HIGHLIGHTS :
- न्यायिक आदेश पर ‘एडवाइजरी’ जारी करना पड़ा भारी
- कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किया मामला
- अध्यक्ष ने मांगी बिना शर्त माफी, पत्र लिया वापस
- भविष्य के लिए मुख्य सचिव को दिए निर्देश
- दोबारा गलती पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
GWALIOR HIGHCOURT: ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ की एकल पीठ ने राजस्व मंडल अध्यक्ष के आचरण पर सख्त नाराजगी जताई है। मामला एक न्यायिक आदेश के खिलाफ अपील के लिए ‘निर्देश’ जारी करने से जुड़ा था, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए अवमानना की श्रेणी में माना। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम पर स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई।
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माफी के बाद खत्म हुई अवमानना कार्यवाही
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अध्यक्ष ने बिना शर्त माफी मांगते हुए विवादित पत्र को वापस ले लिया। कोर्ट ने माफी स्वीकार करते हुए अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह राहत केवल चेतावनी के साथ दी जा रही है। अदालत ने कहा कि भविष्य में इस तरह की चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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उच्च पद पर आचरण को लेकर सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उच्च और अर्ध-न्यायिक पदों पर बैठे अधिकारियों से न्यायिक गरिमा और स्वतंत्रता बनाए रखने की अपेक्षा होती है। किसी भी न्यायिक आदेश पर ‘एडवाइजरी’ जारी करना पद की मर्यादा के खिलाफ है। अदालत ने इस तरह के व्यवहार को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के रूप में देखा।
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मुख्य सचिव को दिए गए सख्त निर्देश
इस मामले को नजीर मानते हुए अदालत ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि राजस्व मंडल अध्यक्ष सहित सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो और न्यायिक व्यवस्था की गरिमा बनी रहे।
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‘सलाहकार की भूमिका’ पर कोर्ट की दो टूक चेतावनी
हाई कोर्ट ने माफी को ‘अनिच्छा के साथ स्वीकार’ करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि कोई भी अधिकारी न्यायिक या अर्ध-न्यायिक कार्य करते समय ‘सलाहकार की भूमिका’ नहीं निभा सकता। कोर्ट ने चेताया कि यदि भविष्य में ऐसा आचरण दोहराया गया, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।