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इंदौर के द्वारकापुरी में रोड विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट

नई दिल्ली। इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र की गणेश मंदिर वाली गली में शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब रोड चौड़ीकरण और अतिक्रमण को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। शुरुआत में हुई कहासुनी धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक पक्ष ने सड़क चौड़ीकरण का समर्थन करते हुए दूसरे पक्ष से सहयोग की बात कही। हालांकि, दूसरे पक्ष ने इस पर सहमति नहीं जताई, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और लोग डंडे व पाइप लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। घटना के वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों पक्षों के लोग सड़क पर हंगामा करते हुए एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। इस दौरान लात-घूंसे भी चले और कुछ लोगों के बीच झूमाझटकी की स्थिति भी बनी रही। बताया जा रहा है कि मारपीट के दौरान एक व्यक्ति का गला पकड़ने की कोशिश भी की गई। इस झड़प में दोनों पक्षों के लोग घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस के अनुसार, मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें लक्की बिंजवा की शिकायत पर धीरज और गिरीश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि धीरज बिंजवा की शिकायत पर सुनील, लक्की और अभिषेक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कुछ लोगों को राउंडअप भी किया गया है और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विवाद की जड़ सड़क चौड़ीकरण और कथित अतिक्रमण से जुड़ी हुई है। एक पक्ष सड़क को चौड़ा करने के पक्ष में था, जबकि दूसरे पक्ष पर निर्माण कर अतिक्रमण करने के आरोप लगाए गए हैं। इसी मुद्दे पर दोनों के बीच तनाव बढ़ता गया और मामला मारपीट तक पहुंच गया।फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि आगे किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

गर्मियों की छुट्टियों में बनाएं इन खूबसूरत जगहों का प्लान, कैमरे में कैद करें यादगार नजारे

नई दिल्ली।  गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही लोग ऐसी जगहों की तलाश में निकल पड़ते हैं, जहां तपती गर्मी से राहत मिले और मन को सुकून देने वाले नजारे देखने को मिलें। भारत में कई ऐसे खूबसूरत पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जहां प्राकृतिक सौंदर्य, ठंडी हवाएं और शांत वातावरण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। अगर आप भी इस समर वेकेशन में फैमिली, दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो दार्जिलिंग, शिमला और लेह-लद्दाख जैसी जगहें आपकी यात्रा को यादगार बना सकती हैं। पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत वादियों में बसा दार्जिलिंग गर्मियों में घूमने के लिए सबसे पसंदीदा हिल स्टेशनों में गिना जाता है। यहां की ठंडी जलवायु, दूर-दूर तक फैले चाय के बागान और पहाड़ों पर तैरते बादल पर्यटकों का दिल जीत लेते हैं। दार्जिलिंग की सबसे खास जगह टाइगर हिल मानी जाती है, जहां सुबह के समय सूर्योदय का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। सूरज की पहली किरण जब कंचनजंगा की बर्फीली चोटियों पर पड़ती है, तो पूरा दृश्य सुनहरी रोशनी से चमक उठता है। इसके अलावा यहां की टॉय ट्रेन की सैर, लोकल मार्केट में शॉपिंग और मोमोज-थुकपा जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद यात्रा को और खास बना देता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है, जिससे लोग भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। शिमला की मॉल रोड पर शाम के समय घूमना, कैफे में बैठकर पहाड़ों के खूबसूरत नजारों का आनंद लेना और लोकल मार्केट से खरीदारी करना पर्यटकों को खूब पसंद आता है। देवदार के ऊंचे पेड़, बादलों से ढकी पहाड़ियां और शांत वातावरण यहां की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। इसके अलावा जाखू मंदिर और द रिज जैसी जगहों से पूरे शहर का शानदार दृश्य दिखाई देता है, जिसे कैमरे में कैद करना हर किसी को पसंद आता है। अगर आप एडवेंचर और रोमांच पसंद करते हैं, तो लेह-लद्दाख आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद सुहावना रहता है और बर्फ से ढकी पहाड़ियां, नीला आसमान तथा शांत झीलें पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। पैंगोंग लेक का नीला पानी और नुब्रा वैली की खूबसूरत वादियां यहां आने वाले हर पर्यटक को आकर्षित करती हैं। बाइक राइडिंग, कैंपिंग और पहाड़ों के बीच बिताए गए पल जिंदगीभर याद रहते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में लेह-लद्दाख युवाओं की पहली पसंद बन जाता है। इस समर वेकेशन अगर आप भी प्रकृति के करीब कुछ यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो इन शानदार डेस्टिनेशंस का प्लान जरूर बनाएं। यहां की खूबसूरती न सिर्फ आपकी यात्रा को खास बनाएगी, बल्कि कैमरे में कैद किए गए नजारे जिंदगीभर की यादें बन जाएंगे।

वट सावित्री व्रत 2026: राशि अनुसार मंत्र जाप से बढ़ेगा सौभाग्य और सुख-शांति

नई दिल्ली । वट सावित्री व्रत 2026 इस वर्ष 16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाएगा, जिसमें सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र, सुख और समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने और वट वृक्ष की परिक्रमा करने से सौभाग्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। शास्त्रों के अनुसार वट सावित्री पूजा के दौरान यदि महिलाएं अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जाप करें तो इसका प्रभाव और अधिक शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और वैवाहिक जीवन में स्थिरता मिलती है। इस दिन शिव, विष्णु और देवी से जुड़े मंत्रों का जप विशेष फलदायी माना गया है। मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं, जिनका जाप श्रद्धा भाव से करने पर जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख का प्रतीक मानी जाती है और वर्षों से महिलाएं इसे श्रद्धापूर्वक निभाती आ रही हैं।

गर्मी में ठंडक और सेहत दोनों का राज, घड़े का पानी क्यों है विशेषज्ञों की पसंद

नई दिल्ली ।गर्मियों का मौसम जैसे-जैसे तेज होता है, वैसे-वैसे शरीर को ठंडक और संतुलन की अधिक जरूरत महसूस होने लगती है। तापमान बढ़ने के साथ लोग राहत पाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं, लेकिन पुराने और प्राकृतिक उपाय आज भी अपनी उपयोगिता साबित करते हैं। इन्हीं में सबसे सरल और प्रभावी तरीका माना जाता है मिट्टी के घड़े या मटके का पानी। मिट्टी के घड़े में रखा पानी किसी मशीन या बिजली की मदद से नहीं, बल्कि प्राकृतिक प्रक्रिया से ठंडा होता है। मिट्टी की खास बनावट और उसकी सांस लेने की क्षमता पानी के तापमान को संतुलित बनाए रखती है, जिससे यह शरीर को धीरे-धीरे ठंडक पहुंचाता है। यही वजह है कि यह पानी पीने के बाद शरीर में एक अलग ही ताजगी महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना कई बार शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अचानक अत्यधिक ठंडक गले और पाचन तंत्र पर असर डाल सकती है। इसके विपरीत घड़े का पानी शरीर के प्राकृतिक तापमान के करीब होता है, जिससे यह शरीर को बिना झटका दिए ठंडक प्रदान करता है। माना जाता है कि मिट्टी के घड़े में रखा पानी हल्का प्राकृतिक रूप से शुद्ध भी होता है, क्योंकि मिट्टी पानी में मौजूद कुछ अशुद्धियों को सोखने की क्षमता रखती है। इससे पानी अधिक संतुलित और हल्का महसूस होता है। लोग अक्सर बताते हैं कि इस पानी को पीने से उन्हें एक अलग तरह की ताजगी और हल्कापन महसूस होता है। गर्मी के मौसम में शरीर तेजी से पानी खोता है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में सही तरीके से हाइड्रेशन बेहद जरूरी हो जाता है। घड़े का पानी शरीर को सिर्फ ठंडक ही नहीं देता, बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद करता है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से संतुलित रखने में सहायक माना जाता है। परंपरागत रूप से भी मिट्टी के घड़े का उपयोग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लंबे समय से किया जाता रहा है। बिना किसी तकनीक के यह तरीका आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह सरल, सस्ता और प्राकृतिक है। यही कारण है कि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद लोग इसे अपनाना पसंद करते हैं। गर्मी में जब शरीर थकान, गर्मी और डिहाइड्रेशन से प्रभावित होता है, तब घड़े का पानी एक प्राकृतिक राहत की तरह काम करता है। यह न केवल शरीर को ठंडा रखता है, बल्कि एक स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा भी बन सकता है। आज के समय में जब लोग तेज और कृत्रिम ठंडक की ओर बढ़ रहे हैं, तब भी मिट्टी के घड़े का पानी अपनी प्राकृतिक विशेषताओं के कारण एक भरोसेमंद विकल्प बना हुआ है। यह दिखाता है कि सरलता और प्रकृति पर आधारित उपाय आज भी स्वास्थ्य के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले थे।

Bank of Baroda FD Scheme: 2 लाख की FD पर मिलेगा 1 लाख से ज्यादा ब्याज, सुरक्षित निवेश का शानदार मौका

नई दिल्ली। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शामिल Bank of Baroda की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम इन दिनों निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सुरक्षित निवेश और तय रिटर्न की वजह से FD हमेशा से भरोसेमंद विकल्प मानी जाती रही है। खास बात यह है कि बैंक की लंबी अवधि वाली FD स्कीम में ₹2 लाख जमा करने पर निवेशक को मैच्योरिटी तक करीब ₹1.03 लाख तक ब्याज मिल सकता है। बैंक फिलहाल अलग-अलग अवधि की FD पर 3.50 प्रतिशत से लेकर 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दर ऑफर कर रहा है। वरिष्ठ नागरिकों और 80 वर्ष से अधिक आयु वाले सुपर सीनियर सिटीजन को अतिरिक्त ब्याज का लाभ भी दिया जा रहा है। बैंक की चर्चित “bob Square Drive Deposit Scheme” 444 दिनों की अवधि पर आम ग्राहकों को 6.45 प्रतिशत, वरिष्ठ नागरिकों को 6.95 प्रतिशत और सुपर सीनियर सिटीजन को 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दे रही है। अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए ₹2 लाख की FD कराता है और ब्याज को कंपाउंडिंग के साथ निवेश में ही रहने देता है, तो मैच्योरिटी पर कुल रकम ₹3 लाख से अधिक पहुंच सकती है। कई FD कैलकुलेशन के अनुसार, 5 साल या उससे ज्यादा की अवधि में ब्याज की राशि ₹1 लाख से अधिक हो सकती है। यही वजह है कि सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहने वाले निवेशक FD की ओर आकर्षित हो रहे हैं। FD का सबसे बड़ा फायदा यह माना जाता है कि इसमें शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की तरह बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता। निवेशक को पहले से तय ब्याज दर के अनुसार निश्चित रिटर्न मिलता है। यही कारण है कि रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की शिक्षा या भविष्य के सुरक्षित निवेश के लिए लोग FD को प्राथमिकता देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बैंक की FD उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है जो बिना जोखिम के निवेश करना चाहते हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त ब्याज दर इस योजना को और आकर्षक बनाती है। हालांकि निवेश से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। FD कराने से पहले ब्याज दर, निवेश अवधि, कंपाउंडिंग का तरीका और समय से पहले पैसा निकालने के नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। बैंक समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव करते रहते हैं, इसलिए निवेश से पहले ताजा ब्याज दर जरूर जांच लें। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई निवेशक सुरक्षित, स्थिर और गारंटीड रिटर्न चाहता है, तो सरकारी बैंक की FD आज भी सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों में से एक मानी जाती है।

Vastu Shastra: शनि के अशुभ प्रभाव से बचना है तो घर की पश्चिम दिशा में भूलकर भी न रखें ये चीजें

नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष दोनों में घर की दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि हर दिशा किसी न किसी ग्रह और ऊर्जा से जुड़ी होती है। घर की पश्चिम दिशा का संबंध न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव से माना जाता है। इसलिए इस दिशा को साफ, व्यवस्थित और संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, यदि पश्चिम दिशा में गंदगी, टूटे सामान या अव्यवस्था हो, तो इसका नकारात्मक प्रभाव घर के सदस्यों के जीवन पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम दिशा का सही उपयोग व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक संतुलन लेकर आता है। वहीं यदि यह दिशा दोषपूर्ण हो जाए तो आर्थिक परेशानियां, तनाव, मेहनत के बावजूद सफलता न मिलना और परिवार में कलह जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वास्तु शास्त्र के मुताबिक पश्चिम दिशा में टूटे-फूटे फर्नीचर, कबाड़ या अनुपयोगी सामान नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है। माना जाता है कि यह स्थिति शनिदेव के अशुभ प्रभाव को बढ़ा सकती है। इसलिए समय-समय पर घर से बेकार और टूटी वस्तुओं को हटाते रहना शुभ माना गया है। घर की पश्चिम दिशा में गंदगी या बदबू भी नहीं होनी चाहिए। खासतौर पर कूड़ेदान को हमेशा साफ-सुथरा रखना जरूरी माना गया है। वास्तु मान्यता है कि गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है, जिससे घर में तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। साफ-सफाई बनाए रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।पश्चिम दिशा में पुराने, फटे या गंदे पर्दे लगाना भी अशुभ माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार साफ और सुंदर पर्दे घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखते हैं और मानसिक शांति बढ़ाते हैं। वहीं फटे पर्दे दुर्भाग्य और नकारात्मकता को बढ़ाने वाले माने जाते हैं। रिश्तों और पारिवारिक स्थिरता के लिए भी पश्चिम दिशा का खास महत्व बताया गया है। यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेडरूम बनाना संभव न हो, तो पश्चिम दिशा में शयनकक्ष बनाना शुभ माना जाता है। इससे पति-पत्नी के संबंध मजबूत होते हैं और करियर में स्थिरता आती है। वास्तु शास्त्र में यह भी कहा गया है कि घर का मंदिर पश्चिम दिशा में नहीं बनाना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर के मुखिया की सेहत और आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। मंदिर के लिए उत्तर, पूर्व या ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है। वास्तु के छोटे-छोटे नियम जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। घर की पश्चिम दिशा को साफ, संतुलित और व्यवस्थित रखने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है और जीवन में स्थिरता, तरक्की और खुशहाली आती है।

DIC भर्ती 2026: सीनियर डेटा एनालिस्ट सहित 3 पदों पर वैकेंसी, 10 मई तक करें आवेदन

नई दिल्ली।  सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। Digital India Corporation (DIC) ने संविदा आधार पर तीन अलग-अलग पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल तीन पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिनमें सीनियर डेटा एनालिस्ट (डैशबोर्ड और रिपोर्ट्स), सीनियर क्लाउड कम डेवऑप्स इंजीनियर और L2 इंजीनियर (एप्लिकेशन सपोर्ट और ऑपरेशंस) शामिल हैं। प्रत्येक पद के लिए एक-एक वैकेंसी निर्धारित की गई है। आवेदन प्रक्रिया 27 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवारों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 मई 2026 तय की गई है। ऐसे में इच्छुक अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन डिग्री होना आवश्यक है। इनमें डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, सांख्यिकी, अर्थशास्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी या संबंधित विषय शामिल हैं। इसके अलावा उम्मीदवारों के पास 2 से 8 वर्षों का प्रासंगिक कार्य अनुभव भी होना चाहिए। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की योग्यता, शैक्षणिक रिकॉर्ड, आयु और कार्य अनुभव के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसके बाद इंटरव्यू के माध्यम से अंतिम चयन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को वेतन डीआईसी के नियमों के अनुसार दिया जाएगा। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को DIC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां संबंधित भर्ती लिंक पर क्लिक करके पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा, फिर लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर देना होगा और भविष्य के लिए उसका प्रिंट आउट सुरक्षित रखना होगा। यह भर्ती उन युवाओं के लिए खास अवसर है जो डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड टेक्नोलॉजी और आईटी सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में सरकारी सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं।

शनिवार को खाएं ये खास चीजें, शनिदेव चमका देंगे किस्मत, मिलेगी तरक्की और सफलता

नई दिल्ली।  हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शनिवार का दिन न्याय और कर्मफल के देवता शनिदेव को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति चाहता है कि शनि की कृपा उस पर बनी रहे और जीवन में आने वाली परेशानियां दूर हों। ज्योतिष के अनुसार, शनिवार को कुछ खास उपाय करने के साथ यदि खानपान में भी शनि से जुड़ी चीजों को शामिल किया जाए, तो शनिदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन में तरक्की, धन लाभ और सफलता के योग बनने लगते हैं। बहुत से लोग शनिवार को व्रत रखते हैं, लेकिन अगर कोई व्रत न कर पाए तो वह खानपान के जरिए भी शनिदेव की कृपा प्राप्त कर सकता है। माना जाता है कि शनिवार के दिन शनि से संबंधित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से शनि के प्रतिकूल प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। शनिवार को खिचड़ी खाना बेहद शुभ माना गया है। खासतौर पर उड़द दाल की खिचड़ी शनिदेव को प्रिय मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि उड़द दाल से बनी खिचड़ी का भोग शनिदेव को लगाने और स्वयं सेवन करने से शनि दोष शांत होते हैं। यदि उड़द दाल उपलब्ध न हो, तो अन्य दालों की खिचड़ी भी लाभकारी मानी जाती है। यह उपाय न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद माना जाता है। भुने हुए काले चने भी शनिवार के दिन विशेष महत्व रखते हैं। अक्सर लोग इस दिन बंदरों को काले चने खिलाते हैं, लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यदि व्यक्ति स्वयं भी भुने हुए काले चनों का सेवन करे, तो शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। काले चने शनि ग्रह से जुड़े माने जाते हैं और इन्हें खाने से शारीरिक कमजोरी दूर होने के साथ जीवन में स्थिरता और सफलता आने लगती है। शनिवार को काले तिल का सेवन भी बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, काले तिल भगवान विष्णु और शनिदेव दोनों को प्रिय हैं। शनिवार के दिन काले तिल से पूजा करना, पीपल के वृक्ष पर अर्पित करना और प्रसाद के रूप में सेवन करना पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। मान्यता है कि इससे शनिदेव प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं और जीवन में तरक्की के रास्ते खोलते हैं। इसके अलावा शनिवार को काला जामुन खाना भी लाभकारी माना गया है। जामुन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी शुभ फल देने वाला माना जाता है। लाल किताब के अनुसार, काले जामुन का सेवन और इसे कौओं या कुत्तों को खिलाना ग्रह दोषों को कम करने में सहायक माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि शनिवार को श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ किए गए छोटे-छोटे उपाय भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। खानपान से जुड़े ये आसान उपाय न केवल शनिदेव की कृपा दिलाते हैं, बल्कि जीवन में सुख, शांति और तरक्की का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

दो दिन में 97 लाख से ज्यादा LPG सिलेंडर की डिलीवरी, ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची: सरकार

नई दिल्ली।  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से सामान्य और सुचारू बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों में करीब 87.66 लाख सिलेंडर की बुकिंग के मुकाबले 97 लाख से अधिक सिलेंडर की डिलीवरी की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग का स्तर बढ़कर लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो डिजिटल प्रणाली की ओर बढ़ते उपभोक्ता व्यवहार को दर्शाता है। मंत्रालय ने बताया कि उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ऑथेंटिकेशन कोड के आधार पर लगभग 95 प्रतिशत डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या हेराफेरी को रोका जा सके। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बावजूद देश में एलपीजी सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और किसी भी रिटेल गैस एजेंसी पर स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति नहीं देखी गई है। इसके अलावा, पिछले दो दिनों में 1.11 लाख छोटे 5 किलोग्राम वाले सिलेंडरों की भी बिक्री हुई है। सरकार के अनुसार, यह छोटे सिलेंडर खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों और छोटे उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम लगातार एलपीजी वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में लगी हुई हैं। साथ ही कमर्शियल एलपीजी की बिक्री भी पिछले दो दिनों में 15,493 मीट्रिक टन से अधिक दर्ज की गई, जो लगभग 8.15 लाख 19 किलो वाले सिलेंडरों के बराबर है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन का विस्तार तेजी से हो रहा है। अब तक करीब 6.5 लाख कनेक्शनों में गैस सप्लाई शुरू हो चुकी है, जबकि कुल कनेक्शन संख्या 9.16 लाख तक पहुंच गई है। इसके अलावा, 7.08 लाख नए उपभोक्ताओं ने कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। सरकार ने बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए देशभर में सख्त कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में 2,000 से अधिक जगहों पर छापेमारी की गई, जिसमें 378 डिस्ट्रीब्यूटरों पर जुर्माना लगाया गया और 76 एजेंसियों को निलंबित किया गया। पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सभी सरकारी तेल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अतिरिक्त खरीदारी न करें। साथ ही उपभोक्ताओं को डिजिटल माध्यम से बुकिंग करने और गैस एजेंसियों पर अनावश्यक भीड़ से बचने की सलाह दी गई है।

शहद के स्किन के लिए फायदे: सही तरीके से इस्तेमाल करने पर मिलता है नेचुरल ग्लो

नई दिल्ली।  शहद को आयुर्वेद और घरेलू स्किन केयर में लंबे समय से एक प्रभावी प्राकृतिक उपाय माना जाता है। यह न केवल त्वचा को नमी प्रदान करता है, बल्कि दाग-धब्बों को हल्का करने और स्किन को साफ रखने में भी मदद करता है। हालांकि, इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही तरीके और सही सामग्री के साथ इस्तेमाल किया जाए। शहद को चेहरे पर सीधे मास्क की तरह लगाना सबसे आसान तरीका माना जाता है। इसके लिए थोड़ा सा शहद लेकर पूरे चेहरे पर समान रूप से फैलाया जाता है और 5 से 10 मिनट बाद हल्के गुनगुने पानी से धो लिया जाता है। यह तरीका त्वचा को प्राकृतिक रूप से हाइड्रेट करने में मदद करता है और स्किन को सॉफ्ट बनाता है। इसके अलावा शहद को छाछ और अंडे की जर्दी के साथ मिलाकर फेस पैक की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मिश्रण को चेहरे पर लगभग 20 मिनट तक लगाकर धोने से त्वचा में निखार आने की संभावना रहती है। यह पैक त्वचा की गहराई से देखभाल करने में मदद करता है और डलनेस को कम कर सकता है। शहद को प्राकृतिक स्क्रब के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसके लिए दो चम्मच शहद में बादाम पाउडर मिलाकर हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज की जाती है। यह मिश्रण डेड स्किन हटाने में मदद करता है और त्वचा को साफ व चमकदार बनाता है। बादाम त्वचा को एक्सफोलिएट करता है, जबकि शहद उसे मॉइस्चराइज करता है। मेकअप हटाने के लिए भी शहद का उपयोग किया जा सकता है। शहद और ऑलिव ऑयल को मिलाकर चेहरे पर लगाने से यह प्राकृतिक क्लींजर की तरह काम करता है। इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धोने पर त्वचा साफ और मुलायम महसूस होती है। शहद के साथ नींबू का इस्तेमाल भी स्किन के लिए फायदेमंद माना जाता है। नींबू में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी त्वचा को एक्सफोलिएट करने में मदद करते हैं, जबकि शहद त्वचा को नमी देता है। हालांकि, संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। इसके अलावा शहद को जैतून के तेल और नींबू के रस के साथ मिलाकर ड्राई स्किन के लिए एक नेचुरल लोशन की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह त्वचा की रूखापन को कम करने में मदद करता है और स्किन को पोषण देता है। एक अन्य घरेलू उपाय में कद्दूकस किए हुए सेब में शहद मिलाकर फेस मास्क तैयार किया जाता है। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर लगाने के बाद धोने से त्वचा में ताजगी और निखार महसूस किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शहद त्वचा के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प है, लेकिन हर स्किन टाइप अलग होता है। इसलिए किसी भी नए घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी होता है। सही तरीके से और नियमित उपयोग के साथ शहद त्वचा को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ, मुलायम और ग्लोइंग बनाए रखने में मदद कर सकता है।