और पैसे खर्च करने होंगे।

भोजशाला केस में मुस्लिम पक्ष की नई दलील… कहा- खिलजी के हमले में मंदिर तोड़ने के सबूत नहीं

इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) में गुरुवार को मुस्लिम पक्ष (Muslim side) ने दलील दी कि भोजशाला परिसर (Bhojshala Complex) में सरस्वती मंदिर (Saraswati Temple) होने और अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले में इसे गिरा कर मस्जिद बनाने का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है। याचिकाकर्ता ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने हाई कोर्ट में दावा किया है कि भोजशाला परमार राजवंश के राजा भोज की ओर से साल 1034 में स्थापित सरस्वती मंदिर है। इसे मालवा क्षेत्र पर अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले के दौरान 1305 में ढहाया गया था। संगठन ने यह दावा भी किया है कि विवादित परिसर में मस्जिद बनाने के लिए मंदिर के अवशेषों का पुनः उपयोग किया गया था। सुनवाई के दौरान धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने इंदौर पीठ के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के समक्ष विस्तृत दलीलें पेश कीं। वारसी ने विभिन्न इतिहासकारों और अभिलेखीय स्रोतों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि 14वीं सदी की शुरुआत में अलाउद्दीन खिलजी की फौज के हमले के दौरान धार में किसी सरस्वती मंदिर को तोड़े जाने का कोई भी दस्तावेजी सबूत मौजूद नहीं है। खिलजी की जीत दर्ज लेकिन मंदिर तोड़ने का जिक्र नहींमुस्लिम पक्ष के वकील ने वीडी महाजन, आरसी मजूमदार और अन्य देशी-विदेशी इतिहासकारों की पुस्तकों का हवाला देते हुए कहा कि खिलजी की फौज द्वारा 1305 के दौरान मालवा में जीत हासिल करना इतिहास में दर्ज है, लेकिन इनमें से कोई भी स्रोत इस सैन्य अभियान के दौरान किसी मंदिर को तोड़े जाने या किसी इमारत को मस्जिद में बदले जाने का उल्लेख नहीं करता। ब्रिटिश म्यूजियम में देवी अम्बिका की मूर्तिइतिहासकारों के अनुसार, 1305 में मालवा पर आक्रमण का नेतृत्व खिलजी के सेनापति और प्रशासक ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी ने किया था। वारसी ने 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री को भेजे कथित पत्र का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। ASI के अलग-अलग जवाबवारसी ने ASI की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए यह भी कहा कि इस विभाग ने भोजशाला की धार्मिक प्रकृति को लेकर अलग-अलग मामलों में अलग-अलग जवाब दिए हैं। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की 2019 में दायर जनहित याचिका पर एएसआई का जवाब, ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ और कुलदीप तिवारी की 2022 में अलग-अलग पेश दो जनहित याचिकाओं पर दिए गए जवाब से अलग है। अब ASI की वीडियोग्राफी पर अलग-अलग दलीलेंहाई कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 4 मई की तारीख तय की है। इस दिन मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से भोजशाला परिसर में एएसआई की वीडियोग्राफी के संबंध में दलीलें रखी जाएंगी। हाईकोर्ट इस स्मारक के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।

4 साल के उच्च स्तर पर पहुंचा क्रूड…. ईरान युद्ध चरम पर था तब भी इतने नहीं बढ़े थे दाम

तेहरान । ईरान युद्ध (Iran War) जब चरम पर था, तब क्रूड (Crude) ने इतनी बड़ी छलांग नहीं लगाई थी। अब जब बातचीत की कोशिशें दिख रही हैं और युद्ध की रफ्तार धीमी हुई है, तब ब्रेंट क्रूड (Brent crude) उछलकर चार साल के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह विरोधाभास नहीं है। तेल बाजार युद्ध की आवाज नहीं, आपूर्ति की सांस सुनता है। दरअसल, एक्सिओस की एक रिपोर्ट (Axios reports) आने के बाद बृहस्पतिवार को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 126.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो 9 मार्च, 2022 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बृहस्पतिवार को ईरान पर सैन्य हमलों की एक शृंखला की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जानी है। ऐसा इस उम्मीद में किया जा रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए वापस लौट आएगा। ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के इस रुख से संघर्ष और बढ़ सकता है, जिससे क्रूड आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आ सकती है।  बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के ब्रेंट क्रूड में गिरावट आई और कीमतें 3.5 फीसदी गिरकर 113.89 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। तेल ब्रोकर पीवीएम के तमास वर्गा ने कहा, क्रूड में यह गिरावट किसी खास घटना से जुड़ी नहीं लगती, बल्कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से बाजार में बढ़ी अस्थिरता को दर्शाती है। यह बस ट्रंप की दुनिया में ट्रेडिंग के अप्रत्याशित स्वभाव को संक्षेप में बताती है। डर ही नहीं बैरल भी कमबाजार में सिर्फ डर नहीं, असल में बैरल भी कम हैं। आईईए के आंकड़े बताते हैं, मार्च में वैश्विक तेल भंडार 8.5 करोड़ बैरल घटा है। खाड़ी के बाहर भंडार में 20.5 करोड़ बैरल की गिरावट आई। समुद्र में चल रहा तेल भी घटा है। ऑयल ऑन वाटर 10.7 करोड़ बैरल कम हुआ, क्योंकि होर्मुज के बंद होने से ट्रांजिट में मौजूद तेल 18.1 करोड़ बैरल घट गया। उबाल की असली वजह होर्मुजतेल में उबाल की असल वजह है होर्मुज। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, युद्ध से पहले होर्मुज से रोज 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइंड उत्पाद निकलते थे। अप्रैल के शुरू में यह घटकर सिर्फ 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। वैकल्पिक रास्तों से निर्यात जरूर बढ़कर 72 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा, लेकिन कुल निर्यात नुकसान अब भी 1.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन से ज्यादा है। केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया कहते हैं, यही वह आंकड़ा है, जिसने बाजार को बेचैन किया है। युद्ध रुक भी जाए, तो जहाज तुरंत नहीं चलेंगे। बीमा, रूट, बंदरगाह, लोडिंग और रिफाइनरी आपूर्ति को सामान्य होने में समय लगेगा। यही बात तेल के बाजार को परेशान कर रही है। आपूर्ति का प्रभावित होना भी बड़ी वजहअर्थवृक्ष फाइनेंशियल सर्विसेज के संस्थापक रविंद्र राव ने बताया, आपूर्ति प्रभावित होने से भी क्रूड में मजबूती दिख रही है। उनका कहना है कि ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौता नहीं करता, जब तक उस पर नाकेबंदी जारी रहेगी, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जब बाजार को पता है कि तेल अभी नहीं मिल रहा, तो जो कॉन्ट्रैक्ट आज डिलीवरी का है, वो सबसे ज्यादा महंगा हो जाता है। रिफाइनरी और ट्रेडर्स किसी भी दाम पर खरीदने को तैयार हो जाते हैं।

पांच राज्यों में चुनाव के बाद काउंटिंग की तैयारी…. केन्द्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा… QR आधारित फोटो ID होंगे जारी

नई दिल्ली। अभी हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections Five states) में मतों की गिनती के दिन यानी 4 मई को सभी मतगणना केंद्रों (Counting centres) पर चुनाव आयोग (Election Commission.) क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र (QR-Based Identity Cards) जारी करेगा ताकि किसी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश को रोका जा सके। चुनाव आयोग की यह अनूठी पहल है और पहली बार व्यापक पैमाने पर लागू किया जाएगा। पांच राज्यों की सभी विधानसभा क्षेत्रों के काउंटिंग सेंटर के अलावा यह व्यवस्था पांच राज्यों की सात असेंबली सीटों पर हुए उपचुनाव में मतगणना केंद्रों पर भी की जाएगी। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने गुरुवार को एक प्रेस नोट जारी कर घोषणा की कि काउंटिंग सेंटर्स पर सुरक्षा को मजबूत करने और अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए ECINET पर QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र प्रणाली शुरू की गई है। आयोग के अनुसार, “काउंटिंग सेंटर्स में किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश की संभावना को खत्म करने के लिए QR कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू किया गया है।” पिछले एक साल में 30 से अधिक पहलों का हिस्सायह प्रणाली 4 मई, 2026 को होने वाली मतगणना से लागू की जाएगी। यह असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभाओं के आम चुनावों के साथ-साथ पांच राज्यों के सात विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के लिए होगी। ECI ने कहा कि इस प्रणाली का विस्तार भविष्य में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी आम चुनावों और उपचुनावों तक भी किया जाएगा। आयोग ने कहा कि यह कदम पिछले एक साल में की गई 30 से अधिक पहलों का हिस्सा है, जिसमें बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) के लिए मानकीकृत QR कोड-आधारित पहचान पत्र शामिल हैं। मतगणना केद्रों पर तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्थाआयोग के मुताबिक मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी। पहले और दूसरे स्तर पर, संबंधित निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी किए गए फोटो पहचान पत्रों की व्यक्तिगत रूप से जांच की जाएगी। मतगणना कक्ष के पास स्थित तीसरे और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरे में, क्यूआर कोड की सफल ‘स्कैनिंग’ के बाद ही कर्मी को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। क्यूआर आधारित पहचान पत्र मतगणना केंद्रों के भीतर प्रवेश करने की अनुमति प्राप्त सभी श्रेणियों के अधिकृत कर्मियों को जारी किए जाएंगे, जिनमें चुनाव अधिकारी, सहायक चुनाव अधिकारी, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट और मतगणना एजेंट शामिल हैं। केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही QR-आधारित पहचान पत्रआयोग ने कहा है कि QR-आधारित पहचान पत्र केवल अधिकृत व्यक्तियों को जारी किए जाएंगे। इनमें रिटर्निंग ऑफिसर, सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और आयोग द्वारा अनुमति प्राप्त अन्य व्यक्ति शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि मौजूदा निर्देशों के अनुसार उसके द्वारा जारी किए गए प्राधिकार पत्रों के आधार पर मीडियाकर्मियों को प्रवेश की अनुमति जारी रहेगी। लोकसभा चुनाव-2024 में उस समय विवाद पैदा हो गया था, जब मुंबई उत्तर पश्चिम लोकसभा सीट पर मतगणना के दौरान एक उम्मीदवार के सहयोगी द्वारा एक ”अधिकृत व्यक्ति” के मोबाइल फोन का ”अनाधिकृत रूप से” उपयोग किया गया था।

KUNO CHEETAH MOVEMENT: खेतों के बीच आराम करता दिखा चीता KGP-1, वीडियो वायरल

KUNO CHEETAH MOVEMENT

Highlights खेतों में आराम करता दिखा चीता KGP-1 तिघरा से घाटीगांव तक बदलता मूवमेंट ग्रामीणों ने बनाया वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल वन विभाग की कड़ी निगरानी, ट्रैकिंग जारी अब तक किसी पर हमला नहीं, फिर भी अलर्ट जारी   KUNO CHEETAH MOVEMENT: ग्वालियर। शहर में इन दिनों एक खास मेहमान ने हलचल मचा रखी है। कूनो नेशनल पार्क से निकला चर्चित चीता KGP-1 एक बार फिर घाटीगांव क्षेत्र में नजर आया है। इस बार उसे ऊआ खेड़ा गांव के खेतों में आराम करते देखा गया। जिसके बाद ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’: सिगरेट फॉयल पर लिखा गया गीत जिसने नेहरू की आंखें भी नम कर दीं तिघरा से घाटीगांव तक बदलता मूवमेंट पिछले कुछ दिनों में चीते का मूवमेंट तेजी से बदलता रहा है। वह पहले तिघरा डैम के लखनपुरा जंगलों में घूमता रहा और अब घाटीगांव के खेतों तक पहुंच गया है। जानकारी के अनुसार, करीब 25 दिन पहले यह चीता कूनो से निकलकर आरोन और सिमरिया होते हुए ग्वालियर पहुंचा था। इससे पहले भी इसे राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और आसपास के इलाकों में देखा जा चुका है। AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप वन विभाग ने जारी किया अलर्ट ग्वालियर वन विभाग और कूनो की टीम इस चीते की लगातार निगरानी कर रही है। उसके गले में लगे ट्रैकिंग कॉलर के जरिए उसकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। लू और थकान से बचने के लिए आयुर्वेद ने सुझाया गर्मियों का सबसे बेहतर डाइट प्लान। अब तक कोई हमला नहीं अब तक राहत की बात यह है कि चीते ने किसी भी ग्रामीण या मवेशी पर हमला नहीं किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में पर्याप्त शिकार होने के कारण वह गांवों की ओर आक्रामक रुख नहीं कर रहा। फिर भी वन विभाग ने आसपास के गांवों में अलर्ट जारी किया है और लोगों से अपील की है कि वे अकेले खेतों या जंगलों में न जाएं।  

‘ऐ मेरे वतन के लोगों’: सिगरेट फॉयल पर लिखा गया गीत जिसने नेहरू की आंखें भी नम कर दीं

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा और देशभक्ति गीतों के इतिहास में Aye Mere Watan Ke Logon का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि देश के शहीदों को दी गई एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है, जिसने करोड़ों लोगों की आंखें नम कर दीं और तत्कालीन प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru को भी भावुक कर दिया था। यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए जवानों की स्मृति में लिखा गया था। इसके गीतकार Kavi Pradeep ने इसे बेहद कम समय में तैयार किया था। कहा जाता है कि जब यह रचना उनके मन में आई, तब उनके पास कागज नहीं था। उन्होंने मुंबई के माहीम बीच पर चलते-चलते एक अनोखे तरीके से इसे लिखा किसी राहगीर से पेन मांगकर सिगरेट की डिब्बी के एल्यूमिनियम फॉयल पर इसके बोल उतारे। शुरुआत में इस गीत के लिए 100 से ज्यादा पंक्तियां लिखी गई थीं, लेकिन अंतिम संस्करण में सिर्फ चुनिंदा पंक्तियों को ही शामिल किया गया। यही वजह है कि इसके हर शब्द में गहरी भावनाएं और देशभक्ति का जज्बा महसूस होता है। इस गीत को स्वर दिया था महान गायिका Lata Mangeshkar ने, जिनकी आवाज ने इसे अमर बना दिया। इस गीत की पहली पसंद वास्तव में Asha Bhosle थीं और उन्होंने इसकी रिहर्सल भी की थी, लेकिन बाद में लता मंगेशकर ने इसे गाने की इच्छा जताई, जिसे स्वीकार कर लिया गया। जब यह गीत पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया गया, तो इसका प्रभाव अविस्मरणीय था। पंडित नेहरू मंच पर मौजूद थे और गीत सुनते ही उनकी आंखें नम हो गईं। वहां मौजूद हर व्यक्ति भावनाओं से भर उठा और पूरा माहौल देशभक्ति की भावना से सराबोर हो गया। आज भी यह गीत हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर गूंजता है और शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। इसकी लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि सच्ची भावनाओं से लिखा गया गीत समय की सीमाओं से परे जाकर इतिहास बन जाता है।

GWALIOR WOMAN RAPED: शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, फिर पति को भेजे अश्लील फोटो-वीडियो; रिश्ता टूटा

GWALIOR WOMAN RAPED

HIGHLIGHTS : शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म शादी के बाद भी ब्लैकमेल कर शोषण पति को भेजे अश्लील फोटो-वीडियो पति ने छोड़ा, आरोपी फिर मुकरा पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को पकड़ा   GWALIOR WOMAN RAPED: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में 26 वर्षीय युवती से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता ने महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई कि साल 2025 में उसकी दोस्ती अपनी सहेली के भाई मुश्फिक हुसैन से हुई थी। आरोपी ने प्यार का इजहार कर उसे अपने जाल में फंसाया और शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह लगातार युवती का शोषण करता रहा और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा। GT vs RCB: “स्कोर कम रह गया”, हार के बाद बोले रजत पाटीदार-मिडिल ऑर्डर की नाकामी बनी वजह शादी के बाद भी जारी रहा दबाव और ब्लैकमेल इसी दौरान युवती के परिवार ने उसकी शादी कहीं और कर दी, लेकिन आरोपी ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। शादी के बाद भी वह उसे मिलने के लिए मजबूर करता रहा और पुराने रिश्ते को उजागर करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता रहा। जब युवती ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसके पति को दोनों के संबंधों के बारे में बता दिया और अश्लील फोटो व वीडियो भेज दिए। होटल में शर्मनाक हरकत: महिला खिलाड़ियों का वीडियो बनाने पर श्रीलंकाई U-19 क्रिकेटर गिरफ्तार सच्चाई सामने आते ही टूटा वैवाहिक जीवन आरोपी द्वारा भेजे गए फोटो और वीडियो देखने के बाद युवती का वैवाहिक जीवन टूट गया। उसके पति ने उसे छोड़ दिया, जिसके बाद वह मायके में रहने लगी। इस मुश्किल समय में आरोपी ने फिर से उससे संपर्क किया और शादी का वादा कर दोबारा संबंध बनाए, लेकिन बाद में वह अपने वादे से मुकर गया। इमरान खान ने मांगी मानवीय आधार पर रिहाई, एकांत कारावास और आंखों की गंभीर समस्या को बताई वजह पुलिस ने दर्ज किया मामला लगातार शोषण और धमकियों से परेशान होकर युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। महिला थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और धमकी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।  

AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता से जुड़ी कंपनी पर पंजाब में बड़ी कार्रवाई हुई है। उनकी कंपनी ट्राइडेंट ग्रुप की धौला स्थित फैक्ट्री पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने छापेमारी की। जानकारी के अनुसार, दोपहर में प्रदूषण विभाग की टीम नौ वाहनों के काफिले के साथ फैक्ट्री परिसर में पहुंची। टीम में लगभग 10 अधिकारी शामिल थे, जो फैक्ट्री के अंदर मौजूद रहकर प्लांट और जरूरी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं। यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई, जिससे फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रूटीन निरीक्षण है या किसी विशेष शिकायत के आधार पर की गई जांच। इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। इसे राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है। उधर, राजिंदर गुप्ता के भाजपा में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। चंडीगढ़ में उनके आवास की दीवारों पर “गद्दार” तक लिखा गया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर सुरक्षा बढ़ा दी थी। राजिंदर गुप्ता पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों में गिने जाते हैं और पद्मश्री से सम्मानित भी रह चुके हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

GT vs RCB: “स्कोर कम रह गया”, हार के बाद बोले रजत पाटीदार-मिडिल ऑर्डर की नाकामी बनी वजह

नई दिल्ली। Indian Premier League 2026 में अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए मुकाबले में Gujarat Titans ने Royal Challengers Bengaluru को 4 विकेट से हराकर एक और महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस हार के बाद RCB कप्तान Rajat Patidar ने साफ तौर पर माना कि उनकी टीम 20-25 रन कम बना पाई, जिसका खामियाजा उन्हें हार के रूप में भुगतना पड़ा। मैच के बाद रजत पाटीदार ने कहा कि शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बाद टीम दबाव में आ गई और मिडिल ऑर्डर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सका। उन्होंने स्वीकार किया कि पिच पर हालात सामान्य थे, लेकिन साझेदारियों की कमी ने टीम की स्थिति कमजोर कर दी। गुजरात टाइटंस की ओर से गेंदबाजी में शानदार अनुशासन देखने को मिला। शुरुआती ओवरों में ही दबाव बनाकर उन्होंने RCB के टॉप ऑर्डर को झकझोर दिया। दूसरी ओर, RCB की बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी साफ दिखाई दी, जिससे बड़ा स्कोर खड़ा नहीं हो सका। रजत पाटीदार ने यह भी कहा कि इस तरह के मैचों में मिडिल ओवर सबसे अहम होते हैं, लेकिन उनकी टीम उन ओवरों में रन गति को बढ़ाने में असफल रही। उन्होंने माना कि अगर 15-20 रन अतिरिक्त जुड़ जाते, तो परिणाम अलग हो सकता था। गुजरात टाइटंस की ओर से कप्तान Shubman Gill ने टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और रणनीतिक रूप से पारी को संभाला। उनकी कप्तानी और बल्लेबाजों के संतुलित प्रदर्शन ने टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। RCB के लिए यह हार अंकतालिका के लिहाज से बड़ी चिंता का विषय नहीं बनी, लेकिन टीम प्रबंधन के लिए यह एक चेतावनी जरूर है कि मिडिल ऑर्डर को जल्द सुधार की जरूरत है। रजत पाटीदार ने आगे कहा कि टीम में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन दबाव की स्थिति में सही निर्णय और साझेदारी बनाना जरूरी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले मुकाबलों में टीम वापसी करेगी और गलतियों से सीख लेगी। कुल मिलाकर यह मुकाबला RCB के लिए एक सीख की तरह रहा, जहां छोटे अंतर ने बड़े परिणाम को बदल दिया। वहीं गुजरात टाइटंस ने एक बार फिर साबित किया कि घरेलू परिस्थितियों में वे किसी भी टीम को कड़ी टक्कर देने में सक्षम हैं।