सावधान! माइक्रोवेव में कुछ फूड्स को गर्म करना बन सकता है जहर जैसा असर

नई दिल्ली। आज के समय में माइक्रोवेव ओवन हर घर की रसोई का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह जल्दी खाना गर्म करना हो या रात का बचा हुआ भोजन दोबारा तैयार करना हो, माइक्रोवेव ने जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। लेकिन सुविधा के साथ-साथ इसका गलत इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। कई लोग बिना सोचे-समझे हर तरह का खाना माइक्रोवेव में गर्म कर लेते हैं, जबकि कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिन्हें दोबारा गर्म करना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार Microwave oven में कुछ चीजें गर्म करने से न सिर्फ उनका स्वाद और पोषण खराब होता है, बल्कि वे शरीर के लिए हानिकारक भी बन सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि माइक्रोवेव का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए। उबले अंडे को माइक्रोवेव में गर्म करना हो सकता है खतरनाकठंडे उबले अंडे को दोबारा माइक्रोवेव में गर्म करना नुकसानदायक हो सकता है। अंडे के अंदर तेजी से भाप बनने के कारण वह फट भी सकता है। इससे न सिर्फ खाना खराब होता है, बल्कि चोट लगने का खतरा भी रहता है। इसलिए अंडे को हल्की आंच पर धीरे-धीरे गर्म करना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। बचा हुआ चावल बन सकता है सेहत के लिए जोखिमचावल को बार-बार गर्म करना भी सुरक्षित नहीं माना जाता। लंबे समय तक बाहर रखा चावल बैक्टीरिया पैदा कर सकता है, और माइक्रोवेव हर हिस्से को समान रूप से गर्म नहीं कर पाता। ऐसे में कुछ हानिकारक बैक्टीरिया जीवित रह सकते हैं, जो पेट की समस्याएं पैदा कर सकते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां बार-बार गर्म न करेंपालक, मेथी और अन्य हरी सब्जियों को बार-बार माइक्रोवेव में गर्म करने से उनमें मौजूद नाइट्रेट्स बदल सकते हैं, जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसके अलावा इनका स्वाद और पोषण भी कम हो जाता है। मिर्च और तीखी चीजों से रहें सावधानहरी और लाल मिर्च को माइक्रोवेव में गर्म करने से बचना चाहिए। इसमें मौजूद कैप्साइसिन हवा में फैल सकता है, जिससे आंखों और गले में जलन हो सकती है। कई बार माइक्रोवेव खोलते ही तेज तीखी गैस जैसा असर महसूस होता है। प्रोसेस्ड मीट भी हो सकता है नुकसानदायकसॉसेज, सलामी और अन्य प्रोसेस्ड मीट को माइक्रोवेव में गर्म करने पर इनके फैट और प्रिजर्वेटिव्स बदल सकते हैं, जिससे हानिकारक तत्व बन सकते हैं। साथ ही इनकी बनावट भी खराब हो जाती है। माइक्रोवेव का इस्तेमाल कैसे करें सुरक्षितविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि Microwave oven का उपयोग करते समय माइक्रोवेव-सेफ बर्तन ही इस्तेमाल करें। खाना हमेशा ढककर गर्म करें ताकि तापमान समान रूप से फैल सके। बहुत लंबे समय तक खाना गर्म करने से बचें क्योंकि इससे पोषण भी कम हो सकता है। इसके अलावा माइक्रोवेव की नियमित सफाई भी जरूरी है, क्योंकि अंदर गिरने वाले खाने के कण बैक्टीरिया पैदा कर सकते हैं। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो माइक्रोवेव सुरक्षित और बेहद उपयोगी उपकरण है, लेकिन लापरवाही इसे स्वास्थ्य के लिए जोखिमभरा बना सकती है।
पहाड़ों में वेकेशन प्लान? जानिए मनाली और दार्जिलिंग में कौन देगा बेस्ट एक्सपीरियंस

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग ठंडी और सुकून भरी जगहों की तलाश में निकल पड़ते हैं। भारत में वैसे तो कई खूबसूरत हिल स्टेशन हैं, लेकिन Manali और Darjeeling सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले समर डेस्टिनेशन माने जाते हैं। दोनों ही जगहें अपनी अलग खूबसूरती, मौसम और अनुभव के लिए मशहूर हैं। ऐसे में अक्सर लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि गर्मियों में घूमने के लिए कौन-सी जगह ज्यादा बेहतर रहेगी। अगर आप भी इसी सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, तो यहां जानिए मनाली और दार्जिलिंग में क्या है खास। Manali एडवेंचर और बर्फ का मजाहिमाचल प्रदेश में स्थित Manali गर्मियों में घूमने के लिए सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक है। मई-जून के दौरान यहां का तापमान लगभग 10 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। ठंडी हवाएं और पहाड़ों पर जमी बर्फ लोगों को खूब आकर्षित करती है। मनाली खासतौर पर उन लोगों के लिए बेस्ट माना जाता है जिन्हें एडवेंचर पसंद है। यहां पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग और स्नो एक्टिविटीज का शानदार अनुभव मिलता है। Solang Valley, Rohtang Pass, Atal Tunnel और Hadimba Devi Temple यहां की सबसे मशहूर जगहों में शामिल हैं। अगर बजट की बात करें, तो दिल्ली से 3-4 दिन की मनाली ट्रिप करीब 5 हजार से 8 हजार रुपये में आराम से पूरी हो सकती है। बस या वोल्वो से यहां पहुंचना भी काफी आसान है। Darjeeling शांति और प्राकृतिक सुंदरता का संगअगर आप भीड़भाड़ और एडवेंचर से ज्यादा शांत माहौल और खूबसूरत नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो Darjeeling आपके लिए परफेक्ट जगह हो सकती है। पश्चिम बंगाल का यह हिल स्टेशन अपनी चाय बागानों, बादलों से ढकी पहाड़ियों और कंचनजंगा के शानदार दृश्यों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। गर्मियों में यहां का तापमान 12 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है, जो काफी आरामदायक महसूस होता है। Tiger Hill, Batasia Loop और Darjeeling Himalayan Railway यानी टॉय ट्रेन यहां के सबसे बड़े आकर्षण हैं। हालांकि दार्जिलिंग की यात्रा मनाली के मुकाबले थोड़ी महंगी पड़ सकती है। यहां पहुंचने के लिए पहले न्यू जलपाईगुड़ी जाना पड़ता है और फिर टैक्सी से पहाड़ों तक सफर करना होता है। 3-4 दिन की ट्रिप में लगभग 8 हजार से 15 हजार रुपये तक का खर्च आ सकता है। आखिर कौन-सी जगह है बेस्टअगर आप कम बजट में एडवेंचर, बर्फ और रोमांच का मजा लेना चाहते हैं, तो Manali आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। वहीं अगर आप शांत माहौल, प्राकृतिक सुंदरता और रिलैक्सिंग ट्रिप चाहते हैं, तो Darjeeling का अनुभव आपको जरूर पसंद आएगा। दोनों ही जगहें अपने-अपने अंदाज में बेहद खास हैं। अब यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है कि आप रोमांच से भरी छुट्टियां बिताना चाहते हैं या बादलों और चाय बागानों के बीच सुकून तलाशना चाहते हैं।
मां गंगा के अवतरण दिवस पर उमड़ेगी आस्था: गंगा दशहरा 25 मई को, स्नान-दान का मिलेगा फल..

नई दिल्ली । देशभर में आस्था का माहौल उस समय विशेष रूप से गहराने लगता है जब गंगा दशहरा जैसे पवित्र पर्व की तिथि नजदीक आती है। वर्ष 2026 में यह महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर 25 मई को मनाया जाएगा। इस दिन को केवल एक पर्व के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मिक उन्नति के अवसर के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे यह तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन की शुरुआत श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जब वे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा और मन को शुद्ध करने की प्रक्रिया मानी जाती है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन किया गया स्नान व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है और उसे पुण्य की ओर अग्रसर करता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष गंगा दशहरा की दशमी तिथि 25 मई की सुबह से प्रारंभ होकर अगले दिन तक प्रभाव में रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार पर्व 25 मई को ही मनाया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त को स्नान, पूजा और दान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु इन समयों में धार्मिक क्रियाओं को विशेष महत्व देते हैं ताकि अधिकतम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सके। गंगा दशहरा का एक महत्वपूर्ण पहलू दान की परंपरा भी है। इस दिन अन्न, वस्त्र, धन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। परंपरा के अनुसार जरूरतमंदों को सहायता देना और ब्राह्मणों को सम्मानपूर्वक दान देना विशेष फलदायी होता है। साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करना भी इस दिन की धार्मिक भावना का हिस्सा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक हैं। पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कठोर तप किया था, जिसके परिणामस्वरूप गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। इस कथा के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि दृढ़ संकल्प और आस्था के बल पर असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। आज के समय में गंगा दशहरा का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और जल शुद्धता का भी संदेश देता है। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि जल स्रोतों की रक्षा करना और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। कुल मिलाकर गंगा दशहरा 2026 श्रद्धा, शुद्धता और सामाजिक सहयोग का प्रतीक पर्व है, जो लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ-साथ सेवा और दान की भावना को भी मजबूत करता है। 25 मई का यह दिन उन सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखेगा जो गंगा स्नान और पूजा के माध्यम से अपने जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता की कामना करते हैं।
Santoshi Mata Vrat: शुक्रवार को ऐसे रखें संतोषी माता का व्रत, जानें नियम और महत्व

नई दिल्ली। सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन मां संतोषी की आराधना के लिए विशेष माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा के साथ मां संतोषी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन से दुख, दरिद्रता और परेशानियां दूर हो जाती हैं। मां संतोषी को संतोष, धैर्य और प्रेम की देवी माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी कृपा से घर में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि बनी रहती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां संतोषी भगवान गणेश की पुत्री हैं। शुक्रवार के दिन उनका व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। खास बात यह है कि इस व्रत में खट्टी चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। भक्त माता को गुड़, चना, केला और सफेद मिठाई का भोग लगाते हैं। कैसे करें संतोषी माता की पूजा?व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां संतोषी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को फूलों की माला अर्पित करें और सिंदूर, हल्दी तथा अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद कलश स्थापना करें। कलश में जल भरकर आम के पत्ते रखें और उसके पास घी का दीपक जलाएं। पूजा में अगरबत्ती और धूप का प्रयोग करें। माता को गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाएं। पूजा के दौरान संतोषी माता की कथा सुनना या पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है। अंत में माता की आरती करें और प्रसाद सभी में बांटें। व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यानसंतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजें खाना पूरी तरह निषिद्ध माना गया है। व्रती को दिनभर संयम और शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। कई लोग इस व्रत में केवल एक समय भोजन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि लगातार 16 शुक्रवार तक यह व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। क्या है इस व्रत का महत्वमान्यता है कि मां संतोषी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है, वहीं नौकरी और कारोबार में भी सफलता मिलने की मान्यता है। छात्र-छात्राओं के लिए भी यह व्रत शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे शिक्षा और परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार मां संतोषी अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं और जीवन में संतोष का भाव बनाए रखती हैं। इसलिए शुक्रवार का यह व्रत आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
शुक्रवार का व्रत दूर करता है कई दोष, सही समय पर शुरुआत से मिलता है विशेष फल

नई दिल्ली। सनातन धर्म में शुक्रवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन धन और ऐश्वर्य की देवी शुक्रवार व्रत तथा मां संतोषी की पूजा के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से जीवन में आर्थिक उन्नति, वैवाहिक सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही शुक्र ग्रह से जुड़े दोष भी कम होते हैं। कब शुरू करें शुक्रवार व्रत?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से शुरू करना शुभ माना जाता है। सामान्यतः यह व्रत लगातार 16 शुक्रवार तक रखा जाता है, जिसके बाद विधिपूर्वक उद्यापन किया जाता है। शुक्रवार व्रत की पूजा विधसुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद लाल वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं और फूल, अक्षत, चंदन, कुमकुम तथा मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान ये मंत्र विशेष फलदायी माने जाते हैं-“ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”“विष्णुप्रियाय नमः”इसके साथ ‘श्री सूक्त’ और ‘कनकधारा स्तोत्र’ का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। संतोषी माता व्रत में रखें ये सावधानीयदि आप मां संतोषी का व्रत रखते हैं तो खट्टी चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान मीठे भोजन जैसे खीर-पूरी का सेवन किया जा सकता है। घर में तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से भी परहेज करना चाहिए। क्या मिलता है शुक्रवार व्रत का फलमान्यता है कि नियमित रूप से शुक्रवार व्रत करने पर- धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैंवैवाहिक जीवन में मधुरता आती हैशुक्र ग्रह मजबूत होता हैघर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती हैमनोकामनाओं की पूर्ति होती हैगरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दान देने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
प्रकृति प्रेमियों के लिए जन्नत हैं नॉर्थ-ईस्ट के ये हिल स्टेशन, एक बार जरूर जाएं

नई दिल्ली। भारत का नॉर्थ-ईस्ट अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, शांत माहौल और अनोखी संस्कृति के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां की पहाड़ियां, बादलों से ढकी वादियां, झरने और हरियाली किसी जन्नत से कम नहीं लगतीं। गर्मियों में जब मैदानी इलाकों में तेज गर्मी लोगों को परेशान करती है, तब नॉर्थ-ईस्ट के हिल स्टेशन ठंडी हवा और सुकून भरे माहौल से यात्रियों को अपनी ओर खींच लेते हैं। यहां की यात्रा सिर्फ घूमने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि रास्तों की खूबसूरती, लोकल संस्कृति और मौसम हर पल को खास बना देते हैं। अगर आप भी इस बार कुछ अलग और यादगार ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के ये 10 हिल स्टेशन आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए। Shillong बादलों और बारिश का खूबसूरत शहरमेघालय की राजधानी Shillong आज भी अपने पुराने ब्रिटिश हिल स्टेशन वाले अंदाज को संभाले हुए है। पाइन के पेड़, हल्की बारिश और छोटे-छोटे कैफे इस शहर को बेहद खास बनाते हैं। गर्मियों में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है और हर तरफ फैली हरियाली मन को सुकून देती है। Gangtok पहाड़ों के बीच बसा शांत शहरGangtok अपने साफ-सुथरे माहौल, शांत सड़कों और खूबसूरत मठों के लिए मशहूर है। शाम के समय धुंध पूरे शहर को ढक लेती है, जिससे इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है। यहां का लोकल बाजार और पहाड़ी कैफे भी पर्यटकों को खूब पसंद आते हैं। Tawang सुकून और आध्यात्म का अनोखा संगमअरुणाचल प्रदेश का Tawang पहुंचने में समय जरूर लगता है, लेकिन यहां की खूबसूरती सफर की सारी थकान मिटा देती है। ऊंचे पहाड़, बदलता मौसम और यहां का प्रसिद्ध मठ इसे बेहद खास बनाते हैं। यहां की शांति लोगों को शहरों की भागदौड़ से दूर ले जाती है। Ziro Valley प्रकृति और संस्कृति का मेलZiro Valley अपनी प्राकृतिक सुंदरता और लोकल संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। धान के खेत, पाइन के जंगल और शांत वातावरण यहां आने वाले लोगों को अलग ही अनुभव देते हैं। Cherrapunji बारिश और बादलों की दुनियाCherrapunji सिर्फ बारिश के लिए ही नहीं, बल्कि अपने खूबसूरत रूट ब्रिज और बादलों से ढकी पहाड़ियों के लिए भी मशहूर है। गर्मियों में यहां का मौसम बेहद रोमांटिक और ठंडा रहता है। Haflong भीड़ से दूर सुकून भरी जगहअसम का Haflong कम चर्चित जरूर है, लेकिन इसकी यही खासियत इसे खास बनाती है। झीलों और हरियाली से घिरा यह छोटा हिल स्टेशन शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए बेहतरीन जगह है। Pelling कंचनजंगा का शानदार नजाराPelling उन लोगों के लिए परफेक्ट जगह है, जो पहाड़ों के बीच शांति का अनुभव करना चाहते हैं। यहां से कंचनजंगा की बर्फीली चोटियां बेहद खूबसूरत दिखाई देती हैं। Kalimpong शांत और खूबसूरत पहाड़ी शहरKalimpong दार्जिलिंग की तुलना में कम भीड़भाड़ वाला और ज्यादा शांत माना जाता है। यहां के पुराने चर्च, मठ और पहाड़ी बाजार पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं। Aizawl पहाड़ियों पर बसा खूबसूरत शहरमिजोरम की राजधानी Aizawl अपनी ढलानों पर बने घरों और धुंध से ढकी पहाड़ियों के लिए जानी जाती है। यहां का शांत माहौल यात्रियों को काफी पसंद आता है। Darjeeling चाय बागानों और टॉय ट्रेन का शहरDarjeeling आज भी भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में शामिल है। चाय बागान, टॉय ट्रेन और हिमालय के खूबसूरत नजारे इसे खास बनाते हैं। सुबह के समय यहां की वादियां किसी सपने जैसी लगती हैं।
विकसित भारत 2047: वैश्विक संकटों के बीच राष्ट्र प्रथम का नया आह्वान

– गौहर आसिफभारत आज एक ऐसे निर्णायक दौर में खड़ा है, जहाँ वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राष्ट्रीय एकता और जिम्मेदारी की भावना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विकसित भारत 2047 केवल एक दीर्घकालिक विकास योजना नहीं, बल्कि एक ऐसा राष्ट्रीय संकल्प है जो नागरिकों की जीवनशैली, आर्थिक व्यवहार और सामूहिक सोच से जुड़ा हुआ है। हाल के वैश्विक संकट महामारी, युद्ध, ऊर्जा संकट और आर्थिक अस्थिरता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकसित राष्ट्र बनने के लिए सरकार की नीतियों के साथ-साथ जनता की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। इसी संदर्भ में Narendra Modi द्वारा हाल में की गई “राष्ट्र प्रथम” अपील को समझना आवश्यक है। यह अपील केवल संकट से निपटने के लिए अस्थायी उपाय नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 की दिशा में सामूहिक राष्ट्र निर्माण का संदेश है। जब प्रधानमंत्री नागरिकों से कुछ जीवनशैली आधारित कदम अपनाने का आग्रह करते हैं, तो उसका उद्देश्य केवल तात्कालिक बचत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों को मजबूत करना और आत्मनिर्भरता की संस्कृति विकसित करना है। प्रधानमंत्री की अपील में सबसे प्रमुख सुझावों में एक था जहाँ संभव हो, वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देना। यह कदम केवल व्यक्तिगत सुविधा के लिए नहीं है। इससे ईंधन की खपत घटती है, यातायात पर दबाव कम होता है और ऊर्जा संरक्षण होता है। वैश्विक तेल कीमतों की अस्थिरता के समय यह एक व्यावहारिक आर्थिक रणनीति भी है। यदि लाखों लोग रोज़ाना कम यात्रा करते हैं, तो विदेशी तेल आयात पर दबाव घटता है, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है। दूसरा महत्वपूर्ण आह्वान था अगले एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचना। भारत दुनिया में सोने का बड़ा आयातक है, और सोने की खरीद से विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है। वैश्विक संकट के समय जब विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन महत्वपूर्ण होते हैं, तब सोने की खरीद में कमी देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूत कर सकती है। यह एक ऐसा उदाहरण है जहाँ व्यक्तिगत निवेश का निर्णय भी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालता है। इसी तरह पेट्रोल और डीज़ल की खपत कम करने तथा सार्वजनिक परिवहन मेट्रो, बस और अन्य सामूहिक साधनों का उपयोग बढ़ाने की अपील सीधे ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग केवल पर्यावरणीय दृष्टि से नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी राष्ट्रहित में है। जब नागरिक निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन चुनते हैं, तो यह राष्ट्रीय संसाधनों की बचत का हिस्सा बन जाता है। प्रधानमंत्री द्वारा खाद्य तेल (खाद तेल) के सीमित उपयोग की बात भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा है। भारत खाद्य तेल का बड़ा आयातक है। यदि नागरिक अनावश्यक खपत कम करें, तो आयात बिल घट सकता है। यह स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी कदम है। राष्ट्र निर्माण कभी-कभी ऐसे छोटे दिखने वाले निर्णयों से भी जुड़ता है, जो करोड़ों लोगों के स्तर पर बड़ा प्रभाव डालते हैं। एक और महत्वपूर्ण संदेश था विदेशी ब्रांडों का कम उपयोग और स्वदेशी उत्पादों को अपनाना। यह आत्मनिर्भर भारत की मूल भावना है। जब भारतीय उपभोक्ता स्थानीय उत्पादों और निर्माताओं को प्राथमिकता देते हैं, तो घरेलू उद्योग मजबूत होते हैं, रोजगार बढ़ता है और पूंजी देश के भीतर ही रहती है। स्वदेशी केवल भावनात्मक नारा नहीं; यह आर्थिक राष्ट्रवाद का व्यावहारिक मॉडल है। विकसित भारत 2047 की दिशा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमता ही विकसित अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। इसी क्रम में विदेश यात्राओं से बचने की अपील भी वैश्विक आर्थिक परिस्थिति से जुड़ी है। विदेश यात्रा पर होने वाला खर्च, विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह बढ़ाता है। यदि नागरिक घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता दें, तो यह न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है बल्कि स्थानीय रोजगार और सेवा क्षेत्र को भी गति देता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में घरेलू पर्यटन स्वयं में आर्थिक विकास का बड़ा स्रोत है। इन सभी अपीलों का मूल संदेश यही है कि संकट के समय राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। सरकार नीतियाँ बनाती है, लेकिन उनकी सफलता नागरिकों की भागीदारी पर निर्भर करती है। वैश्विक संकटों के बीच भारत सरकार ने स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं और बुनियादी ढाँचे पर तेज़ी से काम किया है। लेकिन विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब नागरिक भी अपने दैनिक व्यवहार में राष्ट्रहित को स्थान देंगे। आज भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है। यह एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण है जो आत्मनिर्भर हो, वैश्विक नेतृत्व करे और संकटों के समय स्थिरता का उदाहरण बने। G20 New Delhi Summit ने दिखाया कि भारत अब वैश्विक मंच पर नीति-निर्माता के रूप में उभर रहा है। लेकिन इस नेतृत्व की असली शक्ति घरेलू अनुशासन और राष्ट्रीय एकता से आती है। विकसित भारत 2047 की यात्रा में सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और नागरिक भागीदारी। प्रधानमंत्री की हालिया अपील इसी दृष्टि का सामाजिक विस्तार है। जब नागरिक वर्क फ्रॉम होम अपनाते हैं, सोना खरीद कम करते हैं, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाते हैं, खाद्य तेल की बचत करते हैं, स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं और विदेशी यात्राओं से बचते हैं, तब वे केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं ले रहे होते वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभा रहे होते हैं। विकसित भारत 2047 केवल सरकारी परियोजनाओं का परिणाम नहीं होगा। यह तब साकार होगा जब हर भारतीय अपने जीवन में “राष्ट्र प्रथम” को व्यवहार में उतारे। प्रधानमंत्री की अपील इसी सामूहिक चेतना का आह्वान है जहाँ छोटे व्यक्तिगत कदम मिलकर एक बड़े राष्ट्रीय भविष्य का निर्माण करते हैं।
समर स्पेशल हेल्दी टी: शरीर को रखे ठंडा और दिमाग को शांत

नई दिल्ली। भीषण गर्मी के मौसम में शरीर में थकान, बेचैनी, तनाव और पाचन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। ऐसे में गुड़हल की चाय एक बेहतरीन नेचुरल ड्रिंक साबित हो सकती है। लाल रंग के खूबसूरत गुड़हल के फूलों से तैयार यह हर्बल चाय न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाती है, बल्कि मानसिक तनाव कम करने और कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाने में भी मदद करती है। आयुर्वेद में भी गुड़हल को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी गुड़हल की चाय को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बता चुका है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर और मन दोनों को शीतल रखने में सहायक माना जाता है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मददगारगुड़हल की चाय हाई ब्लड प्रेशर से परेशान लोगों के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व रक्त वाहिकाओं को आराम पहुंचाते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसके एंटीऑक्सीडेंट बैड कोलेस्ट्रॉल कम करने में भी सहायक होते हैं, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा घट सकता है। वजन घटाने में भी असरदाअगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो गुड़हल की चाय आपकी डाइट का अच्छा हिस्सा बन सकती है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करती है और शरीर में जमा अतिरिक्त पानी व नमक बाहर निकालने में सहायक होती है। कम कैलोरी होने की वजह से यह फिटनेस पसंद लोगों के लिए बेहतर विकल्प मानी जाती है। डायबिटीज और इम्युनिटी के लिए भी फायदेमंदगुड़हल की चाय ब्लड शुगर को संतुलित रखने में भी मदद कर सकती है। यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने में सहायक मानी जाती है। इसके अलावा यह लिवर को स्वस्थ रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में भी उपयोगी बताई जाती है। ऐसे बनाएं गुड़हल की चायसूखे गुड़हल के फूल लेंइन्हें गर्म पानी में 5 से 7 मिनट तक उबालें या भिगो देंस्वाद बढ़ाने के लिए थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैंदिन में 1 से 2 कप गुड़हल की चाय पर्याप्त मानी जाती है। इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानीगर्भवती महिलाएंलो ब्लड प्रेशर वाले लोगनियमित दवाइयां लेने वाले मरीज
कितना खतरनाक है नोरो वायरस? जानें इसके लक्षण, फैलने का तरीका और बचाव

नई दिल्ली। दुनिया अभी कोरोना वायरस और दूसरे संक्रमणों के असर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब एक और तेजी से फैलने वाला संक्रमण लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। इस वायरस का नाम है Norovirus, जिसे दुनिया के सबसे संक्रामक पेट संबंधी संक्रमणों में गिना जाता है। यह वायरस अचानक उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करता है। हाल ही में कैरेबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर इसके फैलने से 100 से ज्यादा यात्री और क्रू मेंबर बीमार पड़ गए, जिसके बाद यह संक्रमण फिर चर्चा में आ गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक Norovirus पेट और आंतों में संक्रमण फैलाने वाला बेहद संक्रामक वायरस है। यह खासतौर पर भीड़भाड़ और बंद जगहों में तेजी से फैलता है। स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल, नर्सिंग होम और क्रूज शिप जैसी जगहों पर इसके मामले अचानक बढ़ जाते हैं। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, दूषित खाना खाने या गंदा पानी पीने से यह वायरस आसानी से फैल सकता है। इस संक्रमण के लक्षण अचानक दिखाई देते हैं। मरीज को तेज उल्टी, बार-बार दस्त, मतली और पेट में मरोड़ की शिकायत होती है। कई लोगों में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और ठंड लगने जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। डॉक्टरों के अनुसार संक्रमण के 12 से 48 घंटे के भीतर इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। आमतौर पर मरीज 1 से 3 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इस दौरान शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर तेजी से पानी खोने लगता है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना, मुंह सूखना और पेशाब कम होना जैसे संकेत दिखाई देते हैं। छोटे बच्चों में रोते समय आंसू कम आना और अत्यधिक नींद आना भी डिहाइड्रेशन के संकेत माने जाते हैं। यही वजह है कि यह संक्रमण बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी Centers for Disease Control and Prevention यानी CDC के मुताबिक हर साल दुनियाभर में करीब 68 करोड़ से ज्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में आते हैं। इनमें बड़ी संख्या पांच साल से कम उम्र के बच्चों की होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल हजारों बच्चों की मौत डिहाइड्रेशन और इलाज की कमी के कारण हो जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि Norovirus के कई प्रकार होते हैं, इसलिए एक बार संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति दोबारा इसकी चपेट में आ सकता है। फिलहाल इस वायरस की कोई खास वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। एंटीबायोटिक दवाएं भी इस पर असर नहीं करतीं, क्योंकि यह बैक्टीरिया नहीं बल्कि वायरस से होने वाला संक्रमण है। इससे बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बाहर का दूषित खाना खाने से बचें, हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूरी बनाए रखें। डॉक्टर मरीजों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने और पर्याप्त आराम करने की सलाह देते हैं। अगर उल्टी-दस्त लंबे समय तक जारी रहें या शरीर में पानी की कमी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
स्किन केयर में बेसन का कमाल: इन 3 तरीकों से इस्तेमाल कर बढ़ाएं चेहरे की चमक

नई दिल्ली। रसोई में आसानी से मिलने वाला बेसन सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि त्वचा की खूबसूरती निखारने में भी बेहद असरदार माना जाता है। बेसन में मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को साफ, चमकदार और हेल्दी बनाने में मदद करते हैं। अगर चेहरे पर दाग-धब्बे, टैनिंग, मुंहासे या रूखापन परेशान कर रहा है, तो बेसन के ये घरेलू फेस पैक आपकी स्किन को नेचुरल ग्लो दे सकते हैं। 1. बेसन और हल्दी फेस पैकअगर चेहरे पर मुंहासे, पिंपल्स और दाग-धब्बों की समस्या है, तो बेसन और हल्दी का फेस पैक काफी फायदेमंद हो सकता है। कैसे बनाएं2 चम्मच बेसन लेंइसमें चुटकीभर हल्दी मिलाएंकुछ बूंदें नींबू का रस डालेंसभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर लेंलगाने का तरीकाइस पेस्ट को चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर रखें। फिर साफ पानी से चेहरा धो लें। फायदेचेहरे की रंगत निखारता हैएक्ने और पिंपल्स कम करने में मदद करता हैदाग-धब्बों को हल्का करता हैस्किन को नेचुरल चमक देता है हफ्ते में 2 से 3 बार इस्तेमाल करें। 2. बेसन और शहद फेस पैकड्राई और बेजान त्वचा के लिए बेसन और शहद का फेस पैक बेहद असरदार माना जाता है।कैसे बनाएं2 चम्मच बेसन1 चम्मच शहददोनों को अच्छी तरह मिलाकर स्मूद पेस्ट तैयार करें।लगाने का तरीकाइस फेस पैक को चेहरे पर 15-20 मिनट तक लगाएं और फिर पानी से धो लें। फायदेत्वचा को मॉइश्चराइज करता हैटैनिंग कम करने में मदद करता हैस्किन को मुलायम और ग्लोइंग बनाता हैचेहरे की डलनेस दूर करता है बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में 2-3 बार लगाएं। 3. बेसन और मलाई फेस पैक अगर त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है, तो बेसन और मलाई का फेस पैक स्किन को पोषण देने में मदद कर सकता है। कैसे बनाएं2 चम्मच बेसन1 चम्मच मलाईआधा चम्मच अखरोट पाउडरकुछ बूंदें गुलाब जलइन सभी चीजों को मिलाकर पेस्ट तैयार करें। लगाने का तरीकाचेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से स्क्रब करें और 10-15 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। फायदेस्किन ड्राईनेस दूर करता हैडेड स्किन हटाने में मदद करता हैचेहरे की रंगत निखारता हैत्वचा को सॉफ्ट और स्मूद बनाता हैइस फेस पैक का इस्तेमाल सप्ताह में 2 बार किया जा सकता है। ध्यान रखेंकिसी भी फेस पैक को लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।अगर त्वचा बहुत संवेदनशील है, तो नींबू का इस्तेमाल कम करें।फेस पैक लगाने के बाद मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं।