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Sun Tan Removal Tips: घर पर बनाएं ये फेस पेस्ट और पाएं ग्लोइंग स्किन

नई दिल्ली । गर्मियों में सूरज की UV किरणें (Ultraviolet Rays) त्वचा की ऊपरी परत को प्रभावित करती हैं, जिससे स्किन डार्क और डल दिखने लगती है। जो हिस्से खुले रहते हैं जैसे चेहरा, हाथ और गर्दन वह ज्यादा टैन होते हैं। महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स के बजाय घर पर बने नुस्खे इस समस्या में काफी असरदार माने जाते हैं। बेसन और दही का टैन रिमूवल पेस्टकैसे बनाएं:2 चम्मच बेसन2 चम्मच दही1 चुटकी हल्दीइन्हें मिलाकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें। कैसे लगाएं:चेहरे और टैन वाली जगह पर लगाएं15–20 मिनट बाद हल्के हाथों से रगड़कर धो लें फायदे:डेड स्किन हटाता हैस्किन को प्राकृतिक रूप से ब्राइट बनाता हैटैनिंग धीरे-धीरे कम करता है  नींबू और शहद का नेचुरल पेस्टकैसे बनाएं:1 चम्मच शहद1 चम्मच नींबू का रसदोनों को अच्छे से मिलाएं। कैसे लगाएं:टैन वाली जगह पर हल्के हाथ से लगाएं10–15 मिनट बाद धो लें फायदे:नींबू स्किन को हल्का करता हैशहद स्किन को मॉइश्चर देता हैस्किन टोन को समान बनाने में मदद करता है कितने दिनों में असर दिखेगा?अगर इन दोनों पेस्ट को नियमित रूप से 7 दिनों तक इस्तेमाल किया जाए, तो:टैनिंग में कमी दिखाई देने लगती हैस्किन पहले से ज्यादा साफ और फ्रेश लगती है जरूरी सावधानियांनींबू लगाने के बाद धूप में तुरंत न जाएंपहले पैच टेस्ट जरूर करेंबहुत ज्यादा रगड़ने से बचें सन टैन एक आम समस्या है, लेकिन सही घरेलू उपाय अपनाकर इसे आसानी से कम किया जा सकता है। बेसन-दही और शहद-नींबू जैसे नेचुरल पेस्ट त्वचा को बिना साइड इफेक्ट के निखारने में मदद करते हैं।

राष्ट्रीय सी मंकी दिवस 2026 :इतिहास, महत्व और इसकी शुरुआत की पूरी जानकारी

राष्ट्रीय सी मंकी दिवस (National Sea Monkey Day) एक अनोखा और मजेदार दिवस है, जो बच्चों और विज्ञान प्रेमियों के बीच खास लोकप्रिय है। इस दिन का संबंध छोटे जलीय जीवों “Sea Monkeys” से है, जिन्हें असल में Artemia (ब्राइन श्रिम्प) कहा जाता है। यह दिवस इन जीवों की खोज, उनके वैज्ञानिक महत्व और मनोरंजन में उनकी भूमिका को समझाने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत कब और किसने की?राष्ट्रीय सी मंकी दिवस की शुरुआत किसी सरकारी संस्था ने नहीं की, बल्कि यह एक पॉपुलर साइंस और पॉप कल्चर से जुड़ा अनौपचारिक जागरूकता दिवस है।इसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण Harold von Braunhut नामक अमेरिकी उद्यमी हैं, जिन्होंने 1950-60 के दशक में “Sea Monkeys” को एक इंस्टेंट पेट किट के रूप में बाजार में पेश किया। हालांकि यह जीव वैज्ञानिक रूप से पहले से मौजूद थे, लेकिन इन्हें “Sea Monkeys” नाम देकर एक मनोरंजक उत्पाद के रूप में प्रसिद्ध किया गया। इसके बाद इनकी लोकप्रियता बढ़ी और इसी से जुड़ा एक जागरूकता दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। इसे क्यों मनाया जाता है?इस दिन को मनाने के पीछे कई उद्देश्य हैं: बच्चों में विज्ञान और जीव विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना समुद्री सूक्ष्म जीवों (microscopic marine life) के बारे में जागरूकता फैलाना विज्ञान को मनोरंजन के साथ जोड़ना प्रयोगात्मक शिक्षा (experiential learning) को बढ़ावा देना पालतू जीवों और उनके जीवन चक्र को समझना सी मंकी क्या होते हैं?सी मंकी असल में कोई बंदर नहीं होते, बल्कि ये छोटे जलीय क्रस्टेशियन जीव होते हैं। इनका वैज्ञानिक नाम Artemia है ये खारे पानी (salt water) में पाए जाते हैं ये बहुत छोटे होते हैं और पानी में आसानी से जीवित रहते हैं इनका जीवन चक्र वैज्ञानिक अध्ययन के लिए बहुत उपयोगी है इसका महत्व क्या है?सी मंकी दिवस केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विज्ञान शिक्षा का भी एक हिस्सा है। बच्चों को जीव विज्ञान से जोड़ता है पर्यावरण और जल जीवन के प्रति जागरूक करता है वैज्ञानिक प्रयोगों में रुचि बढ़ाता है घर पर आसान विज्ञान प्रयोग का अवसर देता है आधुनिक समय में महत्वआज के समय में यह दिवस विशेष रूप से STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उपयोग किया जाता है। स्कूलों और साइंस किट्स के माध्यम से बच्चे सी मंकी को देखकर जीवन, विकास और पर्यावरण के बारे में सीखते हैं।राष्ट्रीय सी मंकी दिवस विज्ञान और मनोरंजन का एक अनोखा संगम है। यह हमें सिखाता है कि छोटे-छोटे जीव भी प्रकृति और विज्ञान को समझने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह दिवस बच्चों में जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का एक मजेदार तरीका है। -राष्ट्रीय सी मंकी दिवस 2026 विशेष

अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस : महत्व, इतिहास और उद्देश्य की पूरी जानकारी

हर साल 16 मई को दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस (International Day of Light) मनाया जाता है। यह दिन प्रकाश (Light) और प्रकाश-आधारित तकनीकों के महत्व को समझाने और विज्ञान, शिक्षा, संस्कृति और सतत विकास में इसके योगदान को उजागर करने के लिए समर्पित है। प्रकाश केवल देखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन की प्रगति, विज्ञान की खोजों और आधुनिक तकनीक की नींव भी है। इसी महत्व को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस क्यों मनाया जाता है?इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि प्रकाश और प्रकाश तकनीकें (Optics and Photonics) हमारे जीवन के हर क्षेत्र में कितनी महत्वपूर्ण हैं। यह दिन शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, ऊर्जा, पर्यावरण और उद्योग जैसे क्षेत्रों में प्रकाश विज्ञान के योगदान को उजागर करता है। उदाहरण के लिए मेडिकल उपकरणों में लेज़र तकनीक,इंटरनेट और संचार में फाइबर ऑप्टिक्स,सौर ऊर्जा और हरित तकनीक,कैमरा और इमेजिंग तकनीक इन सभी में प्रकाश विज्ञान की अहम भूमिका है। इसकी शुरुआत कब और किसने की?अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस की शुरुआत यूनेस्को (UNESCO) ने की थी। इसे पहली बार 2018 में आधिकारिक रूप से मनाया गया।इस तारीख का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि 16 मई 1960 को वैज्ञानिक थियोडोर मैमन (Theodore Maiman) ने पहली बार सफलतापूर्वक लेज़र (Laser) का प्रदर्शन किया था। यह खोज आधुनिक विज्ञान और तकनीक में एक क्रांतिकारी कदम माना जाता है। इस दिन का महत्व क्या है?अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस का उद्देश्य केवल विज्ञान को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि यह भी है कि दुनिया में ज्ञान, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा मिले। इस दिन का महत्व इस प्रकार है: वैज्ञानिक शिक्षा और शोध को प्रोत्साहन नई तकनीकों के प्रति जागरूकता ऊर्जा दक्षता और सौर ऊर्जा को बढ़ावा वैश्विक सहयोग और विकास विज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाना इस दिन क्या विशेष आयोजन होते हैं?दुनिया भर में इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे, विज्ञान प्रदर्शनियां (Science Exhibitions) स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम लेज़र और प्रकाश तकनीक पर सेमिनार फोटोनिक्स और ऑप्टिक्स वर्कशॉप वैज्ञानिक चर्चाएं और शोध प्रस्तुतियां इन आयोजनों का उद्देश्य युवाओं को विज्ञान और तकनीक की ओर प्रेरित करना होता है। आज के समय में इसका महत्वआज के डिजिटल और तकनीकी युग में प्रकाश विज्ञान का महत्व और भी बढ़ गया है। इंटरनेट, मोबाइल, चिकित्सा, सुरक्षा और ऊर्जा हर क्षेत्र में प्रकाश तकनीक का उपयोग हो रहा है। इसलिए यह दिन हमें विज्ञान के योगदान को समझने और भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार होने की प्रेरणा देता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस विज्ञान और मानव विकास के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है। यूनेस्को द्वारा शुरू किया गया यह दिवस हमें याद दिलाता है कि प्रकाश न केवल जीवन का आधार है, बल्कि यह भविष्य की प्रगति का मार्ग भी है। -अंतर्राष्ट्रीय प्रकाश दिवस विशेष

बारिश से पहले क्यों बढ़ जाते हैं वायरल फीवर के मामले? जानिए मौसम और सेहत का यह अहम संबंध

नई दिल्ली । बारिश से ठीक पहले का मौसम शरीर के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। गर्मी के बाद जब अचानक हवा में नमी बढ़ती है, तापमान बार-बार ऊपर-नीचे होता है और वातावरण अस्थिर हो जाता है, तो वायरस और बैक्टीरिया को फैलने का बेहतर माहौल मिल जाता है। इसी वजह से इस समय वायरल फीवर, फ्लू और इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। इस मौसम में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण शरीर एडजस्ट नहीं कर पाता, जिससे सर्दी-जुकाम, गले में दर्द और बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसके साथ ही नमी बढ़ने से मच्छरों की संख्या भी बढ़ती है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर पड़ता है। गंदा पानी, बाहर का खाना और साफ-सफाई की कमी भी पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग को बढ़ावा देती है। कैसे करें बचाव इस मौसम में बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छर न पनपें। बाहर का खुला या बासी खाना खाने से बचें और हल्का, ताजा भोजन करें। पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। बारिश में भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदलना जरूरी है। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। अगर बुखार, कमजोरी या खांसी लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें। थोड़ी सावधानी रखकर इस मौसम की कई गंभीर बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है।बारिश से पहले बदलते मौसम, नमी और कमजोर इम्युनिटी के कारण वायरल बीमारियां तेजी से फैलती हैं।

शनिवार व्रत के जरूरी नियम: शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही विधि

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय के देवता और कर्मफलदाता माना गया है। मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिवार के दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में चल रही बाधाएं कम होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। लेकिन यह व्रत तभी पूर्ण फल देता है जब इसके नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए। शनिवार व्रत के महत्वपूर्ण नियशनिवार व्रत रखने वाले साधक को कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। व्रत के दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही किसी भी व्यक्ति का अपमान या बुरा बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि शनिदेव कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। व्रत के दिन अन्न का सेवन न करने की परंपरा भी कई जगहों पर निभाई जाती है। व्रत समाप्ति यानी पारण के समय खिचड़ी और काली उड़द दाल का सेवन शुभ माना गया है। दान और सेवा का विशेष महत्वशनिवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धा अनुसार काले तिल, लोहे की वस्तुएं, कंबल, जूते-चप्पल और धन का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना भी शनिदेव को प्रसन्न करने का एक श्रेष्ठ उपाय माना गया है। पूजा विधि और मंत्र जापशनिवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद शनिदेव की पूजा करनी चाहिए। पूजा में शनि देव को काले तिल, फूल, धूप, दीप और सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान “ॐ शं शनैश्चराय नमः” और “शनि मंत्र” का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद शनि चालीसा और आरती करने से पूजा पूर्ण फल देती है। शनि दोष से मुक्ति के विशेष उपायज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही हो तो शनिवार के दिन शनि कवच का पाठ करना लाभकारी माना गया है। इसके साथ ही लगातार आठ शनिवार तक सरसों का तेल शनिदेव को अर्पित करने से शनि दोष के प्रभाव में कमी आने की मान्यता है। शनिवार व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि अनुशासन, संयम और कर्म सुधार का प्रतीक माना जाता है। यदि श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन किया जाए तो जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।

राष्ट्रीय नदी सफाई दिवस 2026: नदियों को बचाने और स्वच्छ भारत की ओर बड़ा कदम

हर साल 16 मई को राष्ट्रीय नदी सफाई दिवस (National River Cleaning Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य देश की नदियों को स्वच्छ, प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित बनाए रखने के लिए लोगों में जागरूकता फैलाना है। नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और जीवन की रीढ़ मानी जाती हैं। इसकी शुरुआत कब और किसने की?राष्ट्रीय नदी सफाई दिवस की शुरुआत किसी एक व्यक्ति या संगठन से नहीं मानी जाती, बल्कि यह एक जन-जागरूकता आधारित पर्यावरणीय अभियान के रूप में विकसित हुआ है।भारत में नदी संरक्षण और सफाई के लिए कई सरकारी योजनाएं पहले से चल रही हैं, जैसे: नमामि गंगे मिशन (2014) राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजनाएं इन्हीं प्रयासों को मजबूत करने और लोगों में भागीदारी बढ़ाने के लिए 16 मई को एक जागरूकता दिवस के रूप में मनाने की परंपरा विकसित हुई, ताकि लोग नदियों की सफाई और संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें। इसे क्यों मनाया जाता है?इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य नदियों को प्रदूषण से बचाना और उनके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:नदियों में बढ़ते प्रदूषण को रोकना औद्योगिक और घरेलू कचरे के दुष्प्रभावों को समझाना स्वच्छ जल स्रोतों को सुरक्षित रखना लोगों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाना सरकार और समाज के बीच सहयोग को मजबूत करना आज के समय में इसकी जरूरत क्यों है?आज के समय में नदियाँ गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। कई कारणों से नदी जल प्रदूषित हो रहा है: औद्योगिक कचरा और रसायन प्लास्टिक और घरेलू अपशिष्ट धार्मिक और सामाजिक कचरे का विसर्जन शहरीकरण और अव्यवस्थित विकास इसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है: पीने के पानी की कमी बीमारियों का खतरा बढ़ना जलीय जीवों का नुकसान पर्यावरणीय असंतुलन इसी कारण नदी सफाई दिवस आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। नदियों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वभारत में नदियों को सिर्फ जल स्रोत नहीं बल्कि देवी का रूप माना गया है। गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी जैसी नदियाँ धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा हैं। प्राचीन काल से ही नदियों के किनारे सभ्यताओं का विकास हुआ है। इस दिन क्या किया जाता है?राष्ट्रीय नदी सफाई दिवस पर देशभर में कई गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं: नदी किनारे सफाई अभियान जन-जागरूकता रैलियाँ स्कूल और कॉलेजों में पर्यावरण कार्यक्रम वृक्षारोपण अभियान सोशल मीडिया पर जागरूकता संदेशराष्ट्रीय नदी सफाई दिवस हमें यह याद दिलाता है कि नदियाँ हमारे जीवन की आधारशिला हैं। यदि हम आज उन्हें सुरक्षित नहीं रखेंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ स्वच्छ जल के लिए संघर्ष करेंगी। इसलिए यह दिन केवल एक अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। -राष्ट्रीय नदी सफाई दिवस 2026

क्या किचन स्पंज से होता है कैंसर? जानिए वायरल दावे की सच्चाई और असली खतरा क्या है

नई दिल्ली । किचन में रोज इस्तेमाल होने वाला स्पंज या स्क्रबर अचानक चर्चा में है, क्योंकि सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल रहा है कि यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इस दावे ने कई लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी तरह भ्रामक और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। असल में किचन स्पंज का सबसे बड़ा मुद्दा कैंसर नहीं बल्कि उसमें पनपने वाले बैक्टीरिया हैं। जब स्पंज लंबे समय तक गीला रहता है और उसमें खाने के छोटे कण फंस जाते हैं, तो यह बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। ऐसे में इसका उपयोग करने पर ये हानिकारक सूक्ष्मजीव बर्तनों और भोजन तक पहुंच सकते हैं, जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां, फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक किसी भी विश्वसनीय शोध में यह साबित नहीं हुआ है कि किचन स्पंज सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। इसलिए इसे लेकर जो दावा वायरल हो रहा है, वह एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है। कैंसर जैसी बीमारी के कारण जटिल और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं, जिनका संबंध सामान्य घरेलू स्पंज से नहीं पाया गया है। विशेषज्ञ यह जरूर मानते हैं कि खराब किचन हाइजीन कई तरह के संक्रमणों को बढ़ावा दे सकती है। गंदा स्पंज बैक्टीरिया का स्रोत बन सकता है, जो खाने की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से साफ करना और समय-समय पर बदलना जरूरी माना जाता है। सेहत विशेषज्ञों के अनुसार किचन स्पंज को कुछ हफ्तों के अंतराल पर बदल देना चाहिए और इस्तेमाल के बाद उसे पूरी तरह सूखने देना चाहिए। इसके अलावा गर्म पानी से समय-समय पर उसकी सफाई करना और अलग-अलग कामों के लिए अलग स्क्रबर का उपयोग करना भी बेहतर माना जाता है। कुल मिलाकर, किचन स्पंज से कैंसर होने का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, लेकिन साफ-सफाई की अनदेखी निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए असली ध्यान डर पर नहीं, बल्कि सही हाइजीन आदतों पर देना चाहिए।

शनिवार व्रत के असरदार उपाय, शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही तरीका

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित होता है। शनि कर्मों के अनुसार फल देते हैं, इसलिए इस दिन की गई पूजा और व्रत जीवन की बाधाओं को कम करने में मदद करता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से शनिवार व्रत करता है, उसके कार्यों में रुकावटें कम होती हैं और भाग्य का साथ मिलने लगता है। शनिवार व्रत का आसान उपाय (सबसे असरदार तरीका)शनिवार के दिन एक बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय बताया जाता है: पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलानाकैसे करें:शनिवार सुबह या शाम पीपल के पेड़ के पास जाएंसरसों के तेल का दीपक जलाएंउसमें एक काले तिल डाल दें“ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जप करेंपेड़ की 7 बार परिक्रमा करें  शनिवार व्रत में क्या करें?काले कपड़े या गहरे रंग के वस्त्र पहनेंशनि मंदिर में तेल चढ़ाएंजरूरतमंदों को काले तिल, कंबल या भोजन दान करेंहनुमान चालीसा का पाठ करें (शनि देव प्रसन्न होते हैं)दिनभर संयम और अनुशासन बनाए रखें क्या नहीं करना चाहिएझूठ बोलने और विवाद से बचेंमांसाहार और शराब से दूर रहेंकिसी का अपमान न करेंक्रोध और जल्दबाजी से बचें शनिवार व्रत से मिलने वाले लाभनौकरी और व्यवसाय में स्थिरताकोर्ट-कचहरी के मामलों में राहतआर्थिक परेशानियों में कमीमानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धिशनि दोष और साढ़ेसाती के प्रभाव में कमी शनिवार व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन और सकारात्मक कर्मों का प्रतीक है। यदि इसे श्रद्धा और सही विधि से किया जाए, तो जीवन में धीरे-धीरे बाधाएं कम होकर सफलता के रास्ते खुलने लगते हैं।

अधिकमास 2026 की शुरुआत: विवाह और मुंडन पर विराम, पूजा-पाठ रहेगा फलदायी

नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास में ही अधिकमास लग रहा है, जिसके कारण यह महीना सामान्य 30 दिनों का न होकर लगभग 60 दिनों तक चलेगा। 16 मई तक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष रहेगा और 17 मई से अधिकमास की शुरुआत होगी। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस समय में किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं। अधिकमास 2026 की तारीखें प्रारंभ: 17 मई 2026समाप्ति: 15 जून 2026 सामान्य ज्येष्ठ मास: 22 मई से 29 जून 2026 विशेष स्थिति: दोनों मास एक-दूसरे के साथ ओवरलैप करेंगे यह वर्ष 13 महीनों का माना जाएगा (हिंदू पंचांग अनुसार) कौन से कार्य रहेंगे वर्जित? अधिकमास को धार्मिक दृष्टि से “मलमास” भी कहा जाता है, इसलिए इस अवधि में कुछ मांगलिक कार्य नहीं किए जाते:विवाह संस्कारगृह प्रवेशमुंडनजनेऊ संस्कारनया व्यापार या शुभ शुरुआतमान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का अपेक्षित फल नहीं मिलता।  अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?इस पवित्र महीने में धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है: पूजा-पाठ और मंत्र जापभगवान विष्णु की आराधनासत्यनारायण कथा“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र जापश्रीमद्भागवत और रामायण पाठ  दान-पुण्यअनाज, कपड़े और धन का दानगरीबों और जरूरतमंदों की मददमंदिरों में दानगायों को भोजन कराना विशेष धार्मिक कार्यतीर्थ स्नानशिवलिंग पर अभिषेकयज्ञ और अनुष्ठानब्रजभूमि और तीर्थ स्थलों की यात्रा अधिकमास का धार्मिक महत्मान्यता है कि सौर और चंद्र कैलेंडर के अंतर को संतुलित करने के लिए हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी कारण इसे अधिकमास कहा जाता है। कथा के अनुसार, जब महीनों का बंटवारा हुआ तो अधिकमास को स्थान नहीं मिला, तब भगवान विष्णु ने इसे “पुरुषोत्तम मास” का नाम देकर अपना प्रिय मास घोषित किया। अधिकमास 2026 आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समय है। यह अवधि भले ही मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित हो, लेकिन पूजा, तप, दान और सेवा के लिए इसे सबसे शुभ माना गया है। जो लोग इस दौरान भक्ति और संयम से जीवन व्यतीत करते हैं, उन्हें विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।

शनिवार की सुबह करें ये 3 काम, दूर होंगी परेशानियां और बढ़ेगी सफलता

नई दिल्ली । शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन सुबह कुछ सरल उपाय करने से जीवन में चल रही रुकावटें कम होती हैं और रुके हुए कामों में गति आने लगती है।  1. घर के मुख्य द्वार की साफ-सफाई करेंवास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है।अगर यह जगह साफ और व्यवस्थित रहती है तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। क्या करें:सुबह उठकर दरवाजे की अच्छे से सफाई करेंपानी छिड़ककर हल्के कपड़े से पोछा लगाएंचाहें तो हल्दी या कुमकुम से शुभ चिन्ह बनाएं  2. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएशनिवार को पीपल के पेड़ का विशेष महत्व माना जाता है। क्या करें:स्नान के बाद सरसों के तेल का दीपक जलाएंदीपक जलाते समय मन शांत रखें और अच्छी कामना करेंयदि पेड़ न मिले तो घर के मंदिर में दीपक जला सकते हैं  3. घर के कोनों से बेकार सामान हटाएंघर के कोनों में जमा कबाड़ और पुरानी चीजें नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती हैं। क्या करें:टूटे-फूटे सामान को हटा देंकोनों की अच्छे से सफाई करेंघर को खुला और व्यवस्थित रखेंइससे घर हल्का और सकारात्मक महसूस होता है। शनिवार की सुबह किए गए ये छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। साफ-सफाई, सकारात्मक सोच और श्रद्धा के साथ किए गए ये काम घर में शांति और स्थिरता लाने में मदद करते हैं।