भारत–बांग्लादेश रिश्तों में सुधार की बड़ी पहल: वीजा सेवाएं फिर से पटरी पर लौटने लगीं

नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बाद अब रिश्तों में सुधार के संकेत साफ दिखने लगे हैं। दोनों देशों ने वीजा सेवाओं को फिर से सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे आपसी सहयोग और यात्रा व्यवस्था दोबारा मजबूत होने की उम्मीद है। वीजा बहाली की दिशा में अहम कदमढाका ने हाल ही में सभी श्रेणियों के लिए भारतीय नागरिकों को वीजा सेवाएं दोबारा शुरू कर दी हैं। वहीं भारत भी आने वाले हफ्तों में धीरे-धीरे अपनी वीजा सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने की तैयारी में है। पिछले महीनों में दोनों देशों के बीच कांसुलर गतिविधियों में तेजी देखी गई है। पिछले तनाव के बाद सुधार की शुरुआतअगस्त 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। हालांकि अब स्थिति बदलती दिख रही है और दोनों पक्ष कूटनीतिक संवाद को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वीजा सेवाओं की बहाली को इसी प्रक्रिया का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। भारत के वीजा केंद्र फिर सक्रियबांग्लादेश के सभी प्रमुख भारतीय वीजा केंद्र नई दिल्ली उच्चायोग और कोलकाता, अगरतला, मुंबई व चेन्नई स्थित कार्यालय अब पहले की तरह काम कर रहे हैं। ढाका को उम्मीद है कि भारत भी जल्द पूरी तरह सेवाएं शुरू कर देगा। उच्च स्तरीय बैठकों की संभावनासूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय राजनीतिक मुलाकातें भी हो सकती हैं। इससे आर्थिक सहयोग, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। व्यापार और यात्रा में राहतहाल के महीनों में भारत ने बांग्लादेश को ऊर्जा जरूरतों में सहयोग के तौर पर डीजल भी उपलब्ध कराया है। वीजा प्रक्रिया आसान होने से दोनों देशों के नागरिकों, व्यापारियों और मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। भविष्य की दिशाविशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सकारात्मक रुख जारी रहता है तो भारत और बांग्लादेश के रिश्ते एक नए स्थिर और सहयोगी दौर में प्रवेश कर सकते हैं। यह बदलाव क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए भी अहम माना जा रहा है।
11 मई से बदलेगा किस्मत का सितारा, रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के गोचर से 3 राशियों को होगा बड़ा आर्थिक फायदा

नई दिल्ली। मई 2026 में ग्रहों के राजा सूर्य एक अहम नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं, जिसका प्रभाव कई राशियों पर देखने को मिलेगा। 11 मई 2026 को सूर्य देव चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह नक्षत्र वृद्धि, समृद्धि और शुभ फल देने वाला माना जाता है। सूर्य का इस नक्षत्र में गोचर न सिर्फ मौसम में बदलाव लाता है, बल्कि आर्थिक रूप से कुछ राशियों के लिए लाभ के संकेत भी देता है। रोहिणी नक्षत्र का महत्वरोहिणी नक्षत्र आकाशमंडल का चौथा नक्षत्र है, जिसके स्वामी चंद्रमा और देवता ब्रह्मा माने जाते हैं। इसका प्रतीक बैलगाड़ी है, जो प्रगति, उन्नति और जिम्मेदारी को दर्शाता है। यह नक्षत्र सुख-सुविधा, कला, वैभव और धन-धान्य से जुड़ा हुआ है। सूर्य के इस नक्षत्र में प्रवेश को रोहिणी नौतपा की शुरुआत भी माना जाता है, जिससे गर्मी में वृद्धि होती है, लेकिन व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के लिए यह समय अनुकूल रहता है। इन 3 राशियों को होगा खास लाभ 1. वृषभ राशि (Taurus)रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि में स्थित होने के कारण सूर्य का यह गोचर इस राशि के जातकों के लिए बेहद शुभ रहेगा। व्यक्तित्व में निखार आएगा और आय के नए स्रोत विकसित होंगे। बचत में उल्लेखनीय वृद्धि के संकेत हैं। 2. सिंह राशि (Leo)सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं, इसलिए यह गोचर करियर और व्यवसाय के लिहाज से लाभकारी साबित होगा। नई निवेश योजनाएं सफल हो सकती हैं और आय के साधनों में विस्तार होगा, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। 3. धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि वालों के लिए यह परिवर्तन सुख-सुविधाओं में वृद्धि और आर्थिक स्थिरता लेकर आएगा। रुका हुआ धन मिलने के योग बन रहे हैं और वित्तीय योजनाएं सफल होने से भविष्य के लिए अच्छी बचत हो सकेगी।
अमेरिका में 16 साल तक अवैध रूप से रहने पर गुजरात के कारोबारी पर बड़ा एक्शन, 15 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना

नई दिल्ली। अमेरिका में लंबे समय तक अवैध रूप से रहने के मामले में एक भारतीय मूल के गुजराती कारोबारी पर बड़ी कार्रवाई की गई है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने उस पर करीब 1.8 मिलियन डॉलर यानी लगभग 15 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला इमिग्रेशन नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है। मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में हुई एंट्रीजानकारी के मुताबिक, यह कारोबारी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और पिछले 16 वर्षों से वहां अवैध रूप से रह रहायह मामला इमिग्रेशन नियमों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा बताया जा रहा है।मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में हुई एंट्रीजानकारी के मुताबिक, यह कारोबारी मेक्सिको के रास्ते अमेरिका में दाखिल हुआ था और पिछले 16 वर्षों से वहां अवैध रूप से रह था। जांच में सामने आया कि उसे कई साल पहले ही देश छोड़ने का आदेश दिया गया था, लेकिन उसने इस आदेश का पालन नहीं किया और लगातार अमेरिका में ही बना रहा। रोजाना जुर्माना बढ़ता गयाइमिग्रेशन एंड नेशनैलिटी एक्ट के तहत जारी नोटिस में कहा गया है कि डिपोर्टेशन ऑर्डर का पालन न करने की स्थिति में उस पर रोजाना जुर्माना लगाया गया। यह जुर्माना 998 डॉलर प्रतिदिन के हिसाब से तय किया गया, जो समय के साथ बढ़ते-बढ़ते लगभग 1.8 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। सख्त इमिग्रेशन नीति का हिस्सा कार्रवाईअमेरिकी प्रशासन अवैध प्रवासियों के खिलाफ हाल के वर्षों में सख्त रुख अपनाए हुए है। इस मामले को भी उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें लंबे समय तक आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाता है। मामला चर्चा में क्यों है?यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जुर्माने की रकम बेहद बड़ी है और यह साफ संकेत देता है कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम नियमों के उल्लंघन को लेकर बेहद सख्त कार्रवाई कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में संदेश दिया जाता है कि डिपोर्टेशन ऑर्डर की अनदेखी करना गंभीर आर्थिक परिणाम ला सकता है।
तेल संकट से घिरा पाकिस्तान, मंत्री ने की भारत की तारीफ, बोले- वह हमसे काफी आगे..

इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बढ़ते वैश्विक तेल संकट ने पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बीच पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर भारत की ऊर्जा तैयारियों की सराहना की है। उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के पास भारत जैसी मजबूत रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता नहीं है, जिसके कारण वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से अधिक प्रभावित हो रहा है। मलिक के अनुसार, पाकिस्तान के पास कच्चे तेल का भंडार बेहद सीमित है, जो केवल कुछ दिनों की जरूरत ही पूरी कर सकता है। इसके विपरीत, भारत के पास लगभग 60-70 दिनों का संयुक्त रणनीतिक और वाणिज्यिक तेल भंडार मौजूद है। हाल ही में कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित जहाजरानी के चलते हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं, जिसका असर पाकिस्तान पर ज्यादा पड़ रहा है। राहत के लिए करनी पड़ी गुप्त बातचीतपेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि आम लोगों को थोड़ी राहत देने के लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जैसे संस्थानों से गोपनीय स्तर पर बातचीत करनी पड़ी। बजट समझौतों के तहत देश को राजकोषीय घाटा कम करने के लिए ईंधन पर भारी कर लगाने पड़े। डीजल की कीमतों में 3-4 गुना वृद्धि के कारण पेट्रोल पर अतिरिक्त बोझ डालना पड़ा, वहीं मोटरसाइकिल चालकों को सब्सिडी देने से वित्तीय दबाव और बढ़ गया। ऊर्जा संकट से बढ़ी जनता की नाराजगीदेश में ऊर्जा संकट के चलते व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा पेट्रोल की कीमत में 80 पाकिस्तानी रुपये की कटौती कर इसे 378 रुपये प्रति लीटर करने के बावजूद, इससे पहले हुई 42.7% की वृद्धि ने कीमत को 321.17 रुपये से बढ़ाकर 458.41 रुपये तक पहुंचा दिया था। इससे देशभर में विरोध प्रदर्शन और ईंधन की कमी की स्थिति पैदा हो गई। भारत से तुलना पर बोले मंत्रीमलिक ने साफ तौर पर कहा कि भारत इस मामले में पाकिस्तान से काफी आगे है। उन्होंने कहा कि भारत के पास 60-70 दिनों का तेल भंडार है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत उपयोग में लाया जा सकता है, जबकि पाकिस्तान के पास एक दिन का भी पर्याप्त पेट्रोल भंडार नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा स्थिति और बेहतर रणनीतिक योजना उसे ऐसे संकटों से निपटने में सक्षम बनाती है।आईएमएफ पर निर्भरता बनी चुनौतीमलिक ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति आईएमएफ पर निर्भर है, जबकि भारत इस तरह के किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है। भारत ने तेल की कीमतों में वृद्धि के दौरान करों में कमी कर स्थिति को नियंत्रित किया, जबकि पाकिस्तान के पास ऐसा करने की वित्तीय स्वतंत्रता नहीं है। एक इंटरव्यू में मलिक ने बताया कि पाकिस्तान के पास केवल वाणिज्यिक तेल भंडार हैं। कच्चा तेल अधिकतम 5-7 दिन ही चल सकता है, जबकि रिफाइंड उत्पादों का स्टॉक करीब 20-21 दिनों का है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात और बिगड़े, तो देश की ऊर्जा व्यवस्था पर गंभीर संकट आ सकता है।
Gwalior KMJ Chitfund case: KMJ चिटफंड पर 14 साल बाद शिकंजा; 55 करोड़ की 35 संपत्तियां नीलाम

HIGHLIGHTS: 14 साल बाद KMJ चिटफंड केस में बड़ा कदम 35 संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया शुरू करीब 55 करोड़ की सरकारी कीमत, बोली 75 करोड़ तक संभव निवेशकों को रकम वापसी की प्रक्रिया तेज टैक्स और EPFO दावों से भुगतान प्रभावित होने की आशंका Gwalior KMJ Chitfund case: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में हजारों निवेशकों के साथ ठगी करने वाली KMJ चिटफंड कंपनी के खिलाफ आखिरकार 14 साल बाद कार्रवाई तेज हो गई है। झांसी रोड क्षेत्र में एसडीएम द्वारा नीलामी के आदेश जारी किए गए हैं, जिसके तहत कंपनी की 35 संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अन्य क्षेत्रों में भी जल्द ही नीलामी की सूचना जारी की जाएगी। क्या सर्वाइकल कैंसर दुनिया से खत्म हो जाएगा? ऑस्ट्रेलिया की सफलता से भारत के लिए बड़ी सीख और नई उम्मीद सम्पत्तियों की कीमत 55 करोड़ इन संपत्तियों की अनुमानित सरकारी कीमत करीब 55 करोड़ रुपए आंकी गई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खुली नीलामी में यह कीमत 70 से 75 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। नीलामी से प्राप्त राशि को निवेशकों को लौटाने की प्रक्रिया में उपयोग किया जाएगा, जिससे वर्षों से फंसी उनकी पूंजी वापस मिलने की संभावना बढ़ेगी। ट्रंप का नया दावा: भारत-पाकिस्तान जंग रुकवाने के पीछे टैरिफ की धमकी, भारत ने फिर किया खंडन ठगी का पुराना मामला KMJ चिटफंड कंपनी ने लोगों को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर निवेश कराया था। वर्ष 2011 में मैच्योरिटी पूरी होने पर कंपनी संचालक फरार हो गए थे, जिसके बाद निवेशकों को लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा। अब जिला न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद संपत्तियों की बिक्री का रास्ता साफ हो गया है, जिससे मामले में नई उम्मीद जगी है। पेंटागन का 7 बड़ी टेक कंपनियों से एआई समझौता, सैन्य रणनीति में होंगे बड़े बदलाव, भारत के लिए भी अवसर भुगतान पर अन्य दावों का असर संभव हालांकि निवेशकों को मिलने वाली राशि पर आयकर विभाग और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का प्राथमिक दावा हो सकता है। यदि इन विभागों की देनदारी अधिक रही, तो निवेशकों को मिलने वाली रकम प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद प्रशासन से पारदर्शी नीलामी की उम्मीद की जा रही है, ताकि अधिकतम राशि जुटाकर पीड़ितों को जल्द राहत दी जा सके।
ट्रंप का बड़ा बयान: ‘पागलों के हाथ में एटम बम नहीं दे सकते’, ईरान को लेकर फिर सख्त रुख

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को लेकर बेहद सख्त और विवादित बयान दिया है। फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, क्योंकि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मिडिल ईस्ट को उन्होंने एक बड़े परमाणु संकट से बचाया है। ईरान को परमाणु हथियार से रोकने पर जोरट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो ईरान के पास परमाणु हथियार होते और इसका असर इजराइल, यूरोप और पूरे मिडिल ईस्ट पर विनाशकारी हो सकता था। उनके मुताबिक, हम ऐसे लोगों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं जाने दे सकते जिन्हें वह ‘पागल’ बता रहे हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को बातचीत से पहले अपने एनरिच्ड यूरेनियम को सौंपना होगा, तभी किसी भी तरह की डिप्लोमैटिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। ईरान के प्रस्ताव पर असहमतिव्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, ईरान ने हाल ही में जो नया प्रस्ताव भेजा था, उसमें परमाणु कार्यक्रम का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। इसी बात से ट्रंप प्रशासन असंतुष्ट है। वहीं ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जबकि परमाणु मुद्दे पर बाद में बातचीत की जा सकती है।ट्रंप का रुख है कि दोनों मुद्दों को एक साथ हल किया जाना चाहिए, न कि अलग-अलग। सैन्य कार्रवाई पर भी सख्त संकेतट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने ऐसे मांग करने वालों को “देशभक्त नहीं” बताया। यह बयान अमेरिकी राजनीतिक हलकों में नए विवाद को जन्म दे सकता है। मिडिल ईस्ट तनाव और वैश्विक असरअमेरिका ने दावा किया है कि ईरान से जुड़े तनाव के चलते होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही करीब 90% तक कम हो गई है। पहले जहां रोजाना लगभग 130 जहाज गुजरते थे, अब यह संख्या 10 से भी कम रह गई है। इस स्थिति ने वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर डाला है। इसके अलावा अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी कंपनियां ईरान को इस क्षेत्र से गुजरने के लिए वित्तीय सहायता देंगी, उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, चाहे वह सहायता किसी चैरिटी के नाम पर ही क्यों न हो। स्थिति अभी भी तनावपूर्णव्हाइट हाउस ने हालांकि यह भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष में कुछ हद तक कमी आई है, लेकिन अमेरिकी सेना अभी भी क्षेत्र में सक्रिय है। इसी बीच ट्रंप प्रशासन लगातार यह संदेश दे रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार किसी भी कीमत पर नहीं मिलने दिए जाएंगे।
क्या सर्वाइकल कैंसर दुनिया से खत्म हो जाएगा? ऑस्ट्रेलिया की सफलता से भारत के लिए बड़ी सीख और नई उम्मीद

नई दिल्ली। सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर दुनिया की महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक बना हुआ है, लेकिन अब इसे लेकर एक बड़ी उम्मीद भी सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ने इस बीमारी को खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, जिससे दुनिया भर में इसके उन्मूलन की चर्चा तेज हो गई है। भारत की रहने वाली 40 वर्षीय सुनीता की कहानी इस बीमारी की गंभीरता को दर्शाती है। लगातार थकान और असामान्य रक्तस्राव को उन्होंने सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन बाद में पता चला कि वह एडवांस स्टेज सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हैं। देर से इलाज मिलने के कारण उनकी जान नहीं बच सकी। भारत में ऐसी लाखों महिलाएं हर साल इस बीमारी का शिकार बनती हैं, जिसका प्रमुख कारण जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होना है।ऑस्ट्रेलिया ने कैसे बदली तस्वीरऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो सर्वाइकल कैंसर को लगभग खत्म कर सकता है। यह बीमारी मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होती है। ऑस्ट्रेलिया ने 2006 में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में विकसित HPV वैक्सीन ‘गार्डासिल’ को बड़े पैमाने पर लागू किया। 2007 में वहां राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसके तहत 12-13 वर्ष की उम्र के बच्चों को स्कूलों में मुफ्त वैक्सीन दी जाने लगी। 2013 से यह कार्यक्रम लड़कों के लिए भी लागू किया गया, ताकि वायरस के फैलाव को रोका जा सके। इसके साथ ही 2017 में ऑस्ट्रेलिया ने पारंपरिक पैप स्मीयर टेस्ट की जगह अधिक प्रभावी HPV-आधारित स्क्रीनिंग शुरू की, जो हर पांच साल में एक बार की जाती है। महिलाओं को खुद सैंपल लेने का विकल्प भी दिया गया, जिससे जांच की पहुंच और आसान हो गई। ‘कैंसर खत्म’ का मतलब क्या है?चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बीमारी को खत्म करने का मतलब पूरी तरह शून्य केस नहीं, बल्कि प्रति 1 लाख लोगों पर 4 से कम मामले होना है। ऑस्ट्रेलिया फिलहाल इस लक्ष्य के बेहद करीब है और 2035 से पहले इसे हासिल कर सकता है। 2021 में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि 25 वर्ष से कम उम्र की किसी भी महिला में सर्वाइकल कैंसर का नया मामला वहां दर्ज नहीं हुआ। वैश्विक स्तर पर प्रयास तेजस्वीडन और रवांडा जैसे देश 2027 तक इस बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य रख रहे हैं, जबकि ब्रिटेन 2040 तक इसे समाप्त करने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि विकासशील देशों के लिए यह चुनौती अभी भी बड़ी है, क्योंकि वैक्सीन और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित है। भारत के लिए बड़ी उम्मीदभारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। लेकिन हाल के वर्षों में इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। देश ने अपनी स्वदेशी HPV वैक्सीन ‘सर्वावैक’ विकसित की है, जिससे टीकाकरण अधिक किफायती और सुलभ हो गया है। सरकार 9 से 14 वर्ष की किशोरियों को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर टीकाकरण और नियमित जांच से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
ट्रंप का नया दावा: भारत-पाकिस्तान जंग रुकवाने के पीछे टैरिफ की धमकी, भारत ने फिर किया खंडन

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर यह दावा दोहराया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित सैन्य टकराव को रोकने में भूमिका निभाई थी। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने दोनों देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी देकर स्थिति को शांत कराया था। हालांकि भारत ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कहा है कि संघर्षविराम किसी तीसरे देश के दबाव से नहीं, बल्कि सीधे सैन्य स्तर की बातचीत के बाद हुआ था। ट्रंप का दावा क्या है?ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अब तक कई युद्धों को रोका है, जिनमें भारत-पाकिस्तान तनाव भी शामिल है। उनके अनुसार, उस समय हालात इतने गंभीर थे कि परमाणु संघर्ष का खतरा पैदा हो गया था।ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि अगर लड़ाई जारी रही तो अमेरिका व्यापारिक प्रतिबंध और टैरिफ लगा सकता है। उनके मुताबिक, इसी दबाव में स्थिति शांत हुई। भारत का स्पष्ट जवाबभारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों को पहले भी कई बार नकारा है और इस बार भी वही रुख दोहराया है। भारत का कहना है कि संघर्षविराम का निर्णय दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के बाद हुआ था। भारतीय पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी विदेशी देश की मध्यस्थता या दबाव की भूमिका नहीं थी। “ऑपरेशन सिंदूर” और तनाव की पृष्ठभूमिभारत ने हाल के घटनाक्रम में सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ “ऑपरेशन सिंदूर” जैसी कार्रवाई की थी, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा, लेकिन बाद में बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया गया। भारत के अनुसार, इसी प्रक्रिया के तहत संघर्षविराम पर सहमति बनी। पाकिस्तान का रुख और अंतरराष्ट्रीय बयानबाजीपाकिस्तान ने ट्रंप के दावों का समर्थन करते हुए उन्हें “मध्यस्थता” का श्रेय दिया था। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी अमेरिका की भूमिका की सराहना की थी।इसके उलट, भारत लगातार यह कहता रहा है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है और बाहरी हस्तक्षेप की कोई भूमिका नहीं रही। ट्रंप के बार-बार बदलते दावेडोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान तनाव को रोका था। हर बार भारत ने इन बयानों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक राजनीति में व्यापारिक नीतियों और टैरिफ को लेकर फिर से बहस तेज है। भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर अमेरिका के दावों और भारत के आधिकारिक रुख में स्पष्ट अंतर बना हुआ है। जहां ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक सफलता बताते हैं, वहीं भारत इसे पूरी तरह द्विपक्षीय सैन्य संवाद का परिणाम मानता है।
GWALIOR COLLECTOR ORDERS: ग्वालियर में तांगा और बैल गाड़ी पर लगा ब्रेक, भीषण गर्मी के कारण कलेक्टर ने दिए आदेश

HIGHLIGHTS: दोपहर 12 से 4 बजे तक पशुओं से काम कराने पर रोक कलेक्टर रुचिका चौहान ने जारी किया आदेश तांगा, बैलगाड़ी समेत सभी भारवाही गतिविधियां बंद हीट स्ट्रेस से बचाने के लिए लिया गया फैसला 30 जून 2026 तक लागू रहेगा आदेश GWALIOR COLLECTOR ORDERS: ग्वालियर। बढ़ती भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने पशुओं के हित में बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रुचिका चौहान ने आदेश जारी कर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक पशुओं से किसी भी प्रकार का काम कराने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले का मकसद पशुओं को तेज धूप और लू से बचाना है। GWALIOR TIGRA DAM: बरगी हादसे के बाद ग्वालियर प्रशासन अलर्ट; तिघरा डैम पर सख्त जांच, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद तापमान बढ़ने से बढ़ा खतरा जिले में इन दिनों तापमान लगातार 37 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। ऐसी स्थिति में तांगा, बैलगाड़ी, ऊंट गाड़ी, खच्चर, टट्टू और गधों जैसे पशुओं से काम लेना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान किसी भी तरह की सवारी या भारवाही गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। पेंटागन का 7 बड़ी टेक कंपनियों से एआई समझौता, सैन्य रणनीति में होंगे बड़े बदलाव, भारत के लिए भी अवसर हीट स्ट्रेस का जोखिम पशु विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी में काम करने से पशुओं में हीट स्ट्रेस बढ़ जाता है, जिससे उनकी हालत बिगड़ सकती है। कई मामलों में यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है, ताकि पशुओं को अनावश्यक तकलीफ से बचाया जा सके। दिल की बीमारी अब महिलाओं के लिए भी बड़ा खतरा, हल्के संकेतों को न करें नजरअंदाज 30 जून तक लागू आदेश यह आदेश 1 मई 2026 से लागू होकर 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और पशुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
GWALIOR TIGRA DAM: बरगी हादसे के बाद ग्वालियर प्रशासन अलर्ट; तिघरा डैम पर सख्त जांच, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

HIGHLIGHTS: तिघरा बोट क्लब का प्रशासन ने किया निरीक्षण लाइफ जैकेट अनिवार्य, बिना जैकेट प्रवेश पर रोक मौसम अलर्ट सिस्टम को किया जा रहा मजबूत रेस्क्यू और इमरजेंसी प्लान की समीक्षा कई विभागों की संयुक्त टीम रही मौजूद GWALIOR TIGRA DAM: ग्वालियर। जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर दिया है। तेज आंधी के चलते क्रूज डूबने से नौ लोगों की मौत के बाद प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस घटना के बाद प्रदेशभर के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। पेंटागन का 7 बड़ी टेक कंपनियों से एआई समझौता, सैन्य रणनीति में होंगे बड़े बदलाव, भारत के लिए भी अवसर तिघरा डैम पर प्रशासन एक्शन मोड में ग्वालियर के प्रसिद्ध तिघरा जलाशय पर प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर एक संयुक्त टीम ने बोट क्लब का निरीक्षण किया। टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक न हो, इसके लिए सख्त निर्देश दिए। दिल की बीमारी अब महिलाओं के लिए भी बड़ा खतरा, हल्के संकेतों को न करें नजरअंदाज सुरक्षा मानकों की सख्त जांच निरीक्षण के दौरान लाइफ जैकेट की उपलब्धता, बोट संचालन के नियम और यात्रियों की संख्या नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना लाइफ जैकेट किसी भी पर्यटक को नाव में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही मौसम से जुड़े अलर्ट सिस्टम को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए। वैदिक घड़ी ने रचा नया कीर्तिमान, 78 लाख से अधिक लोगों तक पहुंची भारतीय कालगणना की पहचान इमरजेंसी प्लान और समन्वय पर जोर आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और स्टाफ की ट्रेनिंग की भी समीक्षा की गई। एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।