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सुनील पाल ने समय रैना को कहा 'आतंकवादी' और समय ने सरेआम कर दिया रोस्ट

नई दिल्ली। टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ का ताजा एपिसोड हंसी के ठहाकों से ज्यादा तीखी नोकझोंक और पुरानी रंजिशों के सुलझने का गवाह बना। इस बार शो के मंच पर आधुनिक दौर के ‘रोस्ट किंग’ समय रैना और पुराने दौर के दिग्गज कॉमेडियन सुनील पाल का आमना-सामना हुआ। दोनों के बीच का विवाद जगजाहिर है, लेकिन कपिल शर्मा के शो पर जब ये दोनों आमने-सामने आए, तो माहौल में तनाव और हंसी का मिला-जुला तड़का देखने को मिला। समय रैना, जो रणवीर इलाहाबादिया के साथ पहुंचे थे, सुनील पाल की सरप्राइज एंट्री देखकर हैरान रह गए। विवाद की जड़ उस समय की है जब सुनील पाल ने समय रैना के ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ जैसे शो और उनकी कॉमेडी शैली की कड़ी आलोचना की थी। बात इतनी बढ़ गई थी कि सुनील पाल ने सार्वजनिक तौर पर समय रैना को ‘आतंकवादी’ तक कह दिया था। शो के दौरान जब कपिल शर्मा ने इस कड़वाहट पर सवाल किया और मजाकिया लहजे में पूछा कि समय ने कब मुंह से ग्रेनेड फेंके जो उन्हें ऐसा टैग दिया गया, तो सुनील पाल अपने स्टैंड पर अडिग दिखे। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि समय जो कंटेंट परोसते हैं, वह समाज की समझ से परे है और जो समाज की मुख्यधारा में फिट नहीं बैठता, वह उनके लिए किसी आतंकवादी से कम नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि समय अगर मुंह से ग्रेनेड मार देते तो शायद वह सह लिया जाता, लेकिन उनकी बातें असहनीय होती हैं। समय रैना ने भी इस वार का जवाब अपने ही अंदाज में दिया। उन्होंने सुनील पाल की बातों का बुरा मानते हुए कहा कि एक कलाकार के तौर पर उन्हें तब सबसे ज्यादा दुख होता है जब इंडस्ट्री के सीनियर लोग मुश्किल समय में साथ देने के बजाय विरोध में खड़े हो जाते हैं। हालांकि, माहौल को हल्का करने के लिए समय ने सुनील पाल को जबरदस्त रोस्ट भी किया। जब सुनील पाल ने गाली-गलौज वाली कॉमेडी पर तंज कसा, तो समय ने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने सारी गालियां सुनील पाल के वीडियो के कमेंट सेक्शन से सीखी हैं। इस दौरान अर्चना पूरन सिंह ने भी बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन दोनों कॉमेडियन्स के बीच की वैचारिक जंग पूरी तरह हावी रही। कपिल शर्मा ने पूरे एपिसोड के दौरान दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश की। समय ने अपनी शिकायतें सामने रखीं और बताया कि कैसे विवादों के समय उन्हें अपनों के साथ की कमी खली। अंत में, यह एपिसोड न केवल मनोरंजन से भरपूर रहा, बल्कि इसने कॉमेडी के दो अलग-अलग दौर के बीच की गहरी खाई और कंटेंट को लेकर बदलते नजरिए को भी बखूबी दिखाया। सुनील पाल की पुरानी परंपरा और समय रैना की मॉडर्न ‘डार्क कॉमेडी’ का यह टकराव लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

सोशल मीडिया से कमाई का नया रास्ता: Instagram-YouTube के अलावा इन ऐप्स पर भी बरस रहा पैसा

नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दुनिया अब सिर्फ Instagram और YouTube तक सीमित नहीं रही, बल्कि नए-नए प्लेटफॉर्म्स ने कमाई के दरवाजे और ज्यादा खोल दिए हैं। आज के डिजिटल दौर में शॉर्ट वीडियो यानी रील्स सिर्फ टाइमपास नहीं बल्कि एक मजबूत इनकम सोर्स बन चुके हैं। खास बात यह है कि अब Moj, Josh, Snapchat, Facebook और Chingari जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी क्रिएटर्स तेजी से उभर रहे हैं और मोटी कमाई कर रहे हैं। इन ऐप्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां कॉम्पिटिशन अपेक्षाकृत कम है, जिससे नए यूजर्स को जल्दी ग्रो करने का मौका मिलता है और उनके वीडियो ज्यादा लोगों तक पहुंचते हैं। कमाई का तरीका भी अब सिर्फ व्यूज तक सीमित नहीं रहा। क्रिएटर्स ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप, एफिलिएट मार्केटिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए कई सोर्स से पैसा कमा रहे हैं। जैसे-जैसे फॉलोअर्स बढ़ते हैं, ब्रांड्स खुद संपर्क करने लगते हैं और प्रमोशन के लिए अच्छी रकम ऑफर करते हैं। कुछ प्लेटफॉर्म्स तो बोनस और रिवॉर्ड सिस्टम भी देते हैं, जिससे इनकम और बढ़ जाती है। अगर तेजी से ग्रो करना है तो सिर्फ ट्रेंड फॉलो करना काफी नहीं, बल्कि कंटेंट में अपनी अलग पहचान बनानी होगी। नियमित पोस्टिंग, सही टाइमिंग, ट्रेंडिंग म्यूजिक और ऑडियंस से जुड़ाव—ये सभी फैक्टर मिलकर आपके वीडियो को वायरल बना सकते हैं। साथ ही, कॉपी या भ्रामक कंटेंट से बचना जरूरी है क्योंकि अब एल्गोरिदम ओरिजिनल और क्रिएटिव कंटेंट को ज्यादा प्रमोट करता है। दरअसल, यही वजह है कि अब क्रिएटर्स सिर्फ एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि कई ऐप्स पर एक साथ एक्टिव रहकर अपनी कमाई और पहचान दोनों बढ़ा रहे हैं। अगर सही रणनीति और लगातार मेहनत की जाए, तो आज का डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी आम यूजर को बड़ा कंटेंट क्रिएटर बना सकता है

अब लंबे नाखून भी बनेंगे स्मार्ट: नई ‘टच पॉलिश’ से फोन चलाना होगा आसान

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी और ब्यूटी का दिलचस्प मेल अब एक नई क्रांति की ओर बढ़ता दिख रहा है। लंबे नाखून रखने वालों के लिए स्मार्टफोन चलाना अब परेशानी नहीं रहेगा, क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खास नेल पॉलिश विकसित की है, जो नाखूनों को स्टाइलस की तरह काम करने में सक्षम बना सकती है। दरअसल, टचस्क्रीन डिवाइस आमतौर पर हमारी उंगलियों के जरिए काम करते हैं, क्योंकि उंगलियों में मौजूद नमी और कंडक्टिव गुण स्क्रीन के इलेक्ट्रिक फील्ड को प्रभावित करते हैं। लेकिन नाखून कंडक्टिव नहीं होते, इसलिए उनसे स्क्रीन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। यही वजह है कि लंबे नाखून रखने वालों को टाइपिंग और नेविगेशन में दिक्कत होती है। इस समस्या का समाधान Centenary College of Louisiana की रिसर्च टीम ने खोजा है। वैज्ञानिकों ने एक खास एडिटिव तैयार किया है, जिसे नेल पॉलिश में मिलाकर लगाया जा सकता है। इस मिश्रण में एथेनोलामाइन और टॉरिन जैसे तत्व शामिल हैं, जो टचस्क्रीन के इलेक्ट्रिक फील्ड को प्रभावित कर सकते हैं। जब इस पॉलिश को नाखूनों पर लगाया जाता है, तो नाखून भी स्क्रीन के साथ उसी तरह इंटरैक्ट करने लगते हैं जैसे उंगलियां या स्टाइलस करते हैं। यानी अब लंबे नाखून रखने वाले लोग भी बिना किसी परेशानी के स्मार्टफोन चला सकेंगे हे मैसेज टाइप करना हो या ऐप्स इस्तेमाल करना। हालांकि, यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसे बाजार में आने से पहले और परीक्षणों की जरूरत है। लेकिन अगर यह सफल होती है, तो यह न केवल ब्यूटी इंडस्ट्री बल्कि मोबाइल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के तरीके को भी बदल सकती है।

जब दिग्गज गायक ने एक नए अभिनेता के लिए अपनी फीस से किया था बड़ा समझौता..

नई दिल्ली। अस्सी के दशक में जब बॉलीवुड की गलियों में एक नया लड़का अपनी थिरकन और मासूमियत से पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा सितारा उसके लिए अपनी शर्तें बदल देगा। यह कहानी है ‘चीची’ यानी गोविंदा और किशोर कुमार के उस अनकहे रिश्ते की, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में सफलता के नए मायने लिखे। साल 1986 में जब गोविंदा ने फिल्म ‘लव 86’ और ‘इल्जाम’ के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, तब वह महज एक उभरते हुए कलाकार थे। उनके पास टैलेंट तो था, लेकिन उस समय के सबसे महंगे और दिग्गज गायक किशोर कुमार की आवाज पाना उनके लिए एक सुनहरे सपने जैसा था। फिल्म ‘ड्यूटी’ गोविंदा के शुरुआती करियर की एक ऐसी फिल्म थी, जिसका बजट बेहद सीमित था। फिल्म के निर्देशक रविकांत नगैच और संगीतकार बाबला शाह इस बात को लेकर बेहद चिंतित थे कि इतने कम बजट में फिल्म को बड़े स्तर पर कैसे प्रमोट किया जाए। इसी बीच गोविंदा ने एक ऐसी मांग रख दी जिसने मेकर्स के पसीने छुड़ा दिए। गोविंदा चाहते थे कि फिल्म के दो महत्वपूर्ण गानों को केवल किशोर कुमार ही अपनी आवाज दें। गोविंदा का मानना था कि यदि किशोर दा जैसा बड़ा नाम उनके साथ जुड़ जाएगा, तो न केवल फिल्म की वैल्यू बढ़ जाएगी, बल्कि एक नए अभिनेता के तौर पर उन्हें इंडस्ट्री में वह गंभीरता मिलेगी जिसकी उन्हें तलाश थी। चुनौती यह थी कि किशोर कुमार उस दौर के सबसे व्यस्त और महंगे गायक थे। फिल्म का बजट इतना कम था कि निर्माता एक बड़े विलेन तक को कास्ट नहीं कर पा रहे थे, ऐसे में किशोर कुमार की भारी-भरकम फीस चुकाना नामुमकिन लग रहा था। जब संगीत निर्देशक बाबला शाह ने यह बात कल्याणजी-आनंदजी को बताई, तो कहानी में एक नया मोड़ आया। दरअसल, बाबला शाह दिग्गज संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के छोटे भाई थे। अपने भाई के भविष्य और गोविंदा के जुनून को देखते हुए कल्याणजी-आनंदजी ने किशोर कुमार से खास सिफारिश की। किशोर दा के संबंध इस जोड़ी से बेहद मधुर थे, इसलिए उन्होंने मित्रता और सम्मान के खातिर अपनी फीस काफी कम कर दी और गानों के लिए हामी भर दी। किशोर कुमार ने इस फिल्म के लिए ‘जिस महफिल में आता हूं’ और ‘तुम जिसे चाहो’ जैसे दो शानदार गाने गाए। इन गानों के रिलीज होते ही संगीत प्रेमियों के बीच तहलका मच गया। किशोर दा की जादुई आवाज और पर्दे पर गोविंदा के बेहतरीन डांस मूव्स ने वह जादू पैदा किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। इन गानों की सफलता ने गोविंदा को रातों-रात सुपरस्टार्स की कतार में खड़ा कर दिया। इसके बाद गोविंदा और किशोर कुमार की जोड़ी ने कई यादगार नगमे दिए, लेकिन फिल्म ‘ड्यूटी’ के वे दो गाने हमेशा इस बात के गवाह रहेंगे कि कैसे एक दिग्गज कलाकार ने अपनी दरियादिली से एक उभरते हुए सितारे की तकदीर बदल दी थी।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान फिर आमने-सामने: ‘कोई सीजफायर नहीं’, सीमा पर बढ़ा युद्ध का खतरा

नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हालिया घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी थमा नहीं है, बल्कि किसी बड़े टकराव की आशंका फिर से गहराने लगी है। इस्लामाबाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अफगानिस्तान के साथ फिलहाल कोई सीजफायर लागू नहीं है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि ईद के दौरान जो युद्धविराम हुआ था, वह सिर्फ तीन दिन का अस्थायी समझौता था, जो अब समाप्त हो चुका है। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान फिर से सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। दरअसल, फरवरी और मार्च के दौरान दोनों देशों के बीच जबरदस्त सैन्य टकराव देखने को मिला था। तालिबान और पाकिस्तानी सेना के बीच सीमा पर कई दिनों तक भीषण झड़पें हुईं। यह संघर्ष तब भड़का, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर एयर स्ट्राइक की, जिसके जवाब में तालिबान ने सीमा पार हमले किए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया था। हालात को देखते हुए ईद से पहले अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन अब पाकिस्तान के ताजा बयान ने उस समझौते को पूरी तरह खत्म मान लिया है। इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी आतंकी संगठनों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, द्वारा किया जा रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों में उसके नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, अफगानिस्तान की ओर से इन आरोपों को लगातार खारिज किया जाता रहा है। वहीं भारत पर लगाए गए आरोपों को भी नई दिल्ली ने सिरे से नकार दिया है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान के ‘नो सीजफायर’ वाले बयान ने यह संकेत दे दिया है कि सीमा पर शांति फिलहाल दूर की बात है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो दोनों देशों के बीच फिर से बड़े सैन्य टकराव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हॉलीवुड के मंच पर अब भारतीय फिल्मों का होगा दबदबा? अकादमी के नए नियमों ने पलटी वैश्विक सिनेमा की बाजी

नई दिल्ली। अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज ने 2027 में आयोजित होने वाले 99वें ऑस्कर अवॉर्ड समारोह के लिए जो नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, वे वैश्विक फिल्म उद्योग की नींव हिलाने वाले साबित हो सकते हैं। इन नियमों में सबसे क्रांतिकारी बदलाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के उपयोग को लेकर किया गया है। अब फिल्म निर्माताओं को यह अनिवार्य रूप से बताना होगा कि क्या उनकी फिल्म के लेखन, विजुअल इफेक्ट्स, वॉयस क्लोनिंग या किरदारों के चेहरे बदलने में एआई तकनीक का प्रयोग हुआ है। अकादमी का यह कदम रचनात्मकता के क्षेत्र में मानवीय संवेदनशीलता को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उठाया गया है। संस्था का मानना है कि सिनेमा की आत्मा मानवीय कल्पनाओं में बसती है, इसलिए तकनीक का प्रयोग केवल सहायक के रूप में होना चाहिए न कि वह कलाकार की जगह ले ले। हालांकि एआई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन पारदर्शिता की यह शर्त भविष्य की फिल्म मेकिंग को अधिक जवाबदेह बनाएगी। अभिनय की श्रेणी में किया गया बदलाव उन कलाकारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो एक ही साल में कई उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। अब एक ही अभिनेता या अभिनेत्री को एक ही श्रेणी में एक से अधिक फिल्मों के लिए नामांकित किया जा सकता है। पहले के नियमों में यह विकल्प बेहद सीमित था, जिससे कई बार बेहतरीन काम भी जूरी की नजरों से छूट जाता था। अब यदि किसी कलाकार का काम शीर्ष पांच मतों में शामिल होता है, तो वह एक ही साल में अपनी बहुमुखी प्रतिभा के दम पर कई नामांकन हासिल कर सकता है। यह न केवल कलाकारों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा बल्कि दर्शकों को भी एक ही कलाकार के विभिन्न पहलुओं को देखने और समझने का मौका देगा। यह बदलाव वैश्विक सिनेमा में अभिनय की परिभाषा को और अधिक व्यापक बनाने वाला है। भारतीय फिल्म उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण खबर अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी से जुड़ी है। अब तक चली आ रही उस व्यवस्था को बदल दिया गया है जिसमें प्रत्येक देश से केवल एक ही फिल्म आधिकारिक तौर पर भेजी जा सकती थी। नए नियमों के मुताबिक, अब यदि कोई फिल्म प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सवों जैसे कान्स, वेनिस, बर्लिन, टोरंटो, सनडांस या बुसान में बड़ा पुरस्कार जीतती है, तो वह सीधे ऑस्कर की इस श्रेणी में शामिल होने के योग्य होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारत जैसे देश से एक ही साल में एक से अधिक फिल्में ऑस्कर की मुख्य प्रतियोगिता का हिस्सा बन सकती हैं। यह उन स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए एक सुनहरा अवसर है जिनकी फिल्में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो सराही जाती हैं, लेकिन अक्सर स्थानीय चयन समितियों की राजनीति या सीमित कोटे की वजह से मुख्य दौड़ से बाहर रह जाती थीं। इसके अलावा डिजिटल रिलीज और थिएट्रिकल प्रदर्शन के नियमों को भी वर्तमान समय की मांग के अनुरूप ढाला गया है। अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए अकादमी ने नियमों में थोड़ी नरमी बरती है, ताकि बेहतरीन कंटेंट को केवल इसलिए न नकारा जाए क्योंकि वह बड़े पर्दे पर लंबे समय तक नहीं रहा। इसके साथ ही संगीत और तकनीकी श्रेणियों में भी मूल्यांकन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए नए मानक तय किए गए हैं। कुल मिलाकर ये बदलाव एक नए युग की शुरुआत हैं जहां सिनेमा की सीमाओं को विस्तार दिया जा रहा है। भारतीय फिल्मकारों के पास अब अपनी कहानियों को बिना किसी बाधा के विश्व मंच पर ले जाने का एक अभूतपूर्व रास्ता खुल गया है, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय तिरंगे की चमक ऑस्कर के मंच पर और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असम की सियासत का साया, बयानबाजी से बढ़ा तनाव

नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एक ओर नई दिल्ली कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को सुधारने की कोशिश में जुटी है, वहीं असम से उठ रही राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल में तल्खी घोल दी है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि चुनावी सियासत कहीं दोनों देशों के बीच बनी नई समझ को फिर से नुकसान न पहुंचा दे। दरअसल, बांग्लादेश ने हाल ही में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह कदम हिमंत बिस्वा सरमा की उन टिप्पणियों के बाद उठाया गया, जिन्हें ढाका ने द्विपक्षीय संबंधों के लिए नुकसानदायक बताया। बांग्लादेशी अधिकारियों ने साफ कहा कि इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच विश्वास को कमजोर करते हैं, खासकर ऐसे समय में जब रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश हो रही है। पिछले कुछ समय में ढाका और नई दिल्ली के बीच रिश्तों में सुधार के संकेत मिले थे, लेकिन असम में बांग्लादेश को लेकर लगातार हो रही बयानबाजी ने इस प्रक्रिया को झटका दिया है। सीमा पार घुसपैठ, अवैध प्रवास और सुरक्षा जैसे मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं, लेकिन इन्हें लेकर सार्वजनिक मंचों से दिए जा रहे तीखे बयान अब कूटनीतिक तनाव का कारण बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध सिर्फ सीमा विवाद या राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश दुनिया की सबसे संवेदनशील और घनी आबादी वाली सीमाओं में से एक साझा करते हैं, जहां नदियों के जल बंटवारे से लेकर तस्करी और सुरक्षा तक कई मुद्दे आपसी सहयोग पर निर्भर करते हैं। नई दिल्ली के रणनीतिक हलकों में यह समझ बढ़ी है कि बांग्लादेश भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का अहम स्तंभ है। इसी सोच के तहत केंद्र सरकार रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दे रही है और कूटनीतिक स्तर पर बड़े कदम भी उठा रही है। लेकिन राज्य स्तर की राजनीति अगर लगातार विपरीत संकेत देती रही, तो इससे भारत की क्षेत्रीय छवि और रणनीतिक हितों को नुकसान हो सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केंद्र और राज्य की अलग-अलग राजनीतिक लाइनें इस रिश्ते को फिर से कमजोर कर देंगी? क्योंकि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत के लिए अपने पड़ोसियों के साथ स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

मिडिल ईस्ट में जंग की आहट तेज: अमेरिका ने 82 हजार करोड़ के हथियार उतारे, ईरान पर बड़ा घेराव तैयार

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच हालात एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों को अरबों डॉलर के हथियार देकर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। ईरान के साथ टकराव के बीच यह सैन्य तैयारी सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि संभावित बड़े संघर्ष की आहट भी मानी जा रही है। अमेरिका ने इजरायल, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को करीब 8.6 अरब डॉलर (करीब 82 हजार करोड़ रुपये) के हथियार और सैन्य सिस्टम देने की मंजूरी दी है। इस फैसले को अमेरिकी विदेश विभाग ने ‘आपात राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मामला बताते हुए तेजी से आगे बढ़ाया। इसमें एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम (APKWS), पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और बैटल कमांड सिस्टम जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं, जो मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में बेहद अहम माने जाते हैं। दरअसल, हाल के महीनों में ईरान की ओर से इजरायल और खाड़ी देशों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद इन देशों के डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव पड़ा है। ऐसे में अमेरिका अपने सहयोगियों के हथियारों के स्टॉक को फिर से मजबूत कर रहा है, ताकि किसी बड़े हमले की स्थिति में वे तैयार रहें। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का रुख भी सख्त बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल दोनों ही ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं है और वह अपने प्रॉक्सी समूहों तथा मिसाइल कार्यक्रम के जरिए जवाबी रणनीति मजबूत कर रहा है। स्थिति को और संवेदनशील बनाता है हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जहां अमेरिका की नौसेना की मौजूदगी और नाकेबंदी के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। यह इलाका दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है और यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अभी भले ही सीजफायर लागू है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों पक्ष लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहे हैं। इजरायल हाई अलर्ट पर है, अमेरिका लगातार हथियारों की सप्लाई बढ़ा रहा है और ईरान भी अपने नेटवर्क के जरिए दबाव बनाए हुए है। कुल मिलाकर, शांति की कोशिशों के बीच हथियारों का यह बड़ा खेल साफ संकेत दे रहा है कि मिडिल ईस्ट में हालात बेहद नाजुक हैं। अगर बातचीत में प्रगति नहीं हुई, तो यह टकराव किसी भी वक्त बड़े युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को झटका दे सकता है।

केरल चुनाव नतीजों की घड़ी नजदीक, LDF-UDF और NDA के बीच कड़ी टक्कर पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली। केरल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद अब पूरा राजनीतिक माहौल मतगणना के नतीजों पर केंद्रित हो गया है। राज्य की सत्ता की दिशा तय करने वाले इन परिणामों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन से लेकर विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों तक सभी की निगाहें एक ही जगह टिक गई हैं। चुनाव के बाद से ही राजनीतिक हलकों में संभावित समीकरणों और परिणामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बार के चुनाव में राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में मतदाताओं ने हिस्सा लिया। लाखों की तादाद में लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिससे यह चुनाव राज्य की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 883 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होने के कारण यह चुनाव और भी दिलचस्प बन गया है, क्योंकि हर क्षेत्र में कड़ा संघर्ष देखने को मिला। मतगणना को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्य भर में निर्धारित केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हर मतगणना केंद्र पर बड़ी संख्या में कर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारु तरीके से पूरी हो सके। सुरक्षा के लिहाज से भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिससे किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती की जाएगी, जिसके बाद ईवीएम के माध्यम से डाले गए वोटों की गणना शुरू होगी। पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा, ताकि हर वोट की सही गिनती सुनिश्चित हो सके। अधिकारियों के अनुसार, मतगणना के दौरान निगरानी और नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। राजनीतिक दलों के लिए यह परिणाम बेहद अहम हैं, क्योंकि यह राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा को तय करेंगे। हर गठबंधन अपनी जीत के दावे के साथ परिणामों का इंतजार कर रहा है। वहीं, मतदाताओं द्वारा दिए गए फैसले को लेकर पूरे राज्य में उत्सुकता का माहौल बना हुआ है।

ट्रंप-ईरान आमने-सामने: ‘गेंद अमेरिका के पाले में’, शांति प्रस्ताव के साथ तेहरान की दो टूक, युद्ध भी मंजूर

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्ते एक नए मोड़ पर पहुंच गए हैं। तेहरान ने जहां शांति की पहल करते हुए 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, वहीं सख्त लहजे में यह भी साफ कर दिया है कि अब फैसला वॉशिंगटन को करना है कूटनीति या टकराव। पाकिस्तान के जरिए भेजे गए इस प्रस्ताव को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और हालात फिर से टकराव की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दो टूक कहा कि “गेंद अब अमेरिका के पाले में है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान ने शांति का रास्ता खोल दिया है, लेकिन अगर अमेरिका टकराव चाहता है तो ईरान भी हर स्थिति के लिए तैयार है। उनका कहना है कि देश अपने हितों और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ी तो जवाब भी उसी अंदाज में दिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताते हुए साफ संकेत दिए हैं कि इसे स्वीकार करना आसान नहीं होगा। ट्रंप ने कहा कि वह प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य होगा। उन्होंने ईरान पर पिछले कई दशकों के व्यवहार को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान ने अभी तक “पर्याप्त कीमत” नहीं चुकाई है। दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बार-बार विफल हो रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की कोशिशें भी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी हैं। अमेरिका का रुख साफ है कि वह तब तक युद्ध खत्म नहीं करेगा जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ठोस और विश्वसनीय नियंत्रण सुनिश्चित नहीं हो जाता। वहीं ईरान की प्राथमिकता है कि पहले युद्ध पूरी तरह खत्म हो, नाकेबंदी हटे और उसके बाद ही अन्य मुद्दों पर चर्चा हो। ईरान के 14 सूत्रीय प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल हैं। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नाकेबंदी हटाने, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, जब्त ईरानी संपत्तियों की रिहाई, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और भविष्य में हमले न करने की गारंटी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अलावा लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करने और होर्मुज में नया तंत्र लागू करने की बात भी कही गई है। इसी बीच अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को किसी भी रूप में भुगतान करती हैं, तो उन्हें कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस चेतावनी में नकद के साथ डिजिटल और अनौपचारिक लेन-देन भी शामिल हैं, जिससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। कुल मिलाकर, एक तरफ शांति प्रस्ताव है तो दूसरी ओर सख्त बयानबाजी—ऐसे में मिडिल ईस्ट का माहौल अभी भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात बातचीत की मेज तक पहुंचते हैं या फिर टकराव और गहराता है।