Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर

नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने नए Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। यह विमान 19 मई को अपनी पहली उड़ान भर चुका है और इसे भविष्य के युद्धों में एक मल्टी-रोल एयरबोर्न कमांड सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस विमान को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है, खासकर भारत की संभावित जरूरतों के संदर्भ में। दूसरा पायलट बनेगा “कमांड पोस्ट”पायलट सर्गेई बोगदान के अनुसार Su-57D का सबसे महत्वपूर्ण फीचर इसका ट्विन-सीट कॉन्फिगरेशन है। इसमें दूसरा पायलट केवल सह-उड़ान नहीं करेगा, बल्कि हवा में रहते हुए पूरे मिशन का कमांड और कंट्रोल संभाल सकता है। यह स्थिति खासकर बड़े सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण होगी, जहां ग्राउंड कम्युनिकेशन बाधित होने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि यदि रेडियो या नेटवर्क कम्युनिकेशन में बाधा आती है, तो अनुभवी पायलट हवा में ही निर्णय लेकर ऑपरेशन को आगे बढ़ा सकता है, जिससे मिशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। ड्रोन और AI नेटवर्क से लैस क्षमताSu-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। इसमें एडवांस एआई और ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन सिस्टम को कंट्रोल करने की क्षमता विकसित की जा रही है। यह जेट दुश्मन के रडार को जाम करने और स्टील्थ ड्रोन स्क्वाड्रन को गाइड करने में सक्षम बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में युद्ध के स्वरूप को बदल सकती है, जहां एक ही विमान कई ड्रोन और यूनिट्स को नियंत्रित करेगा। भारत के संदर्भ में रणनीतिक अहमियतरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि Su-57D भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। यहां चीन द्वारा तैनात एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने के लिए ऐसे एयरबोर्न कमांड प्लेटफॉर्म की आवश्यकता मानी जाती है। यह विमान भारतीय स्वदेशी CATS (Combat Air Teaming System) और ‘वारियर’ ड्रोन प्रोजेक्ट के साथ इंटीग्रेट होकर एक मजबूत नेटवर्क वॉरफेयर क्षमता दे सकता है। चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धाचीन पहले से ही दो-सीट 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट और ड्रोन-आधारित नेटवर्क वॉरफेयर पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके। FGFA प्रोजेक्ट और आगे की चर्चाभारत और रूस ने पहले FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट पर मिलकर काम शुरू किया था, जिसमें ट्विन-सीट स्टील्थ जेट की मांग भी शामिल थी। हालांकि 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था। अब Su-57D के परीक्षण के बाद एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव: असम से बंगाल तक BSF-BGB में टकराव, ग्रामीणों को लेकर स्थिति संवेदनशील

नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा पर तनाव लगातार तीसरे हफ्ते भी जारी है। असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैले सीमावर्ती इलाकों में बीएसएफ (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच झड़प और टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे हालात संवेदनशील बने हुए हैं। जानकारी के अनुसार, 6 मई के बाद से सीमा पर तनाव बढ़ा है और पिछले लगभग 17 दिनों में आठ से अधिक बार दोनों देशों की सुरक्षा बलों के बीच झड़प की घटनाएं दर्ज की गई हैं। कई जगहों पर अवैध घुसपैठ रोकने और सीमा पार गतिविधियों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी रही है। कई इलाकों में झड़प और आरोप-प्रत्यारोपबांग्लादेशी पक्ष का दावा है कि बीएसएफ की कार्रवाई के दौरान कुछ नागरिकों को सीमा पार धकेलने की कोशिश की गई, जबकि भारतीय पक्ष का कहना है कि वह अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए कार्रवाई कर रहा है। इस दौरान कई स्थानों पर गोलीबारी और टकराव की स्थिति भी बनी।करीमगंज (असम) और ब्राह्मणबारिया (बांग्लादेश) जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात ज्यादा तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। वहीं, ‘जीरो पॉइंट’ नियमों के उल्लंघन को लेकर भी दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। BGB का जन-जागरूकता अभियानतनाव के बीच बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने सीमावर्ती इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसमें स्थानीय लोगों को अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी और सीमा पार अपराधों से दूर रहने की अपील की जा रही है। BGB की 60वीं बटालियन ने इस अभियान की शुरुआत ब्राह्मणबारिया क्षेत्र से की है, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को सतर्क करना और सीमा सुरक्षा में सहयोग बढ़ाना बताया गया है। ग्रामीणों की भूमिका पर भी सवालरिपोर्ट्स के मुताबिक, कई सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका को लेकर भी विवाद सामने आया है। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों के सुरक्षा बलों के साथ आगे बढ़ने और टकराव के दौरान ढाल की तरह इस्तेमाल होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। जानकारों की रायविशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर यह तनाव केवल बाड़ या घुसपैठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे तस्करी और स्थानीय विवाद भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं। कई बार सीमा पार गतिविधियों को रोकने के दौरान स्थिति अचानक हिंसक रूप ले लेती है। फिलहाल दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।
Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर

नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। इस विमान ने 19 मई को अपनी पहली उड़ान भरी है और इसे भविष्य के युद्धों में कमांड और कंट्रोल क्षमता वाला एक एडवांस प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है। पायलट के अनुसार, Su-57D में दूसरा कॉकपिट केवल सह-पायलट के लिए नहीं बल्कि एक ऐसे कमांडर के लिए है जो हवा में रहते हुए पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर सकता है। यह विमान युद्ध के दौरान कम्युनिकेशन बाधित होने पर भी मिशन को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने में सक्षम माना जा रहा है। एयरबोर्न कमांड सेंटर की तरह काम करेगा विमानSu-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक फ्लाइंग कमांड सेंटर के रूप में देखा जा रहा है, जो ड्रोन और अन्य युद्ध प्रणालियों को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। इसे ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन नेटवर्क के साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। रूसी विशेषज्ञों का दावा है कि यह जेट भविष्य में जटिल मिशनों में तेजी से निर्णय लेने और दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को बाधित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत के संदर्भ में रणनीतिक महत्वरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह विमान भारतीय वायुसेना के साथ जुड़ता है तो लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील इलाकों में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम के खिलाफ गहरे हमलों में मदद मिल सकती है। यह भारतीय स्वदेशी ड्रोन प्रोजेक्ट CATS के साथ भी इंटीग्रेट होकर नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता को मजबूत कर सकता है।हालांकि भारत पहले ही रूस के FGFA प्रोजेक्ट से बाहर हो चुका है, लेकिन दो-सीट Su-57D के आने के बाद रक्षा हलकों में एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धाचीन पहले से ही दो-सीट 5th जनरेशन फाइटर और ड्रोन-नेटवर्क आधारित एयर वॉरफेयर सिस्टम पर काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि तिब्बत क्षेत्र में किसी भी रणनीतिक चुनौती का जवाब दिया जा सके।
ममता सरकार पर बढ़ा दबाव: 91 पार्षदों के इस्तीफे के दावे ने बदला बंगाल की राजनीति का समीकरण

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया और बड़ा सियासी घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को लेकर उठे एक बड़े दावे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। दावा किया जा रहा है कि पार्टी के 91 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद स्थानीय निकायों से लेकर राज्य की राजनीति तक कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस घटनाक्रम को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच बड़ी संख्या में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे का दावा सामने आने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर अब संगठनात्मक ढांचे पर भी दिखाई देने लगा है। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, स्थानीय निकायों में प्रशासनिक और वित्तीय मामलों की समीक्षा तथा विभिन्न स्तरों पर जांच की प्रक्रिया तेज होने के बाद कई नेताओं में असहजता बढ़ी है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल और तेज होती दिखाई दे रही है। कई दावे ऐसे भी सामने आए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि आने वाले समय में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निकायों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यदि बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे की स्थिति बनती है तो प्रशासनिक व्यवस्था पर उसका असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर कई विकास परियोजनाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति लंबे समय से स्थानीय निकायों की मजबूत संरचना के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में यदि जमीनी स्तर पर राजनीतिक बदलाव के संकेत दिखाई देते हैं तो इसका असर बड़े चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक रणनीति और दबाव की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक माहौल में बढ़ी इस हलचल ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति आने वाले दिनों में और अधिक दिलचस्प मोड़ ले सकती है। फिलहाल इस दावे को लेकर चर्चा और बहस का दौर जारी है। आने वाले समय में यदि इस पूरे घटनाक्रम पर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आती है तो राज्य की राजनीति में इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। बंगाल का सियासी तापमान फिलहाल बढ़ा हुआ है और सभी की नजर अब अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
पंजाब निकाय चुनाव में तनाव की एंट्री: प्रत्याशी पर हमला, बूथ कैप्चरिंग के आरोप और सुरक्षा पर सवाल

नई दिल्ली। पंजाब में निकाय चुनाव के लिए मतदान के दौरान राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता नजर आया। सुबह मतदान शुरू होने के साथ ही कई क्षेत्रों में मतदाताओं की लंबी कतारें दिखाई दीं, लेकिन दिन बढ़ने के साथ कुछ इलाकों से विवाद, झड़प और आरोप-प्रत्यारोप की खबरें सामने आने लगीं। चुनावी प्रक्रिया के बीच कई घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। हालांकि प्रशासन ने दावा किया कि अधिकांश क्षेत्रों में मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहा और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। राज्य के विभिन्न नगर निगम, नगर कौंसिल और नगर पंचायतों में हजारों उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं और लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। चुनाव को लेकर इस बार विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया तथा मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी गई। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर घटनाओं ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। सबसे अधिक चर्चा उस घटना की रही जिसमें एक कांग्रेस उम्मीदवार पर कथित हमले की बात सामने आई। इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। विपक्षी नेताओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में हिंसा और डर का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है। घटना के बाद राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखने को मिली और कई नेताओं ने तत्काल कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में बूथ कैप्चरिंग के आरोप भी लगाए गए। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक-दूसरे पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। कई जगहों पर कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की की घटनाएं भी सामने आईं। कुछ स्थानों पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके। हालांकि प्रशासन ने अधिकांश आरोपों को जांच का विषय बताते हुए शांतिपूर्ण मतदान का भरोसा जताया। मतदान के दौरान राज्य में लोगों का उत्साह भी देखने को मिला। सुबह से ही कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें नजर आईं। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग लाइन की व्यवस्था की गई थी ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारु बनी रहे। दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्थाओं की बात कही गई थी, हालांकि कुछ स्थानों पर सुविधाओं की कमी की शिकायतें भी सामने आईं। चुनाव आयोग की ओर से मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए रिकॉर्डिंग और निगरानी की विशेष व्यवस्था की गई। प्रशासन का कहना है कि मतदान केंद्रों के अंदर और बाहर गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और किसी भी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि शाम तक मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिणामों और मतदान प्रतिशत पर भी विशेष नजर रहेगी। पंजाब की राजनीति के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम आने वाले समय में राजनीतिक दलों की ताकत और जनसमर्थन की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल पूरे राज्य की नजर मतदान प्रक्रिया और उससे जुड़ी गतिविधियों पर बनी हुई है, जबकि राजनीतिक दल अपने-अपने दावों और आरोपों के साथ चुनावी माहौल को और अधिक सक्रिय बनाए हुए हैं।
शिवपुरी में गंगा दशहरा पर विवाद: नपा अध्यक्ष ने लगाया अपमान का आरोप, प्रदेश नेतृत्व से शिकायत की बात कही

शिवपुरी। शिवपुरी जिले के गोरखनाथ मंदिर परिसर में गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ कार्यक्रम उस समय विवादों में आ गया, जब नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा मंच से नाराज होकर अचानक नीचे उतर गईं और कार्यक्रम स्थल से चली गईं। इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत और माल्यार्पण किया जा रहा था। इसी दौरान नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा असंतुष्ट नजर आईं और कुछ ही देर बाद उन्होंने मंच छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि मंच पर उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर वे काफी नाराज थीं। नगर पालिका अध्यक्ष ने इस पूरे मामले के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ईशांक धाकड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गायत्री शर्मा का कहना है कि यह कार्यक्रम नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित किया गया था, लेकिन सीएमओ द्वारा उनके लिए मंच पर कुर्सी तक की व्यवस्था नहीं की गई, जिसे उन्होंने अपमानजनक बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब सम्मान समारोह चल रहा था, तब उनका नाम मंच से नहीं पुकारा गया, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित महसूस हुआ। इस घटना के बाद वे नाराज होकर मंच से उतर गईं। गायत्री शर्मा ने इसे महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर महिला जनप्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस पूरे मामले की शिकायत प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व तक करेंगी। उनके अनुसार, वे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदेश के प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं से इस घटना की शिकायत करेंगी। वहीं दूसरी ओर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी ईशांक धाकड़ ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि नगर पालिका अध्यक्ष मंच पर मौजूद थीं और कार्यक्रम के दौरान उनका नाम भी सम्मानपूर्वक लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि वे अचानक मंच छोड़कर क्यों चली गईं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मंच पर प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव, कलेक्टर अर्पित वर्मा और एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया भी मौजूद थे। घटना के बाद कार्यक्रम की चर्चा अब प्रशासनिक समन्वय और राजनीतिक विवाद के रूप में की जा रही है। फिलहाल मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और आगे इसकी शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
सिरसौद में राशन वितरण पर बवाल: हितग्राहियों ने गेहूं-चावल में कटौती और अवैध वसूली के लगाए आरोप

शिवपुरी । शिवपुरी जिले के करेरा अनुविभाग के सिरसौद गांव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें निर्धारित मात्रा से कम गेहूं और चावल दिया जा रहा है, साथ ही राशन देने के बदले अतिरिक्त पैसे भी वसूले जा रहे हैं। मामला तब सामने आया जब ग्रामीणों ने राशन वितरण के दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इन वीडियो के सामने आने के बाद गांव में हड़कंप मच गया और लोगों ने खुलकर अपनी शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दीं। ग्रामीणों के अनुसार, कई हितग्राहियों को 2 से 3 किलो तक कम राशन दिया जा रहा है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति 10 से 20 रुपये तक अतिरिक्त वसूली भी की जा रही है। लोगों का आरोप है कि यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, लेकिन अब जाकर मामला उजागर हुआ है। प्रेम नारायण नामक ग्रामीण ने बताया कि उन्हें दो महीने के राशन के बदले 22 किलो गेहूं और 6 किलो चावल मिला, जबकि निर्धारित मात्रा से 2 किलो कम अनाज दिया गया। साथ ही उनसे 10 रुपये अतिरिक्त लिए गए। इसी तरह पुष्पेंद्र लोधी ने भी आरोप लगाया कि उन्हें 20 किलो गेहूं और 8 किलो चावल के बजाय कम मात्रा में राशन मिला और 10 रुपये अतिरिक्त वसूले गए। अन्य ग्रामीणों ने भी समान आरोप लगाए हैं। मुकेश पाल ने कहा कि उन्हें 60 किलो गेहूं और 10 किलो चावल दिया गया, लेकिन उसमें भी 2 किलो की कमी पाई गई और 20 रुपये अतिरिक्त लिए गए। वहीं धनीराम शिवहरे का कहना है कि दो व्यक्तियों के हिस्से का राशन लेने पर उन्हें 3 किलो अनाज कम मिला और अतिरिक्त पैसे भी लिए गए। इन आरोपों के बाद गांव में नाराजगी बढ़ गई है और लोग राशन दुकान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वायरल वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया है, जिसके बाद प्रशासनिक जांच की मांग भी तेज हो गई है। दूसरी ओर, राशन दुकान के सेल्समैन सुमित लोधी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वह पहली बार राशन वितरण कर रहे हैं और इससे पहले किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यह कार्य किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल मामला तूल पकड़ चुका है और स्थानीय प्रशासन से जांच की उम्मीद की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ी अनियमितताओं का संकेत होगा।
बिस्तर विवाद में बड़ा हादसा: मां-बेटी की बहस के दौरान पिता को आया हार्ट अटैक, मौके पर मौत

ग्वालियर । ग्वालियर के चिटनिस की गोठ स्थित वैकुंठ अपार्टमेंट में एक मामूली घरेलू विवाद ने बड़ा और दुखद रूप ले लिया, जब मां-बेटी के बीच झगड़े के दौरान पिता की अचानक मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह मामला बिस्तर को लेकर हुए विवाद से शुरू हुआ, जो देखते ही देखते परिवार के लिए त्रासदी बन गया। जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान अनिल कपूर के रूप में हुई है, जो अपनी पत्नी रितु कपूर और बेटी मानसी कपूर के साथ रहते थे। मानसी हाल ही में अपनी शादी के बाद कुछ दिनों के लिए मायके आई हुई थी। इसी दौरान घर में बिस्तर पर सोने को लेकर मां-बेटी के बीच कहासुनी शुरू हो गई। बताया जाता है कि रात के समय रितु कपूर बेटी के बिस्तर पर सो गईं, जिससे मानसी नाराज हो गई और दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि घर में तनावपूर्ण माहौल बन गया और परिजनों के बीच जोरदार बहस शुरू हो गई। इसी विवाद को शांत कराने के लिए अनिल कपूर बीच-बचाव करने पहुंचे। परिजनों के अनुसार, वह दोनों को समझाने की कोशिश कर ही रहे थे कि अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द महसूस हुआ और वह जमीन पर गिर पड़े। परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। घटना के बाद पूरे परिवार में मातम पसर गया। मां-बेटी दोनों सदमे में हैं और घर का माहौल पूरी तरह शोकाकुल हो गया है। मृतक की बेटी मानसी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के संबंधों को लेकर भी इस मामले में कई भावनात्मक पहलू सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार अनिल कपूर की पहली पत्नी की मृत्यु 2019 में हो चुकी थी। बाद में रितु कपूर, जो पहले उनकी साली थीं, उन्होंने अनिल कपूर से विवाह किया था। पारिवारिक रिश्तों के इस जटिल स्वरूप ने भी मामले को और भावनात्मक बना दिया है। पुलिस ने घटना को लेकर जांच शुरू कर दी है, हालांकि शुरुआती निष्कर्ष में इसे प्राकृतिक हार्ट अटैक से हुई मौत माना जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि घरेलू विवादों में बढ़ता तनाव कभी-कभी गंभीर परिणामों में बदल सकता है। छोटी-छोटी बातों पर होने वाले झगड़े मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं।
21 दिन की पैरोल पर बाहर आया डेरा प्रमुख, सिरसा पहुंचने के साथ ही बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां

नई दिल्ली। डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद सुर्खियों में है। मंगलवार सुबह वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय पहुंच गया। उसके सिरसा पहुंचते ही पूरे इलाके में हलचल बढ़ गई और प्रशासनिक एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नजर आईं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पहले से ही डेरे के आसपास विशेष बंदोबस्त किए गए थे और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी। जानकारी के अनुसार, डेरा प्रमुख को 21 दिन की पैरोल मिली है। सुबह तड़के ही उसके जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हुई और कुछ समय बाद वह सुरक्षा घेरे में सिरसा के लिए रवाना हुआ। उसके साथ करीबी लोग भी मौजूद थे और वाहनों का काफिला विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ आगे बढ़ा। सिरसा पहुंचने से पहले ही डेरे के आसपास बड़ी संख्या में अनुयायियों की मौजूदगी देखने को मिली। कई लोग उसके आगमन का इंतजार कर रहे थे, जिसके चलते प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी। गुरमीत सिंह पहले भी कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आ चुका है। इस बार की रिहाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं क्योंकि बीते वर्षों में उसकी पैरोल को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। हर बार उसके बाहर आने पर समर्थकों और विरोधियों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। यही कारण है कि प्रशासन भी इस पूरे मामले को संवेदनशील मानते हुए अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। डेरा प्रमुख फिलहाल साध्वी यौन शोषण मामले में सजा काट रहा है। हालांकि उससे जुड़े कई अन्य मामलों में समय-समय पर कानूनी स्थिति में बदलाव देखने को मिला है। इसी वजह से उसके नाम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी लगातार बनी रहती हैं। उसके सिरसा आने के बाद एक बार फिर पूरे इलाके में गतिविधियां बढ़ गई हैं। बताया जा रहा है कि पिछली पैरोल के दौरान भी उसने डेरे से जुड़े कई कामों की समीक्षा की थी। उस समय पुराने परिसर के पुनर्निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर गतिविधियां तेज हुई थीं। इस बार भी माना जा रहा है कि वह डेरे से जुड़े विभिन्न कार्यों पर ध्यान दे सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर उसके कार्यक्रमों को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। पैरोल पर उसकी यह रिहाई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। लगातार मिल रही पैरोल और उससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच बहस का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार निगरानी रख रही हैं। आने वाले दिनों में उसकी गतिविधियों और मुलाकातों पर भी सभी की नजर बनी रह सकती है।
ग्वालियर में बड़ा अवैध खनन घोटाला: कृषि जमीन से निकला करोड़ों का पत्थर

ग्वालियर । ग्वालियर जिले के बिलौआ इलाके में अवैध खनन का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें पर्यावरण और खनिज नियमों की खुली अनदेखी कर करोड़ों रुपये की खनिज संपदा निकाल ली गई। आरोप है कि एक क्रेशर संचालक ने निजी और कृषि भूमि पर बिना अनुमति के 200 से 250 फीट तक गहरी खुदाई कर भारी मात्रा में पत्थर का अवैध उत्खनन कर डाला। सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरा उत्खनन उस समय किया गया जब संबंधित जमीन पर माइनिंग की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई थी। इसके बावजूद महीनों तक भारी मशीनों की मदद से लगातार खुदाई चलती रही और खनिज विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। शिकायत सामने आने के बाद जब इस क्षेत्र की सैटेलाइट इमेज मंगाई गई, तो स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि तीन अलग-अलग सर्वे नंबरों पर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया गया है और जमीन का बड़ा हिस्सा गहरे गड्ढे में तब्दील हो चुका है। अनुमान के मुताबिक यहां करोड़ों रुपये मूल्य का पत्थर निकाला जा चुका है। मामले में यह भी आरोप है कि खनिज विभाग ने न तो समय रहते निरीक्षण किया और न ही अवैध उत्खनन पर कोई सख्त कार्रवाई की। नियमों के अनुसार बिना अनुमति खनन पर भारी जुर्माना और खदान सील करने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में न तो जुर्माना लगाया गया और न ही कोई कठोर कार्रवाई हुई। इसके बजाय, संबंधित फाइल को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरा मामला मिलीभगत और संरक्षण का परिणाम है, जिसमें नियमों को दरकिनार कर खनन माफिया को फायदा पहुंचाया गया। वहीं दूसरी ओर, विभागीय स्तर पर यह दलील दी जा रही है कि सीमांकन में त्रुटि के कारण क्रेशर संचालक ने गलती से दूसरी जमीन पर खुदाई कर दी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या 250 फीट गहरी खुदाई किसी “गलती” का परिणाम हो सकती है, या इसके पीछे महीनों की सुनियोजित प्रक्रिया रही है। स्थानीय स्तर पर 22 अप्रैल 2026 को पर्यावरण मंजूरी के लिए लोक सुनवाई भी कराई गई थी, जिसमें ग्रामीणों को रोजगार और विकास के वादे किए गए थे। लेकिन इससे पहले ही खनन पूरा कर लिया गया, जिससे इस सुनवाई की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। फिलहाल कलेक्टर स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद मामले की जांच तेज कर दी गई है। खनिज विभाग के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि अनुमति के बिना इतनी बड़ी खुदाई कैसे और किसकी अनुमति से हुई। यह पूरा मामला न केवल खनिज संपदा की लूट को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।