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बंगाल की राजनीति में हलचल तेज, शुभेंदु अधिकारी के PA हत्या मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, जांच में सामने आई बड़ी चूक

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में अब जांच एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। लंबे समय से चल रही पड़ताल के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है जिसे इस पूरे हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद शुरुआती जांच प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं, क्योंकि मामले में पहले एक निर्दोष व्यक्ति को गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया था। जांच के शुरुआती दौर में पुलिस ने बिहार और उत्तर प्रदेश से तीन लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें मयंक मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह नाम के व्यक्ति शामिल थे। पुलिस का दावा था कि ये लोग हत्या की साजिश और वारदात से जुड़े हुए हैं। हालांकि परिवार वालों ने शुरुआत से ही राज सिंह की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि घटना के समय वह अयोध्या में मौजूद था और उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। बावजूद इसके उसे कई दिनों तक हिरासत में रखा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई। इसके बाद जब पूरे नेटवर्क और घटनाक्रम की दोबारा जांच की गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एजेंसी ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और संदिग्धों के आपसी संपर्कों की गहन पड़ताल की। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पहले गिरफ्तार किया गया व्यक्ति गलत पहचान का शिकार हुआ था और वास्तविक साजिशकर्ता कोई दूसरा व्यक्ति है। इसके बाद जांच टीम ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में छापेमारी कर राजकुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार वही इस पूरे हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता है और लंबे समय से वारदात की योजना तैयार कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि हत्या के पीछे की पूरी साजिश और अन्य जुड़े लोगों की जानकारी हासिल की जा सके। इसी बीच जांच एजेंसी ने वाराणसी से विनय राय नाम के एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस हत्याकांड का नेटवर्क अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है और आने वाले दिनों में कुछ और नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने शुरुआती जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तारी और निर्दोष व्यक्ति को कई दिनों तक हिरासत में रखने की घटना ने पुलिस कार्रवाई की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की नजर अब जांच की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। फिलहाल जांच एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या के पीछे आखिर असली मकसद क्या था और इस साजिश में किन-किन लोगों की भूमिका रही। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड से जुड़े नए खुलासे सामने आने की संभावना भी बढ़ती जा रही है।

पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम, आरजी कर मामले की नए सिरे से होगी गहन जांच

नई दिल्ली । आरजी कर मामले में एक बार फिर न्यायिक सख्ती देखने को मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले में लगाए गए गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से जांच कराने के आदेश दिए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद पूरे मामले ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा पकड़ ली है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ हुई है तो उसकी गहराई से पड़ताल की जानी चाहिए ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। अदालत ने विशेष जांच दल को घटना की पूरी श्रृंखला की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है। जांच केवल घटना तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि घटना वाली रात के भोजन से लेकर अंतिम संस्कार तक की सभी परिस्थितियों की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा है कि जांच एजेंसी किसी भी व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है और जरूरत पड़ने पर नए तथ्यों को भी रिकॉर्ड में शामिल कर सकती है। मामले में गठित विशेष जांच दल का नेतृत्व वरिष्ठ अधिकारी करेंगे और टीम को पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करने की अनुमति दी गई है। अदालत ने यह साफ कर दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के संदेह की गुंजाइश न बचे। जांच एजेंसी को यह भी निर्देश दिया गया है कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का सत्यापन गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ किया जाए। इस फैसले के बाद मामले से जुड़े कई सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं। सबूतों से छेड़छाड़ के दावों ने पहले ही मामले को संवेदनशील बना दिया था और अब अदालत के हस्तक्षेप ने जांच की दिशा को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। माना जा रहा है कि दोबारा जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं जो अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए थे। हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया है। अदालत की निगरानी में होने वाली इस जांच पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले को राहत भरा कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि इस बार पूरी सच्चाई सामने आएगी। मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी प्रतिक्रिया तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि अदालत का यह आदेश न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करेगा। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच ही न्याय की सबसे बड़ी आधारशिला होती है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह जांच केवल एक मामले की सच्चाई सामने लाने तक सीमित नहीं मानी जा रही बल्कि इसे न्यायिक पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।

वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा मान, खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी को मिला प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल

नई दिल्ली । भारत की कृषि नीतियों और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और किसानों के कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर कृषि और खाद्य प्रबंधन के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में माना जाता है। इस उपलब्धि के बाद देशभर में खुशी का माहौल है और इसे भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस सम्मान को देश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बड़े और प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन में सुधार लाने और आधुनिक तकनीक को खेती से जोड़ने के लिए लगातार काम किया गया है। यही कारण है कि आज भारत कृषि क्षेत्र में तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया भारत के मॉडल को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में रिसर्च, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है। खासतौर पर मोटे अनाज यानी श्री अन्ना को वैश्विक पहचान दिलाने में भारत की भूमिका बेहद अहम रही है। सरकार अब इस दिशा में और तेजी से काम कर रही है ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिल सके। कृषि अनुसंधान संस्थानों को भी आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाया जा सके। कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने वाला देश बन सकता है। इसके लिए पूर्वी भारत समेत कई क्षेत्रों में कृषि विकास को नई दिशा देने का काम किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि छोटे और सीमांत किसानों तक नई तकनीक, रिसर्च और आधुनिक संसाधनों का लाभ पहुंचे ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। इसके साथ ही खेती की गुणवत्ता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब भारत कृषि उत्पादन, खाद्यान्न निर्यात और किसानों के हितों से जुड़े कई बड़े फैसलों के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष फोकस किया गया है। इसका असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखाई देने लगा है। इस सम्मान को केवल प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि देश के करोड़ों किसानों के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की कृषि नीतियों को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी। साथ ही भारतीय कृषि उत्पादों और रिसर्च को भी नई पहचान हासिल होगी। देश के किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और इसे भारत के कृषि भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर विकसित करेंगे लेजर हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम

नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा क्षेत्र में भविष्य की तकनीकों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। दोनों देश अब मिलकर अगली पीढ़ी के आधुनिक हथियार सिस्टम विकसित और निर्मित करेंगे। इसमें लेजर आधारित हथियार, गाइडेड एनर्जी वेपन और अत्याधुनिक एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिन्हें भविष्य की ‘स्टार वॉर्स’ तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। यह महत्वपूर्ण पहल राजनाथ सिंह के सियोल दौरे के दौरान सामने आई। इस दौरान उन्होंने दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त निर्माण और उभरती रक्षा तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। राजनाथ सिंह ने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मिलकर रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश भविष्य के एडवांस रक्षा सिस्टम संयुक्त रूप से विकसित और उत्पादित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे। सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की Hanwha Co. Ltd. के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इन समझौतों के तहत गाइडेड एनर्जी वेपन, लेजर डिफेंस सिस्टम और ऑटोमेटिक एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म को मिलकर विकसित और निर्मित किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, गाइडेड एनर्जी वेपन भविष्य की युद्ध तकनीक मानी जाती है। यह लेजर या उच्च ऊर्जा किरणों के जरिए दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और हवाई खतरों को पलभर में नष्ट करने में सक्षम होती है। दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियां पहले से ही इस दिशा में काम कर रही हैं और अब भारत भी इस तकनीक की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजार में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान भारत-कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन का आयोजन भी किया गया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में रक्षा निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी बीच भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। निबा लिमिटेड द्वारा विकसित ‘सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर’ ने ओडिशा के चांदीपुर में सफल लाइव-फायरिंग ट्रायल किया। इस सिस्टम ने 150 और 300 किलोमीटर की दूरी तक रॉकेट दागकर सटीक निशाना साधा। रिपोर्ट्स के अनुसार, 300 किलोमीटर की दूरी से दागे गए रॉकेट ने लक्ष्य के मात्र 2 मीटर के दायरे में निशाना लगाकर अपनी उच्च सटीकता साबित की। इसे भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता में बड़ा कदम माना जा रहा है। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग आने वाले समय में एशिया की रणनीतिक ताकतों के संतुलन पर भी असर डाल सकता है। आधुनिक तकनीक आधारित हथियार प्रणालियों का यह साझा विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

तपती धूप बनी खतरा: बढ़ती गर्मी के बीच हीटस्ट्रोक ने बढ़ाई चिंता, जानिए बचने के उपाय

नई दिल्ली । राजधानी समेत देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी अब लोगों की सेहत पर गंभीर असर डालने लगी है। लगातार बढ़ते तापमान और लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी खतरनाक समस्याओं का शिकार होकर अस्पताल पहुंचने लगे हैं। इसी बीच राजधानी में इस सीजन का पहला हीटस्ट्रोक का गंभीर मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो आने वाले दिनों में ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। जानकारी के अनुसार, तेज गर्मी के कारण एक युवक की तबीयत यात्रा के दौरान अचानक बिगड़ गई। उसे तेज बुखार, चक्कर और बेहोशी जैसी शिकायतों के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक शरीर का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाना हीटस्ट्रोक का सबसे बड़ा संकेत होता है। यह स्थिति शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे दिमाग, दिल और किडनी पर गंभीर असर डाल सकती है। कई मामलों में मरीज की हालत इतनी गंभीर हो जाती है कि जान का खतरा तक पैदा हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार धूप में रहने, शरीर में पानी की कमी होने और तेज गर्मी के बीच अधिक शारीरिक मेहनत करने से हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, अत्यधिक पसीना आना, त्वचा का गर्म और रूखा हो जाना, घबराहट, सांस तेज चलना और शरीर में जकड़न शामिल हैं। कई बार मरीज को उल्टी, दस्त और बेहोशी जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं। डॉक्टरों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत उसे ठंडी जगह पर ले जाकर प्राथमिक उपचार देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर अस्पताल पहुंचाना चाहिए। भीषण गर्मी को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। खासतौर पर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे अधिक खतरनाक मानी जा रही है। बाहर निकलते समय सिर को सूती कपड़े, टोपी या छाते से ढंककर रखना जरूरी बताया गया है। साथ ही शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ, बेल का शरबत और आम पन्ना जैसे पेय पदार्थ शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों ने खानपान को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। गर्मी के मौसम में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, दही और प्याज जैसी चीजें शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करती हैं। वहीं तली-भुनी और अधिक मसालेदार चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि उनमें हीटस्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। तेज गर्मी के बीच स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है। फिलहाल बढ़ती गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना के बीच स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी हो गया है।

सेवा का अनोखा उदाहरण: यात्रियों को मुफ्त शीतल पेयजल उपलब्ध करा रही समिति

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई जिलों में तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसी तपती गर्मी के बीच शाजापुर रेलवे स्टेशन पर मानवता और सेवा की मिसाल देखने को मिल रही है, जहां गिरिराज धरण समिति यात्रियों की प्यास बुझाने का सराहनीय कार्य कर रही है। समिति के सदस्य रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों को नि:शुल्क शीतल पेयजल उपलब्ध करा रहे हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही समिति के कार्यकर्ता सक्रिय हो जाते हैं और यात्रियों की खाली बोतलों में ठंडा पानी भरते हैं। कई सदस्य सीधे यात्रियों को पानी पिलाते भी नजर आते हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में यह सेवा यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। समिति के सदस्यों के अनुसार, इस सेवा कार्य की शुरुआत एक व्यक्तिगत अनुभव से हुई थी। कुछ वर्ष पहले समिति के सदस्य लोकल ट्रेन से गिरिराज धरण यात्रा पर गए थे। यात्रा के दौरान उन्हें कई रेलवे स्टेशनों पर पीने का पानी नहीं मिल पाया, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव ने उन्हें प्रेरित किया कि गर्मी के मौसम में रेलवे स्टेशन पर जरूरतमंद यात्रियों के लिए जलसेवा शुरू की जाए। शुरुआत में यह पहल केवल चार लोगों ने मिलकर शुरू की थी, लेकिन समय के साथ इसमें लोगों का जुड़ाव बढ़ता गया। आज समिति में 30 से अधिक सदस्य शामिल हैं। इनमें शासकीय कर्मचारी, व्यापारी और शहर के प्रतिष्ठित परिवारों के लोग भी शामिल हैं, जो स्वेच्छा से इस सेवा में योगदान दे रहे हैं। समिति विशेष रूप से ट्रेन के जनरल कोच में सफर करने वाले यात्रियों को प्राथमिकता देती है। सदस्यों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर यात्री अक्सर पानी की बोतल खरीदने में सक्षम नहीं होते, इसलिए उनकी जरूरत को ध्यान में रखते हुए उन्हें पहले पानी उपलब्ध कराया जाता है। रेलवे स्टेशन पर यह दृश्य लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्री और ट्रेन में सफर कर रहे लोग समिति के इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं। कई यात्रियों ने कहा कि इस भीषण गर्मी में ठंडा पानी मिलना किसी राहत से कम नहीं है। भीषण गर्मी के बीच जहां लोग अपने घरों से निकलने से बच रहे हैं, वहीं गिरिराज धरण समिति के सदस्य रोजाना रेलवे स्टेशन पहुंचकर सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। उनका यह प्रयास न केवल सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि छोटे-छोटे प्रयास भी लोगों को बड़ी राहत दे सकते हैं। मानवता और सेवा भाव से प्रेरित यह जलसेवा अब शाजापुर में लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है और गर्मी के इस कठिन दौर में यात्रियों को राहत पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी।

शाजापुर के काशी नगर में ट्रांसफार्मर में आग, इलाके की बिजली गुल

मध्यप्रदेश । शाजापुर जिले के काशी नगर क्षेत्र में बुधवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पुलिस लाइन के पास मुख्य मार्ग पर लगे एक ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई। रात करीब 10:30 बजे ट्रांसफार्मर से पहले चिंगारियां निकलती दिखाई दीं और देखते ही देखते उसमें भीषण आग भड़क उठी। घटना के बाद आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया और लोग घरों से बाहर निकल आए। स्थानीय लोगों ने तुरंत बिजली कंपनी और प्रशासन को सूचना दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विद्युत विभाग ने तत्काल इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो सके। इसके बाद कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और ट्रांसफार्मर सुधार का काम शुरू किया। घटना के बाद क्षेत्र में देर रात तक बिजली गुल रही, जिससे भीषण गर्मी के बीच लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। गर्मी और उमस के कारण लोग घरों में बेचैन नजर आए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि काशी नगर इलाके में ट्रांसफार्मर पर लगातार क्षमता से अधिक लोड डाला जा रहा है, जिसकी वजह से इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। रहवासियों के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले सोमवार को भी विजयनगर इलाके में एक डीपी जलने की घटना सामने आई थी। लगातार ट्रांसफार्मर जलने से लोगों में बिजली व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि हर बार अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली की बढ़ती मांग के कारण ट्रांसफार्मरों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। एसी, कूलर और पंखों के अधिक इस्तेमाल से विद्युत लोड क्षमता से ज्यादा पहुंच रहा है, जिससे ट्रांसफार्मर गर्म होकर फुंक रहे हैं। इसका असर शहर की बिजली व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों ने बिजली कंपनी से मांग की है कि क्षेत्र में अधिक क्षमता वाले नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएं और पुराने उपकरणों का समय पर रखरखाव किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और बड़े हादसे हो सकते हैं। घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों ने देर रात तक सुधार कार्य जारी रखा। विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही ट्रांसफार्मर को पूरी तरह ठीक कर बिजली आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी। गर्मी के इस मौसम में लगातार सामने आ रही ट्रांसफार्मर जलने की घटनाओं ने बिजली व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब लोगों को प्रशासन और बिजली कंपनी से स्थायी समाधान की उम्मीद है, ताकि बार-बार होने वाली इन घटनाओं से राहत मिल सके।

मानव हत्याकांड में नया मोड़: पत्नी नहीं, लिव-इन पार्टनर के साथ रह रहा था युवक

नई दिल्ली। होशियारपुर के रहने वाले मानव की हत्या का मामला लगातार उलझता जा रहा है। इस सनसनीखेज केस की जांच अब दिल्ली पुलिस के हाथ में पहुंच चुकी है और पुलिस हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही है। शुरुआती जांच में ट्रांसपोर्टर और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर से जुड़े पहलू सामने आने के बाद केस ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मानव का दिल्ली में एक महिला के साथ कथित तौर पर संबंध था। बताया जा रहा है कि महिला के ट्रांसपोर्टर पति को इस संबंध की जानकारी मिल गई थी। सूत्रों का दावा है कि 15 मई को मानव उसी महिला से मिलने वाला था, लेकिन इससे पहले ही उसे होटल के बाहर से उठा लिया गया। आशंका जताई जा रही है कि बाद में उसकी हत्या कर शव को करनाल में झाड़ियों में फेंक दिया गया। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस एंगल की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस बीच मानव की मां मंजू ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि मानव ने अभी तक शादी नहीं की थी और वह रेशमी के साथ पिछले कई वर्षों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। दोनों मलेशिया में रहते थे और जल्द ही कोर्ट मैरिज करने वाले थे। मंजू ने एजेंट ‘हैप्पी’ पर भी शक जताया है। उनका कहना है कि हैप्पी लगातार मानव को बाहर नहीं निकलने की चेतावनी दे रहा था। मंजू के अनुसार, 15 मई की शाम दो युवक होटल पहुंचे थे, जिनमें एक सरदार था। दोनों ने खुद को एजेंट के भेजे हुए लोग बताया और दस्तावेजों पर साइन कराने की बात कहकर मानव को अपने साथ ले गए। उन्होंने कहा था कि 10-15 मिनट में वापस छोड़ देंगे, लेकिन इसके बाद मानव लौटकर नहीं आया। परिजनों के मुताबिक, रात करीब 1:40 बजे तक मानव का मोबाइल चालू था और उसकी मां से बातचीत भी हुई थी। इसके बाद फोन बंद हो गया। अगले दिन 16 मई की सुबह करनाल में झाड़ियों से एक युवक का शव बरामद हुआ। उस समय शव की पहचान नहीं हो पाई थी। बाद में हाथ पर बने टैटू और कड़े के आधार पर 18 मई को शव की पहचान मानव के रूप में हुई। परिवार का आरोप है कि शव के पास से मानव का आईफोन, ड्राइविंग लाइसेंस, एटीएम कार्ड और अन्य दस्तावेज गायब थे। जेब में केवल 3 हजार रुपए मिले, जिससे लूट की आशंका भी जताई जा रही है। मानव की पार्टनर रेशमी ने बताया कि 15 मई की सुबह मानव उन्हें और बच्चों को एयरपोर्ट छोड़कर होटल लौट गया था। रात करीब 11:50 बजे तक दोनों की बातचीत हुई थी, जिसके बाद उसका फोन बंद हो गया। सूचना मिलने पर वह बच्चों के साथ भारत लौट आई। बताया जा रहा है कि मानव पिछले करीब 10 वर्षों से मलेशिया में रह रहा था और ट्रक ड्राइवर के रूप में काम करता था। वहीं उसकी मुलाकात रेशमी से हुई थी, जिसके बाद दोनों साथ रहने लगे। उनके जुड़वां बेटे भी हैं। मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस का कहना है कि कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। राजीव कुमार ने बताया कि ट्रांसपोर्टर की भूमिका और एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर सहित सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। फिलहाल यह मामला रहस्य, रिश्तों और साजिशों के कई सवाल खड़े कर रहा है, जिनके जवाब अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।

गुरुवार व्रत गाइड: उद्यापन कब और कैसे करें, जानें पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार व्रत करने से गुरु दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख, समृद्धि, संतान सुख तथा वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है। गुरुवार व्रत की शुरुआत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से की जा सकती है। इस व्रत को सामान्यतः 16 गुरुवार तक विधि-विधान से किया जाता है और इसके बाद उद्यापन किया जाता है। उद्यापन का अर्थ है व्रत का समापन पूर्ण धार्मिक विधि के साथ करना। व्रत की शुरुआत के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और पूजा स्थल को स्वच्छ कर गंगाजल से शुद्ध करना शुभ माना जाता है। इसके बाद चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के दौरान केले के पौधे की जड़ में चने की दाल, गुड़ और मुनक्का अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद दीपक जलाकर गुरुवार व्रत कथा का श्रवण किया जाता है और भगवान बृहस्पति की आरती की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीले वस्त्र धारण करना और पीले फल-फूलों का दान करना अत्यंत शुभ फल देता है। साथ ही भगवान विष्णु को हल्दी अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। दान का विशेष महत्व भी इस व्रत में बताया गया है। किसी गरीब या जरूरतमंद को अन्न और धन का दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि केले के पौधे में भगवान विष्णु का वास होता है, इसलिए गुरुवार को इसकी पूजा करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

दूसरे दिन भी मजबूत रहा वेगोरमा पंजाबी अंगीठी आईपीओ का सब्सक्रिप्शन, ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई बड़ी नरमी

नई दिल्ली। फूड और क्लाउड किचन सेक्टर से जुड़ी कंपनी वेगोरामा पंजाबी अंगीठी का एसएमई आईपीओ निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरे दिन भी इस इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता दिखाई दिया, हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई गिरावट ने बाजार के रुख को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं। कंपनी उत्तर भारतीय और पंजाबी फूड सेगमेंट में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है और अब आईपीओ के जरिए जुटाई गई राशि के सहारे अपने कारोबार को और विस्तार देने की तैयारी में है। कंपनी का यह आईपीओ लगभग 38 करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से लाया गया है। इसमें फ्रेश इश्यू के साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल है। बाजार में शुरुआत से ही इस इश्यू को लेकर निवेशकों में उत्साह देखने को मिला और पहले ही दिन यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। दूसरे दिन भी रिटेल और गैर-संस्थागत निवेशकों की ओर से मजबूत भागीदारी जारी रही, जिससे यह संकेत मिला कि छोटे और मध्यम स्तर के निवेशकों के बीच इस कंपनी को लेकर भरोसा बना हुआ है। हालांकि संस्थागत निवेशकों की भागीदारी अपेक्षाकृत धीमी दिखाई दी, जिस पर बाजार विशेषज्ञ लगातार नजर बनाए हुए हैं। कंपनी ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 73 से 77 रुपये प्रति शेयर तय किया है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि अपेक्षाकृत अधिक रखी गई है, जिसके कारण यह इश्यू मुख्य रूप से उन निवेशकों को आकर्षित कर रहा है जो एसएमई प्लेटफॉर्म पर लंबी अवधि के अवसर तलाश रहे हैं। कंपनी की लिस्टिंग आगामी दिनों में बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर होने वाली है और उससे पहले ही एंकर निवेशकों से कंपनी को अच्छी पूंजी मिल चुकी है। हालांकि आईपीओ को मिल रहे अच्छे सब्सक्रिप्शन के बावजूद ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई गिरावट ने निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है। शुरुआती दौर में जहां इस इश्यू का प्रीमियम काफी ऊंचा बताया जा रहा था, वहीं अब इसमें कमी देखी जा रही है। बाजार जानकारों का मानना है कि यह बदलाव निवेशकों की अल्पकालिक मुनाफावसूली की सोच और मौजूदा बाजार परिस्थितियों का संकेत हो सकता है। फिर भी मजबूत ब्रांड पहचान और विस्तार योजनाओं के कारण कंपनी को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वेगोरामा पंजाबी अंगीठी का बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से क्लाउड किचन, डाइन-इन और ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर आधारित है। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कंपनी ने तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ाई है और शहरी ग्राहकों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। कंपनी अब आईपीओ से मिलने वाली राशि का उपयोग नए आउटलेट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में करेगी, जिससे आने वाले समय में इसके विस्तार की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं।