रेलवे परिसर में सनसनी: युवक का शव मिलने से हड़कंप, युवती का दर्दनाक मंजर

झाबुआ । झाबुआ जिले के बामनिया रेलवे परिसर में रविवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया। स्थानीय लोगों ने रेलवे फाटक से कुछ दूरी पर प्लेटफॉर्म के शुरुआती हिस्से के पास शव देखा और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। मृतक ने काली शर्ट और जींस पहन रखी थी। प्रारंभिक पहचान के अनुसार युवक की शिनाख्त ग्राम पीपलीपाडा, अंतर वेलिया चौकी (मेघनगर) क्षेत्र निवासी 18 वर्षीय सुखराम निनामा के रूप में हुई है। घटना स्थल की स्थिति ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है, क्योंकि मौके पर एक युवती शव से लिपटकर रोती हुई देखी गई, जिससे वहां भीड़ जमा हो गई और तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दृश्य बेहद भावुक और रहस्यमयी था, जिसने घटना को और अधिक सवालों के घेरे में ला दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि युवक वहां कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है। चौकी प्रभारी हीरालाल मालीवाड़ ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर एंगल से जांच की जा रही है। पुलिस ने परिजनों और मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के पीछे कोई हादसा है, आत्महत्या है या फिर किसी अन्य कारण से यह मौत हुई है। फिलहाल पुलिस मामले की तह तक पहुंचने के लिए तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी खंगाल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
झाबुआ में खौफनाक वारदात: सड़क किनारे मिला शव, पुलिस ने आरोपी दबोचा

झाबुआ । झाबुआ जिले के पेटलावद थाना क्षेत्र में सामने आए अंधे कत्ल की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। बामनझीरी मोड़ पर 18 मई को मिले खून से लथपथ शव की पहचान शांतु पारगी के रूप में हुई थी, जिसके बाद से पुलिस लगातार मामले की जांच में जुटी हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होने के बाद अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मिले तकनीकी साक्ष्यों और शराब की बोतलों के आधार पर शक की सुई मृतक के ही दोस्त दिनेश उर्फ दितिया मोरी की ओर घूमाई। इसी आधार पर पुलिस ने अपनी जांच तेज करते हुए कई टीमों का गठन किया और आरोपी की तलाश शुरू की। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर 23 मई को पुलिस ने आरोपी दिनेश मोरी को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने हत्या की पूरी वारदात कबूल कर ली, जिससे पुलिस भी हैरान रह गई। आरोपी और मृतक दोनों आपस में मित्र थे और साथ में हम्माली का काम करते थे। आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसे किसी ने बताया था कि उसकी गैरमौजूदगी में मृतक उसके घर आता-जाता है। इसी बात को लेकर उसके मन में गहरी नाराजगी और शक पैदा हो गया। यही रंजिश धीरे-धीरे हत्या की वजह बन गई। घटना वाले दिन यानी 17 मई को आरोपी ने शांतु पारगी को शराब पीने के बहाने एक सुनसान जगह पर बुलाया। दोनों ने वहां बैठकर शराब का सेवन किया। इसी दौरान शराब लाने को लेकर कहासुनी हो गई, जो धीरे-धीरे विवाद में बदल गई। इसी बहस का फायदा उठाकर आरोपी ने पहले से छिपाकर रखी हुई टामी (नुकीला हथियार) निकाली और शांतु पारगी पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले में युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जिसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है, वहीं लोगों में दोस्ती के रिश्ते में हुई इस निर्मम हत्या को लेकर गहरा आक्रोश और हैरानी का माहौल है।
झाबुआ में खाद्य सुरक्षा की बड़ी कार्रवाई: 46 सैंपल्स की जांच, मिलावटी मसाले नष्ट

झाबुआ। झाबुआ जिले में खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने मिलावट पर रोक लगाने के लिए चलित खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के माध्यम से हाट बाजार में औचक निरीक्षण किया। कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित इस विशेष अभियान के तहत खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की मौके पर ही जांच की गई, जिससे व्यापारियों में हड़कंप की स्थिति देखी गई। अभियान के पहले दिन अधिकारियों ने करीब 16 छोटे दुकानदारों और फेरी विक्रेताओं की दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान जीरा, सौंफ, दालचीनी, हल्दी, धनिया, मिर्च और पूजा सामग्री सहित विभिन्न मसालों के नमूने एकत्र किए गए और उनकी मौके पर जांच की गई। चलित लैब के माध्यम से कुल 46 नमूनों की जांच की गई, जिसमें विशेष रूप से मसालों में मिलाए जाने वाले कृत्रिम रंगों की जांच पर फोकस किया गया। जांच के दौरान दो नमूने अमानक पाए गए, जिससे संबंधित दुकानदारों में अफरा-तफरी मच गई। कार्रवाई के तहत खाद्य सुरक्षा विभाग ने लगभग 700 ग्राम मिलावटी सामग्री को मौके पर ही नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को भी नियमों के उल्लंघन की छूट नहीं दी जाएगी। खाद्य सुरक्षा अधिकारी राहुल अलावा ने बताया कि लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह चलित प्रयोगशाला अभियान 26 मई तक जारी रहेगा और जिले के विभिन्न क्षेत्रों में इसी तरह औचक निरीक्षण किए जाएंगे। विभाग के अनुसार, जिले में अब तक मिलावट से जुड़े 24 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 22 मामलों का निराकरण हो चुका है। इसके अलावा काकनवानी क्षेत्र की एक किराना दुकान से 57 एक्सपायरी कन्फेक्शनरी सामग्री भी जब्त की गई थी, जिसमें दुकान संचालक पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई से बाजारों में मिलावटखोरों के बीच सतर्कता बढ़ गई है और आने वाले दिनों में ऐसे निरीक्षण और तेज किए जाने की संभावना है।
बरमान घाट पर फिर डूबने की घटना, नाविकों ने बचाई युवक की जान

नरसिंहपुर । नरसिंहपुर जिले के प्रसिद्ध बरमान घाट पर रविवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब नर्मदा नदी में नहाते समय एक युवक अचानक गहरे पानी में फंस गया और डूबने लगा। मौके पर मौजूद स्थानीय नाविकों ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत रेस्क्यू कर उसकी जान बचा ली। पूरी घटना का लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें नाविकों की तेज और समन्वित कार्रवाई स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। जानकारी के अनुसार, रविवार होने के कारण घाट पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ मौजूद थी। युवक शुरुआती तौर पर उथले पानी में नहा रहा था, लेकिन कुछ ही कदम आगे बढ़ते ही वह गहरे पानी में चला गया और संतुलन खो बैठा। देखते ही देखते वह डूबने लगा और आसपास अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, घाट पर मौजूद नाविकों ने तुरंत स्थिति को भांप लिया और बिना देर किए नदी में कूदकर युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी इस तत्परता के चलते एक बड़ा हादसा टल गया और युवक की जान बच गई। चिंताजनक बात यह है कि बरमान घाट पर पिछले 12 दिनों में यह छठी घटना सामने आई है। इन घटनाओं में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य मामलों में समय रहते लोगों को बचा लिया गया है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने घाट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नर्मदा नदी के इस हिस्से में पानी की गहराई अचानक बढ़ जाती है, जिसका अंदाजा बाहर से आने वाले लोगों को नहीं होता। इसी कारण अक्सर लोग गहरे पानी में जाकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि घाट पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, बैरिकेडिंग की व्यवस्था हो और गोताखोरों की स्थायी तैनाती की जाए। हालांकि, लगातार हादसों के बावजूद अब तक सुरक्षा इंतजामों में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया है। फिलहाल, इस ताजा घटना के बाद एक बार फिर बरमान घाट की सुरक्षा व्यवस्था चर्चा में आ गई है और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
गड्ढों पर लिखे तंज से गरमाई सियासत: नरसिंहपुर में सड़क पर अनोखा विरोध

नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले में सड़क की जर्जर हालत को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। गोटेगांव-नरसिंहपुर मार्ग की बदहाली के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने सड़क के गड्ढों को ही अपना मंच बना लिया और उन्हीं पर तंज भरे नारे लिखकर प्रशासन और सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की। जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस नेता अरविंद सिंह पटेल के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने चूने और फेवीकोल के घोल से गड्ढों के बीच सरकार विरोधी संदेश लिखे। इनमें “रोड पर गड्ढे हैं या गड्ढे में रोड?”, “भाजपा का विकास” और “अमेरिका से बेहतर रोड” जैसे व्यंग्यात्मक नारे शामिल थे, जो राहगीरों के बीच चर्चा का विषय बने रहे। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मार्ग जिले का प्रमुख और व्यस्त सड़क मार्ग है, लेकिन लंबे समय से इसकी मरम्मत नहीं की गई है। जगह-जगह गहरे गड्ढों के कारण यहां आए दिन हादसे होते रहते हैं और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस सड़क के फोरलेन निर्माण को लेकर पहले सर्वे भी किया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका। नेताओं ने आरोप लगाया कि यह मार्ग प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी रास्ते से कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं, इसके बावजूद सड़क की हालत पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। प्रदर्शनकारियों ने इसे सरकार की विकास कार्यों में लापरवाही बताते हुए कहा कि उनका यह अनोखा विरोध प्रशासन को जगाने और जल्द से जल्द सड़क सुधार कार्य शुरू कराने के उद्देश्य से किया गया है। फिलहाल स्थानीय स्तर पर यह प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग सोशल मीडिया पर भी इन नारों को साझा कर रहे हैं।
तपती धूप का असर: कटनी में सड़कों पर सन्नाटा, लू का अलर्ट जारी

कटनी । कटनी जिले में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसके तहत कटनी में भी तापमान ने अपना तीखा असर दिखाना शुरू कर दिया है। रविवार को सुबह से ही सूर्य की तपिश बेहद तेज रही और दोपहर होते-होते हालात और गंभीर हो गए। 12 बजे से 1:30 बजे के बीच ही तापमान 42 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, जबकि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार शाम तक यह 43 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस सीजन के सबसे गर्म दिनों में से यह एक माना जा रहा है। भीषण गर्मी और झुलसाने वाली लू के कारण शहर की रफ्तार थम सी गई है। आमतौर पर रविवार को जहां बाजारों और मुख्य सड़कों पर चहल-पहल रहती है, वहीं इस बार दृश्य पूरी तरह बदल गया। दोपहर होते ही प्रमुख चौराहे, बाजार और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें सूनी नजर आने लगीं। लोग घरों में दुबके रहे और सड़कें अघोषित कर्फ्यू जैसी दिखाई दीं। गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे के बीच घर से बाहर न निकलें। इसके साथ ही शरीर में पानी की कमी न होने देने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि इस मौसम में पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस घोल, छाछ और नींबू पानी का सेवन किया जाए। हल्का और सुपाच्य भोजन करने तथा तैलीय और मसालेदार भोजन से बचने की सलाह दी गई है। बाहर निकलने पर सूती और ढीले कपड़े पहनने तथा सिर को ढकने की हिदायत दी गई है। डॉक्टरों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। लू लगने के लक्षण जैसे सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी या तेज बुखार होने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करने को कहा गया है। फिलहाल कटनी में गर्मी का यह प्रचंड रूप लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
मानसून से पहले नगर निगम का एक्शन, सिल्वर टॉकीज रोड पर ढहाया गया खतरनाक भवन

कटनी । कटनी नगर निगम ने मानसून से पहले संभावित हादसों को रोकने के उद्देश्य से जर्जर भवनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में रविवार को सिल्वर टॉकीज रोड स्थित एक पुराने और बेहद जर्जर भवन को हटाने की कार्रवाई की गई। यह भवन बॉम्बे टेलर के पास स्थित था और लंबे समय से खराब हालत में खड़ा हुआ था, जिससे आसपास के लोगों में हमेशा खतरे की आशंका बनी रहती थी। यह इलाका शहर के व्यावसायिक क्षेत्र को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है, जहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों का आवागमन रहता है। स्थानीय निवासियों और दुकानदारों द्वारा इस भवन को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही थीं कि मानसून के दौरान इसके गिरने का खतरा बढ़ सकता है और किसी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने भवन को हटाने का निर्णय लिया। निगमायुक्त के निर्देश पर नगर निगम का अतिक्रमण हटाने वाला दस्ता, लोक निर्माण विभाग की तकनीकी टीम और पुलिस बल मौके पर पहुंचा और पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। भवन को गिराने के लिए भारी मशीनों जैसे जेसीबी, पोकलेन, क्रेन और हाइड्रोलिक कटर का उपयोग किया गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र में कड़ी व्यवस्था की गई ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अव्यवस्था न हो। कार्रवाई के दौरान आसपास के मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया और यातायात को वैकल्पिक रास्तों से डायवर्ट किया गया। स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को राहतभरा कदम बताया है, क्योंकि लंबे समय से यह जर्जर भवन क्षेत्र के लिए खतरा बना हुआ था। व्यापारियों और राहगीरों का कहना है कि बारिश के मौसम में इसकी स्थिति और भी खतरनाक हो सकती थी। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मानसून को देखते हुए शहर में चिन्हित सभी जर्जर और असुरक्षित भवनों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
बैरकों से छत तक फैला हंगामा: कपूरथला जेल में कैदियों की भिड़ंत के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

नई दिल्ली। पंजाब की कपूरथला केंद्रीय जेल में हुई हिंसक घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार रात जेल परिसर में अचानक ऐसा माहौल बन गया जिसने पूरे इलाके में हलचल पैदा कर दी। कैदियों के दो गुटों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया और कुछ ही समय में हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे जेल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल सक्रिय होना पड़ा। बताया जा रहा है कि झड़प के दौरान कैदियों ने बैरकों में जमकर तोड़फोड़ की और स्थिति को और गंभीर बनाने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर आग लगाने की भी कोशिश की गई, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए। घटना के दौरान कई कैदी बैरकों से बाहर निकलकर जेल परिसर की छतों तक पहुंच गए। अचानक बढ़े इस हंगामे ने जेल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी क्योंकि स्थिति कुछ समय के लिए नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दी। घटना के बाद की गई कार्रवाई में कई चौंकाने वाली चीजें बरामद होने की जानकारी सामने आई है। तलाशी अभियान के दौरान लोहे की छड़ें, लाठियां और मोबाइल फोन जैसी वस्तुएं बरामद की गईं। इन वस्तुओं के मिलने के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ऐसी सामग्री जेल के भीतर कैसे पहुंची। जांच एजेंसियां इस पहलू को बेहद गंभीरता से देख रही हैं क्योंकि इससे जेल की आंतरिक सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है। घटना के दौरान कुछ कैदियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। हालात को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया और स्थिति को काबू में करने के लिए विशेष कदम उठाए गए। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कैदियों को वापस बैरकों में पहुंचाया और पूरे परिसर की दोबारा जांच की गई। इसके बाद सभी कैदियों की गिनती भी की गई ताकि किसी प्रकार की अनहोनी की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी कई वीडियो सामने आने लगे, जिनमें जेल के भीतर तनावपूर्ण हालात दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। कुछ वीडियो में कैदी अपनी शिकायतें और आरोप भी रखते दिखाई दिए। हालांकि प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और वायरल सामग्री की भी सत्यता पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और जेल परिसर की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने जेल प्रशासन के सामने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेल जैसी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की चूक गंभीर परिणाम ला सकती है। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह केवल कैदियों के बीच विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी छिपी हुई थी। आने वाले दिनों में जांच के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
कटनी में सड़क हादसा और बवाल: ट्रक की टक्कर से 4 घायल, ग्रामीणों का चक्का जाम

कटनी। कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र अंतर्गत गणेशपुर-विलायत कला मार्ग पर रविवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। सलैया गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से आ रही कार को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे कार में सवार दो महिलाओं सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए। बताया गया कि कार सवार सभी लोग इमिलिया गांव के निवासी हैं और अपने रिश्तेदारों से मिलकर वापस लौट रहे थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकाला और निजी वाहनों की मदद से अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद 108 एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंची, जिसके कारण घायलों को निजी साधनों से अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर कुछ समय के लिए चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर लंबे समय से ओवरलोड और तेज रफ्तार भारी वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। साथ ही, इन वाहनों के कारण सड़क की हालत भी लगातार खराब हो रही है। ग्रामीणों ने अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। स्थानीय निवासी विजय कुमार के अनुसार खरहटा-देवरी महानदी रेत खदान से बड़े पैमाने पर नियमों के खिलाफ रेत का परिवहन किया जा रहा है। भारी वाहन बिना किसी रोक-टोक के गांवों के संपर्क मार्गों से गुजरते हैं, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़ गई है। हंगामे की सूचना मिलते ही बड़वारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाइश दी और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घायलों के उपचार पर नजर रखी जा रही है।
फालता उपचुनाव में बदले राजनीतिक समीकरण, BJP जीत के बेहद करीब, TMC को बड़ा झटका

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना ने राज्य की राजनीति में नया संदेश देने का काम किया है। शुरुआती रुझानों से लेकर लगातार सामने आ रहे आंकड़ों तक भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह बड़ी बढ़त बनाई, उसने चुनावी तस्वीर लगभग साफ कर दी है। भाजपा उम्मीदवार ने एक लाख से अधिक वोटों की बढ़त हासिल कर जीत की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान, जो कुछ समय पहले तक चर्चा के केंद्र में थे, चुनावी मुकाबले में चौथे स्थान पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। फालता सीट पर हुए पुनर्मतदान के बाद यह मुकाबला पहले से ही राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। मतदान से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान द्वारा चुनाव से पीछे हटने की घोषणा ने पूरे चुनावी समीकरण को बदल दिया था। हालांकि तकनीकी रूप से उनका नाम और चुनाव चिन्ह मतपत्र प्रक्रिया में मौजूद रहा, लेकिन उनके इस फैसले ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह प्रभावित किया। इसका असर मतगणना के दौरान भी साफ दिखाई दिया, जहां अपेक्षा से बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आती नजर आई। मतगणना के कई चरण पूरे होने के बाद भाजपा उम्मीदवार ने लगातार अपनी बढ़त मजबूत रखी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्हें भारी संख्या में मतदाताओं का समर्थन मिलता दिखाई दिया। वहीं दूसरे स्थान के लिए भी मुकाबला बना रहा, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर सके। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि इस उपचुनाव में परिस्थितियों ने सामान्य राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिला। फालता विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आती है और राज्य की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। वर्षों तक यह क्षेत्र अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रभाव का केंद्र रहा है। पहले इसे वामपंथी राजनीति का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन बाद के वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की और लगातार चुनावी सफलता हासिल की। हालांकि इस बार के चुनावी रुझान नए बदलाव की ओर संकेत करते दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की नजर अब अंतिम परिणामों पर टिकी हुई है, लेकिन मौजूदा स्थिति ने इतना स्पष्ट कर दिया है कि फालता का यह चुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं रहा। इसने बंगाल की बदलती राजनीतिक दिशा और मतदाताओं के बदलते रुझानों पर भी नई बहस शुरू कर दी है। अगर अंतिम नतीजों में यही रुझान कायम रहता है तो यह भाजपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि और तृणमूल कांग्रेस के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय बन सकता है।