बंगाल की खाड़ी में चीन का ‘जासूसी जहाज’! Shi Yan 6 की एंट्री से भारत की टेंशन बढ़ी

नई दिल्ली। भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बंगाल की खाड़ी में चीन की गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं। चीन का आधुनिक रिसर्च पोत Shi Yan 6 हाल ही में इस क्षेत्र में दाखिल हुआ है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि यह जहाज मालदीव में सप्लाई लेने के बाद लंबी समुद्री मिशन पर निकला और अब अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के करीब ऑपरेट कर रहा है। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषक Damien Symon के मुताबिक, यह पोत समुद्री अनुसंधान के नाम पर इलाके का विस्तृत डेटा इकट्ठा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डेटा का इस्तेमाल भविष्य में पनडुब्बी ऑपरेशन और सैन्य रणनीति में किया जा सकता है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। Shi Yan 6 को आधिकारिक तौर पर एक वैज्ञानिक अनुसंधान पोत बताया जाता है, लेकिन भारत समेत कई देश इसे “ड्यूल-यूज” यानी शोध के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में देखते हैं। यह जहाज समुद्र की गहराई, तल की संरचना और जल प्रवाह जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने में सक्षम है। यह गतिविधि ऐसे समय में सामने आई है जब भारत ग्रेट निकोबार द्वीप पर अपना महत्वाकांक्षी Great Nicobar Project तेजी से विकसित कर रहा है। करीब 75,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट और टाउनशिप जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं, जिसे हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। बंगाल की खाड़ी भारत के लिए सिर्फ भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आर्थिक और सैन्य दृष्टि से भी बेहद अहम है। यह क्षेत्र भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का मुख्य केंद्र है और दक्षिण-पूर्व एशिया से कनेक्टिविटी का अहम मार्ग भी। साथ ही, यह मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंच का प्रमुख रास्ता है, जहां से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में उसकी बढ़ती मौजूदगी और प्रभाव को दर्शाती हैं। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक परियोजनाओं की निगरानी और मजबूत करे।
कम खर्च, बड़ा असर,पचमढ़ी में सफाई की नई क्रांति: अब एक हाई-टेक गाड़ी करेगी 20 मजदूरों का काम

मध्यप्रदेश/नर्मदापुरम। के पचमढ़ी में स्वच्छता को लेकर एक ऐसा बदलाव शुरू हुआ है, जिसने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने के तरीके को ही बदल दिया है। पहाड़ों और संकरे रास्तों के बीच जहां कचरा प्रबंधन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बना हुआ था, वहीं अब एक नई तकनीकी पहल ने इस समस्या का प्रभावी समाधान पेश किया है। यह बदलाव एक विशेष रूप से तैयार की गई 4×4 कचरा गाड़ी के जरिए संभव हुआ है। इस गाड़ी को ऐसे इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां सामान्य वाहन पहुंचने में असमर्थ रहते हैं। पचमढ़ी के ऊंचे-नीचे रास्ते, पथरीली जमीन और संकरी गलियां अब इस गाड़ी के लिए बाधा नहीं रहीं। यह वाहन उन स्थानों तक आसानी से पहुंच जाता है, जहां पहले सफाई करना बेहद कठिन होता था। इस गाड़ी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका हाइड्रोलिक सिस्टम है। इसकी मदद से कचरे को उठाना और खाली करना बेहद आसान हो गया है। पहले जहां सफाई कर्मियों को भारी मात्रा में कचरा अपने हाथों से उठाकर दूर तक ले जाना पड़ता था, वहीं अब यह प्रक्रिया काफी हद तक मशीन पर निर्भर हो गई है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि श्रमिकों को शारीरिक मेहनत से भी राहत मिल रही है। पचमढ़ी जैसे पर्यटन और धार्मिक महत्व वाले स्थान पर बड़े आयोजनों के दौरान सफाई एक गंभीर चुनौती बन जाती थी। नागद्वारी जैसे मेलों में हजारों लोग जुटते हैं, जिससे भारी मात्रा में कचरा इकट्ठा हो जाता है। पहले सफाई कर्मियों को कई किलोमीटर दूर से कचरा ढोकर लाना पड़ता था, जो बेहद कठिन और समय लेने वाला काम था। लेकिन अब यह नई गाड़ी एक ही चक्कर में बड़ी मात्रा में कचरा उठाकर ले जाने में सक्षम है। बताया जा रहा है कि यह गाड़ी अकेले ही 15 से 20 लोगों के काम के बराबर कार्य कर सकती है। इससे सफाई व्यवस्था में तेजी आई है और काम अधिक व्यवस्थित तरीके से होने लगा है। सबसे अहम बात यह है कि इससे सफाई कर्मियों का बोझ काफी कम हो गया है, जिससे उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ी है। इस पहल की एक और खासियत इसकी लागत है। सीमित बजट में तैयार की गई यह गाड़ी यह दर्शाती है कि बड़े बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। सही योजना और नवाचार के जरिए कम लागत में भी प्रभावी समाधान निकाले जा सकते हैं। अब पचमढ़ी में यह गाड़ी केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक मॉडल बन गई है, जिसे अन्य दुर्गम क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। यह पहल दिखाती है कि तकनीक का सही उपयोग न केवल समस्याओं को हल कर सकता है, बल्कि काम करने के तरीके को भी पूरी तरह बदल सकता है। इस तरह पचमढ़ी ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और नवाचार के साथ किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है, और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी नई दिशा दी जा सकती है।
सिंगापुर में जुबिन गर्ग की मौत के मामले में पोत संचालकों पर उठे सवाल, समुद्र में डूबने से गई थी गायक की जान

नई दिल्ली। भारतीय गायक जुबिन गर्ग की डूबने की घटना ने नशे में धुत यात्रियों से निपटने के दौरान पोत संचालकों की जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह बात स्ट्रेट्स टाइम्स की रिपोर्ट में वकीलों के हवाले से कही गई है। रिपोर्ट में अन्य लोगों के साथ-साथ सिंगापुर की एक ला फर्म, ट्रायंगल लीगल के प्रबंध निदेशक निको ली का भी उल्लेख है, जिन्होंने सिंगापुर समुद्री और बंदरगाह प्राधिकरण (पोर्ट) के नियमों का हवाला दिया है। इसमें नशे में धुत यात्रियों को पोत पर चढ़ने से रोकने के प्रविधान हैं। क्या नशे में थे गायक?ली के अनुसार, पोत के मालिक, एजेंट या कप्तान को किसी भी ऐसे व्यक्ति को पोत पर चढ़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए, जो शराब या ड्रग्स के प्रभाव में हो और जिसका नशा पोत, चालक दल या किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा को खतरे में डालता हो। स्ट्रेट्स टाइम्स ने ली के हवाले से कहा, ”नागरिक दायित्व के संदर्भ में, यह तर्क दिया जा सकता है कि पोत का कप्तान लापरवाह है, क्योंकि सामान्य लापरवाही के सिद्धांतों के तहत पोत पर सवार मेहमानों के प्रति उसकी प्रथम दृष्ट्या देखभाल की जिम्मेदारी होती है।” व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण की मांगगर्ग के मामले का हवाला देते हुए ली ने कहा कि परिस्थितियां गंभीर थीं, क्योंकि पोत के नियंत्रक को पता था कि यात्री नशे में था। उन्होंने आगे कहा कि गायक ने सभी यात्रियों के लिए दी गई सुरक्षा संबंधी जानकारी को शायद समझा नहीं होगा। पोत संचालक किसी चालक दल के सदस्य को सीधे उसकी निगरानी के लिए नियुक्त कर सकते थे या यह सुनिश्चित कर सकते थे कि जब वह समझने में सक्षम हो, तब उसे व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण दिया जाए।
GUNA LAND ENCROACHMENT: गुना में गरीब महिला की जमीन पर दोबारा कब्जा, वारंट के बाद भी खुला घूम रहा आरोपी

HIGHLIGHTS: राघौगढ़ के डोंगर गांव का मामला प्रशासन हटाए कब्जे के बाद फिर अतिक्रमण SDM ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट महिला कोर्ट केस जीत चुकी आरोपी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर GUNA LAND ENCROACHMENT: मध्यप्रदेश। गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र के डोंगर गांव में एक गरीब महिला मनीषा बाई किरार की करीब ढाई बीघा जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। महिला कोर्ट से केस जीत चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वह अपनी ही जमीन पर न तो जा पा रही है और न ही खेती कर पा रही है। न्यूक्लियर डील से लेकर सीजफायर बातचीत तक, क्यों माने जाते हैं ईरान के सबसे भरोसेमंद कूटनीतिज्ञ प्रशासन की कार्रवाई के बाद फिर कब्जा महिला की शिकायत पर पहले तहसील कोर्ट ने कार्रवाई करते हुए जमीन को कब्जामुक्त कराया था। कुछ समय तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन बाद में आरोपी कैलाश और उसके बेटों ने फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। Donald Trump vs Iran: बढ़ता टकराव, ‘महायुद्ध’ की धमकी से वैश्विक तनाव चरम पर धमकी और दबाव के बीच न्याय की लड़ाई पीड़िता का आरोप है कि जब उसने जमीन वापस लेने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसे धमकाया और कब्जा छोड़ने से इनकार कर दिया। इसके चलते महिला पूरी तरह असहाय स्थिति में है और अपनी आजीविका के साधन से भी वंचित हो गई है। GUNA SIBLINGS DEATH: दीवार ढहने से दो मासूम भाइयों की मौत, खेलते-खेलते मलबे में दबे वारंट जारी के बाद भी आरोपी फरार मामले में SDM कोर्ट ने जांच के बाद जमीन को महिला की संपत्ति माना और 16 अप्रैल को आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। बावजूद इसके अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, पीड़िता ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर जमीन वापस दिलाने की मांग की है।
ओप्पो इंडिया ने मिड रेंज में सेल्फी चैंपियनएफ33 सीरीज़ लॉन्च की

नई दिल्ली। आज ओप्पो इंडिया ने भारत में ओप्पो एफ33 सीरीज़ लॉन्च की है, जिसमें दो स्मार्टफोन, ओप्पो एफ33 प्रो 5जी और ओप्पो एफ33 5जी शामिल हैं। एफ 33 सीरीज़ ओप्पो की एफ लाईन में अभी तक की सबसे आधुनिक सीरीज़ है, जिसमें सेगमेंट में सबसे बेहतर 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाईड सेल्फी कैमरा, आईपी69के ड्यूरेबिलिटी, 7,000 एम.ए.एच की जबरदस्त बैटरी, कलरओएस16 और 5जी++ कनेक्टिविटी दी गई है। ओप्पो इंडिया के हेड ऑफ कम्युनिकेशंस, गोल्डी पटनायक ने बताया किएफ सीरीज़ भारत की सबसे ड्यूरेबल चैंपियन है। यह स्मार्टफोन जीवन की वास्तविक परिस्थितियों के लिए बनाया गया है। एफ33 सीरीज़ में हमने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए 100 डिग्री एफ.ओ.वी (फील्ड ऑफ व्यू) के साथ 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाईड सेल्फी कैमरा और कई ए.आई इमेजिंग फीचर्स दिए हैं। हमारी कोशिश है कि ड्यूरेबिलिटी और शानदार फोटोग्राफी के लिए ग्राहकों को महंगी कीमत न चुकानी पड़े। ग्राहकों को मॉनसून की ट्रैकिंग पर जाने की ड्यूरेबिलिटी और ग्रुप में हर व्यक्ति को सेल्फी में कैप्चर करने जैसी खूबियाँ एक ही स्मार्टफोन में मिल सकें। एफ33 हमारे इस वादे को पूरा करता है और भारत की मोबाईल-फर्स्ट पीढ़ी को वो सभी खूबियाँ प्रदान करता है, जिनके वो हकदार हैं।’’ 0.6एक्स तक के स्मार्ट ऑटो-स्विच के साथ सेगमेंट का सबसे बेहतर सेल्फी कैमरा ओप्पो की सेल्फी चैंपियन एफ33 सीरीज़ में 100 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाईड फ्रंट कैमरा है। यह अपने सेगमेंट में सबसे बड़े स्पेस को कैप्चर करने वाला और सबसे ज्यादा रिज़ॉल्यूशन वाला कैमरा है। इसमें ई.आई.एस, ऑटोफोकस और जीसी50एफ6 सेंसर (एफ/2.0, 18 मिमी फोकल लैंथ, 5पी लेंस) जैसी खूबियाँ दी गई हैं। यह पिछली जनरेशन की फ्रेमिंग की तुलना में एक मीटर की दूरी से लगभग 30 प्रतिशत ज्यादा क्षेत्र को कैप्चर करता है। इसलिए सेल्फी में और ज्यादा लोग, और अधिक कॉन्टैक्स्ट तथा ज्यादा मूमेंट आ सकते हैं, और किसी चेहरे को भी क्रॉप करने की जरूरत नहीं पड़ती है। एफ33 प्रो की कैमरा इंटैलिजेंस रिज़ॉल्यूशन से भी बढ़कर है। ओप्पो का ए.आई ग्रुपफी एक्सपर्ट फ्रेम में दो चेहरों का प्रवेश होते ही ऑटोमैटिक 0.6एक्स तक चौड़ा हो जाता है। इसके लिए न तो टैप करने की जरूरत पड़ती है, न ही ऐप टटोलना पड़ता है और न ही कोई मूमेंट चूकता है। फेस डिस्टॉर्शन करेक्शन एलगोरिद्म एक साथ छः सब्जेक्ट्स तक को ट्रैक कर सकती है, जिससे 100 डिग्री के फील्ड ऑफ व्यू तक किनारों पर प्राकृतिक अनुपात बने रहते हैं। इसलिए इस स्मार्टफोन से ग्रुप सेल्फी लेना बहुत आसान है, फिर चाहे आप जयपुर में रूफटॉप पर होंया फिर कूर्ग के विशाल व्यूपॉईंट में सेल्फी ले रहे हों। फ्रंट कैमरा सिस्टम के चारों ओर कलरफुल फ्रंट फिल लाईट दी गई है। व्हाईट फ्लैश की जगह दिए गए इस मल्टी-कलर फ्लैश से सॉफ्ट, स्किन-टोन-फ्रेंडली इल्युमिनेशन प्राप्त होता है, जो कम रोशनी में, जब अन्य कैमरा दिक्कत देने लगते हैं, तब भी बेहतरीन सेल्फी प्रदान करता है। इस कैमरा सिस्टम से मिली सेल्फी फ्लैश की हुई नहीं, बल्कि बिल्कुल प्राकृतिक दिखाई देती हैं। एफ33 प्रो के रियर सिस्टम में ओवी50डी40 सेंसर के साथ 50 मेगापिक्सल का मेन कैमरा है, जो रोजमर्रा की शूटिंग में स्वाभाविक डिटेल बनाए रखता है। इसकी इमेज क्रॉप होने और रीफ्रेम होने के बाद भी प्राकृतिक बनी रहती हैं। इसलिए, यह कैमरा जहाँ क्लाईंट विज़िट के दौरान डॉक्युमेंट की समीक्षा करने के लिए उपयोगी है, वहीं वीकेंड ट्रिप पर शानदार फोटोग्राफी भी कर सकता है। इस कैमरा सिस्टम में 2 मेगापिक्सल का डेप्थ कैमरा भी दिया गया है, जो बैकग्राउंड में काम करता है। इससे आई.एस.पी (इमेज सिग्नल प्रोसेसर) को पर्याप्त डेटा मिलता है, जिसे रेंडर करके वह मैन्युअल इनपुट के बिना ही पोर्ट्रेट में बेहतरीन बोके इफेक्ट दे सकता है।
न्यूक्लियर डील से लेकर सीजफायर बातचीत तक, क्यों माने जाते हैं ईरान के सबसे भरोसेमंद कूटनीतिज्ञ

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और बातचीत के दौर में एक नाम लगातार सुर्खियों में है अब्बास अराघची। ईरान के विदेश मंत्री अराघची को इस वक्त दोनों देशों के बीच चल रही वार्ताओं का सबसे अहम चेहरा माना जा रहा है। उन्हें एक सख्त लेकिन संतुलित ‘डील मेकर’ के रूप में जाना जाता है, जो जटिल हालात में भी बातचीत को दिशा देने की क्षमता रखते हैं। अराघची का कूटनीतिक सफर लंबा और बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 2015 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में हुए ऐतिहासिक ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) की बातचीत में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों और जर्मनी के साथ हुई इस डील में उनका रुख साफ, सख्त और रणनीतिक माना गया था। आज के दौर में जब ईरान और अमेरिका के रिश्ते बेहद नाजुक मोड़ पर हैं, अराघची की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। वे न सिर्फ बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि ईरान के हितों को मजबूती से सामने भी रख रहे हैं। जानकार मानते हैं कि उनकी रणनीति ही तय करेगी कि यह वार्ता समझौते तक पहुंचेगी या फिर तनाव और बढ़ेगा। अराघची की पहचान एक ऐसे कूटनीतिज्ञ के रूप में है जो बैकडोर डिप्लोमेसी और खुले मंच—दोनों जगह समान दक्षता से काम करते हैं। यही वजह है कि उन्हें ईरान की विदेश नीति का ‘क्राइसिस मैनेजर’ भी कहा जाता है
इतिहास के दो किरदार, एक मंच पर सम्मान, अजय देवगन ने ‘राजा शिवाजी’ के लिए रितेश की तारीफ की

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक कहानियों का आकर्षण हमेशा से दर्शकों को अपनी ओर खींचता रहा है, और जब इन कहानियों में भावनाएं, संघर्ष और प्रेरणा का मेल होता है, तो उनका प्रभाव और भी गहरा हो जाता है। हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म Raja Shivaji इसी भावना को जीवंत करती नजर आ रही है। फिल्म के साथ सामने आए एक खास वीडियो ने दर्शकों के बीच उत्सुकता और बढ़ा दी है, जिसमें Ajay Devgn और Riteish Deshmukh के बीच एक दिलचस्प बातचीत देखने को मिलती है। इस बातचीत में Ajay Devgn ने मौजूदा दौर के सिनेमा पर चर्चा करते हुए कहा कि आज के समय में सुपरहीरो फिल्मों का प्रभाव काफी बढ़ गया है। दर्शक बड़े पैमाने पर काल्पनिक किरदारों और उनकी शक्तियों से प्रभावित होते हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के इतिहास में ऐसे असली नायक मौजूद रहे हैं, जिन्होंने अपने साहस और बलिदान से समाज और देश के लिए असाधारण कार्य किए हैं। उनके अनुसार, इन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की कहानियां किसी भी काल्पनिक सुपरहीरो से कम प्रेरणादायक नहीं हैं। वहीं Riteish Deshmukh, जो इस फिल्म में Chhatrapati Shivaji Maharaj की भूमिका निभा रहे हैं, उन्होंने अपने किरदार को लेकर गहरी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे शिवाजी महाराज को अपना पहला “सुपरहीरो” मानते आए हैं। यही व्यक्तिगत जुड़ाव और सम्मान उनके अभिनय में झलकता है, जिसने उन्हें इस फिल्म को करने के लिए प्रेरित किया। बातचीत के दौरान Ajay Devgn ने Riteish Deshmukh की मेहनत और समर्पण की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि किसी ऐतिहासिक चरित्र को पर्दे पर जीवंत करना आसान नहीं होता, लेकिन जिस सच्चाई और भावना के साथ रितेश ने इस किरदार को निभाया है, वह बेहद सराहनीय है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे किरदारों के लिए केवल अभिनय कौशल ही नहीं, बल्कि गहरी समझ और भावनात्मक जुड़ाव भी जरूरी होता है। यह बातचीत केवल दो कलाकारों के बीच संवाद नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास और उसके नायकों के प्रति सम्मान का एक उदाहरण भी है। दर्शकों के लिए यह एक याद दिलाने जैसा है कि मनोरंजन के साथ-साथ सिनेमा समाज और संस्कृति को भी जोड़ने का माध्यम बन सकता है। फिल्म Raja Shivaji हिंदी और मराठी दोनों भाषाओं में रिलीज़ की गई है और यह Chhatrapati Shivaji Maharaj के जीवन, संघर्ष और उनके गौरवशाली इतिहास को श्रद्धांजलि देने का प्रयास करती है। भव्य सेट, भावनात्मक कहानी और मजबूत अभिनय के साथ यह फिल्म दर्शकों को एक ऐतिहासिक यात्रा पर ले जाने का दावा करती है।
Donald Trump vs Iran: बढ़ता टकराव, ‘महायुद्ध’ की धमकी से वैश्विक तनाव चरम पर

नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच एक बार फिर टकराव तेज हो गया है, जहां हालात खुली जंग की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयानों ने तनाव को और भड़का दिया है, जबकि ईरान ने पलटवार करते हुए ‘महायुद्ध’ की चेतावनी दे दी है। दोनों देशों के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र पहले से ही अस्थिर है और वैश्विक समुदाय की नजरें इस टकराव पर टिकी हैं। ईरानी सेना ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका और इजरायल किसी भी समय दोबारा हमला शुरू कर सकते हैं। ईरान के सैन्य मुख्यालय के उप-प्रमुख मोहम्मद जाफर असादी ने कहा कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और उसकी नीतियां अस्थिरता पैदा कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका कोई “नई हिमाकत” करता है, तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा। दूसरी ओर, Donald Trump ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी अनिश्चित है और अगर जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समझौते के प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं हैं और आगे क्या होगा, यह हालात तय करेंगे। ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को “बिखरा हुआ” बताते हुए दावा किया कि वहां अंदरूनी मतभेद गहरे हैं, जिससे बातचीत मुश्किल हो रही है। तनाव के बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें Islamic Revolutionary Guard Corps के 14 जवानों की मौत हो गई। यह हादसा तेहरान के पास जंजन इलाके में हुआ, जहां युद्ध के दौरान बचे विस्फोटक सामग्री में धमाका हो गया। युद्धविराम के बाद यह सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है, जिसने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। इधर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अमेरिका लगातार ईरान पर इसे खोलने का दबाव बना रहा है, जबकि ईरान अपने रुख पर कायम है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, ऐसे में यहां किसी भी टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते बेहद सीमित होते जा रहे हैं। एक तरफ जहां बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य विकल्प भी खुले हैं, जो किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रहे हैं। अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह टकराव क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट में बदल सकता है।
रिलायंस समूह से जुड़े लोन फ्रॉड मामले में अनिल अंबानी के पूर्व सहयोगियों की ईडी हिरासत 15 मई तक बढ़ी

नई दिल्ली। लोन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में दिल्ली की एक अदालत ने अनिल अंबानी से जुड़े पूर्व सहयोगियों की ईडी हिरासत को 15 मई तक बढ़ाने का आदेश दिया है। यह मामला वित्तीय अनियमितताओं और बैंक लोन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच कई स्तरों पर चल रही है। अदालत के समक्ष पेश किए गए दोनों पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें फिर से पेश किया गया, जहां मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी की याचिका पर सुनवाई की गई। अदालत ने जांच को आगे बढ़ाने के लिए हिरासत बढ़ाने की अनुमति दी, ताकि वित्तीय लेन-देन और कथित गड़बड़ियों की गहराई से जांच की जा सके। इस मामले में आरोप है कि रिलायंस समूह से जुड़ी कुछ वित्तीय कंपनियों के माध्यम से लिए गए बैंक लोन का गलत तरीके से उपयोग किया गया और धन को विभिन्न तरीकों से घुमाकर इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसमें गंभीर वित्तीय अनियमितताएं शामिल हो सकती हैं, जिनकी तह तक पहुंचने के लिए विस्तृत पूछताछ आवश्यक है। गिरफ्तार किए गए दोनों पूर्व अधिकारी पहले कंपनी में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रह चुके हैं और वित्तीय निर्णयों में उनकी भूमिका रही थी। हालांकि, कंपनी की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि दोनों अधिकारी अब संगठन से जुड़े नहीं हैं और कई वर्ष पहले ही अपने पद छोड़ चुके हैं।जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई वित्तीय लेन-देन और बैंकिंग प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं, जिनकी जांच की जा रही है। इसी वजह से इस मामले को गंभीर वित्तीय अपराध के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी इसी समूह से जुड़े अन्य मामलों में जांच की जा चुकी है, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान और बैंकिंग संस्थानों को हुए कथित नुकसान के आरोप सामने आए थे। इन मामलों में जांच एजेंसियां लगातार दस्तावेजों और लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल अदालत द्वारा हिरासत बढ़ाए जाने के बाद जांच को और गति मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आने की संभावना है, जिससे पूरे मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है। यह मामला देश के बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है, जिसमें लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क और लेन-देन की परतें खोलने में जुटी हुई हैं, ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
डॉल्फिन से समुद्री जंग? ईरान की ‘सीक्रेट अंडरवॉटर स्ट्रैटेजी’ के दावों से बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है कि ईरान समुद्र के अंदर बारूदी सुरंगें बिछाने और दुश्मन जहाजों को निशाना बनाने के लिए प्रशिक्षित डॉल्फिन का इस्तेमाल कर सकता है। यह दावा ऐसे समय में किया गया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक बना हुआ है और यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का वैश्विक असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कथित रणनीति में डॉल्फिन को विस्फोटकों या माइंस से लैस कर दुश्मन के जहाजों के पास भेजा जा सकता है। हालांकि, इस तरह के दावों की पुष्टि अब तक स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है और कई विशेषज्ञ इसे सूचना युद्ध (Information Warfare) का हिस्सा भी मान रहे हैं। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि वास्तविक युद्ध में इस तरह के प्रयोग बेहद जटिल और जोखिम भरे होते हैं। इतिहास बताता है कि समुद्री जीवों का सैन्य उपयोग पूरी तरह नया नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ जैसे देशों ने अतीत में डॉल्फिन और सी-लायन को माइन डिटेक्शन और अंडरवॉटर मिशन के लिए ट्रेन किया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने भी साल 2000 के आसपास ऐसे प्रशिक्षित समुद्री जीव हासिल किए थे, लेकिन वर्तमान में उनकी वास्तविक क्षमता और तैनाती को लेकर कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं है। दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य में खतरे का बड़ा कारण अभी भी पानी के ऊपर होने वाले हमले और जहाजों की सुरक्षा है, न कि समुद्र के नीचे बिछाई गई माइंस। अमेरिकी अधिकारियों के बयान भी इस मुद्दे पर एक जैसे नहीं हैं कुछ इसे बड़ा खतरा मानते हैं, तो कुछ इसे सीमित जोखिम बताते हैं। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर ईरान किसी भी तरह की माइन बिछाने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। रणनीतिक रूप से देखा जाए तो होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है, और यहां किसी भी तरह का अवरोध या संघर्ष पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। ऐसे में डॉल्फिन जैसे असामान्य हथियारों की चर्चा भले ही सुर्खियां बना रही हो, लेकिन असली चिंता अब भी पारंपरिक सैन्य टकराव और समुद्री सुरक्षा को लेकर ही है।