मिडिल ईस्ट संकट का असर: सूएज छोड़ा, केप ऑफ गुड होप बना नया शिपिंग रूट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और लाल सागर में बढ़ते हमलों ने वैश्विक समुद्री व्यापार की दिशा बदल दी है। एशिया से यूरोप जाने वाले जहाज अब पारंपरिक सूएज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता अपनाने को मजबूर हैं। पहले जहां यह सफर करीब 20-22 दिनों में पूरा हो जाता था, अब वही यात्रा 35 से 50 दिन तक खिंच रही है। सुरक्षा कारणों से जहाज बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्ते से बच रहे हैं, जहां 2023 के अंत से हमलों का खतरा बना हुआ है। इस बदलाव का सीधा असर लागत पर पड़ा है। लंबा रूट लेने से ईंधन खपत 30-50% तक बढ़ गई है, वहीं कंपनियों को समय पर डिलीवरी बनाए रखने के लिए ज्यादा जहाज लगाने पड़ रहे हैं। इससे कंटेनर शिपिंग दरों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसका असर वैश्विक महंगाई और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, इस संकट ने अफ्रीका के समुद्री तटों को नया अवसर भी दिया है। मोरक्को का टैंजर मेड पोर्ट और सऊदी अरब का जेद्दा पोर्ट जैसे बंदरगाह तेजी से नए लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहे हैं। जहाज अब यहां रुककर ईंधन भर रहे हैं और माल को आगे ट्रांसफर कर रहे हैं। उधर, मिस्र को बड़ा झटका लगा है। सूएज नहर से होने वाली आय में भारी गिरावट आई है, क्योंकि जहाजों की संख्या तेजी से घटी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ अस्थायी बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार के पैटर्न में बड़ा शिफ्ट हो सकता है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचता है, तो केप ऑफ गुड होप का रूट स्थायी रूप से प्रमुख विकल्प बन सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि भू-राजनीतिक तनाव अब सीधे वैश्विक व्यापार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल रहा है जहां समुद्र का रास्ता बदलते ही पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो जाती है।
किचन के कचरे से बगीचे में जान, तरबूज के छिलकों से लौटेगी हरियाली..

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम जहां इंसानों के लिए मुश्किलें लेकर आता है, वहीं पौधों के लिए भी यह समय किसी परीक्षा से कम नहीं होता। जब तापमान लगातार बढ़कर 40 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तो बगीचों और घरों में लगे पौधे धीरे-धीरे अपनी ताजगी खोने लगते हैं। पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, उनके किनारे सूखने लगते हैं और कई बार पौधों की बढ़त भी रुक जाती है। ऐसे हालात में लोग अक्सर महंगे खाद और रासायनिक उर्वरकों का सहारा लेते हैं, लेकिन हर बार ये उपाय संतोषजनक परिणाम नहीं देते। कई बार तो ये केमिकल गर्मी में पौधों को और नुकसान पहुंचा देते हैं। इसी समस्या का एक सरल और किफायती समाधान घर की रसोई में ही छिपा होता है, जिसे अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। तरबूज के छिलके, जिन्हें आमतौर पर कचरे में डाल दिया जाता है, दरअसल पौधों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और पौधों को ठंडक देने में मदद करते हैं। यह उपाय खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो बिना केमिकल के अपने बगीचे को स्वस्थ और हरा-भरा रखना चाहते हैं। इस देसी टॉनिक को तैयार करना भी बेहद आसान है और इसके लिए किसी विशेष उपकरण या सामग्री की जरूरत नहीं होती। सबसे पहले तरबूज के छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद इन्हें एक बाल्टी या बड़े बर्तन में डालकर पर्याप्त मात्रा में पानी भर दिया जाता है। इस मिश्रण को दो से तीन दिनों तक ढककर किसी ठंडी जगह पर रखा जाता है, ताकि छिलकों में मौजूद पोषक तत्व धीरे-धीरे पानी में घुल जाएं और एक पौष्टिक घोल तैयार हो सके। जब यह मिश्रण तैयार हो जाए, तो इसे छानकर सीधे पौधों की जड़ों में डाला जा सकता है। इसका उपयोग सुबह या शाम के समय करना अधिक लाभकारी माना जाता है, क्योंकि उस समय धूप कम होती है और पौधे इस पोषण को बेहतर तरीके से ग्रहण कर पाते हैं। इस प्राकृतिक घोल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है, जिससे पौधों को बार-बार पानी देने की जरूरत कम हो जाती है। इसके अलावा यह पौधों को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करता है, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर होती है और पत्तियों के सूखने या जलने की समस्या कम हो जाती है। हालांकि, इसका उपयोग संतुलित मात्रा में करना जरूरी है। बहुत अधिक मात्रा में या रोजाना इसका इस्तेमाल करने से मिट्टी पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए हफ्ते में एक या दो बार इसका उपयोग पर्याप्त माना जाता है।
MP POLITICAL APPOINTMENTS: एमपी में राजनीतिक नियुक्तियों की रफ्तार तेज, सत्येन्द्र भूषण सिंह बने लघु उद्योग निगम चेयरमेन

HIGHLIGHTS: सत्येन्द्र भूषण सिंह को लघु उद्योग निगम की जिम्मेदारी गुड्डी आदिवासी बनीं सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष संदीप जैन को जबलपुर विकास प्राधिकरण का प्रभार कई निगम-मंडलों में नई नियुक्तियां गुड्डी पहली महिला, जिन्हें मिला मंत्री दर्जा MP POLITICAL APPOINTMENTS: श्योपुर। मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में बीजेपी के पूर्व कार्यालय मंत्री सत्येन्द्र भूषण सिंह को लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। बता दें कि उनका कार्यकाल दो साल का होगा। इसके साथ ही सरकार ने कई अन्य निगम और प्राधिकरणों में भी नई नियुक्तियां कर संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है। Datia Halwai Customer Fight: हलवाई ने एडवांस लेने के बाद भी नहीं बनाया खाना, दतिया में हलवाई पर ग्राहक ने किया हमला गुड्डी आदिवासी बनीं अध्यक्ष श्योपुर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष गुड्डी आदिवासी को सहरिया विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल तीन साल का रहेगा। खास बात यह है कि अब तक घोषित नियुक्तियों में वे पहली महिला हैं, जिन्हें यह जिम्मेदारी मिली है। साथ ही उन्हें मंत्री का दर्जा भी दिया गया है। बंगाल की खाड़ी में चीन का ‘जासूसी जहाज’! Shi Yan 6 की एंट्री से भारत की टेंशन बढ़ी विभिन्न प्राधिकरणों में नेताओं की तैनाती सरकार ने संदीप जैन को जबलपुर विकास प्राधिकरण, वीरेंद्र गोयल को सिंगरौली विकास प्राधिकरण और डॉ. राघवेंद्र शर्मा को मध्य प्रदेश योग आयोग का अध्यक्ष बनाया है। इसके अलावा विनोद गोटिया को तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण, कौशल शर्मा को महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान और पंकज जोशी को खादी ग्राम उद्योग बोर्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कम खर्च, बड़ा असर,पचमढ़ी में सफाई की नई क्रांति: अब एक हाई-टेक गाड़ी करेगी 20 मजदूरों का काम जल्द जारी होंगे आदेश सरकार और बीजेपी संगठन की ओर से कई और नामों को मंजूरी मिल चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले हफ्ते में इनके औपचारिक नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिए जाएंगे। वहीं बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल रहे प्रवीण शर्मा का नाम भी मध्य प्रदेश युवा आयोग के लिए लगभग तय माना जा रहा है।
नितिन गडकरी ने किया MLFF टोलिंग लॉन्च; FASTag और AI कैमरों से होगी ऑटोमैटिक वसूली, जाम से मिलेगी राहत

नई दिल्ली। देश के हाईवे सफर को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुजरात के सूरत-भरूच सेक्शन (NH-48) पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लॉन्च किया। यह देश का पहला ऐसा टोल है, जहां वाहन बिना रुके 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरते हुए भी टोल चुका सकेंगे। नई तकनीक के तहत पारंपरिक टोल प्लाजा की तरह बैरियर नहीं होंगे। इसकी जगह ओवरहेड स्ट्रक्चर पर लगे हाई-टेक कैमरे और सेंसर गाड़ियों की पहचान करेंगे। FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के जरिए वाहन की जानकारी तुरंत पढ़ी जाएगी और टोल की रकम सीधे लिंक्ड खाते से कट जाएगी। खास बात यह है कि अगर किसी वाहन में FASTag नहीं लगा है या काम नहीं कर रहा, तो भी टोल वसूली नहीं रुकेगी। AI कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर वाहन मालिक को ई-नोटिस भेज देंगे, जिससे भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से हाईवे पर लगने वाले जाम में बड़ी कमी आएगी। वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे यात्रा समय घटेगा और ईंधन की भी बचत होगी। साथ ही प्रदूषण में कमी और टोल संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। मंत्री गडकरी ने कहा कि यह अत्याधुनिक सिस्टम देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति देगा। उनका कहना है कि आने वाले समय में इस तकनीक को देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जाएगा। इस पहल को भारत के टोल सिस्टम के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आम लोगों के सफर को ज्यादा तेज, सुविधाजनक और झंझटमुक्त बना सकता है।
दवाओं से आगे बढ़कर अपनाएं ये 4 जरूरी बदलाव, टाइप-2 डायबिटीज पर मिलेगा बेहतर नियंत्रण

नई दिल्ली। आज के दौर में टाइप-2 डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। हालांकि यह बीमारी गंभीर जरूर है, लेकिन सही आदतों को अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी उतने ही जरूरी हैं। सबसे पहले शरीर के वजन को संतुलित रखना बेहद आवश्यक है। बढ़ता हुआ वजन न केवल डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि इसे नियंत्रित करना भी मुश्किल बना देता है। इसलिए नियमित रूप से वजन की निगरानी करना और जरूरत के अनुसार उसे कम करने के प्रयास करना चाहिए। संतुलित वजन शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है। इसके साथ ही शारीरिक सक्रियता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तक व्यायाम करने से शरीर सक्रिय रहता है और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। तेज चलना, साइकिल चलाना, योग या हल्का व्यायाम जैसे विकल्प आसानी से अपनाए जा सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखती है और मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाती है। खानपान की भूमिका भी इस बीमारी को नियंत्रित करने में बेहद अहम है। संतुलित और पौष्टिक आहार लेने से शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और ब्लड शुगर अचानक बढ़ने से बचता है। भोजन में हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए। इसके साथ ही अधिक तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना भी जरूरी है। सही डाइट न केवल डायबिटीज को कंट्रोल करती है, बल्कि शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखती है। इसके अलावा कुछ आदतों से दूरी बनाना भी उतना ही जरूरी है, जो इस समस्या को बढ़ा सकती हैं। ज्यादा चीनी और सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित करना चाहिए। साथ ही तंबाकू का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। यह न केवल डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है, बल्कि हृदय और फेफड़ों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
Datia Halwai Customer Fight: हलवाई ने एडवांस लेने के बाद भी नहीं बनाया खाना, दतिया में हलवाई पर ग्राहक ने किया हमला

HIGHLIGHTS: एडवांस लेने के बाद खाना न बनाने पर विवाद बहस से शुरू होकर मारपीट तक पहुंचा मामला मंदिर के बाहर अफरा-तफरी का माहौल फूल विक्रेता भी विवाद में फंसे घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल Datia Halwai Customer Fight: मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के दतिया स्थित पीतांबरा पीठ मंदिर के बाहर शनिवार दोपहर उस समय हंगामा मच गया, जब एक हलवाई और ग्राहक पक्ष के बीच विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि हलवाई ने कार्यक्रम के लिए एडवांस राशि लेने के बावजूद तय समय पर खाना तैयार नहीं किया, जिससे नाराज ग्राहक मौके पर पहुंच गए। सिंगापुर में जुबिन गर्ग की मौत के मामले में पोत संचालकों पर उठे सवाल, समुद्र में डूबने से गई थी गायक की जान कहासुनी से हाथापाई तक पहुंचा मामला प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला इतना बढ़ गया कि मारपीट शुरू हो गई। मंदिर परिसर के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास मौजूद लोग खुद को बचाने की कोशिश करते नजर आए। बंगाल की खाड़ी में चीन का ‘जासूसी जहाज’! Shi Yan 6 की एंट्री से भारत की टेंशन बढ़ी फूल विक्रेता भी विवाद में घिरे विवाद के दौरान वहां मौजूद फूल विक्रेता भी इस झगड़े में उलझ गए और उनके साथ भी धक्का-मुक्की की गई। कुछ देर तक मंदिर के बाहर जमकर हंगामा चलता रहा, जिससे श्रद्धालुओं और दुकानदारों में दहशत फैल गई। GUNA LAND ENCROACHMENT: गुना में गरीब महिला की जमीन पर दोबारा कब्जा, वारंट के बाद भी खुला घूम रहा आरोपी पुलिस ने शुरू की जांच घटना के दौरान किसी व्यक्ति ने पूरा वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फिलहाल किसी भी पक्ष ने थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन पुलिस वायरल वीडियो और स्थानीय जानकारी के आधार पर मामले की जांच में जुटी हुई है।
बंगाल की खाड़ी में चीन का ‘जासूसी जहाज’! Shi Yan 6 की एंट्री से भारत की टेंशन बढ़ी

नई दिल्ली। भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बंगाल की खाड़ी में चीन की गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं। चीन का आधुनिक रिसर्च पोत Shi Yan 6 हाल ही में इस क्षेत्र में दाखिल हुआ है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि यह जहाज मालदीव में सप्लाई लेने के बाद लंबी समुद्री मिशन पर निकला और अब अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के करीब ऑपरेट कर रहा है। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषक Damien Symon के मुताबिक, यह पोत समुद्री अनुसंधान के नाम पर इलाके का विस्तृत डेटा इकट्ठा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डेटा का इस्तेमाल भविष्य में पनडुब्बी ऑपरेशन और सैन्य रणनीति में किया जा सकता है, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। Shi Yan 6 को आधिकारिक तौर पर एक वैज्ञानिक अनुसंधान पोत बताया जाता है, लेकिन भारत समेत कई देश इसे “ड्यूल-यूज” यानी शोध के साथ-साथ खुफिया जानकारी जुटाने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में देखते हैं। यह जहाज समुद्र की गहराई, तल की संरचना और जल प्रवाह जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने में सक्षम है। यह गतिविधि ऐसे समय में सामने आई है जब भारत ग्रेट निकोबार द्वीप पर अपना महत्वाकांक्षी Great Nicobar Project तेजी से विकसित कर रहा है। करीब 75,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट और टाउनशिप जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं, जिसे हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। बंगाल की खाड़ी भारत के लिए सिर्फ भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आर्थिक और सैन्य दृष्टि से भी बेहद अहम है। यह क्षेत्र भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का मुख्य केंद्र है और दक्षिण-पूर्व एशिया से कनेक्टिविटी का अहम मार्ग भी। साथ ही, यह मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंच का प्रमुख रास्ता है, जहां से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में उसकी बढ़ती मौजूदगी और प्रभाव को दर्शाती हैं। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक परियोजनाओं की निगरानी और मजबूत करे।
कम खर्च, बड़ा असर,पचमढ़ी में सफाई की नई क्रांति: अब एक हाई-टेक गाड़ी करेगी 20 मजदूरों का काम

मध्यप्रदेश/नर्मदापुरम। के पचमढ़ी में स्वच्छता को लेकर एक ऐसा बदलाव शुरू हुआ है, जिसने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने के तरीके को ही बदल दिया है। पहाड़ों और संकरे रास्तों के बीच जहां कचरा प्रबंधन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बना हुआ था, वहीं अब एक नई तकनीकी पहल ने इस समस्या का प्रभावी समाधान पेश किया है। यह बदलाव एक विशेष रूप से तैयार की गई 4×4 कचरा गाड़ी के जरिए संभव हुआ है। इस गाड़ी को ऐसे इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां सामान्य वाहन पहुंचने में असमर्थ रहते हैं। पचमढ़ी के ऊंचे-नीचे रास्ते, पथरीली जमीन और संकरी गलियां अब इस गाड़ी के लिए बाधा नहीं रहीं। यह वाहन उन स्थानों तक आसानी से पहुंच जाता है, जहां पहले सफाई करना बेहद कठिन होता था। इस गाड़ी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका हाइड्रोलिक सिस्टम है। इसकी मदद से कचरे को उठाना और खाली करना बेहद आसान हो गया है। पहले जहां सफाई कर्मियों को भारी मात्रा में कचरा अपने हाथों से उठाकर दूर तक ले जाना पड़ता था, वहीं अब यह प्रक्रिया काफी हद तक मशीन पर निर्भर हो गई है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि श्रमिकों को शारीरिक मेहनत से भी राहत मिल रही है। पचमढ़ी जैसे पर्यटन और धार्मिक महत्व वाले स्थान पर बड़े आयोजनों के दौरान सफाई एक गंभीर चुनौती बन जाती थी। नागद्वारी जैसे मेलों में हजारों लोग जुटते हैं, जिससे भारी मात्रा में कचरा इकट्ठा हो जाता है। पहले सफाई कर्मियों को कई किलोमीटर दूर से कचरा ढोकर लाना पड़ता था, जो बेहद कठिन और समय लेने वाला काम था। लेकिन अब यह नई गाड़ी एक ही चक्कर में बड़ी मात्रा में कचरा उठाकर ले जाने में सक्षम है। बताया जा रहा है कि यह गाड़ी अकेले ही 15 से 20 लोगों के काम के बराबर कार्य कर सकती है। इससे सफाई व्यवस्था में तेजी आई है और काम अधिक व्यवस्थित तरीके से होने लगा है। सबसे अहम बात यह है कि इससे सफाई कर्मियों का बोझ काफी कम हो गया है, जिससे उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ी है। इस पहल की एक और खासियत इसकी लागत है। सीमित बजट में तैयार की गई यह गाड़ी यह दर्शाती है कि बड़े बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। सही योजना और नवाचार के जरिए कम लागत में भी प्रभावी समाधान निकाले जा सकते हैं। अब पचमढ़ी में यह गाड़ी केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक मॉडल बन गई है, जिसे अन्य दुर्गम क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। यह पहल दिखाती है कि तकनीक का सही उपयोग न केवल समस्याओं को हल कर सकता है, बल्कि काम करने के तरीके को भी पूरी तरह बदल सकता है। इस तरह पचमढ़ी ने यह साबित कर दिया है कि इच्छाशक्ति और नवाचार के साथ किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है, और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी नई दिशा दी जा सकती है।
सिंगापुर में जुबिन गर्ग की मौत के मामले में पोत संचालकों पर उठे सवाल, समुद्र में डूबने से गई थी गायक की जान

नई दिल्ली। भारतीय गायक जुबिन गर्ग की डूबने की घटना ने नशे में धुत यात्रियों से निपटने के दौरान पोत संचालकों की जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह बात स्ट्रेट्स टाइम्स की रिपोर्ट में वकीलों के हवाले से कही गई है। रिपोर्ट में अन्य लोगों के साथ-साथ सिंगापुर की एक ला फर्म, ट्रायंगल लीगल के प्रबंध निदेशक निको ली का भी उल्लेख है, जिन्होंने सिंगापुर समुद्री और बंदरगाह प्राधिकरण (पोर्ट) के नियमों का हवाला दिया है। इसमें नशे में धुत यात्रियों को पोत पर चढ़ने से रोकने के प्रविधान हैं। क्या नशे में थे गायक?ली के अनुसार, पोत के मालिक, एजेंट या कप्तान को किसी भी ऐसे व्यक्ति को पोत पर चढ़ने की अनुमति नहीं देनी चाहिए, जो शराब या ड्रग्स के प्रभाव में हो और जिसका नशा पोत, चालक दल या किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा को खतरे में डालता हो। स्ट्रेट्स टाइम्स ने ली के हवाले से कहा, ”नागरिक दायित्व के संदर्भ में, यह तर्क दिया जा सकता है कि पोत का कप्तान लापरवाह है, क्योंकि सामान्य लापरवाही के सिद्धांतों के तहत पोत पर सवार मेहमानों के प्रति उसकी प्रथम दृष्ट्या देखभाल की जिम्मेदारी होती है।” व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण की मांगगर्ग के मामले का हवाला देते हुए ली ने कहा कि परिस्थितियां गंभीर थीं, क्योंकि पोत के नियंत्रक को पता था कि यात्री नशे में था। उन्होंने आगे कहा कि गायक ने सभी यात्रियों के लिए दी गई सुरक्षा संबंधी जानकारी को शायद समझा नहीं होगा। पोत संचालक किसी चालक दल के सदस्य को सीधे उसकी निगरानी के लिए नियुक्त कर सकते थे या यह सुनिश्चित कर सकते थे कि जब वह समझने में सक्षम हो, तब उसे व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण दिया जाए।
GUNA LAND ENCROACHMENT: गुना में गरीब महिला की जमीन पर दोबारा कब्जा, वारंट के बाद भी खुला घूम रहा आरोपी

HIGHLIGHTS: राघौगढ़ के डोंगर गांव का मामला प्रशासन हटाए कब्जे के बाद फिर अतिक्रमण SDM ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट महिला कोर्ट केस जीत चुकी आरोपी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर GUNA LAND ENCROACHMENT: मध्यप्रदेश। गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र के डोंगर गांव में एक गरीब महिला मनीषा बाई किरार की करीब ढाई बीघा जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। महिला कोर्ट से केस जीत चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वह अपनी ही जमीन पर न तो जा पा रही है और न ही खेती कर पा रही है। न्यूक्लियर डील से लेकर सीजफायर बातचीत तक, क्यों माने जाते हैं ईरान के सबसे भरोसेमंद कूटनीतिज्ञ प्रशासन की कार्रवाई के बाद फिर कब्जा महिला की शिकायत पर पहले तहसील कोर्ट ने कार्रवाई करते हुए जमीन को कब्जामुक्त कराया था। कुछ समय तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन बाद में आरोपी कैलाश और उसके बेटों ने फिर से जमीन पर कब्जा कर लिया। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। Donald Trump vs Iran: बढ़ता टकराव, ‘महायुद्ध’ की धमकी से वैश्विक तनाव चरम पर धमकी और दबाव के बीच न्याय की लड़ाई पीड़िता का आरोप है कि जब उसने जमीन वापस लेने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसे धमकाया और कब्जा छोड़ने से इनकार कर दिया। इसके चलते महिला पूरी तरह असहाय स्थिति में है और अपनी आजीविका के साधन से भी वंचित हो गई है। GUNA SIBLINGS DEATH: दीवार ढहने से दो मासूम भाइयों की मौत, खेलते-खेलते मलबे में दबे वारंट जारी के बाद भी आरोपी फरार मामले में SDM कोर्ट ने जांच के बाद जमीन को महिला की संपत्ति माना और 16 अप्रैल को आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। बावजूद इसके अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, पीड़िता ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर जमीन वापस दिलाने की मांग की है।