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भीषण गर्मी में अस्पताल में हंगामा: 30 मरीजों पर सिर्फ 2 कूलर, परिजन आपस में भिड़े

नई दिल्ली। सागर जिला अस्पताल में भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं के बीच मंगलवार देर रात एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। महिला मेडिसिन वार्ड क्रमांक-6 में मरीजों के परिजनों के बीच कूलर की हवा में सोने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। रात करीब डेढ़ बजे हुए इस विवाद में दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे और बेल्ट चले, जिससे अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना का वीडियो बुधवार को सामने आया, जिसमें वार्ड के भीतर लोगों को एक-दूसरे पर हमला करते हुए देखा जा सकता है। मारपीट के दौरान वार्ड में भर्ती मरीज भयभीत हो गए और कई लोग अपने बिस्तरों से उठकर बाहर निकलते नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद कूलर के सामने जगह को लेकर शुरू हुआ था। गर्मी से परेशान परिजन कूलर के पास सोने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान कहासुनी हुई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया। वार्ड में मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ देर तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। हंगामे की सूचना मिलते ही अस्पताल के सुरक्षा गार्ड और ड्यूटी स्टाफ मौके पर पहुंचे। काफी समझाइश के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया गया। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल की खराब व्यवस्थाओं के कारण इस तरह के विवाद पैदा हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिला वार्ड में 30 से अधिक मरीज भर्ती हैं, लेकिन पूरे वार्ड में सिर्फ दो कूलर लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, कई सीलिंग पंखे भी खराब पड़े हैं, जिससे उमस और गर्मी से मरीजों की हालत खराब हो रही है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। भीषण गर्मी में मरीजों और उनके साथ रहने वाले अटेंडरों को रातभर परेशानी झेलनी पड़ रही है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि वार्डों में कूलर, पंखे और हवा की पर्याप्त व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

तमिलनाडु राजनीति में बड़ा संकट: AIADMK दो गुटों में बंटी, पलानीस्वामी ने बागियों पर की सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान खड़ा हो गया है, जहां राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी AIADMK गंभीर अंदरूनी संकट से गुजर रही है। हाल ही में हुए फ्लोर टेस्ट के बाद पार्टी में खुलकर बगावत सामने आई है, जिससे न केवल संगठनात्मक ढांचा हिल गया है बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना बन गई है। इस घटनाक्रम ने पार्टी को दो स्पष्ट गुटों में विभाजित कर दिया है, जिसमें एक ओर एडप्पादी के. पलानीस्वामी का नेतृत्व है और दूसरी ओर षणमुगम और वेलुमणि के नेतृत्व में बागी खेमे का गठन हुआ है। फ्लोर टेस्ट के दौरान जब 25 AIADMK विधायकों ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK के पक्ष में क्रॉस वोट किया, तो राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सत्ता समीकरण बदलते नजर आए और TVK की स्थिति मजबूत होती दिखाई दी। पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने सख्त रुख अपनाते हुए षणमुगम और वेलुमणि को उनके पदों से हटा दिया। इसके साथ ही उन्होंने दलबदल विरोधी कानून के तहत संबंधित विधायकों को अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। पार्टी का दावा है कि बागी विधायकों ने व्हिप का उल्लंघन किया है, जबकि दूसरी ओर बागी गुट इसे अवैध और असंवैधानिक बता रहा है। षणमुगम गुट ने पलटवार करते हुए कहा है कि पार्टी महासचिव को सीधे व्हिप नियुक्त करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, विधायकों की बैठक में ही नेता और व्हिप का चुनाव किया जाता है, इसलिए वर्तमान व्हिप नियुक्ति कानूनी रूप से मान्य नहीं है। इस विवाद ने पार्टी के भीतर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है, जिससे संकट गहरा गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच चेन्नई में तनाव का माहौल बन गया है। AIADMK मुख्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी संभावित टकराव या हिंसा को रोका जा सके। 2022 में हुई हिंसक झड़पों की यादें अभी भी ताजा हैं, जब पार्टी के दो गुटों के बीच परिसर में तोड़फोड़ और मारपीट जैसी घटनाएं हुई थीं। प्रशासन इस बार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है। पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान ने संगठनात्मक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पलानीस्वामी गुट अब आगे की रणनीति तय करने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की तैयारी में है, वहीं बागी गुट ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे पार्टी मुख्यालय से दूरी बनाए रखेंगे। इस राजनीतिक उथल-पुथल का असर केवल AIADMK तक सीमित नहीं है, बल्कि तमिलनाडु की पूरी राजनीति पर पड़ सकता है। सत्ता समीकरण बदलने की संभावना ने अन्य दलों की रणनीति भी प्रभावित कर दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी इस संकट से उबर पाती है या यह विभाजन स्थायी रूप ले लेता है।

स्कूटी से भागते समय दीवार से टकराया युवक, सड़क पर घंटों खून से लथपथ पड़ा रहा

नई दिल्ली। रीवा शहर में बुधवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के उपरहटी स्थित मछरिया गेट इलाके में दो गुटों के बीच मामूली विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। शराब के नशे में शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट और पथराव तक पहुंच गई। देर रात सड़क पर हुए इस हंगामे से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे। दोनों पक्षों के बीच पहले बहस हुई और फिर अचानक लात-घूंसे चलने लगे। कुछ ही देर में लोगों ने एक-दूसरे पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। सड़क पर काफी देर तक हंगामा चलता रहा और आसपास मौजूद लोग डर के कारण इधर-उधर भागते नजर आए। इसी दौरान एक युवक स्कूटी से मौके से भागने की कोशिश कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह तेज रफ्तार में वाहन चला रहा था, तभी उसका संतुलन बिगड़ गया और स्कूटी सीधे सड़क किनारे दीवार से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके सिर में गहरी चोट आई और वह सड़क पर खून से लथपथ पड़ा रहा। स्थानीय लोगों ने तुरंत घायल युवक को संभाला और संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार युवक की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली। रहवासियों का आरोप है कि घटना की सूचना कई बार पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंची। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर पहुंच जाती तो स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं और हिंसा को रोका जा सकता था। इलाके के लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में लगातार असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन नियमित पुलिस गश्त नहीं होने से बदमाशों के हौसले बुलंद हैं। देर रात हुई इस घटना के बाद क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। फिलहाल पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने बताया कि मारपीट और पथराव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

रीवा में शादी समारोह बना रणक्षेत्र: बीच सड़क पर दो गुटों में जमकर मारपीट

नई दिल्ली।  रीवा शहर में बुधवार देर रात एक शादी समारोह उस समय हंगामे में बदल गया, जब दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में तब्दील हो गई। मामला शहर के व्यस्त इलाके स्थित गायत्री हॉल के सामने का है, जहां बीच सड़क पर दोनों पक्षों के लोगों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। खास बात यह रही कि यह पूरी घटना सिविल लाइन थाने से महज 100 मीटर की दूरी पर हुई, जिससे इलाके में देर रात अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार, घोघर निवासी संतोष सेन और रामरती सेन की बेटी पलक सेन का विवाह समारोह गायत्री हॉल में आयोजित किया गया था। बारात रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र से आई थी। दूल्हा पंकज सेन अपने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचा था। कार्यक्रम के दौरान कुछ युवकों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए मारपीट में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों पक्षों के लोग अचानक सड़क पर आ गए और एक-दूसरे पर हमला करने लगे। काफी देर तक सड़क पर लात-घूंसे चलते रहे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और कई लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सड़क पर हंगामे के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति काफी देर तक तनावपूर्ण बनी रही। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया। पुलिस की मौजूदगी के बाद हालात नियंत्रण में आए। घटना के दौरान मौजूद कुछ लोगों ने पूरी मारपीट का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया, जो अब सोशल मीडिया और इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में दोनों पक्षों के लोग सड़क पर एक-दूसरे से भिड़ते दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और विवाद की असली वजह जानने की कोशिश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट में सक्रिय दिखीं ममता बनर्जी, चुनावी हिंसा मामले में पेश की पैरवी, बाहर विरोध और नारेबाजी ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर अदालत और सियासी हलकों के केंद्र में आ गई है, जब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के लिए काला कोट पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं। यह मामला राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद सामने आए कथित चुनावी हिंसा से जुड़ा था, जिसकी सुनवाई के दौरान उन्होंने अदालत के समक्ष अपनी बात रखी और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने राज्य में चुनाव परिणामों के बाद हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई जगहों पर हिंसा, आगजनी और अन्य आपराधिक गतिविधियों की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मामलों में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे पीड़ित पक्षों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने अदालत से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। ममता बनर्जी के साथ उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगी भी मौजूद रहे, और पूरे कोर्ट परिसर में उनकी मौजूदगी ने मीडिया और वकीलों का ध्यान खींच लिया। सुनवाई के दौरान उनका व्यवहार पूरी तरह औपचारिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप रहा, जहां उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया कि वे पहले भी वकालत से जुड़ी रही हैं और कानून की समझ रखती हैं। हालांकि सुनवाई समाप्त होने के बाद जैसे ही वह कोर्ट रूम से बाहर निकलीं, माहौल अचानक बदल गया। परिसर के गलियारों में मौजूद कुछ लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और नारेबाजी शुरू हो गई। इस दौरान राजनीतिक नारे लगाए गए, जिससे वातावरण कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित किया और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब राज्य में चुनावी हिंसा को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पहले से ही तेज हैं। विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक ओर जहां कुछ याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया है कि चुनाव परिणामों के बाद हिंसा के चलते कई लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि शिकायतों की संख्या को लेकर तथ्य अलग हैं और कई मामलों में सही कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इस मामले की पृष्ठभूमि में यह भी सामने आता है कि ममता बनर्जी का कानूनी क्षेत्र से पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद कानून की पढ़ाई की थी और कुछ समय तक अदालत में वकालत भी की थी, जिसके बाद उन्होंने पूरी तरह राजनीति में प्रवेश किया। राजनीतिक और कानूनी दोनों ही स्तरों पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। अदालत में रखी गई दलीलों के साथ-साथ बाहर हुई घटनाओं ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। आने वाले समय में इस मामले की सुनवाई और उससे जुड़े तथ्य राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी असर डाल सकते हैं।

महाकाल मंदिर में 5 लाख का ब्रेसलेट गायब, CCTV से खुला राज और 1.5 घंटे में रिकवरी

नई दिल्ली। उज्जैन जिला अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ओपीडी व्यवस्था, उपस्थिति रजिस्टर और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक निर्धारित समय पर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ विभागों में डॉक्टर सुबह 9 बजे से निर्धारित ड्यूटी समय पर मौजूद नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने और सभी संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीईओ श्रेयांश कुमट ने यह भी दोहराया कि शासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी समय का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों को चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। निरीक्षण के दौरान सीईओ ने केवल उपस्थिति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की स्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और सुधार के निर्देश दिए। अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया कि अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके। इस कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और अब सभी चिकित्सकों को उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सख्त पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

सीईओ की सख्ती: ड्यूटी से गायब मिले डॉक्टर, वेतन कटौती का फैसला

नई दिल्ली। उज्जैन जिला अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर एक बार फिर प्रशासन की सख्ती देखने को मिली है। गुरुवार को जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जिसमें ओपीडी व्यवस्था, उपस्थिति रजिस्टर और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। निरीक्षण के दौरान कई चिकित्सक निर्धारित समय पर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए, जिस पर सीईओ ने कड़ी नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि कुछ विभागों में डॉक्टर सुबह 9 बजे से निर्धारित ड्यूटी समय पर मौजूद नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सीईओ ने अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन काटने और सभी संबंधित डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीईओ श्रेयांश कुमट ने यह भी दोहराया कि शासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी चिकित्सकों को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और शाम 5 बजे से 6 बजे तक नियमित रूप से अस्पताल में उपस्थित रहना अनिवार्य है, ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके बावजूद लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ डॉक्टर ड्यूटी समय का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार चिकित्सकों को चेतावनी दी जा चुकी है और कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी कारण अब सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। निरीक्षण के दौरान सीईओ ने केवल उपस्थिति व्यवस्था ही नहीं, बल्कि अस्पताल की साफ-सफाई, वार्डों की स्थिति, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और अन्य चिकित्सकीय सेवाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की और सुधार के निर्देश दिए। अस्पताल की सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया ने बताया कि अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि आगामी राष्ट्रीय असेसमेंट को ध्यान में रखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सके। इस कार्रवाई के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है और अब सभी चिकित्सकों को उपस्थिति व्यवस्था को लेकर सख्त पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

Murena Congress Protest: महापौर को हटाने की मांग पर कांग्रेस का हंगामा, नगर निगम कार्यालय में फेंका कचरा

Murena Congress Protes

HIGHLIGHTS:  मुरैना में कांग्रेस का नगर निगम घेराव महापौर को हटाने की मांग तेज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने परिसर में फेंका कचरा विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के लगाए आरोप राज्यपाल के नाम प्रशासन को सौंपा ज्ञापन   Murena Congress Protest: मधयप्रदेश। मुरैना जिला कांग्रेस कमेटी ने नगर निगम में कथित भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में अनियमितताओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बता दें कि कांग्रेस कार्यकर्ता महादेव नाके पर एकत्रित हुए और वहां से रैली निकालते हुए नगर निगम कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए महापौर शारदा सोलंकी को बर्खास्त करने की मांग उठाई। हाईकोर्ट में बड़ा मोड़: राहुल गांधी के मानहानि केस की अंतिम सुनवाई पर टिकी निगाहें नगर निगम कार्यालय में फेंका कचरा प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम कार्यालय परिसर में कचरा फेंककर विरोध जताया। जिसके बाद घेराव और प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारी नगर निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ लगातार नारे लगाते रहे। जबलपुर में खौफनाक वारदात: गले और चेहरे पर चाकू मारकर युवक की हत्या मूलभूत सुविधाओं को लेकर सरकार पर निशाना कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि शहर में पानी, बिजली, सड़क, सीवर लाइन और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है। साथ ही उनका कहना था कि विकास कार्यों के नाम पर केवल भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जबकि आम जनता परेशानियों से जूझ रही है। मुंबई में CNG हुआ महंगा, बढ़े दाम, ऑटो-टैक्सी किराया बढ़ने की आशंका विकास की राशि में हो रही गड़बड़ी जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष मधुराज तोमर ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के लिए आने वाली राशि में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की जा रही है। इसके बाद उन्होंने कहा कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। SAF आरक्षक पर दुष्कर्म का आरोप: सगाई के बाद संबंध बनाकर शादी से इनकार का मामला राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में महापौर को बर्खास्त करने और नगर निगम में कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार, मानवेंद्र सिंह, गजेंद्र जाटव सहित कई कांग्रेस नेता और पार्षद भी मौजूद रहे।

उज्जैन में बड़ा एक्शन मोड: शिप्रा तट पर अवैध होटल-रिसॉर्ट पर हाईकोर्ट की नजर

नई दिल्ली। उज्जैन में पवित्र शिप्रा नदी के किनारे लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माणों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ग्रीन बेल्ट और सिंहस्थ के लिए आरक्षित भूमि पर होटल, रिसॉर्ट, मठ, आश्रम, रेस्टोरेंट और कॉलोनियों के रूप में 200 से अधिक अवैध निर्माण खड़े होने का मामला अब न्यायालय की निगरानी में है। इस पूरे मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उज्जैन नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह नदी किनारे 100 से 200 मीटर के दायरे में हुए सभी अतिक्रमणों की विस्तृत सूची तैयार करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि अब तक इन अवैध निर्माणों पर क्या कार्रवाई की गई है और उन्हें हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने नगर निगम को यह रिपोर्ट 15 जून तक हर हाल में पेश करने का आदेश दिया है। इसी तारीख को मामले की अगली सुनवाई भी निर्धारित की गई है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि तब तक किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि इन क्षेत्रों में जारी नहीं रहनी चाहिए। यह याचिका वर्ष 2023 में उज्जैन निवासी सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर नियमों को दरकिनार करते हुए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं। इनमें होटल, मठ, आश्रम, स्कूल और आवासीय कॉलोनियां तक शामिल हैं। इन निर्माणों से निकलने वाला सीवरेज सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे शिप्रा का जल गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि नदी के किनारे व्यावसायिक निर्माण न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अनुचित है। कोर्ट ने भी टिप्पणी की कि नदी तट पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक रिसॉर्ट या स्थायी निर्माण को अनुमति नहीं दी जा सकती। पूर्व सुनवाई में 5 मई को भी कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए थे कि सभी अतिक्रमणों की सूची तैयार की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि नदी किनारे कोई अवैध गतिविधि संचालित न हो। इसके साथ ही नदी निधि विकास योजना से जुड़ी रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए थे। अब सभी की नजरें 15 जून की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां नगर निगम की कार्रवाई रिपोर्ट यह तय करेगी कि अवैध निर्माणों पर प्रशासन ने कितनी गंभीरता से कदम उठाए हैं।

लोकतंत्र को मजबूत करने की बड़ी पहल: देशभर में घर-घर पहुंचकर वोटर डेटा अपडेट, SIR का तीसरा चरण शुरू

नई दिल्ली । लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव मानी जाने वाली मतदाता सूची को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने के लिए देशभर में एक बड़ा और संगठित अभियान फिर से शुरू हो गया है। इस अभियान का तीसरा चरण अब उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंच चुका है, जहां करोड़ों नागरिकों के रिकॉर्ड की जांच और अपडेट किया जाएगा। उद्देश्य साफ है कि हर योग्य नागरिक का नाम सूची में शामिल रहे और किसी भी तरह की गलती, दोहराव या अपात्र प्रविष्टि को पूरी तरह हटाया जा सके। इस बार अभियान का दायरा बेहद व्यापक है, क्योंकि इसमें 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल किए गए हैं। इन क्षेत्रों में टीमों को घर-घर भेजकर मतदाताओं की जानकारी का मिलान किया जा रहा है। यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक विस्तृत सत्यापन व्यवस्था है, जिसमें हर व्यक्ति के विवरण को मौजूदा रिकॉर्ड से मिलाकर देखा जाता है। कई स्थानों पर नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है, ताकि युवा नागरिकों को उनके अधिकार से वंचित न रहना पड़े। इस अभियान के दौरान लाखों अधिकारियों और सहयोगी एजेंटों की तैनाती की गई है, जो अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। वे फॉर्म भरवाने, जानकारी जांचने और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर डेटा अपडेट करने का काम कर रहे हैं। जिन लोगों का नाम सूची में नहीं है, उन्हें नए सिरे से जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जबकि जिनके नाम गलत तरीके से दर्ज हैं या दो जगह मौजूद हैं, उन्हें हटाने या संशोधित करने का कार्य किया जा रहा है। दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची की घोषणा की समयसीमा भी तय की गई है, जिससे चुनावी तैयारियों को एक स्पष्ट दिशा मिलेगी। वहीं कुछ पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में मौसम और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए कार्यक्रम को बाद में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह अभियान परिस्थितियों के अनुसार लचीले ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह पूरी कवायद सिर्फ डेटा सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से है। पिछले कई वर्षों में जनसंख्या का स्थानांतरण, शहरीकरण और कई तकनीकी कारणों से मतदाता सूची में कई तरह की विसंगतियां देखने को मिली हैं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए यह घर-घर सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है, ताकि हर वोट की सटीक पहचान सुनिश्चित हो सके। इस प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका। हर व्यक्ति को अपने दस्तावेजों के साथ जानकारी का मिलान करना होता है, ताकि रिकॉर्ड पूरी तरह सही रहे। यह कदम न केवल चुनावी प्रणाली को मजबूत करता है, बल्कि लोगों के मतदान अधिकार को भी अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाता है। तीसरे चरण के साथ यह साफ हो गया है कि देश एक बड़े स्तर पर अपने मतदाता रिकॉर्ड को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में चुनावी व्यवस्था और अधिक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद बन सके।