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अधिकमास 2026 की शुरुआत: विवाह और मुंडन पर विराम, पूजा-पाठ रहेगा फलदायी


नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास में ही अधिकमास लग रहा है, जिसके कारण यह महीना सामान्य 30 दिनों का न होकर लगभग 60 दिनों तक चलेगा। 16 मई तक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष रहेगा और 17 मई से अधिकमास की शुरुआत होगी। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस समय में किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं।

अधिकमास 2026 की तारीखें
 प्रारंभ: 17 मई 2026
समाप्ति: 15 जून 2026
सामान्य ज्येष्ठ मास: 22 मई से 29 जून 2026
विशेष स्थिति: दोनों मास एक-दूसरे के साथ ओवरलैप करेंगे
यह वर्ष 13 महीनों का माना जाएगा (हिंदू पंचांग अनुसार)
कौन से कार्य रहेंगे वर्जित?

अधिकमास को धार्मिक दृष्टि से “मलमास” भी कहा जाता है, इसलिए इस अवधि में कुछ मांगलिक कार्य नहीं किए जाते:
विवाह संस्कार
गृह प्रवेश
मुंडन
जनेऊ संस्कार
नया व्यापार या शुभ शुरुआत
मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का अपेक्षित फल नहीं मिलता।

 अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?
इस पवित्र महीने में धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है:

पूजा-पाठ और मंत्र जाप
भगवान विष्णु की आराधना
सत्यनारायण कथा
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र जाप
श्रीमद्भागवत और रामायण पाठ

 दान-पुण्य
अनाज, कपड़े और धन का दान
गरीबों और जरूरतमंदों की मदद
मंदिरों में दान
गायों को भोजन कराना
विशेष धार्मिक कार्य
तीर्थ स्नान
शिवलिंग पर अभिषेक
यज्ञ और अनुष्ठान
ब्रजभूमि और तीर्थ स्थलों की यात्रा
अधिकमास का धार्मिक महत्
मान्यता है कि सौर और चंद्र कैलेंडर के अंतर को संतुलित करने के लिए हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी कारण इसे अधिकमास कहा जाता है।

कथा के अनुसार, जब महीनों का बंटवारा हुआ तो अधिकमास को स्थान नहीं मिला, तब भगवान विष्णु ने इसे “पुरुषोत्तम मास” का नाम देकर अपना प्रिय मास घोषित किया।

अधिकमास 2026 आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समय है। यह अवधि भले ही मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित हो, लेकिन पूजा, तप, दान और सेवा के लिए इसे सबसे शुभ माना गया है। जो लोग इस दौरान भक्ति और संयम से जीवन व्यतीत करते हैं, उन्हें विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।

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