जल संकट से हाहाकार: इंदौर में विरोध, रतलाम में भी सड़क पर प्रदर्शन

इंदौर। इंदौर में भीषण गर्मी के बीच गहराते जल संकट ने लोगों का गुस्सा सड़क पर उतार दिया। रविवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों में “पानी दो-पानी दो” के नारे गूंजते रहे, जब कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में रहवासियों ने चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के चलते शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और कई प्रमुख मार्गों पर घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही। सुबह से ही पालदा चौराहा और दीनदयाल उपाध्याय चौराहा (सुखलिया जोन-5) पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। वार्ड-75 और वार्ड-64 के रहवासी पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में सड़क पर बैठ गए, वहीं वार्ड-27 में पार्षद राजू भदौरिया के साथ स्थानीय लोग भी विरोध में उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम और महापौर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति तब और बिगड़ गई जब चक्काजाम के कारण सिटी बसें और अन्य वाहन बीच रास्ते में फंस गए। तपती धूप में सैकड़ों यात्री, बुजुर्ग और बच्चे घंटों परेशान होते रहे। कई मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था थी, उसे बंद कर दिया गया है, जिससे आम जनता की परेशानी और बढ़ गई है। महिलाओं और पुरुषों ने खाली बर्तन लेकर विरोध जताया और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, इंदौर में जल संकट के पीछे कई कारण हैं। कई नई कॉलोनियों में नर्मदा जल की पाइपलाइन नहीं पहुंची है, टैंकरों की कमी के कारण नियमित आपूर्ति बाधित है और भीषण गर्मी के चलते भूजल स्तर भी लगातार गिर रहा है। इन सभी कारणों ने मिलकर हालात को और गंभीर बना दिया है। लंबे समय तक चले विरोध के बाद नगर निगम और पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त टैंकर भेजे जाएंगे और जल आपूर्ति व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किया जाएगा। प्रशासन के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो शहरव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा।
बहन की शादी से पहले टूटा परिवार: भोपाल में 16 साल के किशोर ने की आत्महत्या

भोपाल । भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर, बीएचईएल इलाके में रविवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 16 वर्षीय किशोर ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। परिजन इस घटना के बाद गहरे सदमे में हैं। मृतक की पहचान करण (16) के रूप में हुई है, जो 9वीं कक्षा तक पढ़ा था और सुबह के समय दूध बांटने वाली गाड़ी पर काम करता था। परिजनों के अनुसार, 18 जून को उसकी बहन की शादी होने वाली थी, जिसकी तैयारियां परिवार में चल रही थीं। लेकिन इस खुशी के माहौल के बीच अचानक आई इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। परिजनों ने बताया कि घटना से कुछ घंटे पहले करण ने अपने पिता और बहन से फोन पर बातचीत की थी। पिता मौहर सिंह के अनुसार, सुबह करण ने फोन कर कहा था—“सॉरी, मैं शादी में शामिल नहीं हो पाऊंगा।” इस बात को उस समय सामान्य बातचीत समझा गया, लेकिन कुछ देर बाद जब दोबारा फोन लगाया गया तो उसने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद परिवार को छोटे बेटे के माध्यम से घटना की जानकारी मिली। जब परिजन घर पहुंचे तो देखा कि करण कमरे में फंदे से लटका हुआ था। इस दृश्य को देखकर पूरा परिवार टूट गया और घर में चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलने पर गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। बाद में पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच के दौरान किशोर का मोबाइल फोन भी बरामद किया, जो डिस्चार्ज हालत में मिला। थाना प्रभारी अवधेश सिंह तौमर ने बताया कि फिलहाल आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस ने मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि किसी भी संभावित कारण का पता लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है, वहीं परिवार इस असामयिक और दर्दनाक घटना से गहरे सदमे में है।
माथा टेका, पूजा की और फिर दिखाया असली चेहरा, मंदिर में अनोखे अंदाज में हुई चोरी ने सबको किया हैरान

नई दिल्ली। महाराष्ट्र से एक ऐसी हैरान करने वाली घटना सामने आई है जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अपराधी अब वारदात को अंजाम देने के लिए किस हद तक नई तरकीबें अपनाने लगे हैं। धार्मिक आस्था और श्रद्धा से जुड़े स्थान को निशाना बनाकर अंजाम दी गई इस घटना ने लोगों को चौंका दिया है। सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि आरोपी ने घटना को जिस तरीके से अंजाम दिया, उसने पूरी वारदात को बेहद असामान्य बना दिया। घटना के बाद अब यह मामला लोगों के बीच चर्चा और हैरानी दोनों का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि आरोपी किसी सामान्य श्रद्धालु की तरह मंदिर परिसर में पहुंचा था। उसके व्यवहार और गतिविधियों को देखकर किसी को भी उस पर संदेह नहीं हुआ। मंदिर में प्रवेश करने के बाद उसने बेहद शांत और श्रद्धापूर्ण अंदाज में पूजा-अर्चना की। उसने पूरे विश्वास के साथ ऐसा व्यवहार किया मानो वह केवल दर्शन के उद्देश्य से वहां आया हो। उसके इस आचरण ने आसपास मौजूद लोगों और मंदिर से जुड़े लोगों का भरोसा पूरी तरह जीत लिया। घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि आरोपी ने वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की प्रक्रिया पूरी की। उसने देवी के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना की और कुछ समय तक वहीं रुका भी। इस दौरान किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि कुछ ही क्षणों बाद एक बड़ी चोरी की घटना सामने आने वाली है। आरोपी के व्यवहार ने इस पूरी घटना को और अधिक रहस्यमय और चर्चा का विषय बना दिया। मौका मिलते ही आरोपी ने अपनी असली योजना को अंजाम दिया। बड़ी फुर्ती और चालाकी के साथ उसने मंदिर में रखी मूल्यवान वस्तु को अपने कब्जे में लिया और बेहद तेजी से वहां से निकल गया। पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को तत्काल कुछ समझ ही नहीं आया। जब तक लोगों को मामले की जानकारी हुई, तब तक आरोपी वहां से जा चुका था। घटना के बाद जब सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी गई तो पूरी कहानी सामने आई। रिकॉर्डिंग में आरोपी की गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई देने की बात कही जा रही है। हालांकि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे को ढक रखा था, जिसके कारण उसकी पहचान करना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। अब जांच अधिकारी तकनीकी और अन्य माध्यमों से आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले लोगों के प्रति विश्वास का माहौल होता है और अपराधी कई बार इसी भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत की ओर भी संकेत करती हैं। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है और लोग आरोपी के इस अनोखे तरीके को लेकर लगातार चर्चा कर रहे हैं। जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल में जुटी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस घटना से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।
12 दिन बाद मिला एक्ट्रेस ट्विशा को अंतिम विदाई, भोपाल में हुआ अंतिम संस्कार

भोपाल। भोपाल में एक्ट्रेस ट्विशा का अंतिम संस्कार रविवार को भदभदा श्मशान घाट पर 12 दिन बाद संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन और भावुक था। परिवार के सदस्यों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। अंतिम संस्कार में सबसे भावुक क्षण वह रहा जब ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान मौजूद परिजन और करीबी लगातार रोते-बिलखते नजर आए। ट्विशा के अंतिम दर्शन और अंतिम यात्रा के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। अंतिम यात्रा भोपाल AIIMS से शुरू होकर भदभदा विश्राम घाट तक पहुंची, जहां पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। इससे पहले दिन में एक महत्वपूर्ण मेडिकल प्रक्रिया के तहत दिल्ली AIIMS की विशेष टीम ने भोपाल AIIMS परिसर में ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। यह प्रक्रिया करीब तीन घंटे तक चली, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सभी आवश्यक जांचें कीं। पोस्टमॉर्टम के दौरान लिए गए सैंपल और विसरा को सुरक्षित रूप से भोपाल AIIMS में सील कर रखा गया है। टीम अब अपनी विस्तृत रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपेगी, जिसे जांच प्रक्रिया में अहम माना जा रहा है। यह मामला 12 मई की रात का है, जब भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरुआती जांच के बाद मामला आत्महत्या और हत्या के आरोपों के बीच उलझ गया है। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया है, जबकि मायके पक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। इस विरोधाभास ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। कोर्ट की कार्रवाई के तहत ट्विशा के पति समर्थ को पहले ही गिरफ्तार कर 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा जा चुका है। साथ ही अदालत ने उसका पासपोर्ट भी जब्त करने के आदेश दिए हैं, जिससे विदेश भागने की संभावना को रोका जा सके। वहीं सास की जमानत रद्द करने की मांग को लेकर भी अदालत में आवेदन दायर किया गया है, जिस पर सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित है। इसी बीच, इस हाई-प्रोफाइल मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को चीफ जस्टिस की बेंच में सुनवाई तय की है। माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत इस मामले में जांच की दिशा और प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दे सकती है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को सीबीआई को सौंपने पर सहमति जता दी है, जिससे जांच और तेज होने की उम्मीद है। अंतिम संस्कार के दौरान भदभदा घाट पर भारी भीड़ और पुलिस सुरक्षा के बीच पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। परिवार और रिश्तेदारों ने नम आंखों से ट्विशा को अंतिम विदाई दी। माहौल इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। फिलहाल, पूरे मामले की जांच अलग-अलग स्तरों पर जारी है और आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सीबीआई जांच की दिशा इस केस को और स्पष्ट कर सकती है।
आस्था के आगे मौसम भी बेबस: सुमेरपुर में 45 डिग्री गर्मी के बीच चल रही 41 दिनों की अग्नि तपस्या, श्रद्धा में डूबे भक्त

नई दिल्ली। पाली जिले के सुमेरपुर में इन दिनों आस्था और साधना का एक अनोखा दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां बाल योगी गुलाब नाथ जी महाराज भीषण गर्मी और धधकती अग्नि धूणी के बीच 41 दिनों की दिव्य अग्नि तपस्या कर रहे हैं। तपते मौसम में जब तापमान 45 डिग्री तक पहुंच रहा है, तब भी संत अपनी साधना में पूरी तरह लीन हैं। इस तपस्या को लोक कल्याण, गौ-सेवा और धर्म रक्षा के उद्देश्य से किया जा रहा एक विशेष अनुष्ठान बताया जा रहा है। चारों ओर जलती अग्नि धूणी और बीच में शांत मुद्रा में बैठे बाल योगी का यह दृश्य हर किसी को हैरान कर रहा है। यह साधना न केवल कठिन मानी जा रही है, बल्कि इसे आध्यात्मिक शक्ति और आत्मसंयम का अद्भुत उदाहरण भी माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह दिव्य तपस्या लगातार 41 दिनों तक बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। लोक कल्याण और धर्म रक्षा के लिए साधनाइस अग्नि तपस्या का मुख्य उद्देश्य गौ माता की सेवा, सनातन धर्म की रक्षा और समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना बताया जा रहा है। साधक के अनुयायियों का मानना है कि यह तपस्या केवल व्यक्तिगत साधना नहीं बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए की जा रही है। अग्नि के बीच बैठकर की जा रही यह साधना लोगों के बीच गहरी आस्था का केंद्र बन गई है। सात परिक्रमा के लिए उमड़ रहे श्रद्धालुइस पावन स्थल पर दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है। भक्तजन अग्नि धूणी के चारों ओर सात परिक्रमा (फेरे) लगाकर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस पवित्र स्थान पर परिक्रमा करने से जीवन के दुख-दर्द, मानसिक तनाव और कष्टों से मुक्ति मिलती है। भीषण गर्मी और तपती जमीन के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। लोग आस्था के इस संगम को देखने और उसमें शामिल होने के लिए लगातार सुमेरपुर पहुंच रहे हैं। आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना क्षेत्रजिस स्थान पर यह तपस्या चल रही है, वह श्री डूंगलाई मामाधणी उज्जेनी वीर मंदिर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जो पहले से ही श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। अब इस 41 दिनों की अग्नि साधना के कारण इस पूरे परिसर की आध्यात्मिक ऊर्जा और महत्व और भी बढ़ गया है। भक्तों का कहना है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति एक अलग ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करता है। यही वजह है कि यह स्थान अब केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। आस्था और साधना का अनोखा संगम45 डिग्री की झुलसा देने वाली गर्मी में भी साधक की अडिग तपस्या और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस स्थान को विशेष बना रही है। यह दृश्य आस्था, विश्वास और समर्पण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो हर किसी को प्रभावित कर रहा है। सुमेरपुर की यह अग्नि तपस्या आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे एक दिव्य और अलौकिक अनुभव के रूप में देख रहे हैं।
जमीन विवाद में गोलियों की गूंज, पिता-बेटे को दी जान से मारने की धमकी

शिवपुरी । शिवपुरी जिले के सीहोर थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते फायरिंग की गंभीर घटना सामने आई है। यह पूरा विवाद खेत के रास्ते और रेत खदान के संचालन से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें एक ही परिवार के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। ग्राम सीहोर निवासी जितेंद्र गुर्जर ने बताया कि करीब दो महीने पहले खेत के रास्ते को लेकर परिवार के ही प्रशांत गुर्जर से विवाद हुआ था। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और रंजिश गहरी होती चली गई। घटना 23 मई 2026 की रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है, जब जितेंद्र अपने पिता औतार सिंह गुर्जर के साथ घर के बाहर बैठे हुए थे। उसी दौरान प्रशांत गुर्जर अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने कट्टे से कई हवाई फायर कर दहशत फैला दी। फायरिंग की आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। परिजनों को आता देख आरोपी पक्ष ने जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गया। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच रेत खदान के संचालन को लेकर भी लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिससे तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। सीहोर थाना पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(ए), 125, 351(3) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
सेंसेक्स की शीर्ष कंपनियों ने जोड़ी हजारों करोड़ की ताकत, कई दिग्गज पीछे भी फिसले

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह सकारात्मक माहौल देखने को मिला, जिसका सीधा असर देश की शीर्ष कंपनियों के बाजार मूल्यांकन पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कई बड़े नामों ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए अपने बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। सप्ताह भर की कारोबारी गतिविधियों के दौरान निवेशकों के भरोसे और बाजार की मजबूती ने दिग्गज कंपनियों को नई ऊर्जा दी, जिसके परिणामस्वरूप शीर्ष 10 कंपनियों में से छह कंपनियों की कुल बाजार हैसियत में 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया। बीते सप्ताह बाजार की चाल अपेक्षाकृत संतुलित और सकारात्मक रही। प्रमुख शेयर सूचकांक में बढ़त का असर बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। निवेशकों ने वित्तीय, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में भरोसा जताया, जिससे कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर आर्थिक संकेतकों और निवेशकों की सकारात्मक धारणा ने इस बढ़त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान सबसे अधिक लाभ हासिल करने वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में सबसे बड़ा उछाल देखने को मिला, जिससे वह सप्ताह की सबसे बड़ी लाभार्थी बनकर उभरी। इसके अलावा बैंकिंग और आईटी सेक्टर से जुड़ी प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। बड़े निवेशकों के साथ-साथ खुदरा निवेशकों का भरोसा भी इन कंपनियों के पक्ष में दिखाई दिया, जिसका सीधा असर उनके बाजार मूल्यांकन पर पड़ा। आईटी और बैंकिंग क्षेत्र में मजबूती ने भी बाजार को सहारा दिया। टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बड़ी कंपनियों ने निवेशकों को आकर्षित किया और उनके शेयरों में तेजी का माहौल बना रहा। इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने भी अपनी बाजार स्थिति को और मजबूत किया। लगातार बेहतर कारोबारी संभावनाओं और निवेशकों के भरोसे ने इन कंपनियों को बाजार में मजबूती प्रदान की। हालांकि दूसरी ओर कुछ प्रमुख कंपनियों को इस दौरान नुकसान का सामना भी करना पड़ा। कुछ दिग्गज कंपनियों की बाजार हैसियत में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में प्रतिस्पर्धा और उतार-चढ़ाव अभी भी बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग सेक्टरों में निवेशकों की रणनीति और बदलती प्राथमिकताएं कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रही हैं। पूरे सप्ताह के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा अभी भी कायम है। बाजार में बढ़ती गतिविधियां और बड़े समूहों की मजबूती आने वाले समय में निवेश के माहौल को और बेहतर बना सकती हैं। हालांकि बाजार की दिशा वैश्विक परिस्थितियों, आर्थिक संकेतकों और निवेशकों की रणनीति पर भी निर्भर करेगी, लेकिन फिलहाल बाजार में सकारात्मक रुझान ने निवेशकों के उत्साह को जरूर बढ़ाया है।
नरेंद्र मोदी: 2014 के बाद भारत की राजनीति में बदलाव की शुरुआत और प्रधानमंत्री बनने का सफर

2014 का साल भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया। इसी वर्ष भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भारी बहुमत हासिल किया और नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने देश के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। हालांकि उनकी शपथ 26 मई 2014 को हुई, लेकिन 24 मई का समय राजनीतिक रूप से बेहद अहम था क्योंकि चुनाव परिणामों के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो चुकी थी और देश में सत्ता परिवर्तन की स्पष्ट तस्वीर सामने आ चुकी थी। नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में एक सामान्य परिवार में हुआ था। उनके पिता दामोदरदास मोदी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने का काम करते थे। परिवार आर्थिक रूप से साधारण था, लेकिन मोदी ने बचपन से ही संघर्षों के बीच आगे बढ़ने की आदत विकसित की। कहा जाता है कि उन्होंने बचपन में अपने पिता की चाय की दुकान पर मदद की और इसी वजह से उन्हें “चायवाला” के रूप में भी जाना गया। मोदी का राजनीतिक सफर बहुत कम उम्र में शुरू हो गया था। किशोरावस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे। RSS में उन्होंने अनुशासन, संगठन और राष्ट्रवाद की विचारधारा को करीब से समझा। बाद में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े और संगठन में धीरे-धीरे अपनी मजबूत पकड़ बनाई। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक कुशल संगठनकर्ता और रणनीतिक नेता के रूप में बनने लगी। 1990 के दशक में नरेंद्र मोदी को पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कई राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व कौशल और चुनावी रणनीति ने उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया। वर्ष 2001 में उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया, जो उनके राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 13 वर्षों तक शासन किया। इस दौरान उन्होंने राज्य में विकास, औद्योगिकीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया। गुजरात मॉडल ऑफ डेवलपमेंट को देशभर में एक उदाहरण के रूप में देखा जाने लगा। हालांकि उनके कार्यकाल को लेकर कुछ विवाद और आलोचनाएं भी रहीं, लेकिन विकास और प्रशासनिक दक्षता के मुद्दे पर उनकी छवि मजबूत होती गई। 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। उन्होंने पूरे देश में व्यापक चुनाव प्रचार किया और “सबका साथ, सबका विकास” जैसे नारे दिए। चुनाव में बीजेपी को ऐतिहासिक बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने कई बड़े फैसले लिए। इनमें आर्थिक सुधार, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान और जन धन योजना जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, भ्रष्टाचार कम करना और आम लोगों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना था। मोदी की राजनीतिक शैली में निर्णय लेने की तेज गति और मजबूत नेतृत्व प्रमुख विशेषता रही है। उन्होंने विदेश नीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई और भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने पर जोर दिया। उनकी यात्रा एक छोटे शहर के सामान्य परिवार से लेकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री बनने तक की प्रेरणादायक कहानी मानी जाती है। यह सफर संघर्ष, संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक दृढ़ता का प्रतीक है। 2014 में उनकी सरकार के गठन ने भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत की, जिसने देश की नीतियों, शासन प्रणाली और विकास के दृष्टिकोण को काफी हद तक बदल दिया। -24 मई नई सरकार के गठन
बिजली संकट पर सड़क पर उतरे लोग, डीसी ऑफिस के बाहर जोरदार विरोध

सीहोर। सीहोर जिले के अमलाहा क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से जारी रात्रिकालीन बिजली कटौती के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा सोमवार को सड़कों पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर अमलाहा डीसी कार्यालय पहुंचे और चक्का जाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तत्काल बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय बार-बार बिजली गुल होने से आमजन का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।लोगों ने बताया कि लगातार अंधेरे के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं किसानों को सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा छोटे व्यापारी भी बिजली कटौती से परेशान हैं और उनका कामकाज ठप पड़ रहा है।प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, हालांकि प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालते हुए ग्रामीणों को समझाइश देकर सड़क से हटाया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले 72 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो वे बड़े और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और बिजली विभाग से रिपोर्ट तलब की जा रही है।
कोनाझीर टोल के पास खौफनाक हादसा: CNG रिसाव से रास्ता बंद, यातायात प्रभावित

सीहोर। सीहोर जिले में रविवार दोपहर एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया, जब कोनाझीर टोल प्लाजा के पास इछावर की ओर से आ रहा CNG गैस से भरा ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। बताया जा रहा है कि ट्रक चालक ने सामने आए एक बाइक सवार को बचाने के प्रयास में नियंत्रण खो दिया, जिसके चलते यह गंभीर हादसा हुआ। हादसे के तुरंत बाद ट्रक से गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। ट्रक की चपेट में आने से बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई और पूरे क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित जोन घोषित कर दिया गया। संभावित खतरे को देखते हुए सीहोर-इछावर मुख्य मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया, जबकि यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट कर दिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फायर ब्रिगेड और तकनीकी टीम भी मौके पर पहुंची। गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए लगातार पानी की बौछार की गई, जिससे लीकेज के प्रभाव को काफी हद तक कम करने में सफलता मिली। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को नो-एंट्री जोन घोषित कर दिया ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। एडिशनल एसपी, सीएसपी और स्थानीय थाना प्रभारी भी मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की। पुलिस ने दो क्रेन की मदद से पलटे हुए ट्रक को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों के अनुसार स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, हालांकि पूरी सतर्कता बरती जा रही है। सीएसपी के अनुसार, यह टैंकर गेल इंडिया कंपनी का था, जो इछावर से सीहोर की ओर जा रहा था। रास्ते में बाइक सवार को बचाने के प्रयास में यह दुर्घटना हुई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के सभी उपाय अपनाए जा रहे हैं और क्षेत्र में निगरानी लगातार जारी है।