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BHIND WEATHER TODAY: भिंड में बदला मौसम का मिजाज, 44 से गिरकर 37 डिग्री पहुंचा तापमान

BHIND WEATHER TODAY

HIGHLIGHTS: आंधी-बारिश के बाद तापमान में 5-6 डिग्री गिरावट 44°C से घटकर 37°C पर पहुंचा पारा लू से राहत, मौसम हुआ सुहावना बाजारों में बढ़ी लोगों की आवाजाही अगले कुछ दिनों तक राहत के आसार   BHIND WEATHER TODAY: मध्यप्रदेश। भिंड में पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। कुछ दिन पहले तक जहां तापमान 43-44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, वहीं अब इसमें करीब 5 से 6 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। शनिवार को अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली। जनगणना के नाम पर ठगी का जाल! OTP-बैंक डिटेल मांगने वालों से रहें सावधान गर्म हवाओ से लोगों को मिली राहत गुरुवार शाम आई आंधी और हल्की बारिश के बाद से ही मौसम में बदलाव शुरू हो गया था। इसके बाद शुक्रवार और शनिवार को तापमान सामान्य से कम बना रहा। बता दें कि पहले जहां तेज और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही थीं, अब वे पूरी तरह थम गई हैं। दिन के समय भी गर्मी का असर पहले जैसा नहीं रहा। एक फोटो से साफ हो सकता है बैंक अकाउंट! AEPS फ्रॉड का नया खेल, तुरंत लॉक करें आधार बायोमेट्रिक्स बादल और धूप के बीच सुहावना दिन शनिवार को आसमान में हल्के बादल छाए रहे, हालांकि बीच-बीच में धूप भी निकलती रही। इसके बावजूद मौसम में नरमी बनी रही और लू जैसे हालात नहीं बने। सुहावने मौसम के चलते बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही भी बढ़ गई है। किचन के कचरे से बगीचे में जान, तरबूज के छिलकों से लौटेगी हरियाली.. आगे फिर बढ़ सकती है गर्मी मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 2 से 3 दिन तक ऐसा ही राहत भरा मौसम बना रह सकता है। इसके बाद तापमान में फिर से बढ़ोतरी होने की संभावना है और तेज धूप के साथ गर्मी अपने तेवर दिखा सकती है। ऐसे में लोगों को बदलते मौसम में सेहत का खास ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

महर्षि दयानंद के विचारों से जागा स्वाभिमान, शिक्षा और संगठन ने दिलाई स्वतंत्रता की राह

मॉरीशस की स्वतंत्रता की कहानी केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक जागरण, शिक्षा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की एक गहरी प्रक्रिया का परिणाम भी थी। इस पूरे परिवर्तन में Arya Samaj की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिसने प्रवासी भारतीय समाज में आत्मसम्मान, एकता और अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा की। इस परिवर्तन की वैचारिक नींव Swami Dayanand Saraswati ने रखी थी। उन्होंने अपने ग्रंथ Satyarth Prakash में स्पष्ट रूप से बताया कि स्वतंत्रता सर्वोच्च है और परतंत्रता अभिशाप। उनके विचारों ने न केवल भारत में बल्कि मॉरीशस जैसे दूरस्थ द्वीपों पर बसे भारतीयों के मन में भी स्वाधीनता और स्वाभिमान की भावना जगाई। बीसवीं सदी की शुरुआत में जब मॉरीशस में Satyarth Prakash पहुंचा, तब वहां के समाज में बड़ा बदलाव शुरू हुआ। सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास और जात-पात की बाधाओं को चुनौती मिली। धीरे-धीरे आर्यसमाज के प्रयासों से शिक्षा का प्रसार हुआ और लोगों में संगठन की भावना विकसित हुई। गांव-गांव में स्कूलों और शाखाओं की स्थापना कर लोगों को साक्षर बनाया गया, जिससे उनमें राजनीतिक समझ भी विकसित हुई। आर्यसमाज ने केवल धार्मिक सुधार ही नहीं किए, बल्कि लोगों को उनके अधिकारों के प्रति भी जागरूक किया। इसका सबसे बड़ा असर 1948 के चुनावों में देखने को मिला, जब मतदाताओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई। जहां पहले केवल कुछ हजार लोग ही मतदान कर पाते थे, वहीं शिक्षा और जागरूकता के कारण यह संख्या कई गुना बढ़ गई। इससे मॉरीशस की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों की भागीदारी मजबूत हुई और स्वतंत्रता आंदोलन को गति मिली। 1948 से 1967 तक चले स्वतंत्रता संग्राम में आर्यसमाजियों ने सक्रिय भूमिका निभाई और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत समर्थन दिया। इस तरह सामाजिक सुधार से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे राजनीतिक स्वतंत्रता की दिशा में बदल गया और अंततः मॉरीशस को आजादी की राह पर आगे बढ़ाया। आज भी मॉरीशस और भारत के बीच सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती में आर्यसमाज की यह विरासत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह इतिहास इस बात का प्रमाण है कि किसी भी राष्ट्र की स्वतंत्रता केवल राजनीतिक संघर्ष से नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, शिक्षा और एकजुटता से हासिल होती है।

AI Photo Trend: एक ही तस्वीर में बचपन से मुलाकात! सोशल मीडिया पर छाया ‘Meet Your Younger Self’ ट्रेंड

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक नया और दिलचस्प AI ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग अपनी बचपन की यादों को तकनीक के जरिए फिर से जीवंत कर रहे हैं। इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर ‘Meet Your Younger Self’ नाम से चल रहे इस ट्रेंड में यूजर्स अपनी वर्तमान और बचपन की तस्वीरों को मिलाकर एक खास फोटो तैयार कर रहे हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक और भावनात्मक लगती है। इस ट्रेंड की खास बात यह है कि इसमें एक ही फ्रेम में व्यक्ति का बचपन और वर्तमान दोनों रूप दिखाई देते हैं। फोटो इतनी रियलिस्टिक होती है कि ऐसा लगता है मानो दो अलग-अलग लोग आमने-सामने खड़े हैं, लेकिन असल में दोनों एक ही व्यक्ति के अलग-अलग समय के रूप होते हैं। यही वजह है कि यह ट्रेंड लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और लाखों यूजर्स इसे ट्राई कर रहे हैं। इस तरह की फोटो बनाने के लिए यूजर्स ChatGPT या अन्य AI इमेज जनरेशन टूल्स का सहारा ले रहे हैं। इसमें यूजर को अपनी एक वर्तमान फोटो और एक बचपन की फोटो अपलोड करनी होती है। इसके बाद एक डिटेल्ड प्रॉम्प्ट दिया जाता है, जिसमें सीन, लाइटिंग और एक्सप्रेशन जैसी डिटेल्स बताई जाती हैं। AI उसी के आधार पर एक नई इमेज तैयार कर देता है, जिसमें दोनों टाइमलाइन एक साथ नजर आती हैं। यह ट्रेंड सिर्फ एक फोटो बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को अपने अतीत से जोड़ने और समय के साथ आए बदलाव को महसूस करने का मौका भी देता है। कई यूजर्स इस फोटो के साथ इमोशनल कैप्शन लिखकर अपनी यादें साझा कर रहे हैं, जिससे यह ट्रेंड और भी खास बन गया है। अगर आप भी इस ट्रेंड को ट्राई करना चाहते हैं, तो बस अपनी एक क्लियर वर्तमान फोटो और बचपन की फोटो चुनें, किसी AI टूल में जाकर सही प्रॉम्प्ट डालें और कुछ ही सेकंड में आपकी यूनिक फोटो तैयार हो जाएगी। इसके बाद आप इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते हैं और इस वायरल ट्रेंड का हिस्सा बन सकते हैं।

जनगणना के नाम पर ठगी का जाल! OTP-बैंक डिटेल मांगने वालों से रहें सावधान

नई दिल्ली। देश में जनगणना प्रक्रिया के शुरू होते ही साइबर ठगों ने भी नया तरीका अपना लिया है। जनगणना अधिकारी बनकर लोग घर-घर या ऑनलाइन संपर्क कर रहे हैं और नागरिकों से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपको बड़े फ्रॉड का शिकार बना सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, असली जनगणना कर्मचारी केवल सामान्य घरेलू और जनसांख्यिकीय जानकारी ही पूछते हैं, जैसे परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, लिंग, पेशा या घर से जुड़ी बेसिक जानकारी। लेकिन अगर कोई व्यक्ति आपसे बैंक अकाउंट डिटेल, आधार नंबर, पैन नंबर या OTP जैसी जानकारी मांगता है, तो यह साफ संकेत है कि सामने वाला फर्जी है और आपको ठगने की कोशिश कर रहा है। साइबर अपराधी अब सिर्फ सीधे सवाल नहीं पूछते, बल्कि डिजिटल जाल भी बिछाते हैं। कई मामलों में लोगों को लिंक भेजकर ‘डिटेल कंफर्म’ करने के लिए कहा जाता है, या कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया जाता है। कुछ मामलों में QR कोड स्कैन करवाकर भी डेटा चुराने की कोशिश की जा रही है। ऐसे किसी भी लिंक, ऐप या QR कोड से तुरंत दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित तरीका है। सरकार से जुड़े प्लेटफॉर्म Sanchar Saathi के तहत मौजूद Chakshu portal पर ऐसे संदिग्ध मामलों की शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह ठगी का शिकार हो चुका है, तो उसे तुरंत अपने बैंक से संपर्क करना चाहिए और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। साथ ही 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके भी तुरंत मदद ली जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। जनगणना के नाम पर हो रहे इस नए फ्रॉड से बचने के लिए जरूरी है कि लोग सही जानकारी पहचानें, अनजान लोगों पर भरोसा न करें और अपनी निजी व वित्तीय जानकारी को हर हाल में सुरक्षित रखें।

एक फोटो से साफ हो सकता है बैंक अकाउंट! AEPS फ्रॉड का नया खेल, तुरंत लॉक करें आधार बायोमेट्रिक्स

नई दिल्ली। डिजिटल दौर में ठगी के तरीके भी हाईटेक होते जा रहे हैं और अब साइबर अपराधियों ने बैंक खातों पर सेंध लगाने का नया रास्ता खोज लिया है। UIDAI के आधार सिस्टम से जुड़े AEPS को निशाना बनाकर स्कैमर्स सिर्फ एक फोटो के जरिए लोगों के खाते खाली कर रहे हैं। यह नया “फेस ऑथेंटिकेशन फ्रॉड” पारंपरिक OTP या कॉल फ्रॉड से भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें ठगों को पीड़ित से सीधे संपर्क की भी जरूरत नहीं पड़ती। दरअसल, AEPS सिस्टम को आधार नंबर और बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या फेस) के जरिए आसान बैंकिंग के लिए बनाया गया था, लेकिन अब अपराधी इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कैमर्स सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म से आपकी एक साफ फोटो हासिल कर लेते हैं और फिर AI तकनीक की मदद से आपका नकली चेहरा (डीपफेक) तैयार कर लेते हैं। इसके जरिए वे सिस्टम को धोखा देकर आपके बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में अकाउंट खाली हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए सबसे जरूरी है सतर्कता और सही सेटिंग्स का इस्तेमाल। यूजर्स को तुरंत अपने आधार का बायोमेट्रिक लॉक कर देना चाहिए, ताकि कोई भी बिना अनुमति आपके फिंगरप्रिंट या फेस डेटा का उपयोग न कर सके। इसके लिए mAadhaar ऐप या UIDAI की वेबसाइट का सहारा लिया जा सकता है। इसके अलावा, अगर आप AEPS सेवा का नियमित उपयोग नहीं करते हैं तो अपने बैंक से इसे बंद या सीमित कराने की सलाह दी जाती है। साइबर एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि सोशल मीडिया पर अपनी हाई-क्वालिटी तस्वीरें शेयर करते समय सावधानी बरतें, क्योंकि यही फोटो स्कैमर्स के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकती है। अगर आपके खाते से कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन होता है, तो तुरंत कार्रवाई करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं, ताकि नुकसान को कम किया जा सके।

मिडिल ईस्ट संकट का असर: सूएज छोड़ा, केप ऑफ गुड होप बना नया शिपिंग रूट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और लाल सागर में बढ़ते हमलों ने वैश्विक समुद्री व्यापार की दिशा बदल दी है। एशिया से यूरोप जाने वाले जहाज अब पारंपरिक सूएज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता अपनाने को मजबूर हैं। पहले जहां यह सफर करीब 20-22 दिनों में पूरा हो जाता था, अब वही यात्रा 35 से 50 दिन तक खिंच रही है। सुरक्षा कारणों से जहाज बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्ते से बच रहे हैं, जहां 2023 के अंत से हमलों का खतरा बना हुआ है। इस बदलाव का सीधा असर लागत पर पड़ा है। लंबा रूट लेने से ईंधन खपत 30-50% तक बढ़ गई है, वहीं कंपनियों को समय पर डिलीवरी बनाए रखने के लिए ज्यादा जहाज लगाने पड़ रहे हैं। इससे कंटेनर शिपिंग दरों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसका असर वैश्विक महंगाई और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, इस संकट ने अफ्रीका के समुद्री तटों को नया अवसर भी दिया है। मोरक्को का टैंजर मेड पोर्ट और सऊदी अरब का जेद्दा पोर्ट जैसे बंदरगाह तेजी से नए लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहे हैं। जहाज अब यहां रुककर ईंधन भर रहे हैं और माल को आगे ट्रांसफर कर रहे हैं। उधर, मिस्र को बड़ा झटका लगा है। सूएज नहर से होने वाली आय में भारी गिरावट आई है, क्योंकि जहाजों की संख्या तेजी से घटी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ अस्थायी बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के पैटर्न में बड़ा शिफ्ट हो सकता है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है, तो केप ऑफ गुड होप का रूट स्थायी रूप से प्रमुख विकल्प बन सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि भू-राजनीतिक तनाव अब सीधे वैश्विक व्यापार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल रहा है जहां समुद्र का रास्ता बदलते ही पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो जाती है।

किचन के कचरे से बगीचे में जान, तरबूज के छिलकों से लौटेगी हरियाली..

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम जहां इंसानों के लिए मुश्किलें लेकर आता है, वहीं पौधों के लिए भी यह समय किसी परीक्षा से कम नहीं होता। जब तापमान लगातार बढ़कर 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तो बगीचों और घरों में लगे पौधे धीरे-धीरे अपनी ताजगी खोने लगते हैं। पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, उनके किनारे सूखने लगते हैं और कई बार पौधों की बढ़त भी रुक जाती है। ऐसे हालात में लोग अक्सर महंगे खाद और रासायनिक उर्वरकों का सहारा लेते हैं, लेकिन हर बार ये उपाय संतोषजनक परिणाम नहीं देते। कई बार तो ये केमिकल गर्मी में पौधों को और नुकसान पहुंचा देते हैं। इसी समस्या का एक सरल और किफायती समाधान घर की रसोई में ही छिपा होता है, जिसे अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। तरबूज के छिलके, जिन्हें आमतौर पर कचरे में डाल दिया जाता है, दरअसल पौधों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और पौधों को ठंडक देने में मदद करते हैं। यह उपाय खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो बिना केमिकल के अपने बगीचे को स्वस्थ और हरा-भरा रखना चाहते हैं। इस देसी टॉनिक को तैयार करना भी बेहद आसान है और इसके लिए किसी विशेष उपकरण या सामग्री की जरूरत नहीं होती। सबसे पहले तरबूज के छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद इन्हें एक बाल्टी या बड़े बर्तन में डालकर पर्याप्त मात्रा में पानी भर दिया जाता है। इस मिश्रण को दो से तीन दिनों तक ढककर किसी ठंडी जगह पर रखा जाता है, ताकि छिलकों में मौजूद पोषक तत्व धीरे-धीरे पानी में घुल जाएं और एक पौष्टिक घोल तैयार हो सके। जब यह मिश्रण तैयार हो जाए, तो इसे छानकर सीधे पौधों की जड़ों में डाला जा सकता है। इसका उपयोग सुबह या शाम के समय करना अधिक लाभकारी माना जाता है, क्योंकि उस समय धूप कम होती है और पौधे इस पोषण को बेहतर तरीके से ग्रहण कर पाते हैं। इस प्राकृतिक घोल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है, जिससे पौधों को बार-बार पानी देने की जरूरत कम हो जाती है। इसके अलावा यह पौधों को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करता है, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर होती है और पत्तियों के सूखने या जलने की समस्या कम हो जाती है। हालांकि, इसका उपयोग संतुलित मात्रा में करना जरूरी है। बहुत अधिक मात्रा में या रोजाना इसका इस्तेमाल करने से मिट्टी पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए हफ्ते में एक या दो बार इसका उपयोग पर्याप्त माना जाता है।

MP POLITICAL APPOINTMENTS: एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों की रफ्तार तेज, सत्येन्द्र भूषण सिंह बने लघु उद्योग निगम चेयरमेन

MP Political Appointments:

HIGHLIGHTS: सत्येन्द्र भूषण सिंह को लघु उद्योग निगम की जिम्मेदारी गुड्‌डी आदिवासी बनीं सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष संदीप जैन को जबलपुर विकास प्राधिकरण का प्रभार कई निगम-मंडलों में नई नियुक्तियां गुड्‌डी पहली महिला, जिन्हें मिला मंत्री दर्जा   MP POLITICAL APPOINTMENTS: श्योपुर। मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में बीजेपी के पूर्व कार्यालय मंत्री सत्येन्द्र भूषण सिंह को लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। बता दें कि उनका कार्यकाल दो साल का होगा। इसके साथ ही सरकार ने कई अन्य निगम और प्राधिकरणों में भी नई नियुक्तियां कर संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। Datia Halwai Customer Fight: हलवाई ने एडवांस लेने के बाद भी नहीं बनाया खाना, दतिया में हलवाई पर ग्राहक ने किया हमला गुड्‌डी आदिवासी बनीं अध्यक्ष श्योपुर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्‌डी आदिवासी को सहरिया विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल तीन साल का रहेगा। खास बात यह है कि अब तक घोषित नियुक्तियों में वे पहली महिला हैं, जिन्हें यह जिम्मेदारी मिली है। साथ ही उन्हें मंत्री का दर्जा भी दिया गया है। बंगाल की खाड़ी में चीन का ‘जासूसी जहाज’! Shi Yan 6 की एंट्री से भारत की टेंशन बढ़ी विभिन्न प्राधिकरणों में नेताओं की तैनाती सरकार ने संदीप जैन को जबलपुर विकास प्राधिकरण, वीरेंद्र गोयल को सिंगरौली विकास प्राधिकरण और डॉ. राघवेंद्र शर्मा को मध्य प्रदेश योग आयोग का अध्यक्ष बनाया है। इसके अलावा विनोद गोटिया को तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण, कौशल शर्मा को महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान और पंकज जोशी को खादी ग्राम उद्योग बोर्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कम खर्च, बड़ा असर,पचमढ़ी में सफाई की नई क्रांति: अब एक हाई-टेक गाड़ी करेगी 20 मजदूरों का काम जल्द जारी होंगे आदेश सरकार और बीजेपी संगठन की ओर से कई और नामों को मंजूरी मिल चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले हफ्ते में इनके औपचारिक नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिए जाएंगे। वहीं बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल रहे प्रवीण शर्मा का नाम भी मध्य प्रदेश युवा आयोग के लिए लगभग तय माना जा रहा है।

नितिन गडकरी ने किया MLFF टोलिंग लॉन्च; FASTag और AI कैमरों से होगी ऑटोमैटिक वसूली, जाम से मिलेगी राहत

नई दिल्ली। देश के हाईवे सफर को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन (NH-48) पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लॉन्च किया। यह देश का पहला ऐसा टोल है, जहां वाहन बिना रुके 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरते हुए भी टोल चुका सकेंगे। नई तकनीक के तहत पारंपरिक टोल प्लाजा की तरह बैरियर नहीं होंगे। इसकी जगह ओवरहेड स्ट्रक्चर पर लगे हाई-टेक कैमरे और सेंसर गाड़ियों की पहचान करेंगे। FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के जरिए वाहन की जानकारी तुरंत पढ़ी जाएगी और टोल की रकम सीधे लिंक्ड खाते से कट जाएगी। खास बात यह है कि अगर किसी वाहन में FASTag नहीं लगा है या काम नहीं कर रहा, तो भी टोल वसूली नहीं रुकेगी। AI कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर वाहन मालिक को ई-नोटिस भेज देंगे, जिससे भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से हाईवे पर लगने वाले जाम में बड़ी कमी आएगी। वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे यात्रा समय घटेगा और ईंधन की भी बचत होगी। साथ ही प्रदूषण में कमी और टोल संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। मंत्री गडकरी ने कहा कि यह अत्याधुनिक सिस्टम देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति देगा। उनका कहना है कि आने वाले समय में इस तकनीक को देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जाएगा। इस पहल को भारत के टोल सिस्टम के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आम लोगों के सफर को ज्यादा तेज, सुविधाजनक और झंझटमुक्त बना सकता है।

दवाओं से आगे बढ़कर अपनाएं ये 4 जरूरी बदलाव, टाइप-2 डायबिटीज पर मिलेगा बेहतर नियंत्रण

नई दिल्ली। आज के दौर में टाइप-2 डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हालांकि यह बीमारी गंभीर जरूर है, लेकिन सही आदतों को अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी उतने ही जरूरी हैं। सबसे पहले शरीर के वजन को संतुलित रखना बेहद आवश्यक है। बढ़ता हुआ वजन न केवल डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि इसे नियंत्रित करना भी मुश्किल बना देता है। इसलिए नियमित रूप से वजन की निगरानी करना और जरूरत के अनुसार उसे कम करने के प्रयास करना चाहिए। संतुलित वजन शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही शारीरिक सक्रियता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक व्यायाम करने से शरीर सक्रिय रहता है और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। तेज चलना, साइकिल चलाना, योग या हल्का व्यायाम जैसे विकल्प आसानी से अपनाए जा सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखती है और मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाती है। खानपान की भूमिका भी इस बीमारी को नियंत्रित करने में बेहद अहम है। संतुलित और पौष्टिक आहार लेने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और ब्लड शुगर अचानक बढ़ने से बचता है। भोजन में हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए। इसके साथ ही अधिक तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना भी जरूरी है। सही डाइट न केवल डायबिटीज को कंट्रोल करती है, बल्कि शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखती है। इसके अलावा कुछ आदतों से दूरी बनाना भी उतना ही जरूरी है, जो इस समस्या को बढ़ा सकती हैं। ज्यादा चीनी और सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित करना चाहिए। साथ ही तंबाकू का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। यह न केवल डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि हृदय और फेफड़ों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।