MP: धार भोजशाला मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा…. मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

धार/नई दिल्ली। धार भोजशाला (Dhar Bhojshala) मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) के निर्णय को अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी गई है. मुस्लिम पक्ष (Muslim side) की ओर से काजी मोइनुद्दीन (Qazi Moinuddin) ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है. इंतजामिया कमेटी कमाल मौला मस्जिद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी हाईकोर्ट में इस मामले में पक्षकार और पैरोकार थे। हाईकोर्ट ने इस परिसर को देवी सरस्वती यानी वाग्देवी का मंदिर घोषित करते हुए मुस्लिम समुदाय को जुमे की साप्ताहिक नमाज पढ़ने की अनुमति रद्द कर दी थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में भोजशाला परिसर में स्थित कमाल मौला मस्जिद परिसर को पूरी तरह से देवी सरस्वती का मंदिर माना था। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की छूट दी गई थी. इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग से जमीन तलाशने का सुझाव दिया गया था. मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उनका आरोप है कि यह फैसला पुरातात्विक साक्ष्यों और उपासना स्थल अधिनियम (Places of Worship Act, 1991) की मूल भावना के विपरीत है। हिंदू पक्ष ने निर्णय आने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की थी. मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की आशंका के बीच हिंदू पक्षकारों ने पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में ‘कैविएट’ याचिका दायर कर दी है. इसमें अपील की गई है कि हिंदू पक्ष का पक्ष सुने बिना कोर्ट कोई भी एकतरफा आदेश पारित न करे।
MP: देवास पटाखा ब्लास्ट का मुख्य आरोपी दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार, चीन से लौटते ही पुलिस ने दबोचा

देवास। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के देवास जिले (Dewas district) की टोंककला पटाखा फैक्ट्री (Tonkala Firecracker Factory Blast) में हुए भीषण ब्लास्ट मामले में देवास पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. फैक्ट्री ब्लास्ट के मुख्य आरोपी (Main accused) और कथित असली संचालक मुकेश विज को पुलिस ने चीन से भारत लौटते ही दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया. मुकेश विज गुरुवार को ग्वांग्झू (चीन) से भारत लौटा था. ब्लास्ट के बाद से ही वह फरार चल रहा था। देवास पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए देशभर के एयरपोर्ट पर लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी कराया था. इसी के आधार पर दिल्ली एयरपोर्ट पर उसकी पहचान हुई और उसे हिरासत में लिया गया. अब पुलिस उसे देवास लाकर विस्तृत पूछताछ करेगी। बताया जा रहा है कि घटना के बाद से ही मुकेश विज विदेश में छिपा हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स में उसके चीन में होने की जानकारी पहले ही सामने आ चुकी थी। 14 मई को हुआ था भीषण विस्फोट बता दें कि 14 मई गुरुवार को देवास जिले के टोंककला स्थित पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हुआ था. शुरुआती दौर में तीन मौतों की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई. मृतकों में अधिकांश मजदूर बिहार निवासी बताए गए हैं। हादसे में कई मजदूर गंभीर रूप से झुलसे थे, जिनमें से कुछ की इलाज के दौरान मौत हो गई. विस्फोट इतना भयावह था कि फैक्ट्री परिसर पूरी तरह तबाह हो गया था। अब तक 5 आरोपी गिरफ्तारदेवास पुलिस ने इस मामले में लगातार कार्रवाई करते हुए अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. मुख्य आरोपी मुकेश विज के अलावा उत्तराखंड निवासी फरार आरोपी महेश चौहान को भी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले फैक्ट्री के संयुक्त संचालक और मुकेश विज के भाई कपिल विज को भी दिल्ली से पकड़ा गया था। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने लाइसेंसी (नाम का लाइसेंसी/मोहरा) अनिल मालवीय निवासी पीपलरावां जिला देवास और मैनेजर मोहम्मद आज़ास खान निवासी बिहार को गिरफ्तार कर लिया था। प्रशासनिक कार्रवाई से मचा हड़कंपब्लास्ट के बाद शासन, प्रशासन और पुलिस विभाग में ताबड़तोड़ कार्रवाई देखने को मिली. घोर लापरवाही और निगरानी में गंभीर चूक के आरोपों के बीच एक घंटे के भीतर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। उज्जैन संभागायुक्त ने टोंकखुर्द SDM संजीव सक्सेना और टप्पा चिड़ावद के नायब तहसीलदार रवि शर्मा को निलंबित किया. वहीं, गृह विभाग ने सोनकच्छ SDOP दीपा मांडवे को सस्पेंड किया। इसके अलावा देवास एसपी ने टोंककला चौकी प्रभारी रमनदीप हुंडल को भी निलंबित कर दिया. लगातार हुई इन कार्रवाईयों से प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी रही। 13 सदस्यीय SIT कर रही तकनीकी जांचदेवास एसपी पुनीत गेहलोद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है. SIT को तकनीकी साक्ष्य जुटाने, नेटवर्क खंगालने और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की जिम्मेदारी दी गई है. पुलिस ने फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था. विशेष टीमें लगातार दिल्ली समेत कई संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। लाइसेंस पर बड़े सवाल जांच में सामने आया है कि आरोपी अनिल मालवीय के नाम जारी लाइसेंस में केवल 15-15 किलोग्राम बारूद और 600-600 किलोग्राम पटाखा सामग्री रखने की अनुमति थी. इसके बावजूद हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर से कई टन विस्फोटक सामग्री मिलने की बात सामने आई है। जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री का लाइसेंस 31 मार्च 2026 तक वैध था और उसका नवीनीकरण 6 मई 2026 को ही किया गया था. ऐसे में लाइसेंस जारी करने, निरीक्षण व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ‘मोहरा’ था लाइसेंसधारी…स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि BPL कार्डधारी लाइसेंसधारी अनिल मालवीय केवल एक ‘मोहरा’ था. पूरे नेटवर्क के पीछे प्रभावशाली लोगों के संरक्षण और आर्थिक गठजोड़ की आशंका जताई जा रही है। हालांकि राजनीतिक संरक्षण और बड़े कारोबारी नेटवर्क को लेकर सामने आ रही चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। पहले भी हो चुकी थीं आगजनी की घटनाएंजानकारी के अनुसार संबंधित फैक्ट्री में पूर्व में भी आगजनी की घटनाएं हो चुकी थीं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लग रहे हैं. फैक्ट्री में MV यानी मुकेश विज नाम से पैकिंग वाले पटाखों का निर्माण किया जाता था। न्यायिक जांच आयोग गठित_राज्य शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है. हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुभाष काकड़े को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आयोग को एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
पांच देशों की यात्रा से लौटते ही एक्शन मोड में PM मोदी… खोला मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अपने पांच देशों (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) के सफल दौरे से लौटते ही सीधे ऐक्शन मोड (Action mode) में आ गए हैं। गुरुवार (21 मई) को दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) की एक बेहद अहम और लंबी बैठक हुई। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक की गूंज बहुत तेज है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर मंत्रियों के कामकाज का ‘रिपोर्ट कार्ड’ खोलकर रख दिया गया। एनडीए-3 सरकार (NDA-3 Government) के दो साल पूरे होने से ठीक पहले हुई इस मिड-टर्म समीक्षा ने मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की अटकलों को हवा दे दी है। किस आधार पर बनी ‘टॉप-5’ और ‘बॉटम-5’ की लिस्ट?सूत्रों के मुताबिक, यह करीब चार घंटे चली बैठक केवल एक सामान्य चर्चा नहीं थी, बल्कि इसमें मंत्रालयों के परफॉरमेंस का बारीकी से ऑडिट किया गया। बैठक में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने विभिन्न सुधारों और मंत्रालयों के कामकाज पर अपना विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। मंत्रालयों की रैंकिंग तय करने के लिए मुख्य रूप से दो पैमानों को आधार बनाया गया:– फाइलों का निस्तारण– मंत्रालयों में सरकारी फाइलें कितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।– पब्लिक ग्रीवांस (जनता की शिकायतें):– आम लोगों की शिकायतों को सुलझाने में मंत्रालय का रवैया कितना सुस्त या फुर्तीला है। इन्हीं मानकों के आधार पर सबसे अच्छा काम करने वाले ‘टॉप-5’ और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले ‘बॉटम-5’ मंत्रालयों की एक स्पष्ट सूची (रैंकिंग) बैठक में पेश की गई। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर इन खराब प्रदर्शन वाले मंत्रियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यह लिस्ट सामने आने के बाद कई मंत्रियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। ‘बॉटम-5’ वाले मंत्रियों को पीएम की सीधी चेतावनीजिन मंत्रालयों का प्रदर्शन रैंकिंग में निचले स्तर पर रहा, उनके लिए प्रधानमंत्री का संदेश बिल्कुल साफ था। निचले पायदान वाले मंत्रालयों को अपने कामकाज के तरीके में तुरंत सुधार लाने और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने की सख्त हिदायत दी गई है। पीएम ने जोर देकर कहा कि फैसले तेजी से लिए जाने चाहिए, उत्पादकता बढ़ाई जानी चाहिए और फाइलों को बिना किसी लालफीताशाही के क्लियर किया जाना चाहिए। क्या जल्द होगा मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल?आगामी 9 जून 2026 को मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल (NDA-3) अपने दो साल पूरे कर रहा है। सरकार की इस दूसरी वर्षगांठ से पहले सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिल्ली में ही मौजूद रहने का जो निर्देश दिया गया था, उसने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। बैठक में जिस तरह से ‘रिपोर्ट कार्ड’ के आधार पर मंत्रालयों के प्रदर्शन को आंका गया है, उससे यह चर्चा जोरों पर है कि प्रधानमंत्री जल्द ही अपनी टीम में एक बड़ा बदलाव कर सकते हैं। यह माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का परफॉरमेंस उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है, उनकी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है या उनके विभाग बदले जा सकते हैं। वहीं, अच्छा काम करने वाले युवा चेहरों का कद बढ़ाया जा सकता है। ‘सुधार ऐसे हों जो जनता की जिंदगी आसान बनाएं’इस बैठक में कृषि, श्रम, सड़क परिवहन, कॉर्पोरेट मामले, विदेश, वाणिज्य और ऊर्जा सहित कई प्रमुख मंत्रालयों ने पिछले दो वर्षों में किए गए अपने कामों का ब्योरा दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों और शीर्ष नौकरशाहों को दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का काम लोगों की जिंदगी में बेवजह दखल देना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करना है। उन्होंने ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर फोकस करते हुए कहा कि हर नए सुधार और पहल का अंतिम लक्ष्य आम नागरिक के जीवन को आसान बनाना होना चाहिए। पीएम ने मंत्रियों को यह भी याद दिलाया कि ‘विकसित भारत 2047’ महज़ कोई राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह सरकार का देश के प्रति अटूट कमिटमेंट है।
1927, 1939 और 1941 की ऐतिहासिक घटनाएं: भूकंप, युद्ध और वैश्विक बदलाव की कहानी

इतिहास में 20वीं सदी की शुरुआत से मध्य तक का समय दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण और उथल-पुथल भरा रहा। 1927, 1939 और 1941 की ये तीन घटनाएं अलग-अलग क्षेत्रों में हुईं, लेकिन इन्होंने वैश्विक इतिहास पर गहरा असर डाला। 1927 का विनाशकारी चीन भूकंप1927 में चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (गांसू और शान्शी प्रांत के आसपास) में एक भीषण भूकंप आया, जिसकी तीव्रता लगभग 8.0 से 8.3 के बीच मानी जाती है। इसे दुनिया के सबसे घातक भूकंपों में से एक माना जाता है। इस आपदा में करीब 2 लाख लोगों की मौत हुई और हजारों गांव पूरी तरह तबाह हो गए। उस समय भूस्खलन, मकानों का ढहना और राहत व्यवस्था की कमी ने स्थिति को और भयावह बना दिया। आधुनिक आपदा प्रबंधन प्रणाली न होने के कारण इतनी बड़ी संख्या में जनहानि हुई। 1939 की इस्पात संधि (Pact of Steel)22 मई 1939 को द्वितीय विश्व युद्ध से ठीक पहले जर्मनी और इटली ने “इस्पात संधि” पर हस्ताक्षर किए। यह एक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन था, जिसमें दोनों देशों ने युद्ध की स्थिति में एक-दूसरे का पूरा समर्थन करने का वादा किया। इस समझौते ने यूरोप में शक्ति संतुलन को बदल दिया और धुरी शक्तियों (Axis Powers) के गठन की दिशा को मजबूत किया, जिसमें बाद में जापान भी शामिल हुआ। यह संधि द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में एक बड़ा रणनीतिक कदम थी। 1941 का एंग्लो-इराकी युद्ध और फालुजा पर कब्जा1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इराक में ब्रिटिश प्रभाव के खिलाफ राजनीतिक अस्थिरता और विद्रोह बढ़ गया। इस स्थिति में एंग्लो-इराकी युद्ध छिड़ गया। मई 1941 में ब्रिटिश सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर फालुजा पर कब्जा कर लिया। यह कार्रवाई बगदाद की ओर बढ़ने और इराक में ब्रिटिश नियंत्रण बहाल करने की रणनीति का हिस्सा थी। इस युद्ध ने मध्य पूर्व में ब्रिटेन की सैन्य और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। ये तीनों घटनाएं दिखाती हैं कि कैसे प्राकृतिक आपदाएं और वैश्विक युद्ध मानव सभ्यता को गहराई से प्रभावित करते हैं। एक ओर भूकंप जैसी त्रासदी जीवन की नाजुकता को दर्शाती है, तो दूसरी ओर युद्ध अंतरराष्ट्रीय राजनीति और शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देते हैं। -22मई
22 मई: मार्टिनिक में दास प्रथा उन्मूलन दिवस- स्वतंत्रता, संघर्ष और मानव गरिमा का प्रतीक

हर साल 22 मई को कैरिबियाई द्वीप मार्टिनिक में दास प्रथा उन्मूलन दिवस (Abolition of Slavery Day) बड़े सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं है, बल्कि मानव स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों के लिए लड़े गए लंबे संघर्ष का प्रतीक है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि गुलामी की अमानवीय व्यवस्था को खत्म करने के लिए कितनी पीढ़ियों ने संघर्ष किया और बलिदान दिया। मार्टिनिक और दास प्रथा का इतिहासमार्टिनिक एक फ्रांसीसी विदेशी क्षेत्र है, जो कैरिबियन सागर में स्थित है। 17वीं और 18वीं शताब्दी में यह द्वीप चीनी (sugar) और कॉफी के बागानों के लिए प्रसिद्ध था। इन बागानों में काम करने के लिए अफ्रीका से लाखों लोगों को जबरन गुलाम बनाकर लाया गया। इन गुलामों को अमानवीय परिस्थितियों में काम करना पड़ता था, जहां उन्हें न अधिकार थे, न स्वतंत्रता और न ही सम्मान। फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन के दौरान दास प्रथा (Slavery) इस क्षेत्र की आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी थी। लेकिन समय के साथ इसके खिलाफ आवाजें उठने लगीं। 22 मई 1848: ऐतिहासिक स्वतंत्रता का दिन22 मई 1848 को मार्टिनिक में एक ऐतिहासिक घटना घटी, जब गुलामों ने अपने उत्पीड़न के खिलाफ बड़ा विद्रोह किया। यह आंदोलन इतना प्रभावशाली था कि तत्कालीन फ्रांसीसी प्रशासन को मजबूर होकर उसी दिन दास प्रथा को समाप्त करना पड़ा। यह दिन मार्टिनिक के इतिहास में स्वतंत्रता की जीत के रूप में दर्ज हो गया। इस घटना के बाद हजारों गुलामों को आजादी मिली और यह द्वीप धीरे-धीरे एक नए सामाजिक और आर्थिक ढांचे की ओर बढ़ा। दास प्रथा उन्मूलन का महत्वदास प्रथा उन्मूलन केवल एक कानूनी बदलाव नहीं था, बल्कि यह मानवाधिकारों की जीत थी। इसने यह साबित किया कि कोई भी इंसान किसी दूसरे इंसान की संपत्ति नहीं हो सकता। यह दिवस समानता, स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा का प्रतीक बन गया। आज के समय में इसका महत्वआज भी 22 मई को मार्टिनिक में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें ऐतिहासिक परेड और सांस्कृतिक आयोजन गुलामों के संघर्ष की कहानियों का स्मरण स्कूलों और संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि यह दिन नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने और मानवाधिकारों के महत्व को समझाने का काम करता है।मार्टिनिक का दास प्रथा उन्मूलन दिवस हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता कोई दी हुई चीज नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि समाज में समानता और न्याय की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। 22 मई केवल एक तारीख नहीं, बल्कि मानवता की जीत का प्रतीक है। -मार्टिनिक दास प्रथा उन्मूलन दिवस
चिलचिलाती धूप में शरीर को ठंडा रखने का आसान तरीका, घर पर बनाएं फालसा छाछ और पाएं ताजगी का अहसास

नई दिल्ली ।भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना एक बड़ी जरूरत बन जाता है। ऐसे समय में लोग आमतौर पर छाछ, लस्सी और नींबू पानी का सहारा लेते हैं, लेकिन रोज एक ही स्वाद से मन ऊब जाता है। इसी वजह से फालसा छाछ एक बेहतरीन और पारंपरिक विकल्प के रूप में सामने आती है, जो न केवल शरीर को ठंडक देती है बल्कि अपने खट्टे-मीठे स्वाद से ताजगी का नया अनुभव भी कराती है। यह पेय गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू के असर को कम करने में मददगार माना जाता है। फालसा एक मौसमी फल है जिसमें प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाले गुण पाए जाते हैं। जब इसे दही और मसालों के साथ मिलाकर छाछ के रूप में तैयार किया जाता है तो यह एक सुपर समर ड्रिंक बन जाता है। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। फालसा छाछ बनाने के लिए सबसे पहले ताजे फालसा को अच्छी तरह धोकर एक बर्तन में लिया जाता है। इसमें हल्की मात्रा में चीनी या मिश्री और थोड़ा पानी मिलाकर इसे हाथों से अच्छे से मसल लिया जाता है ताकि इसका गूदा अलग हो जाए और स्वाद पूरी तरह निकल आए। इसके बाद इस मिश्रण को छानकर बीज अलग कर दिए जाते हैं और एक गाढ़ा खट्टा-मीठा जूस तैयार किया जाता है। इसके बाद एक बड़े बर्तन में ताजा दही लिया जाता है और उसमें ठंडा पानी मिलाया जाता है। इसी में तैयार फालसा जूस डाला जाता है। स्वाद को संतुलित बनाने के लिए काला नमक और भुना जीरा पाउडर मिलाया जाता है। इन सभी चीजों को अच्छे से मथकर तब तक फेंटा जाता है जब तक मिश्रण हल्का झागदार और स्मूद न हो जाए। यह प्रक्रिया छाछ को और अधिक स्वादिष्ट और पाचक बना देती है। तैयार छाछ को सर्व करने के लिए गिलास में बर्फ के टुकड़े डाले जाते हैं और ऊपर से यह ठंडी फालसा छाछ डाली जाती है। इसे पुदीने की पत्तियों और भुने जीरे से सजाकर परोसा जाता है। इसका स्वाद न केवल शरीर को ठंडक देता है बल्कि मानसिक रूप से भी ताजगी का अहसास कराता है। गर्मी के मौसम में यह पेय शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद दही के प्रोबायोटिक्स पाचन को सुधारते हैं और पेट की जलन को कम करते हैं। वहीं फालसा में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन C शरीर को लू और तेज धूप के असर से बचाने में मदद करते हैं। यह ड्रिंक शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखकर डिहाइड्रेशन से भी राहत दिलाती है। इस तरह फालसा छाछ सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि गर्मियों में शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने का एक आसान और स्वादिष्ट उपाय है, जिसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और रोजाना सेवन किया जा सकता है।
Oppo Find X9 Ultra: लॉन्च के साथ ही आकर्षक ऑफर्स ने बढ़ाई यूज़र्स की दिलचस्पी

नई दिल्ली । भारतीय स्मार्टफोन बाजार में Oppo ने अपना नया प्रीमियम फ्लैगशिप Oppo Find X9 Ultra लॉन्च कर दिया है। यह फोन खास तौर पर उन यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है जो हाई-एंड कैमरा क्वालिटी, पावरफुल परफॉर्मेंस और लग्जरी डिजाइन की तलाश में हैं। 5 कैमरों के सेटअप और लेटेस्ट Snapdragon प्रोसेसर के साथ यह डिवाइस सीधे प्रीमियम सेगमेंट के बड़े स्मार्टफोन्स को टक्कर देता नजर आ रहा है। 5 कैमरों वाला प्रो-ग्रेड फोटोग्राफी सिस्टमOppo Find X9 Ultra का सबसे बड़ा आकर्षण इसका कैमरा सेटअप है। इसमें Hasselblad ट्यूनिंग के साथ क्वाड रियर कैमरा सिस्टम दिया गया है-200MP प्राइमरी कैमरा50MP अल्ट्रा-वाइड सेंसर200MP टेलीफोटो लेंस50MP अल्ट्रा-टेलीफोटो कैमरा50MP फ्रंट सेल्फी कैमराफोन 8K वीडियो रिकॉर्डिंग और 4K 120fps स्लो मोशन को भी सपोर्ट करता है, जिससे यह कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक मजबूत विकल्प बन जाता है। Snapdragon 8 Elite Gen 5 के साथ सुपरफास्ट परफॉर्मेंसपरफॉर्मेंस के मामले में यह फोन काफी मजबूत माना जा रहा है। इसमें दिया गया है-Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर16GB तक RAMAdreno 840 GPUAndroid 16 आधारित ColorOS 16यह कॉम्बिनेशन गेमिंग, मल्टीटास्किंग और हेवी ऐप्स के लिए इसे बेहद स्मूद बनाता है। 6.82 इंच का प्रीमियम AMOLED डिस्प्लेफोन में 6.82 इंच की Quad HD+ Flexible AMOLED डिस्प्ले दी गई है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1800 निट्स ब्राइटनेस के साथ आती है। Gorilla Glass Victus 2 प्रोटेक्शन इसे और मजबूत बनाता है। 7050mAh बैटरी और सुपरफास्ट चार्जिंगOppo Find X9 Ultra में दी गई है-7050mAh बड़ी बैटरी100W वायर्ड फास्ट चार्जिंग50W वायरलेस चार्जिंगकंपनी का दावा है कि यह फोन बहुत कम समय में फुल चार्ज हो सकता है और लंबे समय तक बैकअप देता है। कीमत और उपलब्धताभारत में इसके 12GB RAM + 512GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत लगभग ₹1,69,999 रखी गई है। यह फोन Canyon Orange और Tundra Umber कलर में उपलब्ध होगा और इसे Flipkart, Amazon और Oppo की ऑफिशियल वेबसाइट से प्री-बुक किया जा सकता है। आकर्षक लॉन्च ऑफर्लॉन्च के साथ कंपनी कई ऑफर्स भी दे रही है-₹22,000 तक एक्सचेंज बोनस10% इंस्टेंट कैशबैक (चुनिंदा बैंक कार्ड्स पर)24 महीने तक जीरो डाउन पेमेंटप्रीमियम गिफ्ट बॉक्स (Enco Air 5 Pro + केस)5TB क्लाउड स्टोरेजGoogle AI Pro एक्सेस और Spotify Premium मुकाबला किनसे होगायह स्मार्टफोन प्रीमियम सेगमेंट में कई बड़े डिवाइसेज को टक्कर देगा, जिनमें शामिल हैं-Samsung Galaxy Z Fold6, iPhone 17 Pro Max, Motorola Razr Fold और Vivo X Fold5।
OPPO Enco Air5 Pro भारत में लॉन्च: 55dB ANC, AI कॉल नॉइज रिडक्शन और 54 घंटे बैटरी के साथ दमदार TWS ईयरबड्स

नई दिल्ली। ओप्पो ने भारतीय ऑडियो मार्केट में अपना नया OPPO Enco Air5 Pro TWS ईयरबड्स लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इसे 4,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर उतारा है। यह मॉडल पहले ग्लोबल मार्केट और चीन में पेश किया गया था और अब भारत में इसके फीचर्स के साथ एंट्री हुई है, जिसमें हाई-एंड ANC और AI बेस्ड ऑडियो टेक्नोलॉजी पर खास फोकस किया गया है। ओप्पो के इन नए ईयरबड्स की सबसे बड़ी खासियत इसका 55dB तक का एक्टिव नॉइज कैंसलेशन (ANC) है, जो 5,000Hz तक की फ्रीक्वेंसी रेंज में आसपास के शोर को कम करने में सक्षम बताया गया है। यह पिछले जनरेशन के मुकाबले ज्यादा एडवांस सिस्टम है और म्यूजिक, कॉलिंग और वीडियो स्ट्रीमिंग के दौरान बेहतर क्लैरिटी देने का दावा करता है। कंपनी ने इसमें AI-पावर्ड कॉल नॉइज रिडक्शन टेक्नोलॉजी दी है, जिसमें तीन माइक्रोफोन मिलकर काम करते हैं। यह सिस्टम कॉल के दौरान यूजर की आवाज को साफ रखते हुए बैकग्राउंड नॉइज को फिल्टर करता है। इसके साथ ही विंड नॉइज रिडक्शन फीचर भी दिया गया है, जो 25 km/h तक की हवा में भी बेहतर कॉल क्वालिटी देने में मदद करता है। कनेक्टिविटी के लिहाज से इसमें Bluetooth 6.0, ड्यूल-डिवाइस कनेक्शन सपोर्ट, 12mm बेस ड्राइवर और LHDC 5.0 Hi-Res ऑडियो सपोर्ट जैसे फीचर्स शामिल हैं। गेमिंग और वीडियो यूजर्स के लिए इसमें 47ms लो-लेटेंसी मोड भी दिया गया है, जिससे ऑडियो-वीडियो सिंक बेहतर रहता है। बैटरी बैकअप भी इसकी बड़ी ताकत है। कंपनी के अनुसार ANC ऑफ होने पर यह ईयरबड्स चार्जिंग केस के साथ कुल 54 घंटे तक का प्लेबैक टाइम देते हैं, जबकि ANC ऑन होने पर करीब 29 घंटे तक चल सकते हैं। ओप्पो ने Enco Air5 Pro को Pearl White और Matte Black कलर ऑप्शन में लॉन्च किया है। इसकी पहली सेल भारत में 28 मई से शुरू होगी, जहां यह ओप्पो के ऑनलाइन स्टोर के साथ-साथ अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑफलाइन रिटेल स्टोर्स पर उपलब्ध रहेगा।
ग्रामीण और शहरी भारत के लिए बड़ा बदलाव, डाक विभाग की नई सर्विस से घर बैठे लोन और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध

नई दिल्ली ।भारतीय वित्तीय सेवाओं के डिजिटल विस्तार में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहां अब बैंकिंग सुविधाएं सिर्फ शाखाओं तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि सीधे आम नागरिकों के घर तक पहुंचेंगी। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा शुरू की गई नई स्मार्ट पोस्टमैन सेवा के तहत अब डाकिया केवल पत्र या पार्सल ही नहीं, बल्कि वित्तीय सेवाओं का पूरा पैकेज लेकर लोगों के दरवाजे तक पहुंचेगा। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं को और अधिक सरल, तेज और सुलभ बनाना बताया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत डाकिया अब बायोमेट्रिक डिवाइस और डिजिटल टैबलेट के माध्यम से लोगों को पर्सनल लोन, माइक्रो इंश्योरेंस और डिजिटल लॉकर जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होगा। इसका सीधा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो बैंक शाखाओं तक पहुंचने में असमर्थ हैं या जिनके लिए बैंकिंग प्रक्रियाएं जटिल और समय लेने वाली साबित होती हैं। इस पहल से वित्तीय समावेशन को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सेवा के तहत ग्राहक घर बैठे ही लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे और डाकिया उनके घर पहुंचकर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन करेगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्रता के आधार पर लोन की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जा सकेगी। इसी तरह माइक्रो इंश्योरेंस की सुविधा भी सरल प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे छोटे प्रीमियम पर बीमा कवरेज हासिल किया जा सकेगा। डिजिटल लॉकर सेवा के माध्यम से नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संरक्षित कर सकेंगे। डाकिया इस प्रक्रिया में दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित करने में सहायता करेगा, जिससे कागजी दस्तावेजों के खोने या खराब होने की समस्या से राहत मिलने की संभावना है। यह कदम विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जो अपने दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। इस पूरी व्यवस्था को सरकार के वित्तीय समावेशन अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य देश के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना है। विशेषज्ञों के अनुसार इस पहल से छोटे व्यवसायियों, किसानों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को काफी राहत मिल सकती है, क्योंकि उन्हें छोटे-छोटे वित्तीय कार्यों के लिए अब बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हालांकि, इस नई व्यवस्था के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और डिजिटल साक्षरता की कमी इस सेवा के प्रभावी संचालन में बाधा बन सकती है। इसके अलावा डाक कर्मचारियों पर बढ़ती जिम्मेदारियों के चलते उन्हें विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी ताकि सेवा की गुणवत्ता प्रभावित न हो। इसके बावजूद यह पहल भारतीय डाक प्रणाली को एक नए डिजिटल वित्तीय ढांचे में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल बैंकिंग व्यवस्था को सरल बनाएगा बल्कि देश के आर्थिक ढांचे में भी व्यापक बदलाव ला सकता है।
चंदन फेस पैक: त्वचा को निखारने का प्राकृतिक उपाय, लेकिन सावधानी जरूरी

नई दिल्ली। चंदन यानी सैंडलवुड आयुर्वेद में सदियों से त्वचा की देखभाल के लिए उपयोग किया जाता रहा है। इसे फेस पैक या लेप के रूप में लगाने से त्वचा को ठंडक, निखार और कई प्रकार की समस्याओं से राहत मिलती है। खासकर गर्मी के मौसम में चंदन फेस केयर लेप को बेहद फायदेमंद माना जाता है। चंदन फेस पैक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह त्वचा की जलन और सनबर्न को शांत करता है। गर्मी या धूप के कारण होने वाली त्वचा की लालिमा को यह कम करने में मदद करता है। इसके नियमित उपयोग से त्वचा का रंग साफ और चमकदार दिखाई देने लगता है। साथ ही यह मुंहासों (acne) और दाग-धब्बों को कम करने में भी सहायक माना जाता है। चंदन में मौजूद प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को संक्रमण से बचाते हैं। यह अतिरिक्त तेल (excess oil) को नियंत्रित करने में भी मदद करता है, जिससे ऑयली स्किन वालों के लिए यह विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। कई लोग इसे बेसन, हल्दी या गुलाब जल के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में उपयोग करते हैं। हालांकि, चंदन फेस पैक के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। संवेदनशील त्वचा (sensitive skin) वाले लोगों को इससे एलर्जी, खुजली या रैशेज की समस्या हो सकती है। यदि चंदन की गुणवत्ता शुद्ध न हो या उसमें केमिकल मिले हों, तो यह त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ लोगों में इसका अधिक उपयोग त्वचा को अत्यधिक सूखा (dry) बना सकता है। इसलिए इसे हफ्ते में 2–3 बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उपयोग से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी माना जाता है ताकि किसी भी तरह की एलर्जी से बचा जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, सैंडलवुड का सही और सीमित उपयोग त्वचा के लिए लाभकारी है, लेकिन गलत तरीके से या अधिक मात्रा में उपयोग नुकसानदेह भी हो सकता है। इसलिए हमेशा प्राकृतिक और शुद्ध चंदन पाउडर का ही उपयोग करना चाहिए। कुल मिलाकर कहा जाए तो चंदन फेस केयर लेप एक पारंपरिक और प्रभावी स्किन केयर उपाय है, जो सही तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा को प्राकृतिक निखार और ठंडक प्रदान करता है। लेकिन सावधानी और संतुलन इसके उपयोग की सबसे बड़ी जरूरत है।