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अभिनेता आर. माधवन ने वेलनेस ब्रांड की मनमानी पर जताई नाराजगी, कहा- 'कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी'

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता आर. माधवन इस समय एक वेलनेस ब्रांड के खिलाफ अपनी नाराजगी को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर खुलकर उस कंपनी की आलोचना की, जिसने कथित तौर पर उनके इंटरव्यू की क्लिप का इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए किया। माधवन का कहना है कि ब्रांड ने बिना उनकी अनुमति और जानकारी के वीडियो का हिस्सा लिया, जिससे ऐसा लग सकता है कि वह प्रोडक्ट का समर्थन कर रहे हैं। अभिनेता ने इसे गलत बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। बुधवार को माधवन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर उस ब्रांड की वीडियो पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। वीडियो में उनके इंटरव्यू का हिस्सा ऐसा दिखाया गया था कि आम लोग समझ सकते थे कि माधवन स्वयं उस प्रोडक्ट की तारीफ कर रहे हैं। अभिनेता ने इसे गलत ठहराया और कहा कि इस तरह के कदम जनता का भरोसा तोड़ते हैं। उन्होंने कहा, “इस वीडियो को इस तरह बनाया गया जैसे मैं खुद प्रोडक्ट का प्रचार कर रहा हूं। इसमें मेरी किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली गई। यह शर्मनाक है और लोगों को सही और गलत में फर्क समझने में मुश्किल होती है।” माधवन ने पोस्ट में लंबा कैप्शन लिखते हुए कहा कि यह बेहद दुखद और शर्म की बात है कि कुछ कंपनियां सोचती हैं कि किसी कलाकार के इंटरव्यू या वीडियो को बिना अनुमति प्रचार सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कानूनी नोटिस भी भेज दिया गया है। अभिनेता ने लोगों को सलाह दी कि वे ऐसे पेशेवर और कंपनियों से सतर्क रहें। आर. माधवन के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में कई लोग सामने आए। लोग उनकी नाराजगी और चेतावनी को सही मानते हुए ब्रांड की मनमानी पर सवाल उठा रहे हैं। मामला न केवल मीडिया में बल्कि जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है, और विशेषज्ञ इस तरह की मनमानी को कलाकारों और आम जनता दोनों के लिए गंभीर चेतावनी मान रहे हैं। इस घटना से यह साफ हो गया है कि बिना अनुमति किसी की व्यक्तिगत या पेशेवर सामग्री का इस्तेमाल करना गंभीर अनुचित है, और कलाकार इस तरह की हरकतों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं। माधवन ने न केवल कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है बल्कि लोगों को जागरूक करने की भी कोशिश की है, जिससे भविष्य में इस तरह की मनमानी पर रोक लगे।

तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग

नई दिल्ली। तेलंगाना सरकार ने केंद्र से विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि राज्य में पूंजीगत निवेश और विकास परियोजनाओं को गति दी जा सके। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से नई दिल्ली में मुलाकात की और राज्य की आर्थिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास संबंधी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में वित्तीय सहायता की आवश्यकता, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में किए जा रहे बड़े निवेशों की व्याख्या की गई। उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि तेलंगाना में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश, विशेषकर यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स (वाईआईआईआरएस) परियोजना, राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। इस परियोजना का कुल बजट 30,000 करोड़ रुपए है और यह लाखों बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग से इस परियोजना को एफआरबीएम सीमा से छूट देने की अपील भी की, ताकि दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रतिबंध न आए। विक्रमार्क ने कहा कि इस पहल से राज्य के वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और पौष्टिक भोजन मिलेगा, जो उन्हें सशक्त बनाएगा और राज्य की जनसांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करेगा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि तेलंगाना की आबादी में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग बहुसंख्यक हैं, और उनके सशक्तिकरण के लिए यह योजना निर्णायक साबित होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई इस बैठक में राज्य के कृषि और मानव संसाधन विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव और अन्य प्रतिनिधियों ने राज्य में कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़े बड़े निवेशों के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत छूट की मांग की। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता के बिना राज्य की दीर्घकालिक विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और मानव पूंजी में निवेश की गति धीमी पड़ सकती है। पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की बैठक में मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने यंग इंडिया प्रोजेक्ट के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी, और अब इस मांग को दोबारा केंद्र के समक्ष रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के कार्यान्वयन से तेलंगाना के पिछड़े और वंचित वर्गों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्थायी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकालिक मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री को यह स्पष्ट किया गया कि तेलंगाना की अधिकांश आबादी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से आती है। इस आंकड़े के अनुसार, राज्य की आबादी का 56.33 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग, 17.43 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 10.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से संबंधित है। इस सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों को समय पर लागू किया जा सके और राज्य में समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके।

डिजिटल-प्रथम पहल: भारत टेक्स 2026 ऐप से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और व्यापारियों को मिलेगा सहज मार्गदर्शन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वस्त्र मंत्रालय के नेतृत्व में भारत टेक्स 2026 के लिए एक नया डिजिटल ऐप लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य वैश्विक वस्त्र आयोजन में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों का अनुभव सहज और प्रभावशाली बनाना है। सचिव नीलम शमी राव ने बुधवार को इस आधिकारिक ऐप का लोकार्पण किया और बताया कि यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म खरीदारों, प्रदर्शकों, सोर्सिंग सलाहकारों, वक्ताओं और आगंतुकों के लिए ‘डिजिटल-प्रथम’ सोच को प्रदर्शित करता है। इस ऐप के माध्यम से प्रतिभागी आयोजन संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रदर्शकों की खोज, बैठकें निर्धारित करना, मार्गदर्शन प्राप्त करना, लीड कैप्चर करना और ज्ञान सत्रों में भाग लेना अब सभी डिजिटल रूप से संभव होगा। इसके अलावा, ऐप वास्तविक समय में अपडेट प्रदान करेगा, जिससे प्रतिभागियों को आयोजन से जुड़ी हर गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सकेगी। एक प्रमुख विशेषता इस ऐप का एआई स्मार्ट असिस्टेंट है, जो 24×7 संवादात्मक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा। प्रतिभागी सरल भाषा में प्रश्न पूछ सकेंगे और उन्हें कार्यक्रम-सारणी, दिशा-निर्देश और आयोजन स्थल की महत्वपूर्ण जानकारी तुरंत प्राप्त होगी। यह सुविधा न केवल भारतीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए भी सहज और उपयोगकर्ता-अनुकूल डिज़ाइन की गई है। भारत मंडपम में आयोजित होने वाले भारत टेक्स 2026 में ऐप प्रतिभागियों को उन्नत नेविगेशन और दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराएगा। उपयोगकर्ता फ्लोर प्लान देख सकेंगे, बूथ खोज सकेंगे और कंपनियों का पता लगा सकेंगे। आयोजन स्थल के भीतर स्टॉल-स्तरीय मार्गदर्शन से खरीदार और प्रदर्शक आसानी से अपने लक्षित संपर्क तक पहुँच सकेंगे। प्रदर्शक खोज मॉड्यूल वैश्विक खरीदारों और व्यापारिक आगंतुकों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें कंपनियों को नाम, उत्पाद श्रेणी और प्रदर्शक प्रकार के आधार पर खोज और फिल्टर किया जा सकेगा। इससे वस्त्र मूल्य श्रृंखला में लक्षित सोर्सिंग और केंद्रित व्यावसायिक बातचीत संभव हो सकेगी। भारत टेक्स 2026 का आयोजन 14 से 17 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा। इस महाआयोजन में वैश्विक वस्त्र उद्योग के 7,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार और 1,30,000 से अधिक व्यापारिक आगंतुक शामिल होने की उम्मीद है। इसका आयोजन भारत टेक्स ट्रेड फेडरेशन द्वारा किया जा रहा है, जो 11 वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग निकायों का संघ है। केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय का सहयोग इस आयोजन को और प्रभावशाली बनाएगा। इस डिजिटल पहल के माध्यम से केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत टेक्स 2026 में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को डिजिटल इंटरफेस के जरिए बेहतर मार्गदर्शन, सहज बातचीत और व्यापारिक अवसरों की जानकारी मिल सके। इसके परिणामस्वरूप, भारत के वैश्विक वस्त्र उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बनाने में मदद मिलेगी।

पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

नई दिल्ली।पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर तेज हो रही है। राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात कर विस्तृत प्रस्ताव सौंपा और इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर संरचित और व्यापक चर्चा शुरू करने की अपील की। उनके अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करना केवल कर सुधार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम जनता, उद्योग और परिवहन क्षेत्र में आर्थिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। डॉ. पात्रा ने अपने प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 279ए(5) का हवाला देते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को भविष्य में जीएसटी के दायरे में लाने का प्रावधान पहले से मौजूद है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पहले भी इस विषय पर जीएसटी परिषद में चर्चा हुई थी, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई की चुनौतियों को देखते हुए अब इस पर नए सिरे से व्यावहारिक और संतुलित विचार करना आवश्यक है। सांसद ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च, कृषि उत्पादन लागत, एमएसएमई सेक्टर के संचालन और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों में वैट की अलग-अलग दरें होने के कारण जीएसटी का उद्देश्य—एक समान कर और एकीकृत बाजार—पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार, यदि पेट्रोल-डीजल को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी में शामिल किया जाता है तो माल ढुलाई और सप्लाई चेन की लागत में कमी आएगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों, किसानों तथा ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को राहत मिलेगी। ओडिशा को उदाहरण के रूप में लेते हुए सांसद पात्रा ने बताया कि यह राज्य खनन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। यदि यहां के उद्योग और व्यवसाय जीएसटी के तहत समान कर व्यवस्था का लाभ उठाएं, तो न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता और पारदर्शिता मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्यों को मिलने वाले राजस्व पर ध्यान रखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों को तुरंत जीएसटी में शामिल करने की बजाय चरणबद्ध और संतुलित मॉडल अपनाया जाए। डॉ. पात्रा ने जीएसटी परिषद को सुझाव दिया कि इसके लिए अलग जीएसटी स्लैब, राज्यों के लिए ट्रांजिशनल मुआवजा, सीमित अवधि का उपकर (सेस) और वित्तीय स्थिरता के लिए तय फॉर्मूला तैयार करने पर विचार किया जाए। उन्होंने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर सभी राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कराई जाए और एक तकनीकी व वित्तीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए, जो चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने का मॉडल तैयार कर सके और राष्ट्रीय सहमति बनाने में मदद करे। डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाना केवल कर सुधार नहीं होगा, बल्कि यह देश में आर्थिक संतुलन, उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और आम लोगों को महंगाई से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, आपूर्ति श्रृंखला की लागत कम होगी और भारत का एकीकृत बाजार अधिक प्रभावी तरीके से काम करेगा।

हाई-प्रोफाइल नीट पेपर लीक केस: शुभम खैरनार CBI हिरासत में, बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 2 जून तक

नई दिल्ली। नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला देशभर में सुर्खियों में बना हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल जांच में सीबीआई लगातार सक्रिय है और मुख्य आरोपी शुभम खैरनार की कस्टडी को पांच दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। अदालत ने मामले में गिरफ्तार बाकी पांच आरोपियों को 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। इस मामले की जांच दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में चल रही है। इस घटना के बाद, कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। ये आरोपियों महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा से जुड़े हुए हैं। मुख्य आरोपी नासिक निवासी शुभम खैरनार के अलावा जयपुर के मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और महाराष्ट्र के अहिल्या नगर निवासी धनंजय लोखंडे शामिल हैं। सीबीआई ने अदालत से शुभम खैरनार की कस्टडी बढ़ाने की मांग की। एजेंसी ने यह बताया कि अन्य गिरफ्तार आरोपियों के साथ उसका सामना कराना जरूरी है और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर उससे आगे भी पूछताछ होनी है। साथ ही जांच एजेंसी ने कहा कि मामले में और रिकवरी की आवश्यकता है और शुभम खैरनार को महाराष्ट्र लेकर जांच के सिलसिले में ले जाना पड़ेगा। अदालत ने बाकी पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे अब 2 जून तक हिरासत में रहेंगे। इस दौरान सीबीआई उनके खिलाफ चल रही जांच को आगे बढ़ा सकेगी और नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटा सकेगी। वहीं, शुभम खैरनार के वकील ने सीबीआई की कस्टडी बढ़ाने की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सात दिन की पूछताछ के दौरान एजेंसी को क्या जानकारी मिली, उसे स्पष्ट करना चाहिए। इसके बावजूद अदालत ने सीबीआई की मांग को स्वीकार कर उनके रिमांड को बढ़ा दिया। नीट UG 2026 पेपर लीक मामले में लगातार हुई गिरफ्तारियों और पूछताछ के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। देशभर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, और आगे की जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

भारत की पहली एडल्ट फिल्म में मधुबाला का रोल, रिलीज से पहले ही मचा था बवाल, अभिनेत्री ने कभी नहीं देखी अपनी ही फिल्म

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की अमर और पाकिज़ा अभिनेत्रियों में से एक मधुबाला ने अपने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली करियर में कई ऐसी फिल्में दीं, जो आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। उनकी सुंदरता और अभिनय क्षमता ने हमेशा स्क्रीन पर उपस्थित होने वाले हर दृश्य को यादगार बना दिया। लोग उनके किरदारों और फिल्मों को आज भी बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ याद करते हैं। हालांकि, उनके करियर में एक ऐसी फिल्म भी थी, जिसने रिलीज होने से पहले ही विवाद और चर्चा का केंद्र बन गई। यह फिल्म थी साल 1950 में रिलीज़ हुई ‘हंसते आंसू’, जिसे भारतीय सिनेमा की पहली एडल्ट फिल्म के रूप में जाना गया। मधुबाला ने इस फिल्म में काम किया तब उनकी उम्र केवल 16 साल थी। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने ए सर्टिफिकेट दिया, और यही उस समय के लिए एक नई और विवादास्पद पहल थी। इस फिल्म का नाम डबल मीनिंग माना गया और कथानक में घरेलू हिंसा के दृश्य दिखाए जाने के कारण इसे लेकर काफी हंगामा हुआ। सेंसर बोर्ड द्वारा दिए गए इस सर्टिफिकेट के बाद भी, मधुबाला खुद अपनी ही फिल्म देखने के लिए तैयार नहीं थीं। यह तथ्य इस बात को दर्शाता है कि उनकी संवेदनशीलता और पेशेवर नैतिकता कितनी प्रबल थी, क्योंकि उन्होंने केवल अभिनय पर ध्यान केंद्रित किया और विवाद को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। फिल्म का निर्देशन केबी लाल ने किया था और इसके अलावा मोतीलाल, गोप और मनोरमा जैसे कलाकारों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। फिल्म की कहानी में फैमिली ड्रामा के तत्व थे, लेकिन उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों के कारण इसे ए सर्टिफिकेट दिया गया। फिल्म के टाइटल और कंटेंट को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐतिहासिक घटना बन गई। यह फिल्म ए सर्टिफिकेट की शुरुआत का प्रतीक भी मानी जाती है और यह दर्शाती है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में समय-समय पर किस प्रकार सेंसरशिप और नैतिकता के सवाल उठते रहे हैं। मधुबाला की अभिनय क्षमता ने इस विवादित फिल्म में भी अपनी चमक बनाए रखी। उनके प्रदर्शन ने दर्शकों को यह साबित कर दिया कि वे केवल खूबसूरत नहीं थीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को निभाने में भी सक्षम थीं। ‘हंसते आंसू’ न केवल उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण थी, बल्कि इसने भारतीय सिनेमा में ए सर्टिफिकेट के प्रचलन और फिल्मों के सामाजिक प्रभाव पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। यह फिल्म मधुबाला की कला और उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता का प्रतीक बनी, और इसने उन्हें भारतीय सिनेमा में अमर और यादगार बना दिया। समग्र रूप से देखा जाए, तो ‘हंसते आंसू’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि उस समय की सामाजिक, सांस्कृतिक और सेंसरशिप से जुड़ी चुनौतियों का दस्तावेज़ भी थी। मधुबाला ने अपनी कम उम्र के बावजूद इस फिल्म में काम करके यह साबित किया कि प्रतिभा और संवेदनशीलता का मेल किसी भी विवाद या चुनौती को मात दे सकता है। यह फिल्म उनके करियर की एक यादगार उपलब्धि के रूप में हमेशा सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगी।

गर्मी में स्मार्टफोन पर खतरा: फोन कवर में रखी ये चीजें बन सकती हैं ओवरहीटिंग और ब्लास्ट का कारण

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि स्मार्टफोन के लिए भी काफी खतरनाक साबित हो सकता है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच अगर फोन का सही तरीके से ध्यान न रखा जाए तो यह ओवरहीट होकर खराब हो सकता है और कई बार बैटरी से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। टेक एक्सपर्ट्स के अनुसार फोन कवर के अंदर रखी कुछ सामान्य दिखने वाली चीजें भी इस खतरे को और बढ़ा देती हैं। अक्सर लोग सुविधा के लिए अपने फोन कवर के पीछे नकद पैसे, नोट, एटीएम कार्ड या छोटे-छोटे कागज रख लेते हैं, लेकिन यही आदत गर्मी में नुकसानदायक साबित हो सकती है। कागज और मोटे कार्ड फोन से निकलने वाली गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते, जिससे डिवाइस के अंदर हीट फंस जाती है और फोन तेजी से गर्म होने लगता है। लगातार ओवरहीटिंग से बैटरी पर दबाव बढ़ता है और फोन की लाइफ कम हो जाती है। इसके अलावा एटीएम और क्रेडिट कार्ड भी फोन कवर में रखना सुरक्षित नहीं माना जाता। स्मार्टफोन की लगातार गर्मी और ज्यादा तापमान कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप या चिप को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे कई बार कार्ड काम करना बंद कर देते हैं। वहीं कुछ लोग छोटी धातु की चीजें जैसे चाबी, सिम पिन या अन्य मेटल ऑब्जेक्ट भी फोन कवर में रख लेते हैं, जो ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं क्योंकि धातु गर्मी को तेजी से बढ़ाती है और शॉर्ट सर्किट का खतरा भी पैदा कर सकती है। इसी तरह पुरानी रसीदें और प्लास्टिक जैसे कवर भी फोन के एयरफ्लो को रोक देते हैं, जिससे गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और डिवाइस जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर बैटरी फूलने और फोन बंद होने जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं। इतना ही नहीं, खराब क्वालिटी या बहुत मोटा फोन कवर भी गर्मी को बाहर निकलने से रोकता है, खासकर तब जब फोन गेमिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग या फास्ट चार्जिंग जैसे हैवी टास्क कर रहा हो। टेक विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में फोन को सीधे धूप से बचाना चाहिए और चार्जिंग के दौरान भारी ऐप्स या गेम्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म लगे तो तुरंत कवर हटा देना चाहिए और उसे कुछ देर ठंडा होने देना चाहिए। साथ ही हमेशा हल्का और हीट रेसिस्टेंट कवर इस्तेमाल करना बेहतर होता है, ताकि फोन की गर्मी आसानी से बाहर निकल सके। कुल मिलाकर थोड़ी सी सावधानी आपके महंगे स्मार्टफोन को बड़े नुकसान से बचा सकती है। इसलिए जरूरी है कि फोन कवर की नियमित जांच की जाए और उसमें रखी अनावश्यक चीजों को तुरंत हटा दिया जाए, वरना लापरवाही भारी पड़ सकती है।

Airtel Priority Postpaid: भारत की पहली 5G नेटवर्क स्लाइसिंग सर्विस लॉन्च, मिलेगा फास्ट और स्टेबल इंटरनेट

नई दिल्ली। Airtel ने भारत में अपनी नई “Priority Postpaid” सर्विस लॉन्च की है, जो 5G नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है। यह सर्विस यूजर्स को ज्यादा तेज, स्टेबल और प्रायोरिटी इंटरनेट कनेक्टिविटी देने के लिए डिजाइन की गई है। क्या है Priority Postpaid सर्विस?इस नई सर्विस में नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें एक ही नेटवर्क को कई वर्चुअल हिस्सों में बांटा जाता है। इससे प्रीमियम यूजर्स को भीड़भाड़ वाले नेटवर्क में भी बेहतर स्पीड और कनेक्टिविटी मिलती है। यह फीचर खासकर उन लोगों के लिए है जिन्हें दिनभर लगातार हाई-स्पीड इंटरनेट की जरूरत होती है, जैसे वर्क फ्रॉम होम यूजर्स और प्रोफेशनल्स। Airtel Priority Postpaid के प्लान और कीमतAirtel के इस नए ऑफर की शुरुआत ₹499 + GST से होती है और इसमें अलग-अलग फैमिली और बेनिफिट प्लान शामिल हैं— ₹499 प्लान: सिंगल यूजर, प्रायोरिटी 5G + अनलिमिटेड डेटा ₹699 प्लान: 2 फैमिली मेंबर, Amazon Prime और JioHotstar ₹999 प्लान: 3 यूजर, Apple TV+ और Apple Music ₹1199 प्लान: 4 फैमिली मेंबर, सभी प्रायोरिटी बेनिफिट्स ₹1749 प्लान: 5 फैमिली मेंबर, Netflix सहित सभी प्रीमियम सब्सक्रिप्शन कैसे काम करती है नेटवर्क स्लाइसिंग?5G नेटवर्क स्लाइसिंग टेक्नोलॉजी में एक नेटवर्क को कई अलग-अलग हिस्सों (स्लाइस) में बांटा जाता है। एयरटेल इनमें से एक स्लाइस को प्रीमियम यूजर्स के लिए रिजर्व कर सकता है, जिससे नेटवर्क भीड़ के बावजूद बेहतर परफॉर्मेंस मिलती है। एक्स्ट्रा बेनिफिट्सइस सर्विस में यूजर्स को ये अतिरिक्त फायदे भी मिलते हैं— फास्टलेन 5G स्पीड अनलिमिटेड कॉलिंग और डेटा फ्रॉड और स्पैम प्रोटेक्शन 3000 SMS तक सुविधा क्या चाहिए इस सर्विस के लिए?इसका फायदा लेने के लिए यूजर के पास 5G स्मार्टफोन और लेटेस्ट सॉफ्टवेयर अपडेट होना जरूरी है।

हीरो के बराबर फीस और प्राइवेट जेट की मालकिन, 70 के दशक में इस अभिनेत्री ने रचा था इतिहास

नई दिल्ली। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में सितारों की लग्जरी लाइफस्टाइल हमेशा लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है। आज के दौर में जहां बड़े अभिनेता और अभिनेत्रियां प्राइवेट जेट, महंगी कारों और आलीशान घरों के लिए चर्चा में रहते हैं, वहीं कई दशक पहले भी एक ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्होंने अपनी शाही जिंदगी और स्टारडम से पूरी इंडस्ट्री को हैरान कर दिया था। यह अभिनेत्री कोई और नहीं बल्कि साउथ सिनेमा की दिग्गज कलाकार केआर विजया थीं, जिन्हें अपने समय की सबसे सफल और प्रभावशाली अभिनेत्रियों में गिना जाता है। बताया जाता है कि केआर विजया देश की पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिनके पास खुद का प्राइवेट जेट था। उस दौर में जब फिल्मी सितारों के लिए लग्जरी सुविधाएं बेहद सीमित हुआ करती थीं, तब उनका निजी विमान से शूटिंग लोकेशन पर पहुंचना लोगों के लिए किसी सपने जैसा माना जाता था। उनकी शानदार जीवनशैली ने उस समय फिल्म इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड स्थापित कर दिया था। यही वजह रही कि उन्हें सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि अपने रॉयल अंदाज के लिए भी लंबे समय तक याद किया गया। केआर विजया ने बहुत कम उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। किशोरावस्था में ही उन्होंने फिल्मों में काम शुरू कर दिया और धीरे-धीरे साउथ सिनेमा की सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय अभिनेत्री बन गईं। उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम करते हुए कई सुपरस्टार कलाकारों के साथ स्क्रीन शेयर की। उनकी खूबसूरती, शांत व्यक्तित्व और प्रभावशाली अभिनय शैली ने उन्हें दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाई। 1970 का दशक उनके करियर का सबसे शानदार दौर माना जाता है। उस समय वह इंडस्ट्री की हाईएस्ट पेड अभिनेत्रियों में शामिल थीं और कई फिल्मों में उन्हें हीरो के बराबर फीस दी जाती थी। उस दौर में किसी अभिनेत्री का पुरुष कलाकारों के समान फीस लेना बेहद बड़ी बात मानी जाती थी। इससे यह साफ झलकता है कि उनकी लोकप्रियता और स्टार वैल्यू कितनी मजबूत थी। केआर विजया को खासतौर पर धार्मिक और पारिवारिक किरदारों के लिए खूब सराहा गया। उन्होंने देवी-देवताओं से जुड़े कई रोल निभाए, जिन्हें दर्शकों ने बेहद पसंद किया। उनकी मुस्कान और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी प्रभावशाली थी कि फैंस ने उन्हें एक खास उपनाम तक दे दिया था। फिल्मों में उनका शांत और गरिमामय व्यक्तित्व उन्हें दूसरी अभिनेत्रियों से अलग बनाता था। करीब पांच दशकों से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 500 से अधिक फिल्मों में काम किया और बाद में टीवी की दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी लोकप्रियता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह सादगी और अनुशासन की मिसाल भी मानी गईं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि इंसान जितना स्वाभाविक और सरल रहेगा, उतना लंबे समय तक लोगों के दिलों में बना रहेगा। आज भी केआर विजया का नाम भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में लिया जाता है जिन्होंने अपने दम पर स्टारडम, सम्मान और लग्जरी लाइफस्टाइल का नया अध्याय लिखा।

पांढुर्णा ; भीषण गर्मी में यात्रियों के लिए राहत: पांढुर्णा स्टेशन पर 15 साल से मुफ्त सेवा

पांढुर्णा ।  छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा रेलवे स्टेशन पर भीषण गर्मी के बीच यात्रियों को बड़ी राहत मिल रही है। यहां पिछले 15 वर्षों से लगातार निःशुल्क ठंडा पानी वितरित किया जा रहा है। यह सेवा स्वर्गीय श्री मोहन महाराजजी कठाले की स्मृति में नीलेश मनने द्वारा शुरू की गई थी, जो आज भी पूरी निष्ठा के साथ जारी है। हर साल गर्मी के मौसम में यह सेवा यात्रियों की प्यास बुझाने का काम करती है और खासतौर पर जनरल बोगी में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। 20 मई से शुरू हुई इस वर्ष की सेवा, 25 मई 2026 तक चलेगीइस वर्ष यह निःशुल्क जल सेवा 20 मई से शुरू की गई है और 25 मई 2026 तक जारी रहेगी। नीलेश मनने अपनी मित्र मंडली के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ठंडा पानी उपलब्ध करा रहे हैं। जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर रुकती है, स्वयंसेवक पानी के कैन और गिलास लेकर जनरल बोगी तक पहुंचते हैं और यात्रियों को ठंडा पानी पिलाते हैं। गर्मी से परेशान यात्रियों के लिए यह सेवा बड़ी राहत लेकर आती है, खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वालों के लिए। बिना प्रचार के चल रही सेवा, बनी सामाजिक प्रेरणायह पूरी सेवा व्यक्तिगत खर्च और समाजसेवियों के सहयोग से संचालित की जाती है। वर्षों से यह कार्य बिना किसी बड़े प्रचार-प्रसार के निरंतर चल रहा है, जो इसे और भी खास बनाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक सेवा नहीं बल्कि मानवता का जीवंत उदाहरण है। हर साल गर्मी के मौसम में यह टीम नियमित रूप से यात्रियों की सेवा में जुट जाती है। समाजसेवियों की सक्रिय भागीदारीइस अभियान में नीलेश मन्ने के साथ कई समाजसेवी भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। बुधवार को जल वितरण सेवा में अधिवक्ता चेतन कुमार सुरजुसे, बापू गायधने, कृष्णा भांगे, योगेश डाबरे, ज्ञानेश्वर खुरसंगे, मनीष मेटागले, उमेश सावरकर और दीपक सुरजुसे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। भीषण गर्मी के बीच पांढुर्णा रेलवे स्टेशन की यह निःशुल्क जल सेवा न केवल यात्रियों की प्यास बुझा रही है, बल्कि समाज में सेवा और संवेदना की एक मजबूत मिसाल भी पेश कर रही है।