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Gwalior KMJ Chitfund case: KMJ चिटफंड पर 14 साल बाद शिकंजा; 55 करोड़ की 35 संपत्तियां नीलाम

gwalior high court

HIGHLIGHTS:

  • 14 साल बाद KMJ चिटफंड केस में बड़ा कदम
  • 35 संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया शुरू
  • करीब 55 करोड़ की सरकारी कीमत, बोली 75 करोड़ तक संभव
  • निवेशकों को रकम वापसी की प्रक्रिया तेज
  • टैक्स और EPFO दावों से भुगतान प्रभावित होने की आशंका

 

Gwalior KMJ Chitfund case: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में हजारों निवेशकों के साथ ठगी करने वाली KMJ चिटफंड कंपनी के खिलाफ आखिरकार 14 साल बाद कार्रवाई तेज हो गई है। झांसी रोड क्षेत्र में एसडीएम द्वारा नीलामी के आदेश जारी किए गए हैं, जिसके तहत कंपनी की 35 संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अन्य क्षेत्रों में भी जल्द ही नीलामी की सूचना जारी की जाएगी।

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सम्पत्तियों की कीमत 55 करोड़

इन संपत्तियों की अनुमानित सरकारी कीमत करीब 55 करोड़ रुपए आंकी गई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि खुली नीलामी में यह कीमत 70 से 75 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। नीलामी से प्राप्त राशि को निवेशकों को लौटाने की प्रक्रिया में उपयोग किया जाएगा, जिससे वर्षों से फंसी उनकी पूंजी वापस मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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ठगी का पुराना मामला

KMJ चिटफंड कंपनी ने लोगों को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर निवेश कराया था। वर्ष 2011 में मैच्योरिटी पूरी होने पर कंपनी संचालक फरार हो गए थे, जिसके बाद निवेशकों को लंबे समय तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा। अब जिला न्यायालय से मंजूरी मिलने के बाद संपत्तियों की बिक्री का रास्ता साफ हो गया है, जिससे मामले में नई उम्मीद जगी है।

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भुगतान पर अन्य दावों का असर संभव

हालांकि निवेशकों को मिलने वाली राशि पर आयकर विभाग और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का प्राथमिक दावा हो सकता है। यदि इन विभागों की देनदारी अधिक रही, तो निवेशकों को मिलने वाली रकम प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद प्रशासन से पारदर्शी नीलामी की उम्मीद की जा रही है, ताकि अधिकतम राशि जुटाकर पीड़ितों को जल्द राहत दी जा सके।

 

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