भीषण गर्मी में अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, AC और सीलिंग फैन पड़े बंद

मध्यप्रदेश । उज्जैन में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के बीच संभाग के सबसे बड़े चरक अस्पताल की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में आ गई हैं। शहर में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, लेकिन अस्पताल के कई वार्डों में मरीज केवल सीलिंग फैन के भरोसे इलाज कराने को मजबूर हैं। तेज गर्मी और उमस के कारण मरीजों और उनके परिजनों की हालत खराब हो रही है। कई वार्डों में पर्याप्त पंखे तक नहीं हैं, जिसके चलते कुछ मरीजों और अटेंडरों को फर्श पर लेटकर रात गुजारनी पड़ रही है। मरीजों के परिजन घर से ला रहे कूलर और पंखेस्थिति इतनी खराब हो गई कि मरीजों के परिजन अब अपने घरों से टेबल फैन और कूलर लाकर वार्डों में लगाने लगे हैं। अस्पताल के बच्चों, महिला और जनरल वार्ड में कई बेड के पास निजी कूलर और पंखे रखे दिखाई दिए। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की व्यवस्था गर्मी से राहत देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है, इसलिए मजबूरी में उन्हें अपने स्तर पर इंतजाम करना पड़ रहा है। प्रसूता और नवजात वार्ड में सबसे ज्यादा परेशानीसबसे ज्यादा परेशानी एसएनसीयू और मातृ कक्ष में देखने को मिली, जहां नवजात शिशुओं और उनकी माताओं को उमस और गर्मी झेलनी पड़ रही है। कई महिलाओं ने शिकायत की कि वार्ड में ना पर्याप्त ठंडक है और ना ही सही वेंटिलेशन, जिससे छोटे बच्चों की तबीयत बिगड़ने का खतरा बना हुआ है। अस्पताल प्रबंधन का दावा- व्यवस्थाएं सुधारी जा रहींमामले पर अस्पताल प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा कि व्यवस्थाओं को सुधारने की कोशिश की जा रही है। सिविल सर्जन डॉ. पलसानिया के मुताबिक अस्पताल ने हाल ही में 25 नए कूलर खरीदे हैं, जिनमें से 15 को अलग-अलग वार्डों में लगाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जिन वार्डों में एसी खराब हैं, वहां मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया है और जरूरत के हिसाब से व्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही हैं। निजी कूलर लगाने पर प्रबंधन ने झाड़ा पल्लाजब अस्पताल वार्डों में मरीजों के परिजनों द्वारा लगाए गए निजी कूलर और पंखों को लेकर सवाल पूछा गया, तो अस्पताल प्रबंधन ने इसकी जानकारी होने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल की तरफ से किसी को निजी उपकरण लगाने की अनुमति नहीं दी गई है।
फेसबुक-इंस्टाग्राम पर इलाज करने वाले फर्जी डॉक्टर पर बड़ी कार्रवाई, 8 क्लिनिक भी जांच के घेरे में

मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जहां एक कथित डॉक्टर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Facebook और Instagram के जरिए मरीजों का इलाज और सलाह दे रहा था। जांच के दौरान टीम ने अस्पताल को सील कर दिया, लेकिन कुछ ही घंटों बाद वह फिर से खोल दिया गया। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम दोबारा मौके पर पहुंची और अस्पताल को फिर से सील कर दिया। होम्योपैथिक/आयुर्वेदिक डिग्री पर एलोपैथिक इलाज का आरोपजांच में सामने आया कि संबंधित डॉक्टर के पास होम्योपैथिक या आयुर्वेदिक डिग्री थी, लेकिन वह मरीजों का एलोपैथिक इलाज कर रहा था। साथ ही अस्पताल से बड़ी मात्रा में अमानक दवाइयां भी बरामद की गईं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, डॉक्टर बिना वैध अनुमति और रजिस्ट्रेशन के इलाज कर रहा था और सोशल मीडिया के जरिए भी मरीजों को परामर्श देता था। 8 क्लिनिक और कई संस्थानों पर भी कार्रवाईस्वास्थ्य विभाग की टीम ने बड़नगर और आसपास के क्षेत्रों में करीब एक दर्जन से अधिक संस्थानों की जांच की। इस दौरान अनियमितताएं मिलने पर 8 क्लिनिक, एक पैथोलॉजी लैब, एक मेडिकल स्टोर और एक निजी अस्पताल को सील किया गया। सील किए गए प्रमुख संस्थानों में आरोग्यम क्लीनिक, वेदांता अस्पताल, देवकमल पॉली क्लीनिक, विशेष पैथोलॉजी, जय अम्बे पॉली क्लीनिक सहित कई नाम शामिल हैं। अधिकारियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाईकार्रवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की टीम मौके पर मौजूद रही। कुछ जगहों पर प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंचे और जांच प्रक्रिया को पूरा किया गया। यह मामला साफ दिखाता है कि बिना मान्यता और रजिस्ट्रेशन के चल रहे क्लिनिक और सोशल मीडिया के जरिए इलाज करने वाले फर्जी प्रैक्टिस सिस्टम के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं, जिस पर अब प्रशासन सख्ती बढ़ा रहा है।
भोपाल से स्विट्जरलैंड तक पहुंची फ्लेवर्ड आइस्ड टी, एमएसएमई की वैश्विक पहचान पर सरकार ने जताई खुशी

मध्य प्रदेश /भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जहां मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से तैयार की गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली खेप यूरोप के प्रमुख देश Switzerland के लिए निर्यात की गई है। यह कदम न केवल भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की गुणवत्ता और नवाचार क्षमता को भी मजबूत करता है। इस उपलब्धि को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा है कि भारतीय एमएसएमई अब वैश्विक मानकों पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और लगातार नए बाजारों में अपनी जगह बना रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह निर्यात कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से संभव हुआ है, जिसने मध्य प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है। इस पहल को भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो न केवल उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाता है बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में भी मदद करता है। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि पिछले एक दशक में भारत के चाय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे देश के पारंपरिक उत्पादों की वैश्विक मांग और स्वीकार्यता में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सरकार का मानना है कि भारतीय चाय और उससे जुड़े उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाई है, जिसका श्रेय बेहतर गुणवत्ता, विविधता और निरंतर सुधार को जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार फ्लेवर्ड आइस्ड टी जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद भारत के निर्यात क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। इससे न केवल किसानों और छोटे उत्पादकों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह कदम “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों को भी मजबूती देता है, जिनका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। आने वाले समय में ऐसे और उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता और निर्यात हिस्सेदारी दोनों में बढ़ोतरी हो सकती है। यह उपलब्धि देश के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि भारतीय उत्पाद अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक उपभोक्ताओं की पसंद भी बन रहे हैं।
गुजरात के मोती पलसन गांव में पानी का संकट, जान जोखिम में डालकर कुओं से पानी भरने को मजबूर ग्रामीण

नई दिल्ली । गुजरात में विकास और बुनियादी सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच वलसाड जिले के कपराडा तहसील से एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मोती पलसन गांव में पीने के पानी की गंभीर किल्लत ने ग्रामीणों की जिंदगी को मुश्किलों से भर दिया है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई जल आपूर्ति योजनाओं के बावजूद गांव के लोग आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह गांव, जिसे भारी वर्षा के कारण कभी-कभी गुजरात का चेरापूंजी भी कहा जाता है, आज गर्मी के मौसम में पानी की भारी कमी से जूझ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि गांव की महिलाएं और पुरुष अपने परिवार की प्यास बुझाने के लिए 45 फीट गहरे कुओं में उतरने को मजबूर हैं। कई बार लोहे की सीढ़ियों और रस्सियों के सहारे खतरनाक तरीके से नीचे जाकर पानी निकाला जाता है, जिससे हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में मौजूद सरकारी कुएं भी गर्मी बढ़ते ही सूखने लगते हैं और उनमें बहुत कम पानी बचता है। ऐसे में लोगों को घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ता है ताकि वे कुछ बाल्टी पानी भर सकें। कई परिवारों को सिर्फ एक या दो बाल्टी पानी के लिए एक से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान महिलाएं छोटे बच्चों को साथ लेकर तेज धूप में कुएं के पास बैठने को मजबूर हैं। पानी भरने की यह प्रक्रिया आसान नहीं है। कई बार महिलाएं और युवा कुएं में उतरते समय फिसलकर चोटिल भी हो जाते हैं। इसके बावजूद मजबूरी में यह काम रोजाना करना पड़ता है। गांव में पानी की इतनी कमी है कि हर बूंद की कीमत बढ़ती जा रही है और जीवन की बुनियादी जरूरतें भी चुनौती बन गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई साल पहले सरकार की ओर से बड़ी जल आपूर्ति योजना शुरू की गई थी, जिसके तहत गांव-गांव में नल लगाए गए। इस योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन नलों से आज तक पानी की एक बूंद भी नियमित रूप से नहीं पहुंची। गांव के लोग इसे योजनाओं की विफलता और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम मान रहे हैं। हालांकि हाल के दिनों में कुछ स्थानों पर पानी की आपूर्ति शुरू किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन यह व्यवस्था अभी भी अस्थायी और अपर्याप्त बताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान न होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। यह स्थिति न केवल गांव की जीवनशैली को प्रभावित कर रही है, बल्कि यह भी सवाल खड़े कर रही है कि जब योजनाओं पर भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, तब भी अंतिम व्यक्ति तक पानी क्यों नहीं पहुंच पा रहा। मोती पलसन गांव की यह तस्वीर ग्रामीण भारत में जल संकट की गंभीरता को उजागर करती है और विकास के दावों की वास्तविकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
SAIL की जमीन पर बने कथित अवैध दफ्तर पर प्रशासन की कार्रवाई, बर्नपुर में चार कार्यालय हटाए गए

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में इन दिनों डीजल आपूर्ति को लेकर स्थिति गंभीर चर्चा का विषय बनी हुई है। भीषण गर्मी और खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। कई ग्रामीण इलाकों में स्थिति ऐसी बन गई है कि किसान 50 से 80 किलोमीटर दूर तक डीजल लेने के लिए यात्रा करने को मजबूर हैं। इससे खेती की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका गहराने लगी है। बुलढाणा, वाशिम और आसपास के जिलों में पेट्रोल पंपों पर ट्रैक्टरों और डीजल कैनों की लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। किसान सुबह से ही पंपों पर पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर उन्हें पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा। इस स्थिति ने किसानों के बीच चिंता और असंतोष दोनों को बढ़ा दिया है। वाशिम जिले के कई किसान बताते हैं कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में डीजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा, जिसके चलते उन्हें अकोला जैसे जिलों का रुख करना पड़ रहा है। एक किसान के अनुसार, उन्होंने कई पेट्रोल पंपों के चक्कर लगाए, लेकिन अंततः बहुत कम मात्रा में डीजल मिल पाया, जिससे उनकी खेती की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही। इस बीच अकोला जिले की स्थिति थोड़ी अलग बताई जा रही है। यहां बड़े डिपो होने के कारण डीजल उपलब्ध तो है, लेकिन आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने के कारण पंपों पर दबाव काफी बढ़ गया है। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि वास्तविक कमी की बजाय यह स्थिति अचानक बढ़ी मांग और घबराहट के कारण बनी है। अधिकारियों और पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार पिछले कुछ दिनों में डीजल की बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। उनका कहना है कि ट्रांसपोर्टेशन में देरी के कारण सप्लाई समय पर नहीं पहुंच पा रही, जिससे कुछ पंपों पर अस्थायी रूप से स्टॉक कम हो जाता है और लोगों में डर बढ़ जाता है। अकोला के एक पेट्रोल पंप संचालक का कहना है कि उनके पास डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन भीड़ बढ़ने से दबाव जरूर महसूस किया जा रहा है। उनका यह भी कहना है कि किसान जरूरत से ज्यादा डीजल खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है। हालांकि किसानों का तर्क है कि खरीफ सीजन की तैयारी के लिए समय पर जुताई और बुवाई जरूरी है, और डीजल की अनुपलब्धता से उनकी खेती प्रभावित हो सकती है। तेज धूप और 45 से 46 डिग्री तक पहुंचते तापमान में किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक ओर किसान डीजल की कमी और लंबी कतारों की शिकायत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल पंप संचालक इसे पैनिक और अफवाह का परिणाम बता रहे हैं। फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि अगर सप्लाई और वितरण व्यवस्था समय पर दुरुस्त नहीं हुई, तो खरीफ सीजन की खेती पर इसका सीधा असर पड़ सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
शिवपुरी में बोले सिंधिया- राजनीति ट्रेंड से नहीं, जनता के काम से चलती है

मध्यप्रदेश । शिवपुरी में आयोजित भाजपा के ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान’ के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को लेकर पूछे गए सवालों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस ट्रेंड पर खुलकर प्रतिक्रिया दी और इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। सिंधिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश की जनता प्रधानमंत्री के नेतृत्व में “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है और सोशल मीडिया पर चलने वाले ऐसे ट्रेंड्स का राजनीति की वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि राजनीति का असली आधार जनता के बीच जाकर काम करना है, न कि इंटरनेट पर बनने वाले नैरेटिव। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक टिप्पणी के बाद ‘CJP’ को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जरूर बढ़ी, लेकिन भाजपा का फोकस केवल विकास और जनसेवा पर है। वहीं हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सोशल मीडिया और जमीनी राजनीति में बड़ा अंतर होता है। उनके अनुसार, कई ट्रेंड्स कुछ समय के लिए वायरल होते हैं लेकिन उनका असर स्थायी नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति केवल फॉलोअर्स या ऑनलाइन ट्रेंड्स से नहीं चलती, बल्कि जनता के बीच लगातार काम करने से चलती है। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि भाजपा, कांग्रेस या कोई भी बड़ा दल अपनी विचारधारा और संगठन के दम पर लंबे समय से सक्रिय हैं, इसलिए किसी भी नए सोशल मीडिया ट्रेंड की तुलना उनसे करना उचित नहीं है। हालांकि, जब उनसे CJP के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया। शिवपुरी में दिया गया यह बयान साफ संकेत देता है कि भाजपा नेतृत्व सोशल मीडिया ट्रेंड्स को राजनीतिक वास्तविकता नहीं मानता और जमीनी राजनीति को ही असली ताकत बताता है।
बिहार एनकाउंटर विवाद: बढ़ती पुलिस कार्रवाई पर जातीय राजनीति के आरोप, सत्ता और विपक्ष में टकराव

नई दिल्ली । बिहार में पुलिस मुठभेड़ों को लेकर राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। राज्य में हाल के दिनों में हुई कई एनकाउंटर कार्रवाइयों ने जहां कानून-व्यवस्था पर सरकार की सख्ती को दिखाया है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर जातीय राजनीति भी खुलकर सामने आ गई है। विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल का आरोप है कि इन कार्रवाइयों में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। राज्य में हाल के हफ्तों में पटना, सीवान, भागलपुर, नवादा और समस्तीपुर सहित कई जिलों में पुलिस एनकाउंटर की घटनाएं सामने आई हैं। इन कार्रवाइयों में कुछ अपराधियों की मौत हुई है, जबकि कई घायल होकर गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस इन ऑपरेशनों को अपराध नियंत्रण की सख्त रणनीति के रूप में देख रही है, जिसे अनौपचारिक रूप से “ऑपरेशन लंगड़ा” भी कहा जा रहा है, जिसमें अपराधियों को पैर में गोली मारकर पकड़ने की रणनीति अपनाई जा रही है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि इन मुठभेड़ों में जातीय आधार पर भेदभाव किया जा रहा है और एक विशेष समुदाय के लोगों को ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था के नाम पर निष्पक्षता से समझौता नहीं होना चाहिए और हर कार्रवाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह अपराधियों के खिलाफ है और इसमें किसी भी प्रकार का जातीय भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि कानून को जाति देखकर नहीं चलाया जा सकता और बिहार में अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अपराध का कोई जाति से संबंध नहीं होता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को स्वतंत्र रूप से काम करने देना चाहिए। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि अपराध के मामलों को जातीय नजरिए से देखना उचित नहीं है। बीते कुछ हफ्तों में हुई मुठभेड़ों में कई मामलों में अपराधियों के मारे जाने और घायल होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। सरकार का दावा है कि ये सभी कार्रवाई अपराध नियंत्रण और जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम हैं। वहीं विपक्ष का कहना है कि इन कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के पक्षपात की स्थिति स्पष्ट हो सके। बिहार की राजनीति में यह मुद्दा अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर सामाजिक और जातीय विमर्श का हिस्सा बन गया है। सत्ता और विपक्ष के बीच इस टकराव ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है, और आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
गोविंदपुरी हत्याकांड का आरोपी सौरभ एनकाउंटर में घायल, पुलिस की जवाबी फायरिंग में हुआ गिरफ्तार

नई दिल्ली । राजधानी Delhi के दक्षिण-पूर्वी इलाके गोविंदपुरी में हुए मां-बेटे के सनसनीखेज हत्याकांड के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फरार चल रहे आरोपी सौरभ को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरी घटना शनिवार को उस समय सामने आई जब पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी घाटी पार्क क्षेत्र में छिपा हुआ है और उसकी गतिविधियां संदिग्ध हैं। पुलिस टीम ने तुरंत इलाके की घेराबंदी की और आरोपी को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन स्थिति अचानक हिंसक हो गई। पुलिस के अनुसार जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, आरोपी ने सरेंडर करने के बजाय फायरिंग शुरू कर दी। उसने पुलिस टीम पर लगातार कई राउंड गोलियां चलाईं, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी नियंत्रित फायरिंग की, जिसमें एक गोली आरोपी के पैर में जा लगी और वह घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उसे काबू में लेकर हिरासत में ले लिया और इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया। यह मामला 20 मई को सामने आया था, जब गोविंदपुरी इलाके में मां और बेटे की हत्या की घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया था। वारदात के बाद से आरोपी लगातार फरार चल रहा था और पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई थीं। जांच के दौरान तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस को उसके लोकेशन का सुराग मिला, जिसके बाद यह मुठभेड़ हुई। सूत्रों के अनुसार घटना के समय आरोपी घाटी पार्क में बैठा हुआ था और संदिग्ध अवस्था में था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी बेहद शातिर प्रवृत्ति का है और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। मुठभेड़ के दौरान बरामद हथियार और कारतूस भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि हथियार कहां से आया और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। घायल आरोपी को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पुलिस अब उससे विस्तृत पूछताछ कर रही है ताकि हत्या के पीछे की असली वजह और पूरे घटनाक्रम का खुलासा हो सके। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस जघन्य अपराध में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं। इस कार्रवाई के बाद इलाके में पुलिस की सतर्कता बढ़ा दी गई है और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे गंभीर मामलों में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
Gwalior girl raped: घर में घुसकर युवती से दुष्कर्म, अश्लील वीडियो वायरल करने की दी धमकी

HIGHLIGHTS: अश्लील वीडियो बनाकर युवती से दुष्कर्म का आरोप ग्वालियर में युवती का आरोप- वीडियो से ब्लैकमेल कर किया रेप मां की मौत के बाद अकेली युवती को बनाया शिकार रात में कमरे में घुसा युवक, वीडियो बनाकर करता रहा शोषण ग्वालियर में युवती से कई बार दुष्कर्म, आरोपी पर केस दर्ज Gwalior girl raped: ग्वालियर। थाटीपुर थाना क्षेत्र में एक 20 वर्षीय युवती ने पड़ोस में रहने वाले युवक पर दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता के मुताबिक आरोपी युवक अभिषेक धनौलिया उसके पड़ोस में अपने परिवार के साथ रहता था। युवती अपनी मां के साथ किराए के मकान में रहती थी, लेकिन दिसंबर महीने में मां की मौत के बाद वह घर में अकेली रहने लगी, युवती के पिता ड्राइवर हैं और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। Cannes 2026: ब्लू क्रिस्टल गाउन में ऐश्वर्या राय बच्चन की ग्रैंड एंट्री, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें रात में कमरे में घुसकर बनाया अश्लील वीडियो मामले को लकेर पीड़िता ने पुलिस को बताया कि करीब एक महीने पहले रात 12 बजे के आसपास आरोपी चुपचाप उसके कमरे में घुस आया। इसके बाद उसने युवती को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती कि इस दौरान युवक ने उसका अश्लील वीडियो भी बना लिया। डर और बदनामी की वजह से युवती किसी को घटना के बारे में नहीं बता सकी। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर करता रहा शोषण युवती के अनुसार आरोपी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लगातार उसका शोषण करता रहा। उसने कई बार युवती के साथ जबरदस्ती की। पीड़िता ने बताया कि 9 मई 2026 की रात भी आरोपी उसके कमरे में पहुंचा और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी लगातार उसे धमकाता रहा, जिससे वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई थी। IPL 2026: SRH से हारकर भी RCB ने मारी बाजी, क्वालिफायर-1 में एंट्री पुलिस ने दर्ज किया केस अगले दिन जब युवती के पिता घर लौटे, तो उसने पूरी घटना उन्हें बताई। इसके बाद दोनों गोला का मंदिर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल थाटीपुर थाना पुलिस ने आरोपी अभिषेक धनौलिया के खिलाफ दुष्कर्म, धमकी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पेट्रोल-डीजल सप्लाई पर बड़ा बयान, देशभर में पर्याप्त स्टॉक मौजूद: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन

नई दिल्ली । कंपनी के अनुसार देशभर में उसके नेटवर्क के तहत हजारों पेट्रोल पंपों पर ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और केवल कुछ ही आउटलेट्स पर अस्थायी बाधा देखी गई है। Indian Oil Corporation ने यह भी कहा कि वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जहां भी समस्या सामने आ रही है, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। जानकारी के मुताबिक हाल के दिनों में कुछ इलाकों में डीजल की मांग में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका प्रमुख कारण कृषि क्षेत्र में फसल कटाई का मौसम बताया जा रहा है। इसके साथ ही कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर कीमतें अधिक होने के कारण उपभोक्ता सरकारी पंपों की ओर अधिक संख्या में जा रहे हैं, जिससे कुछ स्थानों पर अस्थायी दबाव की स्थिति बन गई है। इसके अलावा संस्थागत खरीद में वृद्धि ने भी कुछ क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी तरह की राष्ट्रीय स्तर की कमी की स्थिति नहीं है। मौजूदा चुनौतियां केवल वितरण और मांग के स्थानीय बदलाव से जुड़ी हैं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए तेल विपणन कंपनियां लगातार सक्रिय हैं। इसी बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कुछ अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में हाल ही में बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि Indian Oil Corporation ने यह भरोसा दिलाया है कि वह देशभर में निर्बाध ईंधन आपूर्ति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कुल मिलाकर कंपनी का संदेश साफ है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सप्लाई व्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है।