Harbhajan Singh की सुरक्षा पर HC सख्त: कहा- परिवार को खरोंच तक नहीं आनी चाहिए

नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर Harbhajan Singh की सुरक्षा को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि हरभजन सिंह और उनके परिवार को किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। यह आदेश उनकी सुरक्षा बहाल करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। दरअसल, 24 अप्रैल को हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़कर Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थामा। इसके तुरंत बाद पंजाब पुलिस ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली थी। हालांकि, बाद में केंद्र सरकार ने जालंधर स्थित उनके घर के बाहर CRPF की तैनाती कर दी। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पर्याप्त नहीं है और परिवार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। याचिका में हरभजन सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा बिना किसी नोटिस और खतरे के ताजा आकलन के हटा दी गई, जिसे उन्होंने मनमाना निर्णय बताया। इसके बाद कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 12 मई को होगी। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि हरभजन सिंह और उनके परिवार के किसी भी सदस्य को शारीरिक नुकसान न पहुंचे। सुरक्षा हटने के बाद उनके घर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी हुआ। AAP कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की और दीवारों पर ‘गद्दार’ लिखा। याचिका में यह भी कहा गया कि 25 और 26 अप्रैल को उनके घर पर भीड़ ने हमला किया, लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उस समय हरभजन सिंह मुंबई में थे और उन्हें इस घटना की जानकारी फोन के जरिए मिली। याचिका में यह भी कहा गया कि सुरक्षा हटाने के बाद पुलिस को जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार अब पंजाब सरकार को हरभजन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। इस मामले ने सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक बदलाव के बीच संतुलन के सवाल को भी उजागर किया है। हरभजन सिंह की याचिका और कोर्ट के आदेश ने साफ कर दिया कि किसी भी नागरिक, खासकर सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।
सर्जरी के निशानों के साथ आत्मविश्वास की नई परिभाषा बनीं राजश्री देशपांडे, कहा- जख्म नहीं, ये मेरी जीत हैं

नई दिल्ली। जीवन कई बार ऐसे मोड़ पर ले आता है, जहां इंसान को अपनी सबसे बड़ी लड़ाई खुद से और अपने हालात से लड़नी पड़ती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है अभिनेत्री राजश्री देशपांडे की, जिन्होंने ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए न सिर्फ उसे मात दी, बल्कि अपने अनुभव को खुलकर साझा कर हजारों लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण जगा दी है। हाल ही में उन्होंने अपने कुछ ऐसे चित्र साझा किए, जिनमें उनके शरीर पर सर्जरी के निशान साफ नजर आ रहे थे। आमतौर पर लोग ऐसे निशानों को छुपाने की कोशिश करते हैं, लेकिन राजश्री ने इन्हें अपनी पहचान और अपनी जीत का हिस्सा मानते हुए पूरी ईमानदारी के साथ दुनिया के सामने रखा। उनके इस कदम ने लोगों के बीच एक गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा कर दी। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि उनके शरीर पर बने ये निशान उनकी कहानी को बयां करते हैं। हर निशान उस संघर्ष की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने दर्द, डर और अनिश्चितता का सामना करते हुए खुद को मजबूत बनाए रखा। उन्होंने यह भी कहा कि यह बीमारी उनके शरीर तक सीमित रही, लेकिन उनकी आत्मा और हिम्मत को कभी कमजोर नहीं कर पाई। राजश्री ने अपने संदेश में महिलाओं को खास तौर पर संबोधित करते हुए उन्हें आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कोई भी जख्म किसी की खूबसूरती को कम नहीं करता, बल्कि वह उस साहस की पहचान बन जाता है, जिसने कठिन समय में भी हार नहीं मानी। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में असली ताकत बाहरी रूप से नहीं, बल्कि अंदर की सोच और आत्मबल से आती है। अपने वर्तमान जीवन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आज वह पूरी तरह से अपने काम और जीवन को नए नजरिए से देख रही हैं। उनके अंदर एक नई ऊर्जा है, जो उन्हें हर दिन आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि वह अब अपने अनुभवों को कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत मानती हैं और उसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। उनकी यह भावुक और साहसी पोस्ट सामने आने के बाद लोगों में चर्चा का विषय बन गई। कई लोगों ने इसे साहस और आत्मस्वीकृति का बेहतरीन उदाहरण बताया। खासकर उन लोगों के लिए यह कहानी बेहद प्रेरणादायक बन गई है जो किसी गंभीर बीमारी या जीवन की कठिन परिस्थिति से गुजर रहे हैं। राजश्री देशपांडे का यह कदम केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश है कि जीवन में आने वाली चुनौतियाँ हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि मजबूत बनाने के लिए आती हैं। उनका यह आत्मविश्वास भरा संदेश यह साबित करता है कि जब इंसान अपने दर्द को स्वीकार कर लेता है, तभी वह असली जीत की ओर बढ़ता है।
GWALIOR HIGHCOURT: अवमानना पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख,‘एडवाइजरी’ पर लगी फटकार; अध्यक्ष को चेतावनी

HIGHLIGHTS : न्यायिक आदेश पर ‘एडवाइजरी’ जारी करना पड़ा भारी कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किया मामला अध्यक्ष ने मांगी बिना शर्त माफी, पत्र लिया वापस भविष्य के लिए मुख्य सचिव को दिए निर्देश दोबारा गलती पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी GWALIOR HIGHCOURT: ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ की एकल पीठ ने राजस्व मंडल अध्यक्ष के आचरण पर सख्त नाराजगी जताई है। मामला एक न्यायिक आदेश के खिलाफ अपील के लिए ‘निर्देश’ जारी करने से जुड़ा था, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए अवमानना की श्रेणी में माना। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई। ईरान पर फिर वार की आहट! इजरायल सतर्क, ट्रंप–नेतन्याहू रणनीति से मिडिल ईस्ट में बढ़ी हलचल माफी के बाद खत्म हुई अवमानना कार्यवाही गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अध्यक्ष ने बिना शर्त माफी मांगते हुए विवादित पत्र को वापस ले लिया। कोर्ट ने माफी स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह राहत केवल चेतावनी के साथ दी जा रही है। अदालत ने कहा कि भविष्य में इस तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 1 मई 2026 से बड़े बदलाव: गैस सिलेंडर से ATM तक बदले नियम, आम जनता की जेब पर सीधा असर उच्च पद पर आचरण को लेकर सख्त टिप्पणी कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उच्च और अर्ध-न्यायिक पदों पर बैठे अधिकारियों से न्यायिक गरिमा और स्वतंत्रता बनाए रखने की अपेक्षा होती है। किसी भी न्यायिक आदेश पर ‘एडवाइजरी’ जारी करना पद की मर्यादा के खिलाफ है। अदालत ने इस तरह के व्यवहार को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के रूप में देखा। Labour Day 2026: क्या होता है न्यूनतम वेतन? जानिए आपके राज्य में कितनी है मजदूरी और नए नियमों का असर मुख्य सचिव को दिए गए सख्त निर्देश इस मामले को नजीर मानते हुए अदालत ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि राजस्व मंडल अध्यक्ष सहित सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो और न्यायिक व्यवस्था की गरिमा बनी रहे। मई का OTT कैलेंडर: 10 बड़ी फिल्में और वेब सीरीज आ रहीं रिलीज, एंटरटेनमेंट का फुल डोज तय ‘सलाहकार की भूमिका’ पर कोर्ट की दो टूक चेतावनी हाई कोर्ट ने माफी को ‘अनिच्छा के साथ स्वीकार’ करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि कोई भी अधिकारी न्यायिक या अर्ध-न्यायिक कार्य करते समय ‘सलाहकार की भूमिका’ नहीं निभा सकता। कोर्ट ने चेताया कि यदि भविष्य में ऐसा आचरण दोहराया गया, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अदृश्य खतरा, अचूक वार! फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन से हिज्बुल्लाह का नया हमला, इजरायल की सुरक्षा चुनौती में इजाफा

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब तकनीकी युद्ध के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। Hezbollah ने ऐसे फाइबर-ऑप्टिक गाइडेड ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है, जो पारंपरिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से लगभग अछूते रहते हैं। इस नई तकनीक ने Israel की सुरक्षा प्रणाली के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब युद्ध का नया चेहरा सामने आया है—फाइबर-ऑप्टिक नियंत्रित ड्रोन। ये ड्रोन आकार में छोटे, हल्के और बेहद तेज होते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पतली फाइबर-ऑप्टिक केबल के जरिए सीधे ऑपरेटर से जुड़े रहते हैं, जिससे इन पर रेडियो सिग्नल आधारित जैमिंग का कोई असर नहीं पड़ता। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ये ड्रोन बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचकर हमला करने में सक्षम होते हैं। लंदन स्थित Royal United Services Institute के विशेषज्ञ Robert Tolst का कहना है कि यदि ऑपरेटर को सही प्रशिक्षण मिला हो, तो यह तकनीक अत्यंत घातक साबित हो सकती है। इजरायली अधिकारियों का मानना है कि हिज्बुल्लाह ने यह रणनीति इसलिए अपनाई है क्योंकि इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम पारंपरिक रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ प्रभावी है। ऐसे में फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन उस सुरक्षा कवच को भेदने की नई कोशिश हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन ड्रोन को स्थानीय स्तर पर भी तैयार किया जा सकता है—साधारण कमर्शियल ड्रोन, सीमित विस्फोटक सामग्री और पारदर्शी फाइबर-ऑप्टिक तार के जरिए। पूर्व इजरायली वायु रक्षा प्रमुख Ran Kochav ने चेतावनी दी है कि इन ड्रोन को पहचानना और मार गिराना बेहद कठिन है। उनका कहना है कि ये छोटे आकार, तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ान के कारण पारंपरिक डिफेंस सिस्टम को चुनौती देते हैं। बचाव की सीमित संभावनाएंविशेषज्ञों के अनुसार, इन ड्रोन से निपटने के केवल दो प्रमुख तरीके हैं—या तो इन्हें उड़ान के दौरान ही मार गिराया जाए या फिर इन्हें नियंत्रित करने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबल को काट दिया जाए। हालांकि, दोनों ही विकल्प व्यावहारिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि केबल पतली और लगभग अदृश्य होती है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए इजरायली सेना ने अपने सैन्य वाहनों पर सुरक्षात्मक जाल और विशेष कवच लगाने शुरू कर दिए हैं। साथ ही, उन्नत सेंसर, ध्वनि पहचान प्रणाली और अन्य तकनीकों के विकास पर भी काम तेज किया गया है। यूक्रेन युद्ध से मिली तकनीक:विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का तेजी से विकास Russia-Ukraine War के दौरान हुआ है, जहां रूस और यूक्रेन दोनों ही ड्रोन तकनीक में लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं। कुछ मामलों में 50 किलोमीटर तक लंबी फाइबर-ऑप्टिक केबल वाले ड्रोन भी देखे गए हैं, जो इनकी क्षमता को और बढ़ाते हैं। हिज्बुल्लाह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ये फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन आधुनिक युद्ध की बदलती रणनीति का प्रतीक हैं, जहां तकनीक के साथ खतरा और अधिक जटिल और अदृश्य होता जा रहा है।अब बड़ा सवाल यही है—क्या इजरायल इस नई चुनौती का समय रहते प्रभावी समाधान खोज पाएगा, या यह तकनीक आने वाले समय में युद्ध का नया मानक बन जाएगी?
ब्लैक ड्रेस में Sara Ali Khan का ग्लैमरस जलवा, ‘Pati Patni Aur Woh Do’ की रिलीज से पहले इंटरनेट पर मचाया धमाल

नई दिल्ली। बॉलीवुड की बेहतरीन अदाकारा Sara Ali Khan इस समय अपनी आगामी फिल्म Pati Patni Aur Woh Do और सोशल मीडिया पर धमाल मचाने के कारण सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक्ट्रेस ने ब्लैक ड्रेस में अपने ग्लैमरस लुक की झलक सोशल मीडिया पर साझा की, जिसे फैंस ने खूब पसंद किया। उनकी ये तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं और हर फोटो में उनका स्टाइल, कॉन्फिडेंस और फैशन सेंस साफ झलक रहा है। Sara Ali Khan का यह लुक न केवल उनके फैंस बल्कि बॉलीवुड के फैशन प्रेमियों के लिए भी प्रेरणा बन गया है। इस ब्लैक ड्रेस में उनका अंदाज बेहद क्लासी और एलिगेंट लग रहा था। तस्वीरों में एक्ट्रेस का मेकअप और बालों की स्टाइल भी बेहद परफेक्ट दिखाई दी, जिसने उनके पूरे लुक को और भी निखार दिया। सोशल मीडिया पर उनके फैंस ने कमेंट कर उनकी तारीफों के पुल बांधे। फिल्म Pati Patni Aur Woh Do के पोस्टर और टीजर रिलीज होने के बाद फैंस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म में Sara Ali Khan के साथ आयुष्मान खुराना, Rakul Preet Singh और Wamiqa Gabbi भी नजर आएंगे। फिल्म के रिलीज से पहले ही एक्ट्रेस ने अपने ग्लैमरस अंदाज से फैंस का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। Sara Ali Khan ने हमेशा अपने फैशन और स्टाइल के जरिए सबका ध्यान खींचा है। चाहे रेड कार्पेट इवेंट हो या सोशल मीडिया पर फोटोशूट, एक्ट्रेस ने अपनी छवि को हमेशा मजबूत रखा है। इस बार भी ब्लैक आउटफिट में उनका स्टाइल ऐसा रहा कि इंटरनेट पर उनके लुक की तारीफों के ढेर लगे। एक्ट्रेस की ये तस्वीरें इस बात का सबूत हैं कि Sara Ali Khan सिर्फ अभिनय में ही नहीं बल्कि फैशन और स्टाइल में भी एक स्टाइल आइकॉन हैं। उनके इस ग्लैमरस अवतार ने सोशल मीडिया का पारा हाई कर दिया है। अब फैंस फिल्म के साथ-साथ उनके फैशन लुक का भी इंतजार कर रहे हैं। इस फिल्म में Sara Ali Khan की अदाकारी और उनके ऑन-स्क्रीन कैमेस्ट्री को देखने के लिए लोग काफी उत्साहित हैं। वहीं सोशल मीडिया पर उनका यह लुक पार्टी और इवेंट्स के लिए भी परफेक्ट इंस्पिरेशन साबित हो सकता है। कुल मिलाकर Sara Ali Khan ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह अपने अभिनय के साथ-साथ अपने फैशन सेंस से भी लोगों के दिलों पर राज कर सकती हैं।
गैस कीमतों में बड़ा बदलाव, व्यापारियों की लागत बढ़ी, आम उपभोक्ताओं को राहत बरकरार

नई दिल्ली। एलपीजी कीमतों में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने व्यावसायिक क्षेत्र की लागत को सीधे प्रभावित किया है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 993 रुपए की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद राजधानी सहित देश के कई हिस्सों में इसकी कीमत 3,071.5 रुपए के स्तर तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और कच्चे तेल तथा गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग जैसे व्यवसायों पर पड़ने की संभावना है, जहां रोजाना बड़ी मात्रा में एलपीजी का उपयोग होता है। लागत बढ़ने के कारण इन क्षेत्रों में संचालन खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष असर सेवाओं और उत्पादों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी एक अतिरिक्त आर्थिक दबाव के रूप में सामने आई है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर पहले की तरह ही पुराने दामों पर उपलब्ध रहेंगे। इससे करोड़ों परिवारों को महंगाई के इस दौर में कुछ राहत मिली है और घरेलू बजट पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। पिछले कुछ महीनों के आंकड़े देखें तो यह स्पष्ट होता है कि कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में यह लगातार तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले भी दो बार कीमतों में इजाफा हो चुका है, जिससे व्यावसायिक क्षेत्र पहले से ही दबाव में चल रहा था। लगातार बढ़ती लागत ने कारोबारियों के लिए चुनौतियां और अधिक बढ़ा दी हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मुनाफा पहले से ही सीमित रहता है। दूसरी ओर, ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के प्रयास भी जारी हैं। पेट्रोल, डीजल और अन्य प्रमुख ईंधनों की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, ताकि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। इसके साथ ही सरकार और संबंधित व्यवस्था यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि घरेलू ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहें। यह स्थिति दो अलग-अलग प्रभाव दिखाती है, जहां एक ओर व्यापारिक क्षेत्र पर लागत का दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार की दिशा ही यह तय करेगी कि एलपीजी की कीमतों में आगे क्या रुझान देखने को मिलेगा।
ईरान पर फिर वार की आहट! इजरायल सतर्क, ट्रंप–नेतन्याहू रणनीति से मिडिल ईस्ट में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। Israel और Iran के बीच बढ़ती तल्खी ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर वह ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है।इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने कहा है कि उनके देश को ईरान के खिलाफ “फिर से सैन्य कार्रवाई” करनी पड़ सकती है। उनका तर्क है कि यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि ईरान भविष्य में इजरायल, अमेरिका और सहयोगी देशों के लिए खतरा न बन सके। काट्ज ने यह भी संकेत दिया कि इस रणनीति पर Donald Trump और Benjamin Netanyahu के साथ समन्वय में काम हो रहा है। इससे साफ है कि यह केवल एक देश की रणनीति नहीं, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का हिस्सा हो सकता है।इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को “बहुत जल्द समझदार” बनना होगा और गैर-परमाणु समझौते की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अब इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के मूड में है। लेबनान सीमा पर बढ़ा तनावदूसरी ओर, दक्षिण लेबनान में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। Israel Defense Forces ने स्पष्ट किया है कि Hezbollah के साथ जमीनी स्तर पर कोई युद्धविराम नहीं है।आईडीएफ प्रमुख Eyal Zamir ने सैनिकों को निर्देश दिए हैं कि वे ऑपरेशन जारी रखें और उत्तरी इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जब तक खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक सुरक्षा बफर जोन नहीं हटाया जाएगा। हालांकि, अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू है, लेकिन सीमा पर झड़पें, ड्रोन हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार जारी हैं। इजरायली सेना ने हाल ही में हिज्बुल्लाह के एक रॉकेट लॉन्चर को नष्ट करने और दो ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां और सख्त बयानबाजी इस बात का संकेत दे रही हैं कि मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ सकते हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यही हैक्या इजरायल ईरान पर फिर हमला करेगा?और यदि ऐसा होता है, तो क्या यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है?
1 मई 2026 से बड़े बदलाव: गैस सिलेंडर से ATM तक बदले नियम, आम जनता की जेब पर सीधा असर

नई दिल्ली। 1 मई 2026 से देश में कई ऐसे नए नियम लागू हुए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और उनके खर्च पर पड़ने वाला है। LPG सिलेंडर की कीमतों से लेकर ATM ट्रांजैक्शन और बैंकिंग चार्ज तक कई क्षेत्रों में बदलाव किए गए हैं। सरकार और वित्तीय संस्थानों के इन फैसलों का उद्देश्य सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है, लेकिन इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है। 1. LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलावहर महीने की तरह इस बार भी LPG सिलेंडर के दामों में संशोधन किया गया है। इससे घरेलू और व्यावसायिक दोनों उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है। 2. गैस डिलीवरी में OTP अनिवार्यअब गैस सिलेंडर डिलीवरी के समय OTP देना जरूरी कर दिया गया है। इससे फर्जी डिलीवरी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाई जाएगी और सिस्टम ज्यादा सुरक्षित बनेगा। 3. सिलेंडर बुकिंग नियम सख्तअब एक सिलेंडर बुक करने के तुरंत बाद दूसरा सिलेंडर बुक नहीं किया जा सकेगा। दोनों बुकिंग के बीच एक निश्चित समय अंतराल रखना अनिवार्य होगा। 4. ATM ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़ाफ्री ट्रांजैक्शन लिमिट खत्म होने के बाद अब ATM से पैसे निकालने पर अधिक शुल्क देना होगा। इससे बार-बार कैश निकालने वाले ग्राहकों का खर्च बढ़ सकता है। 5. बैंकिंग सेवाओं में बदलावकुछ बैंकों ने मिनिमम बैलेंस, सर्विस चार्ज और अन्य बैंकिंग फीस में संशोधन किया है। इसका असर सीधे ग्राहकों के खाते के बैलेंस पर दिखाई देगा। 6. CNG और PNG की कीमतों में बदलावCNG और PNG की कीमतों में मासिक संशोधन किया गया है, जिससे परिवहन और घरेलू गैस खर्च में बढ़ोतरी की संभावना है। 7. क्रेडिट कार्ड नियमों में बदलावक्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए लेट पेमेंट चार्ज और अन्य फीस में बदलाव किया गया है। समय पर भुगतान न करने पर अब ज्यादा जुर्माना देना पड़ सकता है। 1 मई 2026 से लागू ये बदलाव आम लोगों के मासिक बजट पर सीधा असर डालने वाले हैं। गैस, बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी के चलते उपभोक्ताओं को अब पहले से ज्यादा सतर्क और योजनाबद्ध वित्तीय प्रबंधन की जरूरत होगी।
Labour Day 2026: क्या होता है न्यूनतम वेतन? जानिए आपके राज्य में कितनी है मजदूरी और नए नियमों का असर

नई दिल्ली। Labour Day 2026 के अवसर पर देश में मजदूरों के अधिकारों और वेतन व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा सामने आई है। सरकार द्वारा लागू किए गए Code on Wages 2019 के बाद न्यूनतम वेतन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और संगठित बनाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर श्रमिक को उसकी मेहनत का उचित और सम्मानजनक मूल्य मिले। आज न्यूनतम वेतन केवल जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान का आधार बन चुका है। क्या होता है न्यूनतम वेतन?न्यूनतम वेतन वह कानूनी रूप से तय की गई राशि है, जो किसी भी कर्मचारी को उसकी सेवाओं के बदले देना अनिवार्य होता है। इसका मुख्य उद्देश्य मजदूरों को शोषण से बचाना और उन्हें एक निश्चित आय सुरक्षा प्रदान करना है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि कोई भी श्रमिक अपनी बुनियादी जरूरतों से वंचित न रहे। भारत में वेतन तय करने का सिस्टमदेश में न्यूनतम वेतन तीन स्तरों पर तय किया जाता है- 1. नेशनल फ्लोर लेवलयह पूरे देश के लिए न्यूनतम वेतन की आधार सीमा तय करता है। 2. केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector)रेलवे, खनन और सार्वजनिक उपक्रमों जैसे क्षेत्रों में केंद्र सरकार वेतन तय करती है। 3. राज्य स्तर (State Level)हर राज्य अपने जीवनयापन खर्च और आर्थिक स्थिति के अनुसार मजदूरी निर्धारित करता है। 2026 में राज्यवार न्यूनतम वेतन (अनुमानित आंकड़े)दिल्ली: अकुशल ₹18,456 | कुशल ₹22,411हरियाणा: अकुशल ₹15,221 | कुशल ₹18,501बिहार: अकुशल ₹11,336पश्चिम बंगाल: अकुशल ₹8,840इन आंकड़ों से साफ है कि महानगरों में जीवनयापन की लागत अधिक होने के कारण वेतन भी ज्यादा तय किया जाता है। केंद्र सरकार के क्षेत्र में वेतनकेंद्र सरकार के अधीन क्षेत्रों में मजदूरी अपेक्षाकृत अधिक रखी गई है- अकुशल श्रमिक: लगभग ₹20,358कुशल श्रमिक: लगभग ₹24,800 वेतन संरचना में बड़ा बदलावनए नियमों के अनुसार अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) उसकी कुल सैलरी का कम से कम 50% होना जरूरी है। इस बदलाव से कर्मचारियों को भविष्य में PF और ग्रेच्युटी जैसे लाभों में भी बढ़ोतरी मिलेगी। नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाईसरकार ने न्यूनतम वेतन कानून के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान किया है— पहली गलती पर ₹50,000 तक जुर्मानादोबारा उल्लंघन पर ₹10 लाख तक जुर्माना और जेल की सजा Labour Day 2026 पर लागू ये बदलाव देश के श्रमिक वर्ग के लिए एक सकारात्मक कदम हैं। इससे न केवल उनकी आय में सुधार होगा, बल्कि उन्हें आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी मिलेगा। न्यूनतम वेतन व्यवस्था अब अधिक पारदर्शी और मजबूत होती जा रही है, जो भारत के श्रम बाजार को नई दिशा दे रही है।
UAE का सख्त रुख: कर्ज वसूली के बाद अब पाकिस्तान से निवेश समेटने के संकेत

नई दिल्ली। आर्थिक मोर्चे पर जूझ रहे Pakistan के लिए एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। United Arab Emirates की प्रमुख दूरसंचार कंपनी e& (पूर्व में एतिसलात) पाकिस्तान में अपने निवेश की समीक्षा कर रही है और टेलीकॉम सेक्टर से बाहर निकलने पर विचार कर रही है। जानकारी के अनुसार, e& के पास PTCL में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रबंधन नियंत्रण भी है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी अब अपने शेयर बेचकर इस बाजार से बाहर निकलने की संभावनाएं तलाश रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस लिया है। यह कर्ज लंबे समय से रोलओवर के जरिए टाला जाता रहा था, जिससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को राहत मिलती थी। हालांकि, अचानक भुगतान की मांग ने देश की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है। वहीं, एतिसलात और पाकिस्तान सरकार के बीच 2005 से चला आ रहा 800 मिलियन डॉलर का विवाद भी अब तक अनसुलझा है। उस समय कंपनी ने PTCL की हिस्सेदारी 2.6 अरब डॉलर में खरीदी थी, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े विवाद के कारण रोका गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति से प्रेरित नहीं है, बल्कि यूएई की व्यापक वैश्विक निवेश रणनीति का हिस्सा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और पूंजी के बेहतर उपयोग की नीति के तहत खाड़ी देश अपने निवेश पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यदि e& अपना निवेश वापस लेती है, तो वह Saudi Arabia और Qatar जैसे देशों से नए निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगी। यूएई के लगातार सख्त होते आर्थिक फैसले पाकिस्तान के लिए चेतावनी माने जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पाकिस्तान नई निवेश संभावनाएं तलाश कर पाता है या आर्थिक दबाव और बढ़ता है।