ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए जरूरी खबर, वाहन जब्ती के नियम समझें

नई दिल्ली। सड़क पर वाहन चलाने के साथ-साथ सही जगह पार्क करना भी उतना ही जरूरी है। अक्सर लोग जल्दबाजी या लापरवाही में ऐसी जगह वाहन खड़ा कर देते हैं, जहां पार्किंग की अनुमति नहीं होती। ऐसी स्थिति में ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई करते हुए वाहन को टो कर सकती है। वाहन टो होने पर चालान के साथ-साथ वाहन छुड़ाने में अतिरिक्त खर्च और समय दोनों लगते हैं। इसलिए हर वाहन चालक के लिए ट्रैफिक नियमों की जानकारी बेहद जरूरी है। नो-पार्किंग जोन में सबसे ज्यादा कार्रवाईयदि कोई वाहन No Parking क्षेत्र में खड़ा पाया जाता है, तो ट्रैफिक पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकती है। कई शहरों में नो-पार्किंग जोन पर विशेष निगरानी रखी जाती है और वहां खड़े वाहनों को सीधे टो कर लिया जाता है। इसलिए वाहन पार्क करने से पहले आसपास लगे संकेत बोर्ड और पार्किंग निर्देशों को ध्यान से देखना जरूरी है। ट्रैफिक बाधित करने पर भी टो होगी गाड़ीअगर आपकी गाड़ी ऐसी जगह खड़ी है जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है, तो पुलिस उसे तुरंत हटवा सकती है।चौराहों, संकरी गलियों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में गलत पार्किंग अक्सर जाम का कारण बनती है। ऐसे मामलों में ट्रैफिक पुलिस वाहन को टो करने के साथ जुर्माना भी लगा सकती है। फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग पर पार्किंग गैरकानूनीफुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं। इन जगहों पर वाहन खड़ा करना नियमों के खिलाफ माना जाता है। यदि कोई वाहन इन स्थानों पर खड़ा पाया जाता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है और कई मामलों में वाहन को टो भी किया जाता है। ट्रैफिक सिग्नल के पास पार्किंग करना भी नियम उल्लंघन की श्रेणी में आता है। लंबे समय तक खड़ी गाड़ी भी बन सकती है समस्याअगर कोई वाहन लंबे समय तक सार्वजनिक स्थान पर बिना निगरानी के खड़ा रहता है और यातायात में बाधा बनता है, तो पुलिस उसे लावारिस मानकर हटवा सकती है। कई शहरों में ऐसे वाहनों की पहचान के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाते हैं। नियमों का उद्देश्य सुरक्षा और व्यवस्थाट्रैफिक नियमों का मकसद केवल चालान काटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखना है। गलत पार्किंग से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और लोगों को परेशानी होती है। इन बातों का रखें विशेष ध्यानहमेशा निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही वाहन खड़ा करेंनो-पार्किंग जोन से बचेंफुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग पर पार्किंग न करेंट्रैफिक सिग्नल और चौराहों के पास वाहन खड़ा न करेंलंबे समय तक सार्वजनिक स्थान पर वाहन छोड़ने से बचें नियमों का पालन करके न सिर्फ चालान और टोइंग से बचा जा सकता है, बल्कि सड़क पर सभी की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
रिजल्ट सुधारना हुआ महंगा? CBSE की नई फीस व्यवस्था पर सवाल

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम जारी होने के बाद पोस्ट-रिजल्ट प्रक्रिया का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। जो छात्र अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे अब अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मंगवा सकेंगे और इसके बाद वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर पाएंगे। हालांकि इस प्रक्रिया में तय किए गए शुल्क को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी और चर्चा दोनों बढ़ गई हैं। कॉपी देखने के लिए 700 रुपए प्रति विषयCBSE के अनुसार छात्र 19 मई से 22 मई 2026 तक अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए प्रति विषय ₹700 शुल्क निर्धारित किया गया है। यानी अगर किसी छात्र को तीन विषयों की कॉपी देखनी है, तो उसे ₹2100 तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर कई लोग इसे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहे हैं। दो चरणों में होगी पूरी प्रक्रियाबोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त करेंगे। इसके बाद ही दूसरे चरण में वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया जा सकेगा। CBSE ने स्पष्ट किया है कि केवल वही छात्र री-इवैल्यूएशन के लिए पात्र होंगे, जिन्होंने पहले स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया होगा। वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की फीस भी तययदि छात्र स्कैन कॉपी देखने के बाद अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे 26 मई से 29 मई 2026 के बीच वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेंगे।इसके लिए बोर्ड ने अलग-अलग शुल्क तय किए हैं-वेरिफिकेशन शुल्क: ₹500 प्रति उत्तर पुस्तिकारी-इवैल्यूएशन शुल्क: ₹100 प्रति प्रश्न बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं अंकCBSE ने साफ किया है कि री-इवैल्यूएशन के बाद अंकों में बदलाव संभव है। यानी छात्रों के नंबर बढ़ भी सकते हैं और कम भी हो सकते हैं। अगर किसी छात्र के अंकों में बदलाव होता है, तो उसे पुरानी मार्कशीट और प्रमाणपत्र जमा करने होंगे। इसके बाद बोर्ड संशोधित अंकपत्र जारी करेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगीबोर्ड ने बताया कि आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएगी। छात्रों को तय समय सीमा के भीतर आवेदन करना और शुल्क जमा करना होगा। प्रत्येक चरण में केवल एक बार आवेदन की अनुमति होगी। सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालउत्तर पुस्तिका देखने के लिए ₹700 प्रति विषय शुल्क तय होने के बाद सोशल मीडिया पर कई छात्र और अभिभावक सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अपनी ही कॉपी देखने के लिए इतनी बड़ी रकम लेना छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। कई यूजर्स इसे “शिक्षा का महंगा सिस्टम” बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग पारदर्शिता के लिए इस प्रक्रिया को जरूरी भी मान रहे हैं।
EPFO पेंशनर्स अब घर बैठे चेक कर सकेंगे PPO और पेंशन पेमेंट डिटेल, सिर्फ 5 स्टेप्स में मिलेगा पूरा हिसाब

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने पेंशनर्स के लिए ऑनलाइन PPO Inquiry और Payment Inquiry सुविधा उपलब्ध कराई है, जिसके जरिए कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन पाने वाले लोग अपनी पेंशन से जुड़ी पूरी जानकारी घर बैठे चेक कर सकते हैं। इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए पेंशनर के पास PPO यानी Pension Payment Order नंबर होना जरूरी है। यह 12 अंकों का यूनिक नंबर होता है, जो रिटायरमेंट के बाद EPFO द्वारा जारी किया जाता है और पेंशनर की आधिकारिक पहचान के तौर पर काम करता है। EPFO पोर्टल पर लॉग इन करके पेंशनर यह देख सकते हैं कि उनकी पेंशन जारी हुई है या नहीं, किसी महीने भुगतान में देरी क्यों हुई, जीवन प्रमाण पत्र कब तक वैध है और बैंक डिटेल्स सही हैं या नहीं। 5 आसान स्टेप्स में ऐसे चेक करें PPO/Payment Inquiry:EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Pensioner सेक्शन में जाकर लॉग इन करें। PPO Enquiry/Payment Enquiry ऑप्शन चुनें। PPO नंबर, ऑफिस ID, जन्मतिथि और कैप्चा भरें। Submit करते ही PPO और पेमेंट से जुड़ी पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिख जाएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सुविधा पेंशनर्स को बैंक या EPFO कार्यालय के चक्कर लगाने से बचाएगी और पेंशन संबंधी समस्याओं का पता लगाने में मदद करेगी।EPFO पेंशनर्स अब ऑनलाइन PPO Inquiry और Payment Inquiry के जरिए अपनी पेंशन और भुगतान की पूरी जानकारी घर बैठे देख सकते हैं।सिर्फ PPO नंबर और कुछ जरूरी डिटेल्स भरकर पेंशन स्टेटस, जीवन प्रमाण पत्र और पेमेंट रिकॉर्ड चेक किया जा सकता है।
Vat Savitri Vrat 2026: पूजा में बांस के पंखे का धार्मिक महत्व जानिए

नई दिल्ली। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस पूजा में कई प्रकार की सामग्री का उपयोग किया जाता है, लेकिन बांस से बना पारंपरिक हाथ पंखा, जिसे कई जगह ‘बेना’ कहा जाता है, विशेष महत्व रखता है। सत्यवान-सावित्री कथा से जुड़ा है संबंधधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाने के लिए यमराज के पीछे-पीछे जा रही थीं, तब ज्येष्ठ महीने की भीषण गर्मी में सत्यवान का शरीर निढाल हो गया था। कथा के अनुसार, सावित्री ने बांस के हाथ पंखे से उन्हें हवा देकर राहत पहुंचाई थी। तभी से वट सावित्री व्रत में बांस के पंखे का उपयोग परंपरा का हिस्सा बन गया। पूजा में क्यों खरीदे जाते हैं दो पंखे?मान्यता है कि वट सावित्री व्रत के दौरान महिलाएं दो बांस के पंखे खरीदती हैं। पूजा के बाद इन पंखों को दान किया जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। पूजा के दौरान पंखे को सेवा, समर्पण और पति-पत्नी के अटूट प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। पंखा दान को माना गया है महादानशास्त्रों में ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी में पंखा दान करना बेहद पुण्यकारी बताया गया है। विशेष रूप से बांस का पंखा दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जरूरतमंदों को राहत मिलती है। इसी वजह से वट सावित्री व्रत की पूजा के बाद महिलाएं पंखा दान करने की परंपरा निभाती हैं। बांस को माना जाता है वंश वृद्धि का प्रतीकहिंदू धर्म में बांस को शुभ और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए बांस से बने पंखे का उपयोग केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि परिवार की खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से भी जुड़ा माना जाता है।
Vat Savitri Vrat 2026: घर के पास वट वृक्ष नहीं? जानिए आसान पूजा विधि

नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वट वृक्ष के नीचे ही यमराज से वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण ज्येष्ठ अमावस्या के दिन बरगद यानी वट वृक्ष की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस वर्ष वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। घर के पास बरगद का पेड़ न हो तो क्या करें?आजकल शहरों और हाईराइज सोसायटियों में बरगद के पेड़ आसानी से नहीं मिलते। ऐसे में महिलाएं पूजा को लेकर परेशान हो जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आसपास वट वृक्ष न हो तो व्रत से एक दिन पहले बरगद की छोटी टहनी लाकर उसे गमले में स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद उसी टहनी के पास देवी सावित्री, सत्यवान और यमराज की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जा सकती है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है। ऐसे करें वट सावित्री पूजापूजा के दौरान सबसे पहले वट वृक्ष या उसकी टहनी को जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद रोली, हल्दी, अक्षत और फूल चढ़ाएं। फिर कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और पति की लंबी आयु की कामना करें। पूजा के बाद वट सावित्री व्रत कथा सुनना भी शुभ माना जाता है। पूजा के समय जरूर बोलें यह मंत्रबरगद की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है-“मम सौभाग्यं देहि, आयुष्यम् आरोग्यं देहि मे।पतिसुखं च देहि त्वं, वटवृक्ष नमोऽस्तु ते॥” मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इंस्टाग्राम पर एलन मस्क के बयान से विवाद, बोले- Instagram लड़कियों के लिए पुरुषों के प्रोफाइल पर टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बवाल

नई दिल्ली। एलन मस्क एक बार फिर अपने सोशल मीडिया बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। मस्क ने इंस्टाग्राम को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि “Instagram लड़कियों के लिए है”, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। मस्क ने एक वायरल ऑनलाइन चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए यह टिप्पणी की। बाद में उन्होंने एक और पोस्ट में लिखा कि जब कोई “बड़ा आदमी” उन्हें अपना इंस्टाग्राम प्रोफाइल भेजता है, तो वह मजाक में सोचते हैं कि “क्या वह अपना जेंडर बदल रहा है?” इस बयान को लेकर कई यूजर्स ने आपत्ति जताई और इसे अपमानजनक बताया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने मस्क की टिप्पणी की आलोचना की, जबकि कुछ समर्थकों ने इसे उनके “हास्य” या “व्यंग्य” का हिस्सा बताया। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी एक जेंडर तक सीमित नहीं होते। Obviously. Sometimes grown men send me their Instagram profiles and I’m like are you transitioning or what? — Elon Musk (@elonmusk) May 15, 2026 मस्क और मार्क जुकरबर्ग के बीच पहले से ही सार्वजनिक मतभेद रहे हैं। मस्क इससे पहले भी Meta के प्लेटफॉर्म्स, खासकर WhatsApp और Instagram, पर सवाल उठाते रहे हैं। And X is for the autists! We love the autists — Raq (@raqisright) May 15, 2026 फिलहाल मस्क की इस टिप्पणी पर Meta की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है।एलन मस्क के “Instagram लड़कियों के लिए है” वाले बयान ने सोशल मीडिया पर नया विवाद खड़ा कर दिया है।पुरुषों के इंस्टाग्राम प्रोफाइल को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर कई यूजर्स ने नाराजगी जताई है।
सेबी की बड़ी राहत: ज्यादा लीवरेज वाले InvITs के उधारी नियम आसान

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (इनविट्स) के लिए उधारी नियमों में महत्वपूर्ण राहत देने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब ऐसे इनविट्स भी अतिरिक्त कर्ज ले सकेंगे, जिनका लीवरेज उनकी कुल एसेट वैल्यू के 49 प्रतिशत से अधिक है। सेबी का यह कदम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वित्तीय लचीलापन बढ़ाने और परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्धता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। माना जा रहा है कि इससे सड़क, परिवहन और अन्य बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी। पूंजीगत खर्च और क्षमता विस्तार के लिए मिलेगी मदसेबी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, अतिरिक्त उधारी का उपयोग पूंजीगत खर्चों के लिए किया जा सकेगा। इन खर्चों में परिसंपत्तियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाना, क्षमता विस्तार करना और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मजबूत करना शामिल है। नियामक ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बड़े रखरखाव कार्यों पर होने वाले खर्चों को भी इस राहत के दायरे में शामिल किया है। ऐसे रखरखाव कार्य, जो सामान्य मरम्मत से अलग और कंसेशन एग्रीमेंट के तहत जरूरी होते हैं, अब अतिरिक्त कर्ज के जरिए पूरे किए जा सकेंगे। सड़क परियोजनाओं को होगा सबसे ज्यादा फायदाविशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सड़क क्षेत्र से जुड़े इनविट्स को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं में समय-समय पर बड़े स्तर पर मरम्मत और रखरखाव की जरूरत होती है, जिसके लिए भारी फंडिंग की आवश्यकता पड़ती है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि बड़े रखरखाव खर्च में केवल वही कार्य शामिल होंगे, जो सामान्य संचालन और नियमित रखरखाव से अलग हों और अनुबंध के तहत अनिवार्य हों। रीफाइनेंसिंग को भी मिली मंजूरीसेबी ने इनविट्स, स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs) और होल्डिंग कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत मौजूदा कर्ज की रीफाइनेंसिंग की अनुमति भी दी है। हालांकि यह सुविधा केवल मूल कर्ज राशि तक सीमित रहेगी। नियामक ने साफ किया कि जमा ब्याज, जुर्माना, फीस या अन्य शुल्कों को रीफाइनेंसिंग में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी केवल मूल कर्ज की राशि को ही नए कर्ज से बदला जा सकेगा। तुरंत लागू हुए नए नियमसेबी ने बताया कि यह संशोधित ढांचा 17 अप्रैल 2026 को इनविट नियमों में किए गए बदलावों के बाद लागू किया गया है और नए नियम तत्काल प्रभाव से प्रभावी हो गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई गति मिलेगी और इनविट्स को अपनी परिसंपत्तियों के विस्तार व रखरखाव में अधिक परिचालन स्वतंत्रता प्राप्त होगी।
अमेरिका में पेट्रोल पंपों के फ्यूल सिस्टम पर साइबर हमला, जांच एजेंसियों को ईरान समर्थित हैकर्स पर शक; ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। अमेरिका के कई राज्यों में पेट्रोल पंपों के ऑटोमैटिक टैंक गेज (ATG) सिस्टम को निशाना बनाकर साइबर हमले किए जाने का मामला सामने आया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे ईरान समर्थित हैकर समूह हो सकते हैं, हालांकि अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकर्स ने उन डिजिटल सिस्टम्स में सेंध लगाई जो पेट्रोल पंपों में फ्यूल की मात्रा मापने और मॉनिटर करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि कई सिस्टम इंटरनेट से जुड़े थे और उनमें पर्याप्त पासवर्ड सुरक्षा मौजूद नहीं थी, जिससे हैकर्स को घुसपैठ का मौका मिला। अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में डिस्प्ले स्क्रीन पर दिखने वाले डेटा से छेड़छाड़ की गई, लेकिन फ्यूल की वास्तविक मात्रा या सप्लाई सिस्टम को प्रभावित नहीं किया जा सका। फिलहाल किसी बड़े हादसे या नुकसान की सूचना नहीं है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे सिस्टम पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया जाए तो गैस लीक, आग या बड़े औद्योगिक हादसों जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से इस घटना को अमेरिकी ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है। जांच एजेंसियां इस मामले को अमेरिका-ईरान तनाव के मौजूदा दौर से भी जोड़कर देख रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान समर्थित साइबर समूह पहले भी तेल, गैस, पानी और मेडिकल सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ईरानी साइबर नेटवर्क की तकनीकी क्षमता काफी बढ़ी है और वे अब पारंपरिक युद्ध के बजाय साइबर हमलों को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिका के कई पेट्रोल पंपों के फ्यूल मॉनिटरिंग सिस्टम में साइबर घुसपैठ का मामला सामने आया है, जिसमें जांच एजेंसियों को ईरान समर्थित हैकर्स पर शक है।हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने अमेरिका की ऊर्जा और साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मां बनने के बाद एक्ट्रेसेस को लेकर इंडस्ट्री की सोच पर बोलीं रुबीना दिलैक, कहा- मेकर्स मान लेते हैं कि अब जुनून और स्टैमिना कम हो गया

नई दिल्ली। टीवी अभिनेत्री रुबीना दिलैक ने मां बनने के बाद महिलाओं को एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में मिलने वाले व्यवहार को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि आज भी इंडस्ट्री में ऐसी सोच मौजूद है, जहां नई मां बनी अभिनेत्रियों को कम सक्षम समझा जाता है। रुबीना के मुताबिक, कई मेकर्स यह मान लेते हैं कि बच्चे को जन्म देने के बाद एक्ट्रेस में पहले जैसा स्टैमिना, मेहनत करने की क्षमता और करियर को लेकर जुनून नहीं बचता। इसी वजह से कई महिलाओं को बड़े प्रोजेक्ट्स से दूर रखा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई स्टडीज बताती हैं कि बड़ी संख्या में महिलाएं प्रेग्नेंसी के बाद दोबारा काम पर नहीं लौट पातीं, क्योंकि समाज और इंडस्ट्री दोनों ही उन्हें अलग नजर से देखने लगते हैं। रुबीना ने माना कि महिलाओं पर लगातार खुद को साबित करने का दबाव रहता है, लेकिन उन्होंने खुद को खुशकिस्मत बताया कि मां बनने के बाद भी उन्हें काम जारी रखने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि वह अपनी यात्रा के जरिए दूसरी महिलाओं को यह संदेश देना चाहती हैं कि मातृत्व के बाद करियर खत्म नहीं होता।रुबीना दिलैक जल्द ही खतरों के खिलाड़ी के 15वें सीजन में नजर आने वाली हैं।
चीन-अमेरिका शक्ति संतुलन पर नई बहस, ट्रंप-शी मुलाकात के बाद बदले वैश्विक समीकरण; भारत की रणनीति पर बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर वैश्विक राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। हालिया ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात के बाद कई विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World) की ओर बढ़ रही है, जहां चीन अब अमेरिका को खुली चुनौती देता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा से यह संकेत मिला कि व्यापार, तकनीक और रणनीतिक मुद्दों पर अमेरिका चीन पर निर्णायक दबाव बनाने में अभी तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है। वहीं शी जिनपिंग ने “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” का जिक्र कर यह संकेत देने की कोशिश की कि चीन खुद को अब उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार यह भी मानते हैं कि अमेरिका का प्रभाव तुरंत खत्म होने वाला नहीं है। अमेरिका अब भी सैन्य, तकनीकी और वित्तीय रूप से दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में बना हुआ है, जबकि चीन को भी आर्थिक सुस्ती, सप्लाई चेन और जनसंख्या गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे बदलते समीकरण में भारत की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत आने वाले दशकों में अमेरिका और चीन के बीच संतुलन साधने वाली बड़ी शक्ति बन सकता है। यूरोप, रूस और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ भारत के संबंध भी आने वाले समय में उसकी रणनीतिक स्थिति तय करेंगे। विदेश नीति विश्लेषकों के अनुसार, भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अमेरिका और चीन दोनों के साथ अपने हितों का संतुलन बनाए रखते हुए आर्थिक और सामरिक रूप से खुद को मजबूत करे।