ट्रंप का बड़ा दावा: चीन अब ईरान को नहीं देगा हथियार, शी जिनपिंग से बातचीत में बनी सहमति

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ईरान को सैन्य उपकरण नहीं भेजने पर सहमति जताई है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि चीन हथियारों की सप्लाई रोकता है तो इसका बड़ा रणनीतिक असर पड़ सकता है। बीजिंग बैठक के बाद ट्रंप का बयान13 से 15 मई के बीच चीन दौरे पर पहुंचे ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि बीजिंग में हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान ईरान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया है कि चीन ईरान को सैन्य उपकरण उपलब्ध नहीं कराएगा। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “उन्होंने कहा कि वे ईरान को हथियार या सैन्य उपकरण नहीं देंगे। यह बहुत बड़ा कदम है।” तेल कारोबार जारी रखना चाहता है चीनहालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन ईरान से तेल खरीद जारी रखना चाहता है। उनके मुताबिक चीन ने साफ किया है कि वह ईरानी तेल आयात को बंद नहीं करेगा, क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों के लिए यह महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2025 और 2026 की पहली तिमाही में चीन ने प्रतिदिन करीब 14 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा। यह चीन के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा रहा। अमेरिका-चीन के बीच तेल पर भी चर्चाव्हाइट हाउस की ओर से जानकारी दी गई कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अमेरिका से तेल खरीद के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। इससे पहले ट्रेड वॉर के दौरान चीन ने अमेरिकी कच्चे तेल पर 20 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जिसके बाद मई 2025 में उसने अमेरिकी तेल खरीद लगभग बंद कर दी थी। बोइंग को मिल सकता है बड़ा ऑर्डरट्रंप ने बातचीत के दौरान यह दावा भी किया कि चीन अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग से 200 विमान खरीदने पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा कि यह डील बोइंग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी और इससे अमेरिका में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ट्रंप ने कहा, “बोइंग 150 विमानों के ऑर्डर की उम्मीद कर रहा था, लेकिन अब 200 विमानों का ऑर्डर मिलने जा रहा है।” पहले भी मिल चुके थे संकेतइससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी बोइंग को बड़े ऑर्डर मिलने के संकेत दिए थे। वहीं Kelly Ortberg भी ट्रंप के साथ चीन दौरे पर मौजूद हैं, जिससे इस संभावित समझौते को और बल मिला है।
भारतीयों और चिल्कूर बालाजी मंदिर पर अमेरिकी सीनेटर का विवादित बयान, H-1B वीजा को बताया ‘कार्टेल’

नई दिल्ली। अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट ने H-1B वीजा नीति और भारतीयों को लेकर दिए गए बयान से बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर की गई उनकी टिप्पणी में उन्होंने भारतीय आईटी पेशेवरों, अमेरिकी कंपनियों और वीजा सिस्टम को जोड़ते हुए इसे “वीजा कार्टेल” तक कह दिया। इस टिप्पणी के बाद अमेरिका और भारत दोनों जगह तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा विवाद उनके उस बयान पर है जिसमें उन्होंने हैदराबाद के प्रसिद्ध चिल्कूर बालाजी मंदिर का जिक्र करते हुए इसे “वीजा मंदिर” और कथित “वीजा कार्टेल” से जोड़ दिया। श्मिट के अनुसार, यह सिस्टम अमेरिकी नौकरियों और वेतन पर असर डाल रहा है, हालांकि उनके इन दावों को लेकर कई विशेषज्ञ और यूजर्स ने सवाल उठाए हैं और इसे भ्रामक बताया है। दरअसल, चिल्कूर बालाजी मंदिर लंबे समय से उन लोगों के बीच लोकप्रिय है जो विदेश जाने की इच्छा रखते हैं। मान्यता है कि यहां दर्शन और परिक्रमा करने से मनोकामना पूरी होती है, इसी कारण इसे “वीजा टेंपल” भी कहा जाता है। भक्त यहां वीजा आवेदन से पहले 11 परिक्रमा और सफलता मिलने पर 108 परिक्रमा करते हैं। श्मिट ने अपने बयान में H-1B, L-1 और F-1 वीजा सिस्टम पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों और वेतन पर असर पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने अमेरिकी टेक कंपनियों पर “मेरिट के बजाय पक्षपात” को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हो रही है और लोग इसे बिना तथ्यों के दिया गया भड़काऊ बयान बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले तथ्यों की जांच बेहद जरूरी है। कुल मिलाकर, यह विवाद अब सिर्फ वीजा नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों और सांस्कृतिक संवेदनशीलता तक पहुंच गया है।
MP: पूर्व CM दिग्विजय सिंह बोले- मेरा मॉडल कर रही लागू मोदी सरकार….. इसके लिए धन्यावाद!

भोपाल। मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Former Chief Minister Digvijay Singh) ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार (Central government) पर अपनी सरकार के फैसले को अपनाने का जिक्र किया और बताया कि मोदी सरकार (Modi government) उनके मुख्यमंत्री काल के ‘पालक-शिक्षक संघ’ (Parent-Teacher Association- PTA) मॉडल को देश के 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही है। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने साल 1993 से 2003 के बीच मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहने के दौरान लिया था। खास बात यह है कि इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को धन्यवाद भी दिया। इस दौरान उन्होंने पूरे देश में लाखों सरकारी स्कूलों को बंद करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई। इस बारे में ‘एक्स’ पर शेयर की अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘मेरे मुख्यमंत्री काल का पालक शिक्षक संघ (PTA) का मॉडल जिसे अब केंद्र सरकार 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही हैं। धन्यवाद। मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल 1993-2003 में मध्य प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धि में हासिल की थी मुझे उस पर गर्व है। अब BJP सरकार मेरे मॉडल को स्वीकार कर लागू कर रही है मुझे प्रसन्नता है। देर से आए दुरुस्त आए। ‘ सरकारी स्कूल बंद करने के फैसले पर जताई आपत्तिआगे उन्होंने केंद्र सरकार के एक फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि, ‘देश के शासकीय स्कूलों में सुधार आवश्यक है। पूरे देश में लाखों शासकीय स्कूल बंद किए जा रहे हैं। ये उचित नहीं है। अब शासकीय स्कूलों में वही बच्चे पढ़ रहे हैं जो निजी स्कूलों में फीस नहीं दे पा रहे हैं। शासकीय स्कूलों में छात्रों के पालकों को व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी जाना चाहिए। इन शासकीय स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है। जय सिया राम।’ पोस्ट के साथ शेयर किया कार्यकर्ता की पोस्ट का लिंकअपनी पोस्ट के साथ दिग्विजय सिंह ने अपनी पार्टी के एक कार्यकर्ता की पोस्ट का लिंक भी शेयर किया था, जिसमें उसने केंद्र सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि, ‘पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह जी का पालक-शिक्षक संघ (PTA) का वो मॉडल जिसे केंद्र सरकार 15 लाख सरकारी स्कूलों में लागू करने जा रही हैं। मध्य प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में जो उल्लेखनीय उपलब्धि आदरणीय दिग्विजय सिंह जी के 10 वर्षीय मुख्यमंत्री काल 1993-2003 में हासिल की, ये अभूतपूर्व हैं।’ अपनी पोस्ट के अंत में उस शख्स ने बताया कि ‘दिग्विजय सिंह जी वर्तमान में शिक्षा, महिला, बाल और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं।’ शिक्षक-पालक संघ खुद लेगा इतने लाख रुपए तक के फैसलेपूर्व मुख्यमंत्री ने अपने जिस कार्यकर्ता की पोस्ट के लिंक को शेयर किया, उसने इस खबर से जुड़ा एक न्यूज आर्टिकल भी शेयर किया था, जिसमें केंद्र सरकार के इस फैसले की जानकारी दी गई थी। इसमें बताया गया कि ‘देश के लगभग 15 लाख स्कूलों का प्रबंधन अब सीधे तौर पर अभिभावकों के हाथों में होगा। नए नियमों के मुताबिक, स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) को 30 लाख रुपए तक के निर्माण कार्य बिना लोक निर्माण विभाग की मंजूरी के खुद कराने की वित्तीय शक्ति दी गई है। शिक्षा मंत्रालय ने इन सुधारों को नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 और शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) 2009 के तहत अंतिम रूप दिया है, जिससे अब स्कूल केवल सरकारी संस्थान न रहकर ‘सामुदायिक संपत्ति’ के रूप में विकसित होंगे।’
Gwalior Medical Negligence: बिना डॉक्टर-वेंटिलेटर के चल रहा था अस्पताल, प्रसूता की मौत पर 3.12 लाख हर्जाना देने का आदेश

HIGHLIGHTS: प्रसूता की मौत पर अस्पताल पर 3.12 लाख का जुर्माना अस्पताल में नहीं थे विशेषज्ञ डॉक्टर और वेंटिलेटर बिना वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहा था हॉस्पिटल ऑक्सीजन नहीं मिलने से बिगड़ी महिला की हालत आयोग बोला- समय पर रेफर करते तो बच सकती थी जान Gwalior Medical Negligence: मध्यप्रदेश। ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने इलाज में गंभीर लापरवाही के मामले में न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल को दोषी माना है। आयोग ने अस्पताल प्रबंधन पर 3 लाख 12 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। बता दें कि आयोग के अनुसार अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर, वेंटिलेटर और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मौजूद नहीं थीं, जिसके कारण प्रसूता की हालत बिगड़ती चली गई। Coconut Water Benefits: गर्मी में रोजाना नारियल पानी पीना कितना फायदेमंद है? डिलीवरी के बाद बिगड़ी तबीयत मामला डी.डी. नगर निवासी उदयभान शर्मा की पत्नी अर्चना शर्मा से जुड़ा है। 30 सितंबर 2023 को उन्हें डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन सिजेरियन डिलीवरी हुई, लेकिन बाद में अर्चना का ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। परिजनों का आरोप है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अस्पताल ने समय पर ऑक्सीजन नहीं दी और न ही बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया। हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें कमला राजा अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। Gwalior Development Projects: ग्वालियर में आज विकास कार्यों की सौगात, 3.64 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन आज जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही आयोग की सुनवाई में अस्पताल प्रबंधन की कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। जांच में पता चला कि अस्पताल के बाहर जिस डॉक्टर के नाम का बोर्ड लगा था, वे वहां मरीज नहीं देखती थीं। अस्पताल बिना वैध रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहा था। साथ ही वेंटिलेटर, सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई और ऑपरेशन थिएटर के उपकरणों को कीटाणुमुक्त करने का कोई रिकॉर्ड भी अस्पताल प्रस्तुत नहीं कर सका। Netflix आपकी कौन-कौन सी जानकारी ट्रैक करता है? जानिए प्राइवेसी बचाने के आसान तरीके आयोग की सख्त टिप्पणी आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा ने अस्पताल को 45 दिन के भीतर 3 लाख 12 हजार रुपए देने का आदेश दिया है। इसमें 3 लाख रुपए आर्थिक क्षतिपूर्ति, 10 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना और 2 हजार रुपए वाद व्यय शामिल हैं। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर मरीज को समय रहते बड़े अस्पताल रेफर कर दिया जाता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी।
सैफ अली खान का खुलासा: ‘मैं हूं ना’ के लिए शाहरुख ने चुना था, पर फराह खान ने बदला फैसला

नई दिल्ली । सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि शाहरुख खान ने उन्हें फिल्म ‘मैं हूं ना’ में रोल ऑफर किया था, लेकिन बाद में फराह खान के दखल के चलते मामला बदल गया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा एक पुराना लेकिन दिलचस्प किस्सा साझा किया, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। सैफ ने बताया कि सुपरस्टार शाहरुख खान ने उन्हें अपनी सुपरहिट फिल्म ‘मैं हूं ना’ में एक रोल ऑफर किया था, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदल गईं और वह मौका हाथ से निकल गया। सैफ के अनुसार, शाहरुख खान ने खुद उन्हें फोन कर फिल्म ‘मैं हूं ना’ के एक महत्वपूर्ण किरदार के लिए चुना था। उन्होंने कहा कि उन्हें यह रोल काफी पसंद आया था और वह इसे करने के लिए तैयार भी थे। लेकिन इसी दौरान फिल्म की डायरेक्टर फराह खान ने उनसे संपर्क किया और स्पष्ट रूप से कहा कि यह भूमिका उनके लिए नहीं है। सैफ ने बताया कि फराह खान के इस कॉल के बाद स्थिति बदल गई और वह प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बन पाए। हालांकि उन्होंने इसे लेकर किसी तरह की नाराजगी नहीं जताई और पूरे किस्से को हल्के अंदाज में साझा किया। बातचीत के दौरान जब उन्हें एहसास हुआ कि यह बयान सुर्खियां बना सकता है, तो वह मुस्कुराते हुए बोले कि “अब यह बात वायरल हो जाएगी।” इंटरव्यू में सैफ ने शाहरुख खान और उनकी प्रोडक्शन कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि शाहरुख एक प्रोड्यूसर के तौर पर अपने डायरेक्टर्स को पूरी आज़ादी देते हैं और सेट पर अनावश्यक दखल नहीं करते। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग यह अंदाजा लगा रहे हैं कि सैफ को फिल्म में कौन-सा रोल ऑफर हुआ था, जबकि कुछ इसे सिर्फ एक पुराना कास्टिंग निर्णय मान रहे हैं। गौरतलब है कि सैफ अली खान और शाहरुख खान पहले भी फिल्म ‘कल हो ना हो’ में साथ काम कर चुके हैं और दोनों के बीच अच्छे संबंध माने जाते हैं। वहीं, सैफ की नई फिल्म ‘कर्तव्य’ भी चर्चा में है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है और इसे शाहरुख खान की रेड चिलीज एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है।
MP: इस नेता ने PM मोदी की अपील के विरुद्ध निकाली 200 गाड़ियों की रैली, CM का बड़ा एक्शन… नियुक्ति निरस्त

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने गुरुवार को मध्य प्रदेश टेक्स्ट बुक कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Text Book Corporation) के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह (Saubhagya Singh) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सादगी बरतने की अपील के बावजूद 200 गाड़ियों की एक जश्न वाली रैली निकालने के लिए दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नोटिस का जवाब मिलने तक सौभाग्य सिंह पर अपने ऑफिस में प्रवेश, सरकारी वाहनों और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि जांच पूरी होने तक उन्हें सौंपी गई सभी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई हैं। उन्होंने कहा, ”मुख्यमंत्री कार्यालय ने मितव्ययिता उपायों के घोर उल्लंघन का संज्ञान लिया है। सरकार ने वाहन रैली को अनावश्यक और सरकार की सादगी की नीति के खिलाफ माना है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि दिखावा और अनुशासनहीनता बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” भाजपा नेता ने सैकड़ों गाड़ियों संग रैली निकाली, पार्टी ने पद से हटायाऐसे ही एक मामले में सैकड़ों गाड़ियों के साथ रैली निकालने के आरोप में भाजपा ने मध्य प्रदेश के भिंड जिले के किसान मोर्चा अध्यक्ष को पद से हटा दिया है। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, हाल ही में इस पद पर नियुक्त किए गए सज्जन सिंह यादव को मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के आदेश पर पद से हटाया गया है। बताया गया कि सज्जन सिंह यादव के किसान मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के अवसर पर बुधवार को भिंड शहर में एक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें सैकड़ों वाहन शामिल हुए थे। भिंड शहर भोपाल से लगभग 500 किलोमीटर दूर है। भाजपा ने यादव को जारी पत्र में कहा कि उनका यह आचरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाओ अपील के विपरीत है और गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। नियुक्ति निरस्त की गईभाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “यादव की नियुक्ति अनुशासनहीनता और ईंधन बचत एवं मितव्ययिता के उपायों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बार-बार की गई अपील का पालन नहीं करने के कारण निरस्त कर दी गई है।” गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने, शहरों में अधिक से अधिक मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, पार्सल आवाजाही के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने जैसे उपायों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी।
थ्यूसीडाइड्स ट्रैप पर जिनपिंग का बड़ा संदेश, ट्रंप से बातचीत में टकराव टालने की अपील; क्या बदलेंगे अमेरिका-चीन रिश्ते?

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई हालिया उच्च स्तरीय बैठक एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गई है। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। लेकिन इस बैठक का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला पहलू वह रहा, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र किया और स्पष्ट रूप से टकराव से बचने की अपील की। उनके इस बयान को अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। शी जिनपिंग ने बातचीत के दौरान सवाल उठाया कि क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका और चीन इस ऐतिहासिक “ट्रैप” से बाहर निकलकर सहयोग और स्थिरता का नया मॉडल विकसित कर सकती हैं? उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों का साथ आना आवश्यक है, ताकि दुनिया में शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रह सके। उनके बयान का अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि चीन टकराव के बजाय सहयोग की नीति को प्राथमिकता देना चाहता है, हालांकि इसके पीछे वैश्विक शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका को मजबूत करने की रणनीति भी देखी जा रही है। ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ शब्द कोई नया राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन ने आधुनिक राजनीति में लोकप्रिय बनाया था। यह सिद्धांत प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के अध्ययन पर आधारित है, जिन्होंने लगभग ढाई हजार साल पहले एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध का विश्लेषण किया था। थ्यूसीडाइड्स का मानना था कि जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित महाशक्ति को चुनौती देती है, तो दोनों के बीच तनाव बढ़ना लगभग स्वाभाविक हो जाता है और कई बार यह स्थिति युद्ध तक पहुंच जाती है। आधुनिक वैश्विक राजनीति में इस सिद्धांत को अमेरिका और चीन के रिश्तों से जोड़ा जाता है। पिछले कुछ दशकों में चीन ने आर्थिक, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आया है। दूसरी ओर अमेरिका लंबे समय से वैश्विक सुपरपावर की भूमिका में रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती गई है। व्यापार युद्ध, टैरिफ विवाद, टेक्नोलॉजी पर प्रतिबंध, साइबर सुरक्षा, ताइवान मुद्दा और दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों ने इस तनाव को और गहरा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा हालात काफी हद तक ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ जैसी स्थिति को दर्शाते हैं, जहां एक उभरती हुई शक्ति और एक स्थापित महाशक्ति के बीच टकराव की संभावना बनी रहती है, भले ही कोई भी पक्ष युद्ध नहीं चाहता हो। इसी कारण शी जिनपिंग का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह केवल चेतावनी नहीं बल्कि कूटनीतिक संदेश भी है कि दोनों देशों को बातचीत और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। जिनपिंग ने पहले भी कई मौकों पर इस सिद्धांत का उल्लेख किया है और हमेशा यही संदेश दिया है कि अमेरिका और चीन यदि साझा हितों पर काम करें तो वैश्विक स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान चीन की उस रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जिसमें वह खुद को अमेरिका के बराबर एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। कुल मिलाकर यह बैठक और ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ पर दिया गया बयान केवल एक राजनीतिक चर्चा नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाला संकेत भी माना जा रहा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन, प्रतिस्पर्धा और सहयोग—इन तीनों के बीच आगे का रास्ता किस दिशा में जाएगा, यह वैश्विक राजनीति के लिए सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
US: कोर्ट ने फिर दिया ट्रंप को बड़ा झटका….. 10% टैरिफ को बताया अवैध

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अमेरिकी अदालत (American Court) में एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है। गुरुवार को अमेरिकी व्यापार अदालत ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क (10% Global Import Duty) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून का हवाला देकर लगाए गए ये शुल्क तर्कसंगत नहीं हैं। आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को दुनिया भर से आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इसके खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने मुकदमा दायर किया था। राज्यों का तर्क था कि ट्रंप ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से बचने के लिए उठाया है, जिसने 2025 में लगाए गए उनके पिछले भारी-भरकम टैरिफ को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया था। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है। क्या है धारा 122?यह कानून राष्ट्रपति को केवल तब शुल्क लगाने की अनुमति देता है जब देश गंभीर भुगतान संतुलन घाटे का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत में भारी गिरावट रोकने की जरूरत हो। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि वह 5 दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करे और उन आयातकों को पैसे वापस करे जिन्होंने यह टैक्स भरा था। इन क्षेत्रों पर असर नहींध्यान देने वाली बात यह है कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे, क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती या सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के दायरे में नहीं आते हैं। सरकार की दलील?ट्रंप प्रशासन ने इन शुल्कों का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन ड़लर तक पहुंच गया है और चालू खाता घाटा जीडीपी का 4% है। हालांकि अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं जूझ रहा है, इसलिए इन शुल्कों का कोई कानूनी आधार नहीं था। आगे क्या होगा?अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है। वर्तमान में लगाए गए ये 10% वैश्विक टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाले थे, लेकिन इस अदालती फैसले ने प्रशासन की व्यापारिक रणनीति को समय से पहले ही संकट में डाल दिया है।
नेपाल में फीकी पड़ी बालेन शाह का चमक…. महज दो माह में टूटने लगा Gen Z का भरोसा!

काठमांडु। नेपाल (Nepal) में पारंपरिक राजनेताओं (Traditional Politicians) के खिलाफ जेनरेशन जेड (Gen-Z) के आंदोलन के रूप में देखे गए ऐतिहासिक चुनावों के जरिए सत्ता में आए बालेन शाह (Balen Shah) की सरकार के लिए शुरुआती उम्मीदें और चमक अब फीकी पड़ती नजर आ रही हैं। महज दो महीने के भीतर ही सरकार चौतरफा विवादों, अदालती झटकों और कूटनीतिक मोर्चों पर आलोचनाओं से घिर गई है। संसद सत्र को टालकर अध्यादेशों की बाढ़ लाने और आलोचनाओं पर प्रधानमंत्री शाह की चुप्पी ने उनके समर्थकों को भी निराश किया है। बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के पास 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 181 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत है, लेकिन नेशनल असेंबली (ऊपरी सदन) में उनका एक भी सदस्य नहीं है। विधायी संशोधन और कानून पारित करने के लिए उच्च सदन की भूमिका अनिवार्य होती है। इस विधायी गतिरोध से बचने के लिए शाह सरकार ने एक विवादास्पद रास्ता चुना। 30 अप्रैल को शुरू होने वाले निचले सदन के सत्र को 11 मई तक टाल दिया गया और इस 12 दिनों के अंतराल में सरकार ने आठ अध्यादेश पारित कर दिए। समर्थकों का मानना है कि यह उस सुधार के एजेंडे के साथ विश्वासघात है जिसके दम पर वे सत्ता में आए थे। न्यायपालिका से जुड़ा विवादसबसे बड़ा विवाद संवैधानिक परिषद से जुड़े अध्यादेश को लेकर हुआ। यह परिषद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीशों और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति की सिफारिश करती है। नए अध्यादेश के जरिए प्रधानमंत्री को वीटो पावर दे दी गई। इसके तहत यदि किसी नाम पर टाई होता है, तो पीएम का फैसला अंतिम होगा और वे बहुमत के फैसले को भी पलट सकते हैं। परिषद के दो सदस्यों उच्च सदन के अध्यक्ष नारायण दहाल और भीष्मराज आंगदाम्बे ने इस पर असहमति जताई। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी इसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजा था, लेकिन सरकार द्वारा बिना बदलाव के दोबारा भेजे जाने पर उन्हें इसे मंजूरी देनी पड़ी। अध्यादेश के तुरंत बाद परिषद ने डॉ. मनोज शर्मा को मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की, जिससे कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सपना मल्ला प्रधान सहित तीन वरिष्ठ न्यायाधीश पीछे छूट गए। नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने इसप कहा, “बालेन को इस कृत्य की कीमत चुकानी होगी, जो देश की 15 मिलियन महिलाओं का अपमान है।” सुप्रीम कोर्ट का झटकाप्रशासन को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करने के नाम पर सरकार ने एक अन्य अध्यादेश के जरिए संवैधानिक निकायों, राज्य बोर्डों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों में तैनात करीब 1,600 लोगों की नियुक्तियां रद्द कर दीं। इसके साथ ही, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र संगठनों और कर्मचारी यूनियनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया। हालांकि, नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने इस अध्यादेश पर रोक लगा दी है, जो शाह सरकार के लिए एक बड़ा कानूनी झटका है। इससे पहले कोर्ट ने बिना पुनर्वास के सुकुम्बासी (भूमिहीन निवासियों) को हटाने पर भी रोक लगाई थी। संसद में बर्ताव और स्थानीय स्तर पर विरोध11 मई को शुरू हुए संसद सत्र के पहले ही दिन पीएम बालेन शाह सफेद कैनवास जूते पहनकर पहुंचे, जिसे संसदीय मर्यादा के लिहाज से बहुत अनौपचारिक माना गया। इसके बाद वे राष्ट्रपति के अभिभाषण के बीच में ही अचानक सदन से बाहर निकल गए और बुधवार को बिना किसी सूचना के संसद से गायब रहे, जिसके कारण विपक्ष के हंगामे के बाद सदन को स्थगित करना पड़ा। काठमांडू घाटी में बागमती नदी के किनारे चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान दो भूमिहीन लोगों की आत्महत्या के बाद मानवीय संकट गहरा गया। तीखी आलोचना के बाद शाह ने सोशल मीडिया पर सफाई दी कि सरकार सच्चे भूमिहीनों के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन फर्जी भूमिहीनों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी थी। इसके अतिरिक्त, देश के शीर्ष उद्योगपतियों को भ्रष्टाचार के आरोप में हिरासत में लेने के फैसले से घरेलू और विदेशी निवेशकों में डर का माहौल बन गया है, जिसे संभालने के लिए अब वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले को डैमेज कंट्रोल करना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मोर्चे पर भी नई सरकार अनुभवहीन साबित हो रही है। बालेन शाह ने अप्रैल में 17 देशों के राजदूतों से मुलाकात कर बहुपक्षीय संबंधों का भरोसा दिया था। लेकिन इसके तुरंत बाद भारत और चीन ने नेपाल के क्षेत्रीय दावे की अनदेखी करते हुए लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर सड़क खोलने की घोषणा कर दी, जिस पर काठमांडू को विरोध पत्र भेजना पड़ा। बालेन शाह ने संकल्प लिया है कि वे एक साल तक कोई विदेशी दौरा नहीं करेंगे और केवल मंत्रियों या उससे ऊपर के स्तर के गणमान्य व्यक्तियों से ही मिलेंगे। इसी कूटनीतिक कड़े रुख के कारण भारत के विदेश सचिव विवेक मिस्री ने अपना नेपाल दौरा स्थगित कर दिया।
होर्मुज रहे हमेशा खुला … ट्रंप-जिनपिंग के बीच बनी सहमति, कई मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा

बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के बीच बीजिंग (Beijing) के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई ऐतिहासिक शिखर बैठक में दोनों नेताओं ने वैश्विक स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस मुलाकात में ताइवान, हॉर्मुज स्ट्रेट, ईरान का परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। साल 2017 के बाद चीन में दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी। बैठक ऐसे समय में हुई जब विश्व युद्ध की आशंकाओं, ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रहा है। जिनपिंग ने ट्रंप का औपचारिक स्वागत करते हुए ताइवान मुद्दे पर सख्त चेतावनी दी। उन्होंने इसे चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। जिनपिंग ने चेतावनी देते हुए कहा कि ताइवान पर कोई भी गलत कदम दोनों देशों के बीच टकराव और युद्ध की स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या चीन और अमेरिका थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से बच सकते हैं? और इसके बजाय बड़े देशों के बीच सहयोग का नया मॉडल बनाने का सुझाव दिया। हॉर्मुज और ईरान पर सहमतिदोनों नेताओं ने सहमति जताई कि विश्व के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट हमेशा खुला और सुरक्षित रहना चाहिए। जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की सैन्य तैनाती या टोल वसूली का विरोध करता है। दोनों पक्ष इस बात पर भी एकमत हुए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाए। वहीं, ट्रंप ने बैठक को ‘बेहद सकारात्मक और सफल’ बताया। उन्होंने जिनपिंग को अपना दोस्त और महान नेता करार दिया। वाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेताओं ने रिश्तों को और मजबूत बनाने, व्यापार सहयोग बढ़ाने, अमेरिकी कंपनियों के लिए चीनी बाजार खोलने और चीन से अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में उद्योगपतियों ने भी लिया हिस्साजिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि भागीदार बनना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि 2026 दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय साबित हो। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जाए और रिश्तों को कभी बिगड़ने नहीं दिया जाए। बता दें कि इस बैठक में एलन मस्क, टिम कुक समेत अमेरिका के कई प्रमुख उद्योगपतियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक के बाद आयोजित राजकीय भोज में ट्रंप ने जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन को सितंबर में वाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया।